NCERT Class 8 Hindi Chapter 1 स्वदेश

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NCERT Class 8 Hindi Chapter 1 स्वदेश

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Chapter: 1

पाठ से

आइए, अब हम इस कविता को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं। नीचे दी गई गतिविधिया इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। 

1. “वह हृदय नहीं है पत्थर है” इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है –

(i) सामाजिकता से।

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(ii) संवेदनहीनता से।

(iii) कठोरता से।

(iv) नैतिकता से।

उत्तर: (ii) संवेदनहीनता से।

2. निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है?

(i) देश की प्रगति।

(ii) देश के प्रति प्रेम।

(iii) देश की सुरक्षा।

(iv) देश की स्वतंत्रता।

उत्तर: (ii) देश के प्रति प्रेम।

3. “हम हैं जिसके राजा-रानी” इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द किसके लिए आया है?

(i) देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए।

(ii) देश की शासन व्यवस्था के लिए।

(iii) देश के समस्त नागरिकों के लिए।

(iv) देश के सभी प्राणियों के लिए।

उत्तर: (iii) देश के समस्त नागरिकों के लिए।

4. कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है?

(i) जिसमें साहस की कमी है।

(ii) जिसमें स्नेह का भाव नहीं है।

(iii) जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है।

(iv) जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं है।

उत्तर: (iii) जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर: हो सकता है कि मेरे समूह के साथियों ने कुछ प्रश्नों के अलग-अलग उत्तर चुने हों। लेकिन मैंने जिन उत्तरों को चुना है, उनके पीछे ये कारण हैं—

“वह हृदय नहीं है पत्थर है” – यहाँ पत्थर का तात्पर्य संवेदनहीनता से है, क्योंकि यदि किसी हृदय में देश-प्रेम की भावना ही न हो तो वह केवल कठोर और असंवेदनशील माना जाएगा।

मुख्य भाव – कविता का प्रमुख संदेश देश के प्रति प्रेम है। कवि ने हर पंक्ति में देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना दिखाई है।

“हम हैं जिसके राजा-रानी” – इसमें ‘हम’ देश के सभी नागरिकों के लिए आया है। कवि यह जताना चाहता है कि भारत हमारा है और हम सब मिलकर उसके शासक और संरक्षक हैं।

कौन-सा हृदय पत्थर के समान है – वह हृदय जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है। देश के प्रति प्रेम और समर्पण के बिना मनुष्य का जीवन नीरस और कठोर प्रतीत होता है।

मिलकर करें मिलान

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों का उनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलान कीजिए।

क्रम स्तंभ 1स्तंभ 2
1.जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुंच सकेगा पार नहीं।1. जिस देश की ज्ञान-संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है।
2.जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं।2. जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।
3.जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी।3. जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता।
4.सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।4. जो स्वयं के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है।

उत्तर:

क्रम स्तंभ 1स्तंभ 2
1.जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुंच सकेगा पार नहीं।3. जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता।
2.जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं।4. जो स्वयं के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है।
3.जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी।1. जिस देश की ज्ञान-संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है।
4.सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।2. जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।

पंक्तियों पर चर्चा

कविता से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

(क) “निश्चित है निस्संशय निश्चित, 

है जान एक दिन जाने को। 

है काल-दीप जलता हरदम, 

जल जाना है परवानों को।।”

उत्तर: अर्थ: इन पंक्तियों में जीवन की नश्वरता और मृत्यु की निश्चितता को व्यक्त किया गया है। कवि कहते हैं कि मृत्यु अटल सत्य है—इसमें कोई संदेह नहीं है। जैसे समय का दीपक निरंतर जलता रहता है, वैसे ही उसकी लौ में हर जीवन को एक दिन जलकर समाप्त होना ही है। परवाना दीपक की लौ में जलकर नष्ट हो जाता है, उसी प्रकार हर प्राणी को अंत की ओर बढ़ना अनिवार्य है।

