NCERT Class 9 Science Chapter 9 द्रव्य का परमाण्विक आधार

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NCERT Class 9 Science Chapter 9 द्रव्य का परमाण्विक आधार

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Chapter: 9

TEXTUAL SOLUTIONS

चिंतन कीजिए (Page No. 162)

1. जल विभिन्न स्रोतों से प्राप्त किया जा सकता है। क्या जल के ये सभी प्रतिदर्श (sample) रासायनिक रूप से एकसमान होते हैं?

उत्तर: हाँ, जल के सभी प्रतिदर्श रासायनिक रूप से पूरी तरह एकसमान होते हैं। ‘स्थिर अनुपात के नियम’ (Proust’s Law) के अनुसार, किसी भी यौगिक में तत्व द्रव्यमान के एक निश्चित अनुपात में ही होते हैं। इसलिए जल चाहे नदी, बोरवेल या समुद्र कहीं से भी लिया गया हो, उसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के द्रव्यमान का अनुपात सदैव 1:8 ही रहता है।

2. ऑक्सीजन को कभी O और कभी O2 के रूप में निरूपित किया जाता है। इन दोनों प्रतीकों में क्या अंतर है? 

उत्तर: यहाँ ‘O’ ऑक्सीजन के एक परमाणु (atom) को निरूपित करता है, जो स्वतंत्र रूप से स्थायी नहीं होता। जबकि ‘O2‘ ऑक्सीजन के एक अणु (molecule) को दर्शाता है। अपना अष्टक (स्थायित्व) पूरा करने के लिए ऑक्सीजन के दो परमाणु आपस में दो-दो इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करके (द्वि-आबंध बनाकर) O2 अणु का निर्माण करते हैं।

3. जल में घुला हुआ नमक विद्युत का सुचालक होता है परंतु चीनी नहीं, ऐसा क्यों?

उत्तर: नमक (सोडियम क्लोराइड) एक आयनिक यौगिक है। जब नमक को जल में घोला जाता है, तो यह अपने आयनों (सोडियम धनायन Na+ और क्लोराइड ऋणायन Cl-) में विभक्त हो जाता है। जल में ये मुक्त आयन गति करने के लिए स्वतंत्र होते हैं, जिससे विद्युत का चालन होता है। इसके विपरीत, चीनी एक सहसंयोजी यौगिक है। यह जल में घुल तो जाती है, परंतु आयन नहीं बनाती (मुक्त आयनों का निर्माण नहीं होता), इसी कारण चीनी का विलयन विद्युत का चालन नहीं करता।

सोचिए और बताइए (Page No. 166, 167, 168, 170, 171 and 174)

1. एक विद्यार्थी किसी खुले बीकर में 10 g एथेनॉल जलाता है। अभिक्रिया पूर्ण होने के पश्चात बीकर में कोई अवशेष शेष नहीं रहता है। क्या इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि द्रव्यमान संरक्षण के नियम का उल्लंघन हुआ है? व्याख्या कीजिए।

उत्तर: नहीं, यह द्रव्यमान संरक्षण के नियम का उल्लंघन नहीं है। द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो सृजन होता है और न ही विनाश। जब एथेनॉल को एक खुले बीकर में जलाया जाता है, तो दहन की इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड और जल वाष्प जैसी गैसें उत्पन्न होती हैं। चूँकि बीकर खुला हुआ है, इसलिए ये उत्पन्न गैसें वातावरण में उड़ (मुक्त हो) जाती हैं, जिसके कारण बीकर खाली प्रतीत होता है। यदि हम एक बंद निकाय (closed system) में इस अभिक्रिया को करें और उत्पन्न गैसों के द्रव्यमान को भी मापें, तो अभिकारकों और उत्पादों का कुल द्रव्यमान बिल्कुल समान होगा।

2. जब 20 g हाइड्रोजन, 160 g ऑक्सीजन के साथ पूर्णतः अभिक्रिया करता है तब द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार जल की कितनी मात्रा का निर्माण होगा?

उत्तर: द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार, किसी रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों (reactants) का कुल द्रव्यमान हमेशा उत्पादों (products) के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है।

यहाँ अभिकारक हैं:

हाइड्रोजन का द्रव्यमान = 20 g

ऑक्सीजन का द्रव्यमान = 160 g

अभिकारकों का कुल द्रव्यमान = 20 g + 160 g = 180 g

चूँकि अभिकारकों का कुल द्रव्यमान 180 g है, इसलिए द्रव्यमान संरक्षण के नियम का पालन करते हुए 180 g जल का निर्माण होगा।

3. किसी यौगिक में सल्फर और ऑक्सीजन के द्रव्यमान का प्रतिशत क्रमशः 40% और 60% है। इसी यौगिक के किसी प्रतिदर्श में 20 g सल्फर है तो ऑक्सीजन का द्रव्यमान कितना होना चाहिए जिससे स्थिर अनुपात के नियम का पालन हो?

