UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 24 व्यक्तिगत भिन्नताएँ- अर्थ, प्रकार, कारण एवं मापन

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UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 24 व्यक्तिगत भिन्नताएँ- अर्थ, प्रकार, कारण एवं मापन

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Chapter: 24

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

1. व्यक्तिगत भिन्नता से आप क्या समझते हैं? व्यक्तिगत भिन्नता के मुख्य कारणों का सामान्य परिचय प्रस्तुत कीजिए।

या

व्यक्तिगत भिन्नता का क्या अर्थ है ? इसके मुख्य कारण क्या हैं ? समझाकर लिखिए।

या

व्यक्तिगत भेद किसे कहते हैं? इसके कारणों को स्पष्ट कीजिए।

या

“भिन्नताएँ प्रत्येक व्यक्ति में पायी जाती हैं।” यदि आप इस कथन से सहमत हैं, तो वैयक्तिक विभिन्नता के कारणों का वर्णन कीजिए।

या

व्यक्तिगत विभिन्नताओं के क्या कारण हैं ? विस्तार से समझाइए।

या

व्यक्तिगत भिन्नता के कारणों का उल्लेख कीजिए।

या

व्यक्तिगत विभिन्नता को परिभाषित कीजिए।

या

दो व्यक्तियों में जिन कारणों से व्यक्तिगत भिन्नताएँ पायी जाती हैं, उन्हीं के आधार पर व्यक्तिगत भेद निश्चित किये जाते हैं।” स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: व्यक्तिगत भिन्नता का अर्थ: व्यक्तिगत भिन्नता (Individual Difference) से अभिप्राय उन अंतरों या भेदों से है जो एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से अलग बनाते हैं।

कोई भी दो व्यक्ति अपने शारीरिक गठन, बुद्धि, रुचि, स्वभाव, व्यवहार, क्षमता, आदतों तथा संवेगों में समान नहीं होते।

अर्थात् प्रत्येक व्यक्ति अपनी विशेषताओं, क्षमताओं और व्यक्तित्व में एक-दूसरे से भिन्न होता है — यही व्यक्तिगत भिन्नता कहलाती है।

परिभाषाएँ:

(i) क्रो और क्रो (Crow & Crow) के अनुसार – “व्यक्तिगत भिन्नता वह भिन्नता है जो किसी समूह के सदस्यों में मानसिक, शारीरिक, संवेगात्मक अथवा सामाजिक दृष्टि से पाई जाती है।”

(ii) गैरेट (Garrett) के अनुसार  – “व्यक्तिगत भिन्नताएँ वे विभिन्नताएँ हैं जो व्यक्ति की क्षमताओं, उपलब्धियों और व्यक्तित्व के गुणों में एक-दूसरे से अलग बनाती हैं।”

(iii) ट्रैविस (Travis) के अनुसार – “दो व्यक्ति कभी भी सभी दृष्टियों से समान नहीं होते। व्यक्तियों के बीच पाई जाने वाली असमानता ही व्यक्तिगत भिन्नता कहलाती है।”

व्यक्तिगत भिन्नता के मुख्य कारण:

(i) वंशानुगति (Heredity): व्यक्ति की शारीरिक रचना, बुद्धि, स्वभाव, प्रतिभा आदि अनेक गुण वंशानुगत रूप से माता-पिता से प्राप्त होते हैं। इसलिए एक ही परिवार के बच्चे भी इन गुणों में भिन्न हो सकते हैं।

(ii) पर्यावरण (Environment): व्यक्ति जिस भौतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक वातावरण में रहता है, वही उसके विकास को प्रभावित करता है। भिन्न वातावरण भिन्न व्यक्तित्व उत्पन्न करते हैं।

(iii) परिवार (Family): परिवार का वातावरण, पालन-पोषण की शैली, माता-पिता का व्यवहार, प्रेम या उपेक्षा — ये सभी बालक के स्वभाव और व्यवहार को प्रभावित करते हैं।

(iv) शिक्षा (Education): शिक्षा व्यक्ति की सोच, दृष्टिकोण, कौशल और ज्ञान को आकार देती है। विभिन्न प्रकार की शिक्षा भिन्न व्यक्तित्वों को जन्म देती है।

(v) आर्थिक स्थिति (Economic Status): संपन्नता या गरीबी व्यक्ति के अवसरों, अनुभवों और दृष्टिकोण को प्रभावित करती है, जिससे व्यक्तित्व में भिन्नता आती है।

(vi) स्वास्थ्य (Health): शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति के कार्य, विचार और व्यवहार पर प्रभाव डालता है। स्वस्थ व्यक्ति सामान्यतः अधिक सक्रिय और आत्मविश्वासी होता है।

(vii) लिंग (Sex): पुरुष और स्त्रियों के शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक गुणों में स्वाभाविक अंतर पाया जाता है, जो व्यक्तिगत भिन्नता का कारण बनता है।

(viii) संस्कृति और परंपराएँ (Culture and Traditions): व्यक्ति जिस समाज या संस्कृति में पला-बढ़ा होता है, उसकी मान्यताएँ, मूल्य और आचरण उसके व्यक्तित्व को विशिष्ट बनाते हैं।

(ix) आयु और अनुभव (Age and Experience): अनुभव और आयु के साथ व्यक्ति का दृष्टिकोण, सोचने की क्षमता और व्यवहार बदलता रहता है, जिससे भिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं।

(x) रुचियाँ और अभिरुचियाँ (Interests and Aptitudes): प्रत्येक व्यक्ति की रुचियाँ, क्षमताएँ और रचनात्मक झुकाव अलग-अलग होते हैं, जो उसे विशिष्ट बनाते हैं।

निष्कर्ष: अतः स्पष्ट है कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विशेषताओं में अन्य व्यक्तियों से भिन्न होता है।

2. बालकों में पायी जाने वाली व्यक्तिगत भिन्नता को ध्यान में रखते हुए अध्यापक को शिक्षण-कार्य में किन-किन व्यवस्थाओं को लागू करना चाहिए?

