NCERT Class 9 Science Chapter 3 क्रियाशील ऊतक

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NCERT Class 9 Science Chapter 3 क्रियाशील ऊतक

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Chapter: 3

TEXTUAL SOLUTIONS

चिंतन कीजिए (Page No. 28)

1. जैव प्रक्रमों और मानव कल्याण को समझने के लिए कोशिकाओं और ऊतकों का अध्ययन किस प्रकार से महत्त्वपूर्ण है?

उत्तर: कोशिकाएं ऊतक बनाने के लिए समूहित होती हैं, और ऊतक अंग तथा अंग तंत्र बनाते हैं। विभिन्न प्रकार के ऊतकों का निर्माण श्रम विभाजन की ओर ले जाता है, जिससे शरीर की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है और जटिल जैव प्रक्रम संपन्न होते हैं।

2. पादप और जंतुओं के ऊतक किस प्रकार भिन्न हैं और क्यों?

उत्तर: अधिकांश पादप स्थिर होते हैं, इसलिए उन्हें दृढ़ता और अवलंब (सहारे) की आवश्यकता होती है, जिसके लिए पादप कोशिकाओं में कोशिका भित्ति होती है। जंतु गतिशील होते हैं और उन्हें लचीलेपन की आवश्यकता होती है, इसलिए वे बिना कोशिका भित्ति के सरलता से आकार परिवर्तित कर सकते हैं। दोनों में पोषण की विधि और वृद्धि के पैटर्न भी अलग-अलग होते हैं।

3. बहुकोशिकीय जीवों में संगठन के विभिन्न स्तरों पर श्रम विभाजन किस प्रकार उनकी संरचना और कार्य से संबंधित है?

उत्तर: समान संरचना वाली कोशिकाएं जो समान कार्य करती हैं, मिलकर ऊतक बनाती हैं और विशिष्ट कार्य करती हैं। यह श्रम विभाजन शरीर की कार्यक्षमता को बढ़ाता है, जैसे जंतुओं में पेशीय ऊतक गति के लिए और पादपों में संवहन ऊतक परिवहन के लिए बने होते हैं।

सोचिए और बताइए (Page No. 33, 34 and 40)

1. आपने देखा होगा कि नारियल के रेशे के तंतु कठोर और भंगुर होते हैं जबकि धनिए के पर्णवृंत नरम और लचीले होते हैं। कारण जानने का प्रयास कीजिए।

उत्तर: नारियल के रेशे ‘दृढ़ोतक’ (sclerenchyma) ऊतक से बने होते हैं। इन ऊतकों की कोशिकाओं की भित्ति में लिग्निन का निक्षेपण होता है, जो उन्हें मोटी, बहुत कठोर और सुदृढ़ बनाता है। इसके विपरीत, धनिए के पर्णवृंत (डंठल) में ‘श्लेषोतक’ (collenchyma) ऊतक होता है। यह ऊतक पौधों को सहारा देने के साथ-साथ लचीलापन प्रदान करता है, जिससे ये बिना टूटे आसानी से मुड़ और झुक सकते हैं।

2. आपके विचार में मरुस्थल में रहने वाले पादपों की बाह्यत्वचा की बाहरी भित्ति की मोटी उपत्वचा (cuticle) मरुस्थलीय पादपों के लिए लाभदायक एवं जलमग्न पादपों के लिए हानिकारक क्यों है?

उत्तर: मरुस्थलीय पादपों के लिए मोटी उपत्वचा अत्यंत लाभदायक है क्योंकि यह अत्यंत शुष्क पर्यावरण में रंध्रों द्वारा होने वाले वाष्पोत्सर्जन (transpiration) की प्रक्रिया को कम करके जल की हानि को रोकती है। दूसरी ओर, जलमग्न (पानी में डूबे हुए) पौधों के लिए यह हानिकारक है क्योंकि मोटी परत होने से पानी के भीतर आवश्यक गैसों और जल के सुचारू विनिमय (exchange) में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

3. पादप की जड़ों द्वारा जल अवशोषित होने पर तो इसे जाइलम के माध्यम से गुरुत्वाकर्षण के विपरीत गति करनी होती है। जाइलम की ‘मृत’ कोशिकाएं ऊपरी पत्तियों की सजीव कोशिकाओं के साथ मिलकर जल को गतिमान रखने के लिए किस प्रकार कार्य करती हैं?

