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NCERT Class 7 Social Science Chapter 15 साम्राज्य और राज्य: छठी से 10वीं शताब्दी
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साम्राज्य और राज्य: छठी से 10वीं शताब्दी
Chapter: 15
| Part – 2 |
महत्त्वपूर्ण प्रश्न
1. इस काल को किन प्रमुख परिवर्तनों के लिए जाना जाता है?
उत्तर: प्रमुख परिवर्तन-
(i) क्षेत्रीय शक्तियों और सामंतवाद का उदय: गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद भारत में छोटे और विकेंद्रीकृत राज्यों का उदय हुआ, जहाँ राजाओं के साथ-साथ ‘सामंत’ नामक अधीन शासकों का शासन था।
(ii) सामाजिक एवं भाषाई विकास: यह काल क्षेत्रीय सुदृढ़ीकरण और नए सामाजिक-राजनीतिक समूहों के गतिशील एकीकरण का युग था। इस दौरान संस्कृत और क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्य का भारी उत्कर्ष हुआ।
(iii) धार्मिक संक्रमण: इस काल में बौद्ध धर्म का अन्य क्षेत्रों में धीरे-धीरे ह्रास हुआ, जबकि तांत्रिक मतों, मंदिर-केंद्रित हिंदू धर्म और व्यक्तिगत ‘भक्ति परंपरा’ का व्यापक प्रसार हुआ।
2. इस काल के राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक घटनाक्रमों ने किस प्रकार भारत को प्रभावित किया?
उत्तर: राजनैतिक प्रभाव: उत्तर भारत के समृद्ध केंद्र कन्नौज पर नियंत्रण पाने के लिए पूर्व के पाल, पश्चिम के गुर्जर-प्रतिहार और दक्कन के राष्ट्रकूटों के बीच लंबे समय तक ‘त्रिपक्षीय संघर्ष’ चला। दक्षिण में चोलों ने एक अत्यंत कुशल प्रशासन और शक्तिशाली नौसेना पर आधारित साम्राज्य खड़ा किया।
सांस्कृतिक प्रभाव: कला और वास्तुकला को नया आयाम मिला; जैसे राष्ट्रकूटों द्वारा एलोरा के विशाल कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण और चोल काल की प्रसिद्ध कांस्य नटराज प्रतिमा। शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विक्रमशिला और नालंदा जैसे महान बौद्ध महाविहारों को संरक्षण दिया गया।
धार्मिक प्रभाव: दक्षिण से शुरू हुई भक्ति परंपरा ने पूरे भारत में ईश्वर के साथ सीधे संबंध पर बल दिया। आदि शंकराचार्य ने अद्वैत दर्शन प्रतिपादित किया और देश के चारों कोनों में प्रसिद्ध मठों की स्थापना की शासकों ने हिंदू, बौद्ध और जैन मतों को समान संरक्षण देकर जीवंत सांस्कृतिक बहुलवाद को जीवित रखा।
3. इस काल के विदेशी आक्रमणों एवं अंतर्क्रियाओं का भारतीय समाज एवं राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: हूणों का आत्मसातीकरण: मध्य एशिया के हूणों ने गुप्त साम्राज्य को कमजोर किया, लेकिन छठी शताब्दी में गंगा के मैदानों में प्रवेश करने पर उन्हें औलीकर वंश ने पराजित किया। सातवीं शताब्दी तक हूण पूरी तरह भारतीय समाज में समाहित हो गए, प्रशासनिक पदों पर काम किया, संस्कृत-प्राकृत भाषा को अपनाया और हिंदू देवी-देवताओं (लक्ष्मी, शिव, विष्णु) के प्रतीकों वाले सिक्के चलाए।
अरबों का आक्रमण और प्रतिरोध: अरबों द्वारा सिंध पर किए गए आक्रमणों को भारतीय शासकों (जैसे गुर्जर-प्रतिहार नागभट्ट प्रथम और कश्मीर के ललितादित्य मुक्तापीड) के कड़े सैन्य प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। तीन शताब्दियों के प्रयासों के बाद भी अरबों का नियंत्रण केवल सिंध और पंजाब के सीमित क्षेत्रों तक रहा।
सांस्कृतिक और वैज्ञानिक आदान-प्रदान: इस अंतर्क्रिया के फलस्वरूप भारत की शून्य और दशमलव प्रणाली को अरबों ने अपनाया। इसके अलावा गणित, ज्योतिष और आयुर्वेद के कई संस्कृत ग्रंथों का बग्दाद में अरबी भाषा में अनुवाद किया गया।
प्रश्न और क्रियाकलाप
1. यदि आप पालों, प्रतिहारों और राष्ट्रकूटों के संघर्ष के समय कन्नौज में प्रवास करते तो आपका दैनिक जीवन किस प्रकार प्रभावित होता? शासकों के विषय में आपके आकलन को इसने कैसे बदला होता? कांचीपुरम में रह रहे अपने एक मित्र को इस विषय में एक पत्र लिखिए।