विचार: हमें मृत्यु से भयभीत होने के बजाय जीवन को सार्थक और उद्देश्यपूर्ण बनाने पर ध्यान देना चाहिए। यह जीवन सीमित और क्षणभंगुर है, इसलिए इसे व्यर्थ कार्यों में न गँवाकर देश, समाज और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित करना ही सच्चा जीवन है।

(ख) “सब कुछ है अपने हाथों में, 

क्या तोप नहीं तलवार नहीं। 

वह हृदय नहीं है, पत्थर है, 

जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”

उत्तर: अर्थ: इन पंक्तियों में कवि ने राष्ट्रप्रेम की महत्ता को रेखांकित किया है। कवि कहता है कि मनुष्य के पास शक्ति, साधन और सामर्थ्य सब कुछ है—वह चाहे तो तलवार और तोप का प्रयोग भी कर सकता है। परंतु यदि उसके हृदय में स्वदेश का प्रेम नहीं है, तो उसका हृदय संवेदनहीन पत्थर के समान है।

विचार: मनुष्य का जीवन तभी महान है जब उसमें देश के लिए त्याग और बलिदान की भावना हो। शक्ति और साधन होने पर भी यदि देश के प्रति प्रेम न हो तो जीवन निरर्थक है। इसलिए हमें अपने हृदय में सच्चा स्वदेश-प्रेम जागृत करना चाहिए।

(ग) “जो भरा नहीं है भावों से, 

बहती जिसमें रस-धार नहीं।

वह हृदय नहीं है पत्थर है, 

जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।।”

उत्तर: अर्थ: इन पंक्तियों में कवि ने बताया है कि जिस हृदय में भावनाएँ नहीं हैं, जिसमें स्नेह और रस की धारा नहीं बहती, वह हृदय वास्तव में हृदय नहीं बल्कि पत्थर है। परंतु सबसे बड़ा दोष यह है कि यदि हृदय में स्वदेश के प्रति प्रेम नहीं है, तो वह पूर्णत: निस्सार और मृतप्राय है।

विचार: मनुष्य का जीवन केवल तभी सार्थक है जब उसके भीतर देशप्रेम और मानवीय संवेदनाएँ हों। भावनाविहीन और देशप्रेमविहीन हृदय किसी काम का नहीं होता। सच्चा जीवन वही है जिसमें स्वदेश के लिए त्याग, प्रेम और समर्पण की भावना हो।

सोच-विचार के लिए

कविता को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।

(क) “हम हैं जिसके राजा-रानी पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है?

उत्तर: इस पंक्ति में कवि ने अपने देश की धरती को संबोधित किया है। कवि कहता है कि जिस भूमि में हम जन्मे, पले-बढ़े और अन्न-जल पाया, वही हमारी माता है। उसी भूमि में रहकर हम स्वतंत्रता और स्वाभिमान से जीते हैं, इसलिए हम सब उस भूमि के राजा-रानी कहलाते हैं। यहाँ कवि ने राष्ट्र को महान और हमें उसका गौरवशाली नागरिक बताया है।

(ख) ‘संसार-संग’ चलने से आप क्या समझते हैं। जो व्यक्ति ‘संसार-संग’ नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है?

उत्तर: ‘संसार-संग चलने’ का अर्थ है समय और समाज के साथ चलना तथा प्रगति की राह पर आगे बढ़ना। जो व्यक्ति संसार के साथ नहीं चलता, वह समाज से अलग-थलग पड़ जाता है। ऐसे व्यक्ति का जीवन महत्वहीन हो जाता है, और संसार भी उसे स्वीकार नहीं करता। इसलिए संसार उनका नहीं हो पाता जो समाज और प्रगति से कदम मिलाकर नहीं चलते।

(ग) “उस पर है नहीं पसीजा जो क्या है वह भू का भार नहीं। पक्ति से आप क्या समझते हैं? बताइए।

उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि जिस व्यक्ति का हृदय अपने देश के प्रति प्रेम और करुणा से नहीं पिघलता, वह वास्तव में धरती पर व्यर्थ बोझ है। ऐसा मनुष्य केवल शारीरिक रूप से जीवित है, लेकिन उसका जीवन राष्ट्र और समाज के लिए किसी काम का नहीं है। कवि ने ऐसे लोगों को धरती का भार कहा है। 

