NCERT Class 9 Science Important Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र – ऊर्जा, द्रव्य और जीवन

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NCERT Class 9 Science Important Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र – ऊर्जा, द्रव्य और जीवन

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पृथ्वी एक तंत्र – ऊर्जा, द्रव्य और जीवन

Chapter – 13

IMPORTANT SOLUTIONS

लघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर:

1. पृथ्वी पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत क्या है?

उत्तर: पृथ्वी पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत सौर विकिरण (सूर्य) है।

2. जलमंडल (Hydrosphere) के अंतर्गत क्या-क्या आता है?

उत्तर: जलमंडल में द्रव रूप में पाया जाने वाला सतही जल सम्मिलित है, जैसे— महासागर, नदियाँ (गंगा एवं ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र), झीलें और भूजल।

3. हिममंडल (Cryosphere) किसे कहते हैं?

उत्तर: पृथ्वी पर मौजूद जल के ठोस रूप, जैसे— हिम और बर्फ (हिमालयी हिमनदियाँ, लद्दाख में जमी बर्फ और ध्रुवीय हिम छत्रक) को हिममंडल कहा जाता है।

4. सौर स्थिरांक (Solar constant) का मान कितना होता है?

उत्तर: सौर स्थिरांक का मान लगभग 1.4 किलोवाट प्रति वर्ग मीटर (1.4 kWm–2) अथवा लगभग 1400 जूल प्रति सेकंड प्रति वर्ग मीटर होता है।

5. एल्बिडो (Albedo) से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: किसी सतह द्वारा सौर विकिरण का परावर्तित अंश ‘एल्बिडो’ कहलाता है (यह शब्द लैटिन भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ धवलता है)।

6. सूर्य की पराबैंगनी (UV) किरणों से पृथ्वी की रक्षा कौन करता है?

उत्तर: लघु तरंगदैर्ध्य वाली पराबैंगनी (UV) विकिरणों का अधिकांश भाग ऊपरी वायुमंडल में स्थित ओजोन परत द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है, जिससे पृथ्वी पर जीवन को सुरक्षा मिलती है।

7. क्षोभमंडल (Troposphere) की क्या विशेषता है?

उत्तर: मौसम संबंधी लगभग सभी परिघटनाएँ (बादल, आंधी-तूफान आदि) क्षोभमंडल में घटित होती हैं, जिसकी औसत ऊँचाई लगभग 12 km होती है और ऊँचाई बढ़ने के साथ इसमें तापमान घटता है।

8. शहरी ऊष्मा द्वीप (Urban Heat Island) प्रभाव क्या है?

उत्तर: ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्र (विशेषकर ग्रीष्मकाल की रात्रि में) अधिक गर्म होते हैं क्योंकि वहाँ कंक्रीट और डामर से बनी इमारतें व सड़कें सौर विकिरण को अवशोषित और संचित करती हैं।

9. घाटी समीर (Valley breeze) कैसे उत्पन्न होती है?

उत्तर: दिन के समय पर्वतीय ढलानें घाटी की तुलना में तेजी से गर्म होती हैं, जिससे वहाँ की गर्म वायु ऊपर उठती है और उसकी जगह लेने के लिए घाटी से ठंडी वायु ढलान से ऊपर की ओर उठती है, इसे घाटी समीर कहते हैं।

10. महासागरीय भंवर (Gyres) क्या हैं?

उत्तर: पृथ्वी के घूर्णन के कारण महासागरीय जल प्रवाह विक्षेपित हो जाता है, जिससे विशाल वृत्ताकार प्रवाह पैटर्न बनते हैं, जिन्हें महासागरीय भंवर (Gyres) कहा जाता है।

11. जैव-भू रासायनिक चक्र (Biogeochemical cycle) किसे कहते हैं?

उत्तर: अजैविक और जैविक घटकों के मध्य, द्रव्य और ऊर्जा का चक्रीय संचालन जैव-भू रासायनिक चक्र कहलाता है, जो पारिस्थितिक तंत्र का संतुलन बनाए रखता है।

12: कार्बन चक्र के ‘मंद चक्र’ में कार्बन किस रूप में संचित होता है? 

उत्तर: लाखों वर्षों तक चलने वाले मंद चक्र में मृत पादप और जंतु मृदा में दब जाते हैं और जीवाश्म ईंधनों, जैसे— कोयला, तेल और गैस में परिवर्तित होकर कार्बन को संचित करते हैं।

13: सुपोषण (Eutrophication) क्या है और यह क्यों हानिकारक है? 

