UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 14 डाल्टन पद्धति Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapters UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 14 डाल्टन पद्धति Notes and select need one. UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 14 डाल्टन पद्धति Question Answers Download PDF. UP Board Study Material of Class 11 Pedagogy.
UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 14 डाल्टन पद्धति
Also, you can read the UPMSP book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Parishad (UPMSP) Book guidelines. These solutions are part of UP Board All Subject Solutions. Here we have given UP Board Solutions For Class 11 Pedagogy in Hindi, UP Board of Secondary Education Course Pedagogy Notes in Hindi for All Chapter, You can practice these here.
डाल्टन पद्धति
Chapter: 14
| विस्तृत उत्तरीय प्रश्न |
1. शिक्षा की डाल्टन पद्धति का अर्थ स्पष्ट कीजिए तथा इसके मुख्य सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए।
या
डाल्टन शिक्षण पद्धति के क्या सिद्धान्त हैं?
उत्तर: डाल्टन पद्धति का अर्थ (Meaning of Dalton Method): डाल्टन पद्धति का नाम अमेरिका के डाल्टन नगर के नाम पर पड़ा, जहाँ इस पद्धति को सर्वप्रथम मिस हेलेन पार्कहर्स्ट (Helen Parkhurst) ने विकसित किया। यह पद्धति विद्यार्थियों में स्व-अध्ययन, आत्म-नियंत्रण, उत्तरदायित्व और सहयोग की भावना उत्पन्न करने के उद्देश्य से बनाई गई थी। इस पद्धति में प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी गति और रुचि के अनुसार अध्ययन करने की स्वतंत्रता दी जाती है। शिक्षक का कार्य मार्गदर्शक और सहायक के रूप में होता है, न कि ज्ञान देने वाले के रूप में।
डाल्टन पद्धति के मुख्य सिद्धान्त (Main Principles of Dalton Method):
(i) स्वाध्ययन का सिद्धान्त (Principle of Self-Study): विद्यार्थी स्वयं अपने प्रयासों से विषय का अध्ययन करता है। उसे विषय को समझने और पूरा करने की स्वतंत्रता होती है।
(ii) स्वतन्त्रता का सिद्धान्त (Principle of Freedom): विद्यार्थी को अपनी गति, समय और विधि से अध्ययन करने की पूर्ण स्वतंत्रता दी जाती है।
(iii) उत्तरदायित्व का सिद्धान्त (Principle of Responsibility): विद्यार्थी अपने कार्य की जिम्मेदारी स्वयं लेता है। इससे उनमें उत्तरदायित्व और अनुशासन की भावना विकसित होती है।
(iv) सहयोग का सिद्धान्त (Principle of Cooperation): विद्यार्थियों को सामूहिक रूप से भी कार्य करने के लिए प्रेरित किया जाता है ताकि उनमें सहयोग और परस्पर सहायता की भावना विकसित हो।
(v) व्यक्तिगत भिन्नता का सिद्धान्त (Principle of Individual Difference): प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमता, रुचि और गति अलग होती है। यह पद्धति इन भिन्नताओं का ध्यान रखती है।
(vi) शिक्षक मार्गदर्शक के रूप में (Teacher as a Guide): शिक्षक ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि मार्गदर्शन करने वाला होता है। वह विद्यार्थियों की सहायता और निर्देशन करता है।
(vii) कार्य-परियोजना का सिद्धान्त (Principle of Task or Assignment): प्रत्येक विद्यार्थी को मासिक या साप्ताहिक आधार पर एक “असाइनमेंट” या “कार्य” दिया जाता है जिसे वह स्वयं पूरा करता है।
संक्षेप में: डाल्टन पद्धति विद्यार्थियों को स्वतंत्र, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाने पर बल देती है। यह पद्धति शिक्षण को शिक्षक-केंद्रित न मानकर विद्यार्थी-केंद्रित बनाती है।
संक्षिप्त उत्तर रूप में: डाल्टन पद्धति एक ऐसी शिक्षण पद्धति है जिसमें विद्यार्थियों को अपनी गति से स्वाध्ययन करने की स्वतंत्रता दी जाती है। इसके मुख्य सिद्धान्त हैं— स्वाध्ययन, स्वतंत्रता, उत्तरदायित्व, सहयोग, व्यक्तिगत भिन्नता, शिक्षक का मार्गदर्शक रूप और कार्य-परियोजना का प्रयोग।
2. शिक्षा की डाल्टन पद्धति की शिक्षण-विधि का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
उत्तर: डाल्टन पद्धति की शिक्षण-विधि में विद्यार्थियों को अपनी गति और रुचि के अनुसार अध्ययन करने की स्वतंत्रता दी जाती है। इसमें शिक्षक मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है।
