NCERT Class 9 Science Chapter 4 अपने परिवेश में गति का वर्णन

NCERT Class 9 Science Chapter 4 अपने परिवेश में गति का वर्णन Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus. to each chapter is provided in the list so that you can easily browse through different chapters NCERT Class 9 Science Chapter 4 अपने परिवेश में गति का वर्णन Notes and select need one. NCERT Class 9 Science Chapter 4 अपने परिवेश में गति का वर्णन Question Answers Download PDF. CBSE Class 9 Science Notes in Hindi.

NCERT Class 9 Science Chapter 4 अपने परिवेश में गति का वर्णन

Also, you can read the NCERT book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per Central Board of Secondary Education (CBSE) Book guidelines. NCERT Class 9 Science Chapter 4 अपने परिवेश में गति का वर्णन Solutions are part of All Subject Solutions. Here we have given NCERT Solutions for Class 9 Science Hindi Medium. CBSE Class 9 Science Textbook Solutions for All Chapters, You can practice these here.

Chapter: 4

TEXTUAL SOLUTIONS

चिंतन कीजिए (Page No. 48)

1. हमें अपने वाहन को आगे चलने वाले वाहन से कितनी दूरी पर रखना चाहिए जिससे आगे चलने वाले वाहन चालक द्वारा अचानक ब्रेक लगाने पर भी हमारा वाहन उससे टकराने से बच सके?

उत्तर: हमें अपने वाहन को आगे वाले वाहन से हमेशा एक पर्याप्त ‘सुरक्षित दूरी’ (Safe distance) पर रखना चाहिए, ताकि आपातकालीन स्थिति में टक्कर होने से बचा जा सके।

2. क्या यह दूरी हमारे वाहन की चाल पर निर्भर करती है?

उत्तर: हाँ, यह सुरक्षित दूरी मुख्य रूप से हमारे वाहन की चाल (Speed/Velocity) पर निर्भर करती है।

जब आप वाहन चला रहे होते हैं, तो अचानक ब्रेक लगाने की स्थिति में वाहन तुरंत नहीं रुकता, बल्कि रुकने से पहले कुछ दूरी तय करता है।

यह आवश्यक सुरक्षित दूरी निम्नलिखित बातों पर निर्भर करती है:

(i) वाहन का वेग (चाल): वाहन जितनी अधिक गति से चल रहा होगा, ब्रेक लगाने के बाद पूरी तरह रुकने से पहले वह उतनी ही अधिक दूरी तय करेगा।

(ii) चालक का प्रतिक्रिया काल (Reaction time): सामने वाले वाहन को ब्रेक लगाते देखकर, खुद ब्रेक का पैडल दबाने में चालक को कुछ समय (जैसे आधा सेकंड) लगता है। इस प्रतिक्रिया काल में भी वाहन अपनी मूल चाल से आगे बढ़ता रहता है और कुछ दूरी तय कर लेता है।

(iii) सड़क और वाहन की स्थिति: ब्रेक लगाने के बाद तय की गई दूरी सड़क की सतह (गीली है या सूखी), टायरों की स्थिति और वाहन की ब्रेक क्षमता (उत्पन्न ऋणात्मक त्वरण) पर भी निर्भर करती है।

सोचिए और बताइए (Page No. 51 and 53)

1. किसी सीधे धावन पथ पर इसके दो सिरों के बीच इधर से उधर दौड़ते हुए किसी धावक के उदाहरण (चित्र 4.4) में धावक का विस्थापन शून्य कब होगा? उस स्थिति में उसके द्वारा तय की गई कुल दूरी कितनी होगी?

उत्तर: धावक का विस्थापन शून्य तब होगा जब वह दौड़कर वापस अपने आरंभिक प्रस्थान बिंदु पर लौट आएगा। उस स्थिति में उसके द्वारा तय की गई कुल दूरी, धावन पथ के एक सिरे से दूसरे सिरे तक की लंबाई की दोगुनी होगी (अर्थात जाने और वापस आने की कुल दूरी)।

2. किसी वाहन में उपयुक्त ईंधन का परिमाण निम्नलिखित में से किस राशि पर निर्भर करता है? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क दीजिए।