उत्तर: प्रिय मित्र (कांचीपुरम), कांची से विदा होकर जब से मैं कन्नौज (कान्यकुब्ज) आया हूँ, यहाँ का जीवन पूरी तरह बदल गया है। वर्तमान में यह नगर पाल, प्रतिहार और राष्ट्रकूट राजवंशों के बीच वर्चस्व के भीषण ‘त्रिपक्षीय संघर्ष’ की आग में झुलस रहा है।
यहाँ का दैनिक जीवन भय और अनिश्चितता से भरा है। बार-बार बदलते शासकों के कारण करों का भारी बोझ हम नागरिकों पर आ गया है और बाजारों में आवश्यक वस्तुओं की भारी किल्लत है। शासकों के विषय में मेरा पूर्व का आकलन पूरी तरह बदल गया है। पहले मैं इन्हें केवल कला, साहित्य और मंदिरों का उदार संरक्षक समझता था। परंतु युद्ध की इस विभीषिका को निकट से देखने के बाद अब मैं इन्हें ऐसे महत्वाकांक्षी योद्धाओं के रूप में देखता हूँ, जो अपनी साम्राज्यवादी भूख शांत करने के लिए प्रजा के सुख-चैन और राष्ट्र की संपदा की बलि चढ़ाने से भी पीछे नहीं हटते। ईश्वर करे हमारे दक्षिण में चोल और पल्लव सीमांतों पर ऐसी अराजकता न हो। तुम्हारा प्रिय मित्र, कन्नौज का एक प्रवासी नागरिक।
2. इस काल में सम्राटों और राजाओं का नियंत्रण मुख्य क्षेत्रों पर ही होता था और अन्य क्षेत्रों का शासन अधीनस्थ प्रमुखों के द्वारा होता था। ऐसी व्यवस्था के क्या लाभ एवं क्या चुनौतियाँ रही होंगी?
उत्तर: इस कालखंड में राजा मुख्य क्षेत्रों पर प्रत्यक्ष शासन करते थे और शेष क्षेत्रों को ‘सामंतों’ के माध्यम से नियंत्रित करते थे।
इस व्यवस्था के प्रमुख पहलू इस प्रकार थे:
| लाभ | चुनौतियाँ |
| साम्राज्य के सुदूरवर्ती और दुर्गम क्षेत्रों पर नियंत्रण रखना केंद्र के लिए आसान हो जाता था। | सामंतों की वफादारी केवल तब तक रहती थी जब तक केंद्रीय शासक शक्तिशाली होता था। केंद्र के कमजोर होते ही वे तुरंत विद्रोह कर देते थे। |
| संकट या युद्ध के समय ये सामंत राजा को तुरंत अपनी प्रशिक्षित सेना और संसाधन उपलब्ध कराते थे। | कई सामंत इतने शक्तिशाली हो गए कि उन्होंने अपने ही राजाओं को गद्दी से उतार दिया (उदाहरण के लिए, राष्ट्रकूटों ने अपने स्वामी चालुक्यों को पराजित कर सत्ता हथिया ली)। |
| गांवों और जनपदों के स्थानीय विवादों तथा राजस्व संग्रह का निपटारा स्थानीय स्तर पर ही सुचारू रूप से हो जाता था। | भूस्वामियों और सामंतों के रूप में मध्यस्थों का एक शक्तिशाली वर्ग तैयार हुआ, जो अक्सर निर्धन किसानों का आर्थिक शोषण करता था। |
3. हूणों एवं अरबों के आक्रमण अपने उद्देश्यों, कार्यविधियों और उपमहाद्वीप पर पड़े प्रभावों की दृष्टि से किस प्रकार भिन्न थे? एक लेख तैयार कीजिए, चर्चा कीजिए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
| तुलना के आधार | हूणों का आक्रमण | अरबों का आक्रमण |
| मुख्य उद्देश्य | ये मध्य एशिया के खानाबदोश (यायावर) योद्धा थे। इनका उद्देश्य लूटपाट करना और रहने के लिए नए क्षेत्रों में फैलना था। | इनका मुख्य उद्देश्य राजनीतिक सत्ता का विस्तार करना और अपने नए मजहब (इस्लाम) का प्रसार करना था। |
| कार्यविधियाँ | अत्यंत तीव्र आक्रमण शैली, उत्कृष्ट घुड़सवारी और बेजोड़ धनुर्विद्या के बल पर गंगा के मैदानों तक धावा बोलना। | प्रारंभ में नौसैनिक हमले किए, फिर मुहम्मद बिन कासिम के नेतृत्व में भीषण जमीनी सैन्य अभियान चलाया (जैसे देबल के प्रसिद्ध मंदिर को नष्ट करना)। |
| भारतीय प्रतिरोध | इन्होंने गुप्त साम्राज्य को कमजोर किया, पर अंततः औलीकर वंश के राजा यशोधर्मन ने इन्हें बुरी तरह पराजित किया। | गुर्जर-प्रतिहार (नागभट्ट प्रथम) और कश्मीर के ललितादित्य मुक्तापीड के कड़े सैन्य गठबंधन के कारण अरब ३०० वर्षों तक सिंध-पंजाब से आगे नहीं बढ़ सके। |
| दीर्घकालिक प्रभाव | पूर्ण सामाजिक आत्मसातीकरण: ७वीं शताब्दी तक ये भारतीय समाज में रच-बस गए, संस्कृत अपनाई और देवी लक्ष्मी, शिव व विष्णु के प्रतीकों वाले सिक्के जारी किए। | सांस्कृतिक-वैज्ञानिक आदान-प्रदान: ये समाज में समाहित नहीं हुए, परंतु भारत से शून्य, दशमलव प्रणाली, गणित और आयुर्वेद के ज्ञान को अरब तथा यूरोप तक ले गए। |
4. कल्पना कीजिए कि आप प्रयाग महासभा के एक सामान्य नागरिक हैं। आपको हर्ष द्वारा अपनी अधिकांश संपदा दान करते हुए कैसा लगा?
