NCERT Class 9 Science Important Chapter 8 एक यात्रा – परमाणु के भीतर

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NCERT Class 9 Science Important Chapter 8 एक यात्रा – परमाणु के भीतर

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एक यात्रा – परमाणु के भीतर

Chapter – 8

IMPORTANT SOLUTIONS

लघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर: 

1. महर्षि कणाद ने पदार्थ के सूक्ष्मतम कणों के विषय में क्या विचार प्रस्तुत किया था?

उत्तर: महर्षि कणाद ने सुझाव दिया कि यदि हम पदार्थ (द्रव्य) को निरंतर विभाजित करते जाएँ, तो एक ऐसी स्थिति आएगी जब इतने सूक्ष्म कण प्राप्त होंगे जिन्हें और अधिक विभाजित नहीं किया जा सकेगा, इन अविभाज्य कणों को उन्होंने ‘परमाणु’ कहा।

2. डाल्टन के परमाणु सिद्धांत का मुख्य प्रस्ताव क्या था?

उत्तर: जॉन डाल्टन ने प्रस्तावित किया कि सभी द्रव्य (पदार्थ) अविभाज्य सूक्ष्म कणों से बने होते हैं जिन्हें परमाणु कहा जाता है, जो द्रव्य के मूल निर्माण खंड हैं जिन्हें और अधिक विभाजित नहीं किया जा सकता।

3. इलेक्ट्रॉन की खोज किसने की और इस पर कौन-सा आवेश होता है?

उत्तर: इलेक्ट्रॉन की खोज वैज्ञानिक जे. जे. टॉमसन ने की थी और इन पर ऋणात्मक (-1) आवेश होता है।

4. टॉमसन के परमाणु मॉडल को किस अन्य नाम से जाना जाता है?

उत्तर: टॉमसन के परमाणु मॉडल को ‘प्लम पुडिंग मॉडल’ या ‘तरबूज मॉडल’ के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसमें धनात्मक आवेश के गोले में इलेक्ट्रॉन उसी प्रकार धँसे होते हैं जैसे तरबूज के लाल गूदे में बीज।

5. अल्फा (α) कण क्या होते हैं?

उत्तर: अल्फा (α) कण धनावेशित सूक्ष्म कण होते हैं जो वास्तव में हीलियम परमाणु का नाभिक होते हैं, जिनमें दो प्रोटॉन और दो न्यूट्रॉन उपस्थित होते हैं।

6. न्यूट्रॉन की खोज किसने की और इस पर कैसा आवेश होता है?

उत्तर: न्यूट्रॉन की खोज वर्ष 1932 में जेम्स चैडविक ने की थी और यह एक उदासीन कण है जिस पर कोई आवेश नहीं होता।

7. परमाणु का नाभिक किन कणों से मिलकर बनता है?

उत्तर: परमाणु का नाभिक मुख्य रूप से प्रोटॉनों (धनावेशित) और न्यूट्रॉनों (उदासीन) से मिलकर बनता है, जिन्हें सम्मिलित रूप से ‘न्यूक्लिऑन’ भी कहा जाता है।

8. परमाणु क्रमांक (Z) से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: किसी तत्व के परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की कुल संख्या को उस तत्व का परमाणु क्रमांक कहते हैं, जिसे Z द्वारा दर्शाया जाता है।

9. द्रव्यमान संख्या (A) को कैसे परिभाषित किया जाता है?

उत्तर: परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या (न्यूक्लिऑनों की संख्या) के योग को द्रव्यमान संख्या कहते हैं (A = p⁺ + n⁰)।

10. संयोजकता (Valency) किसे कहते हैं?

उत्तर: किसी तत्व के परमाणु की अन्य परमाणुओं के साथ संयोजन करने की क्षमता को संयोजकता कहते हैं, जो अष्टक पूर्ण करने हेतु त्यागे, ग्रहण किए या साझा किए गए इलेक्ट्रॉनों की संख्या होती है।

11. किसी कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात करने का सूत्र क्या है?

उत्तर: किसी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या ‘2n²’ सूत्र द्वारा ज्ञात की जाती है, जहाँ ‘n’ कोश की संख्या (ऊर्जा स्तर) है।

12. अष्टक (Octet) नियम क्या है?

उत्तर: यदि किसी परमाणु के बाह्यतम कोश में 8 इलेक्ट्रॉन हों (हीलियम को छोड़कर जिसमें 2 होते हैं), तो इसे अष्टक कहा जाता है और ऐसे परमाणु अधिक स्थायी व कम अभिक्रियाशील होते हैं।

13. समस्थानिक (Isotopes) किसे कहते हैं?

उत्तर: एक ही तत्व के वे परमाणु जिनके परमाणु क्रमांक समान होते हैं परंतु न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होने के कारण द्रव्यमान संख्याएँ भिन्न-भिन्न होती हैं, समस्थानिक कहलाते हैं।

14. समभारिक (Isobars) किसे कहते हैं?

उत्तर: विभिन्न तत्वों के ऐसे परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्याएँ समान होती हैं परंतु परमाणु क्रमांक भिन्न-भिन्न होते हैं, समभारिक कहलाते हैं।

15. प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले हाइड्रोजन के तीन समस्थानिकों के नाम लिखिए।

उत्तर: हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक प्रोटियम (¹H), ड्यूटेरियम (²H), और ट्राइटियम (³H) हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर:

1. रदरफोर्ड के स्वर्ण पन्नी प्रयोग के मुख्य निष्कर्ष क्या थे?

