NCERT Class 7 Social Science Chapter 9 शासक से शासित तक – सरकार के प्रकार

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NCERT Class 7 Social Science Chapter 9 शासक से शासित तक – सरकार के प्रकार

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Chapter: 9

प्रश्न और क्रियाकलाप

1. आपने अध्याय में किस-किस प्रकार की सरकारों के बारे में पढ़ा? उनके नाम लिखिए।

उत्तर: अध्याय में हमने विभिन्न प्रकार की सरकारों के बारे में पढ़ा है। इनमें प्रमुख हैं—लोकतंत्र, राजतंत्र, धर्मतंत्र, अधिनायकतंत्र और अल्पतंत्र। हर शासन प्रणाली की अपनी विशेषताएँ और सीमाएँ होती हैं।

2. भारत में किस प्रकार की सरकार है और उसे ऐसा क्यों कहा जाता है?

उत्तर: भारत में लोकतांत्रिक सरकार है। इसे लोकतांत्रिक इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ जनता सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर अपने प्रतिनिधियों को चुनती है। चुने हुए प्रतिनिधि संसद और विधानसभाओं में जनता की ओर से निर्णय लेते हैं और सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी होती है।

3. आपने पढ़ा कि सभी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में स्वतंत्र न्यायपालिका होती है। न्यायपालिका का स्वतंत्र होना क्यों आवश्यक है? कोई तीन कारण बताइए।

उत्तर: लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वतंत्र न्यायपालिका का होना बहुत आवश्यक है-

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(i) यह सुनिश्चित करती है कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा हो।

(ii) यह सरकार के अन्य अंगों—विधायिका और कार्यपालिका—पर नियंत्रण रखती है ताकि वे मनमानी न करें।

(iii) यह सभी विवादों का निष्पक्ष निपटारा करती है और कानून के शासन को स्थापित करती है।

4. क्या आपको लगता है कि लोकतांत्रिक सरकार अन्य शासन प्रणालियों से बेहतर है? क्यों?

उत्तर: हाँ, लोकतांत्रिक सरकार अन्य शासन प्रणालियों से बेहतर है। इसके कारण निम्नलिखित हैं—

(i) जनता की भागीदारी: नागरिक अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करके शासन में सीधे भाग लेते हैं।

(ii) समानता और स्वतंत्रता: लोकतंत्र सभी नागरिकों को समान अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है।

(iii) जवाबदेही: यदि सरकार अच्छा काम नहीं करती, तो जनता चुनाव के माध्यम से उसे बदल सकती है।

(iv) पारदर्शिता: लोकतंत्र में निर्णय खुले तौर पर होते हैं और जनता को जानकारी का अधिकार मिलता है।

(v) जनकल्याण: लोकतांत्रिक सरकार का उद्देश्य सभी नागरिकों के हित और विकास को सुनिश्चित करना होता है।

5. नीचे कुछ देशों की शासन पद्धतियों से जुड़ी गतिविधियाँ दी गई हैं। क्या आप इनका मिलान संबंधित शासन प्रणाली से कर सकते हैं?

क्र. सं.देश में प्रचलित प्रथाशासन प्रणाली
1.सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समान रूप से देखा जाता है।अधिनायकतंत्र
2.सरकार प्रत्येक निर्णय के लिए धार्मिक नेताओं से परामर्श करती है।राजतंत्र
3.शासक की मृत्यु के बाद उसका पुत्र राजा बनता है।लोकतंत्र
4.शासक किसी प्रकार के संविधान का अनुपालन करने के लिए बाध्य नहीं है। वह सभी निर्णय अपनी इच्छा के अनुसार लेता है।धर्मतंत्र

उत्तर:

क्र. सं.देश में प्रचलित प्रथाशासन प्रणाली
1.सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समान रूप से देखा जाता है।लोकतंत्र
2.सरकार प्रत्येक निर्णय के लिए धार्मिक नेताओं से परामर्श करती है।धर्मतंत्र
3.शासक की मृत्यु के बाद उसका पुत्र राजा बनता है।राजतंत्र
4.शासक किसी प्रकार के संविधान का अनुपालन करने के लिए बाध्य नहीं है। वह सभी निर्णय अपनी इच्छा के अनुसार लेता है।अधिनायकतंत्र

6. नीचे कुछ देशों के नाम दिए गए हैं। पता लगाइए कि इनमें कौन-सी शासन व्यवस्था प्रचलित है-

क्र. संदेशशासन प्रणाली
1.भूटान
2.नेपाल 
3.बांग्लादेश 
4.दक्षिण अफ्रीका 
5.ब्राजील 

उत्तर:

क्र. संदेशशासन प्रणाली
1.भूटानसंवैधानिक राजतंत्र
2.नेपाल लोकतंत्र
3.बांग्लादेश लोकतंत्र
4.दक्षिण अफ्रीका लोकतंत्र
5.ब्राजील लोकतंत्र

7. लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में लोकतंत्र के आदर्शों और मूल्यों को प्राप्त करने में कौन-कौन सी बाधाएँ आ सकती हैं? उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है?

