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NCERT Class 9 Science Chapter 12 जीवजगत का स्वरूप — विविधता एवं वर्गीकरण
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जीवजगत का स्वरूप — विविधता एवं वर्गीकरण
Chapter: 12
| TEXTUAL SOLUTIONS |
चिंतन कीजिए (Page No. 228)
1. जैव विविधता से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर: पृथ्वी पर असंख्य प्रकार के जीव पाए जाते हैं। नग्न आँखों से दिखाई न देने वाले सूक्ष्मदर्शीय जीवों से लेकर विशाल वृक्षों तक, और भिन्न-भिन्न पर्यावासों में जीवन असंख्य रूपों में पाया जाता है। जीवजगत की यह असीम विविधता ही ‘जैव विविधता’ (Biodiversity) कहलाती है।
2. विविधता को समझने के लिए जीवों का समूहन किस प्रकार हमारी सहायता करता है?
उत्तर: जीवों का समूहन (वर्गीकरण) सूचनाओं को व्यवस्थित करने, जीवों के बीच के संबंधों (वे एक-दूसरे से किस प्रकार संबंधित हैं) को समझने और जीवन का अधिक व्यवस्थित व क्रमबद्ध ढंग से अध्ययन करने में हमारी भारी सहायता करता है।
3. पादपों और जंतुओं को किस आधार पर वर्गीकृत किया जाता है?
उत्तर: पादपों और जंतुओं को मुख्य रूप से उनकी बाह्य और आंतरिक संरचनाओं, कोशिका के प्रकार (प्रोकैरियोटिक अथवा यूकैरियोटिक), संगठन के स्तर (एककोशिकीय अथवा बहुकोशिकीय), कोशिका भित्ति की उपस्थिति या अनुपस्थिति, और पोषण की विधि (स्वपोषी अथवा विषमपोषी) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
4. वर्गीकरण कृषि की समस्याओं को दूर करने में किस प्रकार सहायक है?
उत्तर: जीवों के वर्गीकरण के ज्ञान का उपयोग हम संधारणीय कृषि (sustainable agriculture) में कर सकते हैं। इससे कृषकों को उपयोगी विशेषताओं वाली फसलों (जैसे— सूखा सहिष्णुता, पीड़क प्रतिरोधकता और कम पोषक तत्वों वाली मृदा में उगने वाली फसलें) को पहचानने और संरक्षित करने में मदद मिलती है, जिससे फसल के नष्ट होने का जोखिम कम होता है और खाद्य सुरक्षा सुदृढ़ होती है।
सोचिए और बताइए (Page No. 231, 236, 238, 242 and 247)
1. यदि अनेक जीव समान विशेषताओं को साझा करते हैं तो क्या उनके वंशक्रम भी समान हो सकते हैं?
उत्तर: हाँ, यदि अनेक जीव समान विशेषताओं को साझा करते हैं, तो इसका अर्थ है कि वे एक ही पूर्वज से विकसित हुए हैं और उनके वंशक्रम (lineage/ancestry) भी समान हो सकते हैं।
2. एक कोशिकीय जीव अपने सभी जैव-प्रक्रम किस प्रकार करते हैं जबकि हमारे जैसे बहुकोशिकीय जीवों में समान कार्य करने के लिए अरबों कोशिकाओं की आवश्यकता होती है?
उत्तर: एककोशिकीय जीवों (जैसे अमीबा या पैरामीशियम) में केवल एक ही कोशिका होती है जो पोषण, गति, और जनन जैसे सभी आवश्यक जैविक कार्य स्वयं ही कर लेती है। जबकि बहुकोशिकीय जीवों (जैसे पादप और जंतु) में कार्य को सुचारू रूप से करने के लिए श्रम-विभाजन (division of labor) होता है, इसलिए उनमें विशिष्ट कार्यों के लिए अलग-अलग ऊतकों और अंगों की आवश्यकता होती है जो अरबों कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं।
3. पादपों की ऐसी कौन-सी विशेषताएँ हैं जो जल पर पादपों की निर्भरता को कम करती हैं परंतु इसके पश्चात भी नम परिस्थितियों की आवश्यकता बनी रहती है?
