NCERT Class 9 Science Chapter 5 मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण

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NCERT Class 9 Science Chapter 5 मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण

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Chapter: 5

TEXTUAL SOLUTIONS

चिंतन कीजिए (Page No. 72)

1. पंकिल जल में निलंबित कण कुछ समय पश्चात तली पर बैठ जाते हैं परंतु दुग्ध में ऐसा नहीं होता है, क्यों?

उत्तर: पंकिल जल एक ‘निलंबन’ (suspension) है जिसके कणों का आकार बड़ा होता है, इसलिए वे भारी होकर गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे बैठ जाते हैं। जबकि दुग्ध एक ‘कोलॉइड’ (colloid) है, जिसके कण निलंबन के कणों से छोटे होते हैं और वे पूरे मिश्रण में समान रूप से फैले रहते हैं, इसलिए वे तली पर नहीं बैठते।

2. वाष्पीकरण किस प्रकार क्वथन से भिन्न होता है?

उत्तर: वाष्पीकरण में द्रव का केवल वाष्प में परिवर्तन होता है जिसमें पीछे विलेय छूट जाता है, और यह प्रक्रिया किसी भी सामान्य ताप पर होती है। जबकि क्वथन (उबलना) एक निश्चित तापमान (क्वथनांक) पर होता है।

3. आपको घने वृक्ष की पत्तियों के मध्य छोटे अंतरालों में से छनकर निकलता हुआ सूर्य का प्रकाश चमकीली किरणों के रूप में क्यों दिखाई देता है?

उत्तर: यह ‘टिंडल प्रभाव’ (Tyndall effect) के कारण होता है। वायु में विद्यमान धूल और धुएँ के कण (कोलॉइड) प्रकाश की किरणों का प्रकीर्णन कर देते हैं, जिससे प्रकाश का मार्ग दिखाई देने लगता है।

सोचिए और बताइए (Page No. 76)

1. किसी साधारण प्रसाधन पाउडर (टैलकम पाउडर) में 4% m/m जिंक ऑक्साइड है, जो एक पूतिरोधी (antiseptic) की भाँति कार्य करता है। 300 g टैलकम पाउडर में जिंक ऑक्साइड की कितनी मात्रा उपस्थित है?

उत्तर: टैलकम पाउडर (विलयन/मिश्रण) का कुल द्रव्यमान = 300 g जिंक ऑक्साइड की सांद्रता = 4% m/m 

द्रव्यमान-द्रव्यमान प्रतिशत का सूत्र = (विलेय का द्रव्यमान/विलयन का कुल द्रव्यमान) × 100

इसलिए, जिंक ऑक्साइड का द्रव्यमान = (4/100) × 300 g = 12 g।

अतः 300 g टैलकम पाउडर में 12 g जिंक ऑक्साइड उपस्थित है।

2. आपकी माँ ने आपको अपने अतिथि मित्रों को परोसने के लिए संतरे के सांद्रित रस की एक बोतल दी है। वे आपको एक गिलास में सांद्र रस के दो बड़े चम्मच जल में मिश्रित करने के लिए कहती हैं। यदि प्रत्येक बड़े चम्मच का माप 15 mL हो और आप प्रत्येक व्यक्ति के लिए 150 mL रस तैयार करते हैं, तो आपके द्वारा बनाए गए मिश्रण में संतरे के सांद्र रस का आयतनानुसार सांद्रता प्रतिशत (% v/v) क्या होगा?

उत्तर: संतरे के सांद्र रस (विलेय) का आयतन = 2 बड़े चम्मच = 2 × 15 mL = 30 mL

तैयार किए गए रस (विलयन) का कुल आयतन = 150 mL आयतनानुसार सांद्रता प्रतिशत (% v/v) = (विलेय का

आयतन/विलयन का कुल आयतन) × 100 = (30 mL / 150 mL) × 100 = 20% v/v। अतः बनाए गए मिश्रण में 

संतरे के सांद्र रस का प्रतिशत 20% v/v होगा।

3. सिरका, जिसका उपयोग खाद्य परिरक्षक (preservatives) और योज्य (additives) के रूप में किया जाता है, में 5% v/v ऐसीटिक अम्ल होता है। ध्यान रखिए कि ग्लेशियल ऐसीटिक अम्ल एक द्रव है, जो 100% ऐसीटिक अम्ल है। यदि आप ग्लेशियल ऐसीटिक अम्ल से सिरका बनाना चाहते हैं तो यह आप किस प्रकार बनाएँगे?

