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NCERT Class 12 Home Science Important Chapter 6 प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा
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प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा
Chapter: 6
| Part – 1: मानव पारिस्थितिकी एवं परिवार विज्ञान |
| IMPORTANT SOLUTIONS |
लघु उत्तरीय प्रश्न:
1. ‘प्रारंभिक बाल्यावस्था’ (Early Childhood) जीवन की किस आयु तक की अवस्था को कहा जाता है?
उत्तर: प्रारंभिक बाल्यावस्था जीवन की जन्म से लेकर आठ वर्ष तक की आयु की अवस्था को कहा जाता है।
2. ‘शैशवावस्था’ (Infancy) की अवधि क्या मानी जाती है?
उत्तर: शैशवावस्था जन्म से लेकर एक वर्ष की आयु तक की अवधि होती है, यद्यपि कुछ विशेषज्ञ इसे 2 वर्ष तक की आयु मानते हैं।
3. दो से तीन वर्ष के छोटे बच्चों को अक्सर “टॉडलर” (Toddler) क्यों कहा जाता है?
उत्तर: इस शब्द की व्युत्पत्ति इस उम्र के छोटे बच्चों की फुदक कर चलने की प्रवृत्ति से हुई है।
4. छोटे बच्चों के लिए बनाए गए कुछ विद्यालय पूर्व केंद्रों (Preschools) को अक्सर क्या कहा जाता है?
उत्तर: छोटे बच्चों के लिए कुछ विद्यालय पूर्व केंद्र अक्सर मॉन्टेसरी स्कूल कहलाते हैं।
5. भारत सरकार ने विद्यालय पूर्व शिक्षा की आवश्यकता को किस कार्यक्रम के माध्यम से पूरा किया है?
उत्तर: भारत सरकार ने यह आवश्यकता अपनी समेकित बाल-विकास सेवाओं (I.C.D.S.) के अंतर्गत काम करने वाली आंगनवाड़ियों द्वारा पूरी की है।
6. लगभग 8-12 माह का छोटा बच्चा अपरिचितों के प्रति जो भय प्रदर्शित करता है, वह क्या दर्शाता है?
उत्तर: यह भय केवल भावनात्मक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह परिचित चेहरों को पहचानने की बच्चे की क्षमता को दर्शाता है।
7. किस उम्र में बच्चे का अपनी मातृभाषा में शब्दज्ञान तेज़ी से बढ़ने लगता है?
उत्तर: लगभग तीन वर्ष की उम्र में, जब बच्चा चलना और बोलना सीख लेता है, तब उसका मातृभाषा में शब्दज्ञान तेज़ी से बढ़ता है।
8. छोटे बच्चों के लिए सीखने का सबसे अनुकूल परिवेश कैसा होना चाहिए?
उत्तर: सीखने का सबसे अनुकूल परिवेश वह है जो सुरक्षित, निरापद, प्रेमपूर्ण, तथा विविध प्रकार के व्यक्तियों और खेल सामग्रियों से युक्त हो।
9. मनोवैज्ञानिक ‘व्यागोत्सकी’ के अनुसार बच्चों को सीखने के लिए किसकी अत्यंत आवश्यकता होती है?
उत्तर: व्यागोत्सकी के अनुसार, बच्चों को उनका खयाल रखने वाले, देखभाल करने वाले और जानकार वयस्क की ज़रूरत होती है।
10. ई.सी.सी.ई. (ECCE) के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए आवश्यक न्यूनतम शैक्षिक योग्यता क्या है?
उत्तर: इसके लिए बाल/मानव विकास या बाल-मनोविज्ञान में स्नातक-पूर्व उपाधि (ग्रेजुएशन) या एक वर्ष का डिप्लोमा अथवा नर्सरी अध्यापक प्रशिक्षण कोर्स आवश्यक है।
11. क्या इसका अर्थ यह है कि जो बच्चे नर्सरी स्कूल (विद्यालय पूर्व केंद्र) नहीं जाते, वे नहीं सीखते?
उत्तर: ऐसा बिल्कुल नहीं है, सभी बच्चे प्राकृतिक रूप से सीखते हैं, लेकिन विद्यालय पूर्व केंद्र बच्चों को विद्यालय में पढ़ने के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण सहायता करते हैं।
12. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2005 (NCF-2005) के अनुसार ई.सी.सी.ई. में सीखने का आधार क्या होना चाहिए?
