UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 15 बेसिक शिक्षा-पद्धति

UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 15 बेसिक शिक्षा-पद्धति Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapters UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 15 बेसिक शिक्षा-पद्धति Notes and select need one. UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 15 बेसिक शिक्षा-पद्धति Question Answers Download PDF. UP Board Study Material of Class 11 Pedagogy.

UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 15 बेसिक शिक्षा-पद्धति

Also, you can read the UPMSP book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Parishad (UPMSP) Book guidelines. These solutions are part of UP Board All Subject Solutions. Here we have given UP Board Solutions For Class 11 Pedagogy in Hindi, UP Board of Secondary Education Course Pedagogy Notes in Hindi for All Chapter, You can practice these here.

Chapter: 15

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

1. गाँधी जी द्वारा प्रतिपादित बेसिक शिक्षा-पद्धति का अर्थ स्पष्ट कीजिए तथा इस शिक्षा-प्रणाली के मुख्य सिद्धान्तों का भी वर्णन कीजिए।

या

बेसिक शिक्षा को बुनियादी शिक्षा क्यों कहा गया है?

या

बेसिक शिक्षा-प्रणाली के मूलभूत सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: बेसिक शिक्षा का अर्थ (Meaning of Basic Education):

बेसिक शिक्षा पद्धति का प्रतिपादन महात्मा गाँधी जी ने सन् 1937 में किया था। इसे ही “नयी तालीम” या “बुनियादी शिक्षा” कहा जाता है।

गाँधी जी का उद्देश्य ऐसी शिक्षा प्रदान करना था जो बच्चों के सिर, हाथ और हृदय — तीनों का समान रूप से विकास करे।

इस शिक्षा में बालक को किसी उत्पादक कार्य (Craft) के माध्यम से शिक्षा दी जाती है, ताकि वह आत्मनिर्भर, श्रमप्रिय और उपयोगी नागरिक बन सके।

बेसिक शिक्षा को “बुनियादी शिक्षा” क्यों कहा गया है:

इसे “बुनियादी” इसलिए कहा गया है क्योंकि यह शिक्षा जीवन की मूल आवश्यकताओं, रोजगार, और चरित्र निर्माण से सीधा सम्बन्ध रखती है। यह व्यक्ति के सर्वांगीण विकास की नींव (बुनियाद) रखती है।

बेसिक शिक्षा के मुख्य सिद्धान्त (Main Principles of Basic Education):

(i) श्रम का महत्व (Dignity of Labour): शिक्षा का मुख्य आधार उत्पादक कार्य है। बालक हाथ से काम करना सीखता है और श्रम का सम्मान करता है।

(ii) शिक्षा और जीवन का घनिष्ठ सम्बन्ध (Correlation of Education with Life): शिक्षा केवल पुस्तकीय न होकर जीवन से जुड़ी होती है। विद्यालय जीवन की प्रयोगशाला बन जाता है।

(iii) स्वावलम्बन का सिद्धान्त (Principle of Self-Sufficiency): विद्यालय अपने उत्पादों से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकता है। बालक भी आत्मनिर्भर बनता है।

(iv) सर्वांगीण विकास का सिद्धान्त (All-Round Development): यह शिक्षा बालक के शरीर, मन और आत्मा — तीनों का समान रूप से विकास करती है।

(v) मातृभाषा में शिक्षा (Mother Tongue as Medium): प्रारम्भिक शिक्षा मातृभाषा में दी जानी चाहिए ताकि बालक आसानी से समझ सके।

(vi) सहयोग और सामूहिक जीवन (Cooperation and Community Life): विद्यालय को समाज का लघु रूप माना गया है जहाँ विद्यार्थी सहयोग, सेवा और सामूहिकता सीखते हैं।

(vii) लोकतांत्रिक भावना का विकास (Democratic Spirit): यह शिक्षा विद्यार्थियों में समानता, सहयोग और भाईचारे की भावना विकसित करती है।

(viii) नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास (Moral and Spiritual Development): शिक्षा के माध्यम से चरित्र, सत्य, अहिंसा और सेवा की भावना उत्पन्न की जाती है।

