NCERT Class 9 Science Chapter 6 गति पर बलों का प्रभाव

NCERT Class 9 Science Chapter 6 गति पर बलों का प्रभाव Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus. to each chapter is provided in the list so that you can easily browse through different chapters NCERT Class 9 Science Chapter 6 गति पर बलों का प्रभाव Notes and select need one. NCERT Class 9 Science Chapter 6 गति पर बलों का प्रभाव Question Answers Download PDF. CBSE Class 9 Science Notes in Hindi.

NCERT Class 9 Science Chapter 6 गति पर बलों का प्रभाव

Also, you can read the NCERT book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per Central Board of Secondary Education (CBSE) Book guidelines. NCERT Class 9 Science Chapter 6 गति पर बलों का प्रभाव Solutions are part of All Subject Solutions. Here we have given NCERT Solutions for Class 9 Science Hindi Medium. CBSE Class 9 Science Textbook Solutions for All Chapters, You can practice these here.

Chapter: 6

TEXTUAL SOLUTIONS

चिंतन कीजिए (Page No. 94)

1. जब कोई नाविक अपने चप्पू से जल को पीछे की ओर धकेलता है तो उसकी डोंगी (छोटी नौका) आगे की ओर क्यों बढ़ती है? और जब वह जल को धकेलने के लिए अधिक बल लगाता है तो डोंगी की गति अधिक तीव्र हो जाती है, ऐसा क्यों होता है?

उत्तर: जब नाविक चप्पू से जल को पीछे की ओर धकेलता है, तो न्यूटन के गति के तृतीय नियम के अनुसार, जल भी चप्पू (और डोंगी) को समान बल से आगे की ओर धकेलता है। जब नाविक जल पर अधिक बल लगाता है, तो चप्पू पर भी आगे की ओर लगने वाला बल अधिक हो जाता है, जिससे डोंगी की गति तीव्र हो जाती है।

2. मान लीजिए कि वही नाविक उसी चप्पू से उतना ही बल लगाकर दो अलग-अलग डोंगियों को चलाता है जिनमें से एक डोंगी खाली है तथा दूसरी डोंगी में एक अन्य यात्री भी बैठा है। इनमें से कौन-सी डोंगी अधिक तीव्र गति से चलेगी?

उत्तर: खाली डोंगी अधिक तीव्र गति से चलेगी। न्यूटन के गति के द्वितीय नियम (a = F/m) के अनुसार, किसी दिए गए बल के परिमाण के लिए उत्पन्न त्वरण वस्तु के द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है। चूँकि यात्री वाली डोंगी का द्रव्यमान अधिक है, इसलिए समान बल लगाने पर उसका त्वरण कम होगा।

सोचिए और बताइए (Page No. 97)

1. कोई भारोत्तोलक (weightlifter) एक भारोत्तोलन दंड को ऊपर उठाती है (चित्र 6.8)। उन दो बलों की सूची बनाइए जो इस दंड पर लग रहे हैं। यदि भारोत्तोलक दंड को स्थिर रखती है तो क्या ये बल संतुलित हैं?

उत्तर: दंड पर दो बल लग रहे हैं:

(i) पृथ्वी द्वारा नीचे की दिशा में लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल (भार), और

(ii) भारोत्तोलक द्वारा ऊपर की ओर लगाया गया बल।

यदि भारोत्तोलक दंड को स्थिर रखती है, तो उस पर लगने वाला परिणामी बल शून्य होता है, जिसका अर्थ है कि ये दोनों बल पूर्णतः संतुलित हैं।

4. दो खिलाड़ी ‘R’ एवं ‘S’ पंजा-कुश्ती प्रतियोगिता (armwrestling) में भाग ले रहे हैं (चित्र 6.9)। जिस क्षण हाथ आगे की दिशा में (पृष्ठ से बाहर आपकी ओर) झुकते हैं तो क्या खिलाड़ियों द्वारा लगाए गए बल संतुलित हैं? यदि नहीं, तो किस खिलाड़ी ने अधिक बल लगाया है?

उत्तर: जिस क्षण हाथ आगे की दिशा में झुकते हैं, उस समय दोनों खिलाड़ियों द्वारा लगाए गए बल संतुलित नहीं होते हैं (वे असंतुलित बल हैं)। जिस खिलाड़ी की विपरीत दिशा में हाथ झुक रहे हैं, उसने अधिक बल लगाया है क्योंकि असंतुलित बलों की स्थिति में परिणामी बल उसी दिशा में कार्य करता है जिस दिशा में अधिक बल लगाया जाता है।

5. क्या होगा यदि (Page No. 98)

1. घर्षण बल विश्व से लुप्त हो जाए तो वस्तुओं की गति पर इसका क्या प्रभाव होगा?