उत्तर: स्थिर अनुपात के नियम के अनुसार, किसी भी यौगिक में तत्व द्रव्यमान के एक निश्चित अनुपात में ही संयोजित होते हैं। यहाँ सल्फर और ऑक्सीजन का अनुपात = 40 : 60 या 2 : 3 है। चूँकि 2 भाग सल्फर के लिए 3 भाग ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, अतः 20 g सल्फर के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता = (3/2) × 20 g = 30 g होगी।

4. कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) में कार्बन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात 3:4 है। कार्बन मोनोऑक्साइड बनाने के लिए 9 g कार्बन से ऑक्सीजन की कितनी मात्रा संयोजन करेगी?

उत्तर: स्थिर अनुपात के अनुसार 3 g कार्बन, 4 g ऑक्सीजन के साथ संयोजन करता है। इसलिए, 9 g कार्बन के साथ संयोजन करने वाली ऑक्सीजन की मात्रा = (4/3) × 9 g = 12 g होगी।

5. स्थिर अनुपात का नियम केवल यौगिकों के लिए सत्य होता है परंतु मिश्रणों के लिए नहीं। कारण दीजिए।

उत्तर: ऐसा इसलिए है क्योंकि किसी भी यौगिक का एक निश्चित रासायनिक सूत्र होता है और उसमें उपस्थित तत्व हमेशा द्रव्यमान के एक निश्चित अनुपात में ही संयोजित होते हैं। इसके विपरीत, मिश्रण में दो या दो से अधिक तत्व या यौगिक किसी भी अनुपात में मिले हो सकते हैं और उनका कोई निश्चित रासायनिक सूत्र नहीं होता।

6. दो विद्यार्थियों X और Y ने कॉपर और ऑक्सीजन को क्रमशः 4:1 और 8:2 के अनुपात में संयोजित करके कॉपर का ऑक्साइड बनाया। क्या उनके परिणाम स्थिर अनुपात के नियम की पुष्टि करते हैं? व्याख्या कीजिए।

उत्तर: हाँ, उनके परिणाम स्थिर अनुपात के नियम की पूर्णतः पुष्टि करते हैं। विद्यार्थी Y द्वारा प्राप्त अनुपात 8:2 है, जिसे यदि सरलतम रूप में लिखा जाए तो वह 4:1 ही होता है। यह दर्शाता है कि यौगिक को चाहे किसी भी तरीके से बनाया जाए, उसमें तत्वों के द्रव्यमान का अनुपात (4:1) सदैव स्थिर रहता है।

7. नीचे दिए गए अभिकथन एवं कारण पढ़िए और उनके संबंध में आगे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।

अभिकथन — 2 g हाइड्रोजन 16 g ऑक्सीजन के साथ संयोजित होकर 18 g जल का निर्माण करती है।

कारण — डाॅल्टन के परमाणु सिद्धांत के अनुसार परमाणु, द्रव्यमान के सरल पूर्णांक अनुपात में संयोजन कर यौगिक बनाते हैं।

(i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण, अभिकथन की सही व्याख्या है।

(ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण, अभिकथन की सही व्याख्या नहीं है।

(iii) अभिकथन सत्य है परंतु कारण असत्य है।

(iv) अभिकथन असत्य है परंतु कारण सत्य है।

उत्तर: (ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण, अभिकथन की सही व्याख्या नहीं है।

8. नाइट्रोजन में पाँच संयोजकता इलेक्ट्रॉन होते हैं। नाइट्रोजन अणु (N2) की संरचना आरेखित कीजिए।

उत्तर: नाइट्रोजन के संयोजकता कोश में 5 इलेक्ट्रॉन होते हैं। अपना अष्टक (8 इलेक्ट्रॉन) पूर्ण करके स्थायी होने के लिए प्रत्येक नाइट्रोजन परमाणु को 3 अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। अतः, दो नाइट्रोजन परमाणु आपस में 3 – 3 इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (सहभाजन) करते हैं। इलेक्ट्रॉनों के इन साझा युग्मों से दोनों परमाणुओं के मध्य ‘त्रि-आबंध’ (triple bond, N ≡ N) बनता है और N2 अणु का निर्माण होता है।

9. फ़्लोरीन का परमाणु क्रमांक 9 है। फ़्लोरीन अणु (F2) के निर्माण की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: फ़्लोरीन का परमाणु क्रमांक 9 है, अतः इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 7 होता है। इसके संयोजकता कोश में 7 इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते हैं। अपना अष्टक पूर्ण करने के लिए इसे केवल 1 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है। इसलिए, दो फ़्लोरीन परमाणु अपना एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा करते हैं। इलेक्ट्रॉनों के इस साझा युग्म के कारण दोनों फ़्लोरीन परमाणुओं के बीच एक ‘एकल सहसंयोजी आबंध’ (single covalent bond) बनता है, जिससे स्थायी फ़्लोरीन अणु (F2) का निर्माण होता है।

