UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 13 योजना अथवा प्रोजेक्ट पद्धति

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UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 13 योजना अथवा प्रोजेक्ट पद्धति

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Chapter: 13

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

1. शिक्षा की योजना पद्धति (Project Method) से आप क्या समझते हैं? इस पद्धति के मुख्य सिद्धान्तों का भी उल्लेख कीजिए।

या

प्रोजेक्ट विधि के मुख्य सिद्धान्त क्या हैं?

उत्तर: (संक्षेप में):

शिक्षा की योजना पद्धति (Project Method) का अर्थ:

प्रोजेक्ट विधि का विकास डॉ. किलपैट्रिक (Dr. W.H. Kilpatrick) ने किया। यह पद्धति जॉन डीवी (John Dewey) के “करके सीखने” (Learning by Doing) के सिद्धान्त पर आधारित है।

अर्थ: प्रोजेक्ट विधि वह पद्धति है जिसमें विद्यार्थी किसी व्यावहारिक समस्या या कार्य को अपनी रुचि से योजना बनाकर, क्रियान्वित कर, अनुभव प्राप्त करते हुए सीखता है।

प्रोजेक्ट विधि के मुख्य सिद्धान्त (Main Principles of Project Method):

(i) रुचि का सिद्धान्त (Principle of Interest): शिक्षा विद्यार्थियों की रुचि और आवश्यकताओं के अनुसार दी जाती है।

(ii) क्रिया का सिद्धान्त (Principle of Activity): विद्यार्थी स्वयं कार्य करके ज्ञान प्राप्त करता है — “करके सीखना” इस पद्धति का मूल है।

(iii) अनुभव का सिद्धान्त (Principle of Experience): विद्यार्थी अपने अनुभवों से सीखता है, जिससे ज्ञान स्थायी बनता है।

(iv) उद्देश्य का सिद्धान्त (Principle of Purpose): प्रत्येक प्रोजेक्ट का कोई निश्चित उद्देश्य होता है, जिसे विद्यार्थी प्राप्त करने का प्रयास करता है।

(v) सामूहिक कार्य का सिद्धान्त (Principle of Cooperation): विद्यार्थी समूह में मिलकर कार्य करते हैं, जिससे सहयोग और सामाजिकता की भावना विकसित होती है।

(vi) सम्पूर्णता का सिद्धान्त (Principle of Wholeness): प्रोजेक्ट में किसी विषय का अध्ययन अलग-अलग भागों में नहीं बल्कि एक संपूर्ण कार्य के रूप में किया जाता है।

(vii) स्वतंत्रता और आत्म-प्रेरणा (Freedom and Self-Motivation):

विद्यार्थियों को निर्णय लेने, योजना बनाने और कार्य करने की स्वतंत्रता दी जाती है।

संक्षेप में: प्रोजेक्ट विधि एक कर्य-आधारित, अनुभवात्मक और बालक-केंद्रित शिक्षा पद्धति है, जो विद्यार्थियों में सहयोग, रचनात्मकता और व्यावहारिक ज्ञान का विकास करती है।

2. शिक्षा की योजना पद्धति के मुख्य गुणों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: (संक्षेप में):

शिक्षा की योजना पद्धति के मुख्य गुण (Merits of Project Method):

(i) करके सीखना: विद्यार्थी स्वयं कार्य करते हुए अनुभव के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करता है।

(ii) रुचि पर आधारित शिक्षा: यह पद्धति विद्यार्थियों की रुचि और आवश्यकताओं पर आधारित होती है।

(iii) सहयोग की भावना: समूह कार्यों से सहयोग, सहानुभूति और सामाजिक व्यवहार का विकास होता है।

(iv) व्यावहारिक ज्ञान का विकास: विद्यार्थी जीवन की वास्तविक समस्याओं को हल करना सीखते हैं।

(v) स्वतंत्रता और आत्म-निर्भरता: विद्यार्थी योजना बनाते और कार्य करते समय आत्म-निर्णय की क्षमता विकसित करते हैं।

(vi) सृजनात्मकता का विकास: कार्य करते हुए बालक की रचनात्मक शक्ति और कल्पनाशक्ति बढ़ती है।

(vii) सर्वांगीण विकास: यह पद्धति विद्यार्थियों के बौद्धिक, सामाजिक और नैतिक विकास में सहायक है।

3. योजना पद्धति के मुख्य दोषों अथवा कमियों का सामान्य विवरण प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर: (संक्षेप में):

योजना पद्धति के मुख्य दोष (Demerits of Project Method):

(i) समय की अधिक आवश्यकता: प्रत्येक प्रोजेक्ट पूरा करने में बहुत समय लगता है।

(ii) सभी विषयों के लिए उपयुक्त नहीं: गणित, व्याकरण जैसे विषयों में इस पद्धति का उपयोग कठिन है।