उत्तर: यदि घर्षण बल पूर्णतः लुप्त हो जाए, तो किसी क्षैतिज तल पर गतिमान वस्तु की गति का विरोध करने वाला कोई बल नहीं होगा। ऐसी स्थिति में, गतिमान वस्तु को नियत वेग से बनाए रखने के लिए किसी बल की आवश्यकता नहीं होगी और वह बिना रुके अनंत काल तक समान वेग से गति करती रहेगी।

सोचिए और बताइए (Page No. 101, 106 and 110)

1. एक वस्तु नियत वेग से गति कर रही है। क्या उस पर कोई परिणामी बल कार्य कर रहा है?

उत्तर: नहीं, यदि वस्तु नियत वेग से गति कर रही है, तो न्यूटन के गति के प्रथम नियम के अनुसार उस पर लगने वाला परिणामी बल शून्य होता है।

2. मान लीजिए किसी वस्तु पर कोई परिणामी बल कार्य नहीं कर रहा है। निम्नलिखित में से कौन-सी स्थितियाँ संभव हैं?

(i) यदि वस्तु विरामावस्था में है तो वह विरामावस्था में ही रहेगी।

(ii) यदि वस्तु पहले से गतिमान है तो वह नियत वेग से गति करती रहेगी।

(iii) वस्तु नियत त्वरण से गति कर रही है।

उत्तर: स्थिति (i) और (ii) संभव हैं। न्यूटन के प्रथम नियम के अनुसार, यदि परिणामी बल शून्य है, तो वस्तु विरामावस्था में ही रहेगी और यदि वह गतिमान है तो नियत वेग से गति करती रहेगी।

3. दैनिक जीवन में ऐसी स्थिति खोजना कठिन है जहाँ किसी वस्तु पर कोई बल न लग रहा हो। परंतु अनेक बल लगाकर ऐसी स्थिति प्राप्त की जा सकती है जहाँ वस्तु पर लगने वाला परिणामी बल शून्य हो। एक उदाहरण की सहायता से समझाइए।

उत्तर: उदाहरण के लिए, जब हम किसी मेज या गुटके को फर्श पर नियत वेग से आगे की ओर धकेलते हैं, तो हमारे द्वारा लगाया गया बल (आगे की दिशा में) और फर्श द्वारा लगाया गया घर्षण बल (पीछे की दिशा में) एक-दूसरे के बराबर और विपरीत होते हैं। दोनों बल एक-दूसरे को संतुलित कर देते हैं, जिससे वस्तु पर परिणामी बल शून्य हो जाता है।

4. 100 g द्रव्यमान वाली एक खिलौना कार 0.5 m s–1 के नियत वेग से गतिमान है। खिलौना कार पर लगने वाला परिणामी बल क्या है?

उत्तर: चूँकि खिलौना कार 0.5 m s–1 के नियत वेग से गतिमान है, इसका त्वरण शून्य होगा। न्यूटन के द्वितीय नियम के अनुसार, यदि त्वरण शून्य है तो कार पर लगने वाला परिणामी बल भी शून्य होगा।

5. अलग-अलग द्रव्यमान वाले दो बच्चे एक जैसे झूलों (swings) पर बैठे हैं। दोनों बच्चों को समान प्रारंभिक त्वरण देने के लिए आपको किस बच्चे पर अधिक बल लगाने की आवश्यकता होगी? कारण बताइए।

उत्तर: अधिक द्रव्यमान वाले बच्चे पर अधिक बल लगाने की आवश्यकता होगी। न्यूटन के गति के द्वितीय नियम (F = ma) के अनुसार, किसी वस्तु में समान त्वरण उत्पन्न करने के लिए लगाया गया परिणामी बल उस वस्तु के द्रव्यमान के समानुपाती होता है।

6. काँच की वस्तुओं को परिवहन के समय क्षति से बचाने के लिए बुलबुलों वाली प्लास्टिक शीट अथवा सूखी घास में लपेटा जाता है?

