NCERT Class 9 Science Chapter 2 कोशिका — जीवन की निर्माण इकाई

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NCERT Class 9 Science Chapter 2 कोशिका — जीवन की निर्माण इकाई

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Chapter: 2

TEXTUAL SOLUTIONS

चिंतन कीजिए (Page No. 8)

1. कोशिका कहाँ से आती है?

उत्तर: कोशिका सिद्धांत के अनुसार, नई कोशिकाएँ हमेशा पहले से मौजूद (पूर्व-विद्यमान) जीवित कोशिकाओं के विभाजित होने से ही बनती हैं। कोई भी कोशिका अचानक से अपने-आप पैदा नहीं होती।

2. नग्न आँखों से परे संसार को समझने के लिए तकनीकी प्रयोगों ने नए ज्ञान के सृजन में किस प्रकार सहायता की है?

उत्तर: हमारी आँखें 0.1 mm से छोटी चीजों को अलग-अलग करके नहीं देख सकतीं। इसलिए नग्न आँखों से न दिखने वाली इस सूक्ष्म दुनिया को समझने में ‘सूक्ष्मदर्शी’ (Microscope) के आविष्कार ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। रॉबर्ट हुक ने 1665 में अपने बनाए सूक्ष्मदर्शी से ही पहली बार कोशिका को देखा था। समय के साथ प्रकाश सूक्ष्मदर्शी और फिर ‘इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी’ जैसी उन्नत तकनीकों के आने से वैज्ञानिकों के लिए कोशिका के भीतर के छोटे-छोटे अंगों (कोशिकांगों) को देखना और उनकी कार्यप्रणाली को समझना संभव हो पाया।

3. कोशिका जीवन की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई किस प्रकार है?

उत्तर: संरचनात्मक इकाई: सभी सजीव (चाहे वे एककोशिकीय हों या बहुकोशिकीय) कोशिकाओं से ही मिलकर बने होते हैं। जिस तरह ईंटों के जुड़ने से घर बनता है, वैसे ही कोशिकाओं के जुड़ने से ऊतक, अंग और पूरा शरीर बनता है।

कार्यात्मक इकाई: किसी भी जीव के जीवित रहने के लिए जरूरी सभी मूलभूत कार्य कोशिका के स्तर पर ही होते हैं। कोशिका के भीतर अलग-अलग ‘कोशिकांग’ मौजूद होते हैं, जो ऊर्जा बनाने, प्रोटीन का निर्माण करने और अपशिष्ट पदार्थों को हटाने जैसे सभी महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।

4. कोशिका किस प्रकार गुणन करती है?

उत्तर: कोशिकाएँ ‘कोशिका विभाजन’ (Cell division) की प्रक्रिया द्वारा गुणन करती हैं। जब कोशिका विभाजित होती है, तो वह नई कोशिकाएँ (संतति कोशिकाएँ) बनाती है।

यह विभाजन मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:

(i) समसूत्री विभाजन (Mitosis): शरीर की वृद्धि करने और पुरानी या चोटिल कोशिकाओं की मरम्मत के लिए यह विभाजन होता है, जिसमें एक कोशिका से दो समान कोशिकाएँ बनती हैं।

(ii) अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis): यह विभाजन जीवों में प्रजनन के समय ‘युग्मक’ (जैसे शुक्राणु और अंडाणु) बनाने के लिए होता है।

क्या होगा यदि (Page No. 12)

1. मूँग के बीजों को 12 घंटे तक जल में भिगोने के पश्चात एक सांद्र विलयन में रखा जाए, बताइए इनमें क्या परिवर्तन होगा?

उत्तर: जब हम मूँग के बीजों को 12 घंटे तक सादे पानी में भिगोते हैं, तो पानी ‘परासरण’ (osmosis) की वजह से बीजों के अंदर चला जाता है और बीज अच्छे से फूल जाते हैं।

अब, अगर हम इन्हीं फूले हुए बीजों को निकालकर किसी सांद्र विलयन (यानी एकदम गाढ़े चीनी या नमक के घोल) में डाल दें, तो स्थिति बिल्कुल उल्टी हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अब बीज के अंदर पानी ज्यादा है और बाहर के गाढ़े घोल में पानी कम है।

संतुलन बनाने के लिए, बीज के अंदर का पानी निकलकर वापस बाहर गाढ़े घोल में आ जाता है। इसका सीधा सा नतीजा ये होता है कि फूले हुए मूँग के बीज अपना पानी खो देते हैं और वापस सिकुड़ जाते हैं।

2. एक कोशिका को अलग-अलग सांद्रताओं के नमक या चीनी के विलयन में रखा जाए?

