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NCERT Class 7 Social Science Chapter 10 भारत का संविधान – एक परिचय
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भारत का संविधान – एक परिचय
Chapter: 10
| प्रश्न और क्रियाकलाप |
1. ‘संविधान सभा में भारत के विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के प्रतिनिधि सम्मिलित थे।’ आपके अनुसार ऐसा होना क्यों महत्वपूर्ण था?
उत्तर: संविधान सभा में भारत के विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के प्रतिनिधियों का सम्मिलित होना इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि भारत विविधताओं से भरा देश है। यहाँ अलग-अलग भाषाएँ, धर्म, जातियाँ, संस्कृतियाँ और परंपराएँ हैं। यदि संविधान केवल किसी एक वर्ग या क्षेत्र के प्रतिनिधियों की राय से बनाया जाता, तो वह सभी नागरिकों के लिए न्यायपूर्ण और स्वीकार्य नहीं हो पाता। सभी वर्गों की सहभागिता ने संविधान को अधिक लोकतांत्रिक और सर्वसमावेशी बनाया। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि हर क्षेत्र और समाज की आवश्यकताओं, आकांक्षाओं और समस्याओं को ध्यान में रखकर संविधान तैयार किया जाए। यही कारण है कि भारतीय संविधान न केवल कानूनों का प्रलेख है, बल्कि पूरे देश की एकता और विविधता का भी प्रतिबिंब है।
2. नीचे दिए गए कथनों को ध्यान से पढ़िए और पहचानिए कि इनमें भारतीय संविधान की कौन-कौन सी प्रमुख विशेषताएँ या मूल्य दिखाई देते हैं-
(क) शीना, रजत और हर्ष एक पंक्ति में खड़े हैं। वे आम चुनावों में अपना पहला वोट डालने के लिए उत्साहित हैं।
उत्तर: शीना, रजत और हर्ष का आम चुनावों में वोट डालने जाना यह दर्शाता है कि भारत में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार लागू है। यह हमारे संविधान का मूल सिद्धांत है, जिससे हर नागरिक को समान रूप से राजनीतिक भागीदारी का अधिकार मिलता है।
(ख) राधा, इमोन और हरप्रीत एक ही विद्यालय की एक ही कक्षा में पढ़ते हैं।
उत्तर: राधा, इमोन और हरप्रीत का एक ही विद्यालय और कक्षा में पढ़ना इस बात को दर्शाता है कि शिक्षा में समानता और समान अवसर का अधिकार सभी को प्राप्त है। यह हमारे संविधान में निहित समानता के अधिकार को स्पष्ट करता है।
(ग) माता-पिता को अपने बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था करनी चाहिए।
उत्तर: माता-पिता का अपने बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करना संविधान में निहित मौलिक कर्तव्य तथा अनुच्छेद 21-ए के अंतर्गत दिया गया शिक्षा का अधिकार है। इससे शिक्षा को नागरिकों का अधिकार और समाज की ज़िम्मेदारी दोनों माना गया है।
(घ) गाँव के कुएँ का उपयोग सभी जाति, धर्म और लिंग के लोग कर सकते हैं।
उत्तर: गाँव के कुएँ का उपयोग सभी जाति, धर्म और लिंग के लोग कर सकते हैं, यह समानता का अधिकार और सामाजिक न्याय का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि किसी भी संसाधन का उपयोग करते समय किसी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है।
3. यह कहा जाता है कि ‘भारत में सभी नागरिक कानून के समक्ष समान है।’ क्या आपको लगता है कि यह एक सच्चाई है? यदि हाँ, तो क्यों? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? तों के साथ उत्तर दीजिए।
उत्तर: संविधान में स्पष्ट किया गया है कि भारत के सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं। अनुच्छेद 14 में प्रावधान है कि किसी भी नागरिक के साथ जाति, धर्म, लिंग या वर्ग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा। सिद्धांत रूप में यह एक सच्चाई है क्योंकि हर व्यक्ति को समान अधिकार प्राप्त हैं और न्यायालय में सभी समान माने जाते हैं। हालाँकि, व्यवहारिक जीवन में अभी भी कई बार सामाजिक असमानताएँ, जातिगत भेदभाव और आर्थिक विषमताएँ देखने को मिलती हैं। इसका अर्थ यह है कि संविधान ने समानता का आदर्श तो स्थापित कर दिया है, लेकिन हमें सामाजिक सुधारों, शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से इसे पूर्ण रूप से लागू करना होगा।
4. आपने पढ़ा कि ‘भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिसने आरंभ से ही अपने नागरिकों को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार प्रदान किया। क्या आप बता सकते हैं कि भारत ने ऐसा क्यों किया?