उत्तर: आयतन-आयतन प्रतिशत (% v/v) यह व्यक्त करता है कि 100 mL विलयन में विलेय के कितने mL उपस्थित हैं। 5% v/v का अर्थ है कि 100 mL सिरके (विलयन) में 5 mL ऐसीटिक अम्ल (विलेय) है। अतः ग्लेशियल ऐसीटिक अम्ल से सिरका बनाने के लिए, आप 5 mL ग्लेशियल ऐसीटिक अम्ल (100% सांद्र) लेंगे और उसमें इतना जल मिलाएँगे कि मिश्रण का कुल आयतन 100 mL हो जाए।

क्रियाकलाप 5.2— आइए, विलेयता को ग्राफ के रूप में निरूपित करें (Page No. 77)

जल को विलायक और यौगिक ‘क’ तथा ‘ख’ को विलेय मानिए। प्रत्येक पदार्थ की विलेयता भिन्न होती है। तापमान के सापेक्ष विलेयता का ग्राफ, विलेयता वक्र कहलाता है। विलेय के रूप में ‘क’ और ‘ख’ के विलेयता वक्रों को चित्र 5.6 में दर्शाया गया है। x-अक्ष तापमान (°C) प्रदर्शित कर रहा है जबकि y-अक्ष प्रति 100 g जल में विलेय की विलेयता को ग्राम में दर्शा रहा है।

1. उपर्युक्त आलेख से प्राप्त सूचना के आधार पर अनुमान लगाइए कि किसी निश्चित तापमान पर दो यौगिकों ‘क’ और ‘ख’ में से कौन-सा जल की दी हुई मात्रा में अधिक विलेय होगा?

उत्तर: ग्राफ के अनुसार, तापमान के आधार पर दोनों की विलेयता भिन्न होती है। कम तापमान पर (लगभग 40°C से पहले) यौगिक ‘ख’ की विलेयता अधिक होती है, जबकि तापमान बढ़ने पर (लगभग 40°C के बाद) यौगिक ‘क’ की विलेयता ‘ख’ की अपेक्षा बहुत अधिक हो जाती है।

2. चित्र 5.6 का अवलोकन कीजिए और निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:

(i) 20°C पर यौगिक ‘क’ की जल में विलेयता 60°C पर उसकी विलेयता ___________ (से कम है/से अधिक है/के समान है)।

उत्तर: 20°C पर यौगिक ‘क’ की जल में विलेयता 60°C पर उसकी विलेयता से कम है।

(ii) 20°C पर यौगिक ‘ख’ की विलेयता 60°C पर उसकी विलेयता ____________ (से कम है/से अधिक है/के समान है)।

उत्तर: 20°C पर यौगिक ‘ख’ की विलेयता 60°C पर उसकी विलेयता से कम है।

(iii) तापमान में वृद्धि से ____________ की विलेयता में ____________ की अपेक्षा अधिक वृद्धि होती है (यौगिक ‘क’/यौगिक ‘ख’)।

उत्तर: तापमान में वृद्धि से यौगिक ‘क’ की विलेयता में यौगिक ‘ख’ की अपेक्षा अधिक वृद्धि होती है।

3. यदि आप उच्च तापमान पर एक संतृप्त विलयन बनाते हैं और उसे धीरे-धीरे ठंडा करते हैं, तो विचार कीजिए कि इसका क्या परिणाम होगा?

उत्तर: यदि हम उच्च तापमान पर बने संतृप्त विलयन को धीरे-धीरे ठंडा करते हैं, तो तापमान कम होने के कारण विलेय की विलेयता घट जाएगी। परिणामस्वरूप, विलयन में घुला हुआ अतिरिक्त विलेय शुद्ध ठोस क्रिस्टलों के रूप में पृथक (अलग) हो जाएगा। इस प्रक्रिया को क्रिस्टलीकरण कहा जाता है।

सोचिए और बताइए (Page No. 79, 83, 84 and 88)

1. क्रियाकलाप 5.2 में दिए गए विलेयता वक्रों का संदर्भ लीजिए। यदि यौगिक ‘क’ और ‘ख’ के गर्म, संतृप्त विलयनों के समान द्रव्यमान को 80°C से 60°C तक ठंडा किया जाए, तो किस विलयन से अधिक ठोस निक्षेपित होने की संभावना है?

