🪔 Diwali Maha Offer Class 10 & 12 Bundles @ ₹299 ₹599
Ends in:
03d
14h
35m
40s

NIOS Class 12 History Chapter 4 वैदिक कल

NIOS Class 12 History Chapter 4 वैदिक कल Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapters NIOS Class 12 History Chapter 4 वैदिक कल Notes and select need one. NIOS Class 12 History Chapter 4 वैदिक कल Question Answers Download PDF. NIOS Study Material of Class 12 History Notes Paper 315.

NIOS Class 12 History Chapter 4 वैदिक कल

Also, you can read the NIOS book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per National Institute of Open Schooling (NIOS) Book guidelines. These solutions are part of NIOS All Subject Solutions. Here we have given NIOS Class 12 History Hindi Medium Solutions, NIOS Senior Secondary Course History Notes in Hindi for All Chapter, You can practice these here.

Chapter: 4

मॉड्यूल – 1 प्राचीन भारत

पाठगत प्रश्न 4.1

1 ‘वेद’ शब्द से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: ‘वेद’ शब्द संस्कृत भाषा के विद् शब्द से बना है, जिसका अर्थ ‘ज्ञान’ है। वेद विश्व के सर्वाधिक प्राचीन लिखित धार्मिक दार्शनिक ग्रंथ हैं। वेद प्राचीन भारतीय ग्रंथ हैं जिन्हें हिंदू धर्म का सबसे पुराना ग्रंथ माना जाता है वेद प्राचीन भारतीय धर्म, ज्ञान और संस्कृति के मूल ग्रंथ हैं, जिन्हें श्रुति माना जाता है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद—ये चार वेद हैं, जिनमें मंत्र, स्तोत्र, यज्ञ विधि, संगीत, आयुर्वेद और दार्शनिक ज्ञान समाहित हैं। वेद संस्कृत में रचित हैं और सनातन धर्म के आधार हैं।

2. वैदिक ग्रन्थों में से कौन-से ग्रन्थों को मंत्रों की श्रेणी में रखा गया है? उनका उल्लेख करें?

उत्तर: वैदिक ग्रंथों में मंत्रों की श्रेणी में आने वाले ग्रंथ संहिता कहलाते हैं। इनमें चार वेद शामिल हैं-ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।

3. ‘श्रुति’ कहे जाने वाले साहित्य की श्रेणी में किस प्रकार के ग्रन्थ हैं? उनका उल्लेख करें?

उत्तर: श्रुति, हिन्दू धर्म के सर्वोच्च और सर्वोपरि धर्मग्रन्थों का समूह है। श्रुति में चार वेद आते हैं : ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद और वेदो के सूक्त। हर वेद के चार भाग होते हैं संहिता, ब्राह्मण-ग्रन्थ, आरण्यक और उपनिषद्।

4. ‘ब्राह्मण’ श्रेणी के ग्रन्थों की विषय-वस्तु का विस्तृत विवरण दें?

उत्तर: ‘ब्राह्मण’ श्रेणी के ग्रंथों की विषय-वस्तु मुख्य रूप से यज्ञ संबंधी अनुष्ठान, विधि-विधान, यज्ञों का महत्त्व, कर्मकांड, देवताओं की स्तुति, तथा यज्ञ से प्राप्त होने वाले लाभों पर केंद्रित होती है। ये वेदों की व्याख्या करने वाले ग्रंथ हैं। प्रत्येक वेद से जुड़े प्रमुख ब्राह्मण ग्रंथ निम्नलिखित हैं:

ऋग्वेद: ऐतरेय ब्राह्मण, कौषीतकि ब्राह्मण

यजुर्वेद: शतपथ ब्राह्मण, तैत्तिरीय ब्राह्मण

सामवेद: पंचविंश ब्राह्मण, तांड्य ब्राह्मण

अथर्ववेद: गोपथ ब्राह्मण

5. ‘वेदान्त’ शब्द को परिभाषित करें?

उत्तर: वेदों के अंतिम भाग अर्थात् उपनिषदों में प्रतिपादित दर्शन को वेदांत कहा जाता है। यह शब्द “वेद + अंत” से बना है, जिसका अर्थ है-वेदों का अंतिम ज्ञान। वेदांत का संबंध वेदों के ज्ञानकाण्ड या ज्ञान खंड से है जिसे उपनिषद कहा जाता है वेदांत मुख्यतः आत्मा (आत्मन), ब्रह्म (परम सत्य) और मोक्ष (मुक्ति) पर केंद्रित है।

पाठगत प्रश्न 4.2

1. आप कैसे जानते हैं कि संस्कृत, लैटिन, ग्रीक, हित्ती (हैटाइट) और कैस्साइट भाषाएँ एक ही भाषायी समूह से संबंधित हैं?