उत्तर: कृषि में उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से झीलों में नाइट्रेट पहुँचता है, जिससे शैवाल की अत्यधिक वृद्धि (शैवाल प्रस्फुटन) होती है। इससे जल में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और जलीय जीवों (मछलियों) की मृत्यु हो जाती है, इसे सुपोषण कहते हैं।

14: नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen fixation) करने वाले किन्हीं दो जीवाणुओं के नाम बताइए। 

उत्तर: फलीदार पादपों की जड़ों की ग्रंथियों में पाए जाने वाले राइजोबियम और मृदा में पाए जाने वाले एजोटोबैक्टर वायुमंडलीय N2 को अमोनिया में परिवर्तित करते हैं।

15: ‘मिशन LiFE’ क्या है? 

उत्तर: ‘मिशन LiFE’ (Lifestyle for Environment) भारत द्वारा नेतृत्व की जाने वाली एक वैश्विक पहल है जिसका उद्देश्य लोगों को सजग तथा पर्यावरण हितैषी जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर:

1. पृथ्वी के वायुमंडल की मुख्य परतों का वर्णन करें और बताएं कि यह पृथ्वी पर जीवन की सुरक्षा कैसे करता है? 

उत्तर: पृथ्वी का वायुमंडल मुख्य परतों में विभाजित है, जो मौसम और जलवायु को नियंत्रित करता है।

(i) क्षोभमंडल (0–12 km): यह सबसे निचली परत है जहाँ मौसम की लगभग सभी परिघटनाएँ (जैसे हवाएँ और तूफान) घटित होती हैं और ऊँचाई के साथ ताप घटता है।

(ii) समतापमंडल (12–50 km): इस परत में ओजोन परत स्थित होती है जो पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती है। यहाँ ऊँचाई के साथ ताप बढ़ता है, जिससे यह परत शांत रहती है।

इसके ऊपर मध्यमंडल, तापमंडल और बहिर्मंडल होते हैं।

जीवन की सुरक्षा: वायुमंडल दो महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाता है। पहला, ओजोन परत हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को रोक कर त्वचा कैंसर आदि से बचाती है। दूसरा, यह ग्रीनहाउस प्रभाव (CO2, जलवाष्प) के माध्यम से पृथ्वी से बाहर जाने वाली अवरक्त ऊष्मा को रोककर रखता है, जिससे पृथ्वी इतनी गर्म रहती है कि जीवन संभव हो सके।

2. नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle) के विभिन्न चरणों का विस्तार से वर्णन करें।

उत्तर: नाइट्रोजन सभी सजीवों में प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल के संश्लेषण के लिए आवश्यक है।

नाइट्रोजन चक्र के मुख्य चरण इस प्रकार हैं:

(i) नाइट्रोजन स्थिरीकरण: राइजोबियम और एजोटोबैक्टर जैसे जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन (N2) को अमोनिया में परिवर्तित करते हैं। तड़ित (बिजली कड़कना) और कृत्रिम हाबर-बॉश प्रक्रिया द्वारा भी स्थिरीकरण होता है।

(ii) नाइट्रीकरण (Nitrification): नाइट्रोसोमोनास जीवाणु अमोनिया को नाइट्राइट में, और नाइट्रोबैक्टर इसे नाइट्रेट में बदलते हैं।

(iii) स्वांगीकरण (Assimilation): पादप इन नाइट्रोजन यौगिकों को मृदा से ग्रहण करते हैं, और जंतु पादपों को खाकर नाइट्रोजन प्राप्त करते हैं।

(iv) अमोनीकरण (Ammonification): मृत पादपों व जंतुओं और अपशिष्टों को अपघटक (जीवाणु/कवक) अपघटित कर अमोनिया के रूप में पुनः मृदा में लौटा देते हैं।

(v) विनाइट्रीकरण (Denitrification): स्यूडोमोनास जैसे जीवाणु नाइट्रेट को पुनः नाइट्रोजन गैस (N2) में बदलकर वायुमंडल में छोड़ देते हैं, जिससे यह चक्र पूरा होता है।

3. पृथ्वी की सतह का असमान ऊष्मण पवन और महासागरीय धाराओं को कैसे संचालित करता है?

