NCERT Class 9 Science Chapter 10 ध्वनि तरंगें — अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग

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NCERT Class 9 Science Chapter 10 ध्वनि तरंगें — अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग

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Chapter: 10

TEXTUAL SOLUTIONS

चिंतन कीजिए (Page No. 184)

1. दो अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष स्टेशन की यांत्रिक भुजा में सुधार करने के लिए अंतरिक्ष में साथ-साथ चल रहे हैं। क्या वे एक-दूसरे से बातचीत कर सकते हैं और धातु की वस्तुओं के परस्पर टकराने की ध्वनि वैसे ही सुन सकते हैं जैसे वे पृथ्वी पर सुनते हैं?

उत्तर: नहीं, वे एक-दूसरे से सीधे बातचीत नहीं कर सकते और न ही धातु की वस्तुओं के टकराने की ध्वनि को पृथ्वी की तरह सुन सकते हैं। इसका कारण यह है कि बाह्य अंतरिक्ष में लगभग निर्वात (vacuum) होता है, और ध्वनि निर्वात में संचरित नहीं हो सकती है। ध्वनि को गमन करने के लिए किसी माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) की आवश्यकता होती है। आपस में बातचीत करने के लिए अंतरिक्ष यात्री अपने अंतरिक्ष परिधान (space suit) में लगी विशेष युक्तियों का उपयोग करते हैं।

2. अधिकांश चमगादड़ रात्रि के अंधेरे में अपने शिकार का पता लगाने हेतु ध्वनि का उपयोग कैसे करते हैं?

उत्तर: अधिकांश चमगादड़ पराश्रव्य तरंगों (ultrasonic waves) के छोटे-छोटे स्पंद उत्सर्जित करते हैं। जब ये पराश्रव्य तरंगें आस-पास की वस्तुओं या शिकार से टकराकर परावर्तित होती हैं (वापस लौटती हैं), तो चमगादड़ इन प्रतिध्वनियों की अनुभूति कर लेते हैं। इस परावर्तित ध्वनि की सहायता से वे अंधेरे में भी बाधाओं और शिकार की स्थिति का सटीक पता लगा लेते हैं। ध्वनि तरंगों की सहायता से वस्तुओं का स्थान ज्ञात करने की इस क्षमता को ‘प्रतिध्वनि द्वारा स्थान निर्धारण’ (echolocation) कहा जाता है।

सोचिए और बताइए (Page No. 186, 188, 191, 192, 193 and 195)

1. ध्वनि उत्पन्न करने के विभिन्न साधनों की खोज कीजिए।

उत्तर: ध्वनि हमेशा वस्तुओं के कंपन (Vibration) द्वारा उत्पन्न होती है।

ध्वनि उत्पन्न करने के विभिन्न साधन निम्नलिखित हैं:

(i) आघात या चोट मारकर: जैसे स्वरित्र द्विभुज (Tuning fork) को रबर पैड पर मारना या मंजीरा को आपस में टकराना।

(ii) खींचकर छोड़ने से: जैसे खींचे हुए रबर बैंड या तार को खींचकर छोड़ना जिससे उसमें कंपन उत्पन्न होता है।

(iii) फूँक मारने से: जैसे बाँसुरी में फूँक मारने पर उसकी खोखली नली के भीतर के वायु-स्तंभ में कंपन होता है।

(iv) रगड़ने से: जैसे टिड्डे और झींगुर जैसे कीट अपने पंखों या टाँगों को आपस में रगड़कर ध्वनि उत्पन्न करते हैं।

(v) वाक् तंतुओं के कंपन से: मनुष्यों और कुछ जंतुओं के गले (वाक् यंत्र) में मौजूद वाक् तंतुओं (vocal cords) के कंपन द्वारा।

2. विभिन्न प्रकार के संगीत वाद्ययंत्रों की एक सूची तैयार कीजिए और उनके कंपन करने वाले उन भागों की पहचान कीजिए जो ध्वनि उत्पन्न करते हैं।