उत्तर: संस्कृत, लैटिन, ग्रीक, हित्ती (हैटाइट) और कैस्साइट इन भाषाओं में, समान ध्वनि और अर्थ वाले शब्द हैं, इसलिए हम कह सकते है कि ये भाषाएँ एक ही भाषायी समूह से संबंधित हैं।

2. आर्यों के स्थानांतरण के पुरातात्त्विक साक्ष्य कहाँ से प्राप्त हुए हैं?

उत्तर: आर्यों के स्थानांतरण के पुरातात्त्विक साक्ष्य दक्षिणी साइबेरिया में स्थित एन्द्रोनोवो सभ्यत से प्राप्त हुए हैं।

3. वे कौन-से स्थान हैं, जिन्हें आर्य सभ्यता की विशेषताओं वाले क्षेत्रों के रूप में पहचाना गया है?

उत्तर: बैक्ट्रिया-मार्जियाना ये वो स्थान हैं, जिन्हें आर्य सभ्यता की विशेषताओं वाले क्षेत्रों के रूप में पहचाना गया है।

4. आर्य सभ्यता के प्रमुख स्थलों का उल्लेख करें?

उत्तर: आर्य सभ्यता के प्रमुख स्थल स्वात घाटी, भगवद, हड़प्पा, और राखीगढ़ी हैं। घोड़ों के साक्ष्य सुरकोटदा से, पहियों के अवशेष सिनौली से, अग्नि भट्ठियों के प्रमाण लोथल व कालीबंगा से, और शवदाह की परंपरा उत्तर भारत के वैदिक कालीन स्थलों से प्राप्त हुई है।

पाठगत प्रश्न 4.3

1. ‘सप्तसिंधु’ में शामिल सात नदियों के नाम लिखें?

उत्तर: ‘सप्तसिंधु’ में शामिल सात नदियों के नाम है सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, व्यास, सतलुज और सरस्वती।

2. उत्तर वैदिक काल में आर्य किस क्षेत्र के लोगों के संपर्क में आए?

उत्तर: उत्तर वैदिक काल में आर्य उत्तर प्रदेश (कौशल) और उत्तरी बिहार (विदेह) से लोगों के संपर्क में आए थे।

पाठगत प्रश्न 4.4

1. प्राचीन वैदिक आर्यों के व्यवसाय का वर्णन करें?

उत्तर: प्राचीन वैदिक आर्यों  चरवाह (पशुपालन) और खेती बड़ी करते थे।

2. कुछ उदाहरण देकर, पशुपालन के महत्त्व को रेखांकित करें?

उत्तर: प्राचीन वैदिक आर्य लोग पशुपालक थे। पशुपालन उनका मुख्य व्यवसाय था। ये दूध, मांस और चमड़ा प्राप्त करने के लिए गाय, भैंस, भेड़ें, बकरियां और घोड़े पालते थे। ऋग्वेद में मिले साहित्यिक साक्ष्यों के विश्लेषण से हमें इनके साक्ष्य मिलते हैं।

पशुपालन के अलावा, आर्य लोग कृषि, शिकार, बढ़ईगिरी, रंगाई, बुनाई, रथ निर्माण और धातु ढलाई जैसे अन्य आर्थिक कार्य भी करते थे। वे अपने उत्पादों का विनिमय करते थे, जिसमें गायों का विशेष महत्व था। बलिपूजन के बाद ब्राह्मणों को गायें, घोड़े और स्वर्ण आभूषण दान में दिए जाते थे। इस प्रकार, पशुपालन केवल खाद्य स्रोत ही नहीं, बल्कि आर्थिक समृद्धि और धार्मिक अनुष्ठानों का भी एक महत्वपूर्ण भाग था।

