UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 2 शिक्षा के स्वरूप एवं प्रकृति

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UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 2 शिक्षा के स्वरूप एवं प्रकृति

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Chapter: 2

वस्तुत उतरीय प्रश्न

1. औपचारिक शिक्षा तथा अनौपचारिक शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इन दोनों का अन्तर: स्पष्ट कीजिए।

या

शिक्षा के औपचारिक स्वरूप का वर्णन कीजिए।

या

औपचारिक शिक्षा से क्या आशय है?

या

शिक्षा के औपचारिक एवं अनौपचारिक स्वरूपों का वर्णन कीजिए।

या

निरौपचारिक (अनौपचारिक) शिक्षा क्या है? उदाहरण दीजिए।

उतर: औपचारिक शिक्षा (Formal Education): औपचारिक शिक्षा वह शिक्षा है जो किसी निश्चित उद्देश्य, पाठ्यक्रम, समय-सारणी और नियमों के अनुसार विद्यालय, महाविद्यालय या विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में दी जाती है। यह शिक्षा संगठित एवं नियोजित होती है। इसमें शिक्षण-प्रक्रिया शिक्षक और विद्यार्थी दोनों के बीच नियमित रूप से संचालित होती है।

उदाहरण: विद्यालयों में गणित, विज्ञान, भाषा आदि विषयों का अध्ययन।

अनौपचारिक शिक्षा (Informal Education): अनौपचारिक शिक्षा वह है जो किसी निश्चित संस्था, पाठ्यक्रम या समय-सारणी के बिना, जीवन के अनुभवों, परिवेश, परिवार, समाज तथा संचार माध्यमों (टी.वी., रेडियो, इंटरनेट आदि) के माध्यम से प्राप्त होती है। यह शिक्षा स्वतःस्फूर्त, निरंतर और जीवनपर्यंत चलने वाली होती है।

उदाहरण: माता-पिता, मित्रों या समाज से व्यवहार, संस्कार और नैतिक मूल्य सीखना।

औपचारिक और अनौपचारिक शिक्षा में अन्तर: 

क्रमांकआधारऔपचारिक शिक्षाअनौपचारिक शिक्षा
1. संस्थाविद्यालय या शैक्षणिक संस्था में दी जाती हैपरिवार, समाज या परिवेश से प्राप्त होती है
2. नियोजनयह नियोजित एवं संगठित होती हैयह स्वतःस्फूर्त एवं अनियोजित होती है
3. पाठ्यक्रमनिश्चित पाठ्यक्रम होता हैकोई निश्चित पाठ्यक्रम नहीं होता
4. समय-सारणीनिश्चित समय-सारणी होती हैसमय-सारणी का कोई बंधन नहीं होता
5. प्रमाणपत्रशिक्षा के अंत में प्रमाणपत्र या उपाधि दी जाती हैकोई प्रमाणपत्र नहीं दिया जाता
6. अवधिसीमित अवधि में पूर्ण होती हैजीवनपर्यंत चलती रहती है
7. उदाहरणविद्यालय, कॉलेज, विश्वविद्यालयपरिवार, समाज, समाचार-पत्र, रेडियो, टीवी आदि

निष्कर्ष: औपचारिक शिक्षा व्यक्ति को संगठित एवं व्यावसायिक रूप से योग्य बनाती है, जबकि अनौपचारिक शिक्षा उसके नैतिक, सामाजिक और व्यवहारिक विकास में सहायक होती है। दोनों ही शिक्षा के आवश्यक एवं पूरक स्वरूप हैं।

2. शिक्षाशास्त्र एक विज्ञान है या कला अथवा दोनों ही? अपने मत के समर्थन में तर्क प्रस्तुत कीजिए।

या

शिक्षाशास्त्र की प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए बताइए कि यह एक विज्ञान है या कला।

या

“शिक्षाशास्त्र न तो शुद्ध विज्ञनि है और न ही शुद्ध कला।” आप इस कथन से कहाँ तक सहमत हैं?

