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NCERT Class 9 Science Important Chapter 2 कोशिका – जीवन की निर्माण इकाई
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कोशिका – जीवन की निर्माण इकाई
Chapter – 2
| IMPORTANT SOLUTIONS |
लघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर:
1. कोशिका की खोज किसने और कैसे की थी?
उत्तर: रॉबर्ट हुक ने 1665 में खुद के बनाए हुए सूक्ष्मदर्शी का उपयोग करके कॉर्क के एक पतले टुकड़े में बक्से जैसे छोटे कोष्ठ देखे थे। उन्होंने ही इन कोष्ठों को ‘कोशिका’ (सेल) नाम दिया था।
2. एककोशिकीय और बहुकोशिकीय जीवों में क्या अंतर है?
उत्तर: जो जीव केवल एक ही कोशिका से बने होते हैं (जैसे जीवाणु और यीस्ट), उन्हें एककोशिकीय जीव कहते हैं। जबकि जो जीव लाखों कोशिकाओं से बने होते हैं (जैसे पादप, मनुष्य, पक्षी), उन्हें बहुकोशिकीय जीव कहते हैं।
3. प्लाज्मा झिल्ली (कोशिका झिल्ली) किसे कहते हैं और इसका क्या काम है?
उत्तर: प्लाज्मा झिल्ली कोशिका का सबसे बाहरी पतला आवरण है जो इसे चारों ओर से घेरकर रखता है। यह वर्णात्मक रूप से पारगम्य होती है, यानी यह केवल कुछ ही पदार्थों को कोशिका के अंदर या बाहर आने-जाने देती है।
4. परासरण (Osmosis) की प्रक्रिया क्या होती है?
उत्तर: जल का एक वर्णात्मक रूप से पारगम्य झिल्ली के माध्यम से तनु विलयन (उच्च जल सांद्रता) से सांद्र विलयन (निम्न जल सांद्रता) की ओर गति करना परासरण कहलाता है। पौधों की जड़ें इसी प्रक्रिया से मिट्टी से जल सोखती हैं।
5. पादप कोशिका में कोशिका भित्ति (Cell Wall) का क्या कार्य है?
उत्तर: पादप कोशिका में कोशिका झिल्ली के बाहर एक दृढ़ आवरण होता है जिसे कोशिका भित्ति कहते हैं, जो मुख्य रूप से सेल्यूलोज की बनी होती है। यह पौधों को कठोरता, आकार और प्रतिकूल पर्यावरण (जैसे तेज हवा, बारिश) को सहने की क्षमता प्रदान करती है।
6. प्रोकैरियोटिक (पूर्वकेन्द्रकी) कोशिकाएं क्या होती हैं?
उत्तर: वे कोशिकाएं जिनमें स्पष्ट केन्द्रक और झिल्ली-आबद्ध कोशिकांग (membrane-bound organelles) नहीं होते हैं, उन्हें प्रोकैरियोटिक कोशिकाएं कहते हैं। जीवाणु (Bacteria) इसका एक मुख्य उदाहरण हैं।
7. कोशिका का ‘ऊर्जा केंद्र’ (Powerhouse) किसे कहा जाता है और क्यों?
उत्तर: माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का ऊर्जा केंद्र कहा जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह कोशिकीय श्वसन के दौरान कोशिका के विभिन्न कार्यों के लिए एटीपी (ATP) के रूप में आवश्यक ऊर्जा उत्पन्न करता है।
8. राइबोसोम का कोशिका में क्या काम होता है?
उत्तर: राइबोसोम कोशिका के भीतर प्रोटीन संश्लेषण (प्रोटीन बनाने) का कार्य करते हैं। ये कोशिकाद्रव्य में मुक्त रूप से या अंतर्द्रव्यी जालिका (ER) से जुड़े हुए पाए जाते हैं।
9. लाइसोसोम कोशिका को साफ रखने में कैसे मदद करता है?
उत्तर: लाइसोसोम में शक्तिशाली एंजाइम होते हैं। यह कोशिका के अंदर मौजूद अपशिष्ट पदार्थों, अवांछित प्रोटीन और क्षतिग्रस्त अंगों को विघटित (तोड़कर) कोशिका को साफ और स्वस्थ रखने का कार्य करता है।
10. रफ (खुरदरी) अंतर्द्रव्यी जालिका और स्मूथ (चिकनी) अंतर्द्रव्यी जालिका में क्या फर्क है?
