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NCERT Class 7 Social Science Chapter 14 भारत का पडोसी देशों से संबंध
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भारत का पडोसी देशों से संबंध
Chapter: 14
| Part – 2 |
महत्त्वपूर्ण प्रश्न
1. पड़ोसी की क्या परिभाषा है? क्या पड़ोसी होना केवल भूमि सीमाओं को साझा करने तक ही सीमित है?
उत्तर: पड़ोसी राष्ट्र की अवधारणा को हम प्रायः एक पारंपरिक दृष्टिकोण से देखते हैं, जिसके अनुसार हमारे मन में तत्काल उस देश की छवि उभरती है जो हमारे देश के साथ प्रत्यक्ष रूप से स्थलीय सीमा साझा करता है। इस पारंपरिक दृष्टि से देखा जाए तो भारत के स्थलीय पड़ोसियों में उत्तर-पश्चिम दिशा में पाकिस्तान और अफगानिस्तान आते हैं, उत्तर में चीन (तिब्बत क्षेत्र), नेपाल तथा भूटान स्थित हैं, और पूर्व दिशा में बांग्लादेश तथा म्यांमार आते हैं। भारत की कुल स्थलीय सीमा लगभग 15,100 किलोमीटर लंबी है, जो विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों जैसे मरुस्थलों, मैदानों, वनों, पर्वतों, दलदली भूभागों और नदी-घाटियों से होकर गुजरती है।
लेकिन पड़ोसी होने की परिभाषा केवल इन भूमि सीमाओं तक ही सीमित नहीं है। भारत ऐतिहासिक रूप से एक समुद्रतटीय राष्ट्र रहा है जो तीन ओर से विशाल समुद्र से घिरा हुआ है, जिसके कारण समुद्र-पार श्रीलंका और मालदीव हमारे सबसे निकटतम समुद्री पड़ोसी बनते हैं। यदि हम उपग्रह चित्रों के माध्यम से व्यापक स्तर पर देखें, तो यह स्पष्ट होता है कि हिंद महासागर की साझेदारी के माध्यम से ईरान, ओमान, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर और इंडोनेशिया जैसे देश भी भारत के समुद्री पड़ोसी हैं । समुद्री पड़ोसी की व्यापक परिभाषा के अंतर्गत वह राष्ट्र आता है जो किसी अन्य राष्ट्र के साथ बिना किसी प्रत्यक्ष भूमि सीमा के भी केवल समुद्र या महासागर की साझेदारी के माध्यम से आपस में जुड़ा होता है। अतः सच्चे अर्थों में अच्छे पड़ोसी होने का तात्पर्य केवल भौगोलिक सीमाओं के मिलन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पूरे क्षेत्र की भलाई और साझा प्रगति के लिए आपसी सहयोग के साथ मिलकर कार्य करना है।
2. भूगोल और इतिहास किस प्रकार भारत और उसके पड़ोसी राष्ट्रों के मध्य संबंधों को प्रभावित करते हैं?
उत्तर: भूगोल का प्रभाव: भारत की लगभग 11,100 किमी लंबी विशाल तटरेखा और हिंद महासागर में इसकी केंद्रीय स्थिति इसे दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका के साथ समुद्री व्यापार और मानवीय सहायता की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कड़ी बनाती है। उत्तर में हिमालय पर्वतमाला और पूर्व में बांग्लादेश के साथ साझा गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी प्रणालियाँ इन देशों के करोड़ों लोगों की कृषि और आजीविका का मुख्य आधार हैं।
इतिहास का प्रभाव: प्राचीन काल में उत्तरापथ, दक्षिणापथ, रेशम मार्ग और मसाला मार्ग जैसे ऐतिहासिक मार्गों ने सांस्कृतिक और व्यापारिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया। सम्राट अशोक के काल में श्रीलंका और बाद में म्यांमार व थाईलैंड में बौद्ध धर्म का प्रसार हुआ। ईरान के साथ भाषाई जुड़ाव का प्रमाण प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद और अवेस्ता की समानताओं में मिलता है। वहीं, औपनिवेशिक काल की विरासत के रूप में 1947 के विभाजन ने पाकिस्तान के साथ संबंधों में जटिलता और सैन्य तनाव को जन्म दिया।
3. वर्तमान समय में भारत और उसके पड़ोसी देश किन रूपों में परस्पर जुड़े हुए हैं?
