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NCERT Class 9 Science Chapter 7 गति पर कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनेंका प्रभाव
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गति पर कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनेंका प्रभाव
Chapter: 7
| TEXTUAL SOLUTIONS |
सोचिए और बताइए (Page No. 119, 121, 123, 126, 12, 132 and 135)
1. पिछले अध्याय के चित्र (6.8) में एक भारोत्तोलक दर्शाई गई है जिसने भारोत्तोलन दंड (barbell) को अपने हाथों में पकड़ कर स्थिर रखा हुआ है। क्या वह इस दंड को स्थिर पकड़े रखने में कोई कार्य करती है?
उत्तर: नहीं, वह इस दंड को स्थिर पकड़े रखने में कोई कार्य नहीं करती है। विज्ञान के दृष्टिकोण से कार्य तब संपन्न माना जाता है जब लगाए गए बल की दिशा में कुछ विस्थापन (displacement) हो। चूँकि भारोत्तोलन दंड स्थिर अवस्था में है (यानी विस्थापन शून्य है), इसलिए उस पर किया गया कार्य भी शून्य होगा।
2. बताइए किसी खुरदरी सतह (rough surface) पर गतिमान एक के ऊपर एक रखे सिक्कों के एक ढेर पर घर्षण द्वारा किया गया कार्य धनात्मक होगा, ऋणात्मक होगा या शून्य होगा?
उत्तर: घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक (Negative) होगा। इसका कारण यह है कि जब किसी वस्तु पर लगने वाले बल की दिशा उसके विस्थापन की दिशा के ठीक विपरीत होती है, तो उस बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होता है। चूँकि घर्षण बल हमेशा सिक्कों की गति (विस्थापन) की विपरीत दिशा में कार्य करता है, इसलिए यह कार्य ऋणात्मक होगा।
3. जब आप एक सपाट सड़क पर साइकिल पर सवार होकर साइकिल के पैडल पर बल लगाते हैं तो इस प्रक्रिया में आपकी मांसपेशियां ऊर्जा प्रदान करती हैं। आपकी मांसपेशियों द्वारा प्रदत्त ऊर्जा साइकिल सवारी में किस रूप में प्रकट होती है?
उत्तर: साइकिल की सवारी करते समय, भोजन से प्राप्त आपकी मांसपेशियों की रासायनिक ऊर्जा मुख्य रूप से यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा) के रूप में परिवर्तित होकर प्रकट होती है, जो साइकिल को आगे की ओर गति प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, मांसपेशियों की ऊर्जा का कुछ भाग घर्षण के विरुद्ध कार्य करने और शरीर की हलचल के कारण तापीय (ऊष्मीय) ऊर्जा के रूप में भी व्यय होता है, जिससे शरीर गर्म हो जाता है।
4. दो वस्तुओं A एवं B के द्रव्यमान क्रमशः m एवं 4 m हैं। बताइए कि यदि इनकी गतिज ऊर्जा समान हो तो इनके वेगों का अनुपात क्या होगा?
उत्तर: गतिज ऊर्जा ज्ञात करने का सूत्र K = 1/2mv2 होता है। प्रश्नानुसार, दोनों वस्तुओं की गतिज ऊर्जा समान है, अतः 1/2 × mA ×(vA)2 = 1/2 × mB × (vB)2
अब द्रव्यमान के मान (mA = m और mB = 4m) रखने पर: 1/2 × m × (vA)2 = 1/2 × (4m) × (vB)2
दोनों तरफ से 1/2m को काटने पर: (vA)2 = 4 × (vB)2 (vA)2/(vB)2 = 4/1 vA/vB = √4/1 = 2/1
अतः, दोनों वस्तुओं के वेगों का अनुपात 2:1 होगा।
5. क्या नियत वेग से गतिमान किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा उसकी स्थिति में परिवर्तन करने के साथ-साथ परिवर्तित होती है?