उत्तर: विभिन्न वाद्ययंत्रों की सूची और उनके कंपन करने वाले भाग (जो ध्वनि उत्पन्न करते हैं) इस प्रकार हैं:

(i) बाँसुरी (Flute): खोखली नली के भीतर का वायु-स्तंभ (Air column)।

(ii) सितार, वीणा और सारंगी: इनमें लगे तने हुए तार (Stretched strings)।

(iii) तबला और मृदंगम: ढोल के ऊपर तनी हुई झिल्ली या पटल (तथा इसके केंद्र पर लगी ‘स्याही’ जो कंपन को परिवर्तित करती है)।

(iv) मंजीरा: धातु से बनी प्लेटें (जिन्हें आपस में टकराने पर वे कंपन करती हैं)।

(v) एकतारा: इसमें लगा तना हुआ तार।

3. नीचे दिए गए अभिकथन एवं कारण को पढ़िए और उनके संबंध में आगे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।

अभिकथन— किसी बंद जार में से अधिकांश वायु निकाल देने के पश्चात हम इसमें बजती हुई घंटी की ध्वनि नहीं सुन पाते हैं।

कारण— ध्वनि को संचरण हेतु एक माध्यम की आवश्यकता होती है।

(i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं, परंतु कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं करता है।

(ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं, और कारण अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

(iii) अभिकथन सत्य है, परंतु कारण असत्य है।

(iv) अभिकथन असत्य है, परंतु कारण सत्य है।

उत्तर: (ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं, और कारण अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

4. नीचे दिए गए अभिकथन एवं कारण को पढ़िए और उनके संबंध में आगे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।

अभिकथन— संपीडन एवं विरलन माध्यम में गति करते हैं।

कारण — माध्यम के कण तरंग के साथ लगातार आगे बढ़ते रहते हैं।

(i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं, परंतु कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं करता है।

(ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

(iii) अभिकथन सत्य है, परंतु कारण असत्य है।

(iv) अभिकथन असत्य है, परंतु कारण सत्य है।

उत्तर: (iii) अभिकथन सत्य है, परंतु कारण असत्य है।

5. जब ध्वनि किसी वस्तु से आपके कान तक पहुँचती है तो वास्तव में निम्नलिखित में से आपके कान तक क्या पहुँचता है?

(i) स्वरित वस्तु के समीप के वायु कण।

(ii) ध्वनि तरंगों द्वारा वहन ऊर्जा।

(iii) स्वरित वस्तु का पदार्थ।

(iv) संपीड़ित वायु की निरंतर धारा।

उत्तर: (ii) ध्वनि तरंगों द्वारा वहन ऊर्जा।

6. दो ध्वनि तरंगों के लिए माध्यम का घनत्व परिवर्तन चित्र 10.17 (क) और (ख) में दर्शाया गया है। इस पर संपीडन और विरलन को C एवं R द्वारा अंकित कीजिए। चित्र 10.17 (ग) और (घ) में दिए गए आलेख में अक्षों को अंकित कीजिए और चित्र 10.17 (क) और (ख) के संगत वक्र खींचिए।

उत्तर: चित्र 10.17 (क) तथा (ख) में जहाँ माध्यम के कण अधिक पास-पास हैं, वहाँ C (संपीड़न) तथा जहाँ कण दूर-दूर हैं, वहाँ R (विरलन) अंकित किया गया है।

इसके बाद चित्र 10.17 (ग) तथा (घ) में दिए गए अनुसार घनत्व परिवर्तन का ग्राफ बनाया गया है।

7. क्रियाकलाप 10.1 को पहले एक बार मोटे रबड़ बैंड के साथ इसके पश्चात पतले रबड़ बैंड के साथ दोहराइए। क्या पतला रबड़ बैंड मोटे रबड़ बैंड की तुलना में अधिक तीव्र कंपन करता है? यदि हाँ, तब पतले रबड़ बैंड द्वारा उत्पन्न ध्वनि की आवृत्ति और आवर्तकाल मोटे रबड़ बैंड द्वारा उत्पन्न ध्वनि की आवृत्ति एवं आवर्तकाल से किस प्रकार भिन्न होते हैं?

