NCERT Class 9 Science Important Chapter 10 ध्वनि तरंगें – अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग Hindi Medium As Per New Syllabus. NCERT Class 9 Science Important Chapter 10 ध्वनि तरंगें – अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग Notes to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapter NCERT Class 9 Science Important Chapter 10 ध्वनि तरंगें – अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग Question Answer Download PDF and select needs one. CBSE Class 9 Science Important Question Hindi Medium.
NCERT Class 9 Science Important Chapter 10 ध्वनि तरंगें – अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग
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ध्वनि तरंगें – अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग
Chapter – 10
| IMPORTANT SOLUTIONS |
लघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर:
1. ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है?
उत्तर: ध्वनि कंपन करने वाली वस्तुओं द्वारा उत्पन्न होती है। किसी वस्तु के आगे-पीछे या ऊपर-नीचे तेजी से गति (दोलन) करने से ध्वनि उत्पन्न होती है।
2. मनुष्यों में ध्वनि उत्पन्न करने वाला मुख्य अंग कौन सा है?
उत्तर: मनुष्यों में ध्वनि गले में स्थित वाक् यंत्र (voice box) अथवा कंठ (Larynx) में मौजूद वाक् तंतुओं (vocal cords) के कंपन से उत्पन्न होती है।
3. ध्वनि संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर: ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है, इसलिए इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए किसी भौतिक माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) की आवश्यकता होती है। यह निर्वात में गमन नहीं कर सकती है।
4. संपीडन और विरलन किसे कहते हैं?
उत्तर: ध्वनि तरंग के माध्यम से गुजरने पर उच्च घनत्व और दाब वाले क्षेत्र को संपीडन (Compression) कहते हैं, जबकि निम्न घनत्व और दाब वाले क्षेत्र को विरलन (Rarefaction) कहते हैं।
5. अनुदैर्ध्य तरंगें क्या होती हैं?
उत्तर: वे तरंगें जिनमें माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के समांतर आगे-पीछे कंपन करते हैं, अनुदैर्ध्य तरंगें (longitudinal waves) कहलाती हैं। ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य होती हैं।
6. तरंगदैर्ध्य (Wavelength) क्या है और इसका मात्रक क्या है?
उत्तर: दो क्रमागत शृंगों (crests) अथवा दो क्रमागत गर्तों (troughs) के मध्य की दूरी को तरंगदैर्ध्य कहते हैं। इसे ग्रीक अक्षर लैम्डा (λ) द्वारा दर्शाया जाता है और इसका SI मात्रक मीटर है।
7. ध्वनि तरंग की आवृत्ति (Frequency) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: किसी नियत बिंदु से प्रति इकाई समय में गुजरने वाले पूर्ण दोलनों (घनात्व परिवर्तनों) की संख्या को ध्वनि तरंग की आवृत्ति कहते हैं। इसका SI मात्रक हर्ट्ज़ (Hz) है।
8. आवर्तकाल (Time Period) को परिभाषित करें।
उत्तर: किसी नियत बिंदु पर माध्यम के घनत्व के एक पूर्ण दोलन में लगने वाले समय को तरंग का आवर्तकाल कहते हैं। इसका SI मात्रक सेकंड (s) है।
9. ध्वनि का आयाम (Amplitude) क्या होता है?
उत्तर: किसी माध्यम में ध्वनि संचरण के दौरान औसत घनत्व की तुलना में संपीडन अथवा विरलन में वायु के घनत्व में होने वाला अधिकतम परिवर्तन ध्वनि तरंग का आयाम कहलाता है।
10. ध्वनि की तीव्रता (Intensity) किसे कहते हैं?
उत्तर: ध्वनि संचरण की दिशा के लंबवत एकांक क्षेत्रफल से एकांक समय में गुजरने वाली ध्वनि ऊर्जा की मात्रा को ध्वनि की तीव्रता कहते हैं।
11. तारत्व (Pitch) किस पर निर्भर करता है?
उत्तर: ध्वनि का तारत्व उसकी आवृत्ति पर निर्भर करता है। उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि का तारत्व अधिक होता है, जबकि निम्न आवृत्ति वाली ध्वनि का तारत्व कम होता है।
12. ध्वनि की चाल, आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य के बीच क्या संबंध है?
उत्तर: ध्वनि की चाल (v) उसकी तरंगदैर्ध्य (λ) और आवृत्ति (ν) के गुणनफल के बराबर होती है। सूत्र है: v = λ × ν।
13. श्रव्यता का परिसर (Audible Range) क्या होता है?
उत्तर: मनुष्यों के लिए ध्वनि सुनने की आवृत्ति का परिसर 20 Hz (हर्ट्ज़) से 20,000 Hz (20 kHz) तक होता है। इससे कम या अधिक आवृत्ति वाली ध्वनि हम नहीं सुन सकते।
14. पराश्रव्य (Ultrasonic) और अवश्रव्य (Infrasonic) तरंगें क्या हैं?
उत्तर: 20 Hz से कम आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को अवश्रव्य तरंगें कहते हैं, और 20,000 Hz (20 kHz) से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को पराश्रव्य तरंगें कहते हैं।
15. सोनार (SONAR) तकनीक का मुख्य उपयोग क्या है?
