NIOS Class 10 Social Science Chapter 17 मौलिक अधिकार तथा मौलिक कर्त्तव्य

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NIOS Class 10 Social Science Chapter 17 मौलिक अधिकार तथा मौलिक कर्त्तव्य

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Chapter: 17

मॉड्यूल – 3 लोकतन्त्र की कार्यप्रणाली

पाठगत प्रश्न 17.1

1. अधिकार और कर्तव्य क्या हैं? वे एक दूसरे से कैसे जुड़े हुए हैं?

उत्तर: अधिकार व्यक्ति द्वारा अपेक्षित ऐसे दावे हैं जो उसके स्वयं के व्यक्तित्व के विकास के लिए आवश्यक हैं तथा जिन्हें समाज या राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त है। वहीं, कर्तव्य किसी व्यक्ति से कुछ किये जाने की अपेक्षा रखते हैं, जिनमें नैतिक और कानूनी दायित्व शामिल होते हैं।

वे एक-दूसरे से निम्न प्रकार से जुड़े हुए हैं:

(i) अधिकार और कर्तव्य अन्योन्याश्रित हैं।

(ii) अधिकार तथा कर्तव्य जीवनरूपी गाड़ी के दो पहिये हैं; यदि इनका ठीक से पालन किया जाए तो जीवन आसान बन जाता है।

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(iii) ये एक दूसरे के पूरक हैं। अधिकार वे हैं जो हम अपने लिए दूसरों द्वारा किये जाने की आशा करते हैं, जबकि कर्तव्य वे कार्य हैं जो हम दूसरों के प्रति करते हैं।

2. निम्नलिखित में से कौन-से कथन समानता के अधिकार के अनुरूप नहीं हैं तथा क्यों?

(i) अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण भेदभाव का उदाहरण है।

उत्तर: कारण: यह कथन गलत है क्योंकि संविधान के अनुसार आरक्षण का उपबंध भेदभाव का कारण नहीं है, बल्कि यह वंचित वर्गों के उत्थान के लिए एक विशेष प्रावधान है।

(ii) एक पूर्व संघीय मंत्री को भ्रष्टाचार के एक मामले में न्यायालय में उपस्थित होने से छूट दी गयी है।

उत्तर: कारण: यह समानता के अधिकार के विरुद्ध है क्योंकि कानून के समक्ष सभी समान हैं तथा व्यक्ति की स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता है।

(iii) सार्वजनिक स्थानों का प्रयोग सभी के लिए खुला रखा गया है।

उत्तर: समानता के अधिकार के अनुरूप है।

(iv) रोजगार के लिये योग्यता धर्म पर आधारित है।

उत्तर: कारण: यह कथन समानता के अधिकार के अनुरूप नहीं है क्योंकि सार्वजनिक रोजगार के मामलों में किसी भी दशा में धर्म को आधार नहीं माना जाता है और राज्य धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता।

(v) राय बहादुर सोहन सिंह लोकसभा चुनावों में प्रत्याशी है।

उत्तर: कारण: यह समानता के अधिकार के विरुद्ध है क्योंकि भारत के संविधान में ‘राय बहादुर’ जैसी सभी पदवियों (उपाधियों) को समाप्त कर दिया गया है, अतः वे इस पदवी का प्रयोग नहीं कर सकते हैं।

3. निम्न में से कौन-सा एक छुआछूत का एक प्रकार नहीं हैं?

(i) धार्मिक स्थानों में प्रवेश के दो दरवाजे होते हैं एक दलितों के लिये तथा दूसरा अन्यों के लिये।

(ii) एक व्यायामशाला में दलितों को प्रवेश की अनुमति नहीं है।

(iii) गांव के हैंडपंप का प्रयोग दलित अन्य लोगों के साथ करते हैं।

(iv) एक दलित वर्ग की दुल्हन को शादी के अवसर पर दुल्हन की वेशभूषा पहनने की अनुमति नहीं दी गई।

उत्तर: (iii) गांव के हैंडपंप का प्रयोग दलित अन्य लोगों के साथ करते हैं।

पाठगत प्रश्न 17.2

1. भारतीय संविधान द्वारा कौन-सी स्वतंत्रताएं प्रदान की गयी हैं?

उत्तर: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 में नागरिकों को निम्नलिखित छह स्वतंत्रताएं प्रदान की गई हैं:

(i) विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।

(ii) शांतिपूर्वक और बिना हथियार सभा और सम्मेलन करने की स्वतंत्रता।

(iii) संघ और संगठन बनाने की स्वतंत्रता।

(iv) भारत के राज्यक्षेत्र में अबाध (बिना रोक-टोक) भ्रमण की स्वतंत्रता।

(v) भारत के राज्यक्षेत्र के किसी भाग में निवास करने और बस जाने की स्वतंत्रता।

(vi) कोई वृत्ति, आजीविका, व्यापार या कारोबार करने की स्वतंत्रता।

2. निम्नलिखित मामलों में कौन-सी स्वतंत्रता का उल्लंघन हुआ है?

(i) राज्य नीति द्वारा विशेष राजीनतिक दल के नेता को विना किसी कारण के सीमापार कर राज्य में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती है।

उत्तर: भारत के राज्यक्षेत्र में सर्वत्र अवाध भ्रमण की स्वतंत्रता।

(ii) कामगारों को संगठित होकर अपनी मांगों को प्रदर्शित करने का अधिकार नहीं देना।

उत्तर: संघ और संगठन बनाने की स्वतंत्रता।

(iii) लोगों को अपने राज्य को छोड़कर कहीं अन्यत्र जाने के लिए दबाव डाला जाये।

उत्तर: भारत के राज्य क्षेत्र के किसी भाग में निवास करने और बस जाने की स्वतंत्रता।

(iv) मोची के बेटे को गांव में मिठाई की दुकान खोलने की अनुमति नहीं दी जाती।

उत्तर: कोई वृत्ति, आजीविका, व्यापार या कारोबार करने की स्वतंत्रता।

(v) किसी राजनीतिक दल को सार्वजनिक सभा करने की अनुमति नहीं दी जाती।

उत्तर: शांतिपूर्वक और बिना हथियार सभा और सम्मेलन की स्वतंत्रता।

3. अपराधों के लिए दोषसिद्धि, प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण तथा गिरफ्तारी एवं निरोध से संरक्षण के लिए संविधान में क्या उपबंध किये गये हैं।

उत्तर: संविधान में इन विषयों पर निम्नलिखित उपबंध (अनुच्छेद 20, 21 और 22) किये गए हैं:

(i) अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण (अनुच्छेद 20): कोई भी व्यक्ति तब तक अपराधी नहीं माना जाएगा जब तक उसने अपराध के समय लागू किसी कानून का उल्लंघन न किया हो और उसे उस समय निर्धारित दंड से अधिक दंड नहीं दिया जा सकता। किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार अभियोजित और दंडित नहीं किया जाएगा, तथा किसी को अपने ही विरुद्ध गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।

(ii) प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण (अनुच्छेद 21): किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन (प्राण) या दैहिक स्वतंत्रता से केवल कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जा सकता है, अन्यथा नहीं।

(iii) गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण (अनुच्छेद 22): गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी का कारण बताए बिना हिरासत में नहीं रखा जा सकता और उसे अपनी पसंद के वकील से सलाह लेने का अधिकार है। गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाना आवश्यक है।

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