उत्तर: (i) समपरासारी विलयन (Isotonic): जब बाहर और अंदर की सांद्रता बराबर होती है, तो जल का कोई आदान-प्रदान नहीं होता और कोशिका का आकार वैसा ही रहता है।

(ii) अल्पपरासारी विलयन (Hypotonic): जब बाहर जल अधिक होता है, तो पानी कोशिका के अंदर घुसता है और कोशिका फूल जाती है।

(iii) अतिपरासारी विलयन (Hypertonic): जब बाहर जल कम (और विलेय ज्यादा) होता है, तो कोशिका के अंदर का पानी बाहर आ जाता है और कोशिका सिकुड़ जाती है।

सोचिए और बताइए (Page No. 14, 19 and 22)

1. एक स्थान से दूसरे स्थान पर गति करने वाले जंतुओं की अपेक्षा एक स्थान पर स्थिर रहने वाले पादपों में कोशिका भित्ति की आवश्यकता के संबंध में आप क्या तर्क देंगे?

उत्तर: जंतु तो चलकर किसी सुरक्षित जगह पर जा सकते हैं, लेकिन पौधे जीवन भर एक ही जगह पर टिके रहते हैं। इसलिए, पौधों को तेज हवा, बारिश और तापमान में बदलाव जैसी मुश्किल पर्यावरणीय स्थितियों को सहने के लिए एक्स्ट्रा मजबूती और सुरक्षा की जरूरत होती है। यही मजबूती और सहारा उन्हें ‘कोशिका भित्ति’ (Cell wall) से मिलता है।

2. यदि किसी पादप कोशिका की कोशिका भित्ति, कोशिका झिल्ली के समान लचीली हो जाए तो आप किन परिणामों का पूर्वानुमान लगाएंगे?

उत्तर: अगर पादप कोशिका की भित्ति झिल्ली की तरह लचीली हो गई, तो पौधा अपनी कठोरता और मजबूती खो देगा और सीधा खड़ा नहीं रह पाएगा। इसके अलावा, जब परासरण (osmosis) के कारण कोशिका के अंदर बहुत सारा पानी भरेगा, तो कठोर भित्ति के अभाव में कोशिका फूल कर फट भी सकती है (क्योंकि कठोर कोशिका भित्ति ही उसे अत्यधिक फूलने पर फटने से बचाती है)।

3. दो आलू के टुकड़ों को लगभग समान आकार में काट कर उन्हें विभिन्न तरल पदार्थों में रखने से पूर्व उनके आरंभिक भार का मापना क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: शुरुआती भार (initial weight) मापना इसलिए बहुत जरूरी है ताकि प्रयोग के अंत में हम उसकी तुलना फाइनल भार से कर सकें। इसी तुलना से तो हमें सटीक रूप से पता चलेगा कि परासरण (osmosis) की वजह से आलू के अंदर कितना पानी गया (जिससे भार बढ़ा) या आलू के अंदर से कितना पानी बाहर निकला (जिससे भार घटा)।

4. क्या सफेद फूलों में कोई वर्णक होता है? कारण बताइए।

उत्तर: बिल्कुल आम बोलचाल की भाषा में कहें तो, सफेद फूलों में कोई रंगीन वर्णक (pigment) नहीं होता। इसके बजाय, उनमें एक खास तरह का रंगहीन (बिना रंग वाला) लवक पाया जाता है जिसे ‘अवर्णी लवक’ (Leucoplast) कहते हैं। ग्रीक भाषा में ‘ल्यूकोस’ का मतलब ही ‘सफेद’ या ‘रंगहीन’ होता है। चूँकि इनमें कोई रंग नहीं होता, इसलिए ये सफेद दिखते हैं। इनका मुख्य काम फूल या पौधे को रंग देना नहीं है, बल्कि पौधे के लिए भोजन (जैसे- स्टार्च, तेल और प्रोटीन) को स्टोर करके (भंडारण) रखना है।

5. निम्न संकेतों का उपयोग करके एक पादप या जंतु कोशिका का सुस्पष्ट रूप से नामांकित आरेखी चित्र बनाइए—

(i) कोशिका के भीतर केंद्रक एक सघन और गोल पिंड के रूप में दिखाई देता है।

(ii) अंतर्द्रव्यी जालिका विस्तारित केंद्रक आवरण के संजाल की तरह फैलती है।

(iii) माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक छड़ाकार होते हैं।

उत्तर: 

6. एक कोशिका में अनेक छोटे-छोटे माइटोकॉन्ड्रिया की अपेक्षा एक विशाल माइटोकॉन्ड्रिया क्यों नहीं होता? यह पृष्ठीय क्षेत्रफल की अवधारणा से किस प्रकार संबंधित है?

