NCERT Class 8 Hindi Chapter 7 मत बाँधो

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NCERT Class 8 Hindi Chapter 7 मत बाँधो

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Chapter: 7

पाठ से

आइए, अब हम इस कविता को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं। नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (☆) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. आप इनमें से कविता का मुख्य भाव किसे समझते हैं?

(i) सपने मात्र कल्पनाएँ हैं।

(ii) सपनों को भूल जाना चाहिए।

(iii) सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए।

(iv) सपने देखना अच्छी बात है।

उत्तर: (iii) सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए।

2. ‘मत बाँधो कविता किसकी स्वतंत्रता की बात करती है?

(i) प्रेम की।

(ii) शिक्षा की।

(iii) सपनों की।

(iv) अधिकारों की।

उत्तर: (iii) सपनों की।

3. “इन सपनों के पंख न काटो” पंक्ति में सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना क्यों की गई है?

(i) सपने जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं।

(ii) सपने सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं।

(iii) सपने पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं।

(iv) सपने पंखों की तरह कोमल और अनेक प्रकार के होते हैं।

उत्तर: (i) सपने जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं।

4. “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प” पंक्ति में ‘स्वर्ग’ से आप क्या समझते हैं?

(i) जहाँ किसी प्रकार का शारीरिक कष्ट न हो।

(ii) जहाँ अतुलनीय धन संपत्ति हो।

(iii) जहाँ परस्पर सहयोग एवं स‌द्भाव हो।

(iv) जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों।

उत्तर: (iii) जहाँ परस्पर सहयोग एवं स‌द्भाव हो।

5. यदि बीज धूल में गिर जाए तो क्या हो सकता है?

(i) वह बहुत तेजी से उड़ सकता है।

(ii) वह और गहरा हो सकता है।

(iii) उसकी उड़ान रुक सकती है।

(iv) वह बढ़कर पीधा बन सकता है।

उत्तर: (iii) उसकी उड़ान रुक सकती है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर: 

1. क्योंकि कविता बार-बार कहती है “इन सपनों के पंख न काटो, इन सपनों की गति मत बाँधो” – इससे स्पष्ट है कि सपनों को रोकना नहीं चाहिए।

2. क्योंकि “मत बाँधो” कविता का मुख्य संदेश ही सपनों की स्वतंत्रता बनाए रखना है।

3. क्योंकि पंक्ति “सौरभ उड़ जाता है नभ में, फिर वह लौट कहाँ आता है” बताती है कि यदि सपनों को बाँध दिया जाए तो वे कभी ऊँचाई नहीं पा सकते।

4. क्योंकि “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा” यह समझाता है कि खुले सपने समाज को सहयोग और सद्भाव से सुंदर बनाते हैं।

5. क्योंकि “बीज धूलि में गिर जाता जो, वह नभ में कब उड़ पाता है” यह सिखाती है कि रुकावट आने पर सपनों की उड़ान रुक सकती है।

पंक्तियों पर चर्चा

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

(क) सौरभ उड़ जाता है नभ में 

फिर वह लौट कहाँ आता है?

बीज धूलि में गिर जाता जो 

वह नभ में कब उड़ पाता है?”

उत्तर: इन पंक्तियों का भाव है कि जैसे फूल की सुगंध (सौरभ) आकाश में फैल जाने के बाद वापस नहीं आती, उसी तरह सपने भी एक बार उड़ान भरने के बाद लौटकर नहीं रुकते। और यदि बीज समय रहते अंकुरित न होकर मिट्टी में ही दब जाए तो वह कभी आकाश तक नहीं पहुँच सकता। इससे संदेश मिलता है कि सपनों को समय पर अवसर और स्वतंत्रता देना ज़रूरी है, वरना उनकी उड़ान रुक जाती है और वे साकार नहीं हो पाते।

(ख) “मुक्त गगन में विचरण कर यह 

तारों में फिर मिल जायेगा, 

मेघों से रंग औ’ किरणों से 

दीप्ति लिए भू पर आयेगा।”

उत्तर: इन पंक्तियों का अर्थ है कि सपने मुक्त आकाश में घूमते हुए तारों में घुल-मिल जाते हैं, मेघों के रंग और सूर्य की किरणों की चमक लेकर फिर धरती पर लौटते हैं। यह बताता है कि सपने नए अनुभव, नई रोशनी और नई ऊर्जा के साथ समाज और जीवन को सुंदर बनाने का कार्य करते हैं। यानी स्वतंत्र और ऊँचे सपने ही धरती को प्रकाश, रंग और रचनात्मकता से भर सकते हैं।

मिलकर करें मिलान

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों को उनके सही भाव अथवा संदर्भ से मिलाइए।

क्रम स्तंभ 1स्तंभ 2
1.इन सपनों के पंख न काटो इन सपनों की गति मत बाँधो!1. सपनों के उठने (आरोहण) और उनके व्यवहार में वापस आने (अवरोहण) में बाधा न डालें, क्योंकि स्वतंत्रता ही सपनों को साकार करने की कुंजी है।
2.सपनों में दोनों ही गति है उड़कर आँखों में आता है।2. सपनों को ऊँचाइयों तक जाने से मत रोको । उन्हें धरती से बाँधकर मत रखो।
3.इसका आरोहण मत रोको इसका अवरोहण मत बाँधो।3. किसी पक्षी के पंख काट दिए जाएँ तो वह उड़ नहीं सकता, वैसे ही अगर हम किसी के सपनों को बाधित करें तो उसकी कल्पनाशीलता और संभावनाएँ समाप्त हो जाएँगी।
4.नभ तक जाने से मत रोको धरती से इसको मत बाँधो!4. रचनात्मक और स्वतंत्र विचार समाज को सुंदर, समृद्ध और शांतिपूर्ण बना सकता है।
5.स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा।5. सपनों में ऊपर उठने (आरोहण) और नीचे आने (अवरोहण) दोनों की विशेषता होती है। सपना विचार की तरह जन्म लेता है और फिर व्यवहार में पूरा होता है. तभी वह कल्पना से निकलकर सच्चाई बनता है।

उत्तर:

क्रम स्तंभ 1स्तंभ 2
1.इन सपनों के पंख न काटो इन सपनों की गति मत बाँधो!3. किसी पक्षी के पंख काट दिए जाएँ तो वह उड़ नहीं सकता, वैसे ही अगर हम किसी के सपनों को बाधित करें तो उसकी कल्पनाशीलता और संभावनाएँ समाप्त हो जाएँगी।
2.सपनों में दोनों ही गनि है उड़कर आँखों में आता है।5. सपनों में ऊपर उठने (आरोहण) और नीचे आने (अवरोहण) दोनों की विशेषता होती है। सपना विचार की तरह जन्म लेता है और फिर व्यवहार में पूरा होता है. तभी वह कल्पना से निकलकर सच्चाई बनता है।
3.इसका आरोहण मत रोको इसका अवरोहण मत बाँधो।1. सपनों के उठने (आरोहण) और उनके व्यवहार में वापस आने (अवरोहण) में बाधा न डालें, क्योंकि स्वतंत्रता ही सपनों को साकार करने की कुंजी है।
4.नभ तक जाने से मत रोको धरती से इसको मत बाँधो!2. सपनों को ऊँचाइयों तक जाने से मत रोको । उन्हें धरती से बाँधकर मत रखो।
5.स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा।4. रचनात्मक और स्वतंत्र विचार समाज को सुंदर, समृद्ध और शांतिपूर्ण बना सकता है।

सोच-विचार के लिए

कविता को पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए-

(क) कविता में ‘मत बाँधो’, ‘पंख न काटो’ आदि संबोधन किसके लिए किए गए होंगे?

