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NCERT Class 9 Science Important Chapter 7 कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
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कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
Chapter – 7
| IMPORTANT SOLUTIONS |
लघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर:
1. विज्ञान के दृष्टिकोण से कार्य को कैसे परिभाषित किया जाता है?
उत्तर: किसी वस्तु पर लगने वाले एक नियत बल द्वारा किसी विस्थापन हेतु किए गए कार्य को बल और बल की दिशा में विस्थापन के गुणनफल (W = F × s) के रूप में परिभाषित किया जाता है।
2. 1 जूल कार्य से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: 1 जूल कार्य तब संपन्न होता है जब किसी वस्तु पर 1 न्यूटन का बल लगाने से वस्तु बल की दिशा में 1 मीटर विस्थापित हो जाती है (1J = 1N × 1m)
3. किया गया कार्य शून्य कब होता है?
उत्तर: किया गया कार्य शून्य तब होता है जब वस्तु पर लगने वाला बल शून्य हो (F = 0), विस्थापन शून्य हो (s = 0), या जब लगाया गया बल विस्थापन की दिशा के लंबवत हो।
4. ऊर्जावान वस्तु या ऊर्जा किसे कहते हैं? इसका SI मात्रक क्या है?
उत्तर: जिस वस्तु में कार्य करने की क्षमता होती है, उसे ऊर्जावान वस्तु कहते हैं। ऊर्जा का SI मात्रक कार्य के मात्रक के समान ही ‘जूल’ (J) है।
5. गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) क्या है?
उत्तर: किसी वस्तु में उसकी गति के कारण जो ऊर्जा विद्यमान होती है, उसे गतिज ऊर्जा कहते हैं। इसका सूत्र K = 1/2mv2 होता है।
6. स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) की परिभाषा क्या है?
उत्तर: किसी वस्तु में विरूपण (विकृति) के कारण अथवा वस्तुओं के समूह (निकाय) में उनकी सापेक्ष स्थिति के कारण जो ऊर्जा संचित होती है, उसे स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
7. पृथ्वी की सतह से h ऊंचाई पर स्थित m द्रव्यमान की वस्तु की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा कितनी होती है?
उत्तर: पृथ्वी की सतह से h ऊंचाई पर स्थित m द्रव्यमान की वस्तु की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा mgh होती है (जहाँ g गुरुत्वीय त्वरण है)।
8. यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy) किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा के कुल योग को उसकी यांत्रिक ऊर्जा कहा जाता है।
9. कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem) क्या है?
उत्तर: कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार, किसी वस्तु पर किया गया कार्य उस वस्तु की ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है।
10. शक्ति (Power) किसे कहते हैं? इसका मात्रक क्या है?
उत्तर: शक्ति को कार्य करने की दर के रूप में परिभाषित किया जाता है (P = W/t)। शक्ति का SI मात्रक ‘वाट’ (W) है।
11. एक अश्वशक्ति (Horsepower) कितने वाट के बराबर होती है?
उत्तर: एक अश्वशक्ति (Horsepower) 746 वाट (W) के बराबर होती है।
12. सरल मशीनें (Simple Machines) क्या होती हैं?
उत्तर: सरल मशीनें ऐसे उपकरण हैं जो किसी कार्य को करने के लिए आवश्यक बल के परिमाण या दिशा को बदलकर कार्य करना सुगम (सरल) बनाते हैं।
13. यांत्रिक लाभ (Mechanical Advantage) का सूत्र क्या है?
उत्तर: यांत्रिक लाभ का सूत्र है: यांत्रिक लाभ = भार/आयास।
14. उत्तोलक (Lever) किसे कहते हैं?
उत्तर: उत्तोलक एक दृढ़ छड़ (जैसे पैमाना) होती है जो किसी स्थिर बिंदु (आलंब) पर घूमने में सक्षम होती है।
15. स्थिर घिरनी (Fixed Pulley) का यांत्रिक लाभ 1 क्यों होता है?