उत्तर: यौगिक ‘क’ के विलयन से अधिक ठोस निक्षेपित (क्रिस्टलीकृत) होने की संभावना है। ग्राफ (विलेयता वक्र) के अनुसार, तापमान में वृद्धि होने पर यौगिक ‘क’ की विलेयता में यौगिक ‘ख’ की अपेक्षा बहुत अधिक तेज़ी से वृद्धि होती है। इसका अर्थ है कि तापमान कम करने (80°C से 60°C) पर यौगिक ‘क’ की विलेयता में कमी भी ‘ख’ की तुलना में अधिक तेजी से होगी। विलेयता तेजी से घटने के कारण, यौगिक ‘क’ का अधिक मात्रा में घुला हुआ ठोस पदार्थ निक्षेपित होकर (क्रिस्टल के रूप में) विलयन से बाहर आ जाएगा।

2. वाष्पीकरण की दर बढ़ाने अथवा घटाने पर साधारण नमक के क्रिस्टलों के आकार में क्या कोई परिवर्तन होगा? व्याख्या कीजिए

उत्तर: हाँ, वाष्पीकरण की दर में बदलाव से क्रिस्टलों के आकार में निश्चित रूप से परिवर्तन होगा।

(i) वाष्पीकरण की दर घटाने पर (धीमी प्रक्रिया): यदि विलयन धीरे-धीरे वाष्पीकृत (या ठंडा) होता है, तो कणों को एक नियमित ज्यामितीय आकार में संगठित होने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। इसके परिणामस्वरूप बड़े, चमकदार और स्पष्ट क्रिस्टल बनते हैं।

(ii) वाष्पीकरण की दर बढ़ाने पर (तेज प्रक्रिया): यदि वाष्पीकरण बहुत तेजी से होता है (जैसे उच्च तापमान पर), तो कणों को सही ढंग से व्यवस्थित होने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है। इसके परिणामस्वरूप बहुत छोटे और भली-भाँति निर्मित न होने वाले (अस्पष्ट) क्रिस्टल बनेंगे।

3. निम्नलिखित कथन सत्य हैं अथवा असत्य। असत्य कथनों को सही भी कीजिए।

(i) नमक के विलयन से नमक को वाष्पीकरण अथवा आसवन द्वारा पृथक किया जा सकता है।

उत्तर: सत्य।

(ii) आसवन का उपयोग उन दो द्रवों को पृथक करने में भी किया जा सकता है जिनके क्वथनांक समान हों।

उत्तर: असत्य।

सही कथन: आसवन का उपयोग केवल उन द्रवों को पृथक करने के लिए किया जाता है जिनके क्वथनांकों में कम-से-कम 25°C का अंतर हो। समान क्वथनांक वाले द्रवों को इस विधि से अलग नहीं किया जा सकता।

(iii) कागज वर्णलेखिकी में प्रयोग के आरंभ में विलायक का स्तर प्रतिदर्श बिंदु से ऊपर होना चाहिए।

उत्तर: असत्य।

सही कथन: कागज वर्णलेखिकी में प्रयोग के आरंभ में विलायक (जल) का स्तर हमेशा प्रतिदर्श बिंदु (स्याही या रंग के बिंदु) से नीचे रहना चाहिए।

(iv) वाष्पीकरण और क्रिस्टलीकरण समान प्रक्रियाएँ हैं।

उत्तर: असत्य।

सही कथन: ये दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं। वाष्पीकरण में विलयन को गर्म करने पर विलायक उड़ जाता है और ठोस पीछे छूट जाता है। जबकि, क्रिस्टलीकरण में किसी संतृप्त विलयन से शुद्ध ठोस पदार्थों को क्रिस्टल के रूप में पृथक किया जाता है, जिससे अवांछित अशुद्धियाँ अलग हो जाती हैं।

4. अमिश्रणीय द्रव पृथक्कारी कीप में दो पृथक परतें क्यों बनाते हैं?

उत्तर: अमिश्रणीय द्रव अपने घनत्व में अंतर के कारण अलग-अलग परतें बनाते हैं। भारी द्रव नीचे रहता है और हल्का द्रव ऊपर आ जाता है।

5. क्या ऊर्ध्वपातन, वाष्पीकरण से भिन्न है?

उत्तर: हाँ। ऊर्ध्वपातन में ठोस पदार्थ बिना द्रव में बदले सीधे वाष्प अवस्था में परिवर्तित हो जाता है। जबकि वाष्पीकरण में द्रव पदार्थ वाष्प में बदलता है।

6. बादलों का निर्माण वायु में सूक्ष्म जल-बूँदों अथवा वायु में तैरते हिमक्रिस्टलों से होता है। विलयनों, निलंबनों और कोलॉइडों के विषय में अपनी जानकारी के आधार पर बताइए कि बादल किस प्रकार के मिश्रण हैं और क्यों?