(i) कुल चलित दूरी।

(ii) विस्थापन।

उत्तर: वाहन में प्रयुक्त ईंधन का परिमाण (i) कुल चलित दूरी पर निर्भर करता है।

तर्क: वाहन का इंजन जितनी अधिक दूरी तय करेगा, उसे उतना ही अधिक कार्य करना पड़ेगा और उसी अनुपात में ईंधन खर्च होगा। यदि कोई वाहन किसी स्थान से चलकर वापस उसी स्थान पर आ जाता है, तो उसका कुल विस्थापन शून्य होगा, लेकिन दूरी तय करने में इंजन द्वारा ईंधन अवश्य खर्च किया गया होगा।

3. कोई गेंद एक आनत पथ पर नीचे की ओर लुढ़कती है जैसा चित्र 4.6 में दर्शाया गया है। क्या इसकी गति सरल रेखीय गति है? यदि यह मान लेते हैं कि गेंद का प्रस्थान बिंदु ‘O’ मूल बिंदु है तो क्या O से D तक की इसकी गति का चित्रण एक क्षैतिज रेखा लेकर उसी प्रकार किया जा सकता है जैसा चित्र 4.3 में किया गया है? क्या स्थितियों A, B, C एवं D में से प्रत्येक पर गेंद द्वारा चलित कुल दूरी एवं बिंदु O से इसके विस्थापन के परिमाण बराबर हैं अथवा भिन्न-भिन्न हैं?

उत्तर: हाँ, गेंद की गति सरल रेखीय गति है क्योंकि यह एक सीधी रेखा (आनत पथ) के अनुदिश नीचे की ओर गति कर रही है।

हाँ, O से D तक की इसकी गति का चित्रण एक क्षैतिज रेखा लेकर उसी प्रकार किया जा सकता है जैसा चित्र 4.3 में किया गया है। चूँकि गेंद एक ही सरल रेखा में चल रही है, इसलिए सुविधा के अनुसार हम आनत पथ को ही एक अक्ष मान सकते हैं और उस पर प्रस्थान बिंदु ‘O’ को मूल बिंदु के रूप में दर्शा सकते हैं।

स्थितियों A, B, C एवं D में से प्रत्येक पर गेंद द्वारा चलित कुल दूरी एवं बिंदु O से इसके विस्थापन के परिमाण बराबर हैं। सरल रेखीय गति के प्रकरण में, यदि कोई वस्तु पलट कर वापस नहीं लौटती है अर्थात् केवल एक ही दिशा में चलती रहती है, तो वस्तु द्वारा तय की गई कुल चलित दूरी और उसके विस्थापन का परिमाण हमेशा बराबर होता है। चूँकि गेंद बिना दिशा बदले केवल नीचे की ओर लुढ़क रही है, अतः प्रत्येक बिंदु (A, B, C, D) पर दोनों राशियाँ समान होंगी।

4. सड़क मार्ग से परिवार सहित किसी यात्रा के लिए आप पहले तीन घंटे में 200 km उत्तर दिशा की ओर गाड़ी चलाते हैं। इसके पश्चात् अगले दो घंटे में आप 200 km दक्षिण दिशा में गाड़ी ले जाते हैं। अपनी पूरी यात्रा के लिए अपनी माध्य चाल और माध्य वेग ज्ञात कीजिए।

उत्तर: माध्य चाल (Average Speed):

कुल चलित दूरी = 200 km (उत्तर की ओर) + 200 km (दक्षिण की ओर) = 400 km।

कुल लिया गया समय = 3 घंटे + 2 घंटे = 5 घंटे।

माध्य चाल = कुल चलित दूरी / समय अंतराल = 400 km/5 h = 80 km/h।

माध्य वेग (Average Velocity):

विस्थापन (Displacement) = चूँकि आप 200 km उत्तर जाकर वापस 200 km दक्षिण आ गए हैं, जिसका अर्थ है कि आप बिल्कुल अपने आरंभिक प्रस्थान बिंदु पर वापस आ गए हैं, इसलिए आपका कुल विस्थापन 0 km होगा।

माध्य वेग = विस्थापन/समय अंतराल = 0 km/5 h = 0 km/h।

5. किस दशा/किन दशाओं में—

(i) किसी वस्तु के माध्य वेग का परिमाण उसकी माध्य चाल के बराबर होता है?

(ii) किसी वस्तु के माध्य वेग का परिमाण तो शून्य होता है किंतु उसकी माध्य चाल शून्य नहीं होती है?

