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NCERT Class 11 Economics Chapter 11 आँकड़ों का संगठन
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आँकड़ों का संगठन
Chapter: 11
| अर्थशास्त्र में सांख्यिकी |
| अभ्यास |
1. निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प सही है?
(क) एक वर्ग मध्यबिन्दु बराबर है:
(i) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के औसत के।
(ii) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के गुणनफल के।
(iii) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के अनुपात के।
(iv) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर: (i) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के औसत के।
(ख) दो चरों के बारंबारता वितरण को इस नाम से जानते हैं:
(i) एक विचर वितरण।
(ii) द्विचर वितरण।
(iii) बहुचर वितरण।
(iv) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर: (ii) द्विचर वितरण।
(ग) वर्गीकृत आँकड़ों में सांख्यिकीय परिकलन आधारित होता है:
(i) प्रेक्षणों के वास्तविक मानों पर।
(ii) उच्च वर्ग सीमाओं पर।
(iii) निम्न वर्ग सीमाओं पर।
(iv) वर्ग के मध्यबिन्दुओं पर।
उत्तर: (iv) वर्ग के मध्यबिन्दुओं पर।
(घ) अपवर्जी विधि के अंतर्गत:
(i) किसी वर्ग की उच्च वर्ग सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित नहीं करते।
(ii) किसी वर्ग की उच्च वर्ग सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित करते हैं।
(iii) किसी वर्ग की निम्न वर्ग सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित नहीं करते।
(iv) किसी वर्ग की निम्न वर्ग सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित करते हैं।
उत्तर: (i) किसी वर्ग की उच्च वर्ग सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित नहीं करते।
(ङ) परास का अर्थ है:
(i) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों के बीच अंतर।
(ii) न्यूनतम एवं अधिकतम प्रेक्षणों के बीच अंतर।
(iii) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों का औसत।
(iv) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों का अनुपात।
उत्तर: (i) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों के बीच अंतर।
2. वस्तुओं को वर्गीकृत करने में क्या कोई लाभ हो सकता है? अपने दैनिक जीवन से एक उदाहरण देकर व्याख्या कीजिए।
उत्तर: हाँ, वस्तुओं को वर्गीकृत करने के कई महत्वपूर्ण लाभ होते हैं। वस्तुओं को सही ढंग से वर्गीकृत करने से हमारा बहुमूल्य श्रम और समय बचता है। जब एक जैसी विशेषताओं वाली वस्तुओं को एक ही वर्ग या समूह में रखा जाता है, तो उन्हें बिना किसी कठिनाई के ढूँढना, संभालना और उनसे निष्कर्ष निकालना बहुत आसान हो जाता है।
दैनिक जीवन से इसके दो प्रमुख उदाहरण नीचे दिए गए हैं:
(i) पुस्तकों का वर्गीकरण: यदि हम अपनी स्कूल की पुस्तकों को विषयों (जैसे- इतिहास, विज्ञान, गणित आदि) के अनुसार अलग-अलग समूहों में वर्गीकृत करके रखते हैं, तो उन्हें संभालना आसान हो जाता है। उदाहरण के लिए, जब हमें इतिहास की पुस्तक की आवश्यकता होती है, तो हमें केवल ‘इतिहास’ वाले समूह में उसे खोजना पड़ता है। यदि हमें अपनी पुस्तकें वर्गीकृत नहीं की हैं, तो हमें केवल एक किताब खोजने के लिए पुस्तकों के पूरे ढेर को छानना पड़ेगा, जिससे हमारा बहुत समय बर्बाद होगा।
(ii) कबाड़ी वाले का उदाहरण: एक कबाड़ी वाला अपने पास मौजूद पुराने अखबारों, प्लास्टिक, कांच की बोतलों और धातुओं (जैसे लोहा, पीतल, तांबा) को अलग-अलग समूहों में छांटकर रखता है। इससे जब भी कोई खरीदार किसी विशेष सामग्री की मांग करता है, तो उसे कबाड़ के बड़े ढेर में से वह सामग्री खोजकर देने में बहुत आसानी होती है।
3. चर क्या है? एक संतत तथा विविक्त चर के बीच भेद कीजिए।
उत्तर: चर वह होता है जिसके मान परिवर्तित होते रहते हैं। एक चर कैसे परिवर्तित होता है, इसी आधार पर उसे मुख्य रूप से दो वर्गों में बांटा जाता है: संतत और विविक्त।
संतत तथा विविक्त चर के बीच अंतर हैं:
| संतत | विविक्त |
| परिभाषा: संतत चर का कोई भी संख्यात्मक मान हो सकता है। यह किसी भी कल्पित मान को अभिव्यक्त करने में सक्षम है और इसके मानों को अनंत श्रेणियों में बांटा जा सकता है। | परिभाषा: संतत चर के विपरीत, विविक्त चर के केवल निश्चित मान ही हो सकते हैं। |
| मान का प्रकार: यह पूर्णांक (जैसे 1, 2, 3), भिन्न (जैसे 1/2, 2/3) या ऐसे मान जो यथार्थ भिन्न नहीं हैं (जैसे √2 = 1.414), कुछ भी हो सकता है। | मान का प्रकार: इसके मान केवल परिमित ‘उछाल’ (finite jumps) से बदलते हैं। यह एक मान से दूसरे मान पर छलांग लगाता है, परंतु उनके बीच का कोई मान नहीं लेता। |
| उदाहरण: यदि किसी छात्र का कद 90 से 150 सेमी के बीच बढ़ता है, तो वह इसके बीच के सभी मान ले सकता है। यह पूर्ण संख्या (90, 100, 108 सेमी) के साथ-साथ भिन्नात्मक मान (90.85, 102.34 सेमी) भी हो सकता है। भार, समय तथा दूरी भी संतत चर के अन्य उदाहरण हैं। | उदाहरण: ‘किसी कक्षा में छात्रों की संख्या’ एक विविक्त चर है। यह केवल पूर्ण संख्या (जैसे 25 या 26) हो सकती है। यह 25.5 नहीं हो सकती, क्योंकि ‘आधा छात्र’ होना निरर्थक है। |
4. आँकड़ों के वर्गीकरण में प्रयुक्त अपवर्जी तथा समावेशी विधियों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:अपवर्जी विधि में किसी वर्ग की निम्न सीमा को उस वर्ग में शामिल किया जाता है, जबकि उच्च सीमा को शामिल नहीं किया जाता। उच्च सीमा अगले वर्ग की निम्न सीमा बन जाती है। इस कारण कोई भी आँकड़ा केवल एक ही वर्ग में आता है और दो वर्गों में आने की संभावना नहीं रहती। यह विधि मुख्यतः सतत आँकड़ों के वर्गीकरण में प्रयोग की जाती है, जैसे— ऊँचाई, वजन, आय, दूरी आदि।
उदाहरण:
0–10
10–20
20–30
30–40
समावेशी विधि में किसी वर्ग की निम्न तथा उच्च दोनों सीमाएँ उसी वर्ग में शामिल होती हैं। प्रत्येक वर्ग की सीमाएँ अलग-अलग होती हैं, इसलिए एक वर्ग की उच्च सीमा अगले वर्ग की निम्न सीमा नहीं बनती। यह विधि मुख्यतः विविक्त आँकड़ों के वर्गीकरण में प्रयोग की जाती है, जैसे— विद्यार्थियों के अंक, व्यक्तियों की संख्या, परिवारों की संख्या आदि।
