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NCERT Class 9 Science Important Chapter 6 गति पर बलों का प्रभाव
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गति पर बलों का प्रभाव
Chapter – 6
| IMPORTANT SOLUTIONS |
लघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर:
1. बल क्या है और इसका मात्रक क्या है?
उत्तर: बल एक ऐसी भौतिक राशि है जिसके लिए हमें उसके परिमाण और मात्रक के साथ-साथ दिशा भी बतानी पड़ती है। बल का SI मात्रक न्यूटन (N) है।
2. संतुलित बल किसे कहते हैं?
उत्तर: ऐसे दो बल जो किसी वस्तु पर परिमाण में बराबर किंतु दिशा में विपरीत लगते हैं, संतुलित बल कहलाते हैं। जब बल संतुलित होते हैं तो वस्तु पर परिणामी बल शून्य होता है।
3. असंतुलित बल क्या होते हैं?
उत्तर: यदि किसी वस्तु पर लगाए गए बल दिशा में विपरीत और परिमाण में असमान हों, तो वे संतुलित नहीं होते हैं और वस्तु पर एक परिणामी बल कार्य करता है जिसका परिमाण शून्य नहीं होता। इन्हें असंतुलित बल कहते हैं।
4. घर्षण बल की दिशा क्या होती है?
उत्तर: घर्षण बल हमेशा वस्तु की गति की विपरीत दिशा में कार्य करता है और यह वस्तु की गति का विरोध करता है।
5. न्यूटन के गति का प्रथम नियम क्या है?
उत्तर: न्यूटन के गति के प्रथम नियम के अनुसार, यदि कोई वस्तु विरामावस्था में है तो वह विरामावस्था में ही रहेगी और यदि गति की अवस्था में है तो नियत वेग से गति करती रहेगी जब तक कि उस पर कोई परिणामी बल कार्य न करे।
6. जड़त्व (Inertia) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: वस्तुओं की विराम अवस्था अथवा एकसमान गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करने की उनकी प्रवृत्ति को जड़त्व (inertia) कहते हैं।
7. 1 न्यूटन बल को कैसे परिभाषित किया जाता है?
उत्तर: एक न्यूटन (1 N) बल वह बल है जो 1 kg द्रव्यमान वाली वस्तु में 1 m s–2 का त्वरण उत्पन्न करता है।
8. गैलीलियो ने अपने विचार प्रयोगों से क्या दर्शाया था?
उत्तर: गैलीलियो ने दर्शाया था कि यदि कोई वस्तु क्षैतिज तल पर गति करती है और उसकी गति में आने वाली सभी बाधाओं (जैसे घर्षण) को हटा दिया जाए, तो वह अनिश्चित काल तक नियत वेग से गतिमान रहेगी।
9. न्यूटन के गति का द्वितीय नियम क्या है?
उत्तर: जब किसी वस्तु पर कोई परिणामी बल कार्य करता है, तो वस्तु परिणामी बल की दिशा में त्वरित होती है; यह त्वरण परिणामी बल के परिमाण के समानुपाती और वस्तु के द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है (F = ma)।
10. संवेग (Momentum) को किस प्रकार परिभाषित किया जाता है?
उत्तर: किसी वस्तु का संवेग उसके द्रव्यमान और वेग के गुणनफल के रूप में परिभाषित किया जाता है, और इसकी दिशा वही होती है जो वेग की दिशा होती है।
11. न्यूटन के गति का तृतीय नियम क्या है?
उत्तर: न्यूटन के गति के तृतीय नियम के अनुसार, जब भी कोई एक वस्तु किसी दूसरी वस्तु पर बल लगाती है तो दूसरी वस्तु भी उसी समय पहली वस्तु पर बराबर बल विपरीत दिशा में लगाती है।
12. गुरुत्वीय त्वरण (g) क्या है?
उत्तर: गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में पृथ्वी की ओर गिरती हुई वस्तु के त्वरण को पृथ्वी द्वारा लगाए गए गुरुत्वाकर्षण बल के कारण गुरुत्वीय त्वरण (g) कहा जाता है।
13. क्या क्रिया और प्रतिक्रिया बल एक ही वस्तु पर लगते हैं?
उत्तर: नहीं, क्रिया और प्रतिक्रिया बल परिमाण में बराबर होते हैं परंतु वे हमेशा दो अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं, इसलिए वे एक-दूसरे को संतुलित या निरस्त नहीं करते।
14. वाहनों के टायरों और जूतों के तलवों पर खांचे क्यों बनाए जाते हैं?
उत्तर: जूतों के तलवों और वाहनों के टायरों पर बने खांचे, सतह के साथ घर्षण बल को बढ़ाने में सहायता करते हैं जिससे फिसलने से बचा जा सके।
15. यदि किसी गतिमान वस्तु पर घर्षण बल शून्य हो जाए, तो क्या होगा?