उत्तर: (i) किसी वस्तु के माध्य वेग का परिमाण उसकी माध्य चाल के बिल्कुल बराबर तब होता है, जब वह वस्तु एक सरल रेखा में केवल एक ही दिशा में गति करती है (अर्थात बीच में दिशा बदलकर पलट कर वापस नहीं लौटती)। इस स्थिति में वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी और उसका विस्थापन का परिमाण बिल्कुल समान होता है।

(ii) किसी वस्तु के माध्य वेग का परिमाण शून्य तब होता है जब उसका कुल विस्थापन शून्य हो, अर्थात जब वस्तु अपनी यात्रा पूरी करने के बाद वापस अपने आरंभिक (प्रस्थान) बिंदु पर लौट आती है। चूँकि वस्तु ने वापस लौटने में कुछ न कुछ दूरी अवश्य तय की है और इसमें समय भी लगा है, इसलिए उसकी माध्य चाल शून्य नहीं होती है।

अभ्यास प्रश्न

1. मेरे पिताजी एक सीधी सड़क पर चल कर एक दुकान पर गए जिसकी घर से दूरी 250 m है। वहाँ पहुँच कर उन्होंने पाया कि वह कपड़े का थैला लाना भूल गए हैं। वह घर वापस लौटे, थैला लेकर दुकान पर आए, सामान खरीदा और लौट कर घर आ गए। बताइए कि उन्होंने कुल कितनी दूरी तय की? उनके घर से विस्थापन का मान कितना हुआ?

उत्तर: कुल तय की गई दूरी: 250 m (दुकान गए) + 250 m (घर वापस आए) + 250 m (फिर दुकान गए) + 250 m (घर वापस आए) = कुल 1000 मीटर (1 km)।

विस्थापन: चूँकि वे अपनी यात्रा पूरी करने के बाद वापस अपने आरंभिक बिंदु (घर) पर ही आ गए हैं, इसलिए उनका कुल विस्थापन 0 (शून्य) होगा।

2. कोई विद्यार्थी एक पुस्तक लेने के लिए विद्यालय भवन के भूतल से चतुर्थ तल तक दौड़ते हुए जाता है और फिर उतर कर द्वितीय तल स्थित अपने कक्षा-कक्ष में लौटता है। यदि प्रत्येक तल की ऊँचाई 3 m है तो ज्ञात कीजिए—

(i) उसके द्वारा चलित ऊर्ध्वाधर दूरी, तथा

(ii) आरंभिक बिंदु से उसके ऊर्ध्वाधर विस्थापन का परिमाण।

उत्तर: (i) चलित ऊर्ध्वाधर दूरी: भूतल से चतुर्थ तल (4 मंजिल) तक ऊपर जाना = 4 × 3 = 12 मीटर। फिर चतुर्थ तल से द्वितीय तल तक 2 मंजिल नीचे आना = 2 × 3 = 6 मीटर। कुल तय की गई दूरी = 12 + 6 = 18 मीटर।

(ii) ऊर्ध्वाधर विस्थापन का परिमाण: आरंभिक बिंदु (भूतल) से अंतिम बिंदु (द्वितीय तल) की सीधी दूरी = 2 × 3 मीटर = 6 मीटर (ऊपर की ओर)।

3. एक लड़की अपना स्कूटर चला रही है और पाती है कि इसके गतिमापी यंत्र का पाठ्यांक स्थिर है। क्या यह संभव है कि उसका स्कूटर त्वरणशील हो? और यदि ऐसा है तो कैसे?

उत्तर: हाँ, यह बिल्कुल संभव है। यदि लड़की अपना स्कूटर एकसमान चाल से किसी वृत्तीय पथ (मोड़) पर चला रही हो, तो गतिमापी का पाठ्यांक स्थिर रहेगा। परंतु लगातार दिशा बदलने के कारण उसके वेग में परिवर्तन होगा, और वेग में परिवर्तन होने के कारण स्कूटर की गति त्वरणशील (accelerated) होगी।

4. एक कार विरामावस्था से चलना आरंभ करती है और 6 s में इसका वेग 24 m s-1 हो जाता है। इन 6 s में इसका त्वरण और इसके द्वारा चलित दूरी ज्ञात कीजिए।

उत्तर: प्रारंभिक वेग (u) = 0 m/s, समय (t) = 6 s, अंतिम वेग (v) = 24 m/s

त्वरण (a): a = (v – u)/t = (24 – 0)/6 = 4 m s–2

दूरी (s): s = ut + ½at² = (0 × 6) + ½ × 4 × (6)² = 0 + 2 × 36 = 72 मीटर।

5. आरंभिक वेग 28 m s–1 एवं नियत त्वरण से गतिमान कोई मोटर साइकिल 98 m चल कर रुक जाती है। मोटर साइकिल का त्वरण तथा इसे विरामावस्था में आने में लगे समय का मान ज्ञात कीजिए।