उत्तर: काँच की वस्तुओं को बुलबुले वाली शीट या सूखी घास में लपेटने से, यदि वे टकराती हैं, तो उनके वेग के शून्य होने की अवधि (समय) बढ़ जाती है। समय अंतराल बढ़ने से त्वरण का परिमाण कम हो जाता है, जिससे वस्तु पर लगने वाला बल कम हो जाता है और उनके टूटने की संभावना घट जाती है।

7. कभी-कभी जल फेंकने वाले पाइप को पकड़े रखने के लिए दमकलकर्मी (fireperson) को संघर्ष क्यों करना पड़ता है?

उत्तर: यह न्यूटन के गति के तृतीय नियम के कारण होता है। जब पाइप से भारी मात्रा में जल तीव्र वेग से आगे की ओर निष्कासित होता है, तो वह जल पाइप पर विपरीत दिशा (पीछे की ओर) में एक समान और तीव्र प्रतिक्रिया बल लगाता है। इसी पीछे की ओर लगने वाले बल के कारण दमकलकर्मी को पाइप पकड़े रखने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

8. मान लीजिए कि एक अंतरिक्ष यान (spacecraft) अंतरिक्ष के ऐसे क्षेत्र में गति कर रहा है जहाँ उस पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल नगण्य है। सुझाव दीजिए कि वह अपनी गति को कैसे परिवर्तित कर सकता है?

उत्तर: अंतरिक्ष यान अपनी गति बदलने के लिए अपने रॉकेट इंजनों का उपयोग करके गैसों को निष्कासित कर सकता है। न्यूटन के गति के तृतीय नियम के अनुसार, जिस दिशा में गैसें बाहर निकलेंगी, वे गैसें अंतरिक्ष यान पर उसकी विपरीत दिशा में एक बराबर बल लगाएँगी, जिससे अंतरिक्ष यान त्वरित हो सकेगा और अपनी गति (या दिशा) परिवर्तित कर सकेगा।

अभ्यास प्रश्न

1. एक क्षैतिज बल F का उपयोग करके किसी मेज को फर्श पर नियत वेग से गति प्रदान की जाती है। फर्श द्वारा मेज पर लगाया गया घर्षण बल कितना है?

उत्तर: चूँकि मेज नियत वेग से गति कर रही है, इसका अर्थ है कि मेज पर लगने वाला परिणामी बल शून्य है। इसलिए, फर्श द्वारा मेज पर विपरीत दिशा में लगाया गया घर्षण बल, आगे की ओर लगाए गए बल ‘F’ के परिमाण के बिल्कुल बराबर होगा। अतः घर्षण बल = F

2. एक चिकनी घर्षण रहित सतह पर गतिमान गेंद के लिए सही शब्द का चयन कर निम्नलिखित कथनों को सत्य कथन बनाइए।

(i) यदि गेंद पर कोई परिणामी बल नहीं लगाया जाता है तो गेंद का वेग समान रहेगा/ बढ़ेगा/ घटेगा।

उत्तर: यदि गेंद पर कोई परिणामी बल नहीं लगाया जाता है तो गेंद का वेग समान रहेगा।

(ii) यदि गेंद पर उसकी गति की दिशा में परिणामी बल लगाया जाता है तो गेंद के वेग का परिमाण समान रहेगा/ बढ़ेगा/ घटेगा।

उत्तर: यदि गेंद पर उसकी गति की दिशा में परिणामी बल लगाया जाता है तो गेंद के वेग का परिमाण बढ़ेगा।

(iii) यदि गेंद पर उसकी गति की विपरीत दिशा में परिणामी बल लगाया जाता है तो गेंद के वेग का परिमाण समान रहेगा/ बढ़ेगा/ घटेगा।

उत्तर: यदि गेंद पर उसकी गति की विपरीत दिशा में परिणामी बल लगाया जाता है तो गेंद के वेग का परिमाण घटेगा।

3. एक चिकनी क्षैतिज सतह पर विद्यमान दो गुटके P और Q चित्र 6.36 (क) और चित्र 6.36 (ख) में दर्शाए गए हैं। गुटके P पर 4 N और 5 N परिमाण के दो बल विपरीत दिशाओं में कार्य कर रहे हैं जबकि गुटका Q नियत वेग से गतिमान है।

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

(i) P पर परिणामी बल लगता है और Q पर परिणामी बल नहीं लगता है।

(ii) P पर परिणामी बल नहीं लगता है और Q पर परिणामी बल लगता है।

(iii) P और Q दोनों पर परिणामी बल लगता है। (iv) न तो P और न ही Q पर परिणामी बल लगता है।

उत्तर: कथन (i) सत्य है। गुटके P पर 5 N और 4 N के बल विपरीत दिशाओं में हैं, अतः उस पर 1 N का परिणामी बल कार्य कर रहा है। गुटका Q नियत वेग से गतिमान है, अतः प्रथम नियम के अनुसार उस पर कोई परिणामी बल कार्य नहीं कर रहा है।

4. सर्प नौका दौड़ (केरल में वल्लुम कली) के अभ्यास के समय 100 नाविक एक नौका को एक साथ खे (चला) रहे हैं। इनमें से 95 नाविक नौका को आगे बढ़ाने के लिए पीछे की ओर चप्पू चलाते हैं। त्रुटिवश 5 नाविक विपरीत दिशा में चप्पू चलाते हैं। यदि प्रत्येक नाविक 200 N का क्षैतिज बल लगाता है तो बताइए सर्प नौका पर लगने वाला परिणामी बल कितना है? (कर्षण बल (drag force), वायु घर्षण आदि की उपेक्षा कीजिए।)

उत्तर: आगे की ओर लगाने वाले 95 नाविकों का बल = 95 × 200 N = 19,000 N

विपरीत दिशा में लगाने वाले 5 नाविकों का बल = 5 × 200 N = 1,000 N

परिणामी बल = 19,000 N – 1,000 N = 18,000 N (आगे की दिशा में)।

5. जब किसी वस्तु पर परिणामी बल लगता है तो हम देखते हैं कि वस्तु त्वरित होती है—

(i) त्वरण बल की दिशा के विपरीत दिशा में और वस्तु पर लगने वाले बल के समानुपाती होता है।

(ii) त्वरण बल की दिशा के विपरीत दिशा में और वस्तु के द्रव्यमान के समानुपाती होता है।

(iii) त्वरण बल की दिशा में और वस्तु पर लगने वाले बल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

(iv) त्वरण बल की दिशा में और वस्तु पर लगने वाले बल के समानुपाती होता है।

उत्तर: (iv) त्वरण बल की दिशा में और वस्तु पर लगने वाले बल के समानुपाती होता है।

6. एक सीधी रेखा के अनुदिश गतिमान चार वस्तुओं A, B, C और D के लिए स्थिति-समय ग्राफ (चित्र 6.37) में दर्शाए गए हैं। इनमें से किस पर एक परिणामी बल कार्य करता है—

(i) वस्तु A

(ii) वस्तु B

(iii) वस्तु C

(iv) वस्तु D

उत्तर: (iii) वस्तु C

7. कोई नाविक किसी छोटी नौका से तट पर कूदता है (चित्र 6.38)। जैसे ही नाविक आगे की ओर कूदता है तो क्या नौका गति करेगी? यदि हाँ, तो किस दिशा में और क्यों?

उत्तर: हाँ, नौका गति करेगी और वह पीछे की दिशा में गति करेगी। न्यूटन के गति के तृतीय नियम के अनुसार, जब नाविक आगे कूदने के लिए अपने पैरों से नौका को पीछे की ओर धकेलता है (क्रिया बल), तो नौका भी नाविक पर समान परिमाण का बल आगे की ओर लगाती है (प्रतिक्रिया बल)। नौका को पीछे की ओर धकेले जाने के कारण वह तट से दूर पीछे की ओर गति करने लगती है।

8. ऊँची कूद प्रतियोगिता में खिलाड़ी सतह पर सुरक्षित गिरें इसके लिए रेत या फोम के गद्दे की व्यवस्था की जाती है। इसके पीछे का कारण स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: रेत या फोम के गद्दे का उपयोग करने से खिलाड़ी के गिरने पर उनके वेग के शून्य होने की अवधि (समय) बढ़ जाती है। समय-अंतराल बढ़ जाने से खिलाड़ी के त्वरण का परिमाण कम हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप खिलाड़ी पर लगने वाले बल का मान कम हो जाता है और उसे गंभीर चोट लगने की संभावना घट जाती है।

9. सब्जियों से भरी हुई एक ठेलागाड़ी किसी अन्य प्रत्येक दृष्टि से उसी के समान परंतु खाली ठेलागाड़ी से टकराती है। टकराव के समय—