उत्तर: माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका का ‘ऊर्जा केंद्र’ होता है और इसकी भीतरी झिल्ली उँगलियों की तरह मुड़ी हुई होती है, जिसे ‘क्रिस्टी’ (cristae) कहते हैं। ये मुड़ी हुई संरचनाएँ ऊर्जा (ATP) बनाने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं के लिए बहुत बड़ा पृष्ठीय क्षेत्रफल (surface area) प्रदान करती हैं। अगर कोशिका में सिर्फ एक ही बहुत बड़ा माइटोकॉन्ड्रिया होता, तो उसका कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल अपेक्षाकृत कम होता। इसके बजाय, अनेक छोटे-छोटे माइटोकॉन्ड्रिया होने से कोशिका के अंदर कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल बहुत अधिक बढ़ जाता है। क्षेत्रफल जितना ज्यादा होगा, कोशिका को काम करने के लिए ऊर्जा का निर्माण भी उतनी ही तेजी से और अधिक मात्रा में हो पाएगा।

7. यदि त्वचा की कोशिकाएँ समसूत्री विभाजन की अपेक्षा अर्धसूत्री विभाजन करने लगें तो आपके विचार से त्वचा के कटने पर क्या होगा?

उत्तर: हमारी त्वचा के कटने या चोट लगने पर घाव भरने और मरम्मत का काम ‘समसूत्री विभाजन’ (Mitosis) के द्वारा होता है। इस विभाजन की खासियत यह है कि इसमें नई बनने वाली कोशिकाएं बिल्कुल अपनी पुरानी कोशिकाओं के समान होती हैं और उनमें गुणसूत्रों (DNA) की संख्या भी बराबर रहती है। लेकिन, अगर त्वचा की कोशिकाएं ‘अर्धसूत्री विभाजन’ (Meiosis) करने लगें, तो नई बनने वाली संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या घट कर आधी रह जाएगी। इसका नतीजा यह होगा कि त्वचा का घाव सही तरीके से नहीं भर पाएगा और उस जगह की कोशिकाओं में आनुवंशिक (Genetic) असंतुलन पैदा हो जाएगा।

अभ्यास प्रश्न

1. कोष्ठक में दिए गए संकेतों के आधार पर निम्नलिखित युग्मों के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए—

(i) कोशिका झिल्ली और कोशिका भित्ति (पारगम्यता)।

उत्तर: 

कोशिका झिल्लीकोशिका भित्ति
यह चयनात्मक पारगम्य (Selectively Permeable) होती है।यह पूर्ण पारगम्य (Fully Permeable) होती है।
केवल कुछ पदार्थों को ही कोशिका के अंदर और बाहर जाने देती है।लगभग सभी पदार्थों को अपने आर-पार जाने देती है।
यह जीवित (Living) संरचना होती है।यह निर्जीव (Non-living) संरचना होती है।
यह सभी कोशिकाओं में पाई जाती है।यह केवल पादप कोशिकाओं (तथा कुछ अन्य जीवों) में पाई जाती है।

(ii) रुक्ष अंतर्द्रव्यी जालिका और चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका (संरचना)।

उत्तर: 

रुक्ष अंतर्द्रव्यी जालिकाचिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका
इसकी सतह पर राइबोसोम लगे होते हैं।इसकी सतह पर राइबोसोम नहीं होते हैं।
इसकी सतह खुरदरी दिखाई देती है।इसकी सतह चिकनी दिखाई देती है।
यह मुख्यतः प्रोटीन संश्लेषण का कार्य करती है।यह मुख्यतः वसा (लिपिड) संश्लेषण का कार्य करती है।
यह सामान्यतः केंद्रक के पास अधिक पाई जाती है।यह कोशिका के अन्य भागों में अधिक फैली रहती है।

(iii) हरितलवक और वर्णीलवक (वर्णक)।

उत्तर:

हरितलवकवर्णीलवक
इसमें हरित वर्णक (क्लोरोफिल) पाया जाता है।इसमें लाल, पीले या नारंगी वर्णक पाए जाते हैं।
यह प्रकाश संश्लेषण का कार्य करता है।यह प्रकाश संश्लेषण नहीं करता।
यह मुख्यतः पत्तियों और हरे भागों में पाया जाता है।यह मुख्यतः फूलों, फलों और रंगीन भागों में पाया जाता है।
यह पौधे को हरा रंग प्रदान करता है।यह पौधे के भागों को लाल, पीला या नारंगी रंग प्रदान करता है।

2. दो समान जंतु कोशिकाओं को दो अलग-अलग विलयनों में रखा जाता है—

कोशिका X को शुद्ध जल में रखा जाता है।

कोशिका Y को नमक के सांद्र विलयन में रखा जाता है।

कुछ समय पश्चात कोशिकाओं का अवलोकन किया जाता है। कोशिका X फूल जाती है और कोशिका Y संकुचित हो जाती है। निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उपर्युक्त अवलोकनों का सही स्पष्टीकरण है?

(i) नमक के अणु कोशिका Y में प्रवेश कर गए जिस कारण वह संकुचित हो गई।

(ii) कोशिका X में जल प्रवेश कर गया और कोशिका Y से बाहर गए जल की मात्रा उसमें प्रवेश कर गए नमक के विलयन की मात्रा से अधिक थी।

(iii) कोशिका झिल्ली के माध्यम से जल कोशिका X में प्रवेश कर गया और कोशिका Y से बाहर चला गया। (iv) विलेय के संचलन के कारण दोनों कोशिकाओं में परासरण हुआ।

उत्तर: (iii) कोशिका झिल्ली के माध्यम से जल कोशिका X में प्रवेश कर गया और कोशिका Y से बाहर चला गया।

3. चित्र 2.20 में एक कोशिका का चित्र देखिए। (क) से (छ) तक चिह्नित भागों की पहचान कीजिए और नीचे दिए गए कार्यों से उनका सही मिलान कीजिए—

(i) कोशिका की सभी गतिविधियों का नियंत्रण करना।

(ii) कोशिकीय श्वसन का स्थल।

(iii) भंडारण कोशिकांग जो कोशिका को दृढ़ता भी प्रदान करता है।

(iv) कोशिका के अवयवों को परिवेश से अलग करता है।

(v) कोशिका को संरचनात्मक दृढ़ता प्रदान करता है।

(vi) अंतर्द्रव्यी जालिका से प्राप्त सामग्री को पैक और संग्रहित करता है।

(vii) भोजन निर्माण में सहायता करता है।

उत्तर: (i) केंद्रक।

(ii) माइटोकॉन्ड्रिया।

(iii) रसधानी।

(iv) कोशिका झिल्ली।

(v) कोशिका भित्ति।

(vi) गॉल्जी उपकरण।

(vii) हरितलवक।

4. निम्नलिखित में से कोशिकांगों के कौन-से युग्म दिए गए वर्गों से सही सुमेलित हैं?

विकल्पपादप कोशिका में उपस्थितजंतु कोशिका में अनुपस्थित
(i)अवर्णी लवककोशिका भित्ति
(ii)माइटोकॉन्ड्रियाराइबोसोम
(iii)कोशिका भित्तिगॉल्जी उपकरण
(iv)लाइसोसोमअंतर्द्रव्यी जालिका

उत्तर: (i) अवर्णी लवक — कोशिका भित्ति।

कारण: अवर्णी लवक और कोशिका भित्ति, ये दोनों ही अंग केवल पादप (पौधे की) कोशिका में उपस्थित होते हैं, लेकिन जंतु कोशिका में ये दोनों ही अनुपस्थित होते हैं।

5. दो विद्यार्थी, रेणु और रोहित लवकों पर चर्चा कर रहे थे। रेणु ने इस बात पर बल दिया कि पौधों के सभी भागों में यहाँ तक कि जड़ों में भी लवक होते हैं। यद्यपि रोहित इस कथन से सहमत नहीं था और उसने बताया कि पादप की जड़ों में लवक अनुपस्थित होते हैं क्योंकि जड़ें भूमिगत होती हैं और उन्हें प्रकाश-संश्लेषण करने की आवश्यकता नहीं होती। कौन सही है? अपने उत्तर का औचित्य सिद्ध कीजिए।

