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UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 8 समुदाय: शिक्षा के अभिकरण के रूप में
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समुदाय: शिक्षा के अभिकरण के रूप में
Chapter: 8
| वस्तुत उतरीय प्रश्न |
1. समुदाय का अर्थ स्पष्ट कीजिए तथा परिभाषा निर्धारित कीजिए। समुदाय की मुख्य विशेषताओं का भी उल्लेख कीजिए।
उत्तर: समुदाय का अर्थ (Meaning of Community):
‘समुदाय’ शब्द संस्कृत के ‘सम्’ और ‘उदाय’ शब्दों से बना है, जिसका अर्थ है — “एक साथ उठना या रहना।”
अर्थात्, जब लोग किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में एक-दूसरे के साथ मिल-जुलकर रहते हैं, समान हितों, आवश्यकताओं, परम्पराओं और उद्देश्यों को साझा करते हैं, तो उस समूह को समुदाय (Community) कहा जाता है।
सरल शब्दों में –
“जो लोग एक ही क्षेत्र में रहते हुए परस्पर सहयोग और सामाजिक सम्बन्ध बनाए रखते हैं, वे समुदाय कहलाते हैं।”
समुदाय की परिभाषाएँ (Definitions of Community):
(i) मैकाइवर और पेज (MacIver & Page): “समुदाय वह समूह है जिसके सदस्य एक निश्चित क्षेत्र में रहकर सामान्य जीवन व्यतीत करते हैं।”
(ii) बोगार्डस (Bogardus): “समुदाय वह सामाजिक समूह है, जिसके सदस्य भौगोलिक निकटता और समान हितों के आधार पर जीवन जीते हैं।”
(iii) गिलिन और गिलिन (Gillin & Gillin): “समुदाय वह सामाजिक संगठन है जिसमें लोग स्थायी रूप से एक साथ रहकर समान संस्कृति और परम्पराओं का पालन करते हैं।”
समुदाय की मुख्य विशेषताएँ (Main Characteristics of Community):
(i) सामान्य भौगोलिक क्षेत्र: समुदाय के सदस्य एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में निवास करते हैं।
(ii) सामाजिक सम्बन्ध: समुदाय के लोग एक-दूसरे के साथ निकट सामाजिक सम्बन्ध बनाए रखते हैं।
(iii) समान हित एवं आवश्यकताएँ: सभी सदस्य समान प्रकार की आवश्यकताओं, हितों और उद्देश्यों से जुड़े होते हैं।
(iv) सांस्कृतिक एकता: समुदाय में समान परम्पराएँ, रीति-रिवाज, भाषा और मान्यताएँ होती हैं।
(v) स्थायित्व: समुदाय अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी और दीर्घकालीन संगठन होता है।
(vi) परस्पर सहयोग: समुदाय के सदस्य एक-दूसरे की सहायता करते हैं और सामाजिक एकता बनाए रखते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion): समुदाय मानव जीवन का मूल आधार है। यह व्यक्ति को पहचान, सुरक्षा और सामाजिक जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
संक्षेप में: “समुदाय वह समूह है जहाँ लोग एक साथ रहकर समान संस्कृति, परम्परा और हितों के आधार पर जीवन व्यतीत करते हैं।”
2. शिक्षा के एक अभिकरण के रूप में समुदाय के शैक्षिक कार्यों की विवेचना कीजिए।
या
“समाज शिक्षा का एक शक्तिशाली अभिकरण है।” इस सन्दर्भ में समाज के शैक्षिक कार्यों को लिखिए।
या
शिक्षा के अभिकरण के रूप में समुदाय की भूमिका का वर्णन कीजिए।
या
“समुदाय शिक्षा का सक्रिय एवं अनौपचारिक अभिकरण है।” विवेचना कीजिए।
या
समाज के शैक्षिक कार्य क्या हैं?
