NCERT Class 9 Science Important Chapter 12 जीवजगत का स्वरूप – विविधता एवं वर्गीकरण Hindi Medium As Per New Syllabus. NCERT Class 9 Science Important Chapter 12 जीवजगत का स्वरूप – विविधता एवं वर्गीकरण Notes to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapter NCERT Class 9 Science Important Chapter 12 जीवजगत का स्वरूप – विविधता एवं वर्गीकरण Question Answer Download PDF and select needs one. CBSE Class 9 Science Important Question Hindi Medium.
NCERT Class 9 Science Important Chapter 12 जीवजगत का स्वरूप – विविधता एवं वर्गीकरण
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जीवजगत का स्वरूप – विविधता एवं वर्गीकरण
Chapter – 12
| IMPORTANT SOLUTIONS |
लघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर:
1. जैव विविधता (Biodiversity) किसे कहते हैं?
उत्तर: पृथ्वी पर असंख्य प्रकार के जीवों (सूक्ष्मजीवों से लेकर विशाल वृक्षों और जंतुओं तक) और उनके विभिन्न पर्यावासों में पाई जाने वाली असीम विविधता को ही जैव विविधता कहते हैं।
2. स्थानिक प्रजातियाँ (Endemic species) क्या होती हैं?
उत्तर: जो प्रजातियाँ विश्व के कुछ विशेष क्षेत्रों में ही पाई जाती हैं और प्राकृतिक रूप से अन्यत्र कहीं नहीं पाई जातीं, उन्हें स्थानिक प्रजातियाँ कहते हैं।
3. भारत में स्थित किन्हीं दो जैव विविधता हॉटस्पॉट के नाम लिखिए।
उत्तर: भारत में स्थित जैव विविधता हॉटस्पॉट के उदाहरण पश्चिमी घाट और हिमालय हैं।
4. मोनेरा जगत के जीवों की मुख्य विशेषता क्या है?
उत्तर: मोनेरा जगत के जीव एककोशिकीय और पूर्वकेन्द्रकी (प्रोकैरियोटिक) होते हैं, अर्थात इनकी कोशिकाओं में झिल्ली आबद्ध वास्तविक केंद्रक नहीं होता।
5. कवक (फंजाई) जगत की कोशिका भित्ति किस पदार्थ की बनी होती है?
उत्तर: कवक (फंजाई) जगत के जीवों की कोशिका भित्ति ‘काइटिन’ (Chitin) नामक पदार्थ की बनी होती है।
6. पादप जगत का ‘उभयचर’ किस समूह को कहा जाता है?
उत्तर: ब्रायोफाइटा (जैसे मॉस और लिवरवर्ट) को पादप जगत का उभयचर कहा जाता है क्योंकि स्थल पर रहने के बावजूद इन्हें जनन के लिए जल की आवश्यकता होती है।
7. टेरिडोफाइटा पादपों में परिवहन के लिए कौन से ऊतक पाए जाते हैं?
उत्तर: टेरिडोफाइटा (जैसे फर्न) पादपों में जल और भोजन के परिवहन के लिए विशेष संवहनी ऊतक— जाइलम और फ्लोएम— पाए जाते हैं।
8. जिम्नोस्पर्म (अनावृतबीजी) के बीजों की क्या विशेषता है?
उत्तर: जिम्नोस्पर्म पादपों के बीज फलों के अंदर बंद नहीं होते हैं, बल्कि वे प्रायः शंकुओं पर अनावृत (नग्न) रहते हैं।
9. लाइकेन किन दो जीवों का सहजीवी संबंध है?
उत्तर: लाइकेन एक स्वपोषी शैवाल और एक विषमपोषी कवक के बीच का सहजीवी संबंध है।
10. जंतुओं को कॉर्डेटा (कशेरुकी) और नॉन-कॉर्डेटा (अकशेरुकी) में किस आधार पर बांटा गया है?
उत्तर: जंतुओं को कॉर्डेटा और नॉन-कॉर्डेटा में एक लचीली छड़ाकार संरचना, ‘पृष्ठरज्जु’ (notochord), की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति के आधार पर बांटा गया है।
11. नाइडेरिया संघ के जीवों में भोजन और अपशिष्ट के लिए कितने छिद्र होते हैं?
उत्तर: नाइडेरिया संघ के जीवों (जैसे हाइड्रा) के शरीर में भोजन के अंतर्ग्रहण और अपशिष्ट के निष्कासन के लिए केवल एक ही छिद्र होता है।
12. आर्थ्रोपोडा संघ के जंतुओं की दो मुख्य शारीरिक पहचान क्या हैं?
उत्तर: आर्थ्रोपोडा संघ के जंतुओं में संधित पाद (जुड़े हुए पैर) पाए जाते हैं और उनके शरीर पर सुरक्षा के लिए कठोर बहिःकंकाल होता है।
13. जीवाश्म (Fossils) क्या होते हैं?
