🪔 Diwali Maha Offer Class 10 & 12 Bundles @ ₹299 ₹599
Ends in:
03d
14h
35m
40s

NIOS Class 12 History Chapter 13 अर्थव्यवस्था

NIOS Class 12 History Chapter 13 अर्थव्यवस्था Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapters NIOS Class 12 History Chapter 13 अर्थव्यवस्था Notes and select need one. NIOS Class 12 History Chapter 13 अर्थव्यवस्था Question Answers Download PDF. NIOS Study Material of Class 12 History Notes Paper 315.

NIOS Class 12 History Chapter 13 अर्थव्यवस्था

Also, you can read the NIOS book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per National Institute of Open Schooling (NIOS) Book guidelines. These solutions are part of NIOS All Subject Solutions. Here we have given NIOS Class 12 History Hindi Medium Solutions, NIOS Senior Secondary Course History Notes in Hindi for All Chapter, You can practice these here.

Chapter: 13

मॉड्यूल – 2 मध्यकालीन भारत

पाठगत प्रश्न 13.1

1. कृषि के लिए भूमि की क्या उपलब्धता थी?

उत्तर: मध्यकालीन भारतीय इतिहास के सम्पूर्ण काल के दौरान किसानों द्वारा खेती की जाने वाली वास्तविक ज़मीन से बहुत अधिक फालतू ज़मीन मौजूद थी। नए-नए क्षेत्रों को खेती के अधीन लाकर कृषि उत्पादों में वृद्धि के प्रयास किए जाते थे।

2. मध्यकालीन भारत की चार खाद्य फसलों और चार नकदी फसलों की सूची बनाए।

उत्तर: मध्यकालीन भारत की चार खाद्य फसलों और चार नकदी फसलों की सूची निम्नलिखित है-

खाद्य फसलोंनकदी फसलों
चावलगन्ना
गेहूँअफीम
जैनील
चना, मूंगरेशम

3. मध्यकाल के दौरान भारत में जिन फसलों का आगमन हुआ, उनमें से चार के नाम लिखें।

उत्तर: मध्यकाल के दौरान भारत में जिन फसलों का आगमन हुआ, उनके नाम तम्बाकू, अनानास, चैरी, पपीता।

4. पर्शियन व्हील (रहट) क्या था?

उत्तर: पर्शियन व्हील (रहट) इस युग की सबसे उच्च वाटर लिफ्टिंग डिवाइस (जल उठाने की युक्ति) थी। एक गियर की यांत्रिकी सहित, एक पहिये के रिम पर, हार की तरह चारों ओर बर्तनों की एक लड़ी जोड़ दी जाती है। पशु-शक्ति के बल से इस पहिये को घुमाया जाता था, जिससे एक के पीछे एक बैंचे डिब्बों से पानी ऊपर चढ़ता रहता था।

पाठगत प्रश्न 13.2

1. ‘खेत बटाई’ और ‘लेंग बटाई’ में क्या अन्तर था?

उत्तर: फसल बांटने के तरीके के रूप में, ‘खेत बटाई किसानों और राज्य के बीच खेत में खड़ी फसल के बंटवारे को कहते हैं, ‘लेंग बटाई यानी फसल की कटाई के बाद फसल की छंटाई किए बगैर उसके ढेर बनाना।

2. मध्यकालीन भारत के तीन शासकों के नाम लिखें, जिनकी भू-राजस्व नीतियों ने भू-राजस्व प्रशासन की व्यापक व्यवस्था के विकास में योगदान किया था।

उत्तर: अलाउद्दीन खिलजी, शेरशाह सूरी और अकबर मध्यकालीन भारत के तीन ऐसे शासक है जिनकी भू-राजस्व नीतियों ने भू-राजस्व प्रशासन की व्यापक व्यवस्था के विकास में योगदान किया था।

3. पोलाज, परती और चच्चर भूमि क्या थीं?

उत्तर: कृषि योग्य भूमि को नापने के बाद, भूमि की उपजाऊ शक्ति के आधार पर इसे तीन वर्गों में बांटा गया था-अच्छी, मध्यम और खराब भूमि। खेती करते रहने के आधार पर भूमि को आगे और चार वर्गों में बांटा गया था जैसे-पोलाज, परती, चच्चर और बंजर। पोलाज भूमि वह थी जिससे हर वर्ष दो फसलें ली जाती थीं, परती भूमि को दो फसलों के बाद उसकी उपजाऊ शक्ति की पुनः पूर्ति करने के लिए, कुछ समय के लिए खाली (बगैर खेती किए हुए) छोड़ना पड़ता था। चच्चर भूमि वह अनुउपजाऊ भूमि का टुकड़ा होता था, जिस पर हर तीसरे या चौथे वर्ष के अंतराल पर फसल उगाई जाती थी, और बंजर भूमि खेती के लिए उपयुक्त नहीं थी और इस पर शायद ही कभी खेती की जाती थी।

4. ‘पट्टा’ और ‘कबूलियत’ क्या है?

