NCERT Class 8 Hindi Chapter 2 दो गौरैया Solutions English Medium As Per NCERT New Syllabus to each chapter is provided in the list so that you can easily browse through different chapters NCERT Class 8 Hindi Chapter 2 दो गौरैया Question Answer and select need one. NCERT Class 8 Hindi Chapter 2 दो गौरैया Notes Download PDF. CBSE Solutions For Class 8 Hindi.
NCERT Class 8 Hindi Chapter 2 दो गौरैया
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दो गौरैया
Chapter: 2
पाठ से
आइए, अब हम इस कहानी को थोड़ी और स्पष्टता से समझते हैं। नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (☆) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. पिताजी ने कहा कि घर सराय बना हुआ है क्योंकि –
(i) घर की बनावट सराय जैसी बहुत विशाल है।
(ii) घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं।
(iii) पिताजी और माँ घर के मालिक नहीं हैं।
(iv) घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं।
उत्तर: (ii) घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं।
2. कहानी में ‘घर के असली मालिक’ किसे कहा गया है?
(i) माँ और पिताजी को जिनका वह मकान है।
(ii) लेखक को जिसने यह कहानी लिखी है।
(iii) जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे।
(iv) मेहमानों को जो लेखक से मिलने आते थे।
उत्तर: (iii) जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे।
3. गौरैयों के प्रति माँ और पिताजी की प्रतिक्रियाएँ कैसी थीं?
(i) दोनों ने खुशी से घर में उनका स्वागत किया।
(ii) पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया।
(iii) दोनों ने मिलकर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया।
(iv) माँ ने उन्हें निकालने के लिए कहा लेकिन पिताजी ने घर में रहने दिया।
उत्तर: (ii) पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया।
4. माँ बार-बार पिताजी की बातों पर मुसकराती और मजाक करती थीं। इससे क्या पता चलता है?
(i) माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ।
(ii) माँ को पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे।
(iii) माँ को गौरैयों की गतिविधियों पर हँसी आ जाती थी।
(iv) माँ को दूसरों पर हँसना और उपहास करना अच्छा लगता था।
उत्तर: (ii) माँ को पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे।
5. कहानी में गौरैयों के बार-बार लौटने को जीवन के किस पहलू से जोड़ा जा सकता है?
(i) दूसरों पर निर्भर रहना।
(ii) असफलताओं से हार मान लेना।
(iii) अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना।
(iv) संघर्ष को छोड़कर नए रास्ते अपनाना।
उत्तर: (iii) अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: हो सकता है कि मेरे समूह के साथियों ने कुछ प्रश्नों के अलग-अलग उत्तर चुने हों। लेकिन मैंने जिन उत्तरों को चुना है, उसके पीछे मेरे ये कारण हैं—
घर सराय बना हुआ है – क्योंकि वहाँ कई प्रकार के पक्षी और जीव-जंतु रहते थे। घर केवल दीवारों का मकान नहीं था, बल्कि जीवों का भी आश्रय था।
घर के असली मालिक – जीव-जंतु थे, क्योंकि वही बिना किसी रोक-टोक के आते-जाते और रहते थे।
गौरैयों के प्रति माँ और पिताजी की प्रतिक्रिया – पिताजी उन्हें भगाना चाहते थे लेकिन माँ ने रोक दिया। इससे माँ की करुणा और स्नेह झलकता है।
माँ का मुस्कराना और मजाक करना – यह दर्शाता है कि माँ पिताजी की कोशिशों को व्यर्थ मानती थीं। वह जानती थीं कि गौरैयाँ बार-बार लौटेंगी, इसलिए उन्हें भगाना व्यर्थ है।
गौरैयों का बार-बार लौटना – जीवन में निरंतर प्रयास करने का प्रतीक है। असफलता के बाद भी हार न मानना और फिर से कोशिश करना ही सफलता का मार्ग है।
मिलकर करें मिलान
(क) पाठ में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो अर्थ दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सबसे उपयुक्त अर्थ से मिलाइए।
| क्रम | वाक्य | अर्थ |
| 1. | वह शोर मचता है कि कानों के पर्दे फट जाएँ, पर लोग कहते हैं कि पक्षी गा रहे हैं। | पक्षियों का शोर बहुत तेज होता है, लेकिन लोग उसे संगीत की तरह सराहते हैं। पिताजी को पक्षियों का चहकना शोर जैसा लगता था लेकिन लोगों को वह संगीत जैसा लगता था। |
| 2. | आँगन में आम का पेड़ है। तरह-तरह के पक्षी उस पर डेरा डाले रहते हैं। | आम के पेड़ पर अलग-अलग प्रकार के पक्षी हर समय निवास करते हैं। पक्षी पेड़ पर तंबू लगाकर रहते हैं जैसे किसी मेले में डेरा डाला जाता है। |
| 3. | वह धमा-चौकड़ी मचती है कि हम लोग ठीक तरह से सो भी नहीं पाते। | पिताजी की भागदौड़ और शोर इतना होता है कि घर के चूहे चैन से सो नहीं पाते। चूहों की भागदौड़ और शोर इतना होता है कि घर के लोग चैन से सो नहीं पाते। |
| 4. | वह समझते हैं कि माँ उनका मजाक उड़ा रही हैं। | पिताजी मों का मजाक समझ जाते हैं। पिताजी को ऐसा भ्रम होने लगता है कि माँ उनकी चेष्टाओं का उपहास कर रही हैं। |
| 5. | पिताजी ने लाठी दीवार के साथ टिकाकर रख दी और छाती फैलाए कुर्सी पर आ बैठे। | पिताजी ने लाठी एक ओर रख दी और गर्व से, विजयी मुद्रा में बैठ गए। पिताजी की छाती और साँस फूलने लगी और उन्होंने लाठी एक ओर रख दी। |