उदाहरण:
0–10
11–20
21–30
31–40
5. सारणी 3-2 के आँकड़ों का प्रयोग करें, जो 50 परिवारों के भोजन पर मासिक व्यय (₹ में) को दिखलाती है, और:
(क) भोजन पर मासिक पारिवारिक व्यय का प्रसार (परास) ज्ञात कीजिए।
उत्तर: न्यूनतम व्यय = ₹1007
अधिकतम व्यय = ₹5090
परास = अधिकतम व्यय − न्यूनतम व्यय
परास = 5090 − 1007 = 4083
परास = ₹4083
(ख) परास को वर्ग अंतराल की उचित संख्याओं में विभाजित करें तथा व्यय का बारंबारता वितरण प्राप्त करें।
उत्तर:
| मासिक व्यय (₹) | परिवारों की संख्या (बारंबारता) |
| 1000 – 1999 | 33 |
| 2000 – 2999 | 11 |
| 3000 – 3999 | 3 |
| 4000 – 4999 | 2 |
| 5000 – 5999 | 1 |
| कुल | 50 |
उन परिवारों की संख्या पता कीजिए जिनका भोजन पर मासिक व्यय:
(क) 2000/- ₹ से कम है।
उत्तर: 2000/- ₹ से कम व्यय वाले परिवार: इसमें ‘1000-1500’ और ‘1500-2000’ वाले दोनों वर्ग शामिल होंगे।
परिवारों की संख्या = 20 + 13 = 33 परिवार
(ख) 3000/- ₹ से अधिक है।
उत्तर: 3000/- ₹ से अधिक व्यय वाले परिवार: इसमें 3000 से ऊपर के सभी वर्गों (3000-3500, 3500-4000, 4000-4500, 4500-5000, 5000-5500) की बारंबारता जोड़ी जाएगी।
परिवारों की संख्या = 2 + 1 + 2 + 0 + 1 = 6 परिवार
(ग) 1500/- ₹ और 2500/- ₹ के बीच है।
उत्तर: 1500/- ₹ और 2500/- ₹ के बीच व्यय वाले परिवार: इसमें ‘1500-2000’ और ‘2000-2500’ वर्ग अंतरालों में आने वाले परिवार शामिल होंगे। परिवारों की संख्या = 13 + 6 = 19 परिवार
6. एक शहर में, यह जानने हेतु 45 परिवारों का सर्वेक्षण किया गया कि वे अपने घरों में कितनी संख्या में सेल फोनों का इस्तेमाल करते हैं। नीचे दिए गए उनके उत्तरों के आधार पर एक बारंबारता सारणी तैयार कीजिए:
| 1 | 3 | 2 | 2 | 2 | 2 | 1 | 2 | 1 | 2 | 2 | 3 | 3 | 3 | 3 |
| 3 | 3 | 2 | 3 | 2 | 2 | 6 | 1 | 6 | 2 | 1 | 5 | 1 | 5 | 3 |
| 2 | 4 | 2 | 7 | 4 | 2 | 4 | 3 | 4 | 2 | 0 | 3 | 1 | 4 | 3 |
उत्तर:
| सेल फोनों की संख्या | परिवारों की संख्या (बारंबारता) |
| 0 | 1 |
| 1 | 7 |
| 2 | 15 |
| 3 | 12 |
| 4 | 5 |
| 5 | 2 |
| 6 | 2 |
| 7 | 1 |
| कुल | 45 |
7. वर्गीकृत आंकड़ों में ‘सूचना की क्षति’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: वर्गीकृत आंकड़ों में ‘सूचना की क्षति’ समूहित कर देते हैं, तो व्यक्तिगत प्रेक्षणों का वास्तविक मान छिप जाता है। एक बार जब आंकड़े वर्गों में बंट जाते हैं, तो आगे की सभी सांख्यिकीय गणनाओं के लिए उन प्रेक्षणों के वास्तविक मानों के स्थान पर उस वर्ग के मध्यबिन्दु (वर्ग चिह्न) का प्रयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि ’20-30′ वर्ग में 6 प्रेक्षण हैं, तो गणना में उन सभी का मान 25 (वर्ग चिह्न) मान लिया जाएगा, भले ही उनके वास्तविक मान 22 या 28 हों। इस प्रकार, व्यक्तिगत प्रेक्षणों के वास्तविक मान की यह जानकारी खो जाना ही सांख्यिकी में ‘सूचना की क्षति’ कहलाता है।
8. क्या आप इस बात से सहमत हैं कि अपरिष्कृत आँकड़ों की अपेक्षा वर्गीकृत आंकड़े बेहतर होते हैं?