उत्तर: रेणु सही है। पौधों की जड़ों (जैसे आलू, अरबी) में भी लवक होते हैं। चूँकि जड़ें भूमिगत होती हैं और उन्हें प्रकाश नहीं मिलता, इसलिए उनमें ‘अवर्णी लवक’ (Leucoplast) पाए जाते हैं, जो रंगहीन होते हैं और प्रकाश-संश्लेषण की जगह स्टार्च, तेल या प्रोटीन का भंडारण करते हैं।

6. माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक एक पादप कोशिका के दो महत्त्वपूर्ण कोशिकांग हैं। विवेचना कीजिए कि ये दोनों कोशिकांग संरचनात्मक और कार्यात्मक रूप से एक-दूसरे से किस प्रकार समान और भिन्न हैं?

उत्तर: माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक दोनों ही पादप कोशिका के बहुत ही महत्वपूर्ण अंग हैं।

इनमें निम्नलिखित समानताएं और भिन्नताएं पाई जाती हैं:

संरचनात्मक समानताएँ (Similarities):

(i) दोहरी झिल्ली: माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक दोनों ही दोहरी झिल्ली से घिरे हुए कोशिकांग हैं।

(ii) अपना DNA और राइबोसोम: इन दोनों में अपना खुद का DNA और राइबोसोम उपस्थित होता है, जिससे ये अपने कुछ प्रोटीन स्वयं बना सकते हैं।

कार्यात्मक और संरचनात्मक भिन्नताएँ (Differences):

(i) मुख्य कार्य: माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका का ‘ऊर्जा केंद्र’ है जो कोशिकीय श्वसन द्वारा ऊर्जा (ATP) बनाता है। जबकि, हरितलवक सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके प्रकाश-संश्लेषण द्वारा पौधे के लिए भोजन बनाता है।

(ii) आंतरिक संरचना: माइटोकॉन्ड्रिया की भीतरी झिल्ली मुड़कर उंगली जैसे उभार बनाती है जिन्हें ‘अंतःकटक’ या ‘क्रिस्टी’ (cristae) कहते हैं। वहीं, हरितलवक के अंदर कोई क्रिस्टी नहीं होती, बल्कि एक तरल पदार्थ ‘पीठिका’ (Stroma) भरा होता है।

(iii) वर्णक (Pigments): हरितलवक में हरा वर्णक ‘पर्णहरित’ (Chlorophyll) पाया जाता है। माइटोकॉन्ड्रिया में ऐसा कोई वर्णक नहीं होता।

7. निम्नलिखित में से कोशिकांगों के कौन-से जोड़े में डीएनए होता है?

(i) हरितलवक, राइबोसोम।

(ii) माइटोकॉन्ड्रिया, केंद्रक।

(iii) गॉल्जी उपकरण, राइबोसोम।

(iv) केंद्रक, लाइसोसोम।

उत्तर: (ii) माइटोकॉन्ड्रिया, केंद्रक।

8. एक शोधकर्ता ने एक प्रयोग किया जिसमें उसने समान आकार की दो गाजरों का उपयोग किया। उसने एक गाजर को साधारण जल में और दूसरी को नमक के सांद्र विलयन में रखा (चित्र 2.21)। 24 घंटे के पश्चात उसने अपने अवलोकन अभिलेखित किए।

(i) वह इस प्रयोग के माध्यम से कौन-सी परिकल्पना का परीक्षण करना चाहती है?

(ii) इस प्रयोग में सुधार के लिए आप क्या सुझाव देंगे?

(iii) साधारण जल में रखी हुई गाजर अदम्य (कठोर) और कड़क (कुरकुरी) रहती है लेकिन नमक के सांद्र विलयन में रखी हुई गाजर रबर जैसी लचीली एवं नरम क्यों हो जाती है?

उत्तर: (i) वह परासरण (Osmosis) की परिकल्पना का परीक्षण करना चाहती है।

(ii) प्रयोग में सुधार के लिए, आलू वाले प्रयोग की तरह ही गाजर का प्रयोग से पहले का ‘प्रारंभिक भार’ और प्रयोग के बाद का ‘अंतिम भार’ मापना चाहिए।

(iii) नमक के सांद्र विलयन (अतिपरासारी) में रखने पर गाजर के अंदर का जल परासरण द्वारा बाहर आ जाता है। जल की हानि से कोशिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे गाजर रबर जैसी लचीली और नरम हो जाती है।