उत्तर: लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में लोकतंत्र के आदर्शों और मूल्यों को प्राप्त करने में कई बाधाएँ सामने आ सकती हैं–

बाधाएँ:

(i) भ्रष्टाचार: जब नेता या अधिकारी सत्ता का दुरुपयोग करते हैं, तो जनता का विश्वास लोकतंत्र पर कमज़ोर पड़ता है।

(ii) आर्थिक असमानता: अमीर और गरीब के बीच बड़ा अंतर होने से समान अवसर नहीं मिल पाते है।

(iii) शक्तिशाली समूहों का दबाव: कुछ लोग या संगठन लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अनुचित प्रभाव डाल सकते हैं।

(iv) न्यायपालिका की निर्भरता: यदि न्यायपालिका स्वतंत्र न रहे, तो न्याय और कानून का पालन प्रभावित होता है।

(v) मीडिया का दुरुपयोग: गलत सूचना और अफवाहें फैलाकर जनता को गुमराह किया जा सकता है।

उपाय:

(i) पारदर्शिता और सख़्ती: सरकार को भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और अपने कार्यों में पारदर्शिता रखनी चाहिए।

(ii) समान अवसर: शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार की सुविधाएँ सभी नागरिकों को समान रूप से दी जानी चाहिए।

(iii) जन-जागरूकता: नागरिकों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जागरूक करना चाहिए।

(iv) स्वतंत्र संस्थाएँ: लोकतांत्रिक संस्थाओं और न्यायपालिका को स्वतंत्र और मजबूत बनाए रखना चाहिए।

(v) मीडिया की स्वतंत्रता: स्वतंत्र, निष्पक्ष और जिम्मेदार मीडिया को प्रोत्साहन देना चाहिए ताकि जनता तक सही जानकारी पहुँचे।

8. लोकतंत्र, राजतंत्र और अधिनायकतंत्र से किस प्रकार भिन्न है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: लोकतंत्र, राजतंत्र और अधिनायकतंत्र शासन प्रणालियाँ कई आधारों पर एक-दूसरे से भिन्न हैं।

(i) शक्ति का स्रोत:

लोकतंत्र: शक्ति का स्रोत जनता होती है, जो अपने प्रतिनिधियों को चुनाव के माध्यम से चुनती है।

राजतंत्र: सत्ता राजा या रानी के पास होती है और यह सामान्यतः वंशानुगत रूप से आगे बढ़ती है।

अधिनायकतंत्र: शक्ति एक व्यक्ति या छोटे समूह के पास केंद्रित होती है, जो बिना किसी संवैधानिक नियंत्रण के शासन करता है।

(ii) नागरिकों की भागीदारी:

लोकतंत्र: नागरिकों को मतदान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समानता का अधिकार प्राप्त होता है।

राजतंत्र: नागरिकों की भागीदारी सीमित होती है, विशेषकर निरंकुश राजतंत्र में।

अधिनायकतंत्र: नागरिकों को अधिकार नहीं मिलते और उनकी भागीदारी लगभग शून्य होती है।

(iii) जवाबदेही:

लोकतंत्र: सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी होती है और चुनावों के माध्यम से बदली जा सकती है।

राजतंत्र: संवैधानिक राजतंत्र में सरकार कुछ हद तक जनता के प्रति जवाबदेह होती है, लेकिन निरंकुश राजतंत्र में राजा किसी के प्रति उत्तरदायी नहीं होता।

अधिनायकतंत्र: शासक किसी के प्रति जवाबदेह नहीं होता और मनमाने ढंग से निर्णय लेता है।

(iv) स्वतंत्रता और समानता:

लोकतंत्र: सभी नागरिकों को समानता और स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त होता है।

राजतंत्र: स्वतंत्रता और समानता सीमित हो सकती है, खासकर निरंकुश राजतंत्र में।

अधिनायकतंत्र: नागरिकों को स्वतंत्रता और समानता से वंचित रखा जाता है।

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