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NIOS Class 12 History Chapter 5 जनपद से साम्राज्य की ओर 

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NIOS Class 12 History Chapter 5 जनपद से साम्राज्य की ओर 

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Chapter: 5

मॉड्यूल – 1 प्राचीन भारत

पाठगत प्रश्न 5.1

1. छठी शताब्दी ई.पू. के दौरान जिन स्थानों पर लोहे के औजारों के साक्ष्य मिले थे, उनके नाम लिखें।

उत्तर: छठी शताब्दी ई.पू. के दौरान जिन स्थानों पर लोहे के औजारों के साक्ष्य मिले थे, उनके नाम है जखेड़ा, राजघाट, कौशाम्बी, वैशाली और सोनपुर।

2. इस काल के कुछ महत्त्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों और व्यापार केंद्रों का विवरण दें।

उत्तर: इस काल (600-300 ईसा पूर्व) में व्यापारिक मार्गों और व्यापार केंद्रों का व्यापक विस्तार हुआ। उत्तर पथ तक्षशिला से शुरू होकर पंजाब, गंगा-यमुना दोआब होते हुए मगध तक जाता था, जबकि दक्षिण पथ मगध से उज्जयिनी और गुजरात के समुद्र तटीय क्षेत्रों तक फैला था। इसके अलावा, पूर्व-पश्चिम मार्ग बंगाल से उत्तर भारत और उत्तर-पश्चिम तक व्यापार का माध्यम था, वहीं सिंधु-गंगा मार्ग सिंधु नदी से गंगा घाटी तक व्यापारिक गतिविधियों को जोड़ता था। इन मार्गों के माध्यम से प्रमुख व्यापारिक केंद्रों का विकास हुआ, जिनमें पाटलिपुत्र, वाराणसी, कौशाम्बी, श्रावस्ती, राजगृह, वैशाली, चम्पा और उज्जयिनी प्रमुख थे। पाटलिपुत्र तत्कालीन भारत का सबसे बड़ा और समृद्ध व्यापारिक केंद्र था, जबकि वाराणसी अपने कपड़ा उद्योग के लिए प्रसिद्ध था। 

3. प्राचीन सिक्कों को पंच मार्कड सिक्के (सांचे में ढले चिहिनत सिक्के) क्यों कहते थे?

उत्तर: प्राचीन सिक्कों को पंच मार्कड सिक्के (सांचे में ढले चिह्नित सिक्के) इसलिए कहा जाता था क्योंकि इन्हें विशेष प्रकार की ठप्पे (डाई) से अंकित किया जाता था। इन सिक्कों को ढालने की प्रक्रिया में धातु की एक पट्टी या गोली को गरम करके उस पर अलग-अलग प्रतीकों की ठप्पे से निशान लगाए जाते थे। पंच शब्द का अर्थ पाँच होता है, और ये सिक्के आमतौर पर पाँच अलग-अलग चिह्नों से मुद्रांकित होते थे, हालांकि कई सिक्कों पर कम या अधिक चिह्न भी देखे गए हैं। 

4. आजीविका पंथ की नींव किसने रखी?

उत्तर: आजीविका पंथ की नींव मंगाली घोषाल ने रखी थी।

पाठगत प्रश्न 5.2

1. जैन धर्म के सिद्धान्त में ‘त्रिरत्न’ नाम के कौन से तीन तत्त्व हैं?

उत्तर: जैन धर्म के सिद्धान्त में ‘त्रिरत्न’ नाम के तीन तत्त्व हैं उचित विश्वास, उचित ज्ञान और उचित व्यवहार।

2. जैन धर्म की कौन सी दो शाखाएँ हैं?

उत्तर: दिगंबर और श्वेतांबर जैन धर्म के दो शाखाएँ हैं।

3. बुद्ध ने अपना पहला प्रवचन किस स्थान पर दिया था?

उत्तर: बुद्ध ने अपना पहला प्रवचन सारनाथ में दिया था।

4. बौद्ध धर्म में कौन से चार महान सत्य और अष्टांग मार्ग हैं?