उत्तर: प्रयाग के एक सामान्य नागरिक के रूप में, सम्राट हर्षवर्धन को प्रत्येक पाँच वर्ष में अपनी संचित अपार संपदा, वस्त्र, और आभूषण तक बौद्धों, ब्राह्मणों तथा दीन-दुखियों को दान करते देखना मेरे लिए अत्यंत अविस्मरणीय और गौरवशाली अनुभव है। सम्राट की यह परम त्याग की भावना उन्हें साधारण मनुष्यों से ऊपर उठाकर देवताओं के समकक्ष खड़ा करती है।
परंतु, एक व्यावहारिक नागरिक के नाते मेरे मन में थोड़ी चिंता और आशंका भी जागती है। पूरी तरह खाली हो चुका राजकोष राज्य की सीमा सुरक्षा और भविष्य में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के समय प्रशासनिक स्थिरता को संकट में डाल सकता है। फिर भी, सम्राट का यह नैतिक मूल्य देश की सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करता है।
5. समूह बनाइए। प्रत्येक समूह में एक आलवार और एक नायनार का चयन कीजिए और उनके जीवन पर आधारित एक जीवनी, पोस्टर अथवा पुस्तिका तैयार कीजिए। इसमें उनकी जीवन-गाथाएँ एवं रचनाओं से एक या दो प्रतिनिधि कविताएँ (अनुवाद सहित) भी सम्मिलित कीजिए।
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं करे।
6. आपने ध्यान दिया होगा कि हमारे मानचित्रों में राज्यों की राजधानी और मुख्य नगरों के केवल प्राचीन नाम दर्शाए गए हैं। एक पेंसिल लेकर उनके मूल नामों के साथ उनके आधुनिक नाम लिखिए। भारत का वर्तमान मानचित्र लेकर इन नगरों को उसमें ढूंढ़िए।
उत्तर:
| प्राचीन नाम | आधुनिक नाम | वर्तमान राज्य |
| स्थानेश्वर | थानेसर | हरियाणा |
| कन्यकुब्ज | कन्नौज | उत्तर प्रदेश |
| प्रयाग | प्रयागराज | उत्तर प्रदेश |
| पाटलिपुत्र | पटना | बिहार |
| उज्जयिनी | उज्जैन | मध्य प्रदेश |
| वातापी | बादामी | कर्नाटक |
| मान्यखेता | मलखेड़ | कर्नाटक |
| कांची / कांचीपुरम् | कांचीपुरम | तमिलनाडु |
| मामल्लपुरम् | महाबलीपुरम | तमिलनाडु |
| विक्रमशिला | अन्तीचक के निकट | बिहार |
| सोमपुर | पहाड़पुर | बांग्लादेश |
| प्राग्ज्योतिष | गुवाहाटी के आसपास | असम |
| भिल्लमाल | भीनमाल | राजस्थान |
| कल्याणी | बसवकल्याण | कर्नाटक |
| वेंगी | एलुरु के निकट | आंध्र प्रदेश |
7. शासक अथवा राजवंश का मिलान उसके नगर से कीजिए-
| क. राष्ट्रकूट | i. कांची |
| ख. गुर्जर प्रतिहार | ii. तंजावुर |
| ग. चोल | iii. मान्यखेत |
| घ. हर्षवर्धन | iv. उज्जयिनी |
| ङ. पल्लव | v. कान्यकुब्ज |
उत्तर:
| क. राष्ट्रकूट | iii. मान्यखेत |
| ख. गुर्जर प्रतिहार | iv. उज्जयिनी |
| ग. चोल | ii. तंजावुर |
| घ. हर्षवर्धन | v. कान्यकुब्ज |
| ङ. पल्लव | i. कांची |
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