उत्तर: नहीं, नियत वेग से गतिमान वस्तु की गतिज ऊर्जा उसकी स्थिति बदलने के साथ परिवर्तित नहीं होती है। किसी भी वस्तु की गतिज ऊर्जा (K = 1/2mv2) केवल उसके द्रव्यमान और वेग पर निर्भर करती है
यदि वस्तु का वेग नियत (constant) है और वेग में कोई परिवर्तन नहीं हो रहा है, तो उसकी गतिज ऊर्जा भी नियत बनी रहेगी। वस्तु की स्थिति (जैसे कि उसकी ऊंचाई) में परिवर्तन होने से केवल उसकी स्थितिज ऊर्जा प्रभावित होती है, गतिज ऊर्जा नहीं।
6. यदि कोई गेंद पृथ्वी की सतह के निकट क्षैतिज दिशा में नियत वेग से गतिशील है तो क्या उसकी स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन होता है? जब किसी वस्तु को धीरे-धीरे ऊर्ध्व दिशा में ऊपर उठाया जाता है तो क्या इसकी स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन होगा?
उत्तर: इस प्रश्न के दो भाग हैं, जिनके उत्तर इस प्रकार हैं:
(i) क्षैतिज दिशा में गति: नहीं, यदि गेंद पृथ्वी की सतह के निकट क्षैतिज (horizontal) दिशा में गति कर रही है, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा में कोई परिवर्तन नहीं होगा। स्थितिज ऊर्जा मुख्य रूप से वस्तु के द्रव्यमान और पृथ्वी से उसकी ऊँचाई पर निर्भर करती है (U=mgh)। चूँकि क्षैतिज गति में ऊँचाई (h) नहीं बदलती (समान रहती है), अतः स्थितिज ऊर्जा भी नियत ही रहेगी।
(ii) ऊर्ध्व दिशा में ऊपर उठाना: हाँ, जब किसी वस्तु को धीरे-धीरे ऊर्ध्व (vertical) दिशा में ऊपर उठाया जाता है, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन (वृद्धि) होगा। जैसे-जैसे वस्तु को ऊपर उठाया जाता है, पृथ्वी की सतह से उसकी ऊँचाई (h) बढ़ती जाती है, जिससे गुरुत्वीय बल के विरुद्ध किए गए कार्य के कारण वस्तु की स्थितिज ऊर्जा (mgh) भी बढ़ती जाएगी।
7. चित्र 7.19 में चित्रित स्थिति के लिए गेंद की यांत्रिक ऊर्जा का मान ठीक उस समय ज्ञात कीजिए जब वह भूतल से टकराती है और दर्शाइए कि इस स्थिति में भी इसका मान mgh ही होगा।
उत्तर: यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार, जब कोई वस्तु गुरुत्व के अधीन मुक्त रूप से गिरती है, तो उसकी कुल यांत्रिक ऊर्जा (स्थितिज ऊर्जा + गतिज ऊर्जा) हमेशा नियत (constant) रहती है।
(i) शुरुआत में उच्चतम बिंदु पर गेंद की स्थितिज ऊर्जा mgh और गतिज ऊर्जा शून्य होती है (कुल ऊर्जा = mgh)।
(ii) ठीक भूतल से टकराते समय, गेंद की ऊँचाई (h) शून्य हो जाती है, जिससे उसकी स्थितिज ऊर्जा शून्य हो जाती है। इस बिंदु पर उसकी संपूर्ण स्थितिज ऊर्जा पूरी तरह से गतिज ऊर्जा में बदल जाती है।
(iii) अतः, भूतल से टकराते समय गतिज ऊर्जा का मान mgh हो जाता है। इसलिए भूतल पर गेंद की कुल यांत्रिक ऊर्जा (0 + mgh) = mgh ही रहेगी।
8. आपने किसी विज्ञान उद्यान में चित्र 7.22 जैसा प्रदर्श देखा होगा जिसमें एक गेंद को इस प्रदर्श के उच्चतम बिंदु से छोड़ा जाता है। वर्णन कीजिए कि इसमें बिंदु A, B और C पर गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा किस प्रकार परिवर्तित होती है। व्याख्या कीजिए कि बाद में आने वाले शीर्ष C, D तथा E पहले वाले शीर्षों की अपेक्षा कम ऊँचाई वाले क्यों होते हैं? क्या इसका संबंध घर्षण के कारण ऊर्जा के कुछ भाग के अन्य रूपों में परिवर्तित होने से हो सकता है?