10. निम्नलिखित अणुओं का निर्माण दर्शाइए—

(i) कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)।

उत्तर: कार्बन डाइऑक्साइड (CO2): कार्बन (परमाणु क्रमांक 6) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 4 है, अतः इसके बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसे अपना अष्टक पूर्ण करने के लिए 4 अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। दूसरी ओर, ऑक्सीजन (परमाणु क्रमांक 8) का विन्यास 2, 6 है और इसे 2 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। अतः, एक कार्बन परमाणु दो ऑक्सीजन परमाणुओं के साथ दो-दो इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करता है, जिससे उनके मध्य द्वि-आबंध (O = C = O) बनता है।

(ii) हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S)।

उत्तर: हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S): सल्फर के बाहरी कोश में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं और इसे अपना अष्टक पूर्ण करने के लिए 2 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। हाइड्रोजन के पास केवल 1 इलेक्ट्रॉन होता है। अतः, एक सल्फर परमाणु दो हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ एक-एक इलेक्ट्रॉन का साझा करता है, जिससे दो एकल आबंध (H – S – H) बनते हैं और H2S अणु का निर्माण होता है।

(iii) अमोनिया (NH3)।

उत्तर: अमोनिया (NH3): नाइट्रोजन के संयोजकता कोश में 5 इलेक्ट्रॉन होते हैं। अपना अष्टक पूरा करने के लिए इसे 3 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। अतः, एक नाइट्रोजन परमाणु तीन हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा करता है, जिससे इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी द्वारा अमोनिया (NH3) अणु का निर्माण होता है।

11. नियॉन (परमाणु क्रमांक 10) अपने संयोजकता इलेक्ट्रॉनों को न तो स्थानांतरित करता है और न ही साझा करता है। व्याख्या कीजिए।

उत्तर: नियॉन का परमाणु क्रमांक 10 है, इसलिए इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8 होता है। इसके बाह्यतम (संयोजकता) कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं। चूँकि इसका अष्टक पहले से ही पूर्ण है, इसलिए यह रासायनिक रूप से पूर्णतः स्थायी होता है। स्थायित्व प्राप्त होने के कारण ही नियॉन को अन्य परमाणुओं के साथ संयोजन करने के लिए इलेक्ट्रॉनों का न तो स्थानांतरण करने की आवश्यकता होती है और न ही साझेदारी करने की।

12. ऑक्सीजन (O) किस प्रकार का आयन बनाएगा?

उत्तर: ऑक्सीजन (O) का परमाणु क्रमांक 8 है और इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 6 होता है। अपना अष्टक पूर्ण करके स्थायी होने के लिए इसे 2 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। अतः, यह 2 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करेगा और ऋणायन (O2) बनाएगा, जिसे ऑक्साइड आयन कहा जाता है।

13. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए—

मैग्नीशियम और क्लोरीन में से Mg2+ बनने के लिए मैग्नीशियम परमाणु दो इलेक्ट्रॉन त्याग सकता है। यद्यपि क्लोरीन परमाणु एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ___________ बनाता है। अब मैग्नीशियम का ___________ आयन और क्लोरीन के ___________ आयन संयोजित हो कर मैग्नीशियम क्लोराइड बनाते हैं।

उत्तर: मैग्नीशियम और क्लोरीन में से Mg2+ बनने के लिए मैग्नीशियम परमाणु दो इलेक्ट्रॉन त्याग सकता है। यद्यपि क्लोरीन परमाणु एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके क्लोराइड आयन (Cl) बनाता है। अब मैग्नीशियम का धनायन (Mg2+) आयन और क्लोरीन के ऋणायन (Cl) आयन संयोजित हो कर मैग्नीशियम क्लोराइड बनाते हैं।

14. पोटैशियम (K) और कैल्शियम (Ca) परमाणुओं के धनायनों के निर्माण तथा उनके संगत क्लोराइडों के निर्माण को चित्र द्वारा दर्शाइए।

उत्तर:

15. दर्शाइए कि सोडियम सल्फाइड (Na2S) का निर्माण किस प्रकार होता है?