उत्तर: स्थिर घिरनी केवल लगाए गए बल (आयास) की दिशा में परिवर्तन करती है, उसके परिमाण में नहीं। चूंकि आयास और भार परिमाण में समान होते हैं, अतः इसका यांत्रिक लाभ 1 होता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर:
1. धनात्मक, ऋणात्मक और शून्य कार्य को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: धनात्मक कार्य: जब विस्थापन उसी दिशा में होता है जिस दिशा में बल आरोपित किया गया है, तो कार्य धनात्मक होता है। उदाहरण: पहिएदार कुर्सी को आगे की ओर धकेलना।
ऋणात्मक कार्य: जब वस्तु पर लगाए गए बल की दिशा उसके विस्थापन की दिशा के ठीक विपरीत होती है, तो बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होता है। उदाहरण: गोलरक्षक (Goalkeeper) द्वारा फुटबॉल की गति की विपरीत दिशा में बल लगाकर उसे रोकना।
शून्य कार्य: जब लगाया गया बल विस्थापन के लंबवत हो या विस्थापन शून्य हो (जैसे दृढ़ दीवार को धकेलना), तो कार्य शून्य होता है। उदाहरण: एक लड़की का सिर पर बॉक्स रखकर क्षैतिज दिशा में चलना।
2. गतिज ऊर्जा के लिए गणितीय व्यंजक (K = 1/2mv2) की व्युत्पत्ति कीजिए।
उत्तर: मान लीजिए m द्रव्यमान की एक वस्तु प्रारंभिक वेग u से चल रही है। उस पर नियत बल F लगाने से s विस्थापन के बाद उसका अंतिम वेग v हो जाता है और त्वरण a उत्पन्न होता है। गति के तृतीय समीकरण से: v2 = u2 + 2as ⇒ s = v2 − u2/2a। न्यूटन के गति के द्वितीय नियम से बल: F = ma। किया गया कार्य: W = F × s = ma × v2 − u2/2a = 1/2m(v2 − u2)। चूंकि किया गया कार्य ही ऊर्जा में परिवर्तन है, यदि वस्तु पविरामावस्था से शुरू होती है (u = 0), तो वस्तु की अंतिम गतिज ऊर्जा K = 1/2mv2 होगी।
3. ‘यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण का नियम’ क्या है? एक मुक्त रूप से गिरती हुई वस्तु का उदाहरण देकर इसे सिद्ध कीजिए।
उत्तर: यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण नियम के अनुसार, जब कोई वस्तु गुरुत्वीय बल के अधीन गतिमान होती है और उस पर कोई अन्य बाह्य बल कार्य नहीं कर रहा हो, तो उसकी कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज + स्थितिज ऊर्जा) नियत (संरक्षित) रहती है।
उदाहरण: मान लीजिए m द्रव्यमान की वस्तु h ऊंचाई (बिंदु A) से मुक्त रूप से गिरती है।
बिंदु A पर: वेग शून्य है, अतः गतिज ऊर्जा 0 है। स्थितिज ऊर्जा mgh है। कुल ऊर्जा = mgh।
नीचे गिरते समय (बिंदु B पर): यदि t समय बाद वेग v हो जाता है, तो v = gt। गतिज ऊर्जा = 1/2mv2 = 1/2m(gt)2। t समय में गिरी गई दूरी = 1/2gt2, अतः नई ऊंचाई = h − 1/2gt2। स्थितिज ऊर्जा = mg(h − 1/2gt2) = mgh − 1/2mg2t2। कुल ऊर्जा = गतिज + स्थितिज ऊर्जा = 1/2mg2t2 +(mgh − 1/2mg2t2) = mgh। अतः हर बिंदु पर कुल यांत्रिक ऊर्जा mgh ही रहती है, जो इस नियम को सिद्ध करती है।
4. आनत तल (Inclined Plane) क्या है? सिद्ध कीजिए कि आनत तल का यांत्रिक लाभ हमेशा 1 से अधिक होता है।
उत्तर: आनत तल एक सरल मशीन है जो भारी वस्तु को ऊपर चढ़ाने या नीचे उतारने में सहायता करती है। मान लीजिए m द्रव्यमान (भार = mg) की एक वस्तु को h ऊंचाई तक सीधा उठाने के लिए किया गया कार्य mgh होगा। यदि उसी वस्तु को L लंबाई वाले आनत तल पर धकेल कर ले जाया जाए, और लगाया गया बल (आयास) F′ हो, तो किया गया कार्य F′ × L होगा। कार्य-ऊर्जा प्रमेय (घर्षण नगण्य मानते हुए) के अनुसार दोनों कार्य समान होंगे: F′ × L = mgh। इससे आयास F′ = mg × h/L प्राप्त होता है। हम जानते हैं कि यांत्रिक लाभ = भार/आयास = mg/F′। F′ का मान रखने पर यांत्रिक लाभ = L/h होता है। चूंकि आनत तल की लंबाई (L) हमेशा उसकी लंबवत ऊंचाई (h) से अधिक होती है, इसलिए आनत तल का यांत्रिक लाभ हमेशा 1 से अधिक होता है।
5. यांत्रिक लाभ (Mechanical Advantage) किसे कहते हैं? घिरनी (Pulley) क्या है? स्पष्ट कीजिए कि एक स्थिर घिरनी का यांत्रिक लाभ 1 होने के बावजूद यह हमारे कार्य को किस प्रकार आसान बनाती है?
उत्तर: (i) यांत्रिक लाभ: किसी मशीन द्वारा उठाए गए ‘भार’ और मशीन पर लगाए गए बल यानी ‘आयास’ के अनुपात को यांत्रिक लाभ कहा जाता है। इसका सूत्र इस प्रकार है: यांत्रिक लाभ = भार/आयास।
(ii) घिरनी (Pulley): घिरनी एक पहिया होता है जिसमें एक खांचा बना होता है, जो रस्सी को दिशा देने का कार्य करता है। इसका उपयोग भारी वस्तुओं को आसानी से ऊपर उठाने के लिए किया जाता है।
(iii) घिरनी कार्य को आसान कैसे बनाती है: एक स्थिर घिरनी उस पर लगाए जाने वाले बल (आयास) के परिमाण में कोई परिवर्तन नहीं करती है, बल्कि यह बल की दिशा में परिवर्तन कर देती है। किसी भारी वस्तु को सीधे ऊपर की ओर उठाने की तुलना में, रस्सी के सहारे नीचे की ओर बल लगाकर (खींचकर) उठाना हमारे लिए अधिक सरल और सुविधाजनक होता है। चूँकि स्थिर घिरनी में लगाया गया आयास और उठाया गया भार परिमाण में समान होते हैं, इसलिए इसका यांत्रिक लाभ 1 होता है। फिर भी, बल की दिशा को नीचे की ओर बदलकर यह हमारे कार्य को आसान बना देती है।