उत्तर: रफ अंतर्द्रव्यी जालिका (RER) की सतह पर राइबोसोम जुड़े होते हैं जिससे यह खुरदरी दिखती है और इसका काम प्रोटीन बनाना है। जबकि स्मूथ अंतर्द्रव्यी जालिका (SER) की सतह पर राइबोसोम नहीं होते, यह चिकनी होती है और वसा (लिपिड) तथा हार्मोन बनाने का काम करती है।
11. फूलों और फलों को उनका सुंदर रंग कहाँ से मिलता है?
उत्तर: फूलों और फलों को उनका रंग ‘वर्णशीलवक’ (Chromoplast) नामक लवक से मिलता है। इनमें पीले, नारंगी या लाल रंग के वर्णक होते हैं जो परागण के लिए जंतुओं को आकर्षित करते हैं।
12. अवर्णी लवक (Leucoplast) का क्या काम है?
उत्तर: अवर्णी लवक रंगहीन होते हैं और इनमें कोई वर्णक नहीं होता है। इनका मुख्य काम खाद्य सामग्री जैसे स्टार्च, तेल या प्रोटीन का भंडारण करना है (जैसे आलू में स्टार्च का भंडारण)।
13. रसधानी (Vacuole) का पौधों में क्या महत्व है?
उत्तर: पादप कोशिका में एक बड़ी केन्द्रीय रसधानी होती है जो जल, खनिज और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को संग्रहित करती है। यह कोशिका के भीतर दबाव बनाए रखती है जिससे पौधे को दृढ़ता मिलती है।
14. समसूत्री विभाजन (Mitosis) क्या है?
उत्तर: यह कोशिका विभाजन का वह प्रकार है जिसमें एक जनक कोशिका विभाजित होकर आनुवंशिक रूप से समान दो संतति कोशिकाएं बनाती है। यह विभाजन शरीर की वृद्धि, मरम्मत और रखरखाव के लिए होता है।
15. कोशिका सिद्धांत (Cell theory) किन वैज्ञानिकों ने दिया था?
उत्तर: कोशिका सिद्धांत 1838 में जर्मन वनस्पतिशास्त्री मैथियास श्लीडेन और 1839 में प्राणीविज्ञानी थिओडोर श्वान ने दिया था, जिसे बाद में 1855 में रुडोल्फ विरचो ने आगे बढ़ाया और बताया कि नई कोशिकाएं हमेशा पहले से मौजूद कोशिकाओं से ही बनती हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर:
1. एक कोशिका को अलग-अलग सांद्रता (concentration) वाले विलयनों (तनु और सांद्र) में रखने पर उस पर क्या प्रभाव पड़ता है? परासरण के संदर्भ में समझाइए।
उत्तर: जब किसी कोशिका को अलग-अलग विलयनों में रखा जाता है, तो परासरण (Osmosis) के कारण जल की गति होती है:
(i) अल्पपरासारी विलयन (Hypotonic): यदि कोशिका को ऐसे विलयन में रखें जहाँ बाहर जल की सांद्रता अधिक है (जैसे शुद्ध जल), तो जल कोशिका के अंदर प्रवेश कर जाता है। इस कारण कोशिका फूल जाती है।
(ii) अतिपरासारी विलयन (Hypertonic): यदि कोशिका को नमक या चीनी के सांद्र विलयन में रखा जाए (जहाँ बाहर जल की सांद्रता कम है), तो कोशिका के अंदर से जल बाहर निकल जाता है। इसके परिणामस्वरूप कोशिका सिकुड़ जाती है।
(iii) समपरासारी विलयन (Isotonic): जब बाहर और अंदर जल की सांद्रता बराबर होती है, तो जल का कोई शुद्ध प्रवाह नहीं होता और कोशिका का आकार वैसा ही रहता है।
2. पादप कोशिका और जंतु कोशिका के बीच मुख्य संरचनात्मक अंतर क्या हैं? विस्तार से वर्णन करें।
उत्तर: पादप कोशिका और जंतु कोशिका में निम्नलिखित प्रमुख अंतर होते हैं:
(i) कोशिका भित्ति: पादप कोशिका में प्लाज्मा झिल्ली के बाहर सेल्युलोज की बनी एक कठोर ‘कोशिका भित्ति’ होती है। जंतु कोशिका में कोशिका भित्ति नहीं पाई जाती, वे केवल प्लाज्मा झिल्ली से घिरी होती हैं।
(ii) लवक: पादप कोशिकाओं में भोजन बनाने और संग्रहित करने के लिए लवक (जैसे हरितलवक, क्रोमोप्लास्ट, ल्यूकोप्लास्ट) होते हैं। जंतु कोशिकाओं में लवक पूरी तरह अनुपस्थित होते हैं।
(iii) रसधानी: परिपक्व पादप कोशिका में एक बहुत बड़ी केन्द्रीय रसधानी होती है जो पानी और खनिजों का भंडारण कर कोशिका को दृढ़ रखती है। जंतु कोशिकाओं में रसधानियां या तो नहीं होतीं, और अगर होती भी हैं तो बहुत छोटी और अस्थायी होती हैं।
3. गॉल्जी उपकरण (Golgi apparatus) और अंतर्द्रव्यी जालिका (ER) मिलकर कोशिका में कैसे काम करते हैं?