उत्तर: ये संबोधन समाज, माता-पिता, बड़े-बुज़ुर्ग और हर उस व्यक्ति के लिए हैं जो बच्चों, युवाओं या किसी भी स्वप्नदर्शी के सपनों को सीमित करने की कोशिश करता है। कवयित्री सबको समझा रही हैं कि किसी के सपनों की उड़ान को मत रोको।

(ख) कविता में सपनों की गति न बाँधने की बात क्यों कही गई होगी?

उत्तर: क्योंकि सपनों में ही नई सृजनात्मकता, प्रगति और परिवर्तन की शक्ति होती है। यदि उन्हें रोका जाएगा तो नई खोजें, नए विचार और समाज को सुंदर बनाने की प्रेरणा रुक जाएगी। सपने ही जीवन में ऊँचाइयाँ और नई दिशा देने वाले पंख हैं।

(ग) कविता में सौरभ, बीज, धुआँ, अग्नि जैसे उदाहरणों के माध्यम से सपनों को इनसे भिन्न बताते हुए उसे विशेष बताया गया है। आपकी दृष्टि में इन सबसे अलग सपनों की और कौन-सी विशेषताएँ हो सकती हैं?

उत्तर: सपने असीमित और असीम कल्पना शक्ति वाले होते हैं।

वे भविष्य को बदलने की क्षमता रखते हैं।

सपने मनुष्य को निरंतर प्रयास और संघर्ष के लिए प्रेरित करते हैं।

वे दुनिया को नई दिशा और समाज को नई ऊर्जा देने वाले होते हैं।

सपने व्यक्ति के अंदर छुपी संभावनाओं को जागृत कर देते हैं।

(घ) कविता में ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ दोनों के महत्व की बात की गई है। उदाहरण देकर बताइए कि आपने ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ को कब-कब सार्थक होते देखा?

उत्तर: आरोहण (ऊपर उठना) : जैसे कोई छात्र कठिन परिश्रम से परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करता है, या कोई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचता है। यह ऊँचाई पाने का प्रतीक है।

अवरोहण (नीचे उतरना/वापसी) : जैसे वही छात्र अपनी सफलता का उपयोग समाज की सेवा में करता है, या खिलाड़ी अपने अनुभव से नए खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देता है। यह धरती पर लौटकर कुछ नया रचने का प्रतीक है।

(ङ) “सपनों में दोनों ही गति है/ उड़कर आँखों में आता है।” क्या आप सहमत हैं कि सपने ‘आँखों में लौटकर वास्तविकता बन जाते हैं? अपने अनुभव या आस-पास के अनुभवों से कोई उदाहरण दीजिए।

उत्तर: हाँ, मैं सहमत हूँ। जब कोई व्यक्ति दिल से सपना देखता है और मेहनत करता है तो वह सपना वास्तविकता बन सकता है।

उदाहरण : हमारे विद्यालय की एक छात्रा ने डॉक्टर बनने का सपना देखा। उसने लगातार पढ़ाई की, प्रतियोगी परीक्षा पास की और अब मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही है।

इसी तरह कई लोग वैज्ञानिक, खिलाड़ी, लेखक या कलाकार बनने का सपना देखते हैं और अपने परिश्रम से उसे साकार कर समाज के लिए उपयोगी कार्य करते हैं।

शीर्षक

कविता का शीर्षक है ‘मत बांधो’। यदि आपको इस कवित्ता को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।

उत्तर: यदि इस कविता को नया नाम देना हो तो मैं इसे “सपनों की उड़ान” नाम दूँगा।

कारण:

यह नाम कविता की मूल भावना को पूरी तरह व्यक्त करता है। महादेवी वर्मा ने कविता में बार-बार कहा है— “इन सपनों के पंख न काटो, इन सपनों की गति मत बाँधो”। इससे स्पष्ट है कि कवयित्री का मुख्य संदेश है सपनों की स्वतंत्रता और उनकी असीम उड़ान। कविता में सौरभ, बीज, मेघ और किरणों के उदाहरण देकर यह बताया गया है कि सपने रोके नहीं जा सकते; वे मुक्त गगन में घूमकर नए रंग और नई रोशनी के साथ लौटते हैं और धरती को सुंदर व समृद्ध बनाते हैं।

“सपनों की उड़ान” नाम इसलिए भी उपयुक्त है क्योंकि यह केवल कल्पना की उड़ान नहीं बल्कि प्रगति, रचनात्मकता और समाज को बेहतर बनाने की शक्ति को दर्शाता है। यह नाम बताता है कि सपने व्यक्ति को ऊँचाइयों तक ले जाकर अंततः जीवन और धरती दोनों को नई दिशा देते हैं।

अनुमान और कल्पना से

(क) मान लीजिए आप एक नया संसार बनाना चाहते हैं। उस संसार में आप क्या-क्या रखना चाहेंगे और क्या-क्या नहीं? अपने उत्तर का कारण भी बताइए।

उत्तर: यदि मैं एक नया संसार बनाऊँ तो वहाँ प्रेम, शांति और आपसी सद्भाव होगा। हर जगह स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और हरियाली फैली होगी। सभी को शिक्षा और समान अवसर मिलेंगे तथा कला, संगीत और प्रकृति की सुंदरता को पूरा सम्मान मिलेगा। उस संसार में युद्ध, हिंसा, नफरत, भेदभाव, अन्याय, प्रदूषण और लालच के लिए कोई स्थान नहीं होगा। ऐसा संसार लोगों को खुशहाल, सुरक्षित और समान अवसर देने वाला होगा।

(ख) कविता में शिल्प और कला के महत्व की बात की गई है। कलाएँ, हमारे आस-पास की दुनिया को सुंदर बनाती हैं। आप अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए कौन-सी कला सीखना चाहेंगे? उससे आपका जीवन कैसे सुंदर बनेगा? अनुमान करके बताइए।

उत्तर: अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए मैं संगीत और चित्रकला सीखना चाहूँगा। संगीत मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा देता है, जबकि चित्रकला मेरे विचारों और भावनाओं को सुंदर ढंग से व्यक्त करने का अवसर देती है। इन कलाओं से जीवन अधिक रचनात्मक, संतुलित और आनंदमय बनेगा।

(ग) “सौरभ उड़ जाता है नभ में / फिर वह लौट कहाँ आता है।” यदि आपके पास अपने बीते हुए समय में लौटने का अवसर मिले तो आप बीते हुए समय में क्या-क्या परिवर्तन करना चाहेगे?