या

व्यक्तिगत भिन्नताओं के कारण शिक्षक को मुख्य रूप से किन-किन बातों को ध्यान में । रखना चाहिए?

या

शिक्षा के क्षेत्र में व्यक्तिगत भिन्नता की भूमिका एवं महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।

या

“व्यक्तिगत भेदों के ज्ञान ने शिक्षा की व्यवस्था को प्रभावशाली बनाया है।” आप इस कथन से कहाँ तक सहमत हैं?

या

“व्यक्तिगत भिन्नताओं के ज्ञान ने शिक्षा को अत्यधिक प्रभावित किया है।” कैसे?

या

“व्यक्तिगत भिन्नता का ज्ञान शिक्षक के लिए अत्यन्त उपयोगी है।” स्पष्ट कीजिए।

या

पाठ्यक्रम, छात्रों के वर्गीकरण और शिक्षण-विधियों में व्यक्तिगत भिन्नताओं को कैसे समायोजित किया जा सकता है? व्याख्या कीजिए।

उत्तर: परिचय: प्रत्येक बालक एक-दूसरे से भिन्न होता है। उनके शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भावनात्मक, सामाजिक और नैतिक गुण समान नहीं होते। यही व्यक्तिगत भिन्नता (Individual Difference) कहलाती है।

शिक्षा का उद्देश्य प्रत्येक बालक के सर्वांगीण विकास में सहायता करना है। इसलिए शिक्षक को शिक्षण-कार्य करते समय इन भिन्नताओं को समझकर उचित शैक्षणिक व्यवस्थाएँ (Educational Arrangements) करनी चाहिए।

व्यक्तिगत भिन्नताओं के कारण शिक्षक के कर्तव्य / शिक्षण में अपनाई जाने वाली व्यवस्थाएँ:

(i) व्यक्तिगत अध्ययन और निरीक्षण: शिक्षक को प्रत्येक विद्यार्थी की रुचि, योग्यता, स्वभाव और क्षमता का अध्ययन करना चाहिए ताकि वह उनकी आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षण कर सके।

(ii) व्यक्तिगत शिक्षण (Individualized Instruction): सभी बच्चों के लिए समान शिक्षण पद्धति उपयुक्त नहीं होती। अतः शिक्षक को प्रत्येक विद्यार्थी की समझ और गति के अनुसार शिक्षण विधि अपनानी चाहिए।

(iii) लचीला पाठ्यक्रम (Flexible Curriculum): पाठ्यक्रम ऐसा होना चाहिए जो विद्यार्थियों की विविध क्षमताओं, रुचियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया हो। उदाहरणार्थ – कला, संगीत, विज्ञान, खेल आदि विविध विषयों को स्थान दिया जाए।

(iv) वर्गीकरण (Classification): विद्यार्थियों को उनकी योग्यता, आयु, रुचि और बौद्धिक स्तर के आधार पर उपयुक्त समूहों में विभाजित करना चाहिए ताकि समान स्तर वाले विद्यार्थी साथ मिलकर बेहतर सीख सकें।

(v) विविध शिक्षण विधियाँ (Use of Various Methods): शिक्षक को विभिन्न शिक्षण विधियों जैसे – चर्चा विधि, प्रोजेक्ट विधि, गतिविधि विधि, प्रयोगात्मक विधि आदि का प्रयोग करना चाहिए ताकि सभी प्रकार के विद्यार्थी सक्रिय रूप से सीख सकें।

(vi) व्यक्तिगत सहायता (Individual Guidance): कमजोर विद्यार्थियों को विशेष सहायता और प्रोत्साहन दिया जाए तथा होनहार विद्यार्थियों को उन्नति के अतिरिक्त अवसर प्रदान किए जाएँ।

(vii) शैक्षिक सामग्री और साधनों का विविध प्रयोग: विभिन्न प्रकार की दृश्य, श्रव्य और प्रयोगात्मक सामग्री (चित्र, मॉडल, चार्ट, वीडियो आदि) का प्रयोग सभी प्रकार के विद्यार्थियों की सीखने की शैली के अनुरूप किया जाए।

(viii) सकारात्मक प्रेरणा और प्रोत्साहन: प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी सफलता पर सराहना और प्रेरणा देना चाहिए ताकि उसमें आत्मविश्वास बढ़े और वह अपनी क्षमता का पूर्ण उपयोग कर सके।

(ix) मूल्यांकन में विविधता: परीक्षा और मूल्यांकन केवल लिखित परीक्षा पर आधारित न होकर मौखिक, व्यवहारिक, प्रोजेक्ट और निरंतर मूल्यांकन (CCE) के रूप में होना चाहिए।

(x) सहायक वातावरण का निर्माण: कक्षा में ऐसा वातावरण बनाया जाए जहाँ प्रत्येक विद्यार्थी को सम्मान, सुरक्षा और आत्मीयता का अनुभव हो।

शिक्षा में व्यक्तिगत भिन्नता का महत्त्व:

(i) यह शिक्षा को बालक-केंद्रित बनाती है।

(ii) यह शिक्षक को प्रत्येक बालक की क्षमता के विकास में सहायता करती है।

(iii) यह समान अवसर प्रदान करने की भावना को सशक्त करती है।

(iv) यह शिक्षा को अधिक प्रभावशाली और उपयोगी बनाती है।

निष्कर्ष: अतः यह सत्य है कि “व्यक्तिगत भिन्नताओं के ज्ञान ने शिक्षा को अत्यधिक प्रभावित किया है।”

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