उत्तर: ब्रायोफाइटा (जैसे मॉस) और टेरिडोफाइटा (जैसे फर्न) जैसे पादपों में शरीर का विभेदन (जैसे मूलाभास/जड़, तना और पत्तियाँ) होता है जो उन्हें स्थल पर रहने में मदद करता है। लेकिन इनमें जनन (reproduction) के लिए नर कोशिकाओं को मादा कोशिकाओं तक तैर कर पहुँचने के लिए जल की आवश्यकता होती है, इसलिए इन्हें हमेशा नम परिस्थितियों की आवश्यकता बनी रहती है।
4. ऊँचे पादपों को विशेष परिवहन ऊतकों की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर: ऊँचे पादपों में आकार बड़ा होने के कारण जड़ से लेकर पत्तियों तक पूरे पौधे में जल और भोजन पहुँचाने के लिए केवल सामान्य प्रक्रियाएं काफी नहीं होतीं। इसलिए उन्हें विशेष संवहनी ऊतकों (जाइलम और फ्लोएम) की आवश्यकता होती है जो जल और भोजन का परिवहन करते हैं।
5. पादप कहाँ और कैसे जीवित रहेंगे इसे बीज और फल किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
उत्तर: बीज विकासशील भ्रूण की रक्षा करते हैं और उनमें पोषण (भोजन) संचित रहता है। वहीं फल, बीजों को नए-नए स्थानों तक फैलाने (प्रकीर्णन) में सहायक होते हैं। इससे पादपों को विविध प्रकार के पर्यावरणों में निवास करने और अपनी उत्तरजीविता बनाए रखने में बहुत मदद मिलती है।
6. एक केंचुआ (ऐनेलिडा) और एक शृंगी (आर्थ्रोपोडा) दोनों का शरीर खंडयुक्त होता है परंतु शृंगी का बहिःकंकाल कठोर होता है। शृंगी का बहिःकंकाल उसे जीवित रहने में किस प्रकार सहायता करता है?
उत्तर: शृंगी (आर्थ्रोपोडा) का कठोर बहिः कंकाल (बाह्य आवरण) उसे सुरक्षा प्रदान करता है, शरीर से जल की हानि को कम करता है और उसकी मांसपेशियों को अवलंब (सहारा) प्रदान करता है। इन्ही विशेषताओं के कारण ये शुष्क (dry) पर्यावरण में भी आसानी से जीवित रह पाते हैं।
7. क्या जैव विविधता शब्द का संबंध केवल जीवों की विविधता से है अथवा इसमें अन्य तत्व भी सम्मिलित हैं?
उत्तर: जैव विविधता का संबंध केवल जीवों (पादप, जंतु, सूक्ष्मजीव आदि) की असीम विविधता से ही नहीं है, बल्कि यह उन विविध पर्यावासों (habitats) और पारिस्थितिक तंत्रों (ecosystems) को भी सम्मिलित करता है जिनमें ये जीव पाए जाते हैं।
8. यदि आपको किसी तालाब में कोई नया जीव दिखाई देता है तो आप उसे वर्गीकृत करने के लिए उसकी किन विशेषताओं का अवलोकन करेंगे और क्यों?
उत्तर: उसे वर्गीकृत करने के लिए हम उसके बाह्य लक्षणों, कोशिका के प्रकार (प्रोकैरियोटिक या यूकैरियोटिक), कोशिका संरचना (कोशिका भित्ति है या नहीं), संगठन का स्तर (एककोशिकीय या बहुकोशिकीय), और पोषण की विधि (स्वपोषी या विषमपोषी) का अवलोकन करेंगे। इन विशेषताओं के आधार पर ही हम उसे पांच-जगत वर्गीकरण में सही स्थान पर रख सकते हैं।
9. आनुवंशिक अध्ययन सजीवों के संबंध में गहन जानकारी क्यों प्रदान करते हैं?
उत्तर: प्रत्येक जीव की कोशिका में आनुवंशिक पदार्थ (DNA) होता है। आनुवंशिक अध्ययन के माध्यम से वैज्ञानिक जीवों के DNA का विश्लेषण करते हैं, जिससे उनके बीच के विकासवादी संबंधों (evolutionary relationships) और वंशागत गुणों की समानताओं का स्पष्ट और सटीक पता चलता है।
10. जलवायु में होने वाले परिवर्तन जैव विविधता को किस प्रकार प्रभावित कर सकते हैं?
