NIOS Class 10 Social Science Chapter 18 भारत एक कल्याणकारी राज्य

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NIOS Class 10 Social Science Chapter 18 भारत एक कल्याणकारी राज्य

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Chapter: 18

मॉड्यूल – 3 लोकतन्त्र की कार्यप्रणाली

पाठगत प्रश्न 18.1

1. कल्याणकारी राज्य से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: कल्याणकारी राज्य शासन व्यवस्था की एक ऐसी संकल्पना है जिसमें राज्य नागरिकों के आर्थिक तथा सामाजिक कल्याण को बढ़ावा तथा सुरक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। एक कल्याणकारी राज्य अवसर की समानता तथा सम्पत्ति के उचित वितरण के सिद्धान्तों पर आधारित होता है।

2. संवधिान निर्माताओं ने भारत को कल्याणकारी राज्य बनाने का निर्णय क्यों लिया?

उत्तर: जब भारत स्वतन्त्र हुआ तो इसके सामने असंख्य समस्याएँ तथा चुनौतियों थीं। आर्थिक रूप से भारत की हालत अत्यन्त दयनीय थी। सामाजिक रूप से भारत में अनेकों समस्याएँ थीं। व्यापक सामाजिक असमानता थी तथा समाज के कमजोर वर्ग बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित थे। संविधान निर्माता इन समस्याओं से यहुत अच्छी तरह से परिचित थे। इसलिए उन्होंने निश्चय किया कि भारत एक कल्याणकारी राज्य होगा।

3. भारतीय समाज के कम-से-कम दो वर्गों का नाम लिखिए जो प्रचलित सामाजिक आसमानताओं के प्रतिकूल प्रभाव से पीड़ित थे?

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उत्तर: भारतीय समाज में प्रचलित सामाजिक असमानताओं से पीड़ित दो प्रमुख वर्ग महिलाएं तथा दलित वर्ग (समाज के कमजोर वर्ग) हैं।

पाठगत प्रश्न 18.2

1. खाली स्थान भरिए:

(क) राज्य के नीति निदेशक तत्वों का उ‌द्देश्य भारत को एक ____________ राज्य बनाना है।

उत्तर: राज्य के नीति निदेशक तत्वों का उ‌द्देश्य भारत को एक कल्याणकारी राज्य बनाना है।

(ब) ये सिद्धान्त भारत की ______________ के लिए दिशा-निदेश हैं, जिनको उन्हें कानून तथा नीतियों के निर्माण के समय ध्यान में रखना है।

उत्तर: ये सिद्धान्त भारत की केन्द्रीय तथा राज्य सरकारें के लिए दिशा-निदेश हैं, जिनको उन्हें कानून तथा नीतियों के निर्माण के समय ध्यान में रखना है।

(स) निदेशक सिद्धान्तों का विचार _____________ के संविधान से लिया गया है।

उत्तर: निदेशक सिद्धान्तों का विचार आयरलैण्ड के संविधान से लिया गया है।

(द) नीति निदेशक तत्वों का सम्बन्ध _____________ से है।

उत्तर: नीति निदेशक तत्वों का सम्बन्ध सामाजिक और आर्थिक अधिकार से है।

2. क्या आप यह मानते हैं कि यदि भारतीय संविधान राज्य के नीति-निदेशक तत्वों को सम्मिलित नहीं करता तो यह लोकतन्त्र के बुनियादी सिद्धान्तों को प्रतिविम्वित करने में असफल रहता। कारण बताएं।

उत्तर: हाँ, यह माना जा सकता है कि नीति-निदेशक तत्वों के बिना संविधान लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों को पूर्णतः प्रतिबिंबित करने में असफल रहता। इसका कारण यह है कि जहाँ मौलिक अधिकार मुख्यतः राजनीतिक लोकतंत्र प्रदान करते हैं, वहीं नीति-निदेशक तत्वों का मुख्य उद्देश्य देश में सामाजिक तथा आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना करना है। इन सिद्धांतों का लक्ष्य ऐसी सामाजिक और आर्थिक दशाओं का निर्माण करना है जिनके अंतर्गत सभी नागरिक गुणवत्ता युक्त अच्छा जीवन व्यतीत कर सकें।

पाठगत प्रश्न 18.3

1. राज्य के नीति निदेशक तत्त्वों की प्रमुख श्रेणियों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: संविधान में नीति निदेशक तत्त्वों को औपचारिक रूप से वर्गीकृत नहीं किया गया है, लेकिन बेहतर समझ के लिए इन्हें निम्नलिखित चार प्रमुख श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:

(i) सामाजिक और आर्थिक समानता को बढ़ावा देने वाले सिद्धान्त।

(ii) गांधीवादी विचारधारा से सम्बन्धित सिद्धान्त।

(iii) अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा सम्बन्धित सिद्धान्त।

(iv) विविध सिद्धान्त।

2. निम्नांकित तालिका में दिए गए नीति निदेशक सिद्धान्तों को उनकी उचित श्रेणी के साथ मिलाइए।

क.सं.निदेशक सिद्धान्तश्रेणी
अ.राज्य अपने लोगों के लिए आजीविका के पार्याप्त साधन सुनिश्चित करेगा।
ब.राज्य न्याय पालिका को कार्यपालिका से पृथक करने के लिए कदम उठाएगा।
स.राज्य अन्य राष्ट्रों के साथ न्यायसंगत और सम्मानपूर्ण सम्वन्धों को बनाए रखने का प्रयास करेगा।
द.राज्य ग्राम पंचायतों का गठन करने के लिए कदम उठाएगा।
य.पुरुष और स्त्री दोनों के लिए समान कार्य के लिए समान वेतन देना चाहिए।
र.राज्य ग्रामीण क्षेत्रों में लघु उद्योगों को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा।

उत्तर:

क.सं.निदेशक सिद्धान्तश्रेणी
अ.राज्य अपने लोगों के लिए आजीविका के पार्याप्त साधन सुनिश्चित करेगा।सामाजिक और आर्थिक समानता को बढ़ावा देने वाले सिद्धान्त।
ब.राज्य न्याय पालिका को कार्यपालिका से पृथक करने के लिए कदम उठाएगा।विविध सिद्धान्त।
स.राज्य अन्य राष्ट्रों के साथ न्यायसंगत और सम्मानपूर्ण सम्वन्धों को बनाए रखने का प्रयास करेगा।अंतर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा से सम्बन्धित सिद्धान्त।
द.राज्य ग्राम पंचायतों का गठन करने के लिए कदम उठाएगा।गाँधीवादी विचारधारा से सम्बन्धित सिद्धान्त।
य.पुरुष और स्त्री दोनों के लिए समान कार्य के लिए समान वेतन देना चाहिए।सामाजिक और आर्थिक समानता को बढ़ावा देने वाले सिद्धान्त।
र.राज्य ग्रामीण क्षेत्रों में लघु उद्योगों को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा।गाँधीवादी विचारधारा से सम्बन्धित सिद्धान्त।

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