उत्तर: सांस्कृतिक जुड़ाव: भारत और नेपाल के बीच ‘मुक्त सीमा’ व्यवस्था है जो दोनों देशों के नागरिकों को बिना वीज़ा-पासपोर्ट के शिक्षा, रोजगार और तीर्थयात्रा हेतु आवागमन की सुविधा देती है। पाकिस्तान के साथ वीज़ा-मुक्त ‘करतारपुर कॉरिडोर’ तीर्थमार्ग चालू है। थाईलैंड के ‘चक्री राजवंश’ के राजाओं के नाम भगवान राम पर आधारित हैं और सिंगापुर के प्रशासनिक विज्ञापनों में तमिल भाषा का उपयोग होता है।
आर्थिक व संपर्क: भारत अपने पड़ोसियों के साथ सघन व्यापार करता है। ढांचागत स्तर पर ‘भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग’ और ईरान में भारत द्वारा विकसित रणनीतिक ‘चाबहार पत्तन’
क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के प्रमुख आधुनिक उदाहरण हैं।
सुरक्षा व पर्यावरण: 2004 की विनाशकारी सुनामी के बाद, भारत समुद्री पड़ोसियों (जैसे मालदीव, इंडोनेशिया, श्रीलंका) को आपदा राहत और पूर्व चेतावनी की सूचनाएं साझा करता है। इसके अतिरिक्त, भारत और बांग्लादेश संयुक्त रूप से चक्रवातों से रक्षा करने वाले यूनेस्को विश्व धरोहर ‘सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान’ का संरक्षण करते हैं तथा ओमान भारत का प्रमुख सैन्य सुरक्षा साझेदार है।
प्रश्न और क्रियाकलाप
1. भारत के संदर्भ में दो उदाहरणों के माध्यम से बताइए कि समुद्री पड़ोसी देश कौन होता है?
उत्तर: समुद्री पड़ोसी देश वह राष्ट्र होता है जो किसी अन्य राष्ट्र के साथ बिना किसी प्रत्यक्ष स्थलीय (भूमि) सीमा के, केवल समुद्र या महासागर की साझेदारी के माध्यम से आपस में जुड़ा होता है।
भारत के संदर्भ में इसके दो प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:
(i) श्रीलंका: यह भारत के दक्षिण-पूर्व में स्थित एक द्वीपीय पड़ोसी देश है, जो भारत के साथ एक अत्यंत संकीर्ण समुद्री पट्टी साझा करता है जिसे पाक जलडमरूमध्य (Palk Strait) के नाम से जाना जाता है। भारत और श्रीलंका के सबसे निकटतम बिंदुओं के बीच की दूरी मात्र 32 किलोमीटर है।
(ii) मालदीव: यह हिंद महासागर में स्थित 1,100 से अधिक छोटे द्वीपों का देश है, जो भारत के केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप के मिनिकॉय द्वीप से केवल लगभग 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
2. बौद्ध धर्म के माध्यम से भारत ने पड़ोसियों के साथ कैसे संबंध स्थापित किए हैं? उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर: बौद्ध धर्म भारत में उत्पन्न हुआ और यह सदियों से भारत और उसके पड़ोसी देशों के बीच घनिष्ठ सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक संबंधों को स्थापित करने वाली एक अत्यंत शक्तिशाली कड़ी रहा है।
उदाहरण:
(i) श्रीलंका के साथ संबंध: ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक के पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा ने श्रीलंका जाकर बौद्ध धर्म का प्रसार किया। इस ऐतिहासिक आध्यात्मिक प्रसार ने दोनों देशों के बीच एक अत्यंत सुदृढ़ सांस्कृतिक साझेदारी की नींव रखी जो आज भी जीवित है।