उत्तर: सोडियम (Na) के संयोजकता (बाह्यतम) कोश में 1 इलेक्ट्रॉन होता है। वहीं दूसरी ओर, सल्फर (S) के संयोजकता कोश में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं और इसे अपना अष्टक पूर्ण करने के लिए 2 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। अतः, दो सोडियम परमाणु अपना एक-एक इलेक्ट्रॉन त्याग कर दो सोडियम धनायन (2Na+) बनाते हैं। एक सल्फर परमाणु इन दोनों त्यागे गए इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण कर लेता है और सल्फाइड ऋणायन (S2-) बनाता है। विपरीत आवेश वाले ये आयन (Na+ और S2-) एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं और स्थिर वैद्युत आकर्षण (आयनिक आबंध) द्वारा संयोजित होकर सोडियम सल्फाइड (Na2S) का निर्माण करते हैं।

क्या होता यदि… (Page No. 174)

1. हम परमाणुओं को प्रत्यक्ष रूप से देख पाते? यह वैज्ञानिकों के लिए किस प्रकार सहायक होता और किस प्रकार की चुनौतियाँ उत्पन्न करता?

उत्तर: वैज्ञानिकों के लिए यह इस प्रकार सहायक होता:

(i) रासायनिक आबंधों की प्रत्यक्ष जानकारी: वैज्ञानिक सीधे देख पाते कि परमाणु अपना अष्टक पूरा करने के लिए इलेक्ट्रॉनों का साझा (सहसंयोजी आबंध) या स्थानांतरण (आयनिक आबंध) कैसे करते हैं।

(ii) क्रिस्टल जालक और संरचना को समझना: आयनिक यौगिकों की 3-D क्रिस्टल जालक (lattice) संरचना और अणुओं की वास्तविक बनावट को सीधे देखा जा सकता। इससे नई दवाइयों और उन्नत सामग्रियों (advanced materials) के निर्माण व शोध में बहुत तेजी आती।

(iii) रासायनिक अभिक्रियाओं का सीधा अवलोकन: रासायनिक परिवर्तनों के दौरान पुराने आबंधों का टूटना और नए आबंधों का बनना, तथा अभिकारकों का उत्पादों में बदलना सीधे देखा जा सकता।

इससे निम्नलिखित चुनौतियाँ उत्पन्न होतीं:

(i) अत्यधिक संख्या: किसी भी पदार्थ के एक बहुत ही छोटे से कण (जैसे नमक के एक छोटे दाने या पानी की एक बूंद) में अरबों-खरबों परमाणु होते हैं। एक साथ इतनी विशाल संख्या में परमाणुओं को देखना बेहद जटिल और दिमाग के लिए भ्रामक होता।

(ii) निरंतर और तीव्र गति: परमाणु कभी स्थिर नहीं रहते, वे हर समय अत्यधिक तीव्र गति से कंपन या विचरण करते रहते हैं। इस तीव्र गति के कारण उन्हें स्पष्ट रूप से देखना लगभग असंभव होता; वे हमारी आँखों को केवल एक धुंधले रूप (blur) में ही दिखाई देते।

(iii) दृष्टिकोण और आकार की समस्या: यदि इंसान की आँखें परमाणुओं (जो नैनोमीटर से भी बहुत छोटे होते हैं) को देखने के लिए अनुकूलित हो जातीं, तो हमारे लिए सामान्य आकार की दैनिक वस्तुओं (मैक्रोस्कोपिक दुनिया) को देखना और उन पर ध्यान केंद्रित करना बहुत कठिन हो जाता।

सोचिए और बताइए (Page No. 177, 179 and 180)

1. निम्नलिखित के नाम लिखिए:

(i) CO2.

उत्तर: कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon dioxide)।

(ii) NO2.

उत्तर: नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (Nitrogen dioxide)।

(iii) SF6.

उत्तर: सल्फर हेक्साफ्लोराइड (Sulfur hexafluoride)।

(iv) PCl3.

उत्तर: फॉस्फोरस ट्राइक्लोराइड (Phosphorus trichloride)।

2. निम्नलिखित के सूत्र लिखिए:

(i) सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट।

उत्तर: NaHCO₃.

(ii) सल्फर डाइऑक्साइड।

उत्तर: SO₂.

(iii) फेरिक क्लोराइड।

उत्तर: FeCl₃.

(iv) क्यूप्रस ऑक्साइड।

उत्तर: Cu₂O.

3. निम्नलिखित आयनों के युग्मों से निर्मित यौगिकों के सूत्र लिखिए—

(i) Fe3+ और OH.

उत्तर: Fe(OH)₃.

(ii) K+ और CO2–3.

उत्तर: K₂CO₃.

4. किसी ठोस यौगिक में किस प्रकार का रासायनिक आबंध होगा जो ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करता है परंतु जल में घुलने पर विद्युत का चालन करता है?