उत्तर: जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक पर्यावास नष्ट हो सकते हैं या बदल सकते हैं। यदि कोई जीव नई परिस्थितियों के अनुसार खुद को अनुकूलित (adapt) नहीं कर पाता है, तो उसकी आबादी कम होने लगती है और वह लुप्त भी हो सकता है, जिससे उस पर निर्भर अन्य जीवों और पूरी आहार श्रृंखला पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
अभ्यास प्रश्न
1. मीना और हरि ने अपने उद्यान में एक जंतु देखा। हरि ने उसे कीट कहा जबकि मीना ने कहा कि वह केंचुआ है। उस सही विकल्प को चुनिए जो यह पुष्ट करता है कि वह एक कीट है।
(i) द्विपार्श्व सममिति की काया।
(ii) संधित पाद वाली काया।
(iii) बेलनाकार काया।
(iv) कम खंडीभवन वाली काया।
उत्तर: (ii) संधित पाद वाली काया।
2. स्पंज, जंतु जगत की सबसे सरल शरीर-संरचना वाले जीवों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके शरीर में वास्तविक ऊतक और अंग नहीं होते हैं। स्पंज कोशिकाओं की कौन-सी विशेषता उसे जंतु जगत के अंतर्गत वर्गीकृत करने का आधार है?
(i) माइटोकॉन्ड्रिया की अनुपस्थिति।
(ii) प्रकाश संश्लेषण करने की क्षमता।
(iii) कोशिका झिल्ली की उपस्थिति।
(iv) कोशिका भित्ति की अनुपस्थिति।
उत्तर: (iv) कोशिका भित्ति की अनुपस्थिति।
3. अपने आस-पास के वातावरण में दो अलग-अलग जीवों का अवलोकन कीजिए। उनकी कौन-सी विशेषताएँ आपको उनमें अंतर करने में सहायता करती हैं? ये विशेषताएँ किस प्रकार से उन्हें भिन्न समूहों में रखने में सहायता प्रदान करती हैं?
उत्तर: उदाहरण के लिए, एक कुत्ता (जंतु) और एक गुलाब का पौधा (पादप)। कुत्ते में चलने-फिरने (चलन) की क्षमता होती है और वह भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर है (विषमपोषी)। दूसरी ओर, गुलाब का पौधा एक ही स्थान पर स्थिर रहता है और प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाता है (स्वपोषी)। ये मूलभूत विशेषताएँ कुत्ते को ‘जंतु जगत’ में और गुलाब को ‘पादप जगत’ में वर्गीकृत करने का आधार बनती हैं।
4. कोई वैज्ञानिक वर्गीकरण करने के लिए जाइलम और फ्लोएम की उपस्थिति की तुलना में कोशिकीय संगठन को अधिक मौलिक आधार बनाना किस प्रकार न्यायसंगत सिद्ध करता है?
उत्तर: कोशिकीय संगठन (अर्थात जीव प्रोकैरियोटिक है या यूकैरियोटिक, एककोशिकीय है या बहुकोशिकीय) जीवन का सबसे बुनियादी और प्रारंभिक स्तर है जो पृथ्वी के सभी जीवों पर लागू होता है। इसके विपरीत, जाइलम और फ्लोएम (संवहनी ऊतक) केवल उच्च पादपों (टेरिडोफाइटा और उसके आगे) तक ही सीमित हैं। इसलिए, संपूर्ण जीवजगत को वर्गीकृत करने के लिए कोशिकीय संगठन एक अधिक व्यापक और न्यायसंगत आधार है।
5. यदि आपको एक बिना नाम वाली स्लाइड पर ऐसा एककोशिकीय जीव मिले जिसमें सुस्पष्ट केंद्रक तथा अनेक पक्ष्माभ हैं तो उसके किस समूह का सदस्य होने की सर्वाधिक संभावना है? कारण बताइए।
उत्तर: इसकी सर्वाधिक संभावना प्रोटिस्टा (Protista) जगत का सदस्य (जैसे पैरामीशियम) होने की है। इसका कारण यह है कि यह जीव एककोशिकीय है और इसमें सुस्पष्ट (झिल्ली आबद्ध/वास्तविक) केंद्रक पाया जाता है, जो कि प्रोटिस्टा जगत के जीवों की मुख्य और प्राथमिक विशेषता है।
6. किसी पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन और स्थायित्व में जीवों की विविधता किस प्रकार योगदान देती है?
