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NCERT Class 9 Science Important Chapter 4 अपने परिवेश में गति का वर्णन
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अपने परिवेश में गति का वर्णन
Chapter – 4
| IMPORTANT SOLUTIONS |
लघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर:
1. गति (Motion) किसे कहते हैं?
उत्तर: यदि समय के साथ संदर्भ बिंदु के सापेक्ष किसी वस्तु की स्थिति परिवर्तित होती है, तो कहा जाता है कि वह वस्तु गतिशील है (गति में है)।
2. विरामावस्था (Rest) क्या है?
उत्तर: यदि समय के साथ संदर्भ बिंदु के सापेक्ष वस्तु की स्थिति परिवर्तित नहीं होती है, तो कहा जाता है कि वस्तु विरामावस्था में है।
3. विस्थापन (Displacement) किसे कहते हैं?
उत्तर: समय के किन्हीं दो क्षणों के बीच किसी वस्तु की प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों में होने वाला सकल परिवर्तन उस वस्तु का विस्थापन कहलाता है।
4. चाल और वेग का SI मात्रक क्या है?
उत्तर: चाल और वेग दोनों का SI मात्रक मीटर प्रति सेकंड (ms−1 अथवा m/s) है।
5. माध्य चाल (Average Speed) का परिकलन कैसे किया जाता है?
उत्तर: किसी वस्तु की माध्य चाल उस वस्तु द्वारा चलित कुल दूरी को यह दूरी तय करने में व्यतीत कुल समय अंतराल से विभाजित करने पर प्राप्त होती है (माध्य चाल = कुल चलित दूरी/समय अंतराल)।
6. माध्य वेग (Average Velocity) क्या है?
उत्तर: दिए गए समय अंतराल में किसी वस्तु का माध्य वेग उस समय अंतराल में उसकी स्थिति में परिवर्तन (अथवा विस्थापन) को उस समय अंतराल से विभाजित करने पर प्राप्त भागफल होता है।
7. क्या दूरी और विस्थापन का मान कभी बराबर हो सकता है?
उत्तर: हाँ, यदि कोई वस्तु पलट कर वापस नहीं लौटती (अर्थात एक ही दिशा में सरल रेखा में गति करती रहती है), तो कुल चलित दूरी एवं विस्थापन का परिमाण बिल्कुल बराबर होता है।
8. त्वरण (Acceleration) किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी दिए गए समय अंतराल में गतिमान वस्तु के वेग में होने वाले परिवर्तन को समय अंतराल से विभाजित करने पर प्राप्त होने वाला भागफल त्वरण कहलाता है (त्वरण = वेग-परिवर्तन/समय अंतराल)।
9. त्वरण का SI मात्रक क्या है?
उत्तर: माध्य त्वरण का SI मात्रक मीटर प्रति सेकंड वर्ग (ms−2 अथवा m/s2) है।
10. स्थिति-समय ग्राफ (Position-time graph) की प्रवणता (slope) क्या दर्शाती है?
उत्तर: स्थिति-समय ग्राफ की प्रवणता (slope) वस्तु के वेग की जानकारी प्रदान करती है।
11. वेग-समय ग्राफ (Velocity-time graph) की प्रवणता क्या दर्शाती है?
उत्तर: सरल रेखीय वेग-समय ग्राफ की प्रवणता यह बताती है कि समय के साथ वेग कितनी तेजी से परिवर्तित हो रहा है, अर्थात् इससे त्वरण का मान प्राप्त होता है।
12. वेग-समय ग्राफ और समय-अक्ष के बीच का घिरा क्षेत्रफल क्या दर्शाता है?
उत्तर: वेग-समय ग्राफ की निरूपक रेखा और समय-अक्ष के बीच परिबद्ध क्षेत्रफल उस दिए गए समय अंतराल में वस्तु के विस्थापन के बराबर होता है।
13. शुद्धगतिक (Kinematic) के तीन समीकरण कौन-से हैं?
उत्तर: नियत त्वरण से गति के लिए तीन समीकरण हैं:
(i) v = u + at
(ii) s = ut + 1/2at2
(iii) v2 = u2 + 2as
14. एकसमान वृत्तीय गति (Uniform circular motion) किसे कहते हैं?
उत्तर: जब कोई वस्तु किसी वृत्ताकार पथ पर अचर (एकसमान) चाल से चलती है, तो इसकी गति एकसमान वृत्तीय गति कहलाती है।
15. वृत्तीय गति में किसी बिंदु पर वेग की दिशा क्या होती है?