उत्तर: बादल एक ‘कोलॉइड’ (colloid) प्रकार का मिश्रण हैं। इसका कारण यह है कि बादलों में वायु (गैस) ‘परिक्षेपण माध्यम’ (dispersion medium) का कार्य करती है, और सूक्ष्म जल-बूँदें (द्रव) या हिमक्रिस्टल (ठोस) उसमें ‘परिक्षिप्त प्रावस्था’ (dispersed phase) के रूप में निलंबित रहते हैं। कोलॉइड के कण विलयन के कणों से बड़े और निलंबन के कणों से छोटे (1 से 1000 nm के बीच) होते हैं, इसलिए वे समय के साथ तली में नीचे नहीं बैठते बल्कि संपूर्ण मिश्रण में समान रूप से फैले रहते हैं।

7. जिन नगरों की वायु में अधिक धुआँ और धूल होते हैं, वे प्रायः धुँधले क्यों दिखाई देते हैं?

उत्तर: धुआँ (वायु में निलंबित ठोस कण) और धूल जब वायु के साथ मिलते हैं, तो वे विषमांगी कोलॉइडी मिश्रण बनाते हैं। जब सूर्य का प्रकाश या कोई अन्य प्रकाश इन कोलॉइडी कणों (धुएँ और धूल) से होकर गुजरता है, तो ये कण प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering) कर देते हैं, जिसे टिंडल प्रभाव (Tyndall effect) कहा जाता है। प्रकाश के इसी बिखराव के कारण दृश्यता (visibility) कम हो जाती है और ऐसे नगर धुँधले दिखाई देते हैं।

अभ्यास प्रश्न

1. निम्नलिखित मिश्रणों में से कौन-से मिश्रण सही रूप से समांगी और विषमांगी मिश्रणों के रूप में वर्गीकृत किए गए हैं? सही विकल्प चुनिए।

(i) वायु — समांगी, दुग्ध — विषमांगी, चीनी का विलयन — समांगी, धुआँ — समांगी।

(ii) पीतल — विषमांगी, कोहरा — विषमांगी, सिरका — विषमांगी, पंकिल जल — समांगी।

(iii) कॉपर सल्फेट का विलयन — समांगी, नमक का विलयन — समांगी, दुग्ध — समांगी, काँसा (Bronze) — समांगी।

(iv) पंकिल जल — विषमांगी, दुग्ध — विषमांगी, रक्त — विषमांगी, पीतल — समांगी।

उत्तर: (iv) पंकिल जल — विषमांगी, दुग्ध — विषमांगी, रक्त — विषमांगी, पीतल — समांगी।

2. सही विकल्पों का चयन कीजिए तथा सही और गलत विकल्पों के कारण स्पष्ट कीजिए।

निम्नलिखित में से कौन-से मिश्रण टिंडल प्रभाव दर्शाते हैं?

(क) वायु और धूल के कणों का मिश्रण

(ख) कॉपर सल्फेट और जल का मिश्रण

(ग) स्टार्च और जल का मिश्रण

(घ) एसीटोन और जल का मिश्रण

(i) क और ख

(ii) ख और घ

(iii) क और ग

(iv) ग और घ

उत्तर: (iii) क और ग।

कारण: टिंडल प्रभाव केवल कोलॉइड और निलंबन मिश्रणों द्वारा दर्शाया जाता है। ‘क’ (वायु और धूल) एक निलंबन/कोलॉइड है और ‘ग’ (स्टार्च और जल) एक कोलॉइड है, इसलिए ये प्रकाश का प्रकीर्णन करते हैं। ‘ख’ और ‘घ’ पूर्ण विलयन हैं जो टिंडल प्रभाव नहीं दर्शाते।

3. किसी मिश्रण को विलयन, निलंबन अथवा कोलॉइड के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है जिनमें से प्रत्येक के अपने विशिष्ट गुणधर्म होते हैं। बॉक्स में दिए गए शब्दों अथवा वाक्यांशों का उपयोग करके तालिका 5.2 को पूर्ण कीजिए। शब्दों और वाक्यांशों का एक से अधिक बार उपयोग किया जा सकता है।

