UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 4 वर्तमान लोकतन्त्रीय भारत में शिक्षा के उद्देश्य

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UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 4 वर्तमान लोकतन्त्रीय भारत में शिक्षा के उद्देश्य

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Chapter: 4

वस्तुत उतरीय प्रश्न

1. शिक्षा के उद्देश्यों के निर्धारण के दृष्टिकोण से अपने देश की वर्तमान परिस्थितियों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: बिलकुल, इसे सुसंगठित और सरल भाषा में पुनर्लेखन इस प्रकार किया जा सकता है:

शिक्षा स्वयं में एक व्यापक प्रक्रिया है और इसके अनेक उद्देश्य हो सकते हैं। शिक्षा के उद्देश्य परिस्थितियों के अनुसार तय किए जाते हैं। किसी देश की ऐतिहासिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही शिक्षा के उद्देश्य निर्धारित किए जा सकते हैं। अलग-अलग परिस्थितियों में शिक्षा के विभिन्न उद्देश्यों को प्राथमिकता दी जाती है।

आधुनिक भारत एक संक्रमण काल से गुजर रहा है। एक ओर पारंपरिक मान्यताएँ, आदर्श और मूल्य कमजोर होकर पतन की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जीवन के सभी क्षेत्रों में विकसित हो रहे नए दृष्टिकोण पूरी तरह स्वीकार नहीं किए गए हैं। इस कारण देश में उलझन और निराशा की स्थिति उत्पन्न हुई है। धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक क्षेत्रों में कई गंभीर समस्याएँ पैदा हो गई हैं। 

शिक्षा के उद्देश्यों को निर्धारित करने के लिए निम्नलिखित परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है:

(i) धार्मिक दिशाहीनता – भारत परंपरागत रूप से धर्मप्रधान रहा है, लेकिन वर्तमान में धर्म अपना वास्तविक स्वरूप खो चुका है। धर्म के नाम पर होने वाले संघर्ष और चारित्रिक पतन साम्प्रदायिक उन्माद को बढ़ा रहे हैं।

(ii) चारित्रिक और नैतिक पतन – समाज में छल, फरेब, भ्रष्टाचार, घूसखोरी और बेरोजगारी जैसी समस्याएँ फैल रही हैं। आर्थिक असमानता भी लोगों के चरित्र और नैतिकता को कमजोर कर रही है।

(iii) सामाजिक विकृतियाँ और विखण्डन – अशिक्षा और अज्ञानता के कारण जातिवाद, क्षेत्रवाद, नारी उत्पीड़न, दहेज प्रथा, अंधविश्वास आदि समाज में व्याप्त हैं। ये सामाजिक दोष राष्ट्र की एकता और अखण्डता के लिए खतरा हैं।

(iv) भौतिकवादी प्रवृत्ति – पश्चिमी सभ्यता और संस्कृति के प्रभाव से भारतीयों के आध्यात्मिक मूल्य कमजोर हो रहे हैं। अधिक भौतिक सुख की चाह ने जीवन के आदर्श लक्ष्यों को पीछे कर दिया है।

(v) बेरोजगारी और निर्धनता – बेरोजगारी और गरीबी की समस्या लगातार बढ़ रही है, जिससे असंतोष और आर्थिक संकट उत्पन्न हो रहा है।

(vi) आर्थिक असमानताएँ – विदेशी ऋण, गरीबी और बेरोजगारी देशवासियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। इसका परिणाम हिंसा, लूट और अपराध में देखा जा सकता है।

(vii) राजनीतिक नेतृत्वहीनता – भ्रष्ट और स्वार्थी राजनीति जनकल्याण की भावना के विपरीत काम कर रही है। अस्थिर सरकारें देश में आंतरिक और बाहरी असुरक्षा पैदा कर रही हैं।

(viii) सांस्कृतिक विघटन – पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव ने भारतीय सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को कमजोर किया है, जिससे व्यक्ति के मानवीय गुण भी प्रभावित हो रहे हैं।

(ix) शिक्षा की कमजोर स्थिति – वर्तमान शिक्षा प्रणाली में शिक्षक, शिक्षार्थी, पाठ्यक्रम और मूल्यांकन में दोष हैं। इससे शिक्षा का परिणाम वांछित गुणों वाला नहीं निकल रहा है।

(x) पड़ोसी देशों से खतरा – देश को पड़ोसी देशों से निरंतर खतरा बना रहता है, जिसके कारण सैन्य बल को मजबूत रखना आवश्यक है।

यदि आप चाहो तो मैं इसे और भी संक्षिप्त और परीक्षा-योग्य रूप में 5–6 बिंदुओं में तैयार कर दूँ, ताकि पढ़ने और याद रखने में आसान हो जाए।

2. वर्तमान भारतीय परिस्थितियों में व्यक्ति के दृष्टिकोण से शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या निर्धारित किए जा सकते हैं? ‘

या

हमारे देश की वर्तमान व्यवस्था के सन्दर्भ में शिक्षा के उद्देश्य क्या होने चाहिए?