(i) भरी हुई ठेलागाड़ी, खाली ठेलागाड़ी पर अधिक परिमाण का बल लगाती है।

(ii) खाली ठेलागाड़ी, भरी हुई ठेलागाड़ी पर अधिक परिमाण का बल लगाती है।

(iii) दोनों में से कोई भी ठेलागाड़ी दूसरी ठेलागाड़ी पर बल नहीं लगाती है।

(iv) भरी हुई ठेलागाड़ी और खाली ठेलागाड़ी दोनों एक-दूसरे पर समान परिमाण का बल लगाती हैं।

उत्तर: (iv) भरी हुई ठेलागाड़ी और खाली ठेलागाड़ी दोनों एक-दूसरे पर समान परिमाण का बल लगाती हैं।

10. विभिन्न द्रव्यमानों वाली वस्तुओं पर लगाए गए किसी बल द्वारा उत्पन्न त्वरण के संगत त्वरण-द्रव्यमान ग्राफ चित्र 6.40 में दर्शाया गया है। इस स्थिति के लिए बल-द्रव्यमान ग्राफ आलेखित कीजिए।

उत्तर: न्यूटन के द्वितीय नियम के अनुसार:

F = ma

दिया गया त्वरण-द्रव्यमान (a – m) ग्राफ दर्शाता है कि द्रव्यमान बढ़ने पर त्वरण घटता है, अर्थात् a ∝ 1/m

इसलिए F = ma = नियत

अर्थात बल का मान सभी द्रव्यमानों के लिए समान रहेगा।

इसलिए बल-द्रव्यमान (F – m) ग्राफ एक क्षैतिज (Horizontal) सीधी रेखा होगा।

बल-द्रव्यमान ग्राफ x-अक्ष के समानांतर एक क्षैतिज सीधी रेखा होगा, क्योंकि बल का मान स्थिर रहता है।

11. सरल रेखा में गतिमान 10 kg द्रव्यमान की किसी वस्तु का वेग-समय ग्राफ चित्र 6.41 में दर्शाया गया है। ग्राफ का उपयोग करके वस्तु पर लगने वाले बल का परिकलन कीजिए।

उत्तर: ग्राफ के अनुसार: प्रारंभिक वेग (u) = 8 m/s

अंतिम वेग (v) = 0 m/s

समय (t) = 4 s

द्रव्यमान (m) = 10 kg

त्वरण (a) = (v – u)/t = (0 – 8)/4 = -2 m s⁻² न्यूटन के द्वितीय नियम से बल (F) = m × a = 10 kg × (-2 m s⁻²) = -20 N. 

अतः वस्तु पर लगने वाला अवरोधी बल 20 N है (ऋणात्मक चिह्न बल की विपरीत दिशा दर्शाता है)।

12. 100 m s–1 के वेग से गतिमान 50 g द्रव्यमान की कोई गोली एक स्थिर भारी लकड़ी के गुटके में प्रवेश करती है और 50 cm की दूरी तक भेदने के पश्चात् रुक जाती है। गोली पर लगने वाले अवरोधी बल का आकलन कीजिए (मान लीजिए कि गुटके के भीतर गोली का त्वरण अचर है)।

उत्तर: प्रारंभिक वेग (u) = 100 m s⁻¹

अंतिम वेग (v) = 0 m s⁻¹

दूरी (s) = 50 cm = 0.5 m

द्रव्यमान (m) = 50 g = 0.05 kg

गति के समीकरण v² = u² + 2as से: 0 = (100)² + 2 × a × 0.5 0 = 10000 + 1a

त्वरण (a) = -10000 m s⁻²

बल (F) = ma = 0.05 kg × (-10000 m s⁻²) = -500 N.

अतः गोली पर लगने वाला अवरोधी बल 500 N है।

13. एक श्रेष्ठ फुटबॉलर ने फुटबॉल पर 108 km h–1 के वेग से प्रहार करके उसको मिले पेनाल्टी निशाने (penalty shot) को गोल में परिवर्तित कर दिया। उसके द्वारा लगाया गया अनुमानित बल 800 N था। फुटबॉल का द्रव्यमान 0.4 kg था। उसके पैर और गेंद के मध्य संपर्क समय की गणना कीजिए।