उत्तर: भारत ने आरंभ से ही अपने नागरिकों को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार प्रदान किया क्योंकि संविधान निर्माताओं का विश्वास था कि लोकतंत्र तभी सशक्त और सफल होगा जब हर नागरिक को समान राजनीतिक अधिकार मिलें। भारत एक विशाल और विविधताओं से भरा देश है, जहाँ जाति, धर्म, भाषा और लिंग के आधार पर समाज बँटा हुआ था। ऐसे में यदि केवल अमीरों, शिक्षितों या किसी विशेष वर्ग को ही मताधिकार मिलता, तो लोकतंत्र अधूरा रह जाता। इसलिए यह आवश्यक था कि हर वयस्क नागरिक, चाहे वह गरीब हो या अमीर, पुरुष हो या महिला, किसी भी धर्म या जाति से संबंध रखता हो, उसे वोट देने का अधिकार मिले।
इसके अलावा, स्वतंत्रता संग्राम ने हमें समानता और स्वतंत्रता का महत्व सिखाया था। स्वतंत्रता के लिए लड़ी गई लंबी लड़ाई में सभी वर्गों और समुदायों ने योगदान दिया था, इसलिए सबको शासन में भागीदारी का अवसर मिलना ही न्यायसंगत था। यही कारण है कि 1950 में संविधान लागू होते ही भारत ने 21 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों को मतदान का अधिकार दिया (बाद में इसे घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया)। यह निर्णय भारत की लोकतांत्रिक भावना, समानता के आदर्श और नागरिक अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
5. स्वतंत्रता संग्राम ने भारतीय संविधान के निर्माण को कैसे प्रेरित किया? भारतीय सभ्यता की विरासत ने संविधान की किन प्रमुख विशेषताओं को किस प्रकार प्रेरित किया? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: स्वतंत्रता संग्राम ने भारतीय संविधान को लोकतंत्र, समानता और न्याय के आदर्शों से प्रेरित किया। अंग्रेजों के दमनकारी कानूनों के अनुभव से मौलिक अधिकारों की आवश्यकता समझी गई। गांधीजी के अहिंसा और सत्याग्रह ने शांति व नैतिकता की दिशा दी, वहीं किसानों-मजदूरों और दलितों की भागीदारी से सामाजिक-आर्थिक न्याय पर बल दिया गया।
भारतीय सभ्यता की विरासत ने संविधान को धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र, समानता और न्याय की दिशा दी। प्राचीन गणराज्यों ने लोकतंत्र को प्रेरित किया, संतों व सुधारकों की शिक्षाओं से सामाजिक न्याय और समानता के प्रावधान जुड़े, गांधीजी के विचारों से अहिंसा व नैतिकता आई, और बहुभाषी-सांस्कृतिक परंपरा से भाषा व संस्कृति की स्वतंत्रता सुनिश्चित हुई।
6. क्या आपको लगता है कि हम एक समाज के रूप में संविधान के सभी आदर्शों को प्राप्त कर चुके हैं? यदि नहीं, तो एक नागरिक के रूप में हम में से प्रत्येक क्या कर सकता है जिससे कि हमारा देश इन आदशों के और निकट पहुँच सके?
उत्तर: नहीं, हम अभी तक एक समाज के रूप में संविधान के सभी आदर्शों को पूरी तरह प्राप्त नहीं कर पाए हैं। हमारे संविधान में समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व जैसे मूल मूल्य निर्धारित किए गए हैं, लेकिन व्यवहार में कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं। उदाहरण के लिए, आज भी कई क्षेत्रों में जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव देखने को मिलता है। गरीबी और अशिक्षा के कारण बहुत से लोग अपने मौलिक अधिकारों का उपयोग नहीं कर पाते। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय जैसे लक्ष्यों को पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सका है।
एक नागरिक के रूप में हमारी भूमिका:
(i) जागरूकता फैलाना: हमें अपने अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में स्वयं जानना चाहिए और दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करना चाहिए।
(ii) पर्यावरण संरक्षण: पेड़ लगाना, जल संरक्षण करना और प्रदूषण कम करना हमारी जिम्मेदारी है।
(iii) समानता को बढ़ावा देना: हमें हर व्यक्ति के साथ सम्मान और समानता का व्यवहार करना चाहिए, चाहे वह किसी भी जाति, धर्म या लिंग का हो।
(iv) लोकतंत्र में भागीदारी: मतदान करना और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त करना लोकतंत्र को मजबूत करता है।
(v) शिक्षा और सहयोग: हमें जरूरतमंद बच्चों और लोगों की शिक्षा तथा मूलभूत आवश्यकताओं में मदद करनी चाहिए।
7. अगले पृष्ठ पर दी गई शब्द-पहेली को भारतीय संविधान की महत्वपूर्ण अवधारणाओं का प्रयोग करते हुए हल कीजिए।
ऊपर से नीचे-
2. वे अधिकार जो हर नागरिक को मिलते हैं, जैसे जैसे – – स्वतंत्रता स्वतंत्रता और समानता का अधिकार।
उत्तर: मौलिक अधिकार।
1. वह गैस जिसमें मूल संविधान की प्रति सुरक्षित रखी गई है।
उत्तर: नाइट्रोजन या हीलियम गैस।
4. लोगों का वह समूह जिसने भारतीय संविधान तैयार किया।
उत्तर: संविधान सभा।
7. संविधान का आरंभिक कथन, जो वे मूल्य व आदर्श बताता है, जिनका वह संरक्षण करता है।
उत्तर: न्यायपालिका।
बाएँ से दाएँ
6. वह प्रकिया जो संविधान में परिवर्तन के लिए प्रयोग की जाती है।
उत्तर: संविधान संशोधन।
5. सरकार का अंग, जो कानून बनाता है।
उत्तर: विधायिका।
8. सरकार का अंग, जो कानून को क्रियान्वित करता है।
उत्तर: कार्यपालिका।
3. संविधान का वह भाग जो नागरिकों के कर्तव्य को दर्शाता है।
उत्तर: भाग IV-A

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