| 6. | इतने में रात पड़ गई। | रात किसी भारी चीज की तरह ऊपर से गिर पड़ी। कहानी की घटनाओं के बीच धीर-धीरे रात हो गई और अंधेरा छा गया। |
| 7. | जब हम लोग नीचे उतरकर आए तो वे फिर से मौजूद थीं और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं। | गौरैयों फिर से लौट आई थीं और शांत व प्रसन्न भाव से चहचहा रही थीं जैसे कोई राग गा रही हों। गौरैयों शास्त्रीय संगीत का अभ्यास कर रही थीं और ‘राग मल्हार’ गा रही थीं। |
उत्तर:
| क्रम | वाक्य | अर्थ |
| 1. | वह शोर मचता है कि कानों के पर्दे फट जाएँ, पर लोग कहते हैं कि पक्षी गा रहे हैं। | पिताजी को पक्षियों का चहकना शोर जैसा लगता था लेकिन लोगों को वह संगीत जैसा लगता था। |
| 2. | आँगन में आम का पेड़ है। तरह-तरह के पक्षी उस पर डेरा डाले रहते हैं। | पक्षी पेड़ पर तंबू लगाकर रहते हैं जैसे किसी मेले में डेरा डाला जाता है। |
| 3. | वह धमा-चौकड़ी मचती है कि हम लोग ठीक तरह से सो भी नहीं पाते। | चूहों की भागदौड़ और शोर इतना होता है कि घर के लोग चैन से सो नहीं पाते। |
| 4. | वह समझते हैं कि माँ उनका मजाक उड़ा रही हैं। | पिताजी को ऐसा भ्रम होने लगता है कि माँ उनकी चेष्टाओं का उपहास कर रही हैं। |
| 5. | पिताजी ने लाठी दीवार के साथ टिकाकर रख दी और छाती फैलाए कुर्सी पर आ बैठे। | पिताजी ने लाठी एक ओर रख दी और गर्व से, विजयी मुद्रा में बैठ गए। |
| 6. | इतने में रात पड़ गई। | कहानी की घटनाओं के बीच धीर-धीरे रात हो गई और अंधेरा छा गया। |
| 7. | जब हम लोग नीचे उतरकर आए तो वे फिर से मौजूद थीं और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं। | गौरैयों फिर से लौट आई थीं और शांत व प्रसन्न भाव से चहचहा रही थीं जैसे कोई राग गा रही हों। |
(ख) अपने उत्तर को अपने मित्रों के उत्तर से मिलाइए और विचार कीजिए कि आपने कौन-से अर्थ का चुनाव किया है और क्यों?
उत्तर: 1. क्योंकि यह पिताजी के दृष्टिकोण को दर्शाता है, वह पक्षियों की चहचहाहट को शोर मानते हैं जबकि लोग उसे संगीत की तरह गान कहते हैं।
2. क्योंकि “डेरा डाले रहना” का सीधा अर्थ है, वहीं ठहर जाना या अस्थायी रूप से निवास करना।
3. क्योंकि वाक्य से पहले लेखक ने चूहों का उल्लेख किया है, जो रातभर कमरे में दौड़ते रहते हैं और उसी से शोर होता है।
4. क्योंकि माँ व्यंग्य और हँसी करती हैं, जिससे पिताजी को ऐसा भ्रम होता है कि उनका मजाक उड़ाया जा रहा है।
5. क्योंकि गौरैयों को भगाने के बाद पिताजी ने स्वयं को विजेता समझा और गर्व से, विजयी मुद्रा में बैठ गए।
6. क्योंकि “रात पड़ना” या “ढलना” शब्द धीरे-धीरे समय के बीतने और अंधेरा छाने का संकेत देता है।
7. क्योंकि “मल्हार गा रही थीं” प्रतीकात्मक है, यहाँ गौरैयों की प्रसन्नचित्त चहचहाहट को राग गाने जैसा बताया गया है।
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) “अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहाँ घोंसला बना लिया है।”
उत्तर: यह पंक्ति माँ द्वारा कही गई है। इसका अर्थ है कि जब गौरैयों ने यहाँ केवल आना-जाना शुरू किया था, तब उन्हें आसानी से भगा दिया जा सकता था। लेकिन अब उन्होंने पंखे के ऊपर अपना घर बना लिया है, यानी इस जगह को अपना स्थायी निवास मान लिया है। घोंसला बनाने के बाद वे इसे छोड़कर नहीं जाएँगी। यह बात यह भी दर्शाती है कि जब कोई जीव या इंसान किसी स्थान पर अपना घर बना लेता है, तो वह उसे छोड़ने के लिए तैयार नहीं होता।
(ख) “एक दिन अंदर नहीं घुस पाएँगी, तो घर छोड़ देंगी।”
उत्तर: यह पंक्ति पिताजी की है। वह सोचते हैं कि यदि गौरैयों को एक दिन भी घर में घुसने नहीं दिया जाए तो वे परेशान होकर यहाँ रहना छोड़ देंगी और कहीं और चली जाएँगी। यहाँ यह विचार सामने आता है कि जब किसी को उसके घर या पसंदीदा जगह से बार-बार रोका जाता है, तो अंततः वह वहाँ से जाना ही पसंद करता है। यह इंसान और पक्षी दोनों के स्वभाव पर लागू होता है।
(ग) “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।”
उत्तर: यह वाक्य पिताजी के गुस्से का परिणाम है। गौरैयों को कितनी भी बार भगाने के बाद भी वे लौट आती थीं, क्योंकि उनका घोंसला वहीं था। इसलिए पिताजी ने नतीजा निकाला कि यदि किसी को वास्तव में बाहर निकालना है, तो उसका घर ही उजाड़ देना चाहिए। इस पंक्ति का गहरा अर्थ है – घर या आश्रय किसी भी प्राणी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण सहारा होता है। जब तक उसका घर सुरक्षित है, वह लौटकर वहीं आता है। अगर घर नष्ट कर दिया जाए, तभी वह वास्तव में वहाँ से दूर जाएगा।
सोच-विचार के लिए
पाठ को पुनः घ्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।
(क) आपको कहानी का कौन-सा पात्र सबसे अच्छा लगा घर पर रहने आई गौरेयाँ, माँ, पिताजी, लेखक या कोई अन्य प्राणी? आपको उसकी कौन-कौन सी बातें अच्छी लगी और क्यों?
उत्तर: माँ संवेदनशील और दयालु हैं। वह बार-बार गौरैयों को नुकसान न पहुँचाने की सलाह देती हैं। उनका स्वभाव हँसमुख और व्यावहारिक है। वह पिताजी के गुस्से को व्यंग्य और हँसी से हल्का करती हैं और जीवन के प्रति सम्मान दिखाती हैं। अंडे और बच्चों के प्रति उनकी चिंता यह दिखाती है कि उनमें करुणा और जीवों के प्रति अपनापन है।
(ख) लेखक के घर में चिड़िया ने अपना घोंसला कहाँ बनाया? उसने घोसला वहीं क्यों बनाया होगा?
