NCERT Class 8 Hindi Chapter 8 नए मेहमान

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NCERT Class 8 Hindi Chapter 8 नए मेहमान

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Chapter: 8

पाठ से

आइए, अब हम इस एकांकी को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं। नीचे दी गई गतिविधियों इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (☆) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. आगतुकों ने विश्वनाथ के बच्चों को सीधे लड़के’ किस संदर्भ में कहा?

(i) अतिथियों की सेवा करने के कारण।

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(ii) किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण।

(iii) आज्ञाकारिता के भाव के कारण।

(iv) गरमी को चुपचाप सहने के कारण।

उत्तर: (i) अतिथियों की सेवा करने के कारण।

(ii) किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण।

(iii) आज्ञाकारिता के भाव के कारण।

2. “एक ये पड़ोसी हैं, निर्दयी विश्वनाथ ने अपने पड़ोसी को निर्दयी क्यों कहा?

(i) उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं।

(ii) पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं।

(iii) लड़ने-झगड़ने के अवसर ढूंढ़ते हैं।

(iv) अतिथियों का अपमान करते हैं।

उत्तर: (i) उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं।

(ii) पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं।

3. “ईश्वर करें करें इन दिनों कोई मेहमान न आए।” न आए।” रेवती इस तरह की कामना क्यों कर रही है?

(i) मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण।

(ii) रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण।

(iii) अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण।

(iv) उसे अतिथियों का आना-जाना पसंद न होने के कारण।

उत्तर: (i) मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण।

(ii) रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण।

(iii) अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण।

4. “हे भगवान ! कोई मुसीबत न आ जाए।” रेवती कौन-सी मुसीबत नहीं आने के लिए कहती है?

(i) पानी की कमी होने की।

(ii) पड़ोसियों के चिल्लाने की।

(iii) मेहमानों के आने की।

(iv) गरमी के कारण बीमारी की।

उत्तर: (iii) मेहमानों के आने की।

5. इस एकांकी के आधार पर बताएँ कि मुख्य रूप से कौन-सी बात किसी रचना को नाटक का रूप देती है?

(i) संवाद।

(ii) कथा।

(iii) वर्णन।

(iv) मचन।

उत्तर: (i) संवाद।

(ख) हो सकता है कि आप सभी ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अब अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर: 1. मैंने यह उत्तर इसलिए चुना क्योंकि नए मेहमान एकांकी की पूरी कथा संवादों से आगे बढ़ती है। हर घटना – मेहमानों का आगमन, पड़ोसी से झगड़ा, असली आगंतुक का आना – सब कुछ केवल पात्रों की बातचीत से स्पष्ट होता है।

2. मेरे विचार से नाटक में पात्रों की भावनाएँ और विचार सीधे संवादों से प्रकट होते हैं, वर्णन से नहीं। यहाँ भी रेवती का दर्द, विश्वनाथ की परेशानी और अतिथियों का स्वभाव सब कुछ उनके बोलचाल से ही समझ में आता है।

3. मुझे लगा कि मंचन और दृश्य सज्जा सहायक होती है, पर नाटक का प्राण संवाद ही हैं। मंचन या कथा न हो तो भी संवादों से नाटक प्रस्तुत किया जा सकता है, लेकिन संवादों के बिना नाटक संभव नहीं।

4. मैंने यह विकल्प इसलिए चुना क्योंकि संवाद ही दर्शकों तक संदेश पहुँचाते हैं और नाटक को जीवंत बनाते हैं। इस एकांकी में वर्णन बहुत कम है, लगभग हर बात पात्र खुद कहते हैं।

5. मेरे अनुसार संवाद ही नाटक को कहानी से अलग करते हैं। अगर केवल वर्णन या कथा होती तो यह कहानी कहलाती, न कि नाटक। इसलिए ‘संवाद’ को सही उत्तर मानना उचित है।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए।

(i) “पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है, और प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।”

उत्तर: इस पंक्ति से भीषण गर्मी और प्यास की तीव्रता झलकती है। कई गिलास पानी पीने के बाद भी प्यास न बुझना बताता है कि गर्मी इतनी ज्यादा है कि शरीर का तापमान सामान्य नहीं हो पा रहा। यह पंक्ति लोगों की असहायता और उस समय की कठिन परिस्थिति को जीवंत कर देती है।

(ii) “सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।”

उत्तर: यहाँ गर्मी और लू की तुलना आग बरसने से की गई है। यह केवल तापमान की ऊँचाई नहीं दिखाता, बल्कि वातावरण में तपिश, धूप की चुभन और चारों ओर फैली बेचैनी का अनुभव कराता है। ऐसा लगता है जैसे पूरा शहर एक अग्निकुंड में बदल गया हो।

(iii) “यह तो हमारा ही भाग्य है कि बने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।”

उत्तर: यह पंक्ति मध्यमवर्गीय परिवार की आर्थिक विवशता को प्रकट करती है। पैसे की कमी के कारण वे पहाड़ या ठंडी जगह नहीं जा सकते। घर को भट्टी और खुद को भाड़ में भुनते चनों से तुलना करके कवि ने उनकी मजबूरी, असहायता और दुख को बहुत मार्मिक ढंग से व्यक्त किया है।

(iv) “आह, अब जान में जान आईी सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।”

उत्तर: यह पंक्ति पानी के महत्त्व को उजागर करती है। भीषण गर्मी में ठंडा पानी पीने से मिलने वाली राहत और ताजगी को यहाँ “जान में जान आना” कहकर व्यक्त किया गया है। यह हमें याद दिलाती है कि गर्मी में पानी ही असली जीवनदायी अमृत है।

मिलकर करें मिलान

स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियों दी गई हैं और स्तंभ 2 में उनसे मिलते-जुलते भाव दिए गए हैं। स्तंभ 1 की पंक्तियों को स्तंभ 2 की उनके सही भाव वाली पंक्तियों से रेखा खींचकर मिलाइएं –  

क्रम स्तंभ 1स्तंभ 2
1.लाखों के आदमी खाक में मिल गए।1. भोजन की व्यवस्था कब तक हो जाएगी
2.धोती ऐसी चर्रा रही है, जैसे पुरानी हो।2. पहले अपना ध्यान फिर दूसरा काम
3.माल-मसाला तो अटी में है न?3. बहुत ही समृद्ध व्यक्ति थे पर अब उनके पास कुछ भी नहीं है
4.खाने में क्या देर-दार है।4. कपड़ा पसीने से भीगकर पुराने जैसा हो गया है।
5