उत्तर: बिंदु A, B और C पर ऊर्जा में परिवर्तन:
(i) बिंदु A पर: गेंद उच्चतम बिंदु पर है, इसलिए यहाँ उसकी स्थितिज ऊर्जा अधिकतम है और गतिज ऊर्जा शून्य है।
(ii) A से B तक जाने पर: जैसे-जैसे गेंद ढलान से नीचे (B की ओर) आती है, उसकी ऊँचाई कम होने से स्थितिज ऊर्जा घटने लगती है और वेग बढ़ने के कारण गतिज ऊर्जा बढ़ने लगती है। बिंदु B (सबसे निचले बिंदु) पर गतिज ऊर्जा अधिकतम हो जाती है।
(iii) B से C तक जाने पर: जब गेंद वापस ऊपर (C की ओर) चढ़ती है, तो इसकी गतिज ऊर्जा कम होने लगती है और ऊँचाई बढ़ने के कारण स्थितिज ऊर्जा में पुनः वृद्धि होने लगती है।
बाद के शीर्ष (C, D, E) कम ऊँचाई वाले क्यों होते हैं: हाँ, इसका सीधा संबंध घर्षण से है। जब गेंद पथ पर लुढ़कती है, तो गेंद और पथ के बीच घर्षण बल तथा वायु प्रतिरोध के कारण उसकी यांत्रिक ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा (तापीय ऊर्जा) या ध्वनि आदि अन्य रूपों में परिवर्तित (व्यय) हो जाता है। ऊर्जा के इसी ह्रास के कारण गेंद के पास उतनी कुल यांत्रिक ऊर्जा नहीं बचती कि वह अपनी प्रारंभिक ऊँचाई (A) तक वापस पहुँच सके, इसलिए बाद वाले शीर्ष (C, D, E) को क्रमशः कम ऊँचाई का बनाया जाता है ताकि गेंद उन तक पहुँच सके।
9. व्याख्या कीजिए कि पहाड़ों पर सड़कें नीचे से ऊपर तक सीधे न बनाकर कम ढलान की घुमावदार क्यों बनाई जाती हैं (चित्र 4.26)?
उत्तर: पहाड़ों पर घुमावदार सड़कें एक ‘आनत तल’ (inclined plane) की तरह कार्य करती हैं। विज्ञान के सिद्धांत के अनुसार, यदि आनत तल का झुकाव (कोण) कम करके उसकी लंबाई बढ़ा दी जाए, तो उसका यांत्रिक लाभ (Mechanical Advantage) 1 से अधिक हो जाता है। ढलान कम होने और मार्ग की लंबाई बढ़ने से, वाहन को उसी ऊँचाई तक ले जाने के लिए आवश्यक बल (आयास) का मान बहुत कम हो जाता है। इसी कारण से पहाड़ों पर घुमावदार सड़कें बनाई जाती हैं ताकि वाहन सरलता से और कम शक्ति लगाकर ऊपर चढ़ सकें।
10. व्याख्या कीजिए कि किसी भवन के ऊपरी तल तक पहुँचने के लिए हमें सीधी खड़ी हुई सीढ़ी की तुलना में आनत सीढ़ी का उपयोग अधिक सुविधाजनक क्यों लगता है?