उत्तर: हाँ, पतला रबड़ बैंड मोटे रबड़ बैंड की तुलना में अधिक तीव्रता (तेजी) से कंपन करता है। चूँकि पतले रबड़ बैंड के कंपन की दर अधिक होती है, इसलिए इसके द्वारा उत्पन्न ध्वनि की आवृत्ति (frequency) अधिक होगी। पुस्तक के अनुसार, आवर्तकाल (time period) और आवृत्ति एक-दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं (T = 1/ν)। 

अतः उच्च आवृत्ति होने के कारण पतले रबड़ बैंड का आवर्तकाल, मोटे रबड़ बैंड की तुलना में कम होगा।

8. यदि वायु से भरी एक लंबी नली के दोलायमान पिस्टन द्वारा उत्पन्न ध्वनि तरंग की आवृत्ति 20 Hz है तो पिस्टन प्रति मिनट कितने दोलन पूर्ण करता है?

उत्तर: तरंग की आवृत्ति 20 Hz होने का अर्थ है कि पिस्टन 1 सेकंड में 20 दोलन पूर्ण करता है (चूँकि आवृत्ति प्रति सेकंड दोलनों की संख्या होती है)। अतः, 1 मिनट (60 सेकंड) में पूर्ण किए गए दोलनों की संख्या = 20 × 60 = 1200 दोलन होगी।

9. बताइए चित्र 10.19 में आलेख द्वारा निरूपित ध्वनि तरंग का अर्ध तरंगदैर्ध्य क्या है?

उत्तर: चित्र 10.19 के ग्राफ में क्षैतिज (X) अक्ष पर दूरी (cm में) 0, 1.5, 3.0 और 4.5 अंकित है। एक पूर्ण तरंगदैर्ध्य (एक पूरा दोलन) 0 से 3.0 cm पर पूरा होता है, इसलिए पूर्ण तरंगदैर्ध्य (λ) = 3.0 cm है। अतः, इस ध्वनि तरंग का अर्ध तरंगदैर्ध्य (λ/2) = 3.0/2 = 1.5 cm होगा।

क्या होता यदि… (Page No. 196)

1. वायु में ध्वनि की चाल आवृत्ति पर निर्भर करती तो क्या तब भी गायक द्वारा वाद्ययंत्रों के साथ प्रस्तुत संगीत कानों को सुखद लगता है? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क दीजिए।

उत्तर: यदि वायु में ध्वनि की चाल आवृत्ति पर निर्भर करती, तो गायक द्वारा वाद्ययंत्रों के साथ प्रस्तुत संगीत कानों को सुखद नहीं लगता।

कारण: वास्तव में वायु जैसे माध्यम में ध्वनि की चाल केवल माध्यम पर निर्भर करती है, ध्वनि के स्रोत अथवा उसकी आवृत्ति (frequency) पर नहीं। इसी कारण गायक और विभिन्न वाद्ययंत्रों से निकलने वाली सभी ध्वनियाँ समान चाल से चलकर श्रोता के कानों तक एक साथ पहुँचती हैं।

यदि ध्वनि की चाल आवृत्ति पर निर्भर करने लगती, तो अलग-अलग वाद्ययंत्रों और गायक के स्वरों (जिनकी आवृत्तियाँ अलग-अलग होती हैं) की गति भी अलग-अलग हो जाती। इसके परिणामस्वरूप, मंच से एक ही समय पर उत्पन्न होने वाली ध्वनियाँ श्रोता के कानों तक अलग-अलग समय पर पहुँचतीं। इससे संगीत की पूरी लय, तालमेल और सामंजस्य (harmony) बिगड़ जाता और वह संगीत मधुर लगने के बजाय एकदम बेसुरा और शोर जैसा प्रतीत होता।

