NCERT Class 9 Science Important Chapter 11 जनन – जीवन की निरंतरता

NCERT Class 9 Science Important Chapter 11 जनन – जीवन की निरंतरता Hindi Medium As Per New Syllabus. NCERT Class 9 Science Important Chapter 11 जनन – जीवन की निरंतरता Notes to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapter NCERT Class 9 Science Important Chapter 11 जनन – जीवन की निरंतरता Question Answer Download PDF and select needs one. CBSE Class 9 Science Important Question Hindi Medium.

NCERT Class 9 Science Important Chapter 11 जनन – जीवन की निरंतरता

Also, you can read the CBSE book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per (CBSE) Book guidelines. NCERT Class 9 Science Additional Solutions. These solutions are part of NCERT All Subject Solutions. Here we have given NCERT Class 9 Science Important Notes Hindi Medium Solutions for All Subject, You can practice these here.

 जनन – जीवन की निरंतरता

Chapter – 11

IMPORTANT SOLUTIONS

लघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर:

1. जनन किसे कहते हैं?

उत्तर: जनन वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा सजीव अपने जैसे नए जीव उत्पन्न करते हैं, जिससे पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता बनी रहती है।

2. अलैंगिक जनन की मुख्य विशेषता क्या है?

उत्तर: अलैंगिक जनन में केवल एक ही जनक संतति उत्पन्न करता है, जिससे उत्पन्न संतति आनुवंशिक रूप से बिल्कुल जनक के समान (क्लोन) होती है।

3. कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) क्या है?

उत्तर: जब नए पौधे बीजों के बजाय पौधे के कायिक भागों (जैसे तने, जड़, या पत्तियों) से उत्पन्न होते हैं, तो इस प्रक्रिया को कायिक प्रवर्धन कहते हैं।

4. मुकुलन (Budding) किस जीव में होता है और यह क्या है?

उत्तर: मुकुलन हाइड्रा और यीस्ट जैसे जीवों में होता है। इसमें जनक के शरीर पर कोशिका विभाजन से एक छोटा उभार (मुकुल) बनता है, जो वृद्धि करके अलग हो जाता है और स्वतंत्र जीव बन जाता है।

5. कवक (फफूँद) में जनन मुख्य रूप से किस विधि द्वारा होता है?

उत्तर: कवकों (फफूँद) में जनन मुख्य रूप से बीजाणु निर्माण (Spore formation) द्वारा होता है, जिसमें बड़ी संख्या में हल्के बीजाणु बनते हैं जो वायु में तैरते रहते हैं।

6. युग्मक (Gametes) क्या होते हैं?

उत्तर: युग्मक विशेष प्रकार की जनन कोशिकाएँ हैं जो अर्धसूत्री विभाजन द्वारा बनती हैं और इनमें गुणसूत्रों की संख्या आधी (अगुणित) होती है।

7. पुष्प के नर और मादा जनन अंगों के नाम क्या हैं?

उत्तर: पुष्प के नर जनन अंग को पुंकेसर (Stamen) कहते हैं, जबकि मादा जनन अंग को स्त्रीकेसर (Pistil) कहते हैं।

8. परागण (Pollination) किसे कहते हैं?

उत्तर: पुष्प के परागकोश से परागकणों के उसी पुष्प या दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण की प्रक्रिया को परागण कहते हैं।

9. बाह्य निषेचन (External Fertilisation) क्या है?

उत्तर: जब नर और मादा युग्मकों का संलयन (निषेचन) जंतु के शरीर के बाहर (जैसे जल में) होता है, तो इसे बाह्य निषेचन कहते हैं, जैसे मेंढक और मछलियों में।

10. मानव नर में शुक्राणु का निर्माण किस अंग में होता है?

उत्तर: मानव नर में शुक्राणु का निर्माण वृषण (Testes) में होता है, जो वृषणकोश नामक त्वचा की थैली में स्थित होते हैं।

11. युग्मनज (Zygote) का निर्माण कैसे होता है?

उत्तर: जब एक नर युग्मक (शुक्राणु) एक मादा युग्मक (अंडाणु) के साथ युग्मित होता है (निषेचन), तो इस संलयन के परिणामस्वरूप युग्मनज का निर्माण होता है।

12. मानव मादा जनन तंत्र में गर्भाशय (Uterus) का क्या कार्य है?

उत्तर: गर्भाशय एक थैले जैसी संरचना है जहाँ निषेचन के पश्चात युग्मनज प्रत्यारोपित होता है और गर्भस्थ शिशु पूरे नौ महीने तक विकसित होता है और पोषण प्राप्त करता है।

13. रजोधर्म (Menstruation) क्या है?

उत्तर: यदि अंडाणु का निषेचन नहीं होता है, तो गर्भाशय का मोटा और रक्त वाहिकाओं से समृद्ध आंतरिक आस्तर टूट जाता है और रक्त के साथ योनि से बाहर निकल जाता है, जिसे रजोधर्म कहते हैं।

14. शिशु के जैविक लिंग का निर्धारण कौन करता है?

उत्तर: शिशु के लिंग का निर्धारण पिता (नर) द्वारा होता है, क्योंकि नर शिशु को ‘X’ या ‘Y’ गुणसूत्र प्रदान कर सकता है, जबकि मादा सदैव ‘X’ गुणसूत्र ही प्रदान करती है।

15. यौन संचारित संक्रमणों (S.T.I.) से बचाव का एक प्रमुख साधन क्या है?