(ii) चीन के साथ संबंध: पहली शताब्दी सा.सं. में बौद्ध धर्म व्यापारिक और तीर्थयात्रा मार्गों से होकर चीन पहुँचा। इसके बाद फाशिएन और श्वेनत्सांग जैसे चीनी बौद्ध भिक्षुओं ने भारत के प्राचीन ज्ञान केंद्रों की यात्रा की, जबकि बोधिधर्म और कुमारजीव जैसे भारतीय बौद्ध भिक्षुओं ने चीन जाकर बौद्ध शिक्षाओं का प्रसार किया, जिससे दोनों सभ्यताओं के मध्य गहरे आध्यात्मिक व बौद्धिक संबंध विकसित हुए।
(iii) भूटान के साथ संबंध: भारत और भूटान के संबंधों का एक बहुत बड़ा हिस्सा बौद्ध धर्म की साझी विरासत पर टिका है। भूटान के तीर्थयात्री सदियों से भारत में स्थित पवित्र बौद्ध स्थलों जैसे बोधगया, राजगीर, नालंदा, उदयगिरि और सिक्किम की यात्रा करते रहे हैं, जो दोनों देशों के जन-जन के संपर्क को मजबूत बनाता है।
(iv) म्यांमार और थाईलैंड के साथ संबंध: बौद्ध धर्म की मूल शिक्षाओं के सबसे निकट मानी जाने वाली ‘थेरवाद’ शाखा का पालन म्यांमार और थाईलैंड में प्रमुखता से किया जाता है। भारत बौद्ध धर्म का जन्मस्थल होने के कारण म्यांमार के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है, और वे तीर्थयात्रा के लिए नियमित रूप से भारत आते हैं।
(v) अफगानिस्तान के साथ संबंध: प्राचीन काल में अफगानिस्तान बौद्ध धर्म और कला का एक समृद्ध केंद्र था, जहाँ पहाड़ियों में उत्कीर्ण की गई बामियान की विशाल बुद्ध प्रतिमाएँ भारत से वहाँ पहुँचे ‘महायान’ बौद्ध धर्म का एक ऐतिहासिक और शक्तिशाली प्रतीक थीं।
3. ‘मुक्त सीमा’ नीति का क्या तात्पर्य है? ‘मुक्त सीमा’ नीति भारत और नेपाल की सीमा पर रहने वाले लोगों के जीवन को किस प्रकार प्रभावित करती है?
उत्तर: मुक्त सीमा’ नीति का तात्पर्य: इससे अभिप्राय एक ऐसी सीमा व्यवस्था से है जहाँ दो पड़ोसी देशों के नागरिक बिना पासपोर्ट और बिना वीज़ा के अत्यंत सुगमता से एक-दूसरे के देश में सीमा-पार आवागमन कर सकते हैं। यह व्यवस्था दो देशों के बीच गहरे आपसी विश्वास और ऐतिहासिक मित्रता का प्रतीक होती है।
नेपाल सीमा पर रहने वाले लोगों के जीवन पर प्रभाव: भारत और नेपाल के बीच 1950 की शांति और मैत्री संधि के तहत मुक्त सीमा की नीति लागू है, जो वहाँ के स्थानीय लोगों के दैनिक जीवन को निम्नलिखित रूप से प्रभावित करती है:
(i) पारिवारिक जुड़ाव: सीमा के दोनों ओर रहने वाले परिवार और समुदाय बिना किसी प्रशासनिक बाधा के आपस में सुगमता से जुड़े रहते हैं और पारिवारिक संबंध बनाए रख सकते हैं।
(ii) आजीविका और रोजगार: सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग दैनिक कार्य, रोजगार, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य-सेवाओं का लाभ उठाने के लिए हर रोज आसानी से सीमा-पार आते-जाते हैं।
(iii) दैनिक बाजारों में पारस्परिक निर्भरता: सीमावर्ती उपनगरों में सक्रिय व्यापार और जीवंत बाजारों के माध्यम से दोनों देशों के नागरिकों के बीच एक अनूठी सामाजिक और आर्थिक आत्मनिर्भरता व जुड़ाव दिखाई देता है।