उत्तर: पत्तियों की बाह्यत्वचा में मौजूद रंध्र (stomata) वाष्पोत्सर्जन का कार्य करते हैं। जब पत्तियों से पानी वाष्प बनकर उड़ता है, तो यह जाइलम में एक ‘वाष्पोत्सर्जन अभिकर्षण’ (Transpiration pull) उत्पन्न करता है। यही अभिकर्षण बल जाइलम की मृत नलीनुमा कोशिकाओं (वाहिनिकाओं और वाहिकाओं) में गुरुत्वाकर्षण के विपरीत जल को ऊपर की ओर खींचने और गतिमान रखने में सहायता करता है।

4. यदि तने या पत्तियों की बाह्यत्वचा में रंध्र न हों तो आपके विचार में क्या होगा?

उत्तर: यदि पत्तियों या तने की बाह्यत्वचा में रंध्र (stomata) नहीं होंगे, तो पौधे गैसीय विनिमय (ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान) नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रिया रुक जाएगी, जिससे जाइलम में जल परिवहन के लिए आवश्यक ‘वाष्पोत्सर्जन अभिकर्षण’ उत्पन्न नहीं हो सकेगा और पादप शरीर से अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन भी बाधित हो जाएगा।

5. नीचे दिया गया चित्र (चित्र 3.17) देखिए। भारत के शास्त्रीय और लोक नृत्यों की विभिन्न मुद्राओं का ध्यानपूर्वक अवलोकन कीजिए। क्या आप पहचान सकते हैं कि इन मुद्राओं में कौन-सी संधियाँ सम्मिलित हैं? साथ ही प्रत्येक संधि से किस प्रकार की गति संभव होती है?

उत्तर: नृत्य की विभिन्न मुद्राओं में मुख्य रूप से कंकाल तंत्र की ये संधियाँ (joints) सम्मिलित होती हैं:

(i) कंदुक-खल्लिका संधि (Ball and socket joint): यह संधि कंधे और कूल्हे में होती है। यह भुजाओं और पैरों को अग्र, पश्च, पार्श्व (बगल) और गोलाकार (मुक्त) दिशा में गति करने में सक्षम बनाती है।

(ii) कोर संधि (Hinge joint): यह घुटने और कोहनी में पाई जाती है। यह दरवाजे के कब्ज़े की तरह केवल एक दिशा में मुड़ने और सीधा होने की गति संभव बनाती है।

(iii) धुराग्र संधि (Pivot joint): यह संधि गर्दन (खोपड़ी और मेरुदंड के जुड़ाव) पर होती है, जो सिर की ऊपर-नीचे और दाएं-बाएं घुमावदार गति को संभव बनाती है।

अभ्यास प्रश्न

1. विभज्योतकी ऊतक बार-बार विभाजित होते हैं। इनकी कोशिकाओं की कौन-सी विशेषताएं इनके लिए ऐसा करना संभव बनाती हैं?

(i) इनमें सुरक्षा के लिए मोटी भित्तियाँ होती हैं।

(ii) इनमें पोषक तत्वों को संग्रहित करने वाली बड़ी रसधानियाँ होती हैं।

(iii) इनमें पतली भित्तियाँ, सघन कोशिकाद्रव्य और बड़ा और स्पष्ट केंद्रक होता है।

(iv) वे कार्यात्मक रूप से विभेदित कोशिकाएं हैं।

उत्तर: (iii) इनमें पतली भित्तियाँ, सघन कोशिकाद्रव्य और बड़ा और स्पष्ट केंद्रक होता है।

2. यदि कोई पादप पत्तियों से जड़ों तक भोजन परिवहन करने में असमर्थ है तो ऐसा किस ऊतक की असामान्य प्रणाली के कारण होता है?