उत्तर: वृत्त के किसी बिंदु पर वेग उस बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा (tangent) के अनुदिश (गति की दिशा में) होता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर:
1. दूरी (Distance) और विस्थापन (Displacement) के बीच उदाहरण सहित अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
| गुण/आधार | दूरी (Distance) | विस्थापन (Displacement) |
| परिभाषा | किसी वस्तु द्वारा तय किए गए मार्ग की कुल लंबाई (सकल दूरी) को दूरी कहते हैं। | समय के किन्हीं दो क्षणों के बीच किसी वस्तु की प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों में होने वाला सकल परिवर्तन विस्थापन कहलाता है। |
| दिशा और परिमाण | कुल चलित दूरी के वर्णन के लिए केवल परिमाण (आंकिक मान) की आवश्यकता होती है, गति की दिशा की नहीं। | विस्थापन के संपूर्ण विवरण के लिए परिमाण (आंकिक मान) एवं दिशा दोनों को निर्दिष्ट करना आवश्यक होता है। |
| SI मात्रक | दूरी का SI मात्रक मीटर (m) है। | विस्थापन का SI मात्रक भी मीटर (m) है। |
| उदाहरण | यदि एक धावक आरंभिक बिंदु ‘O’ से 100 m दूर बिंदु ‘A’ तक जाता है और वापस मुड़कर 60 m चलकर बिंदु ‘B’ पर आता है, तो उसके द्वारा तय की गई कुल दूरी = 100 m + 60 m = 160 m होगी। | इसी उदाहरण में, धावक की आरंभिक स्थिति ‘O’ और अंतिम स्थिति ‘B’ के बीच की स्थिति में परिवर्तन 40 m है, अतः उसका विस्थापन = 40 m (धनात्मक दिशा में) होगा। |
2. त्वरण (Acceleration) से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए कि त्वरण धनात्मक और ऋणात्मक कब होता है?
उत्तर: त्वरण किसी गतिमान वस्तु के वेग में होने वाले परिवर्तन की दर है। इसका परिकलन अंतिम वेग में से प्रारंभिक वेग को घटाकर, उसे समय अंतराल से विभाजित करके (a = v − u/t) किया जाता है।
(i) धनात्मक त्वरण: यदि किसी दिए गए समय अंतराल में वस्तु के वेग का परिमाण बढ़ रहा है, तो त्वरण वेग की दिशा में होता है और इसे धनात्मक त्वरण माना जाता है।
(ii) ऋणात्मक त्वरण: यदि वस्तु के वेग का परिमाण घट रहा है (जैसे ब्रेक लगाने पर), तो त्वरण की दिशा वेग की दिशा के विपरीत होती है। इसे ऋणात्मक त्वरण कहा जाता है (इसे मंदन भी कहते हैं)।
3. स्थिति-समय ग्राफ (Position-Time Graph) की सहायता से आप एकसमान और असमान गति की पहचान कैसे करेंगे?
उत्तर: स्थिति-समय ग्राफ किसी वस्तु की स्थिति में समय के साथ होने वाले परिवर्तन को निरूपित करता है।
(i) एकसमान गति (Uniform Motion): यदि स्थिति-समय ग्राफ एक सीधी/सरल रेखा (ढलान के साथ) है, तो यह इंगित करता है कि वस्तु समान समय अंतरालों में समान दूरियाँ तय कर रही है, अर्थात् वस्तु नियत वेग से गतिमान है। (यदि रेखा समय-अक्ष के बिल्कुल समांतर है, तो इसका अर्थ है वस्तु विरामावस्था में है)।
(ii) असमान गति (Non-Uniform Motion): यदि स्थिति-समय ग्राफ एक वक्र (Curve) है, तो यह दर्शाता है कि वस्तु का वेग नियत नहीं है (समान समय में असमान विस्थापन हो रहा है) और वस्तु त्वरित गति कर रही है।
4. वेग-समय ग्राफ (Velocity-Time Graph) का उपयोग करके वस्तु का त्वरण और विस्थापन कैसे ज्ञात किया जाता है? समझाइए।
उत्तर: (i) त्वरण (Acceleration) ज्ञात करना: सरल रेखीय वेग-समय ग्राफ की प्रवणता (Slope) बताती है कि समय के साथ वेग कितनी तेजी से परिवर्तित हो रहा है। अतः ग्राफ की ढलान/प्रवणता से त्वरण का मान प्राप्त होता है। त्वरण निकालने के लिए ग्राफ के लंब (वेग में परिवर्तन) को आधार (समय में परिवर्तन) से विभाजित किया जाता है।
(ii) विस्थापन (Displacement) ज्ञात करना: किसी वांछित समय अंतराल में वेग-समय ग्राफ की निरूपक रेखा और समय-अक्ष के बीच परिबद्ध (घिरा हुआ) क्षेत्रफल उस समय अंतराल में वस्तु के विस्थापन के बराबर होता है। यदि ग्राफ आयत या त्रिभुज बनाता है, तो उनके ज्यामितीय क्षेत्रफल की गणना करके कुल विस्थापन निकाला जा सकता है।
5. क्या एकसमान वृत्तीय गति (Uniform Circular Motion) त्वरित गति का उदाहरण है? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: हाँ, एकसमान वृत्तीय गति एक त्वरित गति (Accelerated motion) का उदाहरण है।
कारण: वेग एक सदिश राशि है, जिसके लिए परिमाण (चाल) और दिशा दोनों की आवश्यकता होती है। जब कोई वस्तु एकसमान वृत्तीय गति में होती है, तो उसकी चाल (परिमाण) तो हमेशा अचर (नियत) रहती है, लेकिन वृत्ताकार पथ पर लगातार मुड़ने के कारण वृत्त के प्रत्येक बिंदु पर उसकी गति की दिशा निरंतर परिवर्तित होती रहती है। क्योंकि वेग की दिशा लगातार बदल रही है, इसलिए वेग में परिवर्तन हो रहा है। और जहाँ वेग में परिवर्तन होता है, वहाँ त्वरण उत्पन्न होता है। इसलिए एकसमान चाल होने के बावजूद वृत्तीय गति एक त्वरित गति होती है।