उत्तर: उसने वहाँ इसलिए घोंसला बनाया क्योंकि वह जगह ऊँचाई पर और सुरक्षित थी। वहाँ शिकारी या बिल्ली आसानी से नहीं पहुँच सकती थी। पंखे का गोला खाँचेदार होने के कारण घोंसले को टिकाए रखने के लिए भी उपयुक्त था। घर के अंदर मौसम से बचाव भी था और दरवाजों व रोशनदान से प्रवेश आसान था।
(ग) क्या आपको लगता है कि पशु-पक्षी भी मनुष्यों के समान परिवार और घर का महत्व समझते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कहानी से उदाहरण दीजिए।
उत्तर: कहानी में गौरैयों ने अपना घोंसला बनाया और बार-बार भगाए जाने पर भी लौट आईं। जब उनके बच्चे हुए तो वे चुप और चिंतित रहीं और लगातार उनके लिए चुग्गा लाती रहीं। यह उनके मातृत्व और परिवार के प्रति जिम्मेदारी को दर्शाता है। इंसानों की तरह उन्होंने भी अपने घर और परिवार की रक्षा को सबसे जरूरी समझा।
(घ) “अब मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।” इस कथन से पिताजी के स्वभाव के कौन-से गुण उभरकर आते हैं?
उत्तर: वे जिद्दी और दृढ़निश्चयी व्यक्ति हैं। किसी भी काम को छोड़ने या हार मानने में विश्वास नहीं करते। उनमें आत्मविश्वास और अभिमान दोनों दिखाई देता है। लेकिन कहानी के अंत में उनकी कठोरता नरमी में बदल जाती है और बच्चों की चीं-चीं सुनकर उनमें करुणा और अपनापन जाग उठता है।
(ङ) कहानी में गौरैयों के व्यवहार में कब और कैसा बदलाव आया? यह बदलाव क्यों आया?
(संकेत- कहानी में खोजिए कि उन्होंने गाना कब बंद कर दिया?)
उत्तर: शुरू में वे प्रसन्न होकर गाती और चहकती थीं, लेकिन अंडे देने के बाद वे गुमसुम हो गईं और उनका गाना बंद हो गया। वे दुबली और चिंतित सी दिखने लगीं। यह बदलाव इसलिए आया क्योंकि अब वे अपने अंडों और बच्चों की सुरक्षा में लगी हुई थीं और उन्हें खतरे का आभास था।
(च) कहानी में गौरैयों ने किन-किन स्थानों से घर में प्रवेश किया था? सूची बनाइए।
उत्तर: वे कभी खुले दरवाजों से भीतर आईं, कभी दरवाजे के नीचे की दरार से घुस गईं और कई बार रोशनदान के टूटे शीशे से भी अंदर पहुँचीं। इस तरह उन्होंने बार-बार अपना घर सुरक्षित बनाए रखने की कोशिश की।
(छ) इस कहानी को कौन सुना रहा है? आपको यह बात कैसे पता चली?
उत्तर: पाठ में जगह-जगह “मैंने देखा…”, “मैंने दरवाजे बंद किए…” जैसे वाक्य मिलते हैं। इससे साफ होता है कि घटनाओं का प्रत्यक्ष अनुभव लेखक ने किया और उसी रूप में वह कहानी सुना रहा है।
(ज) माँ बार-बार क्यों कह रही होंगी कि गौरैयाँ घर छोड़कर नहीं जाएँगी?
उत्तर: क्योंकि उन्होंने वहाँ अपना घोंसला बना लिया था और संभवतः अंडे भी दिए थे। घोंसला बनाने के बाद पक्षी उस स्थान को आसानी से नहीं छोड़ते। घर में कई जगहों से प्रवेश संभव था, इसलिए माँ को पता था कि चाहे पिताजी कितनी भी कोशिश करें, गौरैयों को भगाना आसान नहीं होगा। माँ को जीवों की प्रकृति का ज्ञान था, इसलिए उनका अनुमान बिल्कुल सही निकला।
अनुमान और कल्पना से
(क) कल्पना कीजिए कि आप उस घर में रहते हैं जहाँ चिड़ियाँ अपना घर बना रही हैं। अपने घर में उन्हें देखकर आप क्या करते?
उत्तर: अगर मैं उस घर में रहता और चिड़ियों को घोंसला बनाते देखता, तो मैं बहुत खुश होता। मैं उन्हें तंग नहीं करता बल्कि उनके लिए सुरक्षित माहौल बनाए रखता। उनके लिए दाने और पानी रख देता ताकि उन्हें बाहर परेशान न होना पड़े। मैं चाहता कि वे मेरे घर को अपना घर समझें और सुरक्षित महसूस करें।
(ख) मान लीजिए कि कहानी में चिड़िया नहीं, बल्कि नीचे दिए गए प्राणियों में से कोई एक प्राणी घर में घुस गया है। ऐसे में घर के लोगों का व्यवहार कैसा होगा? क्यों?
(प्राणियों के नाम चूहा, कुत्ता, मच्छर, बिल्ली, कबूतर, कॉकरोच, तितली, मक्खी)
उत्तर: अगर घर में चूहा या कॉकरोच घुस आए तो लोग डर या गंदगी के कारण उसे भगाने की कोशिश करेंगे। मच्छर और मक्खी आएँ तो सब परेशान होंगे क्योंकि ये बीमारियाँ फैलाते हैं। कुत्ता या बिल्ली आए तो कुछ लोग उसे अपनाने की कोशिश करेंगे, जबकि कुछ लोग डरेंगे कि वह गंदगी फैलाएगा। कबूतर हो तो लोग सहन कर सकते हैं लेकिन उसके मल से गंदगी होगी, इसलिए उसे बाहर निकालना चाहेंगे। तितली आए तो सभी खुश हो जाएँगे क्योंकि तितली सुंदर और हानिरहित होती है। इस तरह व्यवहार इस बात पर निर्भर करेगा कि प्राणी हानिकारक है या नहीं।
(ग) “मैं अवाक् उनकी ओर देखता रहा।” लेखक को विस्मय या हैरानी किसे देखकर हुई? उसे विस्मय क्यों हुआ होगा?