(i) जाइलम।

(ii) फ्लोएम।

(iii) बाह्यत्वचा।

(iv) दृढ़ोतक।

उत्तर: (ii) फ्लोएम।

3. जंतुओं के आंतरिक अंगों को आस्तरित करने वाले उपकला ऊतक प्रायः केवल एक या कुछ कोशिकाओं की मोटाई के क्यों होते हैं?

(i) भोजन को प्रभावी रूप से संग्रहीत करने के लिए।

(ii) अधिकतम दृढ़ता प्रदान करने के लिए।

(iii) उनसे होकर पदार्थों के त्वरित आदान-प्रदान के लिए।

(iv) घर्षण कम करने के लिए।

उत्तर: (iii) उनसे होकर पदार्थों के त्वरित आदान-प्रदान के लिए।

4. आप चित्र में दिखाए गए अनुसार दो प्रकार से कूद सकते हैं (चित्र 3.21)—

टाँग सीधी रखकर कूदना — घुटनों और टखनों को सीधा रखिए।

सामान्य रूप से कूदना — घुटनों और टखनों को स्वाभाविक रूप से मोड़िए।

दोनों बार कूदने में आपके टखने, घुटने और कूल्हे की स्थिति किस प्रकार भिन्न थीं?

उत्तर: टाँग सीधी रखकर कूदते समय घुटने और टखने की संधियां स्थिर रहती हैं। जबकि सामान्य रूप से कूदते समय, घुटनों की ‘कोर संधियों’ में और कूल्हे की ‘कंदुक-खल्लिका संधियों’ में मुड़ाव और गति होती है।

5. जब आप अपने घुटने और टखने मोड़ते हैं तो किस प्रकार की संधि का उपयोग होता है?

(i) कंदुक खल्लिका।

(ii) कोर।

(iii) धुराग्र।

उत्तर: (ii) कोर।

6. निम्नलिखित में से प्रत्येक स्थिति (I, II, III और IV) के लिए नीचे दिए गए सही विकल्प का चयन कीजिए—

(i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण, अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

(ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं किंतु कारण, अभिकथन की सही व्याख्या नहीं करता है।

(iii) अभिकथन सत्य है, किंतु कारण असत्य है।

(iv) अभिकथन असत्य है, किंतु कारण सत्य है।

I. अभिकथन — उपकला फेफड़ों में गैस विनिमय के लिए अधिक उपयुक्त है। कारण — इसमें लंबी कोशिकाओं की अनेक परतें होती हैं जो विसरण की गति को धीमा कर देती हैं।

उत्तर: (iii) अभिकथन सत्य है, किंतु कारण असत्य है। कारण: असत्य है क्योंकि विनिमय के लिए उपकला पतली और चपटी कोशिकाओं की एकल परत होती है।

II. अभिकथन — हृद पेशी बिना थके निरंतर संकुचन कर सकती है। कारण — हृद पेशी कोशिकाओं में अधिक संख्या में माइटोकॉन्ड्रिया और प्रचुर मात्रा में रक्त की आपूर्ति होती है।

उत्तर: (i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण, अभिकथन की सही व्याख्या करता है। कारण: हृदय की पेशियां जीवनपर्यन्त बिना थके निरंतर स्पंदन करती हैं।

III. अभिकथन — कंडराएं एक अस्थि को दूसरी अस्थि से जोड़ती हैं और संधि की गति को संभव बनाती हैं। कारण — कंडराएं सुदृढ़ संयोजी ऊतक से बनी होती हैं जो पेशी से अस्थि तक बल का संचरण करती हैं।

उत्तर: (iv) अभिकथन असत्य है, किंतु कारण सत्य है। कारण: अभिकथन असत्य है क्योंकि कंडराएं मांसपेशी को अस्थि से जोड़ती हैं, जबकि अस्थि को अस्थि से स्नायु जोड़ते हैं।