9. जीवाणु और जंतु कोशिकाओं में निम्नलिखित संरचनाओं की उपस्थिति या अनुपस्थिति इंगित कीजिए—

कोशिका में संरचनाएँजीवाणु कोशिकाजंतु कोशिका
गुणसूत्र
केंद्रक
माइटोकॉन्ड्रिया
गॉल्जी उपकरण
वर्णीलवक

उत्तर: 

कोशिका में संरचनाएँजीवाणु कोशिकाजंतु कोशिका
गुणसूत्रउपस्थितउपस्थित
केंद्रकअनुपस्थितउपस्थित
माइटोकॉन्ड्रियाअनुपस्थितउपस्थित
गॉल्जी उपकरणअनुपस्थितउपस्थित
वर्णीलवकअनुपस्थितअनुपस्थित

10. निम्नलिखित प्रयोग कीजिए—

छिले हुए आलू के चार आधे-आधे भाग लीजिए और प्रत्येक में आलू को खोखला करके कप का आकार बनाइए। इनमें से एक कप उबले हुए आलू से बना होना चाहिए। प्रत्येक आलू के कप को जल से भरकर बीकर में रखिए (चित्र 2.22)। अब प्रयोग को निम्न प्रकार से व्यवस्थित कीजिए—

(क) कप ‘क’ खाली रखिए।

(ख) कप ‘ख’ में एक चम्मच चीनी डालिए।

(ग) कप ‘ग’ में एक चम्मच नमक डालिए।

(घ) कप ‘घ’ (उबले हुए आलू) में एक चम्मच चीनी डालिए।

चारों आलू के कप का कम-से-कम दो घंटे तक अवलोकन कीजिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—

(i) कप ‘ख’ और कप ‘ग’ के खोखले भाग में जल क्यों जमा होता है?

(ii) इस प्रयोग के लिए कप ‘क’ क्यों आवश्यक है?

(iii) स्पष्ट कीजिए कि कप ‘क’ और ‘घ’ के खोखले भागों में पानी क्यों नहीं एकत्र होता है।

उत्तर: (i) चीनी और नमक डालने से कप ‘ख’ और ‘ग’ के अंदर एक सांद्र (अतिपरासारी) विलयन बन गया। परासरण के कारण बाहर का जल आलू की जीवित कोशिकाओं से होकर अंदर जमा हो गया।

(ii) कप ‘क’ एक ‘नियंत्रण’ (Control) के रूप में कार्य करता है। यह साबित करता है कि बिना नमक या चीनी के पानी अपने आप आलू के अंदर प्रवेश नहीं करता।

(iii) ‘क’ खाली था इसलिए पानी नहीं आया। ‘घ’ उबला हुआ आलू था; उबालने से आलू की कोशिकाएं मृत हो जाती हैं और मृत झिल्ली परासरण नहीं कर सकती, इसलिए पानी अंदर नहीं आया।

11. उस युग्म की पहचान कीजिए जो कोशिकांग और उसके कार्य के साथ सुमेलित नहीं है।

(i) राइबोसोम — प्रोटीन संश्लेषण।

(ii) चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका — लिपिड और सेल्यूलोज का संश्लेषण।

(iii) लाइसोसोम — बाह्य पदार्थों का पाचन।

उत्तर: (ii) चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका — लिपिड और सेल्यूलोज का संश्लेषण। यह गलत सुमेलित है क्योंकि चिकनी जालिका केवल वसा/लिपिड का संश्लेषण करती है, सेल्यूलोज का नहीं।

12. यदि किसी सुकेंद्री कोशिका से सभी माइटोकॉन्ड्रिया निकाल दिए जाएँ तो आप किस परिणाम की आशा करते हैं?

उत्तर: यदि किसी सुकेंद्री कोशिका से सभी माइटोकॉन्ड्रिया पूरी तरह निकाल दिए जाएँ, तो कोशिका का जीवित रहना असंभव हो जाएगा।

इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

(i) ऊर्जा उत्पादन का रुकना: माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का ‘ऊर्जा केंद्र’ (powerhouse) कहा जाता है। इसका मुख्य कार्य कोशिकीय श्वसन की प्रक्रिया के दौरान भोजन (ग्लूकोज आदि) को विघटित करके कोशिका के लिए ऊर्जा उत्पन्न करना है। माइटोकॉन्ड्रिया के बिना ऊर्जा बनने की यह प्रक्रिया पूरी तरह रुक जाएगी।