(घ) कविता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बाते आई है। आप देश-प्रेम’ से क्या समझते हैं? बताइए।

उत्तर: देश-प्रेम का अर्थ है अपने देश के प्रति गहरी निष्ठा, सम्मान और समर्पण रखना। देश-प्रेम हमें प्रेरित करता है कि हम अपने राष्ट्र के लिए बलिदान दें, उसकी स्वतंत्रता, संस्कृति और एकता की रक्षा करें। देश-प्रेम का भाव ही नागरिक को सच्चा कर्तव्यनिष्ठ और त्यागी बनाता है।

(ङ) यह रचना एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है। इस रचना की अन्य विशेषताएँ ढूँदिए और लिखिए।

उत्तर: इस कविता की अन्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

यह रचना सरल और प्रभावशाली भाषा में लिखी गई है।

इसमें राष्ट्रप्रेम और त्याग की भावना को बहुत ऊँचे स्वर में व्यक्त किया गया है।

कविता का प्रत्येक छंद लोगों को उत्साहित और प्रेरित करने वाला है।

इसमें उपमान और प्रतीकों (जैसे दीपक, परवाना, पत्थर का हृदय) का प्रयोग कर संदेश को अधिक प्रभावशाली बनाया गया है।

यह कविता केवल भावनात्मक ही नहीं, बल्कि कर्मठ और साहसी जीवन जीने का आह्वान भी करती है।

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और लिखिए।

(क) “जिसने कि खजाने खोले हैं” अनुमान करके बताइए कि इस पंक्ति में किस प्रकार के खजाने की बात की गई होगी?

उत्तर: इस पंक्ति में कवि ने हमारे देश की प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदाओं को खजाना कहा है। यहाँ खजाने से आशय सोना-चाँदी, हीरे-मोती जैसे भौतिक खजानों से नहीं बल्कि उपजाऊ भूमि, नदियाँ, जंगल, खनिज पदार्थ और समृद्ध संस्कृति से है। भारत ने अपनी धरती पर असीम संपदा और ज्ञान का खजाना खोला है।

(ख) “जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े” पंक्ति में ‘उगे-बढ़े’ किसके लिए और क्यों कहा गया होगा?

उत्तर: यहाँ ‘उगे-बढ़े’ से आशय हम सब भारतीयों से है। कवि ने बताया है कि हम उसी मिट्टी में जन्मे, पले और बड़े हुए हैं। उस मिट्टी ने हमें अन्न-पानी दिया, जीवन दिया और हमारी सभ्यता-संस्कृति को पाला-पोसा। इसलिए मातृभूमि की मिट्टी के प्रति हमारा कर्तव्य है कि हम उसके लिए समर्पित रहें।

(ग) “वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति में ‘हृदय’ के लिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया होगा?

उत्तर: कवि ने यहाँ पत्थर शब्द का प्रयोग असंवेदनशील और भावनाशून्य व्यक्ति के लिए किया है। जिस व्यक्ति के हृदय में देश-प्रेम, करुणा और संवेदना नहीं है, उसका हृदय पत्थर जैसा कठोर है। हृदय का कार्य है प्रेम और भावना से भरा होना, परंतु यदि उसमें देश के लिए प्यार नहीं है तो वह व्यर्थ और निस्सार है।

(घ) कल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा है। वो आपसे क्या-क्या बातें करेगा और आप उसे क्या-क्या कहेंगे?

(संकेत- पत्थर जब मैं नदी में था तो नदी की धारा मुझे बदलती भी थी….)