IV. अभिकथन — कोर संधि में गति मुख्यतः एक तल में होती है। कारण — अस्थियों के सिरे सभी दिशाओं में स्पर्शी गति करने हेतु आकारित होते हैं।

उत्तर: (iii) अभिकथन सत्य है, किंतु कारण असत्य है। कारण: असत्य है क्योंकि कोर संधि (जैसे कोहनी और घुटना) केवल एक ही दिशा में मुड़ती है, सभी दिशाओं में नहीं।

7. तालिका 3.7 में दिए गए आँकड़ों का उपयोग करके X-अक्ष पर वृक्ष की आयु (वर्षों में) और Y-अक्ष पर समय के साथ वृक्ष का व्यास (cm में) तथा निर्मित वार्षिक वलयों की संख्या के मध्य एक ग्राफ बनाइए।

तालिका 3.7 — सागवान के वृक्ष की आयु और तदनुरूप तने के व्यास में वृद्धि तथा वार्षिक वलयों की संख्या से संबंधित आँकड़े

क्र.सं.सागवान के वृक्ष की आयु (वर्ष)वृक्ष का व्यास DBH (cm)निर्मित वार्षिक वलयों की संख्या
1. 545
2. 10810
3.202420
4.252825
5.303230
6.404040

(i) समय के साथ तने के व्यास के संदर्भ में ग्राफ का विश्लेषण कीजिए और अपने निष्कर्ष साझा कीजिए।

उत्तर: इस ग्राफ का विश्लेषण यह दर्शाता है कि समय (वृक्ष की आयु) और तने के व्यास में सीधा और सकारात्मक (समानुपाती) संबंध है। हमारा निष्कर्ष यह है कि जैसे-जैसे वृक्ष की आयु बढ़ती है, तने का व्यास भी उसी अनुपात में बढ़ता जाता है।

(ii) सागवान के वृक्ष के व्यास और निर्मित वार्षिक वलयों के बीच क्या संबंध है?

उत्तर: वृक्ष के व्यास और निर्मित वार्षिक वलयों के बीच सीधा संबंध है। वृक्ष की आयु के हर वर्ष के साथ एक नया वार्षिक वलय निर्मित होता है, जो वृक्ष की आयु और तने के व्यास में होने वाली वृद्धि को प्रत्यक्ष रूप से दर्शाता है।

(iii) तने की परिधि में वृद्धि के लिए कौन-सा विशेषीकृत ऊतक उत्तरदायी है और यह कहाँ स्थित होता है?

उत्तर: तने की परिधि (मोटाई) में वृद्धि के लिए पार्श्व विभज्योतक (lateral meristem) विशेषीकृत ऊतक उत्तरदायी है। यह ऊतक तने की परिधि के अनुदिश स्थित होता है।

8. एक वन में देखा गया कि एक हाथी ने अपनी भोजन की आवश्यकता पूरी करने के लिए एक वृक्ष की छाल को बुरी तरह उखाड़ दिया क्योंकि छाल पोषक तत्वों का एक समृद्ध स्रोत होती है (चित्र 3.22)। अपने अधिगम के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—

(i) छाल उखड़ने से वृक्ष का/के कौन-सा/से कार्य बाधित होता/होते है/हैं?

उत्तर: छाल (बाह्यत्वचा/काग) पौधे के आंतरिक अंगों की रक्षा करती है और जल-हानि को रोकती है, अतः छाल उखड़ने से सुरक्षा और जल-संरक्षण का कार्य बाधित होगा। इसके अलावा, छाल के ठीक नीचे भोजन का परिवहन करने वाला संवहन ऊतक ‘फ्लोएम’ होता है, इसलिए पत्तियों द्वारा तैयार भोजन का जड़ों तक परिवहन भी बाधित हो जाएगा।

(ii) छाल उखड़ने के बाद भी वृक्ष के तने को और क्षति होने पर पादप का कौन-सा ऊतक प्रभावित होगा?

