NIOS Class 10 Social Science Chapter 19 स्थानीय शासन तथा क्षेत्रीय प्रशासन

NIOS Class 10 Social Science Chapter 19 स्थानीय शासन तथा क्षेत्रीय प्रशासन Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapters NIOS Class 10 Social Science Chapter 19 स्थानीय शासन तथा क्षेत्रीय प्रशासन Notes in Hindi and select need one. NIOS Class 10 Social Science Question Answers Download PDF. NIOS Study Material of Class 10 Social Science Notes Paper Code: 213.

NIOS Class 10 Social Science Chapter 19 स्थानीय शासन तथा क्षेत्रीय प्रशासन

Also, you can read the NIOS book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per National Institute of Open Schooling (NIOS) Book guidelines. These solutions are part of NIOS All Subject Solutions. Here we have given NIOS Class 10 Social Science Notes, NIOS Secondary Course Social Science Solutions in Hindi Medium for All Chapter, You can practice these here.

Chapter: 19

मॉड्यूल – 3 लोकतन्त्र की कार्यप्रणाली

पाठगत प्रश्न 19.1

1. स्थानीय शासन को परिभाषित कीजिए। दो उदाहरण देकर स्थानीय शासन की आवश्यकता की पुष्टि कीजिए।

उत्तर: स्थानीय शासन वास्तव में, स्थानीय लोगों का, स्थानीय लोगों के द्वारा, स्थानीय लोगों के लिए शासन है। यह शासन का तीसरा स्तर है जिसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर विकास और सामाजिक न्याय प्रदान करना तथा सत्ता के विकेन्द्रीकरण के रूप में कार्य करना है। स्थानीय शासन की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि यह लोगों की दैनिक समस्याओं का समाधान करता है। 

इसके दो उदाहरण हैं:

(i) गाँव या शहर में सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था करना।

(ii) गलियों, नालियों की सफाई और सड़कों की रोशनी की देखभाल करना। स्थानीय शासन लोगों को ‘जन्म से लेकर मृत्यु’ तक सेवाएँ प्रदान करता है, जो इसकी आवश्यकता की पुष्टि करता है।

2. प्राचीन काल से वर्तमान समय तक पंचायती राज व्यवस्था के विकास का वर्णन कीजिए।

उत्तर: भारत में प्राचीन काल से ही समुदाय आधारित स्थानीय संस्थाओं (जैसे पंचायत या बिरादरी) का अस्तित्व रहा है, जिनका नेतृत्व गाँव के वयोवृद्ध लोग करते थे। स्वतंत्रता के बाद, संविधान निर्माताओं ने राज्य के नीति-निदेशक सिद्धान्तों में ग्राम पंचायतों के गठन की व्यवस्था की। वर्तमान पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत सामुदायिक विकास कार्यक्रम के बाद हुई, जब 1957 में बलवन्त राय मेहता समिति ने त्रिस्तरीय ढांचे (ग्राम, ब्लॉक और जिला स्तर) का सुझाव दिया। 1958 में राष्ट्रीय विकास परिषद् ने इसे मंजूरी दी। अंततः, 1992 में 73वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा दिया गया, जिससे इसका वर्तमान स्वरूप निर्धारित हुआ।

3. जिस क्षेत्र में आप रहते हैं वहाँ जो स्थानीय स्वशासी संस्थाएँ कार्यरत हैं उनकी पहचान कीजिए और उनका नाम बताइए।

उत्तर: भारत में स्थानीय शासन की संस्थाएँ दो प्रकार की होती हैं: ग्रामीण क्षेत्रों के लिए और शहरी क्षेत्रों के लिए। यदि आप गाँव में रहते हैं, तो वहाँ ‘ग्राम पंचायत’ कार्यरत होगी। यदि आप शहर में रहते हैं, तो वहाँ की जनसंख्या के आधार पर ‘नगर निगम’ (बड़े शहरों में), ‘नगर परिषद’ (छोटे शहरों में), या ‘नगर पंचायत’ (संक्रमणकालीन क्षेत्रों में) कार्यरत हो सकती है। आप अपने माता-पिता या अध्यापक से पूछकर अपनी विशिष्ट संस्था का नाम (जैसे- पटना नगर निगम या रामपुर ग्राम पंचायत) लिख सकते हैं।

4. स्थानीय संस्थाओं द्वारा प्रदान की गई विभिन्न सुविधाओं का हमारे जीवन की गुणवत्ता पर किस हद तक प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: स्थानीय संस्थाओं द्वारा प्रदान की गई सुविधाओं का हमारे जीवन की गुणवत्ता पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ये संस्थाएँ पानी के रखरखाव, जल निकासी व्यवस्था, और पेयजल आदि की व्यवस्था करती हैं, जो स्वस्थ जीवन के लिए अनिवार्य हैं। स्थानीय शासन लोगों को व्यापक और महत्त्वपूर्ण सेवाएँ देता है, इसीलिए कहा जाता है कि यह लोगों को ‘पालने (जन्म) से लेकर कब्र (मृत्यु)’ तक सेवाएँ प्रदान करता है। यदि ये संस्थाएँ गलियों का निर्माण, सफाई और स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाएँ सही ढंग से प्रदान करें, तो नागरिकों का जीवन स्तर बेहतर हो जाता है।

5. 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1992 ने पंचायती राज संस्थाओं को कैसे प्रभावित किया है।

उत्तर: 1992 के 73वें संविधान संशोधन अधिनियम ने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा देकर एक नए युग की शुरुआत की।

इसने संस्थाओं को निम्न प्रकार से प्रभावित किया:

(i) त्रिस्तरीय ढांचा: इसने ग्राम, ब्लॉक और जिला स्तर पर त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की स्थापना की।

(ii) नियमित चुनाव: हर पाँच वर्ष में नियमित चुनाव अनिवार्य कर दिए गए।

(iii) आरक्षण: अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में और महिलाओं के लिए कम से कम एक-तिहाई (1/3) सीटें आरक्षित की गईं।

(iv) आयोगों का गठन: स्वतंत्र चुनाव कराने के लिए ‘राज्य चुनाव आयोग’ और वित्तीय स्थिति सुधारने के सुझाव देने के लिए ‘राज्य वित्त आयोग’ की स्थापना का प्रावधान किया गया।

(v) शक्तियाँ: ग्यारहवीं अनुसूची में दिए गए 29 विषयों पर कार्य करने और आर्थिक विकास की योजना बनाने की शक्ति पंचायतों को दी गई।

NEW VIDEO CLASS

Subject Ka Complete Video Solution Dekhein

Step-by-step easy concept explanation aur full questions Answer ke liye watch karein ya app download karein:

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Scroll to Top