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NIOS Class 10 Social Science Chapter 13 भारत में कृषि
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भारत में कृषि
Chapter: 13
| मॉड्यूल – 2 भारत : प्राकृतिक पर्यावरण संसाधन तथा विकास |
पाठगत प्रश्न 13.1
1. दो-दो उदाहरण देते हुए गहन और विस्तृत खेती के बीच अंतर बताएं।
उत्तर: गहन और विस्तृत खेती के इन दो प्रकारों के बीच बुनियादी अंतर प्रति इकाई भूमि से उत्पादन की मात्रा है।
| खेती का प्रकार | विशेषताएँ | उदाहरण |
| विस्तृत खेती | जब देश के एक बड़े क्षेत्र का उपयोग खेती के लिए किया जाता है। इस स्थिति में, बड़े क्षेत्र के कारण कुल उत्पादन अधिक हो सकता है, लेकिन प्रति इकाई भूमि उत्पादन कम होता है। | संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, और पूर्व सोवियत संघ। भारत में पंजाब, हरियाणा, और पश्चिमी उत्तर प्रदेश। |
| गहन खेती | इसमें प्रति इकाई भूमि से उत्पादन ज्यादा दर्ज किया जाता है। यह ऐसे क्षेत्रों में होती है जहाँ खेती के लिए भूमि की उपलब्धता बहुत सीमित होती है। | जापान (गहन खेती का सबसे अच्छा उदाहरण)। भारत में केरल राज्य। |
2. ऊपर पढ़े हुए मुख्य बातों के आधार पर आपके क्षेत्र में एक उपयुक्त लागू होने वाले) तथ्य को पहचानें (उदाहरण हरियाणा में बड़े पैमाने पर यंत्रीकृत और अच्छी तरह से सिंचित कृषि है। इस तरह यह मानसून पर कम निर्भर है।)
उत्तर: (चूँकि यह प्रश्न सीखने वाले के व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है, स्रोतों में दिए गए मुख्य तथ्यों को एक उदाहरण के रूप में पहचाना जा सकता है।)
उदाहरण के लिए, यदि क्षेत्र हरियाणा है, तो लागू होने वाला तथ्य है:
हरियाणा में चावल की खेती मुख्य रूप से व्यावसायिक उद्देश्य के लिए की जाती है, क्योंकि इस क्षेत्र के लोगों का मुख्य भोजन गेहूँ है। इसके अलावा, हरियाणा में बड़े पैमाने पर यंत्रीकृत और अच्छी तरह से सिंचित कृषि है, जिस कारण यह मानसून पर कम निर्भर है। यह क्षेत्र विस्तृत खेती का अभ्यास करता है।
पाठगत प्रश्न 13.2
1. कपास की खेती के लिए किसी भी तीन भौगोलिक परिस्थितियों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: कपास मूल रूप से खरीफ की फसल है और उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में होती है।
कपास की खेती के लिए तीन भौगोलिक परिस्थितियाँ निम्नलिखित हैं:
(i) तापमान: कपास उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की फसल है। इसके लिए समान रूप से उच्च तापमान चाहिए जो 21 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच हो।
(ii) पाला मुक्त दिन: इसे आमतौर पर कम से कम 210 पाला मुक्त दिनों वाले क्षेत्रों में उगाया जाता है।
(iii) वर्षा और धूप: इसे 50 से 100 सेमी की वर्षा की आवश्यकता होती है। यदि वर्षा 50 सेमी से कम हो तो सिंचाई द्वारा भी कपास की खेती सफलतापूर्वक की जाती है। अच्छी कपास की उपज के लिए, प्रारंभ में उच्च वर्षा और परिपक्व होने के समय शुष्क और खिली धूप वाला मौसम बहुत उपयोगी होता है।
2. अगर लगातार कई वर्षों तक कपास की खेती असफल हो जाय तो भारत एक अरब से भी ज्यादा लोगों को किस प्रकार वस्त्र उपलव्ध करा पाएगा?