4. इस अध्याय में कहा गया है- “पड़ोसी होने का अर्थ केवल भूगोल तक सीमित नहीं है।” इस कथन की एक उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर: इस कथन का अर्थ है कि अच्छे पड़ोसी होने की पहचान केवल एक नक्शे पर जमीन की सरहदें या भौगोलिक सीमाएँ साझा करने से नहीं होती, बल्कि इसका वास्तविक अर्थ पूरे क्षेत्र की शांति, स्थिरता और कल्याण के लिए मिलकर काम करने तथा सुख-दुख में सहभागिता बढ़ाने से है।
उदाहरण — सुंदरबन का संयुक्त संरक्षण और आपदा प्रबंधन: भारत और बांग्लादेश न केवल एक लंबी स्थलीय और समुद्री सीमा साझा करते हैं, बल्कि वे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल ‘सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान’ का भी संयुक्त रूप से प्रबंधन करते हैं। सुंदरबन की भौगोलिक अवस्थिति ऐसी है कि यह चक्रवातों के विरुद्ध एक प्राकृतिक रक्षक (Barrier) की तरह कार्य करता है। दोनों देश भौगोलिक सीमाओं को भूलकर सुंदरबन के पारिस्थितिकी तंत्र और वहाँ रहने वाले बंगाल टाइगर्स की रक्षा के लिए मिलकर कार्य करते हैं, ताकि जलवायु परिवर्तन और चक्रवातों से दोनों देशों के तटीय समुदायों की आजीविका को बचाया जा सके। यह सहभागिता दर्शाती है कि पड़ोसी होने का असली अर्थ सीमाओं की रक्षा करने से कहीं आगे बढ़कर साझी चुनौतियों का मिलकर सामना करना है।
5. भारत ने अपने पड़ोस के छोटे देशों की किन-किन तरीकों से सहायता की है? उदाहरणों के साथ समझाइए।
उत्तर: भारत ने अपने पड़ोस के छोटे देशों के आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे के निर्माण और उनकी साझी सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में कई महत्वपूर्ण तरीकों से सहायता की है:
(i) भूटान में जल-विद्युत परियोजनाएँ: भारत ने भूटान के आर्थिक विकास में सहयोग करते हुए वहाँ की नदियों पर कई जल-विद्युत परियोजनाओं का निर्माण कराया है। इसका प्रमुख उदाहरण ‘ताला जल-विद्युत परियोजना’ (2008) है, जो भूटान के आर्थिक विकास को गति देने के साथ-साथ भारत को स्वच्छ व नवीकरणीय ऊर्जा की आपूर्ति भी सुनिश्चित करती है।
(ii) अफगानिस्तान का पुनर्निर्माण: भू-राजनीतिक और पारगमन की कठिन चुनौतियों के बावजूद भारत ने अफगानिस्तान में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास में सक्रिय भूमिका निभाई है। इसके तहत भारत ने वहाँ के संसद भवन और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जरंज-डेलाराम राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करवाया।
(iii) म्यांमार में ऐतिहासिक स्मारकों का पुनरुद्धार: म्यांमार के बागान में आए भूकंप से क्षतिग्रस्त हुए ऐतिहासिक आनंद मंदिर सहित कई महत्वपूर्ण स्मारकों के पनुरुद्धार और संरक्षण में भारत ने तकनीकी व वित्तीय सहायता प्रदान की है। इसके अलावा, भारत ने यांगून के श्वेदागोन पगोडा के लिए सारनाथ बुद्ध की प्रतिमा की एक 16 फुट ऊंची भव्य प्रतिकृति भी भेंट की है।
6. साझी चुनौतियाँ सहयोग के अवसर किस प्रकार बनी हैं? क्या इस अध्याय में इसे प्रदर्शित करने हेतु ऐसे उदाहरण हैं?