उत्तर: सूर्य की किरणें पृथ्वी के गोलाकार आकार के कारण अलग-अलग अक्षांशों पर अलग-अलग कोणों पर पड़ती हैं। भूमध्य रेखा पर यह तीव्र होती हैं, जबकि ध्रुवों पर फैल जाती हैं, जिससे असमान ऊष्मण होता है।

पवनों का निर्माण: भूमध्य रेखा के पास अत्यधिक ऊष्मण से वायु गर्म होकर ऊपर उठती है और निम्न दाब बनाती है। यह वायु ध्रुवों की ओर बढ़ती है और ठंडी होकर 30° अक्षांश पर नीचे उतरती है (उच्च दाब)। दाब के इस अंतर के कारण ग्रहीय पवनें उत्पन्न होती हैं। इसी प्रकार दिन और रात के असमान ऊष्मण के कारण घाटी समीर और पर्वतीय समीर जैसी स्थानीय पवनें चलती हैं।

महासागरीय धाराएँ: महासागरों में पवन के घर्षण, तापमान, लवणता के अंतर और पृथ्वी के घूर्णन के कारण सतही जल गतिमान होता है। भूमध्य रेखा का गर्म जल ध्रुवों की ओर बढ़ता है, जबकि ध्रुवों का ठंडा और भारी जल नीचे से भूमध्य रेखा की ओर आता है। पृथ्वी के घूर्णन से ये धाराएँ विक्षेपित होकर महासागरीय भंवर (Gyres) बनाती हैं जो जलवायु को संतुलित करती हैं।

4. कार्बन चक्र क्या है? प्राकृतिक और मानवीय गतिविधियाँ इस चक्र को कैसे प्रभावित कर रही हैं?

उत्तर: कार्बन जीवन का मुख्य आधार है जो वायुमंडल, जैवमंडल, भूमंडल और जलमंडल के मध्य निरंतर चक्रित होता रहता है।

(i) प्राकृतिक चक्र: द्रुत चक्र में पादप प्रकाश संश्लेषण द्वारा CO2 का उपयोग करते हैं और श्वसन व अपघटन के माध्यम से इसे वायुमंडल में वापस छोड़ते हैं। मंद चक्र में मृत जीव लाखों वर्षों में दबकर जीवाश्म ईंधन बन जाते हैं, और महासागर CO2 को अवशोषित कर समुद्री जीवों के लिए कार्बोनेट आयन बनाते हैं (महासागर कार्बन का 71% भंडार हैं)।

(ii) मानवीय प्रभाव: वनों की कटाई (वनोन्मूलन) और कोयला, तेल आदि जीवाश्म ईंधनों के असीमित दहन के कारण वायुमंडल में CO2 की मात्रा बहुत तेजी से (लगभग 35% तक) बढ़ गई है। इसके कारण हरितगृह प्रभाव (Greenhouse effect) तीव्र हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक तापन, हिमानियों का पिघलना और जलवायु परिवर्तन जैसी चरम समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।

5. मानवीय गतिविधियाँ पृथ्वी की प्राकृतिक प्रक्रियाओं (पारिस्थितिक तंत्र, जल और जलवायु) को किस प्रकार बाधित कर रही हैं?

उत्तर: मनुष्यों की गतिविधियाँ पृथ्वी के सूक्ष्म संतुलन को कई तरह से खतरे में डाल रही हैं:

(i) जलवायु परिवर्तन और अम्लीय महासागर: अत्यधिक जीवाश्म ईंधन जलाने से वातावरण में CO2 बढ़ी है। जब महासागर इस अतिरिक्त CO2 को अवशोषित करते हैं, तो समुद्री जल अधिक अम्लीय हो जाता है, जिससे प्रवाल भित्तियों (Coral reefs) और समुद्री जीवों के लिए खतरा पैदा हो गया है।

(ii) सुपोषण (Eutrophication): कृषि में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से नदियों और झीलों में नाइट्रोजन (नाइट्रेट) भर जाती है, जिससे शैवाल की अनियंत्रित वृद्धि होती है। यह पानी की ऑक्सीजन सोख लेता है, जिससे मछलियाँ मर जाती हैं।

(iii) वनोन्मूलन (Deforestation): जंगलों को काटने से प्रकाश संश्लेषण कम हो जाता है, जिससे CO2 का संचय बढ़ता है। इसके अलावा वाष्पोत्सर्जन घटने से वर्षा का चक्र बाधित होता है, मृदा अपरदन बढ़ता है, और जीवों के आवास नष्ट होने से जैव विविधता का पतन होता है। इन प्रभावों को कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा, सतत कृषि और ‘मिशन LiFE’ जैसी पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाना आवश्यक है।

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