उत्तर: ये भूमि-राजस्व से जुड़े दो दस्तावेज़ थे। ‘पट्टा’ किसी व्यक्तिगत किसान को दिया जाने वाला वह दस्तावेज था, जिसमें उसकी भूमि की श्रेणी और विभिन्न फसलों पर लगने वाले भूमि के लगान का पूरा विवरण उल्लिखित होता था। ‘कबूलियत एक सहमति पत्र था, जिसके द्वारा किसान अपनी भूमि पर देय भूमि लगान, राज्य को भुगतान करने का वचन देता था।

पाठगत प्रश्न 13.3

1. राजपुत्र, राणका और महासामन्त कौन थे?

उत्तर: यह शब्द, दिल्ली सलतनत की स्थापना से पहले, वंशानुगत भूमि पर अधिकार प्राप्त करने वाले वर्ग पर लागू होता था। ये लोग भू-राजस्व एकत्र करने की प्रक्रिया में, राजस्व प्राप्त करने में राज्य की सहायता करते थे।

2. मुक़्क़दम और पटेल कौन थे?

उत्तर: ‘मुक्कदम और पटेल’ क्रमशः उत्तर और दक्षिण भारत में गांव के मुखिया होते थे, जो अपने संबंधित गांव में भूमि का लगान एकत्र करने और गांव में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार थे।

3. मुगल काल के दौरान हुए कुछ महत्त्वपूर्ण किसान विद्रोहों की सूची बनाएं।

उत्तर: यह विद्रोह जाटों, सिक्खों, मराठों और सतनामियों में था।

मुगल काल के प्रमुख किसान विद्रोह:

(i) जाट विद्रोह: मथुरा क्षेत्र में, नेता: गोकुला, राजा राम।

(ii) सिक्ख विद्रोह: गुरु गोविंद सिंह के नेतृत्व में, धार्मिक अत्याचार के विरोध में।

(iii) मराठा विद्रोह: शिवाजी के नेतृत्व में, स्वराज्य की स्थापना के लिए।

(iv) सतनामी विद्रोह: हरियाणा क्षेत्र में, सामाजिक और धार्मिक उत्पीड़न के विरुद्ध।

पाठगत प्रश्न 13.4

1. भारत के पाँच मध्यकालीन मुख्य शिल्पों के नाम लिखें?

उत्तर: मध्यकालीन भारत के पाँच प्रमुख शिल्प थे:

(i) कपड़ा बुनाई (टेक्सटाइल)।

(ii) रंगाई और ब्लीचिंग। 

(iii) चीनी का निर्माण।

(iv) खनिज निकालना।

(v) तुविज्ञान (धातु कर्म)।

2. कलमी शोरा उत्पादन के तीन मुख्य केन्द्रों के नाम लिखें?

उत्तर: कलमी शोरा उत्पादन के तीन मुख्य केन्द्रों के नाम है अहमदाबाद, बड़ीदा और पटनाm

3. हीरा उत्पादन के चार मुख्य केन्द्रों के नाम लिखें?

उत्तर: हीरा उत्पादन के चार मुख्य केन्द्रों के नाम गोलकुंडा, बैरागढ़, पन्ना और खोखरा है।

4. कपड़ों की बुनाई में प्रयुक्त होने वाली तीन महत्त्वपूर्ण तकनीकी युक्तियों के नाम लिखें?

उत्तर: कपड़ों की बुनाई में प्रयुक्त होने वाली तीन महत्त्वपूर्ण तकनीकी युक्तियों के नाम स्पिनिंग व्हील (चरखा), पिट लूम और ड्रॉलूम।

पाठगत प्रश्न 13.5

1. ऐसे पाँच देशों के नाम लिखें, जिनके साथ मध्यकाल के दौरान भारत में सड़क मार्ग से व्यापारिक संबंध थे।

उत्तर: भारत ने सड़क मार्ग से, चीन, अरब, मिस्र, फारस और अफ‌गानिस्तान से व्यापार किए थे।

2. ‘हाट’ क्या थी?

उत्तर: ‘हाट’ आवधिक स्थानीय बाजार था, जो कि सप्ताह के निर्धारित दिनों को लगता था। इन बाज़ारों से स्थानीय लोग अपनी दैनिक इस्तेमाल की चीजें खरीदते थे।

3. मध्यकालीन बंगाल के कुछ प्रमुख व्यापार केन्द्रों के नाम लिखें?