उत्तर: बौद्ध धर्म के प्रमुख सिद्धान्तों की संरचना का मूल आधार था। चार महान सत्य या ‘आर्य सत्य’ और ‘अष्टांग मार्ग’ या ‘अष्टांगिका मार्ग’।

(i) प्रथम महान सत्य जिसकी शिक्षा बुद्ध ने दी वह था, यह संसार कष्टों (दुख) से भरा है और पीड़ाओं का महासागर है। 

(ii) दूसरा महान सत्य है ‘दुख समुदय’ अर्थात् प्रत्येक कष्ट का कोई न कोई कारण होता है। 

(iii) तीसरा महान सत्य है ‘दुख निरोध’ अर्थात दुख का निवारण किया जा सकता है 

(iv) चौथा सत्य है ‘दुख विरोध गामिनी प्रतिपदा’ यानी दुख के निवारण का रास्ता है। यदि व्यक्ति दुखों से छुटकारा पाना चाहता है तो उसे अपनी इच्छाओं पर विजय प्राप्त करनी होगी। 

5. ‘दुख’ के संबंध में बुद्ध ने क्या शिक्षा दी?

उत्तर: बुद्ध ने ‘दुख’ के संबंध में अपनी शिक्षाओं में बताया कि यह संसार दुखों से भरा है और प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी रूप में दुख से ग्रस्त रहता है। संसार में जन्म, बुढ़ापा, बीमारी, मृत्यु, प्रियजन से वियोग, अप्रिय वस्तु का सामना और इच्छाओं की पूर्ति न होना—ये सभी दुख के रूप हैं। सभी दुखों का कारण तृष्णा (इच्छा या लोभ) है। मनुष्य की इच्छाएं उसे बार-बार जन्म और मृत्यु के चक्र में डालती हैं।

6. बुद्ध ने अपने सिद्धान्तों के प्रचार के लिए किस भाषा का प्रयोग किया?

उत्तर: बुद्ध ने अपने सिद्धान्तों के प्रचार के लिए पलि भाषा का प्रयोग किया।

7. महायान और हीनयान में क्या अन्तर है?

उत्तर: महायान और हीनयान के अन्तर निम्नलिखित है:

अन्तरहीनयानमहायान
मतलब‘हीनयान’ का अर्थ है ‘छोटी गाड़ी’ या ‘संकीर्ण मार्ग’। यह मूल बौद्ध धर्म के अधिक निकट है।‘महायान’ का अर्थ है ‘बड़ी गाड़ी’ या ‘विशाल मार्ग’। यह अधिक उदार विचारधारा अपनाता है।
लक्ष्यव्यक्तिगत मुक्ति (निर्वाण) पर अधिक बल देता है।न केवल स्वयं के निर्वाण की प्राप्ति, बल्कि सभी प्राणियों की मुक्ति का प्रयास।
उपासनाबुद्ध को एक महापुरुष और गुरु के रूप में मानते हैं, उनकी पूजा नहीं की जाती।उपासना: बुद्ध को ईश्वर के रूप में पूज्य माना जाता है, और उनकी मूर्तियों की पूजा की जाती है।
भाषापालि भाषा में इसके ग्रंथ लिखे गए।संस्कृत में इसके ग्रंथ लिखे गए।
मुख्य ग्रंथत्रिपिटक (विनय पिटक, सुत्त पिटक, अभिधम्म पिटक)।महायान सूत्र, जैसे कि लोटस सूत्र और प्रज्ञापारमिता सूत्र।

8. साहित्य और कला के क्षेत्र में बौद्ध धर्म ने क्या योगदान किया?

उत्तर: बौद्ध धर्म ने साहित्य और कला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। साहित्यिक दृष्टि से, बौद्ध धर्म से जुड़े कई ग्रंथों की रचना हुई, जिनमें त्रिपिटक (विनय पिटक, सुत्त पिटक और अभिधम्म पिटक) सबसे प्रमुख हैं। इसके अलावा, मिलिन्दपानहो, बुद्धचरित, ललितविस्तर और महावंश जैसे ग्रंथों ने बौद्ध धर्म के सिद्धांतों और इतिहास को संरक्षित किया। कला और वास्तुकला के क्षेत्र में भी बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव पड़ा। बौद्ध स्तूपों में सांची, अमरावती, सारनाथ और भरहुत के स्तूप प्रमुख उदाहरण हैं।

पाठगत प्रश्न 5.3

1. छठीशताब्दी ईसा पूर्व काल के किन्ही चार महाजन पदों का नाम लिखें।

उत्तर: छठीशताब्दी ईसा पूर्व काल के  चार महाजन पदों का नाम निम्नलिखित है-

(i) मगध: इसकी राजधानी राजगृह (बाद में पाटलिपुत्र) थी। यह सबसे शक्तिशाली महाजनपद बना।

(ii) कोशल: इसकी राजधानी श्रावस्ती थी, और यह भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या को भी शामिल करता था।

(iii) वज्जि: इसकी राजधानी वैशाली थी, और यह गणराज्य प्रणाली वाला महाजनपद था।

(iv) अवंति: इसकी राजधानी उज्जयिनी थी, और यह मालवा क्षेत्र में स्थित था।

2. गणसंघ और राज्यश्तंत्र में क्या अंतर था?