उत्तर: छाल और फ्लोएम के उखड़ने के बाद तने के भीतरी भाग को और क्षति होने पर पादप का दूसरा संवहन ऊतक जाइलम (Xylem) प्रभावित होगा।

(iii) यदि छाल के नीचे के ऊतक गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाएँ तो वृक्ष का कौन-सा कार्य बाधित होगा?

उत्तर: यदि छाल के नीचे स्थित जाइलम ऊतक गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो जड़ों द्वारा अवशोषित जल और खनिज लवणों का पादप के अन्य भागों (जैसे ऊपरी पत्तियों) तक परिवहन पूरी तरह से बाधित हो जाएगा।

(iv) उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर देने के लिए आप क्या पूर्वानुमान लगाते हैं? यदि आपके पूर्वानुमानों में परिवर्तन हो तो उत्तर में क्या अंतर आएगा?

उत्तर: पूर्वानुमान: उपर्युक्त उत्तर देने के लिए हम यह पूर्वानुमान लगाते हैं कि हाथी ने बाहरी छाल के साथ-साथ भीतरी सजीव ‘फ्लोएम’ को भी पूरी तरह से नष्ट कर दिया है, जिससे पौधे में भोजन का परिवहन रुक जाएगा और पौधा सूख सकता है।

पूर्वानुमान में परिवर्तन का अंतर: यदि हम यह पूर्वानुमान लगाएँ कि हाथी ने केवल मृत बाहरी काग (cork) को ही उखाड़ा है और आंतरिक सजीव फ्लोएम तथा काग एधा (cork cambium) सुरक्षित हैं, तो उत्तर में यह अंतर आएगा कि पौधे का भोजन परिवहन सुचारू रूप से चलता रहेगा। काग एधा की कोशिकाएं विभाजित होकर फिर से नई सुरक्षात्मक छाल का निर्माण कर लेंगी और वृक्ष बच जाएगा।

9. आम्रपाली ने देखा कि आम के एक नवोद्भिद पौधे का तना मानसून की हवाओं में लचीला होकर मुड़ जाता है किंतु टूटता नहीं। इस लचीलेपन के लिए कौन-सा ऊतक उत्तरदायी है? यदि विद्यमान ऊतक को दृढ़ोतक से प्रतिस्थापित कर दिया जाए तो क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका पूर्वानुमान लगाइए और व्याख्या कीजिए।

उत्तर: आम के तने के इस लचीलेपन के लिए श्लेषोतक (collenchyma) ऊतक उत्तरदायी है, जो पौधे को सहारा देने के साथ-साथ बिना टूटे मुड़ने की क्षमता (लचीलापन) प्रदान करता है। यदि इस विद्यमान ऊतक को दृढ़ोतक (sclerenchyma) से प्रतिस्थापित कर दिया जाए, तो तना बहुत कठोर और भंगुर हो जाएगा। इसका कारण यह है कि दृढ़ोतक कोशिकाओं की भित्ति में लिग्निन का निक्षेपण होता है, जो उन्हें मोटी, बहुत कठोर और मृत बनाता है। इसका प्रभाव यह होगा कि तेज हवा चलने पर तना लचीलेपन से मुड़ने के बजाय आसानी से टूट जाएगा।

10. सोहन ने गन्ने के पुनरुद्भवन के लिए एक प्रयोग अभिकल्पित किया जिसमें उसने गन्ना उगाने के लिए कलम (cutting) का उपयोग किया। उसने दो प्रकार की कलम, प्रकार ‘क’ और प्रकार ‘ख’ (चित्र 3.23) का उपयोग किया। कुछ सप्ताह बाद, प्रकार ‘ख’ की कलम में अंकुर दिखाई दिए और वे गन्ने के पादप में विकसित हो गए जबकि प्रकार ‘क’ की कलम में अंकुरण नहीं हुआ।

(i) प्रकार ‘ख’ की कलम ने गन्ने के रूप में क्यों वृद्धि की किंतु प्रकार ‘क’ ने क्यों नहीं की?