उत्तर: जीवाश्म पादपों और जंतुओं के परिरक्षित अवशेष होते हैं जो चट्टानों, रेत और मिट्टी की परतों में दबे पाए जाते हैं।
14. जीवों के नामकरण की द्विनाम पद्धति (Binomial Nomenclature) किसने प्रस्तुत की थी?
उत्तर: जीव जगत के वैज्ञानिक नामकरण की द्विनाम पद्धति 18वीं शताब्दी में कैरोलस लीनियस द्वारा प्रस्तुत की गई थी।
15. वर्गीकरण के पदानुक्रम में सबसे बड़ा और सबसे छोटा स्तर कौन सा है?
उत्तर: वर्गीकरण की पदानुक्रमी प्रकृति में सबसे बड़ा स्तर ‘जगत’ (Kingdom) और सबसे छोटा तथा विशिष्ट स्तर ‘जाति’ (Species) होता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर:
1. जैव विविधता क्या है? स्थानिक प्रजातियाँ और जैव विविधता हॉटस्पॉट का वर्णन करते हुए स्पष्ट कीजिए कि जैव विविधता पर क्या खतरे मंडरा रहे हैं?
उत्तर: पृथ्वी पर असंख्य प्रकार के जीवों (सूक्ष्मजीवों से लेकर विशाल वृक्षों और जंतुओं तक) और उनके विभिन्न पर्यावासों में पाई जाने वाली असीम विविधता को ही जैव विविधता कहते हैं। जो प्रजातियाँ विश्व के कुछ विशेष क्षेत्रों में ही पाई जाती हैं और प्राकृतिक रूप से अन्यत्र कहीं नहीं पाई जातीं, उन्हें ‘स्थानिक प्रजातियाँ’ (Endemic species) कहते हैं (जैसे- नीलगिरी तहर और सिंहपुच्छी वानर जो केवल भारत में पाए जाते हैं)। ऐसे क्षेत्र जो बड़ी संख्या में स्थानिक प्रजातियों को आश्रय देते हैं और जहाँ पर्यावास की अत्यधिक क्षति हुई है, वे ‘जैव विविधता हॉटस्पॉट’ कहलाते हैं (जैसे भारत में पश्चिमी घाट और हिमालय)। जैव विविधता पर खतरे: प्रत्येक प्रजाति प्रकृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मानवीय गतिविधियों जैसे— प्रदूषण, वनों की कटाई, संसाधनों का अत्यधिक उपयोग और जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक पर्यावास नष्ट हो रहे हैं, जिससे जैव विविधता का भारी ह्रास हो रहा है।
2. सजीवों के वर्गीकरण के लिए वैज्ञानिक किन प्रमुख मानदंडों का उपयोग करते हैं? विस्तार से समझाइए।
उत्तर: वैज्ञानिक सजीवों को वर्गीकृत करने के लिए उनकी बाहरी और आंतरिक विशेषताओं का गहराई से अध्ययन करते हैं।
इसके प्रमुख मानदंड निम्नलिखित हैं:
(i) बाह्य विशेषताएँ: जीवों का आकार, आमाप और शारीरिक संगठन (दृश्यामान विशेषताएँ)।
(ii) पोषण की विधि: जीव अपना भोजन स्वयं बनाते हैं (स्वपोषी) या दूसरों पर निर्भर हैं (विषमपोषी)।
(iii) आंतरिक संरचनाएँ: जीव के कंकाल का पैटर्न, अंगों की उपस्थिति या अनुपस्थिति तथा विभिन्न प्रकार के ऊतक।
(iv) कोशिका संरचना: जीव एककोशिकीय है या बहुकोशिकीय, पूर्वकेन्द्रकी (Prokaryotic) है या सुकेन्द्रकी (Eukaryotic), और उनमें कोशिका भित्ति उपस्थित है या नहीं।
(v) पारिस्थितिकीय भूमिका: पर्यावरण में जीव की भूमिका क्या है (उत्पादक, उपभोक्ता अथिवा अपघटक)।
(vi) जनन: जीवों में प्रजनन की विधि लैंगिक है या अलैंगिक।
(vii) आनुवंशिक समानता: डीएनए (DNA) के उपयोग से वंशागत गुणों की समानताएँ जांची जाती हैं, जिससे यह पता चलता है कि जीव एक ही पूर्वज से विकसित हुए हैं या नहीं।
3. पादप जगत (Plantae) को किन प्रमुख समूहों में विभाजित किया गया है? जल पर निर्भरता से लेकर स्थल पर पूर्ण अनुकूलन तक उनके विकास को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पादप जगत को विकास के आधार पर मुख्यतः पाँच समूहों में वर्गीकृत किया गया है:
(i) थैलोफाइटा (शैवाल): ये सबसे सरल पादप हैं जिनका शरीर थैलेस जैसा होता है और ये जल या नम पर्यावरण में पाए जाते हैं।