उत्तर: हाँ, मैं इस बात से पूर्णतः सहमत हूँ कि अपरिष्कृत आँकड़ों की अपेक्षा वर्गीकृत आंकड़े बेहतर होते हैं।
इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
(i) अव्यवस्था और जटिलता से बचाव: अपरिष्कृत आँकड़े कबाड़ी वाले के अव्यवस्थित ढेर की तरह अत्यधिक अव्यवस्थित और विशाल होते हैं। इतने बड़े और बिखरे हुए आँकड़ों से कोई सार्थक निष्कर्ष निकालना लगभग असंभव और थका देने वाला कार्य होता है।
(ii) संक्षिप्त और बोधगम्य: वर्गीकरण के द्वारा अपरिष्कृत आँकड़ों को संक्षिप्त और आसानी से समझने योग्य (बोधगम्य) बनाया जाता है।
(iii) विश्लेषण में आसानी: जब आँकड़ों को एक जैसी विशेषताओं के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है, तो वे तुलना करने और आगे के सांख्यिकीय विश्लेषण के योग्य बन जाते हैं। यद्यपि वर्गीकृत आँकड़ों में थोड़ी ‘सूचना की क्षति’ होती है, फिर भी विशाल आँकड़ों को संभालने और निष्कर्ष निकालने के लिए वर्गीकरण बहुत आवश्यक और अधिक उपयोगी है।
9. एक-विचर एवं द्विचर बारंबारता वितरण के बीच अंतर बताइए।
उत्तर: एक-विचर और द्विचर बारंबारता वितरण के बीच अंतर है:
| एक-विचर | द्विचर |
| इस वितरण में केवल एक चर के आँकड़ों को वर्गीकृत करके उनका वितरण दिखाया जाता है। | इसे दो चरों के बारंबारता वितरण के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसमें किसी एक ही प्रतिदर्श (sample) से एक साथ दो अलग-अलग प्रकार की सूचनाएं (चर) संगृहीत की जाती हैं और उन्हें एक ही सारणी में प्रदर्शित किया जाता है। |
| उदाहरण के लिए, किसी कक्षा के 100 छात्रों द्वारा केवल ‘गणित में प्राप्त अंकों’ को बारंबारता वितरण के रूप में दर्शाना। | उदाहरण के लिए, 20 अलग-अलग कंपनियों की ‘बिक्री’ और उनके द्वारा ‘विज्ञापन पर किया गया व्यय’ इन दोनों चरों को एक ही साथ एक सारणी में दर्शाना। |
| इसे बनाना एवं समझना सरल होता है। | इसे बनाना अपेक्षाकृत जटिल होता है। |
10. निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर 7 का वर्ग अंतराल लेकर समावेशी विधि द्वारा एक बारंबारता वितरण तैयार कीजिए:
| 28 | 17 | 15 | 22 | 29 | 21 | 23 | 27 | 18 | 12 | 7 | 2 | 9 | 4 |
| 1 | 8 | 3 | 10 | 5 | 20 | 16 | 12 | 8 | 4 | 33 | 27 | 21 | 15 |
| 3 | 36 | 27 | 18 | 9 | 2 | 4 | 6 | 32 | 31 | 29 | 18 | 14 | 13 |
| 15 | 11 | 9 | 7 | 1 | 5 | 37 | 32 | 28 | 26 | 24 | 20 | 19 | 25 |
| 19 | 20 | 6 | 9 |
उत्तर: दिए गए आँकड़ों में
न्यूनतम मान = 1
अधिकतम मान = 37
वर्ग अंतराल का आकार = 7
समावेशी विधि द्वारा बारंबारता वितरण सारणी:
| वर्ग-अंतराल | बारंबारता (f) |
| 1 – 7 | 15 |
| 8 – 14 | 12 |
| 15 – 21 | 15 |
| 22 – 28 | 10 |
| 29 – 35 | 6 |
| 36 – 42 | 2 |
| कुल | 60 |
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