उत्तर: प्रकार ‘ख’ की कलम में पर्वसंधि (node) मौजूद है, जहाँ अंतर्वेशी विभज्योतक (intercalary meristem) पाया जाता है, जो नई शाखाओं के विकास और वृद्धि (पुनरुद्भवन) के लिए उत्तरदायी है। ‘क’ में यह ऊतक अनुपस्थित था, इसलिए उसने वृद्धि नहीं की।

(ii) प्रकार ‘ख’ में प्रकार ‘क’ की तुलना में क्या अंतर था?

उत्तर: प्रकार ‘ख’ में तने की पर्वसंधि (node) उपस्थित थी, जबकि प्रकार ‘क’ में केवल दो पर्वसंधियों के बीच का भाग यानी पर्व (internode) ही था।

(iii) इस परिवर्तन के प्रभाव का निर्धारण करने के लिए कौन-सा प्रेक्षण अथवा मापन किया गया?

उत्तर: इस परिवर्तन का निर्धारण करने के लिए कलम से नए अंकुरों का निकलना और उसका एक नए गन्ने के पौधे के रूप में विकसित होने का प्रेक्षण किया गया।

(iv) उचित तुलना सुनिश्चित करने के लिए दोनों प्रकार की कलम में कौन-से मानदंड समान रखने चाहिए?

उत्तर: (iv) उचित तुलना सुनिश्चित करने के लिए दोनों कलमों को उगाने के लिए उपयोग की गई मिट्टी, तापमान, जल की मात्रा, और सूर्य के प्रकाश (पर्यावरणीय परिस्थितियां) जैसे भौतिक मानदंड बिल्कुल समान रखने चाहिए।

11. कक्षा में चर्चा के समय रोहन कहता है—“ऊतक समान कोशिकाओं का एक समूह है जो समान कार्य करता है” किंतु राजीव इसका प्रतिवाद करते हुए कहता है—“यह सरल ऊतकों की स्थिति में सत्य है किंतु जटिल ऊतकों की स्थिति में थोड़ा भिन्न है।” कक्षा में हुई चर्चा के संदर्भ में अपना स्पष्टीकरण दीजिए।

उत्तर: रोहन का कथन सरल स्थायी ऊतकों (जैसे मृदूतक, श्लेषोतक) के संदर्भ में बिल्कुल सत्य है क्योंकि ये ऊतक केवल एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं। लेकिन राजीव का प्रतिवाद भी वैज्ञानिक दृष्टि से सही है क्योंकि जटिल स्थायी ऊतक (जैसे संवहन ऊतक – जाइलम और फ्लोएम) एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं। उदाहरण के लिए, जाइलम में वाहिनिकाएं, वाहिकाएं, जाइलम मृदूतक और जाइलम तंतु होते हैं जो अलग-अलग प्रकार के होते हुए भी मिलकर जल परिवहन का एक समान कार्य करते हैं।

12. नारियल के कठोर और रेशेदार तंतुओं का उपयोग चटाई बनाने के लिए किया जाता है। कौन-से ऊतक में यह दृढ़ता प्रदान करने के लिए उपयुक्त संरचनात्मक विशेषताएँ होती हैं? स्पष्ट कीजिए कि सजीव मृदूतक से इस उद्देश्य की पूर्ति क्यों नहीं हो सकती है।

उत्तर: नारियल के रेशेदार तंतुओं में दृढ़ता प्रदान करने के लिए दृढ़ोतक (sclerenchyma) ऊतक होता है। इस ऊतक की कोशिकाओं की भित्ति में लिग्निन का निक्षेपण होता है, जो इन्हें मोटी, बहुत कठोर और सुदृढ़ बनाता है। सजीव मृदूतक (parenchyma) से इस उद्देश्य (चटाई बनाने) की पूर्ति नहीं हो सकती क्योंकि मृदूतक की कोशिका भित्ति पतली होती है, कोशिकाएं विरल रूप से व्यवस्थित होती हैं और यह ऊतक मुख्यतः भोजन भंडारण और प्रकाश-संश्लेषण का कार्य करता है, कठोरता प्रदान करने का नहीं।

13. विभा अपनी सहेली नेहा से कहती है—“विभज्योतकी कोशिकाएँ केवल जड़ और प्ररोह के अग्रभाग (शीर्ष) पर स्थित होती हैं।” आप इस कथन के विषय में क्या सोचते हैं? यदि कथन असत्य है तो नेहा विभा से कौन-सा प्रश्न पूछ सकती है जिससे वह इसे भली-भाँति समझ सके?