उत्तर: राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2005 के अनुसार ई.सी.सी.ई. में सीखने का आधार खेल होना चाहिए।
13. शिशु देखभाल केंद्र (Creche) क्या होता है?
उत्तर: शिशु केंद्र एक संस्थागत व्यवस्था है जिसे विशेष रूप से शिशुओं और छोटे बच्चों की देखभाल के लिए बनाया गया है, खासकर तब जब घर में देखभाल करने वाले अनुपस्थित हों।
14. एक ई.सी.सी.ई. (ECCE) शिक्षक को किन प्रशासकीय कौशलों में सक्षम होना चाहिए?
उत्तर: शिक्षक को रिकॉर्ड रखने, लेखाकरण और रिपोर्ट लिखने जैसे प्रशासनिक और प्रबंधकीय कौशलों में सक्षम होना चाहिए।
15. संस्थागत शिशु देखभाल के प्रचलन से पूर्व, पारंपरिक रूप से बच्चों की देखभाल किस पर निर्भर होती थी?
उत्तर: पारंपरिक रूप से बच्चे की देखभाल परिवार की अन्य महिलाओं पर होती थी जो स्थायी या अस्थायी रूप से संयुक्त परिवार में रहती थीं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:
1. प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) के क्षेत्र में जीविका (करियर) के लिए कौन-से विभिन्न अवसर उपलब्ध हैं?
उत्तर: इस क्षेत्र में अनेक करियर अवसर उपलब्ध हैं, जैसे नर्सरी स्कूलों में शिक्षक बनना, क्दवस देखभाल केंद्रों (Day Care) और शिशु केंद्रों (Creche) में देखभालकर्ता के रूप में काम करना, तथा छोटे बच्चों के कार्यक्रमों में दल के सदस्य के रूप में कार्य करना। इसके अतिरिक्त, व्यक्ति सरकारी या गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और ICDS में व्यावसायिक के रूप में काम कर सकता है। कोई भी व्यक्ति एक उद्यमी के रूप में अपना स्वयं का बाल-देखभाल केंद्र या शैक्षिक शिविर भी शुरू कर सकता है, और उच्च शिक्षा प्राप्त करके अनुसंधान (Ph.D.) या स्नातकोत्तर स्तर की शिक्षा भी हासिल कर सकता है।
2. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) – 2005 के अनुसार ई.सी.सी.ई. (ECCE) के मुख्य मार्गदर्शक सिद्धांत कौन-कौन से हैं?
उत्तर: NCF-2005 के अनुसार ECCE के प्रमुख मार्गदर्शक सिद्धांत निम्नलिखित हैं: सीखने का आधार खेल होना चाहिए और शिक्षा का आधार कला होना चाहिए। बच्चों की विशिष्ट सोच-विशेषताओं को मान्यता देना और विशेषज्ञता की बजाय अनुभवजन्य अधिगम (अनुभव से सीखने) को प्रमुखता देना आवश्यक है। दैनिक दिनचर्या में अच्छी जानकारी, औपचारिक व अनौपचारिक दोनों प्रकार की परस्पर बातचीत, स्थानीय सामग्रियों व कला का उपयोग, तथा स्वास्थ्य व कल्याण की स्वस्थ आदतें अपनाना भी इसके महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्धांत हैं।
3. छोटे बच्चों के शिक्षकों और माता-पिता को बाल-विकास के वैज्ञानिक सिद्धांतों की जानकारी होना क्यों आवश्यक है?
उत्तर: माता-पिता और देखभालकर्ताओं को बाल-विकास की जानकारी होने से वे समान उम्र के बच्चों के बीच संभावित भिन्नताओं और व्यक्तिगत विभिन्नताओं को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं। इससे वे बच्चों या भाई-बहनों के बीच प्रतिस्पर्धी तुलना करने से बचते हैं। विकास की वैज्ञानिक समझ होने से वयस्क बच्चों से वास्तविक अपेक्षाएँ रख पाते हैं और उनके साथ उसी के अनुरूप सही बातचीत कर सकते हैं। बच्चे वास्तव में क्या जानते हैं और उनमें क्या सीखने की क्षमता है, यह जानकर शिक्षक एक ऐसा अनुकूल परिवेश दे सकते हैं जिसमें सीखना आसान, आनंददायक और अर्थपूर्ण हो।
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