शब्द और वाक्यांश: बड़े आकार के कण; कण समान रूप से वितरित रहते हैं; छोटे आकार के कण (1 nm से कम व्यास); मध्यम आकार के कण (1–1000 nm); स्थिर रहते परन्तु समय के साथ बैठ जाते हैं; तीन स्तरों में बैठे; प्रकाश का प्रकीर्णन करते हैं; निस्यंदन पत्र पर रुक जाते हैं; परासरी; नमक का विलयन; दूध; जल में रेत; धुआँ; विषमांगी मिश्रण; निस्यंदन द्वारा पृथक नहीं किए जा सकते; कोहरा; भवन; पीला।
विलयननिलंबनकोलॉइड
गुणधर्मगुणधर्मगुणधर्म
उदाहरणउदाहरणउदाहरण

उत्तर:

विलयननिलंबनकोलॉइड
गुणधर्मगुणधर्मगुणधर्म
छोटे आकार के कण (1 nm से कम व्यास)बड़े आकार के कणमध्यम आकार के कण (1–1000 nm)
प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं करतेप्रकाश का प्रकीर्णन करते हैंप्रकाश का प्रकीर्णन करते हैं
उदाहरणउदाहरणउदाहरण
नमक का विलयनजल में रेतदूध
चीनी का विलयनधूल और जलकोहरा

4. निम्नलिखित प्रश्नों को हल कीजिए—

(i) केक बनाने की किसी विधि में 420 g मैदा, 75 g चीनी और 5 g सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट का उपयोग सूखी सामग्री के रूप में किया जाता है। उपयुक्त विधि के उपयोग द्वारा मिश्रण के प्रत्येक घटक की सांद्रता व्यक्त कीजिए। 

उत्तर: मिश्रण का कुल द्रव्यमान = 420 g + 75 g + 5 g = 500 g

मैदा का प्रतिशत (% m/m) = (420/500) × 100 = 84%

चीनी का प्रतिशत (% m/m) = (75/500) × 100 = 15%

सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट का प्रतिशत (% m/m) = (5/500) × 100 = 1%

(ii) किसी पीतल मिश्रधातु में द्रव्यमान के अनुसार 70% ताँबा (कॉपर) है। 120 g पीतल में उपस्थित कॉपर और जिंक की मात्रा परिकलित कीजिए।

उत्तर: 120 g पीतल में 70% कॉपर है।

कॉपर का द्रव्यमान = (70/100) × 120 g = 84 g

जिंक का द्रव्यमान = 120 g – 84 g = 36 g

5. खाद्य तेल के किसी पैकेट पर एक लीटर (910 g) लिखा है। यदि इस तेल को जल के साथ मिश्रित किया जाए तो क्या यह अलग परत बनाएगा? यदि हाँ, तो कौन-सा पदार्थ ऊपर रहेगा? आप इन दो परतों को किस प्रकार पृथक करेंगे? प्रयुक्त उपकरण का चित्र भी बनाइए।

उत्तर: हाँ, यह अलग परत बनाएगा क्योंकि तेल और जल अमिश्रणीय द्रव हैं। चूँकि 1 लीटर तेल का द्रव्यमान 910 g है (जो जल के 1000 g/लीटर से कम है), इसलिए तेल का घनत्व जल से कम है। अतः तेल ऊपर की परत बनाएगा। इन्हें पृथक करने के लिए ‘पृथक्कारी कीप’ (Separating funnel) का उपयोग किया जाएगा। (चित्र 5.16 के लिए अपनी पुस्तक का पृष्ठ 84 देखें)।

6. नीचे दिए गए अभिकथन एवं कारण को पढ़िए और उनके संबंध में आगे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।

अभिकथन— विलयन टिंडल प्रभाव नहीं दर्शाते हैं।

कारण— विलयन के कणों का आकार 100 nm से बड़ा होता है, अतः वे प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं कर सकते।

(i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण अभिकथन की सही व्याख्या है।

(ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं है।

(iii) अभिकथन सत्य है परंतु कारण असत्य है।

(iv) अभिकथन असत्य है परंतु कारण सत्य है।

उत्तर: (iii) अभिकथन सत्य है परंतु कारण असत्य है। विलयन के कणों का आकार 1 nm से भी कम होता है (न कि 100 nm से बड़ा), इसलिए वे प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं करते हैं।

7. तालिका 5.3 में दिए गए मिश्रणों को आप किस प्रकार पृथक करेंगे? अपनी चयनित विधि के कारण का भी उल्लेख कीजिए। यदि किसी मिश्रण को पृथक नहीं किया जा सकता है तो उसके कारण की व्याख्या कीजिए।

