NIOS Class 10 Social Science Chapter 25 राष्ट्रीय एकीकरण तथा पंथ निरपेक्षता

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NIOS Class 10 Social Science Chapter 25 राष्ट्रीय एकीकरण तथा पंथ निरपेक्षता

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Chapter: 25

मॉड्यूल – 4 समसामयिक भारत : मुद्दे एवं चुनौतियाँ

पाठगत प्रश्न 25.1

1. खाली स्थानों को भरिए:

(i) राष्ट्र एक ऐसा देश है ______________।

उत्तर: राष्ट्र एक ऐसा देश है जहाँ की सामाजिक-आर्थिक तथा राजनीतिक संरचना एकीकृत होती है

(ii) राष्ट्रीय समाकलन देश के नागरिकों में एक ____________ का बोध है।

उत्तर: राष्ट्रीय समाकलन देश के नागरिकों में एक सामूहिक पहचान का बोध है।

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(iii) इस तरह का राष्ट्रीय समाकलन एक _____________ के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण होता है।

उत्तर: इस तरह का राष्ट्रीय समाकलन एक मजबूत एवं प्रगतिशील राष्ट्र के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण होता है।

(iv) भारत में दुनिया के सभी प्रमुख धर्मों जैसे _____________ का आचरण होता है।

उत्तर: भारत में दुनिया के सभी प्रमुख धर्मों जैसे हिन्दू, इस्लाम, ईसाई, बौद्ध, जैन, सिक्ख तथा पारसी का आचरण होता है।

2. राष्ट्रीय समाकलन क्यों जरूरी है?

उत्तर: राष्ट्रीय समाकलन किसी भी ऐसे राष्ट्र के लिए अनिवार्य है, जहाँ सामाजिक-सांस्कृतिक, धार्मिक, भाषागत तथा भौगोलिक विविधताएं हैं। हमारे देश के लिए तो यह और भी अधिक अनिवार्य है। भारत एक विशाल देश है। यहाँ दुनिया के सभी प्रमुख धर्मों का आचरण होता है। यहाँ हजार से भी अधिक भाषाएं हैं। इन विविधताओं के बावजूद भारत का एक राजनीतिक अस्तित्व है। हमलोगों को एक-दूसरे के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व बनाए रखना है। यह तभी संभव है जब सही अर्थ में राष्ट्रीय समाकलन साकार हो।

पाठगत प्रश्न 25.2

1. खाली स्थानों को भरिए:

(क) ब्रिटिश शासन के दौरान भारत भौगोलिक दृष्टि से एकीकृत हुआ लेकिन यह एक _____________ राष्ट्र नहीं था।

उत्तर: ब्रिटिश शासन के दौरान भारत भौगोलिक दृष्टि से एकीकृत हुआ लेकिन यह एक समाकलित राष्ट्र नहीं था।

(ख) स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पहली बार _____________ की भावना एवं संवेदनशीलता का संचार हुआ।

उत्तर: स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पहली बार राष्ट्रत्व की भावना एवं संवेदनशीलता का संचार हुआ।

(ग) स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विभिन्न _____________ के लोग एकजुट हुए ताकि ब्रिटिश सत्ता को भारत से निकाल फेंका जा सके।

उत्तर: स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों, धर्मों, संस्कृतियों, समुदायों तथा जातियों के लोग एकजुट हुए ताकि ब्रिटिश सत्ता को भारत से निकाल फेंका जा सके।

(घ) भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस का गठन _____________ में हुआ था।

उत्तर: भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस का गठन 1885 में हुआ था।

2. क्या आप यह मानते हैं कि भारतीय संविधान राष्ट्रीय समाकलन पर चल देता है? कैसे?

उत्तर: भारतीय संविधान राष्ट्रीय समाकलन पर बहुत अधिक बल देता है। इसकी प्रस्तावना में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता को एक प्रमुख उद्देश्य के रूप में शामिल किया गया है। यह भी प्रावधान किया गया है कि भारत की सम्प्रभुता तथा एकता एवं अखण्डता की रक्षा करना तथा उन्हें अच्क्षुण्ण बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। संविधान ने एक मजबूत केन्द्र वाली संघीय व्यवस्था का प्रावधान किया है।

पाठगत प्रश्न 25.3

1. सांप्रदायिकता का क्या अर्थ है?

उत्तर: साम्प्रदायिकता तब जन्म लेती है जब एक धर्म के लोग अपने धर्म के प्रति अत्यधिक प्रेम तथा दूसरे धर्मों के विरूद्ध घृणा करने लगते हैं। इस तरह की भावना धार्मिक कट्टरवाद और धर्मान्धता के लिए खतरा साबित होती है।

2. क्या आप इससे सहमत हैं कि क्षेत्रीयवाद न्यायोचित हो सकता है? अपने उत्तर का कारण बताइए।

उत्तर: क्षेत्रीयवाद न्यायोचित हो सकता है, यदि माँगे किसी क्षेत्र की लगातार अवहेलना पर आधारित हो। उस क्षेत्र या उस क्षेत्र के राज्यों को विकास के समग्र ढाँचे में क्रियान्वित हो रहे कार्यक्रमों या उद्योगों को विकसित करने की प्रक्रिया में उचित हिस्सा नहीं मिला हो।

3. गैर-हिन्दी भाषा भाषी राज्य हिन्दी भाषा को राजभाषा बनाए जाने का विरोध क्यों करते हैं?

उत्तर: चूंकि अधिकतम लोग हिन्दी नहीं जानते हैं लेकिन ऐसे गैर हिन्दी भाषी राज्य हैं जहाँ हिन्दी को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह आवश्यक है कि हिन्दी-भाषी राज्य भी गैर-हिन्दी भाषाओं, जैसे, तमिल, तेलुगू, मलयालम, कन्नड़, उड़िया या बंगाली या असमी को अपने क्षेत्रों में बढ़ावा दें।

4. उग्रवाद राष्ट्रीय समाकलन के लिए एक खतरा क्यों है?

उत्तर: क्योंकि ये आन्दोलन प्रायः हिंसा का प्रयोग करते हैं, सार्वजनिक जीवन में भय पैदा करते हैं, सरकारी कर्मचारी गणों तथा लोगों की जान लेते हैं, तथा सार्वजनिक सम्पत्ति को बरवाद करते हैं। ऐसे आन्दोलनों में प्रायः युवा भाग लेते हैं। उनके द्वारा हथियार उठाने का आधारभूत कारण उनकी सामाजिक-आर्थिक विकास से वंचित रहने की लगातार बनी हुई स्थिति है। लेकिन इस तरह की उग्रवादी आन्दोलन प्रभावित क्षेत्रों में कानून एवं व्यवस्था तथा वहां के लोगों द्वारा शांतिपूर्ण जीवन यापन के लिए खतरा है।

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