उत्तर: प्रारंभिक वेग (u) = 28 m/s, अंतिम वेग (v) = 0 m/s (रुकने पर), दूरी (s) = 98 m

त्वरण (a): v² = u² + 2as ⇒ 0 = (28)² + 2 × a × 98 ⇒ 0 = 784 + 196a ⇒ 196a = -784 ⇒ a = -4 m s–2 (ऋणात्मक चिह्न मंदन दर्शाता है)।

समय (t): v = u + at ⇒ 0 = 28 + (-4)t ⇒ 4t = 28 ⇒ t = 7 सेकंड।

6. चित्र 4.27 दो ऐसी वस्तुओं A एवं B का स्थिति-समय ग्राफ दर्शाता है जो समांतर सरल रेखीय पथों पर एक ही दिशा में गतिमान हैं। क्या वस्तुओं A एवं B का वेग कभी बराबर होगा? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क दीजिए।

उत्तर: हाँ, वस्तुओं A और B का वेग हमेशा बराबर ही रहेगा। स्थिति-समय ग्राफ में किसी सरल रेखा की प्रवणता (slope) वस्तु के वेग को दर्शाती है। चूँकि दोनों रेखाएँ एक-दूसरे के समांतर हैं, इसलिए उनकी प्रवणता समान है, जिसका अर्थ है कि दोनों का वेग एक समान है।

7. चित्र 4.28 में दिया गया ग्राफ सरल रेखा में गतिमान दो वस्तुओं A एवं B के लिए 0 – 10 सेकंड के बीच उनकी स्थितियों में समय के साथ होने वाले परिवर्तन को दर्शाता है। सही विकल्प या विकल्पों का चयन कीजिए—

(i) 10 s समय अंतराल में दोनों का माध्य वेग बराबर है क्योंकि उनकी आरंभिक और अंतिम स्थितियाँ समान हैं। 

(ii) 10 s समय अंतराल में दोनों की माध्य-चाल बराबर है क्योंकि ये दोनों समान समय में समान दूरियाँ चलते हैं। 

(iii) 10 s समय अंतराल में A की माध्य-चाल B की माध्य-चाल से कम है क्योंकि 10 s में इसके द्वारा चलित दूरी B द्वारा चलित दूरी से कम है।

(iv) 10 s समय अंतराल में A की माध्य-चाल B की माध्य-चाल से अधिक है, क्योंकि कुछ काल-खंडों में B की चाल A की चाल से कम है।

उत्तर: (i) 10 s समय अंतराल में दोनों का माध्य वेग बराबर है क्योंकि उनकी आरंभिक और अंतिम स्थितियाँ समान हैं।

8. 54 km h–1 की चाल से चलता हुआ एक ट्रक चालक सड़क के किनारे लगा एक यातायात निर्देश-पट (चित्र 4.29) देखता है जिसमें ट्रकों के लिए गतिसीमा 40 km h–1 सूचित की गई है। वह 36 s में अपनी चाल घटाकर 36 km h–1 पर ले आता है। इस समयावधि में उसके द्वारा चलित दूरी कितनी थी? यह मान लीजिए कि चाल घटाने की अवधि में उसका त्वरण अचर था।

उत्तर: u = 54 km/h = 54 × (5/18) = 15 m/s

v = 36 km/h = 36 × (5/18) = 10 m/s

समय (t) = 36 s

त्वरण (a) = (v – u)/t = (10 – 15) / 36 = -5/36 m s–2

दूरी (s) = ut + ½at² = 15(36) + ½(-5/36)(36)² = 540 – 90 = 450 मीटर।

9. एक कार विरामावस्था से गति आरंभ करती है और एकसमान त्वरण से 5 s में 20 m s–1 का वेग प्राप्त कर लेती है। इसके पश्चात् 10 s तक यह 20 m s–1 के वेग से चलती है और अंततः ब्रेक लगा कर (एकसमान त्वरण से) 6 सेकंड में रुक जाती है। इसके द्वारा चलित कुल दूरी ज्ञात कीजिए।