3. प्राचीन आर्यों के जीवन में कृषि का क्या महत्त्व था? विस्तार से लिखें।

उत्तर: प्रारंभिक वैदिक काल में कृषि का महत्व पशुपालन की तुलना में कम था, लेकिन आर्य खेती का ज्ञान रखते थे। वे यव (जौ) जैसी फसलें उगाते थे और पशुधन का उपयोग कृषि कार्यों में करते थे। कृषि भोजन के साथ-साथ वस्तु विनिमय प्रणाली का हिस्सा थी। उत्तरवैदिक काल में लोहे के हल के उपयोग से कृषि अधिक विकसित हुई, जिससे स्थायी बस्तियों का विकास हुआ। धीरे-धीरे, कृषि ने आर्यों के जीवन में एक अनिवार्य भूमिका निभाई और समाज की स्थिरता को बढ़ाया।

4. प्राचीन आर्यों में कौन-सी आर्थिक गतिविधियां प्रचलित थीं? एक सूची बनाएँ।

उत्तर: प्राचीन आर्यों में शिकार, बढ़ईगिरी, प्रशिक्षण, कपड़ा बुनाई, जुआ (द्यूतक्रीड़ा), रथ-निर्माण और धातुओं को गला कर ढलाई आदि आर्थिक गतिविधियां प्रचलित थी।

5. प्राचीन वैदिक काल के दौरान परस्पर विनिमय प्रणाली का वर्णन करें?

उत्तर: प्राचीन वैदिक काल में वस्तुओं का आदान-प्रदान वस्तु-विनिमय प्रणाली से होता था। उस समय गाय को मूल्य का मुख्य साधन माना जाता था और कई वस्तुओं का विनिमय गायों के माध्यम से किया जाता था।

पाठगत प्रश्न 4.5

1. उत्तर वैदिक काल के दौरान कौन-कौन से प्रमुख आर्थिक कार्यकलाप थे?

उत्तर: उत्तर वैदिक काल में कई प्रमुख आर्थिक कार्यकलाप विकसित हुए। इस काल में कृषि का विस्तार हुआ जहां अनाजों की खेती किया जाने लगा था साथ ही तिल से खाद्य तेल निकाला जाता था और इसे धार्मिक कर्मकांडों में प्रयुक्त किया जाता था।

2. कषि का महत्त्व बढ़ने के साथ-साथ आर्यों के जीवन में कौन-से परिवर्तन आए?

उत्तर: कृषि के महत्व बढ़ने से आर्यों के जीवन में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। पहले केवल जौ की खेती होती थी, लेकिन बाद में गेहूं, चावल, दालें, गन्ना, ज्वार-बाजरा जैसी फसलें उगाई जाने लगीं। धार्मिक अनुष्ठानों में अन्न और तिल का दान प्रचलित हुआ। उत्तर वैदिक काल में लोहे के औजारों का उपयोग बढ़ा, जिससे घने जंगल साफ कर खेती योग्य भूमि तैयार की गई। लोहे के हल से गहरी जुताई संभव हुई, जिससे कृषि उत्पादकता बढ़ी और आर्य सभ्यता का विस्तार हुआ।

3. ‘कृषि देवता’ किसे कहा जाता था?

उत्तर: इंद्रदेव को ‘कृषि देवता’ कहा जाता था?

4. ‘तिल को धार्मिक अनुष्ठानों में अत्यधिक महत्त्वपूर्ण क्यों समझा जाता है?

उत्तर: ‘तिल को धार्मिक अनुष्ठानों में अत्यधिक महत्त्वपूर्ण समझा जाता था क्योंकि यह पहला वनस्पति तेल था, जिसका बड़े पैमाने पर प्रयोग होता था।

5. उत्तर वैदिक काल में लोहे के बने उपकरणों के प्रयोग से ‘कृषि में क्या सहायता मिली?

उत्तर: उत्तर वैदिक काल में लोहे के बने उपकरणों के प्रयोग में घने जंगलों की कटाई के लिए औजार बनाने में, लोहे के हल से मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए इसकी जुताई  की जा सकती थी।

6. चित्रित सुरमई बर्तन प्रयोग करने वाले स्थलों के आकार बढ़ने के पीछे क्या कारण थे?

उत्तर: चित्रित सुरमई बर्तन प्रयोग करने वाले स्थलों के आकार बढ़ने का कारण ‘कृषि पर आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार और जनसंख्या में लगातार वद्धि था।

NEW VIDEO CLASS

Subject Ka Complete Video Solution Dekhein

Step-by-step easy concept explanation aur full questions Answer ke liye watch karein ya app download karein:

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Scroll to Top