उत्तर: यदि मुझे अपने बीते समय में लौटने का अवसर मिले तो मैं पढ़ाई और मेहनत को और बेहतर ढंग से उपयोग करता, अपने प्रियजनों के साथ अधिक समय बिताता और गलत निर्णयों को सुधारने व अच्छे कार्यों में अधिक समय देता। इससे मेरा वर्तमान और अधिक सुंदर तथा संतोषजनक हो पाता।

(घ) बीज धूलि में गिर जाता जो / वह नभ में कब उड़ पाता है?” यदि सपने बीज की तरह हीं तो उन्हें उगने के लिए किन चीजों की आवश्यकता होगी? (संकेत धूप अर्थात मेहनत, पानी अर्थात लगन आदि।)

उत्तर: सपनों को उगने के लिए बीज की तरह मेहनत की धूप, लगन का पानी, प्रेरणा का उर्वरक और सकारात्मक सोच की सुरक्षा चाहिए। निरंतर परिश्रम, धैर्य, परिवार व मित्रों का उत्साहवर्धन और असफलताओं के बावजूद आत्मविश्वास बनाए रखना सपनों की जड़ों को मजबूत करता है और उन्हें ऊँचाइयों तक उड़ने में मदद करता है।

(ङ) “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा” यदि अच्छे सपनों या विचारों से स्वर्ग बनाया जा सकता है तो बुरे सपनी अथवा विचारों से क्या होता होगा? बुरे सपनों या विचारों से कैसे बचा जा सकता है?

उत्तर: अच्छे सपनों और विचारों से समाज में शांति, प्रगति और खुशहाली आती है, जबकि बुरे सपनों और नकारात्मक विचारों से हिंसा, अशांति, भय, रिश्तों में टूटन और समाज में अव्यवस्था फैल सकती है। इससे बचने के लिए सकारात्मक सोच विकसित करनी चाहिए, अच्छे मित्रों और आदर्शों का साथ रखना चाहिए तथा ईमानदारी, सत्संग और ध्यान जैसी आदतें अपनानी चाहिए।

(च) इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो!” कल्पना कीजिए कि हर किसी को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की पूरी स्वतंत्रता मिल जाए, तब दुनिया कैसी होगी। आपके अनुसार उस दुनिया में कौन-सी बातें महत्वपूर्ण होगी?

उत्तर: यदि हर किसी को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की पूरी स्वतंत्रता मिले तो दुनिया नई खोजों और आविष्कारों से भर जाएगी, गरीबी, भेदभाव और हिंसा कम होगी और सभी को समान अवसर और सम्मान मिलेगा। उस दुनिया में शिक्षा, पर्यावरण की रक्षा, समानता, कला और विज्ञान का विकास सबसे महत्वपूर्ण बातें होंगी।

(छ) इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बांधी! आपके विचार से यह सुझाव है? आदेश है? प्रार्थना है? या कुछ और है? यह बात किससे कही जा रही है?

उत्तर: पंक्ति “इन सपनों के पंख न काटो, इन सपनों की गति मत बाँधो” मेरे विचार से एक सौम्य प्रार्थना और सशक्त सुझाव है। कवयित्री यह बात समाज, अभिभावकों, शिक्षकों और हर उस व्यक्ति से कह रही हैं जो बच्चों और युवाओं के सपनों को सीमित करना चाहता है। यह आदेश नहीं, बल्कि भावनात्मक विनती और प्रेरणा है कि सपनों को रोकने की बजाय उन्हें खुली उड़ान दी जाए।

कविता की रचना

“सौरभ उड़ जाता है नभ में…”

“बीज धूलि में गिर जाता जो…”

“अग्नि सदा धरती पर जलती…”

उपर्युक्त पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन पंक्तियों को पढ़ते समय हमारी आँखों के सामने कुछ चित्र उभर आते हैं। कई बार कवि अपनी बात अथवा मुख्य भाव को समझाने या बताने के लिए उदाहरणों के माध्यम से शब्द-चित्रों की लड़ी-सी लगा देता है जिससे कविता में विशेष प्रभाव उत्पन्न हो जाता है। इस कविता में भी ऐसी अनेक विशेषताएँ छिपी हैं।

(क) अपने समूह के साथ मिलकर इन विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।

उत्तर: कविता की विशेषताएँ:

1. चित्रात्मकता:

कवयित्री ने “सौरभ उड़ जाता है नभ में” और “बीज धूलि में गिर जाता” जैसी पंक्तियों से ऐसे दृश्य खड़े किए हैं जो आँखों के सामने चित्र बना देते हैं।

2. प्रश्नवाचक शैली:

“फिर वह लौट कहाँ आता है?” जैसे प्रश्न पूछकर कवयित्री पाठक को सोचने पर मजबूर करती है।

3. विरोधाभास:

“नभ” और “धरती”, “आरोहण” और “अवरोहण” जैसे शब्दों से विपरीत भावों को दिखाया गया है।

4. पुनरुक्ति:

“इन सपनों के पंख न काटो, इन सपनों की गति मत बाँधो” जैसी पंक्तियों में बार-बार दोहराकर भाव को और गहरा किया गया है।

5. मानवीकरण:

सपनों को मनुष्य की तरह चित्रित किया गया है-जैसे उनके “पंख” हैं और वे “नभ में उड़ते हैं”।

(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियों दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ समाहित हैं। विशेषताओं का सही पक्तियों से मिलान कीजिए।

क्रम कविता की विशेषताएँकविता की पंक्तियाँ
1. एक-दूसरे के विपरीत अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग किया गया है।1. वह नभ में कब उड़ पाता है?
2.एक ही शब्द का प्रयोग बार-बार किया गया है।2. इसका आरोहण मत रोको इसका अवरोहण मत बाँधो!
3.समानार्थी शब्दों का प्रयोग किया गया है।3. स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा।
4.प्रश्न पूछा गया है।4. इन सपनों के पंख न काटो
5.संबोधन का प्रयोग किया गया है।5. नभ तक जाने से मत रोको धरती से इसको मत बाँधो!
6.सपने को मनुष्य की तरह चित्रित किया गया है।6. दीप्ति लिए भू पर आयेगा। स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा।

उत्तर:

क्रम कविता की विशेषताएँकविता की पंक्तियाँ
1. एक-दूसरे के विपरीत अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग किया गया है।2. इसका आरोहण मत रोको इसका अवरोहण मत बाँधो!
2.एक ही शब्द का प्रयोग बार-बार किया गया है।4. इन सपनों के पंख न काटो
3.समानार्थी शब्दों का प्रयोग किया गया है।3. स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा।
4.प्रश्न पूछा गया है।1. वह नभ में कब उड़ पाता है?
5.संबोधन का प्रयोग किया गया है।5. नभ तक जाने से मत रोको धरती से इसको मत बाँधो!
6.सपने को मनुष्य की तरह चित्रित किया गया है।6. दीप्ति लिए भू पर आयेगा। स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा।

शब्दों की बात

“इसका आरोहण मत रोको 

इसका अवरोहण मत बाँधो!”