उत्तर: जीवों की जैव विविधता पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित और स्थिर रखती है क्योंकि प्रत्येक जीव की प्रकृति में अपनी एक अलग और महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उत्पादक (पौधे) भोजन बनाते हैं, उपभोक्ता (जंतु) उसे खाते हैं, और अपघटक (कवक/जीवाणु) मृत पदार्थों का पुनर्चक्रण करते हैं। विविधता जितनी अधिक होगी, पारिस्थितिक तंत्र पर्यावरणीय परिवर्तनों और आपदाओं को सहने में उतना ही अधिक सक्षम और सुदृढ़ होगा।
7. यदि सभी एककोशिकीय जीवों को एक ही जगत में रख दिया जाए तो कौन-कौन सी समस्याएँ उत्पन्न होंगी?
उत्तर: यदि सभी एककोशिकीय जीवों को एक साथ रख दिया जाए, तो प्रोकैरियोटिक (बिना केंद्रक वाले, जैसे जीवाणु) और यूकैरियोटिक (वास्तविक केंद्रक वाले, जैसे अमीबा) जीवों को एक ही समूह में रखना पड़ेगा। इससे जीवों की कोशिकीय जटिलता, पोषण विधि (स्वपोषी या विषमपोषी) और उनके विकासवादी संबंधों को समझना पूरी तरह से असंभव हो जाएगा।
8. विषाणुओं के विषय में आप पहले की कक्षाओं में पढ़ चुके हैं। इन्हें पाँच-जगत में से किसी के भी अंतर्गत क्यों नहीं रखा गया? कारण बताइए।
उत्तर: विषाणुओं (Viruses) को पाँच जगत प्रणाली में इसलिए नहीं रखा गया है क्योंकि वे अकोशिकीय (non-cellular) होते हैं। उनमें जीवन की मूलभूत इकाई ‘कोशिका’ का अभाव होता है और वे केवल किसी परपोषी (host) कोशिका के भीतर ही सजीवों की तरह व्यवहार करते हैं, जबकि बाहर वे निर्जीव अवस्था में रहते हैं।
9. यदि आप से पाँच वर्गीकरण में संशोधन करने के लिए कहा जाए तो क्या आप विषाणु को पृथक श्रेणी में रखेंगे या इस प्रणाली से बाहर रखेंगे? अपने उत्तर को उचित ठहराइए और स्पष्ट कीजिए कि यह वैज्ञानिक वर्गीकरण की विकासशील प्रकृति के संबंध में क्या संकेत देता है।
उत्तर: विषाणुओं को पाँच-जगत प्रणाली से बाहर एक “पृथक श्रेणी (अकोशिकीय जीवों)” में रखना अधिक उचित होगा क्योंकि यह वर्गीकरण कोशिकीय संगठन पर आधारित है। यह दर्शाता है कि वर्गीकरण कोई स्थिर प्रक्रिया नहीं है; जैसे-जैसे विज्ञान में नए सूक्ष्म जीवों (विषाणुओं आदि) की खोज और आनुवंशिक जानकारियाँ मिलती हैं, वर्गीकरण प्रणालियाँ भी उसी के अनुसार विकसित और परिवर्तित होती रहती हैं।
10. विषाणुओं में सजीवों की भाँति आनुवंशिक पदार्थ होता है परंतु इनमें कोशिकीय संगठन नहीं होता। इनकी कौन-सी विशेषताएँ इन्हें पाँच जगत प्रणाली के अंतर्गत रखे जाने से रोकती हैं? इस बात से हमें वर्गीकरण प्रणालियों की कमियों के विषय में क्या ज्ञात होता है?