उत्तर: ऐसे ठोस यौगिक में आयनिक आबंध (Ionic bond) होगा। आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते क्योंकि उनके आयन प्रबल स्थिर वैद्युत आकर्षण बलों द्वारा निश्चित स्थानों पर मजबूती से बंधे रहते हैं। परंतु जल में घुलने पर ये आयन अलग होकर मुक्त हो जाते हैं, जिसके कारण विलयन विद्युत का चालन करने लगता है।

5. धातु X, जिसके संयोजकता कोश (M कोश) में दो इलेक्ट्रॉन हैं, ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर एक यौगिक बनाती है जो जल में अल्प घुलनशील है। इसके लिए निम्न का पूर्वानुमान लगाइए।

(i) सूत्र।

उत्तर: सूत्र: धातु X के बाह्यतम (M) कोश में 2 इलेक्ट्रॉन हैं, अतः अपना अष्टक पूरा करने के लिए यह 2 इलेक्ट्रॉन त्यागेगा और इसकी संयोजकता 2 होगी (X²⁺)। वहीं, ऑक्सीजन को अपना अष्टक पूरा करने के लिए 2 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है (O²⁻)। चूँकि दोनों की संयोजकता 2 है, अतः यौगिक का सूत्र XO होगा।

(ii) आबंध के प्रकार।

उत्तर: आबंध के प्रकार: धातु X द्वारा इलेक्ट्रॉनों के त्यागने और ऑक्सीजन द्वारा उन्हें ग्रहण करने (इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण) के कारण इनके बीच आयनिक आबंध बनेगा।

(iii) उसके जलीय विलयन की वैद्युत चालकता।

उत्तर: उसके जलीय विलयन की वैद्युत चालकता: चूँकि यह एक आयनिक यौगिक है, इसलिए इसका जलीय विलयन विद्युत का सुचालक होगा (अर्थात् यह विद्युत का चालन करेगा), क्योंकि जल में इसके आयन गति करने के लिए मुक्त हो जाएंगे।

6. नाइट्रिक अम्ल (HNO3) का आण्विक द्रव्यमान ज्ञात कीजिए। (परमाणु द्रव्यमान – H = 1 u; N = 14 u; O = 16 u)

उत्तर: नाइट्रिक अम्ल (HNO3) का आण्विक द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए इसमें उपस्थित सभी परमाणुओं (1 हाइड्रोजन, 1 नाइट्रोजन और 3 ऑक्सीजन) के द्रव्यमान को जोड़ेंगे: = (H का परमाणु द्रव्यमान × 1) + (N का परमाणु द्रव्यमान × 1) + (O का परमाणु द्रव्यमान × 3)

= (1 u × 1) + (14 u × 1) + (16 u × 3)

= 1 u + 14 u + 48 u = 63 u.

7. मेथेन (CH4) का आण्विक द्रव्यमान ज्ञात कीजिए। (परमाणु द्रव्यमान— C = 12 u; H = 1 u)

उत्तर: मेथेन (CH4) का आण्विक द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए इसमें उपस्थित 1 कार्बन और 4 हाइड्रोजन के परमाणुओं के द्रव्यमान को जोड़ेंगे: = (C का परमाणु द्रव्यमान × 1) + (H का परमाणु द्रव्यमान × 4)

= (12 u × 1) + (1 u × 4)

= 12 u + 4 u = 16 u.

8. पोटैशियम क्लोराइड (KCl) का सूत्र इकाई द्रव्यमान ज्ञात कीजिए। (परमाणु द्रव्यमान — K = 39 u; Cl = 35.5 u)।

उत्तर: पोटैशियम क्लोराइड (KCl) का सूत्र इकाई द्रव्यमान इसमें उपस्थित पोटैशियम (K) और क्लोरीन (Cl) के परमाणु द्रव्यमानों का योग होगा: = (K का परमाणु द्रव्यमान × 1) + (Cl का परमाणु द्रव्यमान × 1) = 39 u + 35.5 u = 74.5 u।

9. मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड Mg(OH)2 का सूत्र इकाई द्रव्यमान ज्ञात कीजिए। (परमाणु द्रव्यमान — Mg = 24 u; O = 16 u; H = 1 u)।

उत्तर: मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड Mg(OH)2 का सूत्र इकाई द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए इसमें उपस्थित मैग्नीशियम (Mg) के एक परमाणु तथा ऑक्सीजन (O) व हाइड्रोजन (H) के दो-दो परमाणुओं (क्योंकि कोष्ठक के बाहर 2 है) के द्रव्यमानों को जोड़ेंगे: = (Mg का परमाणु द्रव्यमान × 1) + 2 × (O का परमाणु द्रव्यमान + H का परमाणु द्रव्यमान) = 24 u + 2 × (16 u + 1 u) = 24 u + 2 × (17 u) = 24 u + 34 u = 58 u।

अभ्यास प्रश्न

1. किसी एक तत्त्व (क) के तीसरे कोश में एक इलेक्ट्रॉन है। एक अन्य तत्त्व (ख) है जिसके दूसरे कोश में छह इलेक्ट्रॉन हैं।

(i) स्थायित्व प्राप्त करने के लिए ‘क’ कितने इलेक्ट्रॉनों का त्याग करेगा अथवा ग्रहण करेगा?