मिश्रणपृथक्करण की विधिचयन का कारण
पीने के जल से रेत
रक्त प्रतिदर्शों से अन्य घटकों से प्लाज्मा
नेफ़्थलीन और रेत
चॉक चूर्ण और साधारण नमक
साधारण नमक और जल 
जल और तेल
पुष्प के वर्णक

उत्तर:

मिश्रणपृथक्करण की विधिचयन का कारण
पीने के जल से रेतनिस्यंदन (Filtration)रेत के कण भारी होते हैं और जल में अघुलनशील होते हैं, इसलिए इन्हें आसानी से छानकर अलग किया जा सकता है।
रक्त प्रतिदर्शों से अन्य घटकों से प्लाज्माअपकेंद्रण (Centrifugation)अपकेंद्रीय बल के कारण भारी रक्त कोशिकाएँ नीचे बैठ जाती हैं और हल्का प्लाज्मा ऊपर रह जाता है, जिसे आसानी से अलग किया जा सकता है।
नेफ़्थलीन और रेतऊर्ध्वपातन (Sublimation)नेफ़्थलीन गर्म करने पर बिना द्रव में बदले सीधे वाष्प (ऊर्ध्वपातित) में बदल जाता है, जबकि रेत नहीं बदलती।
चॉक चूर्ण और साधारण नमकजल में घोलकर निस्यंदन तथा वाष्पीकरणनमक जल में घुलनशील है जबकि चॉक चूर्ण अघुलनशील है। मिश्रण को जल में घोलकर छानने (निस्यंदन) से चॉक अलग हो जाएगा और छने हुए विलयन का वाष्पीकरण करने पर नमक प्राप्त हो जाएगा।
साधारण नमक और जल वाष्पीकरण (Evaporation) या आसवन (Distillation)वाष्पीकरण करने पर विलायक (जल) वाष्पीकृत होकर उड़ जाता है और विलेय (ठोस नमक) पीछे छूट जाता है।
जल और तेलपृथक्कारी कीप (Separating Funnel)जल और तेल अमिश्रणीय द्रव हैं और दोनों के घनत्व में अंतर होता है, जिससे वे अलग-अलग परतें बनाते हैं।
पुष्प के वर्णककागज वर्णलेखिकी (Paper Chromatography)इस विधि में द्रवों (विलायक) के साथ विभिन्न वर्णक कागज़ पर अलग-अलग गति से ऊपर चढ़ते हैं, जिससे वे एक-दूसरे से पृथक हो जाते हैं।

8. किसी मिश्रण में दो मिश्रणीय द्रव ‘क’ तथा ‘ख’ उपस्थित हैं। ‘क’ का क्वथनांक 60°C तथा ‘ख’ का क्वथनांक 90°C है। इन्हें पृथक करने की विधि सुझाइए। सुझाई गई विधि का नामांकित चित्र भी बनाइए।

उत्तर: इन्हें पृथक करने के लिए ‘आसवन’ (Distillation) विधि का उपयोग किया जाएगा क्योंकि दोनों मिश्रणीय द्रवों के क्वथनांकों में 25°C से अधिक का अंतर (90°C – 60°C = 30°C) है।

9. वाष्पीकरण, क्रिस्टलीकरण और आसवन की तुलना कीजिए। आप किस स्थिति में एक विधि को दूसरी विधियों की अपेक्षा प्राथमिकता देंगे?

उत्तर: (i) वाष्पीकरण में विलायक वाष्प बनकर उड़ जाता है और केवल विलेय (ठोस) बचता है।

(ii) क्रिस्टलीकरण में गर्म संतृप्त विलयन को ठंडा करके अशुद्धियों से शुद्ध ठोस के क्रिस्टल प्राप्त किए जाते हैं। शुद्ध पदार्थ प्राप्त करने के लिए हम वाष्पीकरण की तुलना में क्रिस्टलीकरण को प्राथमिकता देते हैं।

(iii) आसवन का उपयोग तब किया जाता है जब हमें ठोस के साथ-साथ विलायक (द्रव) को भी पुनः प्राप्त करना हो, या फिर दो मिश्रणीय द्रवों (जिनके क्वथनांक में पर्याप्त अंतर हो) को अलग करना हो।