उत्तर: विषाणुओं का अकोशिकीय होना, उनमें अपनी उपापचय (metabolic) प्रक्रिया का न होना, और केवल परपोषी के अंदर सक्रिय होना ही उन्हें पाँच-जगत में रखने से रोकता है। यह हमें बताता है कि कोई भी वर्गीकरण प्रणाली पूर्णतः परिपूर्ण नहीं होती है। प्रकृति में असीम विविधता है, और कुछ जीव हमेशा ऐसे अपवाद स्वरूप मिलते हैं जो मौजूदा वर्गीकरण के नियमों में फिट नहीं बैठते हैं।
11. टेरिडोफाइट और ब्रायोफाइट दोनों में पुष्प और बीज नहीं पाए जाते हैं तब भी इन्हें अलग-अलग समूहों में रखा गया है। इनकी मुख्य विशेषताओं के आधार पर इस वर्गीकरण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इन दोनों को अलग रखने का मुख्य कारण इनके शरीर की संरचना और परिवहन ऊतक हैं। ब्रायोफाइट (जैसे मॉस) में वास्तविक जड़, तना और पत्तियां नहीं होती हैं तथा जल और भोजन परिवहन के लिए संवहनी ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) अनुपस्थित होते हैं। दूसरी ओर, टेरिडोफाइट (जैसे फर्न) का शरीर वास्तविक जड़, तने और पत्तियों में बंटा होता है और इनमें सुविकसित संवहनी ऊतक (जाइलम/फ्लोएम) पाए जाते हैं।
12. वर्गीकरण पदानुक्रम में वर्ग अथवा वंश में से किस समूह में सदस्यों की संख्या कम होती है परंतु वे अधिक विशेषताएँ साझा करते हैं? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: वर्गीकरण पदानुक्रम में वंश (Genus) समूह में सदस्यों की संख्या ‘वर्ग (Class)’ की तुलना में बहुत कम होती है, परंतु वे आपस में अधिक विशेषताएँ साझा करते हैं। इसका कारण यह है कि जैसे-जैसे हम पदानुक्रम में ऊपर (जगत) से नीचे (जाति/वंश) की ओर आते हैं, जीवों की संख्या घटती है लेकिन उनके बीच की विकासवादी निकटता और शारीरिक समानताएँ बढ़ती जाती हैं।
13. एक वैज्ञानिक एक नए जीव की खोज करता है जिसमें चलन की क्षमता तथा स्वपोषी पोषण का गुण पाया जाता है। पाँच जगत वर्गीकरण के अनुसार कौन-सी विशेषताएँ वैज्ञानिक को इस जीव को प्रोटिस्टा कुल में रखने में सहायता करेंगी?
उत्तर: यदि उस नए जीव का शारीरिक संगठन एककोशिकीय (unicellular) है और उसकी कोशिका में सुस्पष्ट/वास्तविक केंद्रक (eukaryotic) मौजूद है, तो वैज्ञानिक उसे ‘प्रोटिस्टा’ जगत में रखेंगे (जैसे यूग्लीना, जो गति भी करता है और प्रकाश संश्लेषण से स्वपोषी भी है)।
14. एक शोधकर्ता ने एक एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीव की पहचान कवक के रूप में की है। पाँच जगत वर्गीकरण के अनुसार किसी एककोशिकीय जीव को जगत फंजाई में रखने के लिए आप कौन-सी पहचान कुंजी को सुझाएँगे?
उत्तर: उस एककोशिकीय जीव (जैसे यीस्ट) को फंजाई (कवक) जगत में रखने के लिए मुख्य पहचान कुंजी यह होगी कि उसकी कोशिका भित्ति ‘काइटिन (Chitin)’ की बनी होनी चाहिए और उसकी पोषण विधि स्वपोषी न होकर विषमपोषी (दूसरों से भोजन अवशोषित करने वाली) होनी चाहिए।
15. एक वैज्ञानिकीय पारिस्थितिकीय अध्ययन के दौरान विद्यार्थियों ने पाँच अलग-अलग पर्यावरण—एक अज्ञात जल के तालाब, मरी-गली लकड़ियों के आयाम तथा मृत जीवों की मिट्टी तथा जंतुओं के पाचन तंत्र से एकत्रित किए गए जीवों का परीक्षण किया। वैज्ञानिकों ने “जीवों” का प्रत्यक्षतः नामकरण करने के स्थान पर केवल उनकी संरचनात्मक, कोशिकीय तथा पोषण सम्बन्धी विशेषताओं को नीचे दी गई तालिका के आधार पर विश्लेषित किया।
| जीव | मुख्य अवलोकन |
| P | सूक्ष्मदर्शी, वास्तविक केन्द्रक अनुपस्थित, दृढ़ कोशिका आवरण, उच्च लवणता और तापमान में जीवित रहता है। |
| Q | बहुकोशिकीय, तंतुयुक्त काय, कोशिका भित्ति उपस्थित, परपोषित, मृत कार्बनिक पदार्थ पर वृद्धि करता है। |
| R | एककोशिकीय, वास्तविक केन्द्रक उपस्थित, संकुचनशील रिक्तिका उपस्थित, कशाभ द्वारा गति करता है, प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश-संश्लेषण करता है और प्रकाश की अनुपस्थिति में विषमपोषी बन जाता है। |
| S | बहुकोशिकीय, सुविभेदित ऊतक, मेरुदण्ड उपस्थित, जीवन की प्रारम्भिक अवस्था में जलचर संरचना। |
| T | एककोशिकीय, आनुवंशिक पदार्थ उपस्थित, परन्तु कोशिका के बाहर निष्क्रिय रहता है। |
विद्यार्थियों ने यह अनुभव किया कि कुछ जीवों को व्हिटेकर के पाँच जगत वर्गीकरण के अंतर्गत स्पष्ट रूप से रखा जा सकता है, जबकि कुछ इस वर्गीकरण की मूल अवधारणाओं को चुनौती देते हैं।
उपर्युक्त अध्ययन के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
(i) किसी एक ऐसे जीव की पहचान कीजिए जो स्पष्ट रूप से जगत फंजाई में सम्मिलित हो।
उत्तर: जीव ‘Q’ जगत फंजाई में सम्मिलित है, क्योंकि यह बहुकोशिकीय है, इसमें पर्णहरित अनुपस्थित है, और यह मृत कार्बनिक पदार्थों पर वृद्धि करता है (मृतपोषी)।
(ii) कौन-सा जीव जगत मोनेरा में सम्मिलित किया जाएगा?