उत्तर: ‘क’ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,8,1 है। अपना अष्टक पूर्ण करने (स्थायित्व प्राप्त करने) के लिए यह 1 इलेक्ट्रॉन का त्याग करेगा।

(ii) वह किस प्रकार का आयन बनाएगा?

उत्तर: इलेक्ट्रॉन त्यागने के कारण यह धनायन (cation) बनाएगा।

(iii) स्थायित्व प्राप्त करने के लिए ‘ख’ कितने इलेक्ट्रॉनों का त्याग करेगा अथवा ग्रहण करेगा?

उत्तर: ‘ख’ का विन्यास 2,6 है। स्थायित्व प्राप्त करने के लिए यह 2 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करेगा।

(iv) वह किस प्रकार का आयन बनाएगा?

उत्तर: इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने के कारण यह ऋणायन (anion) बनाएगा।

(v) ‘क’ और ‘ख’ के संयोजित होने पर किस प्रकार का आबंध बनेगा?

उत्तर: इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण के कारण इनके मध्य आयनिक आबंध बनेगा।

(vi) उनके संयोजन से निर्मित यौगिक का सूत्र क्या होगा?

उत्तर: चूँकि ‘क’ की संयोजकता 1 है और ‘ख’ की 2 है, अतः सूत्र क₂ख (K₂O के समान) होगा।

2. किसी तत्त्व ‘च’ के बाह्यतम कोश में छह इलेक्ट्रॉन हैं और वह एक द्विपरमाणुक अणु बनाता है।

(i) ऐसा क्यों हुआ होगा?

उत्तर: अपना अष्टक पूर्ण करने और स्थायी होने के लिए ‘च’ के दो परमाणुओं ने आपस में 2-2 इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी की होगी, इसलिए यह द्विपरमाणुक अणु बनाता है।

(ii) वह किस प्रकार का आबंध बनाएगा?

उत्तर: 2-2 इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से सहसंयोजी द्वि-आबंध (double covalent bond) बनेगा।

(iii) उसके द्वारा निर्मित अणु की संरचना आरेखित कीजिए।

उत्तर: च = च (जैसे O = O)।

(iv) एक अन्य तत्त्व ‘छ’ के दूसरे कोश में दो इलेक्ट्रॉन हैं। उस अणु की संरचना आरेखित कीजिए जो तत्त्व ‘च’ और ‘छ’ के संयोजन से बनेगा।

उत्तर: ‘छ’ की संयोजकता 2 है (जैसे Be) और ‘च’ की भी 2 है (जैसे O)। अतः यह दोनों आपस में 2 इलेक्ट्रॉनों का लेन-देन करके आयनिक यौगिक बनाएँगे, जिसका सूत्र छच होगा।

3. आप एक नवीन आयनिक यौगिक की अभिकल्पना करना चाहते हैं जिसमें कुल धन आवेश 6+ है और कुल ऋण आवेश 6– है। निम्नलिखित में से कौन-सा संयोजन आयनों की सही संख्या दर्शाता है?

(i) 2 Al3+ और 3 Cl

(ii) 3 Mg2+ और 1 PO43–

(iii) 2 Fe3+ और 3 O2–

(iv) 3 Ca2+ और 2 SO42–

उत्तर: (iii) 2 Fe3+ और 3 O2–

क्योंकि: 2 × +3 = +6 और 3 × -2 = -6 होता है)।

4. सही कथन (नों) का चयन कीजिए और गलत कथन (नों) को सही कीजिए।

(i) तत्त्व अणुओं से बनते हैं और यौगिक परमाणुओं से बनते हैं।

उत्तर (गलत): सही कथन — तत्त्व एक ही प्रकार के परमाणुओं से बनते हैं और यौगिक भिन्न प्रकार के परमाणुओं (या अणुओं) के संयोजन से बनते हैं।

(ii) किसी यौगिक का अणु सदैव एक ही प्रकार के दो अथवा अधिक परमाणुओं से मिलकर बनता है।

उत्तर: (गलत): सही कथन — किसी यौगिक का अणु सदैव ‘भिन्न’ प्रकार के दो अथवा अधिक परमाणुओं से मिलकर बनता है।

(iii) नाइट्रोजन गैस के एक अणु में तीन नाइट्रोजन परमाणु होते हैं।

उत्तर: (गलत): सही कथन — नाइट्रोजन गैस (N₂) के एक अणु में केवल ‘दो’ नाइट्रोजन परमाणु होते हैं।

(iv) जल दो हाइड्रोजन परमाणुओं से मिलकर बना है जो एक ऑक्सीजन परमाणु से सहसंयोजी रूप से आबंधित होते हैं।

उत्तर: यह कथन सही है।

5. निम्नलिखित यौगिकों के रासायनिक सूत्र लिखिए।

(i) ऐलुमिनियम नाइट्रेट।

उत्तर: Al(NO₃)₃.