उत्तर: त्वरण वाला भाग (पहले 5s): u = 0, v = 20 m/s, t = 5s। दूरी (s₁) = ut + ½at²। पहले त्वरण निकालें: a = (20-0)/5 = 4 m/s²। s₁ = 0 + ½(4)(25) = 50 m

नियत वेग वाला भाग (अगले 10s): वेग = 20 m/s, समय = 10 s। दूरी (s₂) = वेग × समय = 20 × 10 = 200 m

मंदन वाला भाग (अंतिम 6s): u = 20 m/s, v = 0, t = 6s। त्वरण a = (0 – 20)/6 = -10/3 m/s²। दूरी (s₃) = ut + ½at² = 20(6) + ½(-10/3)(36) = 120 – 60 = 60 m

कुल दूरी: s₁ + s₂ + s₃ = 50 + 200 + 60 = 310 मीटर।

10. एक बस 36 km h–1 के वेग से गतिमान है तभी चालक को 30 m आगे एक अवरोध दिखाई पड़ता है। ब्रेक लगाने की प्रतिक्रिया में उसे 0.5 s का समय लगता है। ब्रेक लगाने के पश्चात् बस का वेग 2.5 m s–2 के नियत त्वरण से कम होता है। क्या यह बस अवरोध तक पहुँचने से पहले रुकेगी?

उत्तर: बस का वेग (u) = 36 km/h = 10 m/s

प्रतिक्रिया काल (0.5 s) में तय दूरी = 10 m/s × 0.5 s = 5 m

ब्रेक लगाने के बाद रुकने की दूरी: v = 0, a = -2.5 m/s²। सूत्र v² = u² + 2as से, 0 = (10)² + 2(-2.5)s ⇒ 5s = 100 ⇒ s = 20 m

कुल तय दूरी = 5 m + 20 m = 25 m.

11. किसी विद्यार्थी ने कहा, “पृथ्वी सूर्य के चारों ओर गति करती है।” इस संदर्भ में चर्चा कीजिए कि क्या पृथ्वी पर रखी किसी वस्तु को विरामावस्था में माना जा सकता है।

उत्तर: गति का वर्णन हमेशा किसी संदर्भ बिंदु (Reference point) के सापेक्ष किया जाता है। यदि हम पृथ्वी को ही संदर्भ बिंदु मान लें, तो पृथ्वी पर रखी वस्तु की स्थिति समय के साथ पृथ्वी के सापेक्ष परिवर्तित नहीं होती है, अतः पृथ्वी पर रखी वस्तु को विरामावस्था में माना जा सकता है।

12. किसी साइकिल चालक के लिए 0 s से 120 s के बीच वेग-समय ग्राफ चित्र 4.30 में दर्शाया गया है। उन क्षेत्रफलों को छायांकित (अलग-अलग रंगों में) कीजिए जो इसका विस्थापन निरूपित करते हैं, जब—

(i) साइकिल चालक नियत वेग से चल रहा है।

(ii) साइकिल चालक का वेग कम हो रहा है। 0 –120 s समय अंतराल में विस्थापन एवं माध्य त्वरण का परिकलन भी कीजिए।

उत्तर: (i) जब चालक नियत वेग से चल रहा है (20s से 100s तक ग्राफ X-अक्ष के समांतर है), तो उसके नीचे का आयताकार क्षेत्रफल विस्थापन निरूपित करेगा।

(ii) जब वेग कम हो रहा है (100s से 120s तक), तो ढलान वाली रेखा के नीचे का त्रिभुजाकार क्षेत्रफल विस्थापन दर्शाएगा।

विस्थापन: वेग-समय ग्राफ और समय-अक्ष के बीच परिबद्ध कुल क्षेत्रफल विस्थापन के बराबर होता है। कुल क्षेत्रफल = (0 से 20s का त्रिभुज = ½ × 20 × 6 = 60 m) + (20 से 100s का आयत = 80 × 6 = 480 m) + (100 से 120s का त्रिभुज = ½ × 20 × 6 = 60 m) = कुल विस्थापन 600 मीटर।

माध्य त्वरण (0 से 120s): साइकिल शून्य वेग से शुरू होकर 120s पर शून्य वेग पर ही रुकती है। माध्य त्वरण a = (अंतिम वेग – प्रारंभिक वेग)/कुल समय = (0 – 0)/120 = 0 m s–2