उत्तर: लेखक को हैरानी तब हुई जब उन्होंने घोंसला तोड़ते समय देखा कि उसमें नन्हीं-नन्हीं गौरैया बच्चे मौजूद हैं, जो चीं-चीं करके अपना परिचय दे रहे थे। लेखक को विस्मय इसलिए हुआ क्योंकि वे समझ रहे थे कि केवल बड़ी गौरैयाँ हैं, लेकिन अचानक उन्हें मासूम बच्चों का दिख जाना अप्रत्याशित और भावुक कर देने वाला अनुभव था।
(घ) “माँ मदद तो करती नहीं थीं, बैठी हँसे जा रही थीं।” माँ ने गौरैयों को निकालने में पिताजी की सहायता क्यों नहीं की होगी?
उत्तर: माँ दयालु और संवेदनशील थीं। वे जानती थीं कि चिड़ियों को निकालना सही नहीं है क्योंकि उन्होंने घोंसला और अंडे दिए थे। इसलिए उन्होंने मदद करने के बजाय पिताजी को हँसी और व्यंग्य से शांत करने की कोशिश की। माँ का मानना था कि चिड़ियों को अपने घर में रहने देना चाहिए।
(ङ) “एक चूहा अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है, शायद बूढ़ा है उसे सर्दी बहुत लगती है।” लेखक ने चूहे के विशेष व्यवहार से अनुमान लगाया कि उसे सर्दी लगती होगी। आप भी किसी एक अपरिचित व्यक्ति या प्राणी के व्यवहार को ध्यान से देखकर अनुमान लगाइए कि वह क्या सोच रहा होगा, क्या करता होगा या वह कैसा व्यक्ति होगा आदि। (संकेत आपको उसके व्यवहार पर ध्यान देना है, उसके रंग-रूप या वेशभूषा पर नहीं)
उत्तर: एक बार मैंने देखा कि एक छोटा बच्चा पार्क में सब बच्चों से अलग बैठा था और दूर से झूले देख रहा था। वह लगातार अपने जूते की डोरी से खेल रहा था और किसी से बात नहीं कर रहा था। उसके इस व्यवहार से मैंने अनुमान लगाया कि शायद वह शर्मीला है या उसे नए दोस्त बनाने में हिचकिचाहट होती है। वह चाहता होगा कि कोई उससे बात करे और उसे खेलने के लिए बुलाए।
(च) पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है।” सराय और घर में कौन-कौन से अंतर होते होंगे?
उत्तर: सराय एक ऐसी जगह होती है जहाँ हर कोई अस्थायी रूप से ठहरने आता है और फिर चला जाता है। वहाँ अपनापन या स्थायित्व नहीं होता। जबकि घर वह स्थान है जहाँ अपने लोग रहते हैं, सुरक्षा और स्नेह का वातावरण होता है। घर में जिम्मेदारी और अपनापन जुड़ा होता है, पर सराय में यह सब नहीं होता। पिताजी का कहना था कि इतने सारे जीव-जंतु उनके घर में रहते हैं कि लगता है जैसे यह स्थायी घर न होकर एक सराय बन गया हो।
संवाद और अभिनय
नीचे दी गई स्थितियों के लिए अपने समूह में मिलकर अपनी कल्पना से संवाद लिखिए और बातचीत को अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए –
(क) “वे अभी भी झाँके जा रही थीं और चीं-चीं करके मानो अपना परिचय दे रही थीं, हम आ गई हैं। हमारे माँ-बाप कहाँ हैं” नन्हीं-नन्हीं दो गौरैया क्या-क्या बोल रही होंगी?
उत्तर: नन्हीं-नन्हीं गौरैया के संवाद: “वे अभी भी झाँके जा रही थीं और चीं-चीं करके मानो अपना परिचय दे रही थीं, हम आ गई हैं। हमारे माँ-बाप कहाँ हैं?”
बच्चा 1: (चीं-चीं) “देखो बहन, यह दुनिया कितनी बड़ी है!”
बच्चा 2: “हाँ, लेकिन हमें भूख लगी है। हमारे माँ-बाप कहाँ हैं?”
बच्चा 1: “शायद दाना लाने गए होंगे। हम ज़रा ज़ोर से आवाज़ करें, ताकि वे हमें ढूँढ लें।”
दोनों मिलकर: (चीं-चीं करते हुए) “हम आ गए हैं, हमें पहचानो!”
(ख) “चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?” घोंसले से झाँकती गौरैयाँ क्या-क्या बातें कर रही होंगी?
उत्तर: घोंसले से झाँकती गौरैयों के संवाद: “चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?”
गौरैया 1: “अरे, यह कौन आदमी है? यह क्यों उछल-कूद कर रहा है?”
गौरैया 2: “शायद यह हमें डराना चाहता है।”
गौरैया 1: “लेकिन इसका नाच तो बड़ा मज़ेदार है!”
गौरैया 2: (हँसकर) “हाँ, लगता है यह हमें भगाने के बजाय हमारा मनोरंजन कर रहा है।”
(ग) “एक दिन दो गौरैया सीधी अंदर घुस आईं और बिना पूछे उड़-उड़कर मकान देखने लगीं।” जब उन्होंने पहली बार घर में प्रवेश किया तो उन्होंने आपस में क्या बातें की होंगी?
उत्तर: पहली बार घर में प्रवेश करते समय गौरैयों के संवाद: “एक दिन दो गौरैया सीधी अंदर घुस आईं और बिना पूछे उड़-उड़कर मकान देखने लगीं।”
गौरैया 1: “वाह! यह घर कितना बड़ा है।”
गौरैया 2: “हाँ, यहाँ तो घोंसला बनाने की अच्छी जगहें भी हैं।”
गौरैया 1: “देखो, वह पंखे का गोला कितना सुरक्षित लग रहा है।”
गौरैया 2: “हाँ, यहाँ बारिश भी नहीं आएगी और बिल्ली भी नहीं पहुँच पाएगी। चलो यहीं घर बना लेते हैं।”
(घ) “उनके माँ-बाप झट से उड़कर अंदर आ गए और चीं-चीं करते उनसे जा मिले और उनकी नन्हीं-नन्हीं चोंचों में चुग्गा डालने लगे।” गौरैयों और उनके बच्चों ने क्या-क्या बातें की होंगी?
