NCERT Class 9 Science Chapter 8 एक यात्रा — परमाणु के भीतर

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NCERT Class 9 Science Chapter 8 एक यात्रा — परमाणु के भीतर

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Chapter: 8

TEXTUAL SOLUTIONS

चिंतन कीजिए (Page No. 140)

1. क्या परमाणु सूक्ष्मतम अविभाज्य कण हैं?

उत्तर: नहीं, परमाणु सूक्ष्मतम अविभाज्य कण नहीं हैं। जे. जे. टॉमसन द्वारा कैथोड किरणों के प्रयोग से इलेक्ट्रॉन की खोज और बाद में रदरफोर्ड तथा चैडविक द्वारा क्रमशः प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन की खोज से यह स्पष्ट प्रमाणित हो गया कि परमाणु अविभाज्य नहीं हैं, बल्कि ये और भी सूक्ष्म अवपरमाणुक कणों (इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) से मिलकर बने हैं।

2. इलेक्ट्रॉन परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों द्वारा आकर्षित होने पर भी नाभिक में क्यों नहीं गिरते हैं?

उत्तर: नील्स बोर के परमाणु मॉडल ने इस तथ्य को स्पष्ट किया है। बोर के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर यादृच्छिक रूप से गति नहीं करते, बल्कि वे केवल कुछ निश्चित वृत्ताकार पथों (जिन्हें स्थायी अवस्थाएं, कक्षाएं अथवा कोश कहते हैं) में ही गति करते हैं। जब इलेक्ट्रॉन इन निश्चित अनुमत कोशों में परिक्रमा करते हैं, तो वे ऊर्जा का ह्रास (क्षय) नहीं करते हैं। इसी कारण प्रोटॉनों के आकर्षण के बावजूद इलेक्ट्रॉन नाभिक में नहीं गिरते और परमाणु का स्थायित्व बना रहता है।

3. वैज्ञानिक परमाणु प्रतिरूपों (मॉडलों) में परिवर्तन क्यों करते रहे हैं?

उत्तर: विज्ञान निरंतर प्रयोगों और खोजों पर आधारित है। जैसे-जैसे नए वैज्ञानिक प्रयोग किए गए और नए प्रमाण (सबूत) प्रकाश में आए, पुराने मॉडलों (जैसे डाल्टन या टॉमसन का मॉडल) की कमियां सामने आने लगीं। नए प्रायोगिक अवलोकनों (जैसे रदरफोर्ड का स्वर्ण पन्नी प्रयोग) की सटीक व्याख्या करने और परमाणु की संरचना को अधिक स्पष्ट रूप से समझने के लिए वैज्ञानिकों ने इन मॉडलों में निरंतर परिवर्तन एवं सुधार किया।

सोचिए और बताइए (Page No. 143, 144 and 145)

1. मान लीजिए कि आपने टॉमसन के विवरणानुसार स्वयं एक ‘परमाणु’ बनाया जिसमें धनात्मक आवेश के लिए मिट्टी और वितरित इलेक्ट्रॉनों के लिए छोटे मोतियों का उपयोग किया। क्या होगा यदि —

(i) मिट्टी पर धनावेश उसमें वितरित मोतियों के कुल ऋणावेश से कम हो?

उत्तर: यदि धनावेश का मान मोतियों के कुल ऋणावेश से कम होगा, तो परमाणु उदासीन नहीं रहेगा बल्कि ऋणावेशित हो जाएगा।

(ii) त्रुटिवश यदि मिट्टी में थोड़ा-सा भी ऋणावेश हो तो क्या आपका मॉडल अब भी उदासीन परमाणु को प्रदर्शित करेगा?

उत्तर: यदि धनावेशित मिट्टी में त्रुटिवश ऋणावेश आ जाए, तो कुल ऋणावेश की मात्रा धनावेश से अधिक हो जाएगी, जिसके कारण मॉडल अब उदासीन परमाणु को प्रदर्शित नहीं करेगा और ऋणावेशित हो जाएगा।

2. क्या इसकी तुलना एक संतरे (अथवा एक नींबू जिनके नर्म गूदों के मध्य बीज होते हैं) से करना उचित है? यह कहाँ तक टॉमसन के विचार से मेल खाता है और इसमें कहाँ कमी है?