उपर्युक्त पंक्तियों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ दोनों एक-दूसरे के विपरीतार्थक शब्द हैं। आरोहण का अर्थ है – नीचे से ऊपर की ओर जाना या चढ़ना और अवरोहण का अर्थ है- ऊपर से नीचे की ओर आना या उतरना।

(क) नीचे दिए रिक्त स्थान में ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ का उपयुक्त प्रयोग करके वाक्यों को पूरा कीजिए।

पर्वतारोहियों ने बीस दिन तक पर्वत पर ________ कर विजय प्राप्त की।

नदियाँ विशाल पर्वतों से ___________ करते हुए सागर में मिल जाती हैं।

अंकगणित में बड़ी संख्या से छोटी संख्या की ओर लिखने की प्रक्रिया ___________ क्रम कहलाती है।

इसी प्रकार से ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ शब्दों के प्रयोग को देखते हुए आप भी कुछ सार्थक वाक्य बनाइए।

उत्तर: पर्वतारोहियों ने बीस दिन तक पर्वत पर आरोहण कर विजय प्राप्त की।

नदियाँ विशाल पर्वतों से अवरोहण करते हुए सागर में मिल जाती हैं।

अंकगणित में बड़ी संख्या से छोटी संख्या की ओर लिखने की प्रक्रिया अवरोहण क्रम कहलाती है।

अपने बनाए वाक्य – ‘आरोहण’ शब्द से।

सूर्य का आरोहण होते ही चारों ओर उजाला फैल गया।

मेहनत और लगन से जीवन में ऊँचाई का आरोहण किया जा सकता है।

विमान का आरोहण देखने योग्य दृश्य था।

अपने बनाए वाक्य – ‘अवरोहण’ शब्द से।

शाम ढलते ही तापमान का तेज़ अवरोहण शुरू हो गया।

पर्वत का कठिन अवरोहण करने के बाद यात्री सुरक्षित नीचे पहुँचे।

सफलता पाने के बाद भी विनम्र बने रहना जीवन का श्रेष्ठ अवरोहण है।

(ख) नीचे दी गई कविता की पंक्तियों के रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए–

“वह नभ में कब उड़ पाता है?”

“घूम गगन में मंडराता है।”

‘नभ’ और ‘गगन समान अर्थ वाले शब्द है। रेखांकित शब्दों के समानार्थी शब्दों का प्रयोग करते हुए कुछ नई पंक्तियों की रचना कीजिए और देखिए कि पक्तियों में लय बनाए रखने के लिए और किन परिवर्तनों की आवश्यकता पड़ती है?

उत्तर: कविता की पंक्तियों में ‘नभ’ और ‘गगन’ समानार्थी शब्द हैं। इनके स्थान पर हम आकाश, अंबर, आसमान जैसे शब्दों का प्रयोग कर सकते हैं। नई पंक्तियाँ इस प्रकार रची जा सकती हैं—

“वह आकाश में कब उड़ पाता है?”

“घूम अंबर में मंडराता है।”

“वह आसमान में कब उड़ पाता है?”

लय बनाए रखने के लिए पंक्ति की गति और छंद में हलका परिवर्तन आवश्यक होगा, जैसे “अंबर” या “आसमान” का उच्चारण ध्यान में रखकर पंक्ति का भार संतुलित करना।

(ग) कविता में ‘मन’ शब्द के साथ बांधो, काटी क्रिया लगाई गई है। आप ‘मत’ के साथ कौन-कौन सी क्रियाएँ लगाना चाहेगे? लिखिए। (संकेत – मत डरोसी)।

उत्तर: कविता में मत के साथ हम कई अन्य क्रियाएँ लगा सकते हैं, जैसे—

मत डरो,मत रोको,मत तोड़ो,मत छोड़ो,मत रोओ,मत झुको,मत भागो,मत गिरो,मत रुकों।

उदाहरण वाक्य : मत डरो, अपने सपनों की उड़ान भरो।

(घ) आपकी भाषा में बाँधने के लिए और कौन-कौन सी क्रियाएं हैं। अपने समूह में चचों करके लिखिए और उनसे वाक्य बनाइए) (संकेत – जोड़ना)।

उत्तर: बाँधने के लिए प्रयोग होने वाली अन्य क्रियाएँ हैं—

जोड़ना : उसने टूटी हुई डोर को फिर से जोड़ दिया।

लगाना : माली ने पौधों को सहारा लगाने के लिए डोरी लगाई।

गाँठना : उसने कपड़े में गुप्त वस्तु को अच्छी तरह गाँठ दिया।

कसना : उसने कमर पर बेल्ट कस लिया।

लपेटना : बच्चे ने ऊन को गेंद की तरह लपेट लिया।

(ङ) ‘मत’ शब्द को उलट कर लिखने से शब्द बनता है ‘तम’ जिसका अर्थ है ‘अँधेरा’। कविता में से कुछ ऐसे और शब्द छॉटिए जिन्हें उलट कर लिखने से अर्थ देने वाले शब्द बनते हैं।

उत्तर: कविता में कुछ ऐसे शब्द हैं जिन्हें उलट कर लिखने से अर्थ देने वाले शब्द बनते हैं—

मत → तम (अँधेरा)

राम → मार

सुमन → नमुस (सम्मान)

नील → लीन

मन → नम

रात → तार

ये शब्द दिखाते हैं कि हिंदी भाषा में शब्दों का उलटा रूप भी कभी-कभी अर्थपूर्ण हो सकता है।

काल परिवर्तन

“सौरभ उड़ जाता है नभ में

उपर्युक्त पंक्ति को ध्यान से देखिए। इस पंक्ति की क्रिया ‘जाता है’ से पता चलता है कि यह वर्तमान काल में लिखी गई है। यदि हम इसी पंक्ति को भूतकाल और भविष्य काल में लिखे तो यह निम्नलिखित प्रकार से लिखी जाएगी–

भूतकाल – सौरभ उड़ गया है नभ में

भविष्य काल – सौरभ उड़ जाएगा नभ में

कविता में वर्तमान काल में लिखी गई ऐसी अनेक पंक्तियाँ आई हैं। उन पंक्तियों को कविता में से ढूँढ़कर भूतकाल और भविष्य काल में लिखिए।

उत्तर: कविता “मत बाँधो” में कई पंक्तियाँ वर्तमान काल में हैं। नीचे कुछ मुख्य पंक्तियों को वर्तमान काल से भूतकाल और भविष्य काल में बदला गया है—

1. मूल पंक्ति (वर्तमान काल):

सौरभ उड़ जाता है नभ में।

भूतकाल – सौरभ उड़ गया है नभ में।

भविष्य काल – सौरभ उड़ जाएगा नभ में।

2. मूल पंक्ति (वर्तमान काल):

बीज धूलि में गिर जाता जो वह नभ में कब उड़ पाता है।

भूतकाल – बीज धूलि में गिर गया जो वह नभ में कब उड़ पाया है।

भविष्य काल – बीज धूलि में गिरेगा जो वह नभ में कब उड़ पाएगा।

3. मूल पंक्ति (वर्तमान काल):

अग्नि सदा धरती पर जलती धूम गगन में मंडराता है।

भूतकाल – अग्नि सदा धरती पर जली, धूम गगन में मंडराया है।

भविष्य काल – अग्नि सदा धरती पर जलेगी, धूम गगन में मंडराएगा।

4. मूल पंक्ति (वर्तमान काल):

सपनों में दोनों ही गति हैं, उड़ कर आँखों में आता है।

भूतकाल – सपनों में दोनों ही गति थीं, उड़ कर आँखों में आया है।

भविष्य काल – सपनों में दोनों ही गति होंगी, उड़ कर आँखों में आएगा।

5. मूल पंक्ति (वर्तमान काल):

मुक्त गगन में विचरण कर यह तारों में फिर मिल जाता है।

भूतकाल – मुक्त गगन में विचरण कर यह तारों में फिर मिल गया है।

भविष्य काल – मुक्त गगन में विचरण कर यह तारों में फिर मिल जाएगा।

6. मूल पंक्ति (वर्तमान काल):