(ii) ब्रायोफाइटा (मॉस): इन्हें पादप जगत का उभयचर कहा जाता है। यद्यपि ये स्थल पर रहते हैं, परंतु इनमें वास्तविक जड़ों (संवहनी ऊतकों) का अभाव होता है और जनन के लिए इन्हें जल की आवश्यकता होती है।
(iii) टेरिडोफाइटा (फर्न): इनमें वास्तविक जड़, तना और पत्तियां होती हैं तथा जाइलम-फ्लोएम जैसे संवहनी ऊतक पाए जाते हैं, परंतु जनन के लिए जल की आवश्यकता बनी रहती है।
(iv) जिम्नोस्पर्म (अनावृतबीजी): ये सूखे क्षेत्रों के अनुकूल होते हैं। ये बीज उत्पन्न करते हैं जो फलों में बंद नहीं होते (नग्न होते हैं), और निषेचन के लिए जल की आवश्यकता नहीं होती।
(v) एंजियोस्पर्म (आवृत्तबीजी): ये पुष्पी पौधे हैं जिनके बीज फलों के अंदर बंद होते हैं। पुष्पों और फलों के विकास के कारण ये विभिन्न पर्यावरणों में रहने के लिए सर्वाधिक अनुकूलित हैं। यह क्रम दर्शाता है कि पादपों ने धीरे-धीरे संवहनी ऊतकों, बीजों और पुष्पों का विकास करके स्थल पर रहने की चुनौतियों का सामना किया।
4. जंतु जगत के अंतर्गत अकशेरुकी (नॉन-कॉर्डेटा) जीवों के शारीरिक संगठन में पोरीफेरा से लेकर आर्थ्रोपोडा और मोलस्का तक किस प्रकार क्रमिक विकास (जटिलता) दिखाई देता है?
उत्तर: अकशेरुकी (बिना रीढ़ की हड्डी वाले) जीवों में शारीरिक संगठन की जटिलता का क्रमिक विकास इस प्रकार है:
(i) पोरीफेरा (स्पंज): ये सबसे सरल बहुकोशिकीय जीव हैं जिनमें ऊतक और अंग नहीं होते। इनके शरीर में केवल छिद्र और नाल होते हैं जिनसे जल प्रवाहित होता है।
(ii) नाइडेरिया (हाइड्रा): इनमें ऊतक-स्तर का संगठन विकसित होता है, लेकिन भोजन ग्रहण करने व अपशिष्ट निकालने के लिए एक ही छिद्र होता है।
(iii) प्लैटीहेल्मिन्थीज़ (चपटे कृमि): इनमें द्विपार्श्व सममिति और दिशात्मक गति विकसित होती है तथा शरीर में सिर और पूँछ के भाग स्पष्ट होते हैं।
(iv) ऐनेलिडा (केंचुआ): इनमें शरीर बेलनाकार और खंडों में बँटा होता है। अंग तंत्र स्तर का संगठन, देहगुहा और पेशियाँ विकसित हो जाती हैं जो गति पर नियंत्रण देती हैं।
(v) आर्थ्रोपोडा (कीट/केकड़े): इनमें खंडयुक्त शरीर, संधित पाद (जुड़े हुए पैर) और सुरक्षा व जल की हानि रोकने के लिए कठोर बहिःकंकाल विकसित होता है।
(vi) मोलस्का (घोंघा/ऑक्टोपस): इनका शरीर कोमल होता है जो सिर, पेशीय पाद और कूबड़ में बँटा होता है, जिसकी सुरक्षा के लिए कवच पाया जाता है।
5. वैज्ञानिक नामकरण की ‘द्विनाम पद्धति’ (Binomial Nomenclature) क्या है? इसे किसने प्रस्तुत किया और इसके प्रमुख नियम क्या हैं?
उत्तर: अलग-अलग क्षेत्रों और भाषाओं में एक ही जीव के अलग-अलग नाम होने से भ्रम उत्पन्न होता है। इस भ्रम से बचने के लिए वैज्ञानिक जीवों के नामकरण की एक सार्वभौमिक प्रणाली का उपयोग करते हैं, जिसे द्विनाम पद्धति (Binomial Nomenclature) कहा जाता है। इसे 18वीं शताब्दी में कैरोलस लीनियस द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
इसके वैज्ञानिक नाम लिखने के प्रमुख नियम निम्नलिखित हैं:
(i) प्रत्येक जीव के वैज्ञानिक नाम के दो भाग (शब्द) होते हैं: पहला शब्द ‘वंश’ (Genus) का और दूसरा शब्द ‘जाति’ (Species) का होता है।
(ii) वंश का नाम हमेशा पहले लिखा जाता है और अंग्रेजी भाषा में इसका पहला अक्षर बड़ा (Capital) होता है।
(iii) इसके बाद जाति का नाम लिखा जाता है, जो पूरी तरह से छोटे (Small) अक्षरों में होता है।
(iv) ये नाम लैटिन भाषा से लिए जाते हैं, इसलिए इन्हें हमेशा तिरछे (Italics) अक्षरों में लिखा जाता है। यदि इन्हें हाथ से लिखा जाए, तो दोनों शब्दों को अलग-अलग रेखांकित (Underline) करना अनिवार्य है।