उत्तर: गणसंघ और राज्यतंत्र में मुख्य अंतर उनकी शासन व्यवस्था में था। 

गणसंघ: गणसंघ एक जनतांत्रिक शासन प्रणाली थी, जहाँ शासन का संचालन एक परिषद या सभा द्वारा किया जाता था, जिसमें कुलीन परिवारों या प्रमुख व्यक्तियों की भागीदारी होती थी। इसमें निर्णय बहुमत के आधार पर लिए जाते थे, और कोई एक व्यक्ति निरंकुश सत्ता नहीं रखता था।

राज्यतंत्र: राज्यतंत्र में शासन एक वंशानुगत राजा द्वारा संचालित होता था, जिसकी सत्ता केंद्रित और निरंकुश होती थी। राज्यतंत्र में राजा स्वयं निर्णय लेता था, जबकि गणसंघ में परिषद के सदस्य मिलकर प्रशासन का संचालन करते थे। गणसंघ में शासन व्यवस्था अधिक जनतांत्रिक थी, जबकि राज्यतंत्र में राजा के अधीन मंत्रिमंडल और अधिकारियों की व्यवस्था होती थी। 

3. छठीशताब्दी ई. पू. काल में सबसे महत्त्वपूर्ण गणसंघ कौन सा था?

उत्तर: वैशाली छठीशताब्दी ई. पू. काल में सबसे महत्त्वपूर्ण गणसंघ था।

पाठगत प्रश्न 5.4

1. बिंबिसार ने अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए किन नीतियों को अपनाया?

उत्तर: बिंबिसार ने अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए विवाह संबंध, युद्ध और कूटनीति की नीति अपनाई।

2. मगध के उत्थान में भौगोलिक तत्त्वों ने कैसे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई?

उत्तर: मगध के उत्थान में उपजाऊ भूमि, नदियाँ (गंगा), लोहे की उपलब्धता और सुरक्षित स्थिति ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

3. मगध की राजधानी का क्या नाम था?

उत्तर: मगध की राजधानी का नाम राजगृह (राजगीर) था।

4. दो शासकों के नाम बताएँ जिनके साथ अजातशत्रु ने युद्ध लड़े?

उत्तर: अजातशत्रु ने कोशल के राजा प्रसेंनजित और लिच्छवि गणराज्य के साथ युद्ध लड़े।

5. नंद राजवंश का सबसे प्रमुख शासक कौन था?

उत्तर: नंद राजवंश का सबसे प्रमुख शासक महापद्म नंद था।

6. किसृशासक के काल में द्वितीय बौद्ध धर्म सम्मेलन का आयोजन हुआ?

उत्तर: कालाशोक के शासनकाल में द्वितीय बौद्ध धर्म सम्मेलन का आयोजन हुआ।

पाठगत प्रश्न 5.5

1. मौर्यकालीन इतिहास लिखने के लिए कौन-कौन से मुख्य स्त्रोत हैं?

उत्तर: मौर्यकालीन इतिहास के प्रमुख स्रोतों में साहित्यिक, पुरातात्विक और विदेशी विवरण शामिल हैं। साहित्यिक स्रोतों में अर्थशास्त्र (कौटिल्य), बौद्ध ग्रंथ (दीपवंश, महावंश) और जैन ग्रंथ (परिशिष्ट पर्वन) प्रमुख हैं। पुरातात्विक स्रोतों में अशोक के शिलालेख और स्तंभलेख, पाटलिपुत्र के अवशेष, स्तूप और अन्य संरचनाएँ शामिल हैं। 

2. अशोक के अधिकांश शिलालेख किस भाषा और लिपि में लिखे गए हैं?

उत्तर: अशोक के अधिकांश शिलालेख प्राकृत भाष और ब्राह्‌मी लिपि में लिखे गए हैं।

3. इंडिका का लेखक कौन है?

उत्तर: इंडिका का लेखक मैगस्थनीज़ थे।

4. अंतिम मौर्य शासक कौन था?

उत्तर: बहद्रथ मौर्य शासक कौन था।

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