उत्तर: यदि घर्षण बल शून्य हो जाए और वस्तु पर कोई अन्य बल कार्य न करे, तो वस्तु कभी भी विरामावस्था में नहीं आएगी और वह सदैव नियत वेग से गतिमान रहेगी।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर:
1. न्यूटन के गति के द्वितीय नियम की गणितीय व्याख्या कीजिए तथा F=ma सूत्र कैसे प्राप्त होता है, समझाइए।
उत्तर: न्यूटन के गति के द्वितीय नियम के अनुसार, जब किसी वस्तु पर कोई परिणामी बल कार्य करता है तो वस्तु परिणामी बल की दिशा में त्वरित होती है। इस त्वरण (a) का परिमाण, परिणामी बल (F) के परिमाण के समानुपाती होता है (a∝F) और वस्तु के द्रव्यमान (m) के व्युत्क्रमानुपाती होता है (a∝1/m)। इन दोनों को मिलाने पर गणितीय रूप से इसे F=ma के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ a त्वरण, F बल और m वस्तु का द्रव्यमान है।
2. दैनिक जीवन के कुछ उदाहरण देकर न्यूटन के गति के तृतीय नियम को समझाइए।
उत्तर: न्यूटन का तृतीय नियम कहता है कि प्रत्येक क्रिया के बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।
इसके कुछ दैनिक उदाहरण हैं:
(i) चलने की प्रक्रिया: चलते समय हम अपने पैरों से पृथ्वी की सतह को पीछे की ओर धकेलते हैं (क्रिया), और पृथ्वी की सतह हमारे पैरों पर विपरीत दिशा में (आगे की ओर) घर्षण बल लगाती है (प्रतिक्रिया), जिससे हम आगे बढ़ते हैं।
(ii) नाव चलाना: जब नाविक अपने चप्पू से जल को पीछे की ओर धकेलता है, तो जल भी चप्पू (और नाव) को बराबर बल से आगे की ओर धकेलता है जिससे नाव आगे बढ़ती है।
(iii) रॉकेट का प्रक्षेपण: रॉकेट का इंजन गैस उत्पन्न करके उसे नीचे की ओर तीव्रता से निष्कासित करता है (क्रिया), और निष्कासित गैसें रॉकेट पर ऊपर की ओर बराबर बल लगाती हैं (प्रतिक्रिया), जिससे रॉकेट उड़ता है।
3. क्रिकेट के खेल में क्षेत्ररक्षक (fielder) तेज आती गेंद को पकड़ते समय अपने हाथों को पीछे की ओर क्यों खींचता है?
उत्तर: तेज़ गति से आती गेंद को पकड़ते समय क्षेत्ररक्षक अपने हाथों को पीछे की ओर खींचता है ताकि गेंद के उच्च वेग के शून्य होने की अवधि (समय) बढ़ जाए। समय अंतराल बढ़ जाने से गेंद के संवेग में परिवर्तन की दर और त्वरण का परिमाण कम हो जाता है। त्वरण कम होने के कारण, गेंद को रोकने के लिए क्षेत्ररक्षक के हाथों पर लगने वाला बल भी कम हो जाता है। इससे क्षेत्ररक्षक के हाथों में गंभीर चोट लगने की संभावना काफी कम हो जाती है। इसी सिद्धांत का उपयोग वाहनों में एयरबैग लगाकर दुर्घटना के समय व्यक्ति पर लगने वाले बल को कम करने में भी किया जाता है।
4. किसी निकाय (system) पर लगने वाले आंतरिक और बाह्य बलों में क्या अंतर है? दो जुडी हुई पेटियों के उदाहरण से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: जब दो या दो से अधिक वस्तुओं (जैसे डोरी से जुड़ी दो पेटियां) को एक साथ उनके गति के विश्लेषण के लिए एक ही इकाई मान लिया जाता है, तो उसे निकाय (system) कहते हैं। इस निकाय के भीतर की वस्तुओं द्वारा एक-दूसरे पर लगाए गए बल आंतरिक बल कहलाते हैं, जबकि निकाय के बाहर से किसी अन्य स्रोत द्वारा लगाए गए बल बाह्य बल कहलाते हैं। उदाहरण के लिए, यदि m1 और m2 द्रव्यमान की दो पेटियों को एक डोरी से जोड़कर किसी बल F द्वारा खींचा जाता है, तो दोनों पेटियों और डोरी को एक निकाय माना जा सकता है। इस स्थिति में डोरी द्वारा दोनों पेटियों पर लगाया गया तनाव (T) एक आंतरिक बल है, जबकि बाहर से लगाया गया खींचने वाला बल (F) बाह्य बल है। निकाय का कुल त्वरण केवल बाह्य बल (F) और निकाय के कुल द्रव्यमान पर निर्भर करता है, आंतरिक बल पर नहीं।
5. घर्षण बल गति को किस प्रकार प्रभावित करता है? एक प्रयोगात्मक गतिविधि का उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर: घर्षण बल हमेशा वस्तु की गति की विपरीत दिशा में कार्य करता है और यह गति का विरोध करता है। किसी गतिमान वस्तु की गति को नियत बनाए रखने के लिए हमें इस घर्षण बल के विरुद्ध निरंतर एक बाह्य बल लगाना पड़ता है। यदि हम बल लगाना बंद कर दें, तो घर्षण बल वस्तु के वेग को धीरे-धीरे कम करके अंततः उसे विरामावस्था में ला देता है। प्रयोगात्मक उदाहरण: यदि हम एक रबर बैंड की मदद से सिक्कों के एक ढेर को अलग-अलग सतहों (जैसे लकड़ी की मेज और पॉलिश की हुई चिकनी सतह) पर समान बल से धकेलते हैं, तो हम पाते हैं कि चिकनी सतह पर घर्षण बल कम होने के कारण सिक्के अधिक दूरी तय करते हैं और उनका वेग धीरे-धीरे कम होता है। वहीं लकड़ी जैसी खुरदरी सतह पर घर्षण अधिक होने के कारण सिक्के कम दूरी तय करके जल्दी रुक जाते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि घर्षण बल सतहों की प्रकृति पर निर्भर करता है और गति का विरोध करता है।