(ii) कैल्सियम ऑक्साइड।

उत्तर: CaO.

(iii) फेरिक ऑक्साइड।

उत्तर: Fe₂O₃.

6. आयनों के निम्नलिखित युग्मों से निर्मित यौगिकों के सूत्र लिखिए।

(i) Ca2+ और Br.

उत्तर: CaBr₂.

(ii) Al3+ और CO32–.

उत्तर: Al₂(CO₃)₃.

(iii) K+ और SO42–.

उत्तर: K₂SO₄

(iv) NH4+ और Cl.

उत्तर: NH₄Cl.

7. चित्र 9.18 में निम्नलिखित में से कौन Cl आयन को सही प्रकार से निरूपित कर रहा है (क्लोरीन की परमाणु संख्या 17 है)?

उत्तर: (iii)

कारण:

(i) क्लोरीन (Cl) की परमाणु संख्या 17 है।

(ii) Cl⁻ आयन बनने पर यह 1 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है।

(iii) इसलिए Cl⁻ में कुल 18 इलेक्ट्रॉन होते हैं।

(iv) इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 8 होता है।

(v) चित्र (iii) में बाहरी (तीसरे) कोश में 8 इलेक्ट्रॉन दर्शाए गए हैं, इसलिए वही Cl⁻ आयन का सही निरूपण है।

8. निम्नलिखित पदार्थों का सूत्र इकाई द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।

(i) अमोनियम नाइट्रेट (NH4NO3) जिसका उपयोग नाइट्रोजन उर्वरक के रूप में किया जाता है जो पौधों की वृद्धि हेतु आवश्यक है।

उत्तर: (14 + 4×1 + 14 + 3×16) = 14 + 4 + 14 + 48 = 80 u।

(ii) फॉस्फोरिक अम्ल (H3PO4) जिसका उपयोग फॉस्फेट उर्वरक और अपमार्जकों के निर्माण में किया जाता है।

उत्तर: (3×1 + 31 + 4×16) = 3 + 31 + 64 = 98 u।

(iii) सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (NaHCO3) जिसका उपयोग अम्लता को कम करता है और पाचन में सहायता करता है।

उत्तर: (23 + 1 + 12 + 3×16) = 23 + 1 + 12 + 48 = 84 u।

9. उन यौगिकों के सूत्र लिखिए जो निम्नलिखित की परस्पर अभिक्रिया द्वारा बनते हैं—

(i) मैग्नीशियम और नाइट्रोजन।

उत्तर: Mg₃N₂.

(ii) लीथियम और नाइट्रोजन।

उत्तर: Li₃N.

(iii) सोडियम और सल्फर।

उत्तर: Na₂S.

(iv) ऐलुमिनियम और ऑक्सीजन।

उत्तर: Al₂O₃.

10. बाईं ओर दिए गए धनायनों और शीर्ष पर दिए गए ऋणायनों से निर्मित यौगिकों के सूत्र लिखकर तालिका 9.3 को पूर्ण कीजिए। LiNO3 एक उदाहरण के रूप में दिया गया है।

NO3SO42-PO42-
NH4+
Li+LiNO3
Al3+
Cu2+

उत्तर: 

NO3SO42-PO42-
NH4+NH₄NO₃(NH₄)₂SO₄(NH₄)₃PO₄
Li+LiNO3Li₂SO₄Li₃PO₄
Al3+Al(NO₃)₃Al₂(SO₄)₃AlPO₄
Cu2+Cu(NO₃)₂CuSO₄Cu₃(PO₄)₂

11. 5.3 g सोडियम कार्बोनेट और 6.0 g ऐसीटिक अम्ल परस्पर अभिक्रिया द्वारा 2.2 g कार्बन डाइऑक्साइड, 0.9 g जल और 8.2 g सोडियम ऐसीटेट बनाते हैं। जाँच कीजिए कि क्या इसमें द्रव्यमान संरक्षण के नियम का अनुपालन हो रहा है।

उत्तर: अभिकारकों का कुल द्रव्यमान = 5.3 g + 6.0 g = 11.3 g

उत्पादों का कुल द्रव्यमान = 2.2 g + 0.9 g + 8.2 g = 11.3 g

चूँकि अभिकारकों का कुल द्रव्यमान, उत्पादों के कुल द्रव्यमान के बराबर है, अतः हाँ, इसमें द्रव्यमान संरक्षण के नियम का पूर्णतः अनुपालन हो रहा है।

12. यदि किसी स्पीशीज में 11 प्रोटॉन, 12 न्यूट्रॉन और 10 इलेक्ट्रॉन हैं, तो

(i) उसका परमाणु क्रमांक और द्रव्यमान संख्या क्या होंगे?