या

वर्तमान भारत में माध्यमिक शिक्षा के क्या उद्देश्य होने चाहिए? सविस्तार व्याख्या कीजिए।

या

भारत की वर्तमान सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर आप शिक्षा के किन उद्देश्यों का निर्धारण करेंगे?

या

आधुनिक लोकतन्त्रीय भारत में शिक्षा के क्या उद्देश्य होने चाहिए?

या

भारत में उभरते हुए लोकतन्त्र में शिक्षा के क्या उद्देश्य होने चाहिए?

या

भारत की वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार शिक्षा के क्या उद्देश्य होने चाहिए। इनकी विस्तृत विवेचना कीजिए।

या

भारत के वर्तमान सन्दर्भ में शिक्षा के विभिन्न उद्देश्यों का वर्णन कीजिए। कौन-से उद्देश्य व्यक्तिगत विकास में सहायक हैं?

उत्तर: वर्तमान भारतीय परिस्थितियों में शिक्षा के उद्देश्य –

भारतीय शिक्षा के उद्देश्यों का अध्ययन दो दृष्टियों से किया जा सकता है:

(अ) व्यक्ति की दृष्टि से।

(ब) समाज की दृष्टि से।

(क) व्यक्ति की दृष्टि से शिक्षा के उद्देश्य –

(i) शारीरिक विकास – स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क होता है। स्वास्थ्यवर्धक शिक्षा से व्यक्ति समाज और राष्ट्र की सेवा कर सकता है।

(ii) मानसिक विकास – शिक्षा मानसिक शक्तियों, तर्क, विवेक और आत्मनिर्णय की क्षमता विकसित करती है।

(iii) आध्यात्मिक विकास – शिक्षा व्यक्ति में आध्यात्मिक गुणों का विकास कर उसे श्रेष्ठ कार्यों के लिए प्रेरित करती है।

(iv) चारित्रिक विकास – अच्छे चरित्र के बिना समाज और राष्ट्र की उन्नति असंभव है।

(v) व्यक्तित्व का विकास – शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, रचनात्मक और कलात्मक विकास से संपूर्ण व्यक्तित्व निर्मित होता है।

(vi) वैज्ञानिक दृष्टिकोण – शिक्षा से तार्किक सोच, विज्ञान की समझ और तकनीकी कौशल का विकास होता है।

(vii) व्यावसायिक कुशलता – शिक्षा द्वारा विद्यार्थियों को व्यवसायिक और कार्यकुशल बनाया जाता है।

(viii) जीवन-यापन की कला – शिक्षा सामाजिक सहयोग और जीवन प्रबंधन सिखाती है।

(ix) अवकाश का सदुपयोग – समय का उचित उपयोग करना शिक्षा का उद्देश्य होना चाहिए।

(x) सांस्कृतिक विकास – शिक्षा से राष्ट्रीय संस्कृति का ज्ञान और पुनरुत्थान संभव है।

(ख) समाज की दृष्टि से शिक्षा के उद्देश्य:

(i) लोकतान्त्रिक नागरिकता का विकास – शिक्षा से व्यक्ति मानसिक, सामाजिक और नैतिक रूप से सक्षम नागरिक बनता है।

(ii) समाजवादी समाज की स्थापना – शिक्षा समाज में समान अवसर और न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित करती है।

(iii) सामाजिक कुप्रथाओं का अंत – जातिवाद, बाल-विवाह, अस्पृश्यता आदि का समाप्त करना शिक्षा का उद्देश्य है।

(iv) सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना – शिक्षा से व्यक्ति समाज के प्रति जिम्मेदारी और सहयोग सीखता है।

(v) जन-शिक्षा – राष्ट्र की उन्नति शिक्षित जनता के माध्यम से ही संभव है।

(vi) नेतृत्व के गुणों का विकास – शिक्षा भविष्य के नेताओं को प्रशिक्षण और जिम्मेदारी देती है।

(vii) भावात्मक एकता – शिक्षा राष्ट्रीय एकता और समान मूल्यों के प्रति भावना विकसित करती है।

(viii) निःस्वार्थ कार्य की भावना – शिक्षा व्यक्ति को स्वार्थ रहित कार्य और सेवा के लिए प्रेरित करती है।

(ix) अंतर-सांस्कृतिक भावना – शिक्षा विभिन्न संस्कृतियों के प्रति समझ, सम्मान और सहिष्णुता बढ़ाती है।

(x) विश्व-बन्धुत्व की भावना – शिक्षा अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है।

यदि चाहो तो मैं इसे और भी छोटा, 10–12 पंक्तियों में “परीक्षा-योग्य सारांश” बना दूँ, जो याद करना आसान हो।

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