सोचिए और बताइए (Page No. 197 and 201)

1. तालिका 10.1 वायुमंडलीय दाब पर कुछ माध्यमों में ध्वनि की चाल दर्शाती है।

अवस्थापदार्थ/माध्यमलगभग चाल
ठोसस्टील5000 m s⁻¹
द्रवजल1500 m s⁻¹
गैसवायु340 m s⁻¹

निम्न अनुपात ज्ञात करके भिन्न-भिन्न माध्यमों में ध्वनि के चालों की तुलना कीजिए।

(i) वायु में ध्वनि की चाल के सापेक्ष जल में ध्वनि की चाल।

(ii) जल में ध्वनि की चाल के सापेक्ष स्टील में ध्वनि की चाल।

उत्तर: तालिका 10.1 के अनुसार ध्वनि की चाल इस प्रकार है:

वायु में ध्वनि की चाल = 340 m/s

जल में ध्वनि की चाल = 1500 m/s

स्टील (ठोस) में ध्वनि की चाल = 5000 m/s

(i) वायु के सापेक्ष जल में ध्वनि की चाल का अनुपात: अनुपात = (जल में ध्वनि की चाल)/(वायु में ध्वनि की चाल) = 1500/340 = 4.41 (लगभग)।

जल में ध्वनि की चाल वायु की तुलना में लगभग 4.4 गुना अधिक होती है।

(ii) जल के सापेक्ष स्टील में ध्वनि की चाल का अनुपात: अनुपात = (स्टील में ध्वनि की चाल)/(जल में ध्वनि की चाल) = 5000/1500 = 3.33 (लगभग)।

स्टील में ध्वनि की चाल जल की तुलना में लगभग 3.3 गुना अधिक होती है।

2. किसी परिसर की स्टील की बड़ी सीधी बाड़ के साथ दो मित्र एक-दूसरे से 340 m की दूरी पर खड़े हैं। गुंजन बाड़ पर अपना कान रखती है और उसका मित्र धातु की किसी वस्तु से बाड़ पर प्रहार करता है। तालिका 10.1 में दी गई स्टील और वायु में ध्वनि की चाल के मानों का उपयोग करके गुंजन तक वायु और स्टील के माध्यम से पहुँचने वाली ध्वनि के मध्य के समय अंतराल का परिकलन कीजिए। क्या इसके लिए दोनों ध्वनियों के मध्य अंतर करना संभव होगा? (दो ध्वनियों को पृथक-पृथक सुनने हेतु उनके मध्य कम-से-कम 0.1 s का समय अंतराल होना चाहिए।)

उत्तर: दिया गया है:

दोनों मित्रों के बीच की दूरी (d) = 340 m

स्टील में ध्वनि की चाल (vs) = 5000 m/s

वायु में ध्वनि की चाल (va) = 340 m/s

(i) स्टील के माध्यम से गुंजन तक ध्वनि पहुँचने में लगा समय (ts): समय = दूरी/चाल ts = 340/5000 = 0.068 सेकंड

(ii) वायु के माध्यम से गुंजन तक ध्वनि पहुँचने में लगा समय (ta): समय = दूरी/चाल ta = 340/340 = 1 सेकंड

(iii) दोनों ध्वनियों के पहुँचने के मध्य समय अंतराल: समय अंतराल = ta − ts = 1 – 0.068 = 0.932 सेकंड

हाँ, दोनों ध्वनियों के मध्य अंतर करना (उन्हें अलग-अलग सुनना) पूरी तरह संभव होगा। इसका कारण यह है कि दोनों ध्वनियों के पहुँचने के बीच का समय अंतराल 0.932 सेकंड है, जो हमारे कानों द्वारा दो ध्वनियों को अलग-अलग पहचानने के लिए आवश्यक न्यूनतम समय (0.1 सेकंड) से काफी अधिक है।