उत्तर: गौरैयों और उनके बच्चों के संवाद: “उनके माँ-बाप झट से उड़कर अंदर आ गए और चीं-चीं करते उनसे जा मिले और उनकी नन्हीं-नन्हीं चोंचों में चुग्गा डालने लगे।”
बच्चा 1: (उत्साह से) “माँ! हमें बहुत भूख लगी थी।”
माँ गौरैया: “लो, यह दाना खाओ। हम तुम्हें कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे।”
बच्चा 2: “पापा! आप कहाँ थे? हम डर गए थे।”
पापा गौरैया: “हम यहीं पास में थे बेटा। अब चिंता मत करो, हम हर बार तुम्हारे लिए खाना लाएँगे।”
दोनों बच्चे: (चीं-चीं करते हुए) “हमें आप सबसे बहुत प्यार है!”
बदली कहानी
मान लीजिए कि घोंसले में अंडों से बच्चे न निकले होते। ऐसे में कहानी आगे कैसे बढ़ती? यह बदली हुई कहानी लिखिए।
उत्तर: गौरैयों ने पंखे के ऊपर अपना घोंसला बनाया। सबको लग रहा था कि अब उसमें अंडों से बच्चे निकलेंगे। लेकिन कई दिन बीत गए और अंडों से कोई बच्चा नहीं निकला।
धीरे-धीरे गौरैयाँ भी थकने और उदास होने लगीं। वे पहले जैसी चहकती नहीं थीं। कभी आतीं, थोड़ी देर बैठतीं और फिर उड़ जातीं। पिताजी को लगा कि अब वे घर छोड़ देंगी। माँ बोलीं – “शायद ये अंडे अच्छे नहीं निकले।”
कुछ ही दिनों बाद गौरैयाँ सचमुच घोंसला खाली छोड़कर चली गईं। अब पंखे पर केवल सूखी घास और धागे बचे थे। घर में फिर से शांति छा गई, लेकिन लेखक को लगा जैसे कोई अपनापन घर से चला गया हो।
पिताजी को चैन मिला, पर कभी-कभी वे भी आँगन की ओर देखते और मन ही मन सोचते – “काश, ये गौरैयाँ फिर लौट आतीं।”
कहने के ढंग/क्रिया विशेषण
“माँ खिलखिलाकर हँस दीं।”
इस वाक्य में ‘खिलखिलाकर’ शब्द बता रहा है कि माँ कैसे हँसी थीं। कोई कार्य कैसे किया गया है, इसे बताने वाले शब्द ‘क्रिया विशेषण’ कहलाते हैं। ‘खिलखिलाकर’ भी एक क्रिया विशेषण शब्द है।
अब नीचे दिए गए रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। इन शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए।
(क) पिताजी ने झिड़ककर कहा, “तू खड़ा क्या देख रहा है?”
(ख) “देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो”, माँ ने अबकी बार गंभीरता से कहा।
(ग) “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए”, उन्होंने गुस्से में कहा।
अब आप इनसे मिलते-जुलते कुछ और क्रिया विशेषण शब्द सोचिए और उनका प्रयोग करते हुए कुछ वाक्य बनाइए।
(संकेत- धीरे से, जोर से, अटकते हुए, चिल्लाकर, शरमाकर, सहमकर, फुसफुसाते हुए आदि।)
उत्तर: (क) पिताजी ने झिड़ककर कहा –
वाक्य: पिताजी ने झिड़ककर कहा, “पढ़ाई पर ध्यान दो, खेलों में मत उलझो।”
(ख) माँ ने गंभीरता से कहा –
वाक्य: माँ ने गंभीरता से कहा, “झगड़ा करना गलत बात है, सबके साथ मिल-जुलकर रहो।”
(ग) उन्होंने गुस्से में कहा –
वाक्य: शिक्षक ने गुस्से में कहा, “कक्षा में शोर क्यों मचा रखा है?”
और कुछ नए क्रिया विशेषण शब्दों का प्रयोग
धीरे से: बच्चा धीरे से बोला, “मुझे प्यास लगी है।”
जोर से: घंटी जोर से बजी और सब चौंक गए।
अटकते हुए: डर के कारण वह अटकते हुए बोला, “म…मुझे नहीं पता।”
चिल्लाकर: रेफरी ने चिल्लाकर कहा, “खेल बंद करो!”
शरमाकर: लड़की ने शरमाकर कहा, “धन्यवाद।”
सहमकर: बिल्ली सहमकर दरवाजे के पीछे छिप गई।
फुसफुसाते हुए: दोनों दोस्त फुसफुसाते हुए कोई राज़ बता रहे थे।
घर के प्राणी
कहानी में आपने पढ़ा कि लेखक के घर में अनेक प्राणी रहते थे। लेखक ने उनका वर्णन ऐसे किया है जैसे वे भी मनुष्यों की तरह व्यवहार करते हैं। कहानी में से चुनकर उन प्राणियों की सूची बनाइए और बताइए कि वे मनुष्यों जैसे कौन-कौन से काम करते थे?