उत्तर: प्रारंभिक वेग (u) = 0 m/s

अंतिम वेग (v) = 108 km/h = 108 × (5/18) = 30 m/s

द्रव्यमान (m) = 0.4 kg

बल (F) = 800 N

न्यूटन के द्वितीय नियम F = ma से त्वरण (a) = F/m = 800 / 0.4 = 2000 m s⁻²

संपर्क समय (t) = (v – u) / a = (30 – 0) / 2000 = 0.015 सेकंड।

अतः पैर और गेंद के मध्य संपर्क समय 0.015 सेकंड था।

14. 2 kg द्रव्यमान की एक वस्तु 10 m s–1 के नियत वेग से गतिमान है। यह एक खुरदरे क्षेत्र में प्रवेश करती है जहाँ वस्तु पर घर्षण बल 7 N है। उसी समय वस्तु पर उसकी गति का विरोध करते हुए 3 N का एक अतिरिक्त नियत बल लगाया जाता है। खुरदरे क्षेत्र में प्रवेश करने के पश्चात् वस्तु विरामावस्था में आने से पूर्व कितनी दूरी तय करती है?

उत्तर: द्रव्यमान (m) = 2 kg

प्रारंभिक वेग (u) = 10 m s⁻¹

अंतिम वेग (v) = 0 m s⁻¹

वस्तु पर गति की विपरीत दिशा में लगने वाला कुल बल (F) = घर्षण बल (7 N) + अतिरिक्त बल (3 N) = 10 N

चूँकि बल विपरीत दिशा में है, F = -10 N त्वरण (a) = F/m = -10 / 2 = -5 m s⁻²

गति के समीकरण v² = u² + 2as से: 0 = (10)² + 2 × (-5) × s 0 = 100 – 10s 10s = 100

s = 10 m.

अतः विरामावस्था में आने से पूर्व वस्तु 10 मीटर की दूरी तय करेगी।

15. कोई ट्रैक्टर m1 द्रव्यमान के हैरो (जुताई उपकरण) को परिणामी बल F से खींचता है जिसके परिणामस्वरूप हैरो में a1 त्वरण उत्पन्न होता है। वही ट्रैक्टर m2 द्रव्यमान की किसी ट्रॉली को F बल से खींचता है जिसके परिणामस्वरूप ट्रॉली में a2 त्वरण उत्पन्न होता है। यदि ट्रैक्टर अब हैरो को ट्रॉली पर रखकर उसे उसी बल F से खींचता है तो a1 और a2 के पदों में परिणामी त्वरण का व्यंजक प्राप्त कीजिए। घर्षण को नगण्य मान लीजिए।

उत्तर: हैरो के लिए: m₁ = F/a₁

ट्रॉली के लिए: m₂ = F/a₂

जब दोनों को एक साथ (एक निकाय मानकर) खींचा जाता है, तो कुल द्रव्यमान (m) = m₁ + m₂

m = (F / a₁) + (F / a₂) = F(1/a₁ + 1/a₂)

नया परिणामी त्वरण (a) = F/(m₁ + m₂)

a = F/[F(1/a₁ + 1/a₂)] a = 1/(1/a₁ + 1/a₂) = (a₁a₂)/(a₁ + a₂) यही परिणामी त्वरण का व्यंजक है।

16. जब किसी दंड चुंबक के ध्रुव को चुंबकीय दिक्सूचक (magnetic compass) के निकट लाया जाता है तो दंड चुंबक और दिक्सूचक सुई (जो स्वयं भी एक चुंबक है) एक-दूसरे पर चुंबकीय बल लगाते हैं। न्यूटन के गति के तृतीय नियमानुसार दोनों बल परिमाण में बराबर और दिशा में विपरीत होते हैं। तथापि दिक्सूचक सुई (compass needle) गति करता है जबकि दंड चुंबक गति नहीं करता है (चित्र 6.42)। ऐसा क्यों होता है? व्याख्या कीजिए।

उत्तर: यद्यपि दोनों चुंबकों द्वारा एक-दूसरे पर लगाए गए बलों का परिमाण बिल्कुल बराबर होता है, फिर भी वे समान त्वरण उत्पन्न नहीं करते क्योंकि उनके द्रव्यमानों में बहुत अधिक अंतर होता है। दिक्सूचक सुई का द्रव्यमान दंड चुंबक की तुलना में अत्यंत कम होता है। न्यूटन के द्वितीय नियम (a = F/m) के अनुसार, समान बल लगने पर कम द्रव्यमान वाली दिक्सूचक सुई में अधिक त्वरण उत्पन्न होता है जिससे वह गति करती है। इसके विपरीत, दंड चुंबक का द्रव्यमान बहुत अधिक होने के कारण उसमें उत्पन्न त्वरण लगभग नगण्य होता है, इसलिए वह गति करता हुआ प्रतीत नहीं होता है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Scroll to Top