10. रक्त कोलॉइडी मिश्रण का एक उदाहरण है। (i) क्या होगा यदि शरीर में रक्त एक शुद्ध निलंबन की भाँति व्यवहार करे? (ii) रक्त के किसी प्रतिदर्श में परिक्षिप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम की पहचान कीजिए।

उत्तर: (i) यदि रक्त एक शुद्ध निलंबन होता, तो भारी रक्त कोशिकाएँ गुरुत्वाकर्षण के कारण नसों की तली में बैठ जातीं और शरीर में रक्त प्रवाह और पोषक तत्वों का परिवहन बाधित हो जाता।

(ii) परिक्षिप्त प्रावस्था: लाल रक्त कोशिकाएँ, श्वेत रक्त कोशिकाएँ और प्लेटलेट्स। परिक्षेपण माध्यम: प्लाज्मा (तरल)।

11. आपको रेत, साधारण नमक और नैफ्थलीन का एक मिश्रण दिया गया है (चित्र 5.25 क)। चित्र 5.25 ख इस मिश्रण के घटकों को पृथक करने के विभिन्न चरणों को दर्शा रहा है। पृथक्करण तकनीकों के सही क्रम की पहचान कीजिए और उन्हें लिखिए।

उत्तर: सही क्रम है:

(i) ऊर्ध्वपातन (Sublimation): गर्म करने पर नैफ्थलीन वाष्प बनकर अलग हो जाएगा।

(ii) जल में घोलकर निस्यंदन (Filtration): बचे हुए रेत और नमक को जल में घोलेंगे। नमक घुल जाएगा और रेत छानकर अलग कर ली जाएगी।

(iii) वाष्पीकरण/आसवन (Evaporation/Distillation): नमक के विलयन से वाष्पीकरण द्वारा नमक प्राप्त कर लिया जाएगा।

12. जल और एसीटोन के मिश्रण को पृथक करने के लिए आसवन एक प्रभावी विधि क्यों है?

उत्तर: क्योंकि जल का क्वथनांक 100°C है और एसीटोन का क्वथनांक 56°C है। आसवन विधि उन द्रवों को पृथक करने के लिए प्रभावी है जिनके क्वथनांकों में कम-से-कम 25°C का अंतर हो। यहाँ अंतर 44°C है, इसलिए गर्म करने पर एसीटोन पहले आसानी से वाष्पित हो जाता है और जल आसवन फ्लास्क में रह जाता है।

13. तालिका 5.4 में दिए गए आँकड़ों की सहायता से निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

तालिका 5.4 — विभिन्न तापमानों पर विभिन्न लवणों की विलेयता

(प्रति 100 g जल में विलेय ग्राम)

लवण10°C20°C30°C40°C60°C80°C
पोटैशियम नाइट्रेट21324562106167
सोडियम क्लोराइड363636.336.53737
पोटैशियम क्लोराइड353537.4404654
अमोनियम क्लोराइड243741415566

(i) 40°C पर 50 g जल में पोटैशियम नाइट्रेट का संतृप्त विलयन बनाने के लिए उसके कितने द्रव्यमान की आवश्यकता होगी?

उत्तर: तालिका के अनुसार 40°C पर 100 g जल में पोटैशियम नाइट्रेट की विलेयता 62 g है। इसलिए, 50 g जल में इसका संतृप्त विलयन बनाने के लिए हमें 62 g के आधे, यानी 31 g द्रव्यमान की आवश्यकता होगी।

(ii) एक विद्यार्थी 80°C पर पोटैशियम क्लोराइड का जल में संतृप्त विलयन बनाता है और विलयन को कक्ष के तापमान (25°C) पर ठंडा होने के लिए छोड़ देता है। जैसे-जैसे विलयन ठंडा होगा वह क्या अवलोकन करेगा? व्याख्या कीजिए।

उत्तर: तालिका 5.4 के अनुसार 80°C पर पोटैशियम क्लोराइड की विलेयता 54 g है, जबकि कक्ष के तापमान (25°C) पर यह घटकर कम (लगभग 35-36 g के बीच) हो जाती है। जैसे-जैसे संतृप्त विलयन ठंडा होगा, तापमान कम होने के कारण विलेयता घट जाएगी और अतिरिक्त घुला हुआ पोटैशियम क्लोराइड शुद्ध ठोस क्रिस्टलों के रूप में पृथक होकर विलयन से बाहर आ जाएगा।

(iii) लवणों की विलेयता पर तापमान के परिवर्तन का क्या प्रभाव पड़ता है? 10°C से 80°C तक तापमान में वृद्धि करने पर दिए गए चार लवणों की विलेयता में होने वाले परिवर्तनों की तुलना भी कीजिए।