उत्तर: आनत (तिरछी) सीढ़ी भी एक प्रकार की सरल मशीन यानी ‘आनत तल’ ही है। यदि हम सीधी खड़ी सीढ़ी से चढ़ें, तो हमें अपने पूरे भार के बराबर बल सीधे ऊर्ध्वाधर (vertical) दिशा में ऊपर की ओर लगाना पड़ता है। इसके विपरीत, आनत सीढ़ी का झुकाव कोण कम होता है और इसकी लंबाई अधिक होती है, जिससे इसका यांत्रिक लाभ बढ़ जाता है। यांत्रिक लाभ अधिक होने के कारण, उसी ऊँचाई तक अपने शरीर के भार को ले जाने के लिए हमें अपेक्षाकृत कम बल (आयास) लगाना पड़ता है, इसीलिए आनत सीढ़ी पर चढ़ना अधिक सुविधाजनक लगता है।
11. चित्र 7.35 में दर्शाए अनुसार चम्मच की सहायता से किसी डिब्बे का ढक्कन खोलना सरल क्यों होता है?

उत्तर: चम्मच एक ‘प्रथम श्रेणी के उत्तोलक (Lever)’ की तरह कार्य करता है। डिब्बे का ढक्कन खोलते समय चम्मच का वह हिस्सा जो डिब्बे के किनारे पर टिकता है, ‘आलंब (Fulcrum)’ बन जाता है। हम चम्मच के लंबे हत्थे पर बल (आयास) लगाते हैं। उत्तोलक के सिद्धांत के अनुसार, आयास भुजा की लंबाई अधिक होने से इसका यांत्रिक लाभ बढ़ जाता है। इसी कारण से चम्मच के हत्थे (लंबी आयास भुजा) पर कम बल लगाकर भी हम ढक्कन (भार) को उठाने के लिए बहुत अधिक बल उत्पन्न कर लेते हैं, जिससे ढक्कन आसानी से खुल जाता है।
12. किसी कठोर वस्तु को काटने के लिए उसे कैंची के आलंब के निकट क्यों रखा जाता है?
उत्तर: कैंची भी प्रथम श्रेणी के उत्तोलक का ही एक उदाहरण है। जब हम किसी कठोर वस्तु को कैंची के ‘आलंब’ (बीच वाले पेंच जहाँ से कैंची घूमती है) के निकट रखते हैं, तो उसकी ‘भार भुजा (Load arm)’ की लंबाई बहुत कम हो जाती है। उत्तोलक के सिद्धांत (आयास × आयास भुजा = भार × भार भुजा) के अनुसार, भार भुजा जितनी छोटी होगी, यांत्रिक लाभ उतना ही अधिक होगा। यांत्रिक लाभ अधिक होने के कारण कठोर वस्तु को काटने के लिए हमें अपनी उँगलियों से बहुत कम बल (आयास) लगाना पड़ता है।
13. पूरे इतिहास में (पहियों, भार या चुंबकों का उपयोग करके बने) सदैव चलते रहने वाली मशीनों के कई प्रारूप प्रस्तावित किए गए हैं लेकिन वास्तव में कोई भी सदैव के लिए चलती नहीं रहती है। सभी वास्तविक मशीनें अंततः धीमी हो कर रुक क्यों जाती हैं? कार्य एवं ऊर्जा के पदों में व्याख्या कीजिए।
उत्तर: विज्ञान के अनुसार कोई भी मशीन 100% आदर्श नहीं होती। सभी वास्तविक मशीनों में गतिमान पुर्जे होते हैं और गतिक अवस्था के दौरान उनके बीच घर्षण (friction) तथा वायु प्रतिरोध हमेशा कार्य करता है। मशीन द्वारा जो कार्य किया जाता है, उसमें से यांत्रिक ऊर्जा का कुछ भाग हमेशा घर्षण के विरुद्ध कार्य करने में ऊष्मीय (तापीय) ऊर्जा या ध्वनि ऊर्जा के रूप में परिवर्तित होकर व्यय हो जाता है। ऊर्जा के इसी निरंतर रूपांतरण और ह्रास के कारण मशीन की कुल यांत्रिक ऊर्जा धीरे-धीरे कम होती जाती है और बिना बाहरी ऊर्जा (ईंधन, विद्युत आदि) की लगातार आपूर्ति के मशीन अंततः धीमी होकर रुक जाती है।