मेघों से रंग और किरणों से दीप्ति लिए भू पर आता है।

भूतकाल – मेघों से रंग और किरणों से दीप्ति लिए भू पर आया है।

भविष्य काल – मेघों से रंग और किरणों से दीप्ति लिए भू पर आएगा।

शब्दकोश से

“स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प”

शब्दकोश के अनुसार ‘शिल्प’ शब्द के निम्नलिखित अर्थ हैं- 1. हाथ से कोई चीज बनाकर तैयार करने का काम – दस्तकारी, कारीगरी या हुनर, जैसे- बरतन बनाना, कपड़े सिलना, गहने गढ़ना आदि। 2. कला संबंधी व्यवसाय। 3. दक्षता, कौशल। 4. निर्माण, सर्जन, सृष्टि, रचना। 5. आकार, आवृत्ति। 6. अनुष्ठान, क्रिया, धार्मिक कृत्य।

अब शब्दकोश से ‘शिल्प’ शब्द से जुड़े निम्नलिखित शब्दों के अर्थ खोजकर लिखिए-

1. शिल्पकार, शिल्पी, शिल्पजीवी, शिल्पकारक, शिल्पिक या शिल्पकारी।

उत्तर: शिल्पकार / शिल्पी / शिल्पजीवी / शिल्पकारक / शिल्पिक या शिल्पकारी:

शिल्पकार / शिल्पी / शिल्पजीवी : वह व्यक्ति जो हाथों से वस्तुएँ बनाता है, जैसे मूर्तिकार, कुम्हार, बढ़ई, सुनार या अन्य हस्तकला में निपुण कारीगर। यह शब्द कारीगरी करने वाले कलाकार के लिए प्रयुक्त होता है।

शिल्पकारक : वह व्यक्ति या वस्तु जो शिल्प निर्माण का कारण बने या उसे संपन्न करे; शिल्प को बनाने वाला।

शिल्पिक / शिल्पकारी : शिल्प से संबंध रखने वाला, शिल्पकला या कारीगरी करने वाला; शिल्प निर्माण करने का कार्य या उसकी प्रक्रिया।

2. शिल्पकला।

उत्तर: शिल्पकला:

हाथ से सुंदर और उपयोगी वस्तुएँ बनाने की कला और कौशल। इसमें मूर्तिकला, चित्रकला, वास्तुकला, काष्ठकला, आभूषण निर्माण और अन्य हस्तकलाएँ शामिल हैं।

3. शिल्पकौशल।

उत्तर: शिल्पकौशल:

वह व्यक्ति जो शिल्पकला में बहुत दक्ष और निपुण हो। ऐसा कलाकार जो मूर्ति गढ़ने, चित्र बनाने, आभूषण बनाने या अन्य कारीगरी में विशेष कौशल रखता हो।

4. शिल्पगृह या शिल्यगेह।

उत्तर: शिल्पगृह / शिल्पगेह:

शिल्पकला का घर या स्थान। वह भवन, कार्यशाला या आर्ट-स्टूडियो जहाँ मूर्तिकला, चित्रकला, हस्तकला आदि का निर्माण, अभ्यास या प्रदर्शन किया जाता हो।

5. शिल्पविद्या।

उत्तर: शिल्पविद्या:

शिल्पकला से संबंधित ज्ञान और विज्ञान। इसमें वास्तुकला, मूर्तिकला, चित्रकला, धातु-कला, लकड़ी पर नक्काशी और अन्य हस्तकला के निर्माण की शिक्षा व विधियाँ सम्मिलित हैं।

6. शिल्पशाला या शिल्पालय

उत्तर: शिल्पशाला / शिल्पालय:

वह विद्यालय, संस्थान या कार्यशाला जहाँ शिल्पकला सिखाई जाती है और शिल्प का निर्माण किया जाता है। यहाँ पर विद्यार्थी मूर्तिकला, चित्रकला, आभूषण निर्माण, वस्त्र-कला आदि का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) कविता में गति को न बाँधने की बात कही गई है। आप ‘बाँधने’ का प्रयोग किन-किन स्थितियों या वस्तुओं के लिए करते हैं? बताइए। (संकेत- गाँठ बाँधना)।

उत्तर: कविता में गति को न बाँधने की बात कही गई है। सामान्य जीवन में हम बाँधने शब्द का प्रयोग कई स्थितियों या वस्तुओं के लिए करते हैं, जैसे—

कपड़े या रस्सी में गाँठ बाँधना

बालों में रिबन बाँधना

किसी वस्तु को डोरी या रस्सी से बाँधना

खेत में पशुओं को खूँटे से बाँधना

उपहार को फीते से बाँधना

नाव को किनारे रस्सी से बाँधना

किसी वचन या वादे से अपने को बाँधना

ये उदाहरण दिखाते हैं कि बाँधना शारीरिक वस्तुओं तक ही सीमित नहीं, यह विचारों और वचनों में भी हो सकता है।

(ख) ‘स्वर्ग’ शब्द से आशय है ‘सुखद स्थान’। अर्थात वह स्थान जहाँ सुख, शांति, समृद्धि और आनंद की अनुभूति हो। अपने घर, आस-पड़ोस और विद्यालय को सुखद स्थान बनाने के लिए आप क्या-क्या प्रयास करेंगे? सूची बनाइए और घर के सदस्यों के साथ साझा कीजिए।

उत्तर: ‘स्वर्ग’ का अर्थ सुखद स्थान है। अपने घर, आस-पड़ोस और विद्यालय को सुखद बनाने के लिए मैं ये प्रयास करूँगा—

घर में साफ-सफाई और सुव्यवस्था बनाए रखना।

पौधारोपण कर वातावरण को हरा-भरा बनाना।

घर व विद्यालय में प्यार, सहयोग और आपसी सम्मान का वातावरण बनाना।

समय-समय पर सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियाँ आयोजित करना।

कचरा न फैलाना और पानी-बिजली की बचत करना।

सभी को मदद करने और साझा करने की आदत डालना।

इनसे घर, पड़ोस और विद्यालय शांति, सौहार्द और समृद्धि से भरे सुखद स्थान बन सकते हैं।

(ग) कविता में सपनों की बात की गई है। आपका कौन-सा सपना ऐसा है जो यदि सच हो जाए तो वह दूसरों की सहायता कर सकता है? उसके विषय में बताइए।

उत्तर: मेरा सपना है कि मैं शिक्षक और लेखक बनूँ। यदि यह सपना सच होता है तो मैं गाँव और शहर के बच्चों को मुफ़्त शिक्षा, पुस्तकें और मार्गदर्शन देकर उनकी मदद कर सकूँगा। साथ ही शिक्षा के माध्यम से समाज में समान अवसर और जागरूकता फैला पाऊँगा, जिससे कई परिवारों का भविष्य उज्ज्वल होगा।

चर्चा-परिचर्चा

“सपनों में दोनों ही गति है/ उड़कर आँखों में आता है।” किसी एक के द्वारा देखा गया सपना बहुत से लोगों का सपना भी बन जाता है, जैसे- हमारे स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा भारत को स्वतंत्र कराने का सपना सभी भारतीयों का सपना बन गया। साथियों से चर्चा कीजिए कि आपके कौन-से ऐसे सपने हैं जिन्हें पूरा करने के लिए आप अन्य लोगों को भी जोड़ना चाहेंगे।