(क) बिल्ली – ‘फिर आऊँगी’ कहकर चली जाती है।
(ख) ______________________________
(ग) ______________________________
(घ) ______________________________
(ङ) ______________________________
उत्तर: (क) बिल्ली – “फिर आऊँगी” कहकर चली जाती है।
(ख) चूहा – एक बूढ़ा चूहा अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है जैसे उसे ठंड लगती हो; दूसरा चूहा टंकी पर बैठता है जैसे उसे गरमी लगती हो।
(ग) चमगादड़ – कमरे में उड़-उड़कर कसरत करते हैं जैसे व्यायाम कर रहे हों।
(घ) कबूतर – दिन-भर ‘गुटर गूँ’ करके गाना गाते हैं जैसे कोई संगीत सभा कर रहे हों।
(ङ) गौरैयाँ – घर का निरीक्षण करती हैं, घोंसला सजाती हैं और बच्चे होने पर चुपचाप चिंता करती हैं जैसे कोई परिवार बसाने वाले मनुष्य हों।
हेर-फेर मात्रा का
“माँ और पिताजी दोनों सोफे पर बैठे उनकी ओर देखे जा रहे थे।”
“पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं।”
उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। आपने ध्यान दिया होगा कि शब्द में एक मात्रा-भर के अंतर से उसके अर्थ में परिवर्तन हो जाता है।
अब नीचे दिए गए शब्दों की मात्राओं और अर्थों के अंतर पर ध्यान दीजिए। इन शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए।
नाच-नाचा-नचा, हार-हरा-हारा, पिता-पीता, चूक-चुक, नीचा-नीचे, सहसा-साहस।
उत्तर: 1. नाच – नाचा – नचा
नाच: नृत्य → राधा का नाच देखने लायक था।
नाचा: नाच किया → उसने मंच पर सुंदर गीत पर नाचा।
नचा: नचवाया → उस्ताद ने शिष्यों को ताल पर नचा दिया।
2. हार – हरा – हारा
हार: गले की माला / पराजय → उसने फूलों का हार पहनाया।
हरा: हरे रंग का → बगीचे में हरा पेड़ खड़ा है।
हारा: पराजित हुआ → वह खेल में हारा, पर हिम्मत नहीं छोड़ी।
3. पिता – पीता
पिता: जनक → मेरे पिता मुझे रोज़ पढ़ाते हैं।
पीता: सेवन करना → राहुल रोज़ दूध पीता है।
4. चूक – चुक
चूक: गलती / अवसर चूकना → समय पर न पहुँचकर वह परीक्षा से चूक गया।
चुक: समाप्त होना → उसका सारा पैसा चुक गया।
5. नीचा – नीचे
नीचा: ऊँचाई का विपरीत / कमतर → नीचा दिखाने की आदत बुरी है।
नीचे: नीचे की ओर / स्थान → किताब मेज़ के नीचे रखी है।
6. सहसा – साहस
सहसा: अचानक → सहसा तेज़ बारिश शुरू हो गई।
साहस: हिम्मत → सैनिकों ने दुश्मनों के सामने साहस दिखाया।
वाद-विवाद
कहानी में माँ द्वारा कही गई कुछ बातें नीचे दी गई हैं-
“अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं।”
“एक दरवाजा खुला छोड़ो, बाकी दरवाजे बंद कर दो। तभी ये निकलेंगी।”
“देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो। अब तो इन्होंने अंडे भी दे दिए होंगे। अब यहाँ से नहीं जाएँगी।”
कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। वाद-विवाद का विषय है–
“माँ चिड़ियों को घर से निकालना चाहती थीं।”
कक्षा में आधे समूह इस कथन के पक्ष में और आधे समूह इसके विपक्ष में तर्क देंगे।
उत्तर: वाद–विवाद विषय:
“माँ चिड़ियों को घर से निकालना चाहती थीं।”
पक्ष के तर्क (हाँ, माँ चिड़ियों को घर से निकालना चाहती थीं):
माँ ने बार-बार कहा कि अगर शुरू में उड़ा दिया होता, तो चिड़ियाँ नहीं रुकतीं।
उन्होंने व्यंग्य में कहा कि एक दरवाजा खुला छोड़ो, बाकी बंद करो – यानी वे भी चाहती थीं कि चिड़ियाँ बाहर निकलें।
घर में चिड़ियों के कारण गंदगी और शोर हो रहा था, इसलिए माँ ने सुझाव दिए कि उन्हें बाहर निकालना चाहिए।
माँ ने पिताजी को यह कहकर उकसाया कि “तुम तो बड़े समझदार हो जी, सभी दरवाजे खुले हैं और चिड़ियों को निकाल रहे हो” यानी वे चाहती थीं कि वे जल्दी बाहर जाएँ।
विपक्ष के तर्क (नहीं, माँ चिड़ियों को घर से निकालना नहीं चाहती थीं):
माँ बार-बार कहती रहीं – “देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो, अब तो इन्होंने अंडे भी दे दिए होंगे।”
माँ ने पिताजी को हँसकर टोक दिया – “चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे?”
माँ की बातें व्यंग्य और मजाक से भरी थीं – उनका उद्देश्य चिड़ियों को बचाना था, न कि निकालना।
जब बच्चे निकले तो माँ ने दरवाजे खोल दिए ताकि चिड़ियों का परिवार सुरक्षित रह सके। यह उनके दयालु स्वभाव को दर्शाता है।
कहानी की रचना
“कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे।”
इस पंक्ति में बताया गया है कि पिताजी का दृष्टिकोण कैसे बदल गया। इस प्रकार यह विशेष वाक्य है। इस तरह के वाक्यों से कहानी और अधिक प्रभावशाली बन जाती है।
(क) आपको इस कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। उन्हें अपने समूह के साथ मिलकर ढूंढ़िए और उनकी सूची बनाइए।
उत्तर: कहानी दो गौरैया में कई विशेष वाक्य हैं जो कहानी को जीवंत और प्रभावशाली बनाते हैं।
“घर के मालिक तो कोई दूसरे ही हैं।” – इस वाक्य से पिताजी का गुस्सा और असंतोष साफ दिखाई देता है। उन्हें लगता है कि उनका घर अब चूहों और पक्षियों का अड्डा बन गया है।
“अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहाँ घोंसला बना लिया है।” – माँ का यह कथन दर्शाता है कि जब कोई अपना घर बना लेता है तो उसे वहाँ से हटाना आसान नहीं होता।
“चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?” – यह वाक्य कहानी में हास्य और मज़ाक का रंग भरता है। माँ के व्यंग्य से वातावरण हल्का हो जाता है।
“किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।” – पिताजी का यह वाक्य उनके गुस्से और जिद को दिखाता है। साथ ही यह बताता है कि घर हर प्राणी के जीवन का सबसे बड़ा सहारा है।
“वे अभी भी झाँके जा रही थीं और चीं-चीं करके मानो अपना परिचय दे रही थीं, हम आ गए हैं। हमारे माँ-बाप कहाँ हैं?” – इस वाक्य से कहानी में करुणा और संवेदना का भाव उभरता है। नन्हीं गौरैयों की मासूमियत पाठक का हृदय छू लेती है।
“कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे।” – यह वाक्य पिताजी के दृष्टिकोण में आए परिवर्तन को दर्शाता है। पहले वे गुस्से में चिड़ियों को भगाते थे, लेकिन अब उनके मन में कोमलता और अपनापन आ गया।
(ख) इस कहानी की कुछ विशेषताओं को नीचे दिया गया है। इनके उदाहरण कहानी में से चुनकर लिखिए।
आपकी बात
| कहानी की विशेषताएँ | कहानी में से उदाहरण |
| 1. किसी बात को कल्पना से बढ़ा-चढ़ाकर कहना | जो भी पक्षी पहाड़ियों-घाटियों पर से उड़ता हुआ दिल्ली पहुँचता है, पिताजी कहते हैं वहीं सीधा हमारे घर पहुँच जाता है, जैसे हमारे घर का पता लिखवाकर लाया हो। |
| 2. हास्य यानी हँसी-मजाक का उपयोग किया जाना | |
| 3. सोचा कुछ और, हुआ कुछ और | |
| 4. दूसरों के मन के भावों का अनुमान लगाना | |
| 5. किसी की कही बात को उसी के शब्दों में लिखना | |
| 6. किसी प्राणी या उसके कार्य को कोई अन्य नाम देना | |
| 7. किसने किससे कोई बात कही, यह सीधे-सीधे बताए बिना उस संवाद को लिखना |
उत्तर:
| कहानी की विशेषताएँ | कहानी में से उदाहरण |
| 1. किसी बात को कल्पना से बढ़ा-चढ़ाकर कहना | जो भी पक्षी पहाड़ियों-घाटियों पर से उड़ता हुआ दिल्ली पहुँचता है, पिताजी कहते हैं वहीं सीधा हमारे घर पहुँच जाता है, जैसे हमारे घर का पता लिखवाकर लाया हो। |
| 2. हास्य यानी हँसी-मजाक का उपयोग किया जाना | “चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?” (माँ का व्यंग्यपूर्ण कथन) |
| 3. सोचा कुछ और, हुआ कुछ और | पिताजी ने सोचा कि दरवाजे बंद करने से चिड़ियाँ अंदर नहीं आएँगी, पर वे फिर भी रोशनदान से आ गईं। |
| 4. दूसरों के मन के भावों का अनुमान लगाना | “गौरैयाँ मकान का निरीक्षण कर रही हैं कि उनके रहने योग्य है या नहीं।” (पिताजी का अनुमान) |
| 5. किसी की कही बात को उसी के शब्दों में लिखना | “अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं।” (माँ का कथन) |
| 6. किसी प्राणी या उसके कार्य को कोई अन्य नाम देना | “शाम पड़ते ही दो-तीन चमगादड़ कमरों के आर-पार पर फैलाए कसरत करने लगते हैं।” (चमगादड़ों की उड़ान को ‘कसरत’ कहा गया) |
| 7. किसने किससे कोई बात कही, यह सीधे-सीधे बताए बिना उस संवाद को लिखना | “इतनी तकलीफ करने की क्या ज़रूरत थी। पंखा चला देते, तो ये उड़ जातीं।” (यहाँ सीधा नहीं बताया गया कि यह माँ ने कहा, लेकिन प्रसंग से स्पष्ट है।) |
पाठ से आगे
(क) “गौरैयों ने घोंसले में से सिर निकालकर नीचे की ओर झाँककर देखा और दोनों एक साथ ‘चीं-चीं’ करने लगीं।” आपने अपने घर के आस-पास पक्षियों को क्या-क्या करते देखा है? उनके व्यवहार में आपको कौन-कौन से भाव दिखाई देते हैं?
उत्तर: मैंने अपने घर के आसपास कई तरह के पक्षियों को देखा है। कबूतर छत पर बैठकर गुटरगूँ करते हैं, मैना पेड़ पर घोंसला बनाती है और तोते आम के पेड़ से कच्चे आम तोड़कर खाते हैं। गौरैयाँ अक्सर छोटी-छोटी तिनके चोंच में दबाकर लाती हैं और घोंसले में सजाती हैं। उनके व्यवहार में मुझे प्रेम, मेहनत, जिम्मेदारी और परिवार के प्रति अपनापन दिखाई देता है। जब वे चूजों को दाना खिलाती हैं तो मातृत्व और पितृत्व की भावना स्पष्ट रूप से नजर आती है।
(ख) “कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे।” कहानी के अंत में पिताजी गौरैयों का अपने घर में रहना स्वीकार कर लेते हैं। क्या आप भी कोई स्थान या वस्तु किसी अन्य के साथ साझा करते हैं? उनके बारे में बताइए। साझेदारी में यदि कोई समस्या आती है तो उसे कैसे हल करते हैं?
उत्तर: हाँ, मैं भी अपनी चीजें दूसरों के साथ साझा करता हूँ। जैसे–मेरे भाई के साथ मैं किताबें और खेल साझा करता हूँ। कभी-कभी मोबाइल या कंप्यूटर का समय भी बाँटना पड़ता है। साझेदारी में कभी समस्या होती है, जैसे दोनों को एक ही समय पर चीज चाहिए होती है। ऐसे में हम बातचीत और समझौते से बारी-बारी करके इस्तेमाल करते हैं। इससे झगड़ा नहीं होता और सबको संतुलित अवसर मिलता है।
(ग) परिवार के लोग गौरैयों को घर से बाहर भगाने की कोशिश करते हैं, किंतु गौरैयों के बच्चों के कारण उनका दृष्टिकोण बदल जाता है। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि किसी को देखकर या किसी से मिलकर आपका दृष्टिकोण बदल गया हो?