उत्तर: अंतर्द्रव्यी जालिका (ER) और गॉल्जी उपकरण कोशिका में एक ‘निर्माण और परिवहन’ (Manufacturing and Shipping) प्रणाली की तरह काम करते हैं। अंतर्द्रव्यी जालिका (विशेषकर RER) का काम प्रोटीन बनाना है, जबकि SER वसा (लिपिड) और हार्मोन का निर्माण करती है। गॉल्जी उपकरण चपटी थैलियों जैसी संरचनाओं का समूह होता है जो अंतर्द्रव्यी जालिका से जुड़ा रहता है। जब ER में प्रोटीन या लिपिड बनते हैं, तो वे गॉल्जी उपकरण के पास आते हैं। गॉल्जी उपकरण एक ‘डाकघर’ की तरह काम करता है; यह इन प्रोटीनों और लिपिडों को रूपांतरित करता है, पुटिकाओं (Vesicles) में पैक करता है, और फिर उन्हें कोशिका के अंदर या बाहर जहाँ भी उनकी आवश्यकता होती है, वहां भेज (ट्रांसपोर्ट कर) देता है।
4. माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक (Chloroplast) को कोशिका के सबसे महत्वपूर्ण अंग क्यों माना जाता है? इनकी संरचना में क्या समानता है?
उत्तर: माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक दोनों ही कोशिका के जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि दोनों सीधे ऊर्जा से जुड़े हैं:
माइटोकॉन्ड्रिया: यह कोशिका का ‘ऊर्जा केंद्र’ है। यह ग्लूकोज को तोड़कर ATP (ऊर्जा की मुद्रा) उत्पन्न करता है जिससे शरीर के सारे कार्य होते हैं।
हरितलवक: यह पौधों के लिए भोजन बनाता है। इसमें पर्णहरित (क्लोरोफिल) होता है जो सूर्य के प्रकाश को सोखकर प्रकाश-संश्लेषण के जरिए भोजन (स्टार्च) का निर्माण करता है।
समानता: इन दोनों कोशिकांगों में एक बड़ी समानता यह है कि दोनों दोहरी झिल्ली वाले होते हैं। इसके अलावा, दोनों के पास अपना खुद का डीएनए (DNA) और राइबोसोम होता है, जिसकी वजह से ये अपने कुछ जरूरी प्रोटीन स्वयं बना सकते हैं (जो जीवाणुओं की विशेषता से मिलती-जुलती बात है)।
5. समसूत्री और अर्धसूत्री कोशिका विभाजन में क्या अंतर है, और शरीर में इनका क्या महत्व है?
उत्तर: कोशिका विभाजन वह प्रक्रिया है जिससे पुरानी कोशिकाओं से नई कोशिकाएं बनती हैं। इसके दो मुख्य प्रकार हैं:
(i) समसूत्री विभाजन (Mitosis): यह शरीर की सामान्य वृद्धि, मरम्मत और मृत कोशिकाओं को बदलने के लिए होता है। इसमें एक जनक कोशिका विभाजित होकर दो बिल्कुल समान संतति कोशिकाएं (Daughter cells) बनाती है। इन नई कोशिकाओं में गुणसूत्रों (Chromosomes) और DNA की संख्या जनक कोशिका के बराबर ही रहती है।
(ii) अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis): यह विभाजन केवल जनन अंगों (नर के वृषण और मादा के अंडाशय) में होता है, जिसका काम युग्मक (शुक्राणु और अंडाणु) बनाना है। इसमें कोशिका दो बार लगातार विभाजित होती है, जिससे एक जनक कोशिका से चार संतति कोशिकाएं बनती हैं। इसमें सबसे बड़ी खासियत यह है कि संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या जनक कोशिका की तुलना में घटकर आधी रह जाती है। यह लैंगिक जनन के दौरान आनुवंशिक विविधता लाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