उत्तर: विभा का यह कथन असत्य है क्योंकि विभज्योतकी कोशिकाएं केवल शीर्ष पर ही स्थित नहीं होती हैं। पौधों में तीन प्रकार के विभज्योतकी ऊतक होते हैं: शीर्षस्थ, पार्श्व (lateral), और अंतर्वेशी (intercalary)। विभा को भली-भांति समझाने के लिए नेहा उससे यह प्रश्न पूछ सकती है: “यदि विभज्योतक केवल जड़ों और प्ररोह के शीर्ष पर होते हैं, तो पेड़ के तने की मोटाई (परिधि) कैसे बढ़ती है (पार्श्व विभज्योतक के कारण) और जानवरों के चरने के बाद घास फिर से कैसे उग जाती है (अंतर्वेशी विभज्योतक के कारण)?”।

14. एक पादप कोशिका और एक जंतु कोशिका का आमाप समान है।

(i) किस कोशिका में रसधानी अपेक्षाकृत बड़ी होगी? कारण बताइए।

उत्तर: पादप कोशिका में रसधानी अपेक्षाकृत बहुत बड़ी होगी। पादप कोशिकाओं को अतिरिक्त जल, अपशिष्ट पदार्थों और भोजन के भंडारण के साथ-साथ कोशिका को कठोरता प्रदान करने के लिए एक बड़ी रसधानी की आवश्यकता होती है।

(ii) उपरोक्त प्रश्न का उत्तर देने के लिए आप क्या पूर्वानुमान लगाते हैं?

उत्तर: इस उत्तर के लिए हम यह पूर्वानुमान लगाते हैं कि दी गई पादप कोशिका एक स्थायी ऊतक की परिपक्व कोशिका है, न कि सक्रिय रूप से विभाजित होने वाले विभज्योतकी ऊतक की। क्योंकि, सक्रिय रूप से विभाजित होने वाले विभज्योतकी ऊतक की कोशिकाओं में आमतौर पर रसधानियाँ अनुपस्थित होती हैं।

15. एक पाठ्यपुस्तक में यह कहा गया है, “प्रत्येक पादप ऊतक केवल एक विशिष्ट कार्य करता है।” इस कथन की सत्यता की विवेचनात्मक जाँच करने के लिए आप कौन-से प्रश्न पूछेंगे? इन प्रश्नों के उत्तर खोजने के लिए आप किन ऊतकों के उदाहरण देंगे?

उत्तर: इस कथन की विवेचनात्मक जाँच के लिए हम यह प्रश्न पूछेंगे: “क्या कोई ऐसा पादप ऊतक है जो पौधे में एक से अधिक प्रकार के कार्य संपन्न करता है?” इस प्रश्न के उत्तर के लिए हम बाह्यत्वचा (epidermis) और मृदूतक (parenchyma) का उदाहरण देंगे।

(i) बाह्यत्वचा (epidermis) पौधे को सुरक्षा प्रदान करती है और साथ ही इसमें मौजूद रंध्र (stomata) गैसों के विनिमय तथा वाष्पोत्सर्जन का भी कार्य करते हैं।

(ii) इसी प्रकार, मृदूतक (parenchyma) भोजन का भंडारण भी करता है, पौधों के हरित भागों में प्रकाश-संश्लेषण भी करता है, और जलीय पौधों में तैरने (वायु गुहिकाओं के कारण) में भी सहायता करता है। अतः यह कथन पूर्णतः सत्य नहीं है कि प्रत्येक ऊतक केवल एक ही विशिष्ट कार्य करता है।

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