उत्तर: हाँ, मेरे साथ भी ऐसा अनुभव हुआ है। एक बार मुझे एक नया सहपाठी बहुत चुप-चुप और घमंडी लगा। शुरू में मैं उसके साथ घुलना-मिलना नहीं चाहता था। लेकिन बाद में जब मैंने उससे बात की तो पता चला कि वह शर्मीला है और किसी से जल्दी घुलता नहीं। उसने मेरी पढ़ाई में मदद भी की। उसे जानने के बाद मेरा दृष्टिकोण बदल गया और हम अच्छे दोस्त बन गए। इससे मैंने सीखा कि बिना समझे किसी के बारे में राय नहीं बनानी चाहिए।
चिड़ियों का घोंसला
घोंसला बनाना चिड़ियों के जीवन का एक सामान्य हिस्सा है। विभिन्न पक्षी अलग-अलग तरह के घोंसले बनाते हैं। इन घोंसलों में वे अपने अंडे देते हैं और अपने चूजों को पालते हैं।
(क) अपने आस-पास विभिन्न प्रकार के घोंसले ढूंढ़िए और उन्हें ध्यान से देखिए और नीचे दी गई तालिका को पूरा कीजिए। (सावधानी – उन्हें हाथ न लगाएँ अन्यथा पक्षियों, उनके अंडों और आपको भी खतरा हो सकता है)
| क्रम संख्या | घाँसले को कहाँ देखा | घोंसला किन चीजों से बनाया से बनाया गया था | घोंसला खाली था या नहीं | घोंसला किस पक्षी का था |
| 1 | ||||
| 2 | ||||
| 3 | ||||
| 4 | ||||
| 5 |
उत्तर:
| क्रम संख्या | घाँसले को कहाँ देखा | घोंसला किन चीजों से बनाया से बनाया गया था | घोंसला खाली था या नहीं | घोंसला किस पक्षी का था |
| 1 | आम के पेड़ की शाख पर | सूखी घास, टहनियाँ और पत्तियाँ | खाली नहीं, उसमें दो अंडे थे | गौरैया |
| 2 | मकान की छत के कोने में | पुराने कपड़े के टुकड़े और तिनके | खाली था | कबूतर |
| 3 | बिजली के खंभे पर तारों के बीच | टहनियाँ और प्लास्टिक के टुकड़े | खाली नहीं, उसमें चूजे थे | कौवा |
| 4 | बाथरूम की खिड़की की जाती पर | सूखी घास और रूई के फाहे | खाली था | मैना |
| 5 | बांस के झुरमुट में | पत्तियाँ और पतली टहनियाँ | खाली नहीं, उसमें छोटे-छोटे चूजे थे | बुलबुल |
(ख) विभिन्न पक्षियों के पोंसलों के संबंध में एक प्रस्तुति तैयार कीजिए। उसमें आप चाहें तो उनके चित्र और थोड़ी रोचक जानकारी सम्मिलित कर सकते हैं।
उत्तर: प्रस्तुति : विभिन्न पक्षियों के घोंसले।
1. शीर्षक: विभिन्न पक्षियों के घोंसल: घोंसला चिड़ियों का घर होता है, जहाँ वे अंडे देती हैं और चूजों को पालती हैं।
2. गौरैया का घोंसला: स्थान: घर की छत, खिड़की, बिजली का मीटर बॉक्स।
सामग्री: सूखी घास, तिनके, पुराने कपड़े के टुकड़े।
विशेषता: छोटा और गोल आकार का, सुरक्षित जगह पर।
रोचक तथ्य: गौरैया हमेशा इंसानों के घरों के पास रहना पसंद करती है।
3 : कबूतर का घोंसला: स्थान: मकान की छत, खिड़की की चौखट, दीवार की दरार।
सामग्री: मोटी टहनियाँ और पत्तियाँ।
विशेषता: बहुत साधारण और ढीला-ढाला घोंसला।
रोचक तथ्य: कबूतर बार-बार उसी जगह पर घोंसला बनाते हैं।
4 : कौए का घोंसला: स्थान: ऊँचे पेड़ पर।
सामग्री: टहनियाँ, तार और प्लास्टिक के टुकड़े।
विशेषता: बड़ा और मजबूत घोंसला।
रोचक तथ्य: कौए बहुत चालाक होते हैं और दूसरों के अंडे भी चुराकर अपने घोंसले में रख देते हैं।
5 : बुलबुल का घोंसला स्थान: झाड़ियों और बांस के झुरमुट में।
सामग्री: पत्तियाँ, घास और पतली टहनियाँ।
विशेषता: प्याले (कटोरी) जैसा घोंसला।
रोचक तथ्य: बुलबुल का गाना सुबह-सुबह बहुत मधुर सुनाई देता है।
6 : बया (Weaver Bird) का घोंसला स्थान: पेड़ों की डालियों पर लटकता हुआ
सामग्री: घास, पत्तियाँ और रेशेदार तिनके।
विशेषता: थैलीनुमा, उल्टा लटका हुआ घोंसला।
रोचक तथ्य: नर बया अपने सुंदर घोंसले से मादा को आकर्षित करता है।
7 : निष्कर्ष: हर पक्षी अपने वातावरण और जरूरत के अनुसार घोंसला बनाता है।
घोंसले हमें मेहनत, जिम्मेदारी और परिवार के प्रति प्रेम सिखाते हैं।
हमें हमेशा पक्षियों और उनके घरों की रक्षा करनी चाहिए।
हास्य-व्यंग्य
“छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे! माँ ने व्यंग्य से कहा।”
आप समझ गए होंगे कि इस वाक्य में माँ ने पिताजी से कहा है कि वे चिड़ियों को नहीं निकाल सकते। इस प्रकार से कही गई बात को ‘व्यंग्य करना’ कहते हैं।
व्यंग्य का अर्थ होता है- हँसी-मजाक या उपहास के माध्यम से किसी कमी, बुराई या विडंबना को उजागर करना।
व्यंग्य में बात को सीधे न कहकर उलटा या संकेतात्मक ढंग से कहा जाता है ताकि उसमें चुटकीलापन भी हो और गंभीर सोच की संभावना भी बनी रहे। अनेक बार व्यंग्य में हास्य भी छिपा होता है।
(क) आपको इस कहानी में कौन-कौन से वाक्य पढ़कर हँसी आई? उन वाक्यों को चुनकर लिखिए।
उत्तर: कहानी के वे वाक्य जिन पर हँसी आती है:
“चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?”
“छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!”
“तुम तो बड़े समझदार हो जी, सभी दरवाजे खुले हैं और तुम गौरैयों को बाहर निकाल रहे हो। एक दरवाजा खुला छोड़ो, बाकी दरवाजे बंद कर दो।”
पिताजी का ताली बजाना, “श… शू” कहना और कूद-कूदकर चिड़ियों को भगाने की कोशिश करना।
“इतनी तकलीफ करने की क्या ज़रूरत थी। पंखा चला देते, तो ये उड़ जातीं।”
(ख) अब चुने हुए वाक्यों में से कौन-कौन से वाक्य ‘व्यंग्य’ कहे जा सकते हैं? उन पर सही का चिह्न लगाइए।
उत्तर: इनमें से व्यंग्यात्मक वाक्य:
“छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!”
“चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?”
“तुम तो बड़े समझदार हो जी, सभी दरवाजे खुले हैं और तुम गौरैयों को बाहर निकाल रहे हो। एक दरवाजा खुला छोड़ो, बाकी दरवाजे बंद कर दो।”
“इतनी तकलीफ करने की क्या ज़रूरत थी। पंखा चला देते, तो ये उड़ जातीं।”

Hi! my Name is Parimal Roy. I have completed my Bachelor’s degree in Philosophy (B.A.) from Silapathar General College. Currently, I am working as an HR Manager at Dev Library. It is a website that provides study materials for students from Class 3 to 12, including SCERT and NCERT notes. It also offers resources for BA, B.Com, B.Sc, and Computer Science, along with postgraduate notes. Besides study materials, the website has novels, eBooks, health and finance articles, biographies, quotes, and more.