अभ्यास प्रश्न
1. बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य—
(i) कार्य तब होता है जब कोई बल लगाया जाता है भले ही वस्तु गति न करे।
उत्तर: असत्य।
(ii) बाल्टी को ऊर्ध्वाधरतः ऊपर उठाने से बाल्टी पर धनात्मक कार्य होता है।
उत्तर: सत्य।
(iii) कार्य और ऊर्जा दोनों का SI मात्रक जूल (J) है।
उत्तर: सत्य।
(iv) एक स्थिर तनी हुई रबड़ की पट्टी में गतिज ऊर्जा होती है।
उत्तर: असत्य।
(v) ऊर्जा एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित हो सकती है।
उत्तर: सत्य।
2. रिक्त स्थान भरिए—
(i) किया गया कार्य = ______________ × ______________ (बल की दिशा में)।
उत्तर: किया गया कार्य = लगाया गया बल × विस्थापन (बल की दिशा में)।
(ii) किसी वस्तु पर ______________ न्यूटन बल लगाने से वस्तु 1 m विस्थापित होती है तो 1 जूल कार्य संपन्न होता है।
उत्तर: किसी वस्तु पर 1 न्यूटन बल लगाने से वस्तु 1 m विस्थापित होती है तो 1 जूल कार्य संपन्न होता है।
(iii) m द्रव्यमान और v वेग वाले पिंड की गतिज ऊर्जा का व्यंजक ______________ होगा।
उत्तर: m द्रव्यमान और v वेग वाले पिंड की गतिज ऊर्जा का व्यंजक 1/2mv2 होगा।
(iv) पृथ्वी की सतह से h ऊँचाई पर स्थित m द्रव्यमान की वस्तु की स्थितिज ऊर्जा ______________ होती है।
उत्तर: पृथ्वी की सतह से h ऊँचाई पर स्थित m द्रव्यमान की वस्तु की स्थितिज ऊर्जा mgh होती है।
(v) कार्य करने की ______________ को शक्ति कहते हैं।
उत्तर: कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं।
3. जब ऊपर की ओर फेंकी गई गेंद अपने उच्चतम बिंदु पर पहुँचती है तो निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(i) गेंद पर लगने वाला बल शून्य है।
(ii) गेंद का त्वरण शून्य है।
(iii) इसकी गतिज ऊर्जा शून्य है।
(iv) इसकी स्थितिज ऊर्जा अधिकतम है।
उत्तर: कथन (iii) और (iv) सही हैं। जब गेंद उच्चतम बिंदु पर पहुँचती है, तो क्षण भर के लिए उसका वेग शून्य हो जाता है, जिससे गतिज ऊर्जा (1/2mv2) शून्य हो जाती है। अधिकतम ऊँचाई (h) होने के कारण इस बिंदु पर स्थितिज ऊर्जा (mgh) अधिकतम होती है। (गुरुत्वीय बल और त्वरण कभी शून्य नहीं होते, वे नीचे की ओर कार्य करते रहते हैं)।
4. निम्नलिखित में से प्रत्येक स्थिति में होने वाले ऊर्जा रूपांतरण की पहचान कीजिए।
(i) एक ट्रक का पहाड़ी पर ऊपर की ओर चढ़ना।
उत्तर: गतिज ऊर्जा → स्थितिज ऊर्जा (ऊंचाई बढ़ने के कारण)।
(ii) घड़ी की स्प्रिंग का खुलना।
उत्तर: स्थितिज ऊर्जा → गतिज ऊर्जा।