3. किसी प्रयोग में यह आवश्यक है कि प्रतिध्वनि ध्वनि उत्सर्जन के कम-से-कम 0.2 सेकंड पश्चात् सुनाई दे। परावर्तक सतह को न्यूनतम कितनी दूरी पर रखा जाना चाहिए? इसके लिए ध्वनि की चाल को आप 343 m s⁻¹ मान लीजिए।

उत्तर: दिया गया है:

प्रतिध्वनि सुनने के लिए आवश्यक समय (t) = 0.2 सेकंड

ध्वनि की चाल (v) = 343 m s⁻¹

ज्ञात करने की विधि: हम जानते हैं कि प्रतिध्वनि उत्पन्न होने के लिए ध्वनि को स्रोत से परावर्तक सतह तक जाने और टकराकर वापस आने (यानी दोगुनी दूरी) की यात्रा करनी पड़ती है।

अतः, परावर्तक सतह की न्यूनतम दूरी निकालने का सूत्र है: परावर्तक सतह से दूरी = (ध्वनि की चाल × समय)/2

मान रखने पर: दूरी = (343 m s⁻¹ × 0.2 s)/2 दूरी = 68.6/2 दूरी = 34.3 मीटर।

परावर्तक सतह को ध्वनि स्रोत से न्यूनतम 34.3 मीटर की दूरी पर रखा जाना चाहिए।

क्या होता यदि… (Page No. 202)

1. यदि मनुष्य भी कुत्तों की तरह पराश्रव्य तरंगों को पहचान सकते तो इसके क्या लाभ और हानियाँ होतीं?”

उत्तर: दिए गए पराश्रव्य तरंगों (20 kHz या 20,000 Hz से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनियों) के सिद्धांतों के आधार पर इसके संभावित लाभ और हानियाँ निम्नलिखित होतीं:

लाभ:

(i) अंधेरे में नेविगेशन (प्रतिध्वनि द्वारा स्थान निर्धारण): चमगादड़ और डॉल्फिन की तरह, मनुष्य भी पराश्रव्य तरंगों की प्रतिध्वनि (echolocation) का उपयोग करके अंधेरे में बिना किसी वस्तु से टकराए बाधाओं और चीजों की सटीक स्थिति का पता लगा सकते।

(ii) जानवरों की गुप्त ध्वनियाँ सुनना: मनुष्य उन पराश्रव्य ध्वनियों को भी स्पष्ट सुन पाते जो चमगादड़, कुत्ते और डॉल्फिन जैसे जीव संचार के लिए उपयोग करते हैं और जो वर्तमान में मानव कानों के लिए अदृश्य (अश्रव्य) हैं।

हानियाँ:

(i) अत्यधिक शोर और ध्वनि प्रदूषण: कई औद्योगिक मशीनें, चिकित्सा उपकरण (जैसे अल्ट्रासाउंड मशीनें) और बहुत से जीव निरंतर पराश्रव्य तरंगें उत्पन्न करते हैं। यदि मानव इन्हें सुन पाते, तो यह हमारे वातावरण में अवांछित शोर (noise) को बहुत अधिक बढ़ा देत।

(ii) श्रवण क्षमता और स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव: अवांछित उच्च-आवृत्ति वाली इन तीव्र ध्वनियों (शोर) को लगातार सुनने से मानसिक तनाव बढ़ता, निद्रा प्रभावित होती और हमारी सामान्य श्रवण क्षमता (सुनने की शक्ति) को स्थायी नुकसान (श्रवण ह्रास) पहुँच सकता था।

सोचिए और बताइए (Page No. 203)

1. जल में ध्वनि प्रकाश की अपेक्षा बहुत अधिक दूरी तक गमन करती है, इसलिए इसका उपयोग विभिन्न अंतर्जलीय अनुप्रयोगों में किया जाता है। महासागर की गहराई ज्ञात करने के लिए भेजा गया कोई सोनार संकेत 4 सेकंड में वापस लौटता है। यदि समुद्री जल में ध्वनि की चाल 1500 m s⁻¹ है तो बताइए कि उस स्थान पर महासागर की गहराई कितनी होगी?