(ii) ATP (ऊर्जा की मुद्रा) का अभाव: माइटोकॉन्ड्रिया से उत्पन्न ऊर्जा एडेनोसिन ट्राईफॉस्फेट (ATP) अणुओं के रूप में संग्रहित होती है, जो कोशिका के लिए ‘ऊर्जा की मुद्रा’ (energy currency) का कार्य करती है।

(iii) कोशिकीय गतिविधियों का ठप होना: कोशिका की अधिकांश आवश्यक जैविक गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाने के लिए इसी ATP ऊर्जा का उपयोग होता है।

(iv) अंतिम परिणाम: बिना माइटोकॉन्ड्रिया के कोशिका को कार्य करने के लिए कोई ऊर्जा नहीं मिलेगी, जिससे उसकी सभी प्रणालियां ठप हो जाएंगी और अंततः ऊर्जा के पूर्ण अभाव में कोशिका मृत हो जाएगी।

13. मानव शरीर में अर्बुद के निर्माण को कौन-सी परिघटना रोकती या संदमित करती है? क्या पौधों में भी अर्बुद का विकास हो सकता है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: मानव शरीर में अर्बुद (ट्यूमर) के निर्माण को ‘संपर्क अवरोध’ नामक परिघटना रोकती है। जंतु कोशिकाओं में कोशिका विभाजन सामान्यतः उस समय अवरुद्ध या रुक जाता है जब वे अपने आस-पास की निकटवर्ती कोशिकाओं के संपर्क में आती हैं। जब असामान्य या कैंसर कोशिकाएं यह नियंत्रण खो देती हैं, तो वे अनियंत्रित रूप से वृद्धि करने और विभाजित होने लगती हैं, जिससे अर्बुद बन जाते हैं। दूसरी ओर, पौधों में भी कोशिकाएं असामान्य वृद्धि कर सकती हैं, लेकिन उनमें अर्बुद का विकास जंतुओं से बिल्कुल भिन्न होता है। अपनी कठोर कोशिका भित्ति की उपस्थिति के कारण पादप कोशिकाएँ जंतुओं की तरह ‘संपर्क अवरोध’ नहीं दर्शाती हैं और वृद्धि के एक अलग प्रतिरूप का अनुसरण करती हैं।

14. कोशिका की कोशिका झिल्ली प्रोटीन और लिपिड से निर्मित होती है। बताइए कि कोशिका झिल्ली के संश्लेषण में कौन-से कोशिकांग सहायता करते हैं? इन यौगिकों के संश्लेषण के स्थान से कोशिका झिल्ली तक के पथ को लिखिए और इसे एक नामांकित चित्र के द्वारा दर्शाइए।

उत्तर: कोशिका झिल्ली मुख्य रूप से प्रोटीन और लिपिड (वसा) से बनी होती है।

(i) रुक्ष अंतर्द्रव्यी जालिका (RER) पर प्रोटीन का संश्लेषण होता है।

(ii) चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका (SER) पर लिपिड का संश्लेषण होता है।

(iii) इसके बाद ये दोनों पदार्थ गॉल्जी उपकरण (Golgi Apparatus) में पहुँचते हैं, जहाँ उनका संशोधन (Modification), पैकेजिंग (Packaging) और परिवहन (Transport) किया जाता है।

(iv) अंत में ये वेसिकल (Vesicles) के माध्यम से कोशिका झिल्ली (Cell Membrane) तक पहुँचकर उसमें जुड़ जाते हैं।

संश्लेषण का पथ:

प्रोटीन:

राइबोसोम → रुक्ष अंतर्द्रव्यी जालिका (RER) → गॉल्जी उपकरण → वेसिकल → कोशिका झिल्ली

लिपिड:

चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका (SER) → गॉल्जी उपकरण → वेसिकल → कोशिका झिल्ली

15. यदि युग्मक समसूत्री विभाजन द्वारा बनाए जाएँ तो क्या होगा?