उत्तर: जीव ‘P’ जगत मोनेरा में रखा जाएगा, क्योंकि इसमें वास्तविक केंद्रक अनुपस्थित (प्रोकैरियोटिक) है और यह सूक्ष्मदर्शीय है।
(iii) जीव ‘R’ और ‘Q’ दोनों यूकैरियोटिक हैं तब भी इन्हें अलग-अलग जगतों में सम्मिलित किया गया है। उन मानदंडों का विश्लेषण कीजिए जो इन्हें अलग करते हैं।
उत्तर: जीव ‘R’ एककोशिकीय है (अतः प्रोटिस्टा), जबकि जीव ‘Q’ बहुकोशिकीय है (अतः फंजाई)। इसके अलावा ‘R’ स्वपोषी/विषमपोषी दोनों हो सकता है, जबकि ‘Q’ पूर्णतः मृतपोषी (विषमपोषी) है।
(iv) समझाइए कि जीव ‘S’ का वर्गीकरण केवल पोषण की विधि के आधार पर क्यों नहीं किया जा सकता।
उत्तर: जीव ‘S’ में सुविभेदित ऊतक और मेरुदंड (कॉर्डेटा) उपस्थित है। केवल पोषण विधि के आधार पर वर्गीकृत करने से इसके शरीर की इस जटिल संरचना, अंगों के विकास और विकासवादी इतिहास की सही जानकारी नहीं मिल पाएगी।
(v) जीव ‘T’ पाँचों जगतों में से किसी में भी नहीं रखा जा सकता है। वर्गीकरण में प्रयुक्त कौन-सी मूलभूत विशेषता इसमें नहीं है?
उत्तर: जीव ‘T’ (विषाणु) ‘अकोशिकीय’ (non-cellular) है और परपोषी कोशिका के बाहर निष्क्रिय रहता है। इससे पता चलता है कि वर्गीकरण प्रणालियों की यह कमी है कि वे अकोशिकीय जीवों को स्थान नहीं दे पाती हैं।
(vi) यदि वर्गीकरण केवल पर्यावास के आधार पर किया गया होता तो किन जीवों को यथार्थ रूप से एक साथ समूहित किया जा सकता था?
उत्तर: यदि केवल पर्यावास (रहने की जगह) ही आधार होता, तो जल में रहने वाले जीव ‘R’, ‘S’ और जलीय पौधे सभी एक ही समूह में आ जाते, जिससे उनकी बनावट और आनुवंशिकी की भारी असमानताएँ छिप जातीं और वैज्ञानिक अध्ययन भ्रामक हो जाता।
(vii) कल्पना कीजिए कि वैज्ञानिकों ने एक नए जीव की खोज की है जो बहुकोशिकीय तथा यूकैरियोटिक है। उसमें पर्णहरित नहीं है और वह बाहर से किसी परपोषी से पोषक तत्व अवशोषित करता है। इसे फंजाई या एनिमेलिया में से किस जगत में सम्मिलित किया जाना चाहिए?
उत्तर: इसे फंजाई (कवक) जगत में रखा जाना चाहिए। क्योंकि यद्यपि एनिमेलिया भी बहुकोशिकीय, यूकैरियोटिक और विषमपोषी होते हैं, परंतु वे भोजन का अंतर्ग्रहण (ingestion/खाते हैं) करते हैं। जबकि यह जीव परपोषी से पोषक तत्वों को बाहर से अवशोषित (absorb) करता है, जो कि फंजाई जगत की प्रमुख विशेषता है।