या
समुदाय के शैक्षिक कार्यों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर: भूमिका (Introduction):
समुदाय (Community) या समाज शिक्षा का एक महत्वपूर्ण अनौपचारिक अभिकरण (Informal Agency of Education) है। विद्यालय से बाहर बालक का जो जीवन होता है, वह समाज और समुदाय में ही व्यतीत होता है। अतः समुदाय बालक को प्रत्यक्ष अनुभवों द्वारा शिक्षा प्रदान करता है।
अर्थात्, समुदाय बालक को जीवन जीने की कला, परम्पराएँ, संस्कृति, व्यवहार और नैतिक मूल्य सिखाता है।
शिक्षा के अभिकरण के रूप में समुदाय की भूमिका (Role of Community as an Agency of Education):
समुदाय बालक को वास्तविक जीवन से जोड़ता है और उसे सामाजिक, नैतिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक दृष्टि से विकसित करता है। यह शिक्षा को व्यावहारिक बनाता है और विद्यालय के कार्यों को पूर्णता प्रदान करता है।
समुदाय के शैक्षिक कार्य (Educational Functions of Community):
(i) सामाजिक विकास का कार्य: समुदाय में रहकर बालक सामाजिक नियमों, रीति-रिवाजों, परम्पराओं और नैतिक मूल्यों को सीखता है।
यह उसे सहयोग, सहानुभूति, सेवा और अनुशासन का अभ्यास कराता है।
(ii) नैतिक विकास का कार्य: समुदाय बालक को सही और गलत का भेद सिखाता है। धार्मिक एवं सामाजिक अनुष्ठानों में भाग लेने से नैतिकता और आचरण का विकास होता है।
(iii) सांस्कृतिक विकास का कार्य: समुदाय अपनी संस्कृति, परम्परा, भाषा, कला और लोकगीतों के माध्यम से बालक में सांस्कृतिक चेतना का विकास करता है।
(iv) आर्थिक शिक्षा का कार्य: समुदाय में विभिन्न प्रकार के व्यवसाय, व्यापार और श्रम कार्य देखकर बालक आर्थिक जीवन के व्यावहारिक पक्ष को सीखता है।
(v) नागरिकता का विकास: समुदाय बालक को समाज के प्रति उत्तरदायित्व, कानून का पालन, और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना सिखाता है।
(vi) अनुभवात्मक शिक्षा का कार्य: समुदाय बालक को प्रत्यक्ष अनुभवों से सीखने का अवसर देता है, जिससे शिक्षा व्यवहारिक और जीवनोपयोगी बनती है।
(vii) व्यक्तित्व विकास का कार्य: समुदाय बालक को आत्मविश्वास, नेतृत्व, सहयोग, सेवा भावना और आत्मनिर्भरता का अनुभव कराता है।
निष्कर्ष (Conclusion):
समुदाय एक सक्रिय, अनौपचारिक और प्रभावशाली शैक्षिक अभिकरण है। यह बालक के चरित्र, व्यवहार, संस्कृति और व्यक्तित्व को आकार देता है। विद्यालय में दी गई शिक्षा को यह जीवन के अनुभवों से पुष्ट करता है।
संक्षेप में: “समाज या समुदाय शिक्षा का सबसे शक्तिशाली और जीवंत माध्यम है, जो बालक को वास्तविक जीवन के अनुभवों द्वारा शिक्षित करता है।”
3. विद्यालय और समुदाय में सहयोग स्थापित करने की विधियों का उल्लेख कीजिए।
या
उन मुख्य उपायों का संक्षेप में वर्णन कीजिए जो विद्यालय तथा समुदाय के बीच सामंजस्य स्थापित करते हैं।
उत्तर: विद्यालय और समुदाय दोनों ही बालक के सर्वांगीण विकास के महत्वपूर्ण अभिकरण हैं। यदि इन दोनों के बीच सहयोग एवं सामंजस्य स्थापित हो जाए तो शिक्षा अधिक प्रभावशाली और जीवनोपयोगी बन जाती है।
विद्यालय और समुदाय में सहयोग स्थापित करने की मुख्य विधियाँ / उपाय:
(i) विद्यालय प्रबन्ध समिति में समुदाय के प्रतिनिधि: विद्यालय की प्रबन्ध समिति में समुदाय के बुद्धिजीवी, अभिभावक और समाजसेवी शामिल किए जाएँ ताकि शिक्षा में उनकी भागीदारी बढ़े।
(ii) अभिभावक-शिक्षक संघ (Parent-Teacher Association): ऐसे संघों के माध्यम से विद्यालय और समुदाय के बीच संवाद, सहयोग तथा समझ बढ़ती है।
(iii) सामुदायिक कार्यक्रमों का आयोजन: विद्यालय में मेले, प्रदर्शनी, खेलकूद, उत्सव आदि आयोजित करके समुदाय के लोगों को भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाए।
(iv) विद्यालय भवन और संसाधनों का सामुदायिक उपयोग: विद्यालय की पुस्तकालय, खेल सामग्री, भवन आदि को स्थानीय जनता के उपयोग के लिए भी उपलब्ध कराया जाए।
(v) समुदाय की आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षा: विद्यालय में ऐसे पाठ्यक्रम और गतिविधियाँ चलाई जाएँ जो समुदाय की सामाजिक एवं आर्थिक आवश्यकताओं से जुड़ी हों।
(vi) शिक्षकों द्वारा समुदाय से सम्पर्क: शिक्षक समुदाय में जाकर वहाँ की परिस्थितियों को समझें और शैक्षिक सुधार के लिए सुझाव दें।
(vii) सामुदायिक सेवा गतिविधियाँ: विद्यार्थियों को स्वच्छता, वृक्षारोपण, ग्राम-सेवा, साक्षरता अभियान आदि कार्यों में भाग लेने के अवसर दिए जाएँ।
(viii) संचार माध्यमों द्वारा सम्पर्क: पत्र, फोन, बैठकें और सूचना-पत्रों के माध्यम से विद्यालय और समुदाय के बीच नियमित सम्पर्क रखा जाए।
निष्कर्ष (Conclusion): विद्यालय और समुदाय का सहयोग शिक्षा की सफलता का आधार है।
संक्षेप में: “जब विद्यालय और समुदाय परस्पर सहयोगी बनते हैं, तब शिक्षा वास्तविक जीवन से जुड़ती है और बालक का सर्वांगीण विकास संभव होता है।”

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