संक्षेप में: गाँधीजी की बेसिक शिक्षा एक ऐसी जीवनमूलक शिक्षा है जो बालक को श्रमशील, स्वावलम्बी, नैतिक, सामाजिक और उपयोगी नागरिक बनाती है।

2. गाँधी जी द्वारा प्रतिपादित बेसिक शिक्षा-प्रणाली के मुख्य गुणों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

या

बेसिक शिक्षा-प्रणाली की मुख्य विशेषताओं का विस्तार से वर्णन कीजिए।

या

बेसिक शिक्षा के गुण एवं दोषों का विस्तार से वर्णन कीजिए।

या

बेसिक शिक्षा के गुण-दोषों की विवेचना कीजिए।

उत्तर: बेसिक शिक्षा के गुण या विशेषताएँ (Merits or Characteristics of Basic Education):

(i) जीवनोपयोगी शिक्षा: यह शिक्षा जीवन से जुड़ी हुई है और बालक को आत्मनिर्भर बनाती है। वह पढ़ाई के साथ कोई उत्पादक कार्य भी सीखता है।

(ii) श्रम का सम्मान: यह शिक्षा हाथ से काम करने पर बल देती है, जिससे श्रम के प्रति सम्मान और परिश्रम की आदत विकसित होती है।

(iii) स्वावलम्बन का विकास: विद्यार्थी अपने श्रम से उपयोगी वस्तुएँ बनाकर आत्मनिर्भर बनता है, और विद्यालय भी आर्थिक रूप से सहयोग प्राप्त करता है।

(iv) सर्वांगीण विकास: यह शिक्षा बालक के शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा — चारों का विकास करती है।

(v) मातृभाषा में शिक्षा: शिक्षा मातृभाषा में देने से बालक आसानी से समझ पाता है और अपनी संस्कृति से जुड़ा रहता है।

(vi) सामाजिकता और सहयोग की भावना: समूह कार्यों के माध्यम से विद्यार्थियों में सहयोग, सेवा और भाईचारे की भावना विकसित होती है।

(vii) नैतिक और आध्यात्मिक विकास: यह पद्धति सत्य, अहिंसा, सेवा और सदाचार जैसे नैतिक मूल्यों को विकसित करती है।

(viii) लोकतांत्रिक भावना का विकास: विद्यालय को समाज का लघु रूप मानकर विद्यार्थियों में समानता और जिम्मेदारी की भावना उत्पन्न की जाती है।

बेसिक शिक्षा के दोष (Demerits or Limitations):

(i) आर्थिक दृष्टि से अव्यावहारिक: प्रत्येक विद्यालय में उत्पादक कार्यों के साधन जुटाना कठिन है।

(ii) प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी: इस पद्धति के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षक आवश्यक हैं, जिनकी कमी है।

(iii) बौद्धिक विकास में बाधा: अधिक ध्यान हस्त-कला पर देने से बौद्धिक विषयों की उपेक्षा होती है।

(iv) माध्यमिक स्तर पर असंगति: उच्च शिक्षा से इसका सीधा सम्बन्ध नहीं है, जिससे आगे की पढ़ाई में कठिनाई होती है।

(v) भारतीय परिस्थितियों में कठिन प्रयोग: संसाधनों की कमी और भीड़भाड़ वाले विद्यालयों में इसका सफल कार्यान्वयन कठिन है।

संक्षेप में: बेसिक शिक्षा एक जीवनमूलक, श्रमप्रधान और नैतिक शिक्षा-पद्धति है जो विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता, सहयोग और चरित्र का विकास करती है, किन्तु संसाधनों, प्रशिक्षित शिक्षकों और उच्च शिक्षा से असंगति के कारण इसके व्यावहारिक प्रयोग में कठिनाइयाँ आती हैं।

NEW VIDEO CLASS

Subject Ka Complete Video Solution Dekhein

Step-by-step easy concept explanation aur full questions Answer ke liye watch karein ya app download karein:

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Scroll to Top