(iii) हरे पत्तों द्वारा प्रकाश संश्लेषण।
उत्तर: प्रकाश ऊर्जा → रासायनिक ऊर्जा।
(iv) बाँध से बहता हुआ जल।
उत्तर: स्थितिज ऊर्जा → गतिज ऊर्जा।
(v) माचिस की तीली का जलना।
उत्तर: रासायनिक ऊर्जा → प्रकाश एवं ऊष्मीय (तापीय) ऊर्जा।
(vi) एक पटाखे में विस्फोट होना।
उत्तर: रासायनिक ऊर्जा → ध्वनि, प्रकाश एवं ऊष्मीय ऊर्जा।
(vii) माइक्रोफोन में बोलना।
उत्तर: ध्वनि ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा।
(viii) एक दीप्त विद्युत बल्ब।
उत्तर: विद्युत ऊर्जा → प्रकाश एवं तापीय ऊर्जा।
(ix) सौर-पैनल।
उत्तर: सौर (प्रकाश) ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा।
5. एक विद्यार्थी को एक लिफ्ट द्वारा धीरे-धीरे भूतल से भवन के सबसे ऊपरी तल तक ले जाया जाता है, तत्पश्चात् वही विद्यार्थी सीढ़ियों से चढ़कर सबसे ऊपरी तल तक पहुँचता है। यदि भवन की ऊँचाई h = 72.5 m, गुरुत्वीय त्वरण g = 10 m s−2 और विद्यार्थी का द्रव्यमान m = 50 kg है तो—
(i) यदि विद्यार्थी को लिफ्ट द्वारा सीधे सबसे ऊपरी तल तक ले जाया जाता है तो उसकी स्थितिज ऊर्जा में हुई वृद्धि ज्ञात कीजिए।
उत्तर: लिफ्ट द्वारा स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि = mgh = 50 × 10 × 72.5 = 36250 J.
(ii) जब विद्यार्थी सीढ़ियों से चढ़कर सबसे ऊपरी तल पर पहुँचता है तो उसकी स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि ज्ञात कीजिए।
उत्तर: सीढ़ियों द्वारा स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि = mgh = 50 × 10 × 72.5 = 36250 J.
(iii) आप तय किए रास्ते पर स्थितिज ऊर्जा की निर्भरता के संबंध में क्या निष्कर्ष निकालेंगे?
उत्तर: निष्कर्ष: किसी वस्तु की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन केवल उसकी प्रारंभिक और अंतिम ऊँचाई पर निर्भर करता है। यह इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वह किस रास्ते या विधि से उस ऊँचाई तक पहुँचा है।
6. एक क्रेन m द्रव्यमान को एक निश्चित समय में किसी भवन के 10वें तल तक उठाती है। इसके पश्चात् यह उसी द्रव्यमान को उसी भवन के 20वें तल तक दोगुने समय में उठाती है। इसके लिए उसे कितनी और अधिक ऊर्जा एवं शक्ति चाहिए? यह मान लीजिए कि सभी तलों की ऊँचाई समान है।
उत्तर: ऊर्जा: 20वें तल की ऊँचाई 10वें तल की तुलना में दोगुनी होगी (2h)। अतः, 20वें तल तक भार उठाने में दोगुनी ऊर्जा (2mgh) की आवश्यकता होगी (पहले mgh थी)।
शक्ति: शक्ति क्रेन के कार्य करने की दर (P = W/t) है। 10वें तल पर क्रेन की शक्ति W/t थी। 20वें तल पर क्रेन ने दोगुना कार्य (2W) दोगुने समय (2t) में किया। अतः शक्ति = 2W/2t = W/t। इसलिए शक्ति समान ही रहेगी, अतिरिक्त शक्ति की आवश्यकता नहीं है।