13. एक लड़की किसी सीधी सड़क पर दौड़ कर अपनी पहली मैराथन दौड़ प्रतियोगिता की तैयारी कर रही है। विभिन्न समयावधियों में अपनी धावन-चाल के परिकलन के लिए वह एक स्मार्टवॉच का उपयोग करती है। चित्र 4.31 में दर्शाया गया वेग-समय ग्राफ विभिन्न क्षणों पर उसके वेग के मान को चित्रित करता है। ग्राफ के आधार पर उसके द्वारा दौड़ी गई दूरी का आकलन कीजिए।

उत्तर: दूरी ज्ञात करने के लिए वेग–समय (v–t) ग्राफ के नीचे का कुल क्षेत्रफल निकाला जाता है।

ग्राफ से अनुमानित मान लेकर,

0–2 h का क्षेत्रफल = 7.0 + 7.5/2 × 2 = 14.5

2–4 h का क्षेत्रफल = 7.5 + 7.2/2 × 2 = 14.7

4–6 h का क्षेत्रफल = 7.2 + 6.5​/2 × 2 = 13.7

अतः,

कुल दूरी = 14.5 + 14.7 + 13.7 = 42.9 ≈ 43

अतः लड़की द्वारा दौड़ी गई कुल दूरी = 43 km (लगभग)।

14. किसी राज्य-राजमार्ग पर प्रवेश करने के पश्चात् एक कार 2 मिनट तक 6 m s–1 के नियत वेग से चलती है और फिर 6 सेकंड तक 1 m s–2 के नियत त्वरण से त्वरित होती है। इस कार की गति के लिए वेग-समय ग्राफ बना कर 2 मिनट 6 सेकंड की अवधि में राज्य के राजमार्ग पर कार का विस्थापन ज्ञात कीजिए।

उत्तर: पहले 2 मिनट (120 s) तक नियत वेग (6 m/s): दूरी = वेग × समय = 6 × 120 = 720 m

अगले 6 s तक त्वरित गति (a = 1 m/s², प्रारंभिक वेग u = 6 m/s): दूरी = ut + ½at² = 6(6) + ½(1)(6)² = 36 + 18 = 54 m

कुल विस्थापन: 720 m + 54 m = 774 मीटर।

15. दो कारें A एवं B सरल रेखा में नियत त्वरण से विरामावस्था से गति आरंभ करती हैं। कार A 5 s में 5 m s–1 वेग प्राप्त करती है। जबकि कार B, 10 s में 3 m s–1 वेग प्राप्त करती है। एक ही ग्राफपेपर पर दोनों कारों के वेग-समय ग्राफ आलेखित कीजिए। इस ग्राफ का उपयोग करके दी गई दोनों समयावधियों में विस्थापन के मान परिकलित कीजिए।

उत्तर: ग्राफ पर कार A की रेखा मूल बिंदु (0,0) से बिंदु (5, 5) तक जाएगी, और कार B की रेखा मूल बिंदु से (10, 3) तक जाएगी।

कार A का विस्थापन: ग्राफ के नीचे बने त्रिभुज का क्षेत्रफल = ½ × आधार × ऊँचाई = ½ × 5 × 5 = 12.5 m।

कार B का विस्थापन: ग्राफ के नीचे बने त्रिभुज का क्षेत्रफल = ½ × 10 × 3 = 15 m.

16. रोहन घर पर शाम के 6 बजे से 7:30 बजे तक विज्ञान का अध्ययन करता है। उसकी दीवार घड़ी (चित्र 4.32) की मिनट की सुई की लंबाई 7 cm है। परिकलन कीजिए, दी गई समयावधि में इस सुई के सिरे—

(i) द्वारा चलित दूरी।

(ii) का विस्थापन।

(iii) की चाल तथा।

(iv) का वेग।

उत्तर: समय = 6:00 से 7:30 = 90 मिनट = 1.5 घंटा (5400 सेकंड)। इस दौरान सुई 1.5 चक्कर पूरे करेगी। सुई की लंबाई (r) = 7 cm।

(i) दूरी: 1.5 चक्कर की परिधि = 1.5 × (2πr) = 1.5 × 2 × (22/7) × 7 = 66 cm

(ii) विस्थापन: 1.5 चक्कर के बाद सुई का सिरा ठीक विपरीत दिशा (व्यास के छोर) पर होगा। विस्थापन = 2 × r = 14 cm।

(iii) चाल: दूरी / समय = 66 cm / (90 × 60 s) = 66 / 5400 = 0.0122 cm/s

(iv) वेग: विस्थापन / समय = 14 cm / 5400 s = 0.0026 cm/s

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Scroll to Top