उत्तर: रदरफोर्ड के स्वर्ण पन्नी प्रयोग (α-कण प्रकीर्णन प्रयोग) के मुख्य निष्कर्ष निम्नलिखित थे:

(i) परमाणु का अधिकांश भाग अंदर से रिक्त होता है क्योंकि अधिकतर अल्फा कण बिना विक्षेपित हुए पन्नी के पार निकल गए।

(ii) परमाणु का संपूर्ण धनावेश और अधिकांश द्रव्यमान एक अत्यंत सूक्ष्म और सघन केंद्र में संकुचित होता है, जिसे ‘नाभिक’ कहते हैं।

(iii) नाभिक का आकार परमाणु के आकार की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म (लगभग 10⁵ गुना छोटा) होता है।

(iv) ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर उसी प्रकार चक्कर लगाते हैं जैसे ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं, इसलिए इसे ‘ग्रहीय मॉडल’ भी कहा गया।

2. रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की क्या सीमा (कमी) थी और नील्स बोर ने इसे कैसे दूर किया?

उत्तर: रदरफोर्ड का मॉडल परमाणु के स्थायित्व को नहीं समझा सका। उनके अनुसार यदि ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन धनावेशित नाभिक के चारों ओर त्वरित गति करते हैं, तो वे निरंतर अपनी ऊर्जा का ह्रास करेंगे और अंततः नाभिक में गिर जाएंगे, जिससे परमाणु नष्ट हो जाएगा। इस कमी को दूर करने के लिए नील्स बोर ने अपना मॉडल प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉन यादृच्छिक रूप से नहीं, बल्कि केवल कुछ निश्चित अनुमत वृत्ताकार पथों (स्थायी कक्षाओं/कोशों K, L, M, N) में ही गति करते हैं और इन कक्षाओं में गति करते समय इलेक्ट्रॉन अपनी ऊर्जा का क्षय नहीं करते हैं, जिससे परमाणु स्थायी बना रहता है।

3. बोर और बरी के अनुसार विभिन्न ऊर्जा स्तरों (कोशों) में इलेक्ट्रॉनों के वितरण के क्या नियम हैं?

उत्तर: बोर और बरी ने इलेक्ट्रॉनों के वितरण के लिए निम्नलिखित नियम सुझाए:

(i) किसी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या 2n² सूत्र द्वारा निर्धारित होती है (जहाँ n कोश की संख्या है)। जैसे K-कोश में अधिकतम 2, L-कोश में 8, और M-कोश में 18 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं।

(ii) परमाणु के सबसे बाह्यतम कोश में अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन ही समायोजित हो सकते हैं (प्रथम कोश को छोड़कर जहाँ अधिकतम दो हो सकते हैं)।

(iii) इलेक्ट्रॉनों का भराव क्रमानुसार होता है; अर्थात् जब तक भीतरी कोश पूर्ण रूप से नहीं भर जाता, तब तक इलेक्ट्रॉन बाहर वाले कोश में नहीं जाते (जैसे K के बाद L, फिर M कोश भरता है)।

4. समस्थानिक क्या होते हैं? चिकित्सा और अन्य क्षेत्रों में इनके कोई प्रमुख उपयोग लिखिए।

उत्तर: एक ही तत्व के वे परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान परंतु द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है, समस्थानिक कहलाते हैं।

समस्थानिकों के प्रमुख उपयोग इस प्रकार हैं:

(i) यूरेनियम के समस्थानिक (U-235) का उपयोग नाभिकीय परमाणु संयंत्रों में विद्युत उत्पादन हेतु ईंधन के रूप में किया जाता है।

(ii) कोबाल्ट के रेडियोधर्मी समस्थानिक (Co-60) का उपयोग कैंसर के उपचार (रेडियोथेरेपी) में किया जाता है।

(iii) आयोडीन के समस्थानिक (I-131) का उपयोग घेंघा रोग और थायरॉइड कैंसर के उपचार में किया जाता है।

(iv) कार्बन-14 का उपयोग पुरातत्व और भूविज्ञान में प्राचीन जीवाश्मों और कलाकृतियों की आयु ज्ञात करने में किया जाता है।

5. किसी तत्व का भारित औसत परमाणु द्रव्यमान (Average Atomic Mass) क्या होता है और इसे कैसे परिकलित किया जाता है? क्लोरीन का उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर: यदि कोई तत्व प्रकृति में एक से अधिक समस्थानिकों के रूप में पाया जाता है, तो उस तत्व का यथार्थ परमाणु द्रव्यमान उसके सभी समस्थानिकों के द्रव्यमानों और उनकी प्राकृतिक प्रचुरता (प्रतिशत मात्रा) के आधार पर निकाला जाता है, जिसे ‘भारित औसत परमाणु द्रव्यमान’ कहते हैं। उदाहरण के लिए, प्रकृति में क्लोरीन के दो समस्थानिक ³⁵Cl (लगभग 75% मात्रा) और ³⁷Cl (लगभग 25% मात्रा) पाए जाते हैं। इसका औसत द्रव्यमान इस प्रकार निकाला जाता है: औसत द्रव्यमान = (35 × 75/100) + (37 × 25/100) = (105/4) + (37/4) = 142/4 = 35.5 u यही कारण है कि क्लोरीन का द्रव्यमान 35.5 u लिया जाता है।

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