उत्तर: मेरे कई सपनों में से एक ऐसा सपना है जिसे मैं दूसरों के साथ मिलकर पूरा करना चाहता हूँ—अपने क्षेत्र में पुस्तकालय और अध्ययन-केंद्र खोलना। इसके लिए मैं अपने मित्रों, पड़ोसियों, विद्यालय के शिक्षकों और समाज के जागरूक नागरिकों को जोड़ना चाहूँगा ताकि हर बच्चा और युवा मुफ़्त में किताबें पढ़ सके, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सके और नई जानकारी प्राप्त कर सके। यह केवल मेरा नहीं, बल्कि पूरे समाज के विकास का सपना बन जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का सपना भारत को स्वतंत्र कराने का था।

सृजन

(क) विराम चिह्न का फेरबदल-

रोको मत, जाने दो

रोको, मत जाने दो

लेखन में विराम चिह्नों का विशेष महत्व होता है। विराम चिह्नों के प्रयोग से वाक्य या पंक्ति का अर्थ स्पष्ट हो जाता है और परिवर्तित भी हो जाता है, जैसे ‘रोको मत, जाने दो’ में रोको मत के बाद अल्पविराम चिह्न (,) का प्रयोग किया गया है, जिसका अर्थ है कि बिना रोके जाने दिया जाए। वहीं ‘रोको, मत जाने दो’ में रोको के बाद अल्पविराम (.) का प्रयोग किया गया है, जिसका अर्थ है कि जाने से रोका जाए। नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। आप किन चित्रों के लिए ‘रोको मत, जाने दो’ या ‘रोको, मत जाने दो’ का प्रयोग करेंगे? दिए गए रिक्त स्थान में लिखिए और इन चित्रों को शीर्षक भी दीजिए।

उत्तर: नीचे दिए गए चित्रों को देखकर उनके लिए उपयुक्त वाक्य “रोको मत, जाने दो” या “रोको, मत जाने दो” और शीर्षक इस प्रकार हैं—

1. ट्रैफिक पुलिस वाला चित्र (पहला चित्र – बायीं ओर):

शीर्षक : एम्बुलेंस को रास्ता दो

उपयुक्त वाक्य : रोको मत, जाने दो।

कारण : एम्बुलेंस में रोगी को तुरंत अस्पताल ले जाना है, इसलिए ट्रैफिक पुलिस सभी गाड़ियों को रोककर एम्बुलेंस को बिना रोके जाने दे रहा है।

2. नेत्रहीन व्यक्ति को सड़क पार कराना (पहला चित्र – दायीं ओर):

शीर्षक : जरूरतमंद की सहायता

उपयुक्त वाक्य : रोको, मत जाने दो।

कारण : नेत्रहीन व्यक्ति को सुरक्षित सड़क पार कराने के लिए गाड़ियों को रोकना जरूरी है, ताकि दुर्घटना न हो।

3. ज़ेब्रा क्रॉसिंग पर सड़क पार करते लोग (दूसरी पंक्ति – बायीं ओर):

शीर्षक : पैदल यात्रियों को सुरक्षा

उपयुक्त वाक्य : रोको, मत जाने दो।

कारण : वाहन चालकों को रोककर पैदल यात्रियों को सुरक्षित पार कराने का संकेत है।

4. वन्य जीवों का चेतावनी बोर्ड (दूसरी पंक्ति – दायीं ओर):

शीर्षक : वन्य प्राणियों की सुरक्षा

उपयुक्त वाक्य : रोको, मत जाने दो।

कारण : जंगल के भीतर जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए वाहनों को रोकने और सावधानी से चलने की आवश्यकता है।

5. पुलिस द्वारा परिवार को गले लगाना – संदेश “बेटियाँ बोझ नहीं हैं” (तीसरी पंक्ति – बायीं ओर):

शीर्षक : बेटियों का सम्मान

उपयुक्त वाक्य : रोको, मत जाने दो।

कारण : बेटियों को बोझ समझने की सोच और कुरीति को रोकना ज़रूरी है।

6. मतदान केंद्र (तीसरी पंक्ति – दायीं ओर):

शीर्षक : मतदान का अधिकार

उपयुक्त वाक्य : रोको मत, जाने दो।

कारण : लोगों को मतदान के लिए प्रोत्साहित करना है, इसलिए उन्हें रोके बिना मतदान केंद्र तक जाने देना चाहिए।

सारांश:

रोको मत, जाने दो : जहाँ मदद, आपात स्थिति या जनहित के लिए तुरंत रास्ता देने की आवश्यकता है।

रोको, मत जाने दो : जहाँ सुरक्षा, कानून-व्यवस्था या किसी खतरे को रोकने की आवश्यकता है।

(ख) कविता आगे बढ़ाएँ

नीचे दी गई पंक्तियों को आगे बढ़ाते हुए अपनी एक कविता तैयार कीजिए।

इन सपनों के पंख न काटो

इन सपनों की गति मत बाँधो।

_____________________

_____________________

उत्तर: कविता आगे बढ़ाएँ

इन सपनों के पंख न काटो,

इन सपनों की गति मत बाँधो।

ये उजियारे कल का लाएँ,

नव निर्माण की राह दिखाएँ।

जहाँ न रहे कोई दुःख की छाया,

हर मन में हो प्रेम की माया।

उमंगों के दीप जलाएँ ये,

सत्य और साहस अपनाएँ ये।

इनको खुला गगन दे दो,

हर मंज़िल तक उड़ने दो।

इन सपनों के पंख न काटो,

इन सपनों की गति मत बाँधो।

(ग) खोया-पाया

मान लीजिए आपका सपना कहीं खो गया है। उसके खो जाने की रिपोर्ट तैयार करें। आपको स्कूल प्रशासन को यह रिपोर्ट भेजनी है। इसके लिए स्कूल प्रशासन के नाम एक पत्र लिखिए।

उत्तर: 

सेवा में,

प्रधानाचार्य महोदय / महोदया

________ विद्यालय

विषय : सपना खो जाने की रिपोर्ट

महोदय / महोदया,

सविनय निवेदन है कि मेरा एक अनमोल सपना कल विद्यालय से घर लौटते समय खो गया। यह सपना मेरे उज्ज्वल भविष्य और समाज की सेवा से जुड़ा हुआ है। उसका विवरण इस प्रकार है—

सपने का नाम : शिक्षा से सभी बच्चों को सशक्त बनाने का सपना

खोने का स्थान : विद्यालय से घर के बीच का रास्ता

खोने की तिथि व समय : (तिथि व समय लिखें)

विशेष पहचान : इस सपने में नई आशाएँ, साहस और मेहनत की चमक थी।

मैं इस सपने को पूरा करने के लिए निरंतर मेहनत कर रहा था। इसके खो जाने से मुझे बहुत दुःख हो रहा है। आपसे विनम्र अनुरोध है कि इसकी खोज में मदद करें और विद्यालय के सूचना-पट्ट पर इसकी जानकारी प्रसारित कराएँ ताकि यदि किसी को यह सपना मिले तो मुझे तुरंत सूचित करें।

धन्यवाद सहित।

भवदीय

Neet Sharma

वाद-विवाद

(क) कक्षा में पाँच-पाँच विद्यार्थियों के समूह बनाकर एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। इसके लिए विषय है “व्यक्ति को बाँध सकते हैं उसकी कल्पना और विचारों को नहीं।”   

एक समूह विषय के विपक्ष में और दूसरा समूह विषय के पक्ष में अपना तर्क देगा। जैसे-

समूह 1– व्यक्ति की कल्पना और विचारों पर नियंत्रण आवश्यक है।

समूह 2- स्वतंत्र विचार और कल्पना प्रगति के लिए महत्वपूर्ण हैं।

उत्तर: वाद–विवाद गतिविधि:

हमारी कक्षा में पाँच-पाँच विद्यार्थियों के दो समूह बनाए गए। वाद-विवाद का विषय था —

“व्यक्ति की कल्पना और विचारों पर नियंत्रण आवश्यक है” (विपक्ष) और

“स्वतंत्र विचार और कल्पना प्रगति के लिए महत्वपूर्ण हैं” (पक्ष)।

समूह 1 (विषय के पक्ष में : नियंत्रण आवश्यक)

उनका तर्क था कि यदि कल्पना और विचारों पर कोई नियंत्रण न हो तो समाज में अराजकता फैल सकती है।

असंयमित विचार अपराध, हिंसा और गलत कार्यों को जन्म दे सकते हैं।

नैतिकता, कानून और अनुशासन बनाए रखने के लिए सीमाएँ जरूरी हैं।

अनियंत्रित कल्पना कभी-कभी व्यक्ति को वास्तविकता से दूर कर सकती है, जिससे नुकसान हो सकता है।

समूह 2 (विषय के विपक्ष में : स्वतंत्रता महत्वपूर्ण)

उनका कहना था कि स्वतंत्र विचार और कल्पना ही खोज, विज्ञान, कला और साहित्य को जन्म देते हैं।

यदि महापुरुषों और वैज्ञानिकों की कल्पना को रोका गया होता तो समाज प्रगति नहीं कर पाता।

स्वतंत्र सोच आत्मविश्वास, नवाचार और समस्याओं के समाधान में सहायक है।

प्रगति और बदलाव के लिए विचारों को खुली उड़ान देना अनिवार्य है।

अंत में, कक्षा के अधिकांश विद्यार्थियों ने समूह 2 के तर्कों को अधिक सशक्त माना, क्योंकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि विचारों की स्वतंत्रता ही रचनात्मकता और प्रगति की असली कुंजी है।

(ख) विद्यार्थी वाद-विवाद के अनुभवों पर एक अनुच्छेद भी लिख सकते हैं।

उत्तर: वाद–विवाद का अनुभव (अनुच्छेद): वाद–विवाद में भाग लेना हमारे लिए अत्यंत रोचक और सीख से भरपूर अनुभव रहा। हमें विषय पर गहराई से सोचने, तर्क खोजने और स्पष्ट भाषा में अपने विचार रखने का अवसर मिला। इस गतिविधि ने हमारी तार्किक सोच, आत्मविश्वास और बोलने की कला को विकसित किया। समूह में मिलकर तैयारी करने से सहयोग और टीम भावना मजबूत हुई। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि हम अलग-अलग दृष्टिकोणों को समझ पाए और यह जाना कि किसी भी विचार को परखने के लिए संतुलित सोच और ठोस तर्क कितने आवश्यक होते हैं। यह अनुभव भविष्य में वाद-विवाद, भाषण और निर्णय लेने की स्थितियों में हमारे लिए बहुत उपयोगी होगा।

देखना-सुनना-समझना…

(क) “धूम गगन में मंडराता है।”

सुगंध का अनुभव सूंघकर किया जाता है। धुएँ को देखा जा सकता है। वायु का अनुभव स्पर्श द्वारा किया जा सकता है और अनुभवों को बोलकर भी कहा या बताया जा सकता है जैसे कि कोई कमेंट्री कर रहा हो।

जो व्यक्ति देख पाने में सक्षम नहीं है, आप उन्हें निम्नलिखित स्थितियों का अनुभव कैसे करवा सकते हैं-

वर्षा की बेंदों का

धुएँ के उड़ने का

खेल के रोमांच का

उत्तर: देखना–सुनना–समझना:

जो व्यक्ति देख पाने में सक्षम नहीं है, उन्हें अलग-अलग इंद्रियों से अनुभव करवाया जा सकता है—

(i) वर्षा की बूँदों का अनुभव –

उनके हाथों पर धीरे-धीरे पानी की बूँदें गिरने दें ताकि वे स्पर्श से बूंदों की ठंडक और गिरने की लय को महसूस कर सकें।

वर्षा की टप-टप की आवाज़ सुनाकर वर्षा का संगीत अनुभव कराएँ।

मिट्टी से उठने वाली सोंधी महक सूँघने दें ताकि बारिश का वातावरण समझ सकें।

(ii) धुएँ के उड़ने का अनुभव –

उन्हें पास में जलती अगरबत्ती या हल्का धुआँ देने से उसकी गंध सूँघने दें।

हाथ को धुएँ की दिशा में ले जाकर धुएँ के हल्के ताप और गति का स्पर्श महसूस कराएँ।

धुएँ के फैलने का वर्णन बोलकर या कमेंट्री की तरह सुनाएँ कि किस तरह वह ऊपर उठता और फैलता है।

(iii) खेल के रोमांच का अनुभव –

खेल मैदान की आवाज़ें सुनाएँ जैसे तालियाँ, उत्साहवर्धक नारे, सीटी, खिलाड़ियों की पुकार।

रोमांचक पलों का जोर से वर्णन करें जैसे रेडियो कमेंट्री ताकि खेल की गति और उत्साह वे कल्पना कर सकें।

भीड़ की उत्सुकता और जोश भरी हलचल का स्पर्श पास खड़ा होकर महसूस कराया जा सकता है।

(ख) मूक अभिनय द्वारा कविता का भाव

विद्यार्थियों के बराबर-बराबर की संख्या में दो दल (टीम) बनाइए। दलों के नाम रखें कल्पना और आकांक्षा।

‘कल्पना’ दल से एक प्रतिभागी आगे आए और मूक अभिनय (हाव-भाव या संकेत) के माध्यम से इस कविता की किसी भी पंक्ति का भाव प्रस्तुत करें। ‘आकांक्षा’ दल के प्रतिभागियों को पहचानकर बताना होगा कि अभिनय में किस पंक्ति की बात की जा रही है। पहचानने की समय सीमा भी निर्धारित की जाए। निर्धारित समय सीमा पर सही उत्तर बताने वाले दल को अंक भी दिए जा सकते हैं। इस तरह से खेल को आगे बढ़ाया जाए।

उत्तर: मूक अभिनय द्वारा कविता का भाव:

कक्षा को दो दलों में बाँटा जाएगा—दल ‘कल्पना’ और दल ‘आकांक्षा’।

सबसे पहले ‘कल्पना’ दल का एक सदस्य मंच पर आएगा और कविता की किसी भी पंक्ति का भाव सिर्फ हाव-भाव और संकेतों से प्रस्तुत करेगा।

जैसे “इन सपनों के पंख न काटो” के लिए हाथों से उड़ान का संकेत देना और पंख फैलाने का अभिनय करना।

या “मुक्त गगन में विचरण कर यह तारों में फिर मिल जाएगा” के लिए दोनों हाथ ऊपर उठाकर आसमान और तारों की ओर इंगित करना।

‘आकांक्षा’ दल के सदस्य को निर्धारित समय (जैसे 30 सेकंड) के भीतर यह पहचानना होगा कि अभिनय में कविता की कौन-सी पंक्ति दर्शाई जा रही है।