उत्तर: सामान्यतः तापमान में वृद्धि करने पर ठोस लवणों की विलेयता बढ़ती है।

10°C से 80°C तक के आँकड़ों की तुलना करने पर यह स्पष्ट होता है:

(i) पोटैशियम नाइट्रेट: इसकी विलेयता में तापमान बढ़ने के साथ सबसे अधिक तेज़ी से वृद्धि होती है (21 g से 167 g)।

(ii) अमोनियम क्लोराइड: इसकी विलेयता में मध्यम वृद्धि होती है (24 g से 66 g)।

(iii) पोटैशियम क्लोराइड: इसकी विलेयता में थोड़ी वृद्धि होती है (35 g से 54 g)।

(iv) डियम क्लोराइड: इसकी विलेयता पर तापमान का प्रभाव सबसे कम पड़ता है और यह लगभग स्थिर ही रहती है (36 g से मात्र 37 g तक बढ़ती है)।

14. तीन विद्यार्थी ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ किसी प्रयोग के लिए चीनी का विलयन बना रहे हैं—

• विद्यार्थी ‘क’ 80 g जल में 20 g चीनी घोलता है।

• विद्यार्थी ‘ख’ 100 g जल में 20 g चीनी घोलता है।

• विद्यार्थी ‘ग’ 80 g जल में 30 g चीनी घोलता है।

(i) प्रत्येक विद्यार्थी द्वारा बनाए गए विलयन में चीनी की द्रव्यमान प्रतिशत (% m/m) सांद्रता का परिकलन कीजिए।

(ii) इनमें से किस विद्यार्थी का विलयन सबसे अधिक सांद्र है? कारण सहित व्याख्या कीजिए।

उत्तर: (i) सांद्रता प्रतिशत = (विलेय का द्रव्यमान/विलयन का कुल द्रव्यमान) × 100

  • विद्यार्थी ‘क’: (20/(80 + 20)) × 100 = (20/100) × 100 = 20% m/m
  • विद्यार्थी ‘ख’: (20/(100 + 20)) × 100 = (20/120) × 100 = 16.67% m/m
  • विद्यार्थी ‘ग’: (30/(80 + 30)) × 100 = (30/110) × 100 = 27.27% m/m

(ii) विद्यार्थी ‘ग’ का विलयन सबसे अधिक सांद्र है, क्योंकि परिकलन के अनुसार उसके विलयन का द्रव्यमान प्रतिशत (27.27%) सबसे अधिक है, जिसका अर्थ है प्रति 100 g विलयन में चीनी की मात्रा सबसे ज़्यादा है।

15. चित्र 5.26 को ध्यानपूर्वक देखिए—

(i) ‘स’ द्वारा चिह्नित पृथक्करण तकनीक की पहचान कीजिए।

उत्तर: ‘स’ द्वारा चिह्नित तकनीक आसवन (Distillation) है।

(ii) उपकरण क, ख और ग को नामांकित कीजिए।

उत्तर: उपकरण क = तापमापी (Thermometer), ख = जल संघनित्र (Water Condenser), और ग = आसवन फ्लास्क (Distillation Flask)।

(iii) निम्नलिखित में से किन मिश्रणों को उपयुक्त पहचानी गई तकनीक द्वारा पृथक किया जा सकता है? तालिका 5.5 के आँकड़ों का उपयोग कीजिए। मिश्रण हैं—

(क) जल—एसीटोन

(ख) जल—नमक

(ग) एसीटोन—ऐल्कोहॉल

(घ) रेत—नमक

(ङ) ऐल्कोहॉल—क्लोरोफॉर्म

(च) ऐल्कोहॉल—बेंजीन।

उत्तर: तालिका 5.5 के अनुसार, यह तकनीक (साधारण आसवन) केवल उन द्रवों के लिए प्रभावी है जिनके क्वथनांकों में कम-से-कम 25°C का अंतर हो। अतः केवल (क) जल (100°C) और एसीटोन (56°C) के मिश्रण को इस तकनीक द्वारा पृथक किया जा सकता है क्योंकि इनके क्वथनांकों का अंतर 44°C है। (ग), (ङ), और (च) के क्वथनांकों में 25°C से कम का अंतर है, अतः इन्हें साधारण आसवन से पृथक नहीं किया जा सकता, इनके लिए प्रभाजी आसवन की आवश्यकता होगी।

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