उत्तर: दिया गया है:

सोनार संकेत को महासागर की तलहटी तक जाने और टकराकर वापस लौटने में लगा कुल समय (t) = 4 सेकंड

समुद्री जल में ध्वनि की चाल (v) = 1500 m s⁻¹

ज्ञात करने की विधि: चूँकि सोनार द्वारा भेजा गया संकेत गहराई तक जाने और वहां से परावर्तित होकर वापस आने में कुल दोगुनी दूरी (2d) तय करता है।

अतः, महासागर की गहराई (d) निकालने का सूत्र है: गहराई = (ध्वनि की चाल × कुल समय)/2

मान रखने पर: गहराई = (1500 m s⁻¹ × 4 s)/2 गहराई = 6000/2 गहराई = 3000 मीटर

उस स्थान पर महासागर की गहराई 3000 मीटर (या 3 किलोमीटर) होगी।

अभ्यास प्रश्न

1. कौन-सा अवलोकन इस विचार का सर्वोत्तम समर्थन करता है कि ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है?

(i) ध्वनि परावर्तन प्रदर्शित करती है।

(ii) ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम आवश्यक है।

(iii) ध्वनि की आवृत्ति होती है।

(iv) ध्वनि ऊर्जा वहन करती है।

उत्तर: (ii) ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम आवश्यक है।

2. किसी माध्यम में संचरित हो रही ध्वनि तरंग की आवृत्ति बढ़ाने पर क्या बढ़ेगा?

(i) तरंगदैर्ध्य।

(ii) चाल।

(iii) प्रति सेकंड संपीडनों की संख्या।

(iv) आवर्तकाल।

उत्तर: (iii) प्रति सेकंड संपीडनों की संख्या।

3. यदि किसी बिंदु से 4 सेकंड में 20 संपीडन गुजरते हैं तो आवृत्ति होगी—

(i) 80 Hz

(ii) 5 Hz

(iii) 10 Hz

(iv) 0.2 Hz

उत्तर: (ii) 5 Hz

4. किसी कक्ष में परावर्तित ध्वनि उत्पन्न होने के 0.05 सेकंड पश्चात् कान तक पहुँचती है। क्या यह प्रतिध्वनि उत्पन्न करेगी या अनुरणन? कारण सहित बताइए।

उत्तर: यह अनुरणन (reverberation) उत्पन्न करेगी। कारण: स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए मूल ध्वनि और परावर्तित ध्वनि के बीच कम-से-कम 0.1 सेकंड का समय अंतराल होना आवश्यक है। यहाँ समय अंतराल केवल 0.05 सेकंड है, जो 0.1 सेकंड से कम है, इसलिए यह बहु-परावर्तनों के कारण अनुरणन उत्पन्न करेगी।

5. चित्र 10.30 में दो ध्वनि तरंगों के आलेखीय निरूपण दिए गए हैं। यदि X और Y अक्षों के पैमाने समान हों तो बताइए—

(i) किस तरंग का तरंगदैर्ध्य अधिक है?

(ii) किस तरंग का आयाम कम है?