सही उत्तर देने पर अंक दिए जाएँगे।

फिर ‘आकांक्षा’ दल से कोई प्रतिभागी अभिनय करेगा और ‘कल्पना’ दल पहचान करेगा।

इस प्रकार पूरे कक्षा में रोचक खेल, सहयोग और कविता के भावों की गहरी समझ विकसित होगी।

आपदा प्रबंधन

“अग्नि सदा धरती पर जलती / धूम गगन में मंडराता है।”

आग, बाढ़, भूकंप जैसी आपदाएँ अचानक आ जाती हैं। सही जानकारी से आपदाओं की स्थिति में बचाव संभव हो जाता है।

(क) कक्षा में अपने शिक्षकों के साथ चर्चा कीजिए कि क्या-क्या करेंगे यदि– 

कहीं अचानक आग लग जाए। 

आपके क्षेत्र में बाढ़ आ जाए। 

भूकंप आ जाए।

उत्तर: आपदा की स्थिति में क्या करेंगे:

कहीं अचानक आग लग जाए:

तुरंत आसपास के लोगों को आग की सूचना दें और फ़ायर ब्रिगेड (अग्निशमन विभाग) को 101 पर कॉल करें।

बिजली के मुख्य स्विच को बंद करें ताकि शॉर्ट सर्किट न हो।

गैस सिलेंडर व ज्वलनशील वस्तुओं को सुरक्षित स्थान पर हटाएँ।

धुआँ अधिक हो तो नाक और मुँह को गीले कपड़े से ढकें और झुककर बाहर निकलें।

लिफ्ट का उपयोग न करके सीढ़ियों से बाहर निकलें।

आपके क्षेत्र में बाढ़ आ जाए:

तुरंत ऊँचाई वाली सुरक्षित जगह पर पहुँचें।

ज़रूरी चीज़ें (पहचान पत्र, नकद, सूखी खाद्य सामग्री, पीने का पानी, दवाइयाँ, टॉर्च) सुरक्षित थैले में रखें।

बिजली के उपकरणों और मुख्य स्विच को बंद करें।

पानी में बहाव तेज़ हो तो सड़क या पुल पार करने का प्रयास न करें।

सरकारी राहत दल के निर्देशों का पालन करें।

भूकंप आ जाए:

सबसे पहले शांत रहें और बाहर निकलने का प्रयास करें।

यदि भवन से तुरंत बाहर नहीं निकल सकते तो किसी मजबूत मेज़, पलंग या दीवार के कोने में बैठ जाएँ और सिर को हाथ या तकिए से ढक लें।

लिफ्ट का प्रयोग न करें और खिड़कियों से दूर रहें।

बिजली के स्विच और गैस सिलेंडर बंद कर दें।

झटका रुकने के बाद ही इमारत से बाहर निकलें और खुले स्थान पर रहें।

(ख) “मैं आपदा के समय क्या करूँगा या करूंगी?” – एक सूची या चित्र आधारित योजना बनाइए।

उत्तर: “मैं आपदा के समय क्या करूँगा/करूँगी” – सूची आधारित योजना:

1. आग लगने पर:

101 नंबर पर फ़ायर ब्रिगेड को कॉल करूँगा/करूँगी।

बिजली और गैस का मुख्य स्विच तुरंत बंद करूँगा/करूँगी।

गीले कपड़े से नाक-मुँह ढककर धुएँ से बचते हुए सुरक्षित रास्ते से बाहर निकलूँगा/निकलूँगी।

बच्चों और बुजुर्गों को पहले सुरक्षित स्थान पर पहुँचाऊँगा/पहुँचाऊँगी।

2. बाढ़ आने पर:

परिवार को ऊँचे स्थान पर ले जाऊँगा/जाऊँगी।

ज़रूरी दवाइयाँ, सूखा भोजन, पानी और टॉर्च के साथ एक आपात बैग तैयार रखूँगा/रखूँगी।

सरकारी बचाव दल और रेडियो पर मिलने वाले निर्देशों का पालन करूँगा/करूँगी।

तेज़ बहाव वाले पानी में जाने से बचूँगा/बचूँगी।

3. भूकंप आने पर:

तुरंत खुली जगह पर जाने का प्रयास करूँगा/करूँगी।

बाहर न निकल पाने की स्थिति में मजबूत मेज़ या दीवार के कोने में सुरक्षित बैठूँगा/बैठूँगी और सिर ढकूँगा/ढकूँगी।

बिजली और गैस का स्विच बंद करूँगा/करूँगी।

झटके रुकने तक लिफ्ट का प्रयोग नहीं करूँगा/करूँगी और बाहर निकलने में जल्दबाज़ी नहीं करूँगा/करूँगी।

शिल्प

“स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प

भूमि को सिखलायेगा।”

हमारे देश में हजारों वर्षों से अनगिनत शिल्प प्रचलित हैं। उनमें से कुछ के बारे में आप पहले से जानते होंगे। इनके बारे में कक्षा में चर्चा कीजिए।

(क) अपने समूह के साथ मिलकर नीचे दिए गए शिल्प-कार्यों को उनके सही अर्थों या व्याख्या से मिलाइए–

शिल्प-कार्यअर्थ या व्याख्या
1. काष्ठ शिल्प1. काँच से झूमर, सजावटी वस्तुएँ और रंगीन खिड़कियाँ आदि बनाना
2. मृत्तिका शिल्प2. कपड़ों पर कढ़ाई, बुनाई, छपाई, बंधेज आदि सजावटी कार्य
3. धातु शिल्प3. कागज से खिलौने, सजावट, लिफाफे और पेपर मेशी बनाना
4. कांच शिल्प4. लकड़ी से वस्तुएँ, खिलौने, मूर्तियाँ आदि बनाना
5. वस्त्र शिल्प5. मिट्टी से बर्तन, दीये, मूर्तियाँ और सजावटी चीजें बनाना
6. कागज शिल्प6. ताँबा, पीतल, लोहे जैसी धातुओं से दीपक, मूर्तियाँ, थालियाँ आदि बनाना
7. पत्थर शिल्प7. पारंपरिक चित्रकलाओं, जैसे मधुबनी, गोड, वरली आदि से कलाकृतियाँ बनाना
8. चमड़ा शिल्प8. कपड़ों या सजावट की वस्तुओं में शीशे जोड़ना या जड़ाई करना
9. बाँस और बेंत शिल्प9. लाख से चूड़ियाँ, खिलौने, डिब्बे और अन्य सजावटी वस्तुएँ बनाना
10. मोती एवं आभूषण शिल्प10. लकड़ी, पत्थर या धातु पर बारीक खुदाई द्वारा डिजाइन बनाना
11. लाख शिल्प11. बाँस और बेंत से टोकरियाँ, कुर्सियाँ, चटाई, पंखे आदि बनाना
12. शीशा शिल्प12. चमड़े से जूते, बेल्ट, बैग और अन्य उपयोगी वस्तुएँ बनाना
13. चित्रकला शिल्प13. संगमरमर या अन्य पत्थरों से मूर्तियाँ बनाना, मंदिरों की सजावट करना आदि
14. नक्काशी शिल्प14. रंग-बिरंगे मोतियों से हार, कंगन, झुमके आदि गहने बनाना

उत्तर:

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