उत्तर: सोनार में पराश्रव्य तरंगों का उपयोग करके जल के भीतर स्थित पिंडों, जैसे — पनडुब्बियों या जहाजों के अवशेषों की दूरी, दिशा तथा गति का पता लगाया जाता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर:
1. प्रयोग द्वारा दर्शाइए कि ध्वनि संचरण के लिए भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है।
उत्तर: ध्वनि निर्वात में गमन नहीं कर सकती, इसे सिद्ध करने के लिए निर्वात बेलजार प्रयोग किया जाता है। एक कांच के बेलजार के भीतर एक विद्युत घंटी लटका दी जाती है। जब घंटी का स्विच ऑन करते हैं, तो उसकी ध्वनि स्पष्ट सुनाई देती है। इसके बाद जार को एक निर्वात पंप से जोड़कर जार के अंदर की वायु को धीरे-धीरे बाहर निकाला जाता है। जैसे-जैसे वायु बाहर निकलती है, घंटी की ध्वनि धीमी होती जाती है। जब जार में लगभग निर्वात की स्थिति आ जाती है, तो घंटी बजते हुए दिखाई देने पर भी उसकी ध्वनि सुनाई नहीं देती है। यह सिद्ध करता है कि ध्वनि संचरण के लिए ठोस, द्रव या गैस जैसे माध्यम की आवश्यकता होती है।
2. ध्वनि तरंगें वायु में किस प्रकार गमन करती हैं? स्पष्ट करें।
उत्तर: जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह अपने संपर्क में आने वाले वायु के कणों को विस्थापित करती है। जब कंपन करती हुई वस्तु आगे की ओर बढ़ती है, तो वह अपने सामने की वायु को धक्का देकर संपीडित करती है, जिससे उच्च घनत्व और दाब का एक क्षेत्र बनता है जिसे संपीडन (Compression) कहते हैं। जब वस्तु पीछे की ओर हटती है, तो वायु का घनत्व और दाब कम हो जाता है, जिसे विरलन (Rarefaction) कहते हैं। जब वस्तु तेजी से आगे-पीछे कंपन करती है, तो वायु में संपीडनों और विरलनों की एक शृंखला बन जाती है। इस प्रकार माध्यम के कण स्वयं आगे नहीं बढ़ते, बल्कि वे अपनी माध्य स्थिति पर कंपन करके विक्षोभ (ऊर्जा) को आगे बढ़ाते हैं और ध्वनि तरंगें गमन करती हैं।
3. प्रतिध्वनि (Echo) और अनुरणन (Reverberation) को परिभाषित करें और इनमें अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर: प्रतिध्वनि (Echo): जब ध्वनि किसी दूर स्थित कठोर अवरोध (जैसे पहाड़ या ऊँची इमारत) से टकराकर परावर्तित होती है, तो मूल ध्वनि के बाद सुनाई देने वाली उस परावर्तित ध्वनि को प्रतिध्वनि कहते हैं। स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए मूल ध्वनि और परावर्तित ध्वनि के बीच कम से कम 0.1 सेकंड का समय अंतराल होना चाहिए। इसके लिए परावर्तक सतह कम से कम 17 मीटर दूर होनी चाहिए। अनुरणन (Reverberation): किसी बड़े हॉल या सभागार में ध्वनि के कई बार परावर्तित होने के कारण, स्रोत के बंद हो जाने के बाद भी ध्वनि का कुछ समय तक गूँजते रहना अनुरणन कहलाता है। यह तब होता है जब परावर्तित ध्वनियाँ 0.05 सेकंड से कम समय में कानों तक पहुँचती हैं। इसे कम करने के लिए दीवारों और छतों पर ध्वनि-अवशोषक पदार्थ लगाए जाते हैं।
4. मानव कान ध्वनि को किस प्रकार ग्रहण करता है? इसकी कार्यप्रणाली समझाइए।
उत्तर: मानव कान एक अत्यंत संवेदनशील अंग है जो ध्वनि ऊर्जा को ग्रहण कर मस्तिष्क तक पहुंचाता है। जब ध्वनि तरंगें कान में प्रवेश करती हैं, तो वे कान के अंत में स्थित कर्णपटल (eardrum) नामक पतली झिल्ली से टकराती हैं। संपीडन और विरलन के कारण कर्णपटल में कंपन उत्पन्न होता है। मध्य कान में मौजूद तीन छोटी हड्डियां इन कंपनों को कई गुना प्रवर्धित (amplify) कर देती हैं। इसके बाद, आंतरिक कान में स्थित कर्णावर्त (cochlea) इन यांत्रिक कंपनों को विद्युत संकेतों में परिवर्तित कर देता है। अंत में, ये विद्युत संकेत श्रवण तंत्रिका के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुँचते हैं, जहाँ मस्तिष्क इनकी ध्वनि के रूप में पहचान और अनुभूति करता है।
5. पराश्रव्य तरंगों (Ultrasonic waves) के किन्हीं चार महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों (उपयोगों) का वर्णन करें।
उत्तर: 20,000 Hz से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनि को पराश्रव्य तरंगें कहते हैं।
इनके प्रमुख अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं:
(i) चिकित्सा क्षेत्र (अल्ट्रासोनोग्राफी): बिना किसी शल्यक्रिया के शरीर के आंतरिक अंगों (जैसे यकृत, पित्ताशय, गर्भाशय) का प्रतिबिंब प्राप्त करने और बीमारियों का पता लगाने में।
(ii) गुर्दे की पथरी का इलाज: गुर्दे की पथरी को बारीक टुकड़ों में तोड़ने के लिए, जो बाद में मूत्र के रास्ते शरीर से बाहर निकल जाते हैं।
(iii) सोनार (SONAR) प्रणाली: समुद्र की गहराई मापने, जल के भीतर पनडुब्बियों, डूबे हुए जहाजों और चट्टानों का पता लगाने के लिए।
(iv) औद्योगिक सफाई और परीक्षण: मशीनों के जटिल पुर्जों की सफाई करने और धातु के बड़े ब्लॉकों के भीतर दरारों या दोषों का पता लगाने में।