उत्तर: इस अध्याय में यह स्पष्ट किया गया है कि जब पड़ोसी देश प्राकृतिक या पर्यावरणीय खतरों जैसी साझी चुनौतियों का सामना करते हैं, तो वे अपनी सीमाओं से परे जाकर आपसी सहयोग के नए मार्ग खोजते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण 2004 की विनाशकारी सुनामी आपदा है, जिसने भारत, इंडोनेशिया, श्रीलंका और थाईलैंड के तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई थी। इस भीषण संकट ने एक प्रभावी चेतावनी प्रणाली की तत्काल आवश्यकता को उजागर किया, जिसके समाधान के लिए भारत ने इन सभी देशों के साथ मिलकर सेंसर, उपग्रहों और संचार संपर्कों का एक विशाल नेटवर्क स्थापित किया। आज हैदराबाद में स्थित ‘भारतीय सुनामी प्रारंभिक चेतावनी केंद्र’ न केवल भारत बल्कि अपने सभी समुद्री पड़ोसियों को भी समय पर चक्रवात और भूकंप की चेतावनी जारी कर हजारों जीवन बचाता है।
इसी प्रकार, जलवायु परिवर्तन, चक्रवातों और बढ़ते समुद्र स्तर के साझा संकट से निपटने के लिए भारत और बांग्लादेश मिलकर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान का संयुक्त संरक्षण और प्रबंधन करते हैं, जो चक्रवातों की तीव्रता को कम कर क्षेत्र की सुरक्षा करता है। इसके अतिरिक्त, समुद्री डकैती और समुद्री सुरक्षा जैसी साझी रणनीतिक चिंताओं के कारण भारत अपने समुद्री पड़ोसियों इंडोनेशिया और ओमान के साथ आपदा प्रबंधन और संयुक्त सुरक्षा अभ्यासों के माध्यम से लगातार सहयोग कर रहा है।
7. यदि सीमाएँ केवल संस्कृति और संबंधों के आधार पर निर्मित की जातीं, तो मानचित्र कैसा होता?
उत्तर: यदि सीमाएँ केवल संस्कृति और संबंधों के आधार पर बनाई जातीं, तो दक्षिण एशिया का मानचित्र विभाजनकारी लकीरों के बजाय आपसी जुड़ाव का एक सुंदर चित्र होता। इसमें भारत और पाकिस्तान जैसी तनावपूर्ण सैन्य सीमाएँ न होकर साझी भाषा, संगीत और खान-पान का मुक्त प्रवाह दिखाई देता। यह मानचित्र लोगों को बांटने के बजाय नदियों, प्राचीन व्यापारिक मार्गों (जैसे उत्तरापथ और रेशम मार्ग) तथा बौद्ध धर्म व रामायण जैसी साझी आध्यात्मिक विरासतों के प्राकृतिक प्रवाह के अनुसार आपस में जुड़ा होता। पूरा क्षेत्र भारत-नेपाल की तरह ‘मुक्त सीमाओं’ का एक जीवंत जाल बन जाता, जहाँ लोग बिना पासपोर्ट-वीज़ा के शिक्षा, रोजगार और संबंधों के लिए सुगमता से आ-जा सकते। संक्षेप में, वह मानचित्र विभाजन का नहीं, बल्कि ‘सौहार्द्रता की नई सीमाओं’ का प्रतीक होता जो पड़ोसियों को अलग करने के बजाय उन्हें साझी विरासत के अटूट धागे में पिरोता।
8. रूपरेखा (रिक्त) मानचित्र पर-
→ भारत के पड़ोसी राष्ट्रों को अंकित कीजिए।
→ भारत और उसके पड़ोसियों के मध्य सांस्कृतिक प्रवाह (जैसे- भोजन, पर्व, भाषा) को तीरों द्वारा दर्शाइए।
→ कल्पना कीजिए और ‘सौहार्द्र की नई सीमाएँ’ पुनः बनाइए जो पड़ोसी राष्ट्रों को नदियों, व्यापार मार्गों या सांस्कृतिक क्षेत्रों से जोड़ती हैं।
→ इस अध्याय में सूचीबद्ध देशों के राष्ट्रध्वज के चित्रों को एकत्रित कीजिए और उनका अवलोकन कर लिपिबद्ध कीजिए।
उत्तर:

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