उत्तर: यदि पत्थर अपनी कथा सुनाए तो वह कहेगा—“मैं कभी नदी की धारा में था। जल की धारा मुझे बहाकर लाती-जाती थी और धीरे-धीरे मेरे रूप को बदलती रही। कभी मैं पहाड़ का हिस्सा था, फिर टूटकर नीचे आया और अब किसी के घर की नींव में लगा हूँ। मैंने अनेक ऋतुएँ देखी हैं और सब कुछ सहा है।”

मैं पत्थर से कहूँगा—“तुम बहुत कठोर हो, लेकिन तुम्हारे भीतर भी एक इतिहास छिपा है। तुम हमें यह सिखाते हो कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, हमें मजबूत बने रहना चाहिए और अपने कर्तव्य पर अडिग रहना चाहिए।”

(ङ) देश-प्रेम की भावना देश की सुरक्षा से ही नहीं, बल्कि संरक्षण से भी जुड़ी होती है। अनुमान करके बताइए कि देश के किन-किन संसाधनों या वस्तुओं आदि को संरक्षण की आवश्यकता है और क्यों?

उत्तर: देश-प्रेम का अर्थ केवल सीमा की रक्षा करना नहीं है, बल्कि देश की अमूल्य धरोहरों को सुरक्षित रखना भी है। हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों जैसे जंगल, नदियाँ, वन्यजीव, खनिज संपदा और स्वच्छ पर्यावरण का संरक्षण करना चाहिए। इसके अलावा ऐतिहासिक धरोहरों, मंदिरों, पुरानी इमारतों और सांस्कृतिक परंपराओं को भी बचाना आवश्यक है। यदि हम इनका संरक्षण करेंगे तभी हमारा देश समृद्ध रहेगा और आने वाली पीढ़ियाँ भी इनका लाभ उठा पाएँगी।

कविता की रचना

“जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े, 

पाया जिसमें दाना-पानी। 

हैं माता-पिता बंधु जिसमें, 

हम हैं जिसके राजा-रानी।।”

इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों को ध्यान से देखिए।

‘दाना-पानी’ और ‘राजा-रानी इन शब्दों की अंतिम ध्वनि एक-सी है। इस विशेषता को ‘तुक मिलाना” कहते हैं। अब नीचे दिए गए प्रश्नों पर पाँच-पाँच के समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए।

(क) शब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?

उत्तर: शब्दों के तुक मिलाने से कविता में संगीतात्मकता और लय उत्पन्न होती है। तुकबंदी से कविता गेय बनती है और पाठक या श्रोता के मन पर गहरा प्रभाव डालती है। ‘दाना-पानी’ और ‘राजा-रानी’ जैसे तुक मिलाने वाले शब्दों से कविता में मिठास, प्रवाह और सुंदरता बढ़ जाती है। इससे कविता याद रखने और सुनाने में भी सरल हो जाती है।

(ख) कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए और क्या-क्या प्रयोग किए गए हैं?

उत्तर: कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए कवि ने केवल तुकबंदी ही नहीं, बल्कि उपमा, रूपक और प्रतीकों का भी प्रयोग किया है। जैसे— दीपक और परवाना का उदाहरण जीवन की क्षणभंगुरता बताने के लिए, हृदय को पत्थर कहना भावहीनता का प्रतीक है, और तोप-तलवार का उल्लेख शक्ति और साहस को दर्शाने के लिए किया गया है। इसके अलावा सरल और प्रेरक भाषा तथा जोशीले भावों का प्रयोग कविता को और भी सशक्त बनाता है।

भावनात्मक जुड़ावः कविता में ‘माता-पिता’, ‘बंधु’, ‘राजा-रानी’ जैसे शब्दों का प्रयो करके देश या जन्मभूमि के प्रति प्रेम और अपनत्व का भाव जगाया गया है।

सरल भाषाः कविता की भाषा सरल और सुबोध है, जिससे यह आसानी से समझ में आती है और पाठक से जुड़ पाती है।

आपकी कविता

देश-प्रेम से जुड़े अपने विचारों को आधार बनाते हुए कविता को आगे बढ़ाइए-

वह हृदय नहीं है पत्थर है, 

जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।

__________________

__________________

__________________

उत्तर: वह हृदय नहीं है पत्थर है, 

जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।

वह जीवन कैसा जीवन है,

जिसमें त्याग का भार नहीं।

जननी-भूमि के लिए जो जिए,

वही अमर, उसका हार नहीं।

देश-प्रेम ही सच्ची पूजा,

इससे बढ़कर उपहार नहीं।

भाषा की बात

(क) शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘स्वदेश’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए। फिर मित्रों से मिलाकर अपनी सूची बढ़ाइए –