या

“शिक्षा कलाा है।” स्पष्टतया समझाइए।

उतर: भूमिका: शिक्षाशास्त्र (Pedagogy) वह शास्त्र है जिसमें शिक्षण की प्रक्रियाओं, सिद्धांतों और विधियों का अध्ययन किया जाता है। यह जानने का प्रयास करता है कि “कैसे सिखाया जाए” और “सीखने की प्रक्रिया को कैसे प्रभावी बनाया जाए।” शिक्षाशास्त्र को कुछ विद्वान विज्ञान मानते हैं, कुछ कला, जबकि कुछ के अनुसार यह दोनों का सम्मिलित रूप है।

शिक्षाशास्त्र एक विज्ञान के रूप में:

शिक्षाशास्त्र विज्ञान इसलिए है क्योंकि इसमें शिक्षण से संबंधित सिद्धांतों और नियमों का अध्ययन, प्रयोग और परीक्षण किया जाता है।

 तर्क: 

(i) यह निश्चित सिद्धांतों और नियमों पर आधारित है।

(ii) इसमें निरीक्षण, प्रयोग और विश्लेषण के माध्यम से निष्कर्ष निकाले जाते हैं।

(iii) यह मानव-व्यवहार और अधिगम की वैज्ञानिक व्याख्या करता है।

(iv) इसके सिद्धांत सर्वमान्य और परीक्षणीय हैं।

उदाहरण: सीखने के सिद्धांत (थॉर्नडाइक, पावलॉव आदि) शिक्षाशास्त्र के वैज्ञानिक आधार हैं।

शिक्षाशास्त्र एक कला के रूप में:

शिक्षाशास्त्र कला इसलिए है क्योंकि यह केवल सिद्धांतों का ज्ञान नहीं, बल्कि उनके रचनात्मक और व्यावहारिक प्रयोग का कौशल भी है।

तर्क:

(i) प्रत्येक शिक्षक अपने अनुभव, कल्पना और कौशल से शिक्षण को प्रभावी बनाता है।

(ii) यह विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षण में नवाचार करता है।

(iii) शिक्षण में शिक्षक की व्यक्तिगत शैली, सृजनात्मकता और व्यवहार-कुशलता का महत्त्व होता है।

उदाहरण: कोई शिक्षक समान विषय को विभिन्न ढंग से आकर्षक रूप में पढ़ा सकता है — यही शिक्षण की कला है।

शिक्षाशास्त्र दोनों — विज्ञान और कला:

अधिकांश शिक्षाशास्त्री मानते हैं कि शिक्षाशास्त्र न तो केवल विज्ञान है, न केवल कला, बल्कि दोनों का समन्वय है।

तर्क:

(i) यह वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित होता है, परंतु उनका प्रयोग कला के रूप में किया जाता है।

(ii) शिक्षाशास्त्र में नियमों का पालन विज्ञान की तरह और प्रस्तुतीकरण कला की तरह होता है।

(iii) जैसे चिकित्सक विज्ञान और कला दोनों का उपयोग कर रोगी का उपचार करता है, वैसे ही शिक्षक भी ज्ञान और कौशल दोनों का उपयोग करता है।

निष्कर्ष:

अतः यह कहा जा सकता है कि —

“शिक्षाशास्त्र न तो शुद्ध विज्ञान है और न ही शुद्ध कला, बल्कि विज्ञान और कला दोनों का समन्वित रूप है।”

यह विज्ञान है क्योंकि यह शिक्षण के सिद्धांत देता है, और कला है क्योंकि यह उन सिद्धांतों के रचनात्मक प्रयोग की मांग करता है।

संक्षेप में:

(i) विज्ञान → “क्या और क्यों पढ़ाया जाए।”

(ii) कला → “कैसे पढ़ाया जाए।”

इस प्रकार शिक्षाशास्त्र दोनों का संतुलित रूप है।

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