उत्तर: परमाणु क्रमांक प्रोटॉनों की संख्या के बराबर होता है, इसलिए इसका परमाणु क्रमांक 11 होगा। द्रव्यमान संख्या, प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों के योग के बराबर होती है, इसलिए यह 23 (11 + 12) होगी।

(ii) क्या यह उदासीन है, धनायन है अथवा ऋणायन है? व्याख्या कीजिए।

उत्तर: यह एक धनायन है। चूँकि इसमें 11 धनावेशित प्रोटॉन हैं और केवल 10 ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन हैं, जिसका अर्थ है कि इसने अपना एक इलेक्ट्रॉन त्याग दिया है। इस कारण इस स्पीशीज पर एक इकाई धनावेश आ गया है।

(iii) इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।

उत्तर: चूँकि इसमें 10 इलेक्ट्रॉन हैं, इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8 होगा।

(iv) स्पीशीज का नाम लिखिए।

उत्तर: 11 प्रोटॉन वाला तत्त्व सोडियम (Na) है, और एक इलेक्ट्रॉन त्यागने के कारण यह सोडियम धनायन (Na⁺) है।

13. दो तत्त्वों, ‘क’ और ‘ख’ के विन्यास निम्नलिखित हैं—

(क) 2, 8, 5

(ख) 2, 8, 7

(i) कौन-सा तत्त्व अधिक अभिक्रियाशील है?

उत्तर: तत्त्व ‘ख’ अधिक अभिक्रियाशील है क्योंकि इसके संयोजकता कोश में 7 इलेक्ट्रॉन हैं और इसे अपना स्थायी अष्टक पूर्ण करने के लिए केवल 1 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता है।

(ii) जब ‘क’ और ‘ख’ संयोजन करेंगे तब वे आयनिक आबंध बनाएंगे अथवा सहसंयोजी आबंध? इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण अथवा साझेदारी के उपयोग द्वारा समझाइए।

उत्तर: वे इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी द्वारा सहसंयोजी आबंध बनाएंगे। चूँकि दोनों तत्त्वों के बाह्यतम कोश में 4 से अधिक इलेक्ट्रॉन हैं, इसलिए वे स्थायी इलेक्ट्रोनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रॉनों का साझा करेंगे।

(iii) उनसे निर्मित यौगिक के सूत्र का पूर्वानुमान कीजिए।

उत्तर: तत्त्व ‘क’ की संयोजकता 3 है (8 – 5 = 3) और ‘ख’ की संयोजकता 1 है (8 – 7 = 1)। इनकी संयोजकता का तिर्यक (criss-cross) करने पर सूत्र कख₃ प्राप्त होगा।

14. नीचे दिए गए अभिकथन एवं कारण को पढ़िए और उनके संबंध में आगे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।

अभिकथन — गलित अवस्था में कॉपर सल्फेट विद्युत् का चालन करता है परंतु ठोस अवस्था में नहीं।

कारण— जालक की गलित अवस्था में कॉपर और सल्फेट आयनों की स्थिति नियत होती है जबकि ठोस अवस्था में वे स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं।

सही विकल्प का चयन कीजिए—

(i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण, अभिकथन की सही व्याख्या है।

(ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं परंतु कारण, अभिकथन की सही व्याख्या नहीं है।

(iii) अभिकथन सत्य है, परंतु कारण असत्य है।

(iv) अभिकथन असत्य है, परंतु कारण सत्य है।

उत्तर: (iii) अभिकथन सत्य है, परंतु कारण असत्य है।

15. 27Al, 80Br और 201Hg2+ कणों में क्रमशः 13, 35 और 80 प्रोटॉन हैं। इनमें कितने इलेक्ट्रॉन और न्यूट्रॉन हैं?

उत्तर: (i) 27Al (उदासीन परमाणु): चूँकि यह उदासीन है, इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों के बराबर यानी 13 होगी। न्यूट्रॉनों की संख्या इसकी द्रव्यमान संख्या और प्रोटॉनों के अंतर (27 – 13) के बराबर, यानी 14 होगी।

(ii) 80Br (ऋणायन): एक इकाई ऋण आवेश का अर्थ है कि इसमें प्रोटॉनों की तुलना में एक इलेक्ट्रॉन अधिक है। अतः इलेक्ट्रॉनों की संख्या 36 (35 + 1) होगी। न्यूट्रॉनों की संख्या (80 – 35) = 45 होगी।

(iii) 201Hg2+ (धनायन): दो इकाई धन आवेश का अर्थ है कि इसने अपने दो इलेक्ट्रॉन त्याग दिए हैं। अतः इलेक्ट्रॉनों की संख्या 78 (80 – 2) होगी। न्यूट्रॉनों की संख्या (201 – 80) = 121 होगी।

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