7. घिरनी की सहायता से किसी झंडे को भूमि से एक ऊँचे ध्वजदंड के शीर्ष तक उठाने के लिए आवश्यक ऊर्जा किन कारकों पर निर्भर करती है? क्या झंडे को धीरे-धीरे या शीघ्रता से ऊपर उठाने पर किए गए कार्य के परिमाण में अंतर होगा? यदि झंडे को उठाने की गति दोगुनी कर दी जाए तो शक्ति की आवश्यकता किस प्रकार परिवर्तित होगी? अपने उत्तरों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: (i) आवश्यक ऊर्जा झंडे के द्रव्यमान (m) और ध्वजदंड की ऊँचाई (h) पर निर्भर करती है (E = mgh)।
(ii) झंडे को धीरे-धीरे या शीघ्रता से ऊपर उठाने पर किए गए कार्य (mgh) के परिमाण में कोई अंतर नहीं होगा, क्योंकि कार्य किए गए समय पर निर्भर नहीं करता।
(iii) चूँकि शक्ति (P = W/t) समय के व्युत्क्रमानुपाती होती है, अतः गति दोगुनी करने पर समय आधा लगेगा। इसलिए, शक्ति की आवश्यकता दोगुनी हो जाएगी।
8. 60 kg द्रव्यमान का कोई व्यक्ति 100 kg के स्कूटर पर सवारी करता है, वह स्कूटर को v वेग तक त्वरित करता है। दूसरे दिन उसका 40 kg द्रव्यमान का पुत्र उसके साथ यात्री के रूप में बैठता है, यदि उक्त दोनों दिनों में स्कूटर समान समय में समान चाल प्राप्त करता है। तो बताइए दोनों दिनों में उपयोग किए गए ईंधन का अनुपात कितना होगा? यह मान लीजिए कि स्कूटर में ऊर्जा का स्थानांतरण पूर्णतया ईंधन के कारण होता है और वायु प्रतिरोध या घर्षण के कारण कोई अन्य हानि नहीं होती है।
उत्तर: ईंधन का खर्च गतिज ऊर्जा (1/2mv2) में वृद्धि के समानुपाती होता है।
पहले दिन कुल द्रव्यमान (m1) = 100 kg + 60 kg = 160 kg
दूसरे दिन कुल द्रव्यमान (m2) = 160 kg + 40 kg = 200 kg ईंधन का अनुपात = गतिज ऊर्जाओं का अनुपात = (1/2 × 160 × v2)/1/2 × 200 × v2) = 160/200 = 4/5
अतः ईंधन का अनुपात 4:5 होगा।
9. सरकने वाली कुर्सियों वाले सी-सॉ प्रकार के एक झूले पर एक तरफ एक बच्चा बैठा है और दूसरी ओर एक वयस्क। वयस्क का भार बच्चे के भार से दोगुना है। इसके पश्चात् भी सी-सॉ संतुलित है। ऐसी स्थिति को दर्शाता हुआ एक चित्र बनाइए जिसमें आलंब से बच्चे और वयस्क की दूरी दर्शाई गई हों।
उत्तर: जब सी-सॉ (See-saw) संतुलित होता है, तो आलंब (Fulcrum) के दोनों ओर आघूर्ण (Torque) बराबर होते हैं।
दिया है:
वयस्क का भार = बच्चे के भार का 2 गुना
फिर भी सी-सॉ संतुलित है।
इसलिए,
बच्चे का भार × बच्चे की दूरी = वयस्क का भार × वयस्क की दूरी
यदि बच्चे का भार = W और वयस्क का भार = 2W
तो,
W × d₁ = 2W × d₂
⇒ d₁ = 2d₂
अर्थात बच्चा आलंब से वयस्क की तुलना में दोगुनी दूरी पर बैठेगा।

बच्चे की दूरी = 2 m (उदाहरण)
वयस्क की दूरी = 1 m
इसलिए दोनों ओर का आघूर्ण बराबर होगा और सी-सॉ संतुलित रहेगा।
10. एक गेंद को 20 m s−1 की गति से ऊपर की ओर फेंका जाता है।
(i) गेंद की ऊपर की ओर गति और नीचे की ओर गति के समय इस पर गुरुत्व के अधीन किए गए कार्य के चिह्न की पहचान कीजिए।
(ii) यदि गेंद 19.4 m की ऊँचाई तक पहुँचती है तो वायु प्रतिरोध द्वारा कितना कार्य किया जाता है? (मान लीजिए g = 10 m s−2)
उत्तर: (i) ऊपर जाते समय: विस्थापन ऊपर और गुरुत्व बल नीचे है (विपरीत दिशा), इसलिए कार्य ऋणात्मक होगा।
नीचे आते समय: विस्थापन और गुरुत्व बल दोनों एक ही दिशा (नीचे) में हैं, इसलिए कार्य धनात्मक होगा।
(ii) गेंद की प्रारंभिक गतिज ऊर्जा (Ki) = 1/2 × m × (20)2 = 200m J। 19.4 m पर गेंद की स्थितिज ऊर्जा (Uf) = m × 10 × 19.4 = 194m J। कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार, ऊर्जा में हुई कमी वायु प्रतिरोध के विरुद्ध किए गए कार्य के कारण है। कमी = 200m − 194m = 6m J (जहाँ m गेंद का द्रव्यमान है)। वायु प्रतिरोध द्वारा किया गया कार्य −6m J होगा।
11. एक 10.0 kg का गुटका नगण्य घर्षण वाले क्षैतिज फर्श पर गतिमान है। चित्र 7.37 में दर्शाए अनुसार गुटके पर उसकी गति की दिशा में 0 m से 4 m तक के विस्थापन के समय अंतराल में एक परिवर्ती बल (variable force) लगाया जाता है। यदि गुटके की 0 m की स्थिति पर गतिज ऊर्जा 180 J थी तो गुटके की चाल ज्ञात कीजिए। (i) 0 m पर और (ii) 4 m पर। क्या गुटके की गति के किसी भाग में गुटके का त्वरण ऋणात्मक है?

उत्तर: (i) 0 m पर चाल: 1/2mv2 = 180 ⇒ 1/2 × 10 × v2 = 180 ⇒ 5v2 = 180 ⇒ v2 = 36⇒v=6 m s−1
(ii) 4 m पर चाल: बल-विस्थापन ग्राफ का क्षेत्रफल किए गए कुल कार्य (W) को दर्शाता है। 4 मीटर तक कुल कार्य की गणना ग्राफ के क्षेत्रफल से करके उसे प्रारंभिक गतिज ऊर्जा (180 J) में जोड़ा जाएगा। (180 + W = ½ × 10 × v2final)। त्वरण: गुटके का त्वरण (a=F/m) तब तक ऋणात्मक नहीं होगा, जब तक लगाया गया बल ग्राफ में शून्य से नीचे (ऋणात्मक अक्ष पर) नहीं चला जाता।
12. चंद्रमा की सतह (चंद्रतल) पर गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी की सतह के गुरुत्वाकर्षण का लगभग 1/6 भाग है। एक अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की सतह से किसी गेंद को 8 m की ऊँचाई तक फेंक सकता है। यदि उसी गेंद को उतने ही ऊर्ध्व वेग से चंद्रमा की सतह से ऊपर की ओर फेंका जाए तो गेंद चंद्रमा की सतह पर कितनी ऊँचाई तक जाएगी?
उत्तर: चूँकि दोनों स्थितियों में फेंकने का प्रारंभिक वेग समान है, इसलिए प्रारंभिक गतिज ऊर्जा भी समान होगी। पृथ्वी पर अधिकतम स्थितिज ऊर्जा = चंद्रमा पर अधिकतम स्थितिज ऊर्जा m × gearth × 8 = m × (gearth/6) × hmoon
hmoon = 8 × 6 = 48 m
अतः चंद्रमा पर गेंद 48 मीटर की ऊँचाई तक जाएगी।