उत्तर: यदि लैंगिक जनन के लिए आवश्यक युग्मक ‘समसूत्री विभाजन’ द्वारा बनाए जाने लगें, तो इससे बनने वाली नई कोशिकाओं (युग्मकों) में गुणसूत्रों और डीएनए की संख्या अपनी जनक कोशिका के बिल्कुल बराबर रहेगी। लैंगिक जनन में संतान के निर्माण के लिए नर और मादा युग्मकों का संलयन (निषेचन) होता है। यदि दोनों युग्मक समसूत्री विभाजन से बने होंगे, तो जब ये दोनों निषेचन के समय आपस में मिलेंगे, तब बनने वाली संतान में गुणसूत्रों की संख्या जुड़कर अपने माता-पिता से दोगुनी हो जाएगी। यह प्रक्रिया अगर हर पीढ़ी में चलती रही, तो हर अगली पीढ़ी में गुणसूत्रों की संख्या लगातार दोगुनी होती जाएगी, जिससे कोशिका का आनुवंशिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा और प्रजाति के अस्तित्व पर संकट आ जाएगा। यही कारण है कि प्रकृति में युग्मक समसूत्री विभाजन की जगह ‘अर्धसूत्री विभाजन’ द्वारा बनते हैं, जिसमें गुणसूत्रों की संख्या घटकर आधी रह जाती है। इसलिए, जब निषेचन के समय आधे गुणसूत्रों वाला नर युग्मक और आधे गुणसूत्रों वाला मादा युग्मक मिलते हैं, तो संतान में गुणसूत्रों की मूल संख्या फिर से पूरी (पुनःस्थापित) हो जाती है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह संतुलन बना रहता है।

16. दीपा नामक एक कृषक अपने खेत में आँवले और नींबू की पैदावार से बहुत प्रसन्न थी। यद्यपि वह स्थानीय बाजार में अपनी उपज के मात्र एक-चौथाई भाग को ही बेच सकी। तथापि यह अनुमान लगाते कि फसल संग्रह के बाद अधिक मात्रा में उत्पाद नष्ट हो सकता है, उसने आँवलों और नींबू की निधानी आयु (shelf life) अवधि को बढ़ाने के लिए एक पारंपरिक किंतु वैज्ञानिक रूप से सही विधि अपनाई। उसने विकारीय उत्पाद (perishable produce) को लाभदायक उत्पादों, जैसे— अचार और शरबत में परिवर्तित किया। उसने अतिरिक्त उपज का उपयोग करके फलों के छोटे-छोटे टुकड़ों और उनके रस में उपयुक्त मात्रा में नमक, चीनी या गुड़ मिलाकर अचार, मुरब्बा और शरबत तैयार किए। इन्हें बिक्री के लिए छोटी काँच की बोतलों में संग्रहित किया गया इससे कटाई के पश्चात उपज को व्यर्थ होने से बचाने में सहायता मिली। खेती से कृषि-प्रसंस्करण का यह परिवर्तन खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। इससे एक संधारणीय (sustainable) मॉडल विकसित हुआ जिसने अपशिष्ट की मात्रा को कम किया और उसकी आय बढ़ा दी। उपर्युक्त गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—

(i) कृषक ने खेत उत्पाद के संरक्षण में कौन-सी वैज्ञानिक अवधारणा का उपयोग किया है?

उत्तर: उसने परासरण (Osmosis) की वैज्ञानिक अवधारणा का उपयोग किया है।

(ii) नमक और चीनी के उच्च सांद्रता में मिलाने से किस प्रकार एक ऐसा पर्यावरण बनता है जो भोजन को दूषित करने वाले जीवाणुओं और कवकों की वृद्धि को रोकता है?

उत्तर: नमक और चीनी के उच्च सांद्रता वाले विलयन (अतिपरासारी विलयन) में रखने पर, जीवाणुओं और कवकों के शरीर का जल परासरण द्वारा बाहर निकल जाता है। जल की हानि से वे सिकुड़ कर मृत हो जाते हैं और उनकी वृद्धि रुक जाती है।

(iii) इस प्रकार के खाद्य परिरक्षण के लिए एक स्वास्थ्यवर्धक पाकविधि सुझाइए।

उत्तर: स्वास्थ्यवर्धक पाकविधि के रूप में फलों को धूप में सुखाकर (निर्जलीकरण द्वारा) भी परिरक्षित किया जा सकता है, जिससे उनका पानी वाष्पीकृत हो जाता है और वे लंबे समय तक खराब नहीं होते।

(iv) उपर्युक्त स्थिति में कौन-से वैज्ञानिक मूल्यों पर ध्यान दिया गया है?

उत्तर: इसमें अपशिष्ट को कम करने, संधारणीय (sustainable) खाद्य सुरक्षा, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और संसाधनों के उचित उपयोग जैसे वैज्ञानिक और सामाजिक मूल्यों पर ध्यान दिया गया है।

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