उत्तर: बंगाल के कुछ प्रमुख व्यापार केन्द्र थे, हुगली, ढाका, मुर्शिदाबाद, सतगांव और पटना।

4. निम्नलिखित शब्दों की संक्षिप्त व्याख्या करें: कारवांनी, खत्री, कोमाती, बोहरा, चैत्ती

उत्तर: ‘कारवांनीस’: एक फारसी (पर्शियन) शब्द है, जिसे उन व्यापारियों के लिए उपयोग किए जाता था, जो समूहों में चलते थे और एक से दूसरे स्थान पर अनाज वहन करते थे।

खत्री: खत्री, पंजाब में अनाज के व्यापारियों (आढ़तियों) का एक प्रमुख व्यापारिक समुदाय था।

कोमाती: कोमाती, गोलकुंडा का एक प्रमुख व्यापारी समूह था (तेलुगू बोलने वाला)

बोहरा: बोहरा, प्रमुख व्यापारिक समुदाय था, जिनकी गुजरात, उज्जैन और बुरहानपुर में काफी संख्या में उपस्थिति थी।

चैत्ती: दक्षिण भारत का प्रमुख व्यापारिक समूह।

पाठान्त प्रश्न

1. मध्यकालीन भारत में खेती-बाड़ी की सीमा क्या थी?

उत्तर: मध्यकालीन भारत में खेती-बाड़ी की सीमा को इस दृष्टिकोण से समझा जा सकता है कि कुल खेती योग्य भूमि में से कितनी भूमि पर वास्तव में खेती की जा रही थी। उस समय देश में कृषि योग्य भूमि पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध थी, लेकिन सभी भूमि पर जुताई नहीं हो रही थी।

कई क्षेत्रों में उपजाऊ भूमि होते हुए भी वे वन, घास के मैदान या अनुपयोगी पड़े थे। इसका मतलब यह है कि खेती के विस्तार की संभावना मौजूद थी और यदि अधिक भूमि को कृषि के अधीन लाया जाता, तो उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव थी।

उदाहरण के लिए, समकालीन संसाधनों से हमें सूचना मिली है कि मुगल सल्तनत की अवधि के दौरान गंगा-यमुना दोआब की उपजाऊ भूमि के विशाल भूमि-क्षेत्र, वनों और घास के मैदानों से ढके हुए थे। मुगल काल में भी पर्याप्त भूमि लोगों के पास उपलब्ध थी।

2. ‘पर्शियन व्हील’ (रहट) से आप क्या समझते हैं? यह कैसे काम करता था?

उत्तर: ‘पर्शियन व्हील’ को साकिया कहते हैं और यह कुओं से पानी उठाने वाला एक ज़मीनी उपकरण है, जो ज़्यादातर पंप की तरह होता है। दरअसल कर्नाटक के कोलार के कुछ हिस्सों में इसे ‘बकेट पंप’ कहा जाता है। भारत में भूजल स्तर में गिरावट के कारण पर्शियन व्हील्स खुले कुओं से पानी निकालने के लिए पानी तक नहीं पहुँच पा रहे हैं। फ़ारसी व्हील एक यांत्रिक जल उठाने वाला उपकरण है जिसे आमतौर पर बैल, भैंस या ऊँट जैसे भारवाहक जानवरों द्वारा संचालित किया जाता है। इसका उपयोग जल स्रोतों से पानी उठाने के लिए किया जाता है, आमतौर पर खुले कुओं से ।।

पर्शियन व्हील (रहट) का उपयोग विशेष रूप से सिंचाई के लिए किया जाता था। सल्तनत काल के दौरान भारत में इस यंत्र का उपयोग प्रारंभ हुआ और यह उस समय की सबसे उन्नत तकनीक मानी जाती थी। रहट एक बड़े पहिए के रूप में होता था, जिसके किनारों पर छोटे-छोटे बर्तन लगे होते थे। इस अवधि के दौरान उपयोग में लाई जाने वाली जल उठाने की सभी युक्तियों (यंत्रों) में से, सबसे उच्च स्तरीय थी। इस पद्धति में एक पहिए के रिम के चारों ओर छोटे-छोटे डिब्बों की शक्ल के बर्तनों की लड़ी जुड़ी होती थी, गियर की एक यांत्रिकी भी इसके साथ जुड़ी होती थी और पशु शक्ति के बल पर इस पहिये को घुमाया जाता था।

NEW VIDEO CLASS

Subject Ka Complete Video Solution Dekhein

Step-by-step easy concept explanation aur full questions Answer ke liye watch karein ya app download karein:

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Scroll to Top