उत्तर: (i) चित्र (क) की तरंग का तरंगदैर्ध्य (Wavelength) अधिक है, क्योंकि समान दूरी में इसके दो शिखरों (Crests) के बीच की दूरी अधिक है।

(ii) चित्र (क) की तरंग का आयाम (Amplitude) कम है, क्योंकि इसकी अधिकतम ऊँचाई (विस्थापन) चित्र (ख) की तुलना में कम है।

6. चित्र 10.31 में तीन स्रोत A, B और C द्वारा उत्पन्न ध्वनि तरंगें दर्शाई गई हैं। यदि A की आवृत्ति अधिकतम और C की न्यूनतम है तो संबंधित वक्रों की पहचान कीजिए तथा उन पर A, B और C अंकित कीजिए।

उत्तर: चित्र 10.31 में:

A (अधिकतम आवृत्ति) → हरे रंग (Green) की तरंग, क्योंकि इसमें सबसे अधिक दोलन हैं (तरंगदैर्ध्य सबसे कम)।

B (मध्यम आवृत्ति) → लाल रंग (Red) की तरंग।

C (न्यूनतम आवृत्ति) → नीले रंग (Blue) की तरंग, क्योंकि इसमें सबसे कम दोलन हैं (तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक)।

7. ऐसी ध्वनि तरंग का ग्राफ बनाइए जिसका घनत्व आयाम 3 मात्रक तथा तरंगदैर्ध्य 4 cm हो।

उत्तर: 

8. किसी फिल्म में अंतरिक्ष में हुए किसी अंतरिक्ष यान के विस्फोट में प्रकाश और ध्वनि दोनों का एक साथ एक ही समय पर उत्पन्न होना दर्शाया जाता है। बताइए कि इस चित्रण में क्या त्रुटियाँ हैं?

उत्तर: इस चित्रण में त्रुटि यह है कि अंतरिक्ष में ध्वनि सुनाई नहीं दे सकती।

कारण: अंतरिक्ष में निर्वात (vacuum) होता है और ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है, जिसे संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है। निर्वात में ध्वनि गमन नहीं कर सकती। प्रकाश बिना माध्यम के गमन कर सकता है, इसलिए विस्फोट की केवल चमक दिखाई देगी।

9. एक स्रोत 3.44 m तरंगदैर्ध्य वाली ध्वनि तरंग उत्पन्न करता है। यदि तरंग की चाल 344 m s⁻¹ है तो उसका आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।

उत्तर: दिया गया है: तरंगदैर्ध्य (λ) = 3.44 m, चाल (v) = 344 m s⁻¹ सूत्र: आवर्तकाल (T) = तरंगदैर्ध्य/चाल

T = 3.44/344 = 0.01 सेकंड।

10. किसी डूबे हुए जलयान की खोज के लिए किसी जलपोत से भेजे गए सोनार संकेत की प्रतिध्वनि 5 सेकंड पश्चात् प्राप्त होती है। यदि समुद्री जल में पराश्रव्य तरंग की चाल 1525 m s⁻¹ है तो डूबे हुए जहाज के भग्नावशेष समुद्र में लगभग कितनी गहराई पर स्थित हैं?

उत्तर: कुल समय (t) = 5 सेकंड, जल में चाल (v) = 1525 m s⁻¹ गहराई (d) = (चाल × कुल समय)/2 (चूँकि ध्वनि दोगुनी दूरी तय करती है) गहराई = (1525 × 5)/2 = 7625/2 = 3812.5 मीटर।

11. किसी वाहन में पार्किंग सहायता प्रणाली के एक भाग के रूप में पराश्रव्यी दूरी संवेदक लगा हुआ है जो प्रतिध्वनि निर्धारण तकनीक का उपयोग करता है। वाहन को पीछे करते समय (यह लगभग 40 kHz की) पराश्रव्यी तरंगें उत्सर्जित करता है जो अवरोध से परावर्तित होकर वापस आती हैं। यदि चेतावनी बीप अवरोध से 1.2 m दूरी पर बजना आरंभ होती है तो पराश्रव्यी तरंग को अवरोध तक जाकर वापस आने में कितना समय लगता है? मान लीजिए कि वायु में पराश्रव्यी तरंग की चाल 345 m s⁻¹ है।