मुख्य अंग:
(i) असाइनमेंट प्रणाली – प्रत्येक विषय को कार्यों में बाँटकर विद्यार्थियों को दिया जाता है।
(ii) विषय-कक्ष व्यवस्था – हर विषय के लिए अलग कक्ष या प्रयोगशाला होती है।
(iii) लचीली समय-सारणी – विद्यार्थी अपनी सुविधा से किसी भी विषय पर कार्य कर सकते हैं।
(iv) शिक्षक मार्गदर्शक के रूप में – शिक्षक केवल सहायता और निर्देशन करता है।
(v) निरंतर मूल्यांकन – विद्यार्थियों की प्रगति का नियमित रूप से मूल्यांकन किया जाता है।
संक्षेप में: यह पद्धति विद्यार्थियों में स्वाध्ययन, उत्तरदायित्व और सहयोग की भावना का विकास करती है।
3. शिक्षा की डाल्टन पद्धति के गुणों अथवा विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
या
डाल्टन प्रणाली की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: डाल्टन पद्धति की विशेषताएँ या गुण (Merits or Characteristics of Dalton Plan):
(i) स्वतन्त्र अध्ययन की सुविधा: विद्यार्थियों को अपनी गति और रुचि के अनुसार अध्ययन करने की स्वतंत्रता मिलती है।
(ii) उत्तरदायित्व की भावना का विकास: विद्यार्थी अपने कार्य की पूरी जिम्मेदारी स्वयं लेते हैं, जिससे उनमें उत्तरदायित्व की भावना बढ़ती है।
(iii) स्व-अनुशासन का विकास: जब विद्यार्थी अपने समय और कार्य का नियोजन स्वयं करते हैं, तो उनमें आत्म-अनुशासन विकसित होता है।
(iv) सहयोग की भावना: विद्यार्थी समूहों में कार्य करते हैं जिससे परस्पर सहयोग और सामाजिकता का विकास होता है।
(v) व्यक्तिगत भिन्नताओं का ध्यान: प्रत्येक विद्यार्थी अपनी क्षमता और रुचि के अनुसार अध्ययन कर सकता है, अतः यह पद्धति व्यक्तिगत भिन्नताओं का सम्मान करती है।
(vi) शिक्षक का मार्गदर्शक रूप: शिक्षक ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि सहयोगी और सलाहकार की भूमिका निभाता है।
(vii) व्यावहारिक एवं प्रयोगात्मक शिक्षा: यह पद्धति अध्ययन को जीवन और अनुभव से जोड़ती है, जिससे शिक्षा अधिक उपयोगी बनती है।
संक्षेप में: डाल्टन पद्धति की मुख्य विशेषताएँ हैं— स्वाध्ययन, स्वतंत्रता, उत्तरदायित्व, सहयोग, आत्म-अनुशासन, व्यक्तिगत भिन्नताओं का सम्मान और शिक्षक का मार्गदर्शक रूप।
4. डाल्टन पद्धति के मुख्य दोषों का सामान्य विवरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: डाल्टन पद्धति के दोष (Demerits or Limitations of Dalton Plan):
(i) सभी विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त नहीं: यह पद्धति केवल बुद्धिमान और स्वअनुशासित विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त है। कमजोर या आलसी विद्यार्थी इसका लाभ नहीं ले पाते।
(ii) शिक्षक के मार्गदर्शन की कमी: शिक्षक केवल मार्गदर्शक रहता है, प्रत्यक्ष शिक्षण नहीं करता, जिससे कमजोर विद्यार्थियों को कठिनाई होती है।
(iii) समय और संसाधनों की अधिक आवश्यकता: प्रत्येक विषय के लिए अलग प्रयोगशाला या कक्ष की आवश्यकता होती है, जो सभी विद्यालयों में संभव नहीं।
(iv) पाठ्यक्रम पूरा करने में कठिनाई: विद्यार्थियों की गति भिन्न होने से सभी का पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पाता।
(v) प्रतिस्पर्धा की भावना का अभाव: समूह अध्ययन और स्वतंत्रता के कारण विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना कम होती है।
(vi) सामाजिक व्यवहार में कमी: विद्यार्थी अधिकतर व्यक्तिगत रूप से कार्य करते हैं, जिससे सामूहिक व्यवहार के अवसर कम मिलते हैं।
(vii) भारतीय परिस्थितियों में अनुपयुक्त: भारत जैसे देश में जहाँ कक्षाएँ बड़ी और संसाधन सीमित हैं, वहाँ यह पद्धति व्यावहारिक नहीं है।
संक्षेप में: डाल्टन पद्धति के मुख्य दोष हैं— सभी विद्यार्थियों के लिए अनुपयुक्तता, शिक्षक मार्गदर्शन की कमी, अधिक संसाधनों की आवश्यकता, पाठ्यक्रम पूरा करने में कठिनाई और भारतीय शिक्षा व्यवस्था के लिए अनुपयुक्तता।

Hi, I’m Dev Kirtonia, Founder & CEO of Dev Library. A website that provides all SCERT, NCERT 3 to 12, and BA, B.com, B.Sc, and Computer Science with Post Graduate Notes & Suggestions, Novel, eBooks, Biography, Quotes, Study Materials, and more.
Subject Ka Complete Video Solution Dekhein
Step-by-step easy concept explanation aur full questions Answer ke liye watch karein ya app download karein:

