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NCERT Class 7 Social Science Chapter 3 भारत की जलवायु
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भारत की जलवायु
Chapter: 3
| प्रश्न और क्रियाकलाप |
1. जलवायु के कारकों का उनके प्रभावों के साथ निम्नलिखित सूची में मिलान कीजिए-
| अ | ब |
| (1) अक्षांश | (क) भारत में गर्मी के दौरान नमीयुक्त पवन को लाता है। |
| (2) ऊँचाई | (ख) उत्तर एवं दक्षिण में अलग-अलग जलवायु बनाता है। |
| (3) समुद्र से निकटता | (ग) ऊँचे स्थानों को अधिक ठंडा रखता है। |
| (4) मानसूनी पवन | (घ) तापमान को प्रभावित करता है। |
उत्तर:
| अ | ब |
| (1) अक्षांश | (ख) उत्तर एवं दक्षिण में अलग-अलग जलवायु बनाता है। |
| (2) ऊँचाई | (ग) ऊँचे स्थानों को अधिक ठंडा रखता है। |
| (3) समुद्र से निकटता | (घ) तापमान को प्रभावित करता है। |
| (4) मानसूनी पवन | (क) भारत में गर्मी के दौरान नमीयुक्त पवन को लाता है। |
2. नीचे दिए गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए-
(क) मौसम और जलवायु में क्या अंतर है?
उत्तर: मौसम और जलवायु में यह अंतर है-
मौसम किसी स्थान पर कुछ घंटों या दिनों का तात्कालिक वातावरण है—जैसे आज धूप, कल बादल, परसों बारिश; यह जल्दी बदलता रहता है। इसके विपरीत, जलवायु किसी क्षेत्र में दशकों तक देखे गए तापमान, वर्षण और पवन के औसत प्रतिरूप का नाम है; यानी दीर्घकालिक स्वभाव। सरल शब्दों में, मौसम रोज़ बदलता है, जलवायु लंबे समय में बनने वाला उसका स्थायी “चरित्र” है।
(ख) समुद्र के निकट स्थित स्थानों का तापमान समुद्र से दूर स्थित स्थानों की तुलना में कम क्यों होता है?
उत्तर: समुद्र की ऊष्मा-क्षमता अधिक होने से वह धीरे-धीरे गरम और ठंडा होता है, इसलिए तटीय क्षेत्रों में तापमान का उतार-चढ़ाव सीमित रहता है। समुद्री और स्थलीय बयार का दैनिक चक्र भी तापमान को संतुलित करता है, जिससे तटीय शहरों में ताप-परिसर (अधिकतम–न्यूनतम का अंतर) कम हो जाता है।
(ग) भारतीय जलवायु को प्रभावित करने में मानसूनी पवन की क्या भूमिका है?
उत्तर: दक्षिण-पश्चिम मानसून जून से नमीदार पवनें भारत में लाता है, पर्वत-मालाओं से टकराकर वर्षा कराता है, नदियाँ भरती हैं और कृषि को जल मिलता है—यही भारत की खाद्य और जल-आधारित अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। शीतकाल में उत्तर-पूर्व मानसून भूमि से समुद्र की ओर बहता है; इसका एक भाग बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर तमिलनाडु आदि में वर्षा भी कराता है। इस प्रकार मानसून देश की वर्षा-वितरण, कृषि चक्र और आजीविका को निर्णायक रूप से प्रभावित करता है।
(घ) चेन्नई पूरे वर्ष गर्म क्यों रहता है, जबकि लेह ठंडा रहता है?
उत्तर: चेन्नई निम्न अक्षांश पर समुद्र के बिलकुल पास है, इसलिए साल भर समुद्रीय प्रभाव व नमी के कारण वहाँ मौसम गर्म और आर्द्र रहता है तथा ताप-परिसर कम होता है। दूसरी ओर, लेह अत्यधिक ऊँचाई पर स्थित है; ऊँचाई के साथ वायुदाब/घनत्व घटते हैं और तापमान कम होता है, इसलिए लेह का मौसम अधिकांश समय ठंडा और शुष्क रहता है।
3. इस पुस्तक के अंत में दिए गए भारत के मानचित्र को देखिए। लेह, चेन्नई, दिल्ली, पणजी, इन शहरों की जलवायु को पहचानिए।
क्या यह स्थान समुद्र के समीप हैं, पर्वत पर हैं या रेगिस्तान में हैं?
ये कारक वहाँ की जलवायु को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं करें।
4. भारत के मानचित्र पर गर्मी और सर्दी के मानसून चक्र को प्रदर्शित कीजिए।
गर्मियों और सर्दियों में पवनें कहाँ चलती हैं, इसके प्रतीक लगाइए।
मानसून के दौरान पवनों की दिशा दिखाइए–
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं करें।
5. भारत में कृषि और मौसम से जुड़े त्योहारों (जैसे बैसाखी, ओणम) को दिखाते हुए एक रंगीन पोस्टर बनाइए। इन त्योहारों की तस्वीरें या रेखाचित्र लगाइए।
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं करें।
6. कल्पना कीजिए कि आप भारत में एक किसान हैं। बरसात के मौसम के लिए आप कैसे तैयारी करेंगे? इस बारे में डायरी में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर: “बरसात निकट है, इसलिए मैंने खेत की मेड़ों को दुरुस्त कर जल निकासी की नालियाँ साफ कर दीं, जिससे अतिवृष्टि में जलभराव न हो। धान की नर्सरी हेतु बीज उपचार कर लिया और मृदा-परीक्षण के अनुसार खाद की संतुलित योजना बनाई है। तिरपाल, बोरियाँ और गोदाम की मरम्मत पूरी कर ली; कीट-रोकथाम के लिए फेरोमोन ट्रैप लगा दिए। मौसम चेतावनियाँ रोज़ देख रहा हूँ, ताकि रोपाई का समय वर्षा-खिड़कियों के अनुरूप तय कर सकूँ। सौर पंप/डिजल पंप की सर्विस हो गई और फसल बीमा का फॉर्म भी भर दिया है। उम्मीद है, अच्छा मानसून आएगा तो गाँव में हरियाली, खेत में पानी और घरों में खुशहाली लौटेगी।”
7. किसी प्राकृतिक आपदा (जैसे चक्रवात, बाढ़, भूस्खलन या दावानल) की पहचान कीजिए और एक छोटा निबंध लिखिए, जिसमें इसके कारण और प्रभाव सम्मिलित हों। ऐसे सुझाव दीजिए जो व्यक्ति, समुदाय और सरकार को इस आपदा के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
उत्तर: भारत जैसे मानसूनी देश में बाढ़ एक आवर्ती प्राकृतिक आपदा है, जिसका प्रमुख कारण अतिवृष्टि, नदी-तंत्र का भराव, तलछट/अतिक्रमण, अनियोजित शहरीकरण तथा पर्वतीय क्षेत्रों में हिमनदीय विस्फोट हैं। बाढ़ मानव-जीवन, फसलों और पशुधन की हानि, जलजनित रोगों के प्रसार, सड़क–पुल–बिजली–पेयजल जैसे आधारभूत ढाँचे की क्षति और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं के अवरोध का कारण बनती है; शहरों में जलनिकासी पर दबाव और कंक्रीट सतहें समस्या को बढ़ाती हैं। समाधान के लिए व्यक्ति-स्तर पर सुरक्षित ऊँचे स्थान, आपदा-किट और शुद्ध पेयजल का प्रबंध; समुदाय-स्तर पर बाढ़-मानचित्र, चेतावनी तंत्र और सामुदायिक आश्रय; तथा शासन-स्तर पर नदी-क्षमता पुनर्स्थापन, तटबंधों का वैज्ञानिक रख-रखाव, बाढ़-मैदानी ज़ोनिंग, आर्द्रभूमि/झीलों का पुनर्जीवन और अर्ली-वॉर्निंग सिस्टम की मजबूती आवश्यक है। प्रकृति-आधारित समाधानों और वैज्ञानिक नियोजन के मेल से बाढ़ के जोखिम को घटाया जा सकता है, भले ही उसे पूर्णतः रोका न जा सके।

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