उत्तर: यौन संचारित संक्रमणों (जैसे सुजाक, सिफलिस, एच.आई.वी.) के संचरण को रोकने के लिए ‘कंडोम’ (एक अवरोध युक्ति) का उपयोग किया जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर:

1. पौधों में कायिक प्रवर्धन की विभिन्न कृत्रिम विधियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: पौधों के प्रभावी प्रवर्धन के लिए मुख्य रूप से चार कृत्रिम विधियों का उपयोग होता है:

(i) कर्तन (Cutting): पौधे की शाखा या तने का एक टुकड़ा काटकर नमी युक्त मिट्टी में रोपना (जैसे- गुलाब, मनीप्लांट)।

(ii) कलम बाँधना (Grafting): एक स्वस्थ जड़ वाले पौधे के तने पर किसी अन्य वांछित किस्म के पौधे की टहनी (कलम) को जोड़ना (जैसे- सेब, गुलाब)।

(iii) परतन (Layering): पौधे की लचीली शाखा को बिना काटे मिट्टी में दबा देना ताकि उसमें से नई जड़ें निकल आएं (जैसे- नींबू)।

(iv) ऊतक संवर्धन (Tissue Culture): पौधे के प्ररोह शीर्ष की कोशिकाओं का उपयोग करके प्रयोगशाला में रोग-मुक्त और उच्च उपज वाले पौधे तैयार करना (जैसे- केला)।

2. परागण के प्रकारों का वर्णन कीजिए तथा परागण के विभिन्न कारकों के नाम लिखिए।

उत्तर: परागण मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:

(i) स्व-परागण (Self-pollination): जब परागकणों का स्थानांतरण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर अथवा उसी पौधे के किसी अन्य पुष्प के वर्तिकाग्र पर होता है।

(ii) पर-परागण (Cross-pollination): जब परागकण एक पौधे के पुष्प से उसी प्रजाति के दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरित होते हैं। परागण प्रकृति में विभिन्न बाहरी कारकों (परागणकारियों) द्वारा होता है, जिनमें वायु (जैसे गेहूँ, मक्का में), जल (हाइड्रिला में), कीट (मधुमक्खी, तितलियाँ) और पक्षी (शकरखोरा) सम्मिलित हैं।

3. पुष्पी पादपों में निषेचन और बीज निर्माण की प्रक्रिया को समझाइए।

उत्तर: परागकण जब पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं, तो वे अंकुरित होकर एक पराग नलिका बनाते हैं। यह पराग नलिका वर्तिका से होते हुए नीचे अंडाशय तक बढ़ती है। नर युग्मक इसी नलिका से होकर अंडाशय के अंदर स्थित बीजांड तक पहुँचता है, जहाँ वह मादा युग्मक (अंडकोशिका) के साथ संलयन (निषेचन) करता है, जिससे युग्मनज (Zygote) बनता है। निषेचन के पश्चात, युग्मनज भ्रूण में विकसित होता है, बीजांड कठोर होकर बीज में परिवर्तित हो जाता है, और संपूर्ण अंडाशय बड़ा होकर फल बन जाता है।

4. मानव मादा जनन तंत्र के विभिन्न अंगों और उनके कार्यों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: मानव मादा जनन तंत्र के प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं:

(i) अंडाशय (Ovaries): यह एक जोड़ी होते हैं, जो मादा जनन कोशिकाएँ (अंडाणु) और हार्मोन उत्पन्न करते हैं।

(ii) डिंबवाहिनी/अंडवाहिका (Fallopian Tubes): ये नलिकाएं अंडाशय को गर्भाशय से जोड़ती हैं। अंडाणु इसी मार्ग से गर्भाशय तक पहुँचता है और यहीं पर शुक्राणु द्वारा उसका निषेचन होता है।

(iii) गर्भाशय (Uterus): यह एक थैले जैसी संरचना है जहाँ भ्रूण प्रत्यारोपित होता है और नौ महीने तक शिशु का विकास व पोषण होता है।

(iv) गर्भाशय ग्रीवा और योनि (Cervix & Vagina): गर्भाशय एक संकरे मार्ग (ग्रीवा) द्वारा योनि में खुलता है। योनि मैथुन के समय शुक्राणुओं को ग्रहण करती है और प्रसव के दौरान जन्म मार्ग का कार्य करती है।

5. अवांछित गर्भावस्था को रोकने (गर्भनिरोधक) की विभिन्न विधियाँ कौन-सी हैं?

उत्तर: अवांछित गर्भावस्था को रोकने के लिए निम्नलिखित गर्भनिरोधक विधियों का उपयोग किया जाता है:

(i) अवरोध विधियाँ: इसमें ‘कंडोम’ या योनि आवरण का उपयोग होता है, जो शुक्राणु को अंडाणु तक पहुँचने से भौतिक रूप से रोकते हैं। ये यौन संचारित संक्रमणों (STI) से भी बचाते हैं।

(ii) रासायनिक विधियाँ (दवाइयाँ): मुँह से ली जाने वाली गर्भनिरोधक गोलियाँ हार्मोन में परिवर्तन करके अंडाशय से अंडाणु के मोचन को रोक देती हैं।

(iii) अंतर्भाशयी युक्तियाँ (IUDs): कॉपर-T (Copper-T) जैसी युक्ति को डॉक्टर द्वारा गर्भाशय में रखा जाता है, जो गर्भधारण को रोकती है।

(iv) शल्य-चिकित्सा (Surgical Methods): पुरुषों में शुक्रवाहिका को और महिलाओं में डिंबवाहिनी को अवरुद्ध (नसबंदी) कर दिया जाता है, जिससे शुक्राणु और अंडाणु का मिलन न हो सके।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Scroll to Top