उत्तर: दूरी (d) = 1.2 m, चाल (v) = 345 m s⁻¹ ध्वनि द्वारा तय की गई कुल दूरी = 2 × 1.2 = 2.4 m समय (t) = दूरी/चाल t = 2.4/345 = 0.00695 सेकंड (लगभग 0.007 सेकंड)।

12. वायु में ध्वनि की चाल 0 ºC पर लगभग 331 m s⁻¹ तथा 22 ºC पर लगभग 344 m s⁻¹ है। यदि वायु का तापमान 22 ºC से घटकर 0 ºC हो जाए, तो 1720 m दूरी तय करने में मेघगर्जन की ध्वनि को लगभग कितना अतिरिक्त समय लगेगा? मान लीजिए कि अन्य सभी परिस्थितियाँ अपरिवर्तित रहती हैं।

उत्तर: 22 ºC पर लिया गया समय (t1) = 1720/344 = 5 सेकंड 0 ºC पर लिया गया समय

(t2) = 1720/331 ≈ 5.196 सेकंड अतिरिक्त समय = t2 − t1 = 5.196 – 5 = 0.196 सेकंड।

13. 340 m s⁻¹ की चाल से संचरित हो रही एक ध्वनि तरंग के लिए माध्यम के घनत्व में परिवर्तन चित्र 10.32 में दर्शाया गया है। ध्वनि तरंग का तरंगदैर्ध्य तथा आवृत्ति का परिकलन कीजिए।

उत्तर: (i) तरंगदैर्ध्य, λ = 4 cm (0.04 m)

(ii) आवृत्ति,

f = 8500 Hz

तरंगदैर्ध्य = 4 cm

आवृत्ति = 8500 Hz

14. 345 m s⁻¹ की समान चाल से संचरित हो रही दो ध्वनि तरंगों A तथा B का आलेखीय निरूपण चित्र 10.33 में दर्शाया गया है। प्रत्येक तरंग का तरंगदैर्ध्य कितना है? इसके साथ ही उनकी आवृत्तियों का भी परिकलन कीजिए।

उत्तर: दिया गया :

ध्वनि की चाल, v=345 m s−1

चित्र 10.33 से,

तरंग A एक पूर्ण तरंग 2.5 cm में पूरी करती है।

तरंग B एक पूर्ण तरंग 5 cm में पूरी करती है।

(i) तरंग A के लिए

λA = 2.5 cm = 0.025 m

fA = λA/v = 0.025/345 = 13800 Hz

(ii) तरंग B के लिए

λB = 5 cm = 0.05 m

fB = 0.05/345 = 6900 Hz

15. दो समरूप ध्वनि स्रोत बिंदु A और B पर रखे गए हैं — इनमें से एक वायु में है और दूसरा जल में डुबोया गया है (चित्र 10.34)। दोनों स्रोत एक ही समय पर ध्वनि उत्पन्न करते हैं जो क्षैतिज दिशा में चट्टान की ऊर्ध्वाधर सतह तक जाती है और वापस लौटती है। यदि A बिंदु तक ध्वनि के लौटने में लगा समय B बिंदु तक ध्वनि के लौटने में लगे समय का 4.5 गुना है तो वायु और जल में ध्वनि के वेगों का अनुपात क्या है?

उत्तर: माना चट्टान से दूरी = d (तय की गई कुल दूरी 2d समान रहेगी)। वायु में लिया गया समय ta और वेग va है। 

जल में लिया गया समय tw और वेग vw है।

प्रश्नानुसार: ta = 4.5 × tw चूँकि (वेग × समय) का मान दोनों के लिए समान है:

va × ta = vw × tw

va/vw = tw/ta

va/vw = tw/(4.5 × tw) = 1/4.5 = 2/9

अतः, वायु और जल में ध्वनि के वेगों का अनुपात 2 : 9 होगा।

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