उत्तर: स्रोतों में इस विशिष्ट परिदृश्य (यदि कपास की खेती लगातार कई वर्षों तक असफल हो जाए) के लिए कोई आकस्मिक योजना या वैकल्पिक वस्त्र आपूर्ति रणनीति का उल्लेख नहीं किया गया है कि भारत एक अरब से अधिक लोगों को वस्त्र कैसे उपलब्ध कराएगा।
3. वाणिज्यिक फसल क्यों नकदी फसल के रूप में जाना जाता है?
उत्तर: वाणिज्यिक फसलों को नकदी फसल के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि उत्पादन का अधिकांश भाग पैसा कमाने के लिए बाजार में बेचा जाता है। ये फसलें शुद्ध या अर्ध-प्रसंस्कृत रूप में बेचने के लिए उगाई जाती हैं।
पाठगत प्रश्न 13.3
1. भारत में जलवायु परिवर्तन किस प्रकार कृषि को प्रभावित करेगा? किसी भी दो स्थितियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: वैश्विक जलवायु परिवर्तन भारतीय कृषि के सामने नवीनतम चुनौतियों में से एक है, और इसके प्रभाव असीम होने की भविष्यवाणी की गई है।
दो स्थितियाँ इस प्रकार हैं-
(i) तापमान वृद्धि और गेहूँ उत्पादन पर प्रभाव: जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने की भविष्यवाणी की गई है। विशेष रूप से सर्दियों के मौसम में तापमान का बढ़ना उत्तरी भारत के गेहूँ उत्पादन को प्रतिकूल ढंग से प्रभावित करेगा।
(ii) समुद्री जल का प्रवेश और चावल उत्पादन पर प्रभाव: जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र के स्तर में वृद्धि होने की संभावना है। तटीय भागों में समुद्री जल के प्रवेश और चक्रवात की बढ़ती बारंबारता के कारण चावल का उत्पादन भी प्रभावित होगा।
पाठान्त प्रश्न
1. भारतीय कृषि की किसी भी चार प्रमुख विशेषताओं को समझाइए।
उत्तर: भारतीय कृषि की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(i) निर्वाह कृषि: भारत के अधिकांश हिस्सों में निर्वाह कृषि की जाती है। इसका अर्थ है कि किसान अपने और अपने परिवार के उपभोग के लिए खेती करते हैं। इस प्रकार की खेती में जोत छोटे और खंडित होते हैं, और कृषि तकनीकें सरल तथा आदिम प्रकार की होती हैं, जहाँ आधुनिक उपकरणों और रासायनिक उर्वरकों का अभाव होता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कृषि में बड़े पैमाने पर बदलाव आया है, फिर भी यह बड़े भूभाग पर आज भी की जाती है।
(ii) मानसून पर निर्भरता: आजादी के बाद से सिंचाई के बुनियादी ढाँचे का विस्तार तेजी से हुआ है, इसके बावजूद कुल फसली क्षेत्र का केवल एक-तिहाई भाग ही सिंचित है। नतीजतन, फसली क्षेत्रों का दो-तिहाई भाग अभी भी मानसून पर निर्भर करता है। भारत में मानसून अनिश्चित और अविश्वसनीय है, और जलवायु परिवर्तन के कारण यह और भी अविश्वसनीय हो गया है।
(iii) जनसंख्या का कृषि पर दबाव: शहरीकरण और औद्योगीकरण में वृद्धि के बावजूद, देश की लगभग 70% जनसंख्या अभी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। कृषि अभी भी देश में अधिकांश लोगों को आजीविका प्रदान करती है।
(iv) फसलों के विभिन्न प्रकार: भारत में जलवायु, स्थलाकृति और मिट्टी में विविधता है। चूँकि भारत में उष्णकटिबंधीय और शीतोष्ण जलवायु दोनों के क्षेत्र हैं, यहाँ दोनों जलवायु की फसलें उगाई जाती हैं। दुनिया के बहुत कम देशों में ऐसी विविधता पाई जाती है।

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