(iii) अनुशासन की कमी: स्वतंत्रता मिलने पर विद्यार्थी अनुशासनहीन हो सकते हैं।

(iv) मूल्यांकन में कठिनाई: विद्यार्थियों के कार्यों का समान रूप से मूल्यांकन करना कठिन होता है।

(v) अधिक संसाधनों की आवश्यकता: उपकरण, सामग्री और स्थान की आवश्यकता होती है, जो हर विद्यालय में उपलब्ध नहीं।

(vi) शिक्षक की तैयारी जरूरी: शिक्षक को अच्छी योजना, मार्गदर्शन और निरीक्षण की क्षमता चाहिए।

संक्षेप में: योजना पद्धति रुचि, अनुभव और सहयोग पर आधारित उपयोगी पद्धति है, परंतु यह समय, संसाधन और प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी के कारण सीमित रूप से प्रयोग की जा सकती है।

लघु उत्तरीय प्रण

1. योजना पद्धति की कार्य-प्रणाली को स्पष्ट करने के लिए उसके विभिन्न सोपानों का उल्लेख कीजिए। योजना शिक्षण पद्धति के कौन-से सोपान हैं?

उत्तर: (संक्षेप में):

योजना पद्धति की कार्य-प्रणाली (Steps of Project Method):

प्रोजेक्ट पद्धति में कार्य को चरणबद्ध ढंग से पूरा किया जाता है। 

इसके मुख्य सोपान (Steps) निम्नलिखित हैं —

(i) परियोजना (प्रोजेक्ट) का चयन (Selection of the Project): विद्यार्थियों की रुचि और अनुभव के अनुसार किसी उपयोगी एवं व्यावहारिक विषय का चयन किया जाता है।

(ii) परियोजना की योजना बनाना (Planning): विद्यार्थी और शिक्षक मिलकर कार्य की रूपरेखा बनाते हैं — कौन क्या करेगा, किस सामग्री की आवश्यकता होगी आदि।

(iii) परियोजना का क्रियान्वयन (Execution): विद्यार्थी योजना के अनुसार कार्य करते हैं। शिक्षक मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करता है।

(iv) परियोजना का मूल्यांकन (Evaluation): कार्य पूरा होने पर उसका निरीक्षण किया जाता है — क्या उद्देश्य पूरे हुए या नहीं।

(v) परिणाम प्रस्तुत करना (Presentation of Results): विद्यार्थी अपने कार्य का विवरण, रिपोर्ट या प्रदर्शनी के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

(vi) निष्कर्ष निकालना (Conclusion): पूरे कार्य से प्राप्त अनुभवों और ज्ञान का सार निकाला जाता है।

संक्षेप में: योजना पद्धति के सोपान हैं – (1) प्रोजेक्ट का चयन, (2) योजना बनाना, (3) क्रियान्वयन, (4) मूल्यांकन, (5) परिणाम प्रस्तुत करना, और (6) निष्कर्ष निकालना।

यह पद्धति “करके सीखने” के सिद्धान्त पर आधारित है।

2. प्रोजेक्ट प्रणाली की क्या उपयोगिता है?

उत्तर: आधुनिक शिक्षा – पद्धतियों में प्रोजेक्ट या योजना प्रणाली का एक महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस प्रणाली का मुख्यतम गुण है-व्यावहारिकता। इस प्रणाली से प्राप्त होने वाला ज्ञान व्यावहारिक होता है तथा वह जीवन के लिए उपयोगी होता है। यह एक रोचक शिक्षा-प्रणाली है, जो मनोवैज्ञानिक मान्यताओं पर आधारित है। यह बच्चों के मानसिक विकास में सहायक है। इस शिक्षा-पद्धति में सभी बालकों को समान रूप से कार्य करने का अवसर प्राप्त होता है, चाहे उनकी बुद्धि तीव्र, मन्द अथवा साधारण हो। यह शिक्षा-प्रणाली बालकों को आत्म-विकास के अवसर प्रदान करती है। इस प्रणाली में विभिन्न विषयों को समन्वित रूप से पढ़ाया जाता है। इस शिक्षा-प्रणाली में गृह, पाठशाला तथा समाज में एक प्रकार का सम्बन्ध स्थापित किया जाता है। प्रोजेक्ट प्रणाली बालकों के चरित्र के विकास में भी सहायक है। इसके अतिरिक्त प्रोजेक्ट प्रणाली की एक अन्य उपयोगिता है–सामाजिक भावना के विकास में सहायक होना। इस पद्धति में बालकों को दूसरे के सहयोग से कार्य करने का अवसर प्राप्त होता है। इससे उनमें सामाजिकता की भावना का विकास होता है।

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