उत्तर: स्वतंत्रता,मातृभूमि,देशभक्ति,आज़ादी,त्याग,बलिदान,

नागरिक,संविधान।

(ख) विराम चिह्नों को समझें:

(i) “जो चल न सका संसार-संग”

(ii) “बहती जिसमें रस-धार नहीं”।

(iii) “पाया जिसमें दाना-पानी”

(iv) “हैं माता-पिता बंधु जिसमें”।

(v) “हम हैं जिसके राजा-रानी”

(vi) “जिससे न जाति-उद्धार हुआ”।

कविता में आई हुई उपर्युक्त पंक्तियों को ध्यानपूर्वक पढ़िए। इनमें कुछ शब्दों के बीच एक चिह्न (-) लगा है। इसे योजक चिहन कहते हैं। योजक चिह्न दो शब्दों में परस्पर संबंध स्पष्ट करने तथा उन्हें जोड़कर लिखने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। कविता में संदर्भ के अनुसार योजक चिह्नों के स्थान पर का, की, के और में से कौन-से शब्द जोड़ेंगे जिससे अर्थ स्पष्ट हो सके। लिखिए। (संकेत – ‘जो चल न सका संसार के संग’)

उत्तर: (i) “जो चल न सका संसार-संग”।

सही रूप: “जो चल न सका संसार के संग”।

(ii) “बहती जिसमें रस-धार नहीं”।

सही रूप: “बहती जिसमें रस की धार नहीं”।

(iii) “पाया जिसमें दाना-पानी”।

सही रूप: “पाया जिसमें दाना और पानी” (यहाँ ‘और’ भी अर्थ स्पष्ट करता है, पर ‘का’/‘की’/‘के’ प्रयोग आवश्यक नहीं है।)।

(iv) “हैं माता-पिता बंधु जिसमें”।

सही रूप: “हैं माता-पिता और बंधु जिसमें”।

(v) “हम हैं जिसके राजा-रानी”।

सही रूप: “हम हैं जिसके राजा और रानी”।

(vi) “जिससे न जाति-उद्धार हुआ”।

सही रूप: “जिससे न जाति का उद्धार हुआ”।

(ग) शब्द-मित्र

“है जान एक दिन जाने को”

“है काल-दीप जलता हरदम”

उपर्युक्त पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों में ‘है’ शब्द पहले आया है जिसके कारण कविता में लयात्मकता आ गई है। यदि ‘है’ का प्रयोग पंक्ति के अंत में किया जाए तो यह गद्य जैसी लगने लगेगी, जैसे-

‘जान एक दिन जाने को है।’

‘काल-दीप हरदम जलता है।’

अब आप कविता में से ऐसी पंक्तियों को चुनिए जिनमें ‘है’ शब्द का प्रयोग पहले हुआ है। चुनी हुई पंक्तियों में शब्दों के स्थान बदलकर पुनः लिखिए।

अब नीचे दी गई पंक्तियों में ‘है, हैं’ शब्द का प्रयोग पहले करके पंक्तियों को पुनः लिखिए और देखिए कि इससे पंक्तियों के सौंदर्य में क्या परिवर्तन आया है। अपने साथियों से चर्चा कीजिए।

“जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, 

जिस पर है दुनिया दीवानी।।”

उत्तर: – ‘है’ शब्द का प्रयोग पहले होने वाली पंक्तियाँ और उनके स्थान बदलकर पुनः लिखा गया रूपः

“है जान एक दिन जाने को” –  “जान एक दिन जाने को है।”

“है काल-दीप जलता हरदम” –  “काल-दीप हरदम जलता है।”

“है, हैं शब्द का प्रयोग पहले करके पंक्तियों को पुनः लिखना:

“है जिस पर ज्ञानी भी मरते”

“है जिस पर दुनिया दीवानी।।”

(घ) समानार्थी शब्द

कविता से चुनकर कुछ शब्द निम्न तालिका में दिए गए हैं। दिए गए शब्दों से इनके समानार्थी शब्द ढूँढ़कर तालिका में दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए।

उत्तर: भू → पृथ्वी, धरा।

दीप → दीपक, प्रदीप।

हृदय → दिल, जी।

तलवार → असि, कृपाण।

दुनिया → संसार, जग।

पत्थर → पाहन, पाषाण।

कविता का शीर्षक

“वह हृदय नहीं है पत्थर है, 

जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”

इस कविता का शीर्षक है ‘स्वदेश’। कई बार कवि कविता की किसी पंक्ति को ही कविता का शीर्षक बनाते हैं। यदि आपको भी इस कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?

उत्तर: यदि मुझे इस कविता की किसी पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो, तो मैं यह पंक्ति चुनूँगा—

“वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”

कारण: यह पंक्ति पूरी कविता की आत्मा को प्रकट करती है। पूरी कविता का मुख्य संदेश यही है कि बिना देश-प्रेम के हृदय व्यर्थ है और जीवन का कोई मूल्य नहीं। कवि बार-बार देश-प्रेम को ही सबसे बड़ा धर्म और कर्तव्य मानते हैं। इसलिए यह पंक्ति शीर्षक के रूप में सबसे उपयुक्त है क्योंकि यह पूरी कविता के भाव और सार को स्पष्ट करती है।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। उन चित्रों पर सही (✓) का चिह्न लगाइए जिन्हें आप ‘स्वदेश प्रेम’ की श्रेणी में रखना चाहेंगे?

उत्तर: छात्र श्याम करें।

(ख) अब आप अपने उत्तर के पक्ष में तर्क भी दीजिए।

उत्तर: तर्क: सैनिक को सम्मान देना स्वदेश-प्रेम है क्योंकि सैनिक देश की रक्षा करते हैं और उनका आदर करना राष्ट्रप्रेम का प्रतीक है।

सफाई करना देश को स्वच्छ रखने का कार्य है, यह भी देशभक्ति का एक रूप है।

किसान खेत में काम करता है तो वह देशवासियों के लिए अन्न पैदा करता है, यह भी देशसेवा है।

ध्वज वंदन करना सीधे-सीधे राष्ट्र के प्रति आदर और प्रेम दिखाता है।

बुजुर्गों की मदद करना मानवीय संवेदना और संस्कृति का हिस्सा है, जो स्वदेश-प्रेम की नींव है।

अनुशासन से लाइन लगाना समाज और व्यवस्था के प्रति जिम्मेदारी का भाव है।

नियम का पालन करना (फूल न तोड़ें) देश की सम्पत्ति और पर्यावरण की रक्षा करना भी स्वदेश-प्रेम है।

पुस्तकालय में पढ़ाई करना शिक्षा प्राप्त कर देश की प्रगति में योगदान देना स्वदेश-प्रेम है।

हमारे अस्त्र-शस्त्र

“सब कुछ है अपने हाथों में, 

क्या तोप नहीं तलवार नहीं।”

देश की सीमा पर सैनिक सुरक्षा प्रहरी की भाँति खड़े रहते हैं। वे बुरी भावना से अतिक्रमण करने वाले का सामना तोप, तलवार, बंदूक आदि से करते हैं।

आप बताइए कि निम्नलिखित स्वदेश प्रेमियों के अस्व-शस्त्र क्या होंगे?

विद्यार्थी  ______________________________

अध्यापक ______________________________

कृषक ______________________________

चिकित्सक ______________________________

वैज्ञानिक ______________________________

श्रमिक ______________________________

पत्रकार ______________________________

उत्तर: विद्यार्थी – पुस्तक, कलम, ज्ञान और अनुशासन।

(क्योंकि विद्यार्थी का अस्त्र-शस्त्र शिक्षा है, जिसके द्वारा वह राष्ट्र को मजबूत बनाता है।)

अध्यापक – शिक्षा, सद्गुण और आदर्श चरित्र।

(अध्यापक अपने ज्ञान और मूल्यों से समाज में नई चेतना जगाता है।)

कृषक – हल, बीज, भूमि और परिश्रम।

(कृषक अपने परिश्रम से अन्न उपजाता है और देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है।)

चिकित्सक – दवा, सेवा और करुणा।

(डॉक्टर बीमारियों से लड़ने और जीवन बचाने का कार्य करते हैं।)

वैज्ञानिक – अनुसंधान, आविष्कार और विज्ञान-तकनीक।

(वैज्ञानिक अपने प्रयोगों से देश को प्रगति की राह पर आगे बढ़ाते हैं।)

श्रमिक – श्रम, औज़ार और कार्यकुशलता।

(श्रमिक अपने पसीने और मेहनत से उद्योग, निर्माण और विकास के कार्य आगे बढ़ाते हैं।)

पत्रकार – कलम, सच्चाई और साहस।

(पत्रकार समाज को जागरूक करने और सत्य को सामने लाने का कार्य करते हैं।)

अपनी भाषा अपने गीत

(क) कक्षा में सभी विद्यार्थी अपनी-अपनी भाषा में देश-प्रेम से संबंधित कविताओं और गीतों का संकलन करें।

उत्तर: विद्यार्थी श्याम करें।

(ख) किसी एक गीत की कक्षा में संगीतात्मक प्रस्तुति भी करें।

उत्तर: विद्यार्थी श्याम करें।

तिरंगा झंडा – कब प्रसन्न और कब उदास

राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा झंडा) देश का सम्मान है। किसी एक दिन सोने से पहले अपने पूरे दिन के कार्यों को याद कीजिए और विचार कीजिए कि आपके किन कार्यों से तिरंगा झंडा उदास हुआ होगा और किन कार्यों से तिरंगे झंडे को प्रसन्नता हुई होगी।

उत्तर: पैराग्राफ़ रूप में – तिरंगा झंडा हमारे देश का सम्मान है। यदि हम दिनभर ऐसे कार्य करते हैं जो देश, समाज और पर्यावरण के लिए हानिकारक हों—जैसे गंदगी फैलाना, नियम तोड़ना, झूठ बोलना, झगड़ा करना, आलस्य करना या दूसरों की मदद न करना—तो तिरंगा झंडा हमसे उदास हो जाता है।

लेकिन जब हम ईमानदारी से पढ़ाई करते हैं, अनुशासन में रहते हैं, बड़ों का आदर करते हैं, कमजोरों की मदद करते हैं, पेड़-पौधे लगाते हैं, सफाई रखते हैं और अपने देश के नियमों का पालन करते हैं—तो तिरंगा झंडा हमसे प्रसन्न होता है।

बिंदुवार में –

तिरंगा झंडा कब उदास हुआ होगा :

जब मैंने कक्षा का होमवर्क पूरा नहीं किया।

जब मैंने रास्ते में गंदगी फैलाई।

जब मैंने किसी की मदद नहीं की।

जब मैंने झगड़ा किया या अनुशासन तोड़ा।

तिरंगा झंडा कब प्रसन्न हुआ होगा :

जब मैंने मन लगाकर पढ़ाई की।

जब मैंने घर और स्कूल को स्वच्छ रखने में योगदान दिया।

जब मैंने बड़ों का आदर किया और छोटे बच्चों की मदद की।

जब मैंने पेड़-पौधे लगाए और पर्यावरण की रक्षा की।

जब मैंने ईमानदारी और साहस से सही काम किया।

झरोखे से

आपने देश-प्रेम से संबंधित ‘स्वदेश’ कविता पढ़ी। अब आप स्वदेशी कपड़े ‘खादी’ से संबंधित सोहनलाल द्विवेदी की कविता ‘खादी गीत’ का एक अंश पढ़िए।

खादी गीत

खादी के धागे-धागे में 

अपनेपन का अभिमान भरा, 

माता का इसमें मान भरा, 

अन्यायी का अपमान भरा;

खादी के रेशे-रेशे में 

अपने भाई का प्यार भरा, 

माँ-बहनों का सत्कार भरा, 

बच्चों का मधुर दुलार भरा;

खादी की रजत चंद्रिका जब, 

आकर तन पर मुसकाती है, 

तब नवजीवन की नई ज्योति 

अंतस्तल में जग जाती है

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