UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 21 भाषा का विकास

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UP Board Class 11 Pedagogy Chapter 21 भाषा का विकास

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Chapter: 21

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

1. भाषा के विकास से क्या आशय है? भाषा के विकास की विभिन्न अवस्थाओं का सामान्य परिचय प्रस्तुत कीजिए।

या

शैशवावस्था में भाषा-विकास के विभिन्न चरणों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: भाषा के विकास का अर्थ: भाषा का विकास उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसके द्वारा बालक *शब्दों, वाक्यों और अभिव्यक्ति के माध्यम से अपनी भावनाओं, विचारों और अनुभवों को व्यक्त करना सीखता है। यह शैशवावस्था से प्रारंभ होकर जीवनभर जारी रहता है और मानसिक, सामाजिक तथा बौद्धिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है।

शैशवावस्था में भाषा विकास के मुख्य चरण:

(क) रेंगना-शब्दपूर्व चरण (0–6 महीने):

(i) बालक केवल रोता है और विभिन्न ध्वनियों से अपनी आवश्यकताओं को व्यक्त करता है।

(ii) यह भाषा सीखने की प्रारंभिक प्रक्रिया है।

(ख) ध्वनि और बड़बड़ाने का चरण (6–12 महीने):

(i) बालक ‘गु’, ‘बा’, ‘मा’ जैसी बड़बड़ाहट करने लगता है।

(ii) यह शुरुआती ध्वनियों के संयोजन से भाषा सीखने की तैयारी है।

(ग) एक शब्द का चरण (12–18 महीने):

(i) बालक एक-एक शब्द बोलने लगता है, जैसे “माँ”, “पानी”।

(ii) शब्दों का प्रयोग आवश्यकताओं और वस्तुओं को इंगित करने के लिए होता है।

(घ) दो शब्दों का चरण (18–24 महीने):

(i) बालक दो शब्दों के वाक्य बोलने लगता है, जैसे “माँ आओ”, “पानी दो”।

(ii) इसमें क्रम और अर्थ का प्रारंभिक समझ विकसित होती है।

(ङ) वाक्य निर्माण का चरण (2–6 वर्ष):

(i) बालक सरल वाक्य बनाने लगता है।

(ii) शब्दों का प्रयोग भावनाओं, विचारों और अनुभवों को व्यक्त करने के लिए बढ़ता है।

(iii) भाषा का व्याकरण और उच्चारण धीरे-धीरे सटीक होता है।

निष्कर्ष: भाषा विकास शैशवावस्था में बालक के सामाजिक, मानसिक और संचार कौशल के विकास का आधार है। सही वातावरण, संवाद और मार्गदर्शन मिलने पर बालक भाषा को जल्दी और सटीक रूप में सीखता है, जो उसके संपूर्ण व्यक्तित्व निर्माण में सहायक होता है।  

2. वे कौन-से कारक हैं, जो बालकों के भाषा-विकास को प्रभावित करते हैं? विवेचना कीजिए।

उत्तर: बालकों के भाषा-विकास को प्रभावित करने वाले कारक: भाषा विकास केवल जन्मजात क्षमता का परिणाम नहीं है। यह कई आनुवंशिक, सामाजिक, मानसिक और पर्यावरणीय कारकों के संयुक्त प्रभाव से होता है। इन कारकों का ज्ञान शिक्षक और अभिभावक दोनों के लिए आवश्यक है, ताकि बालक का भाषा विकास सही दिशा में हो सके।

मुख्य कारक:

(i) आनुवंशिकता (Heredity): माता-पिता की बुद्धि, संचार कौशल और भाषा की क्षमता बालक के भाषा विकास को प्रभावित करती है।

(ii) परिवार और सामाजिक वातावरण (Family & Social Environment):

बालक जिस वातावरण में रहता है, वहाँ भाषा का प्रयोग कैसा है, यह बहुत महत्वपूर्ण है। माता-पिता और परिवार द्वारा संवाद, कहानी सुनाना और वार्तालाप से बालक जल्दी और सटीक भाषा सीखता है।

(iii) शिक्षा और विद्यालयीय प्रभाव (Education & School): विद्यालय में शिक्षक के संवाद, पाठ्यक्रम, पढ़ाई और समूह गतिविधियाँ बालक की भाषा क्षमता को विकसित करती हैं।

(iv) मनोवैज्ञानिक कारक (Psychological Factors): बालक की मानसिक स्वास्थ्य, जिज्ञासा, ध्यान और सीखने की इच्छा भाषा सीखने की क्षमता को प्रभावित करती है।

(v) पोषण और स्वास्थ्य (Nutrition & Health): उचित आहार और अच्छे स्वास्थ्य से मस्तिष्क का विकास होता है, जिससे भाषा सीखने की क्षमता बेहतर होती है।

(vi) संस्कृति और सामाजिक आदान-प्रदान (Culture & Social Interaction): बालक जितना अधिक विभिन्न लोगों के साथ संवाद करता है और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेता है, उसकी भाषा और संचार कौशल अधिक विकसित होते हैं।

निष्कर्ष: बालकों का भाषा विकास बहु-कारक प्रक्रिया है। यदि उन्हें स्नेहपूर्ण वातावरण, संवाद, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक अनुभव मिलें, तो उनका भाषा विकास संतुलित और प्रभावी होता है, जो उनके संपूर्ण मानसिक और सामाजिक विकास के लिए आवश्यक है।

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