उत्तर: हाँ, इसकी तुलना संतरे या तरबूज से की जा सकती है। यह टॉमसन के विचार से इस तरह मेल खाता है कि संतरे का नर्म गूदा धनात्मक आवेश को और बीज परमाणु में वितरित इलेक्ट्रॉनों को प्रदर्शित कर सकते हैं। इसकी कमी यह है कि यह परमाणु के स्थायित्व को नहीं समझा पाता और रदरफोर्ड के स्वर्ण पन्नी प्रयोग के परिणामों (कि धनावेश एक सूक्ष्म केंद्र में स्थित है, न कि पूरे परमाणु में फैला हुआ) की व्याख्या करने में विफल रहता है।

3. टॉमसन ने यह निष्कर्ष क्यों निकाला कि इलेक्ट्रॉन सभी परमाणुओं में उपस्थित होते हैं?

उत्तर: जे. जे. टॉमसन ने अत्यंत निम्न दाब पर गैसों में विद्युत धारा के चालन का अध्ययन करते हुए पाया कि कैथोड किरणों (इलेक्ट्रॉनों) की प्रकृति कैथोड के पदार्थ एवं कैथोड नली में भरी गैस पर निर्भर नहीं करती है। इससे यह प्रमाणित हुआ कि इलेक्ट्रॉन सभी परमाणुओं के मूल घटक हैं जो प्रत्येक तत्व में उपस्थित होते हैं।

4. आप क्या सोचते हैं? यदि रदरफोर्ड के स्वर्ण पणिर्का प्रयोग में अल्फा (α) कणों के स्थान पर ऋणावेशित कणों का उपयोग किया जाता तो क्या होता?

उत्तर: यदि अल्फा कणों की जगह ऋणावेशित कणों का उपयोग किया जाता, तो वे स्वर्ण परमाणु के धनावेशित नाभिक द्वारा प्रकीर्णित (प्रतिकर्षित) होने के बजाय उसकी ओर आकर्षित हो जाते।

5. रदरफोर्ड ने पाया कि कुछ अल्फा (α) कण तीव्र गति से पुनः लौट आए। मात्र इस एक आश्चर्यजनक परिणाम से टॉमसन का परमाणु ‘प्लम पुडिंग मॉडल’ पूर्ण रूप से कैसे गलत सिद्ध हो गया?

उत्तर: टॉमसन के मॉडल के अनुसार परमाणु में धनात्मक आवेश समान रूप से वितरित होता है, जिससे अल्फा कण बिना अधिक विक्षेपित हुए पार निकल जाने चाहिए थे। परंतु अल्फा कणों के पुनः लौट आने का अर्थ था कि परमाणु का संपूर्ण धनावेश और अधिकांश द्रव्यमान पूरे परमाणु में वितरित न होकर एक अत्यंत सूक्ष्म केंद्र (नाभिक) में केंद्रित है, जिसने टॉमसन के मॉडल को गलत सिद्ध कर दिया।

6. यदि आप रदरफोर्ड से उनके कार्य के संबंध में एक प्रश्न पूछ सकते तो वह क्या होता?

उत्तर: मैं पूछना चाहूँगा: “आपके मॉडल के अनुसार यदि ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन धनावेशित नाभिक के चारों ओर चक्कर लगाते हैं, तो त्वरित होने के कारण वे ऊर्जा का ह्रास करके नाभिक में क्यों नहीं गिर जाते?”।

7. नीचे दिए गए अभिकथन एवं कारण को पढ़िए और उनके संबंध में आगे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।

अभिकथन— रदरफोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान उसके केंद्र में एक छोटे से भाग में केंद्रित होता है जिसे नाभिक कहते हैं।

कारण— टॉमसन मॉडल के अनुसार इलेक्ट्रॉन एकसमान रूप से वितरित धनावेश वाले गोले में धँसे हुए रहते हैं।

(i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण अभिकथन की सही व्याख्या है।

(ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं परंतु कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं है।

(iii) अभिकथन सत्य है परंतु कारण असत्य है।

(iv) अभिकथन असत्य है परंतु कारण सत्य है।

उत्तर: (ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं परंतु कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं है।

क्या होगा यदि… (Page No. 147)

4. परमाणु में कोई रिक्त स्थान न हो? इससे विभिन्न वस्तुओं का आकार किस प्रकार प्रभावित हुआ होगा?

उत्तर: रदरफोर्ड के मॉडल के अनुसार, परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त होता है और उसका संपूर्ण धनावेश एवं द्रव्यमान एक अत्यंत सूक्ष्म केंद्र (नाभिक) में केंद्रित होता है जो कि पूरे परमाणु से लगभग 10⁵ (एक लाख) गुना छोटा होता है। यदि परमाणु में कोई रिक्त स्थान न हो, तो परमाणु अत्यधिक सघन होकर अपने नाभिक के आकार जितना छोटा हो जाएगा। इसके परिणामस्वरूप, ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं का आकार सिकुड़कर अत्यंत सूक्ष्म (नाममात्र का) रह जाएगा, लेकिन उनका द्रव्यमान (भार) वही रहेगा। अर्थात् वस्तुएं अकल्पनीय रूप से अत्यधिक सघन और अत्यंत छोटी हो जाएंगी।

सोचिए और बताइए (Page No. 149, 150, 152 and 156)

1. कल्पना कीजिए कि आप एक वैज्ञानिक हैं और आपने एक नया तत्व खोजा है। उसका नाम अपने नाम पर रखिए और सिद्ध कीजिए कि आपने उसके लिए जिस प्रतीक का चयन किया वह आई.यू.पी.ए.सी. के नियमों का पालन करता है।

उत्तर: मैंने अपने नाम पर एक नया तत्व खोजा जिसका नाम ‘रमनियम’ (Ramanium) रखा। आई.यू.पी.ए.सी. (IUPAC) के नियमों के अनुसार, किसी तत्व का प्रतीक उसके नाम के प्रथम अक्षर या प्रथम दो अक्षरों से बनता है, जिसमें पहला अक्षर सदैव बड़ा (capital) और दूसरा अक्षर छोटा (small) होता है। अतः इस तत्व का प्रतीक ‘Ra’ या ‘Rm’ रखा जा सकता है।

2. यदि सभी वैज्ञानिक एक तत्व के लिए भिन्न-भिन्न प्रतीकों का उपयोग करते तो क्या समस्याएँ उत्पन्न हो सकती थीं?

उत्तर: यदि भिन्न-भिन्न प्रतीकों का उपयोग किया जाता, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक संवाद और अनुसंधान में बहुत भ्रम और कठिनाइयाँ उत्पन्न होतीं। स्वीकृत प्रतीक भाषा की बाधा के बिना सरलता एवं स्पष्टता से जानकारी साझा करने में सहायता करते हैं।

3. परमाणु क्रमांक 26 के किसी परमाणु में 56 न्यूक्लिऑन हैं। इसके इलेक्ट्रॉनों, प्रोटॉनों एवं न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।

उत्तर: प्रोटॉनों की संख्या: परमाणु क्रमांक के बराबर = 26

इलेक्ट्रॉनों की संख्या: उदासीन परमाणु में प्रोटॉनों के समान = 26

न्यूट्रॉनों की संख्या: द्रव्यमान संख्या (न्यूक्लिऑन) – प्रोटॉनों की संख्या = 56 – 26 = 30

4. एक परमाणु के नाभिक में 20 प्रोटॉन हैं। यदि उसकी द्रव्यमान संख्या 41 है तो उसमें न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।

उत्तर: न्यूट्रॉनों की संख्या = द्रव्यमान संख्या – प्रोटॉनों की संख्या = 41 – 20 = 21

5. एक परमाणु में 18 न्यूट्रॉन हैं और उसका परमाणु क्रमांक 17 है। इसकी द्रव्यमान संख्या क्या होगी?

उत्तर: द्रव्यमान संख्या = प्रोटॉनों की संख्या (परमाणु क्रमांक) + न्यूट्रॉनों की संख्या = 17 + 18 = 35

6. एक परमाणु में 11 इलेक्ट्रॉन हैं। इसमें न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।

उत्तर: परमाणु में 11 इलेक्ट्रॉन हैं, इसका परमाणु क्रमांक 11 है, जो सोडियम (Na) का होता है। सोडियम (Na) के नाभिक में 12 न्यूट्रॉन होते हैं।

7. निम्नलिखित तत्वों के बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या पहचानिए।

उत्तर: (i) C (परमाणु क्रमांक 6): विन्यास 2, 4 है, अतः बाह्यतम कोश में 4 इलेक्ट्रॉन हैं।

(ii) F (परमाणु क्रमांक 9): विन्यास 2, 7 है, अतः बाह्यतम कोश में 7 इलेक्ट्रॉन हैं।

(iii) Si (परमाणु क्रमांक 14): विन्यास 2, 8, 4 है, अतः बाह्यतम कोश में 4 इलेक्ट्रॉन हैं।

8. ऐसे तत्वों जिनके परमाणु क्रमांक 12, 16 और 18 हैं, का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।

उत्तर: परमाणु क्रमांक 12 (Mg): 2, 8, 2

परमाणु क्रमांक 16 (S): 2, 8, 6

परमाणु क्रमांक 18 (Ar): 2, 8, 8

9. इस पहेली को हल कीजिए — मैं एक ऐसा परमाणु हूँ जिसकी द्रव्यमान संख्या 23 और प्रोटॉनों की संख्या 11 है। मैं एक नर्म धातु हूँ और जल के साथ तीव्रता से अभिक्रिया करती हूँ। मैं कौन हूँ और मेरे पास कितने न्यूट्रॉन हैं? आप भी इसी प्रकार की एक पहेली बना सकते हैं।

उत्तर: चूँकि प्रोटॉनों की संख्या 11 है, इसलिए यह तत्व सोडियम (Na) है।

न्यूट्रॉनों की संख्या = द्रव्यमान संख्या – प्रोटॉनों की संख्या = 23 – 11 = 12

अतः यह सोडियम है और इसके पास 12 न्यूट्रॉन हैं।

10. आप दो भिन्न परमाणुओं जिसमें से प्रत्येक में 11 प्रोटॉन हैं परंतु एक में 12 न्यूट्रॉन हैं और दूसरे में 13 न्यूट्रॉन हैं, के परमाणु क्रमांकों और द्रव्यमान संख्याओं की तुलना किस प्रकार से करेंगे? क्या वे एक ही तत्व के परमाणु हैं अथवा भिन्न तत्वों के?

उत्तर: दोनों में 11 प्रोटॉन होने के कारण, इनका परमाणु क्रमांक समान (11) है। इनकी द्रव्यमान संख्याएँ भिन्न हैं: पहले की द्रव्यमान संख्या (11 + 12) = 23 और दूसरे की (11 + 13) = 24 है। परमाणु क्रमांक समान होने के कारण ये एक ही तत्व (सोडियम) के परमाणु हैं और इन्हें समस्थानिक (Isotopes) कहते हैं।

11. यदि ब्रोमीन परमाणु दो समस्थानिकों, 79 35 Br (49.7%) और 81 35 Br (50.3%) के रूप में उपलब्ध होता है तो ब्रोमीन परमाणु के भारित औसत द्रव्यमान की गणना कीजिए।

उत्तर: भारित औसत द्रव्यमान = (79 × 49.7/100) + (81 × 50.3/100) = (39.263) + (40.743) = 80.006 u।

अभ्यास प्रश्न

1. अर्नेस्ट रदरफोर्ड के स्वर्ण पन्नी का प्रयोग के संदर्भ में सही विकल्पों का चयन कीजिए और सही एवं गलत विकल्पों का कारण समझाइए।

(i) इस प्रयोग ने स्पष्ट रूप से नाभिक में न्यूट्रॉनों की उपस्थिति को दर्शाया।

उत्तर: गलत: न्यूट्रॉन की खोज जेम्स चैडविक ने की थी, रदरफोर्ड के इस प्रयोग ने नहीं।

(ii) इसके परिणामों ने प्लम पुडिंग मॉडल को गलत सिद्ध कर दिया और परमाणु के केंद्र में नाभिक होने की अवधारणा को जन्म दिया।

उत्तर: सही: अल्फा कणों के प्रकीर्णन ने सिद्ध किया कि धनावेश एक केंद्र (नाभिक) में है, न कि पूरे परमाणु में समान रूप से वितरित, जिससे प्लम पुडिंग मॉडल गलत सिद्ध हो गया।

(iii) कुछ अल्फा कणों का अधिक विक्षेपण यह दर्शाता है कि परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान और धन आवेश एक सूक्ष्म केंद्र में संकुचित है।

उत्तर: सही: बहुत कम अल्फा कणों का वापस लौटना यह प्रमाणित करता है कि परमाणु का द्रव्यमान और धनावेश अत्यंत सूक्ष्म क्षेत्र (नाभिक) में केंद्रित है।

(iv) जिस प्रकार अल्फा कण विक्षेपित हुए उससे यह ज्ञात हुआ कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर गति करते हैं।

उत्तर: गलत: अल्फा कणों का विक्षेपण नाभिक के धनावेश के कारण हुआ था, न कि इलेक्ट्रॉनों की गति के कारण।

2. बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही अथवा गलत हैं? प्रत्येक कथन के लिए एक कारण दीजिए।

(i) इलेक्ट्रॉन निश्चित कक्षाओं में गति करते हुए अपनी ऊर्जा का ह्रास करते हैं और धीरे-धीरे नाभिक में गिर जाते हैं।

उत्तर: गलत: बोर के मॉडल के अनुसार, निश्चित कक्षा में गति करते हुए इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का क्षय नहीं करते हैं।

(ii) इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कहीं भी विद्यमान हो सकते हैं और उनकी ऊर्जा निश्चित नहीं होती।

उत्तर: गलत: इलेक्ट्रॉन केवल निश्चित वृत्ताकार पथ (कक्षाओं/कोशों) में गति करते हैं और प्रत्येक कोश की ऊर्जा निश्चित होती है।

(iii) इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित ऊर्जा की कक्षाओं में ऊर्जा ह्रास किए बिना चक्कर लगाते हैं।

उत्तर: सही: बोर ने स्थायी कक्षाओं की अवधारणा दी, जिसमें इलेक्ट्रॉन ऊर्जा ह्रास के बिना नाभिक की परिक्रमा करते हैं।

(iv) नाभिक के चारों ओर गति करते हुए इलेक्ट्रॉन ऊर्जा स्तरों के मध्य भी पाए जा सकते हैं।

उत्तर: गलत: इलेक्ट्रॉन मात्र अनुमत कोशों में गति कर सकते हैं, इन कोशों के मध्य में नहीं।

3. तीन परमाणु कणों X, Y और Z के नाभिकों का संघटन नीचे दिया गया है—

XYZ
प्रोटॉनों की संख्या181717
न्यूट्रॉनों की संख्या191820

निम्नलिखित के मध्य संबंध स्पष्ट कीजिए।

(i) Y एवं Z

(ii) Z एवं X

उत्तर: (i) Y एवं Z: दोनों में प्रोटॉनों की संख्या (17) समान है परंतु न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न है। इसलिए ये एक ही तत्व के समस्थानिक (Isotopes) हैं।

(ii) Z एवं X: Z की द्रव्यमान संख्या (17 + 20 = 37) और X की द्रव्यमान संख्या (18 + 19 = 37) है। द्रव्यमान संख्या समान होने परंतु परमाणु क्रमांक भिन्न होने के कारण ये समभारिक (Isobars) हैं।

4. रदरफोर्ड ने स्वर्ण पन्नी का प्रयोग में ऐसे कुछ अल्फा कण जो पुनः लौट आए थे अथवा बड़े कोणों पर विक्षेपित हो गए थे, के आधार पर परमाणु के धनावेशित भाग की अवस्थिति और आकार के विषय में क्या निष्कर्ष निकाला?

उत्तर: रदरफोर्ड ने यह निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का संपूर्ण धनावेश और अधिकांश द्रव्यमान एक अत्यंत सूक्ष्म क्षेत्र में केंद्रित होता है, जिसे नाभिक कहते हैं। उन्होंने यह भी पाया कि नाभिक का आकार परमाणु के आकार की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म (लगभग 10⁵ गुना छोटा) होता है।

5. निम्नलिखित कथनों की व्याख्या कीजिए और इन्हें सही कालक्रम में व्यवस्थित कीजिए जिससे यह ज्ञात हो सके कि समय के साथ परमाणु मॉडल कैसे विकसित हुए हैं।

(i) बोर के मॉडल ने प्रस्तावित किया कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित कक्षाओं में परिभ्रमण करते हैं और प्रत्येक कक्षा की एक निश्चित ऊर्जा होती है।

(ii) टॉमसन के मॉडल ने परमाणु को एक ‘प्लम पुडिंग’ के रूप में दर्शाया है जिसमें इलेक्ट्रॉन धनावेश के एक गोले में धँसे होते हैं।

(iii) रदरफोर्ड के मॉडल ने प्रस्तावित किया कि परमाणुओं में एक सघन केंद्रीय नाभिक होता है।

(iv) डाल्टन के मॉडल ने परमाणुओं को अविभाज्य कणों के रूप में वर्णित किया।

उत्तर: सही कालक्रम (Chronological Order): (iv) डाल्टन का मॉडल ➞ (ii) टॉमसन का मॉडल ➞ (iii) रदरफोर्ड का मॉडल ➞ (i) बोर का मॉडल।

कथनों की विस्तृत व्याख्या:

(i) डाल्टन का परमाणु मॉडल (1808): समय के साथ परमाणु संरचना की समझ की शुरुआत जॉन डाल्टन के सिद्धांत से हुई। वर्ष 1808 में डाल्टन ने प्रस्तावित किया कि सभी द्रव्य (पदार्थ) अति सूक्ष्म और अविभाज्य कणों से बने होते हैं, जिन्हें परमाणु कहा जाता है। उनके अनुसार, परमाणु पदार्थ का वह मूल निर्माण खंड है जिसे और अधिक सूक्ष्म कणों में विभाजित नहीं किया जा सकता। यह वैज्ञानिक आधार पर परमाणु की संरचना को समझने का प्रारंभिक बिंदु था।

(ii) टॉमसन का परमाणु मॉडल (19वीं शताब्दी का अंत/1897 के बाद): जे. जे. टॉमसन द्वारा कैथोड किरणों के प्रयोग से ऋणावेशित कण ‘इलेक्ट्रॉन’ की खोज की गई, जिससे यह सिद्ध हुआ कि परमाणु अविभाज्य नहीं है। इसके बाद टॉमसन ने परमाणु का ‘प्लम पुडिंग मॉडल’ (या तरबूज मॉडल) प्रस्तुत किया। इस मॉडल के अनुसार, परमाणु धनात्मक आवेश का एक गोला होता है, जिसमें ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन समान रूप से इस प्रकार धँसे रहते हैं (जैसे तरबूज के लाल गूदे में बीज) ताकि परमाणु वैद्युत रूप से उदासीन (neutral) बना रहे।

(iii) रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल (1911): वर्ष 1911 में अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने स्वर्ण पन्नी (gold foil) पर अल्फा (α) कणों का प्रकीर्णन प्रयोग किया। इस प्रयोग के अप्रत्याशित परिणामों (जैसे कुछ अल्फा कणों का बड़े कोणों से विक्षेपित होना या वापस लौट आना) के आधार पर रदरफोर्ड ने टॉमसन के मॉडल को गलत साबित कर दिया। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का अधिकांश भाग अंदर से खोखला (रिक्त) होता है। परमाणु का सम्पूर्ण धनावेश और अधिकांश द्रव्यमान एक अत्यंत सूक्ष्म, सघन केंद्र में संकुचित होता है, जिसे ‘नाभिक’ (nucleus) कहते हैं। उन्होंने बताया कि ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन इस धनावेशित नाभिक के चारों ओर परिक्रमा करते हैं।

(iv) बोर का परमाणु मॉडल (1913): रदरफोर्ड का मॉडल यह समझाने में विफल रहा था कि त्वरित होते हुए इलेक्ट्रॉन अपनी ऊर्जा का ह्रास करके नाभिक में क्यों नहीं गिर जाते (परमाणु का स्थायित्व)। इस कमी को दूर करने के लिए वर्ष 1913 में नील्स बोर ने अपना क्वांटम आधारित परमाणु मॉडल दिया। बोर ने स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर यादृच्छिक रूप से नहीं, बल्कि केवल कुछ निश्चित वृत्ताकार पथों (जिन्हें कक्षाएं, कोश या ऊर्जा स्तर K, L, M, N कहते हैं) में ही परिभ्रमण करते हैं। प्रत्येक कक्षा की एक निश्चित ऊर्जा होती है और इन स्थायी कक्षाओं में गति करते समय इलेक्ट्रॉन किसी भी ऊर्जा का क्षय (ह्रास) नहीं करते हैं, जिससे परमाणु स्थायी बना रहता है।

6. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कक्षाओं में गति करते हैं। वे परमाणु से बाहर क्यों नहीं निकल जाते? कौन-सा बल उन्हें नाभिक की ओर आकर्षित रखता है, व्याख्या कीजिए?

उत्तर: इलेक्ट्रॉनों के परमाणु से बाहर न निकलने और नाभिक के चारों ओर बंधे रहने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

(i) विपरीत आवेशों के बीच आकर्षण बल: परमाणु के केंद्र में एक सूक्ष्म और सघन नाभिक होता है, जिसमें प्रोटॉन उपस्थित होते हैं। इन प्रोटॉनों के कारण नाभिक पर धनावेश (Positive charge) होता है। वहीं दूसरी ओर, इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित (Negatively charged) कण होते हैं। विज्ञान के नियमानुसार विपरीत आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। इसलिए, धनावेशित नाभिक और ऋणावेशित इलेक्ट्रॉनों के बीच एक बहुत मजबूत आकर्षण बल कार्य करता है। यही आकर्षण बल इलेक्ट्रॉनों को नाभिक की ओर खींचे रखता है और उन्हें परमाणु से बाहर नहीं जाने देता।

(ii) ग्रहीय मॉडल की तरह गति: रदरफोर्ड के मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर ठीक उसी प्रकार परिक्रमा करते हैं, जैसे ग्रह सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। जिस तरह सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल ग्रहों को उनकी कक्षा से बाहर नहीं जाने देता, उसी तरह नाभिक का यह आकर्षण बल इलेक्ट्रॉनों को परमाणु के भीतर बांध कर रखता है।

(iii) निश्चित ऊर्जा स्तर (कक्षाएं): नील्स बोर के परमाणु मॉडल ने इसे और अधिक स्पष्ट किया। बोर के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कहीं भी या यादृच्छिक (random) रूप से गति नहीं करते हैं। वे नाभिक के चारों ओर केवल कुछ निश्चित वृत्ताकार पथों में गति करते हैं, जिन्हें ‘स्थायी अवस्थाएं’, ‘कक्षाएं’ या ‘ऊर्जा स्तर’ (K, L, M, N…) कहा जाता है।

(iv) ऊर्जा का क्षय न होना: जब इलेक्ट्रॉन इन अनुमत और निश्चित कक्षाओं में तेजी से परिक्रमा करते हैं, तो वे अपनी ऊर्जा का क्षय (ह्रास) नहीं करते हैं। इस निश्चित ऊर्जा के कारण ही इलेक्ट्रॉन न तो नाभिक के आकर्षण से खिंचकर उसके अंदर गिरते हैं और न ही परमाणु की कक्षा को छोड़कर बाहर निकल पाते हैं।

7. नीचे दिए गए अभिकथन एवं कारण को पढ़िए और उनके संबंध में आगे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।

अभिकथन— अवपरमाणुक कणों की खोज ने परमाणु संरचना को समझने में सहायता की।

कारण— किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों की संख्या के समान होती है।

(i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

(ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं परंतु कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं करता है।

(iii) अभिकथन सत्य है परंतु कारण असत्य है।

(iv) अभिकथन असत्य है परंतु कारण सत्य है।

उत्तर: (ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं परंतु कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं करता है।

8. मैग्नीशियम अनेक जैविक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक है जिसमें मांसपेशियों का संकुचन भी सम्मिलित है। मैग्नीशियम के परमाणु की द्रव्यमान संख्या 24 और परमाणु क्रमांक 12 है तो उसमें

(i) प्रोटॉनों की संख्या।

उत्तर: प्रोटॉनों की संख्या = 12 (परमाणु क्रमांक के बराबर)।

(ii) न्यूट्रॉनों की संख्या।

उत्तर: न्यूट्रॉनों की संख्या = द्रव्यमान संख्या – प्रोटॉनों की संख्या = 24 – 12 = 12

(iii) इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए। मैग्नीशियम परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की व्यवस्था को भी चित्रात्मक रूप से दर्शाइए।

उत्तर: इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 12 (उदासीन परमाणु में प्रोटॉनों के समान)। (इलेक्ट्रॉनों की व्यवस्था: K-कोश में 2, L-कोश में 8, M-कोश में 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसे नाभिक के चारों ओर तीन कक्षाओं (वृत्तों) में क्रमशः 2, 8 और 2 बिंदु बनाकर दर्शाया जा सकता है)।

9. चित्र 8.17 में दर्शाए गए तत्वों के लिए निम्नलिखित जानकारी ज्ञात कीजिए।

(i) तत्व का नाम

(ii) प्रतीक

(iii) इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या

(iv) संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या

(v) तत्व की संयोजकता

(vi) प्रोटॉनों की संख्या

(vii) परमाणु क्रमांक

उत्तर: 

चित्रतत्व का नामप्रतीकइलेक्ट्रॉनों की कुल संख्यासंयोजकता इलेक्ट्रॉनतत्व की संयोजकताप्रोटॉनों की संख्यापरमाणु क्रमांक
(क)लिथियमLi31133
(ख)कार्बनC64466
(ग)मैग्नीशियमMg12221212
(घ)नाइट्रोजनN75377

10. रदरफोर्ड और बोर दोनों के प्रतिरूपों में इलेक्ट्रॉन नाभिक की परिक्रमा करते हैं परंतु रदरफोर्ड का मॉडल, परमाणु के स्थायित्व को समझाने में असफल क्यों रहा जबकि बोर का मॉडल सफल रहा?

उत्तर: रदरफोर्ड के मॉडल में यह कमी थी कि वृत्ताकार पथ में त्वरित इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का निरंतर ह्रास करेगा और अंततः नाभिक में गिर जाएगा, जिससे परमाणु नष्ट हो जाएगा। इसके विपरीत, बोर ने यह समझाकर सफलता प्राप्त की कि इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित अनुमत कक्षाओं में ही परिक्रमा करते हैं और इन स्थायी कक्षाओं में गति करते समय वे ऊर्जा का क्षय नहीं करते हैं।

11. एक परमाणु 70X में 31 इलेक्ट्रॉन हैं। बताइए कि इसके नाभिक में कितने न्यूट्रॉन हैं?

उत्तर: इलेक्ट्रॉनों की संख्या 31 है, 

अतः प्रोटॉनों की संख्या भी 31 होगी।

द्रव्यमान संख्या = 70

न्यूट्रॉनों की संख्या = द्रव्यमान संख्या – प्रोटॉनों की संख्या = 70 – 31 = 39

12. एक परमाणु में 79 प्रोटॉन हैं और उसकी द्रव्यमान संख्या 197 है। इसमें (i) न्यूट्रॉनों की संख्या और (ii) इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना कीजिए।

उत्तर: (i) न्यूट्रॉनों की संख्या = 197 (द्रव्यमान संख्या) – 79 (प्रोटॉनों की संख्या) = 118

(ii) इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 79 (प्रोटॉनों की संख्या के समान)।

13. तालिका 8.5 को पूर्ण कीजिए।

परमाणु क्रमांकद्रव्यमान संख्याट्रॉनों की संख्याप्रोटॉनों की संख्याइलेक्ट्रॉनों की संख्यातत्व के नाम 
56
147नाइट्रोजन
2412
1516
10

उत्तर: 

परमाणु क्रमांकद्रव्यमान संख्यान्यूट्रॉनों की संख्याप्रोटॉनों की संख्याइलेक्ट्रॉनों की संख्यातत्व के नाम 
511655बोरॉन
714777नाइट्रोजन
1224121212मैग्नीशियम
1531161515फॉस्फोरस
11011हाइड्रोजन

14. अमन अपने सहपाठियों के साथ परमाणु की संरचना पर चर्चा कर रहा था। चर्चा के समय उसे ज्ञात हुआ कि किसी तत्व X की द्रव्यमान संख्या 35 है और उसमें 18 न्यूट्रॉन हैं। इस जानकारी के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—

(i) तत्व X में कितने इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन हैं?

उत्तर: प्रोटॉन = 35 – 18 = 17, इलेक्ट्रॉन = 17।

(ii) इसका परमाणु क्रमांक क्या है?

उत्तर: 17

(iii) तत्व X की पहचान कीजिए। 

उत्तर: क्लोरीन – Cl।

(iv) इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।

उत्तर: 2, 8, 7

(v) इसमें कितने संयोजकता इलेक्ट्रॉन हैं?

उत्तर: 7

(vi) यदि इसके नाभिक में दो न्यूट्रॉन और जोड़ दिए जाएँ तो इसकी द्रव्यमान संख्या क्या होगी?

उत्तर: 35 + 2 = 37

(vii) X का नए परमाणु के साथ क्या संबंध होगा?

उत्तर: वे समस्थानिक होंगे क्योंकि उनका परमाणु क्रमांक 17 समान रहेगा परंतु द्रव्यमान संख्याएँ 35 और 37 भिन्न होंगी।

15. किसी परमाणु के नाभिक में 12 प्रोटॉन और 12 न्यूट्रॉन हैं। अब कल्पना कीजिए कि सभी इलेक्ट्रॉनों को किन्हीं काल्पनिक कणों से प्रतिस्थापित कर दिया जाता है जिनका आवेश इलेक्ट्रॉनों के समान ही है परंतु वे 500 गुना अधिक भारी हैं। इस प्रतिस्थापन का परमाणु के निम्नलिखित गुणों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

(i) परमाणु क्रमांक।

उत्तर: कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह केवल प्रोटॉनों की संख्या (12) पर निर्भर करता है।

(ii) परमाणु द्रव्यमान।

उत्तर: परमाणु द्रव्यमान बढ़ जाएगा, क्योंकि नए कणों का भार इलेक्ट्रॉनों से 500 गुना अधिक है।

(iii) द्रव्यमान संख्या।

उत्तर: यह समान (24) ही रहेगी, क्योंकि द्रव्यमान संख्या केवल नाभिक के प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों का योग होती है।

(iv) समग्र आवेश।

उत्तर: कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा (परमाणु उदासीन ही रहेगा), क्योंकि नए कणों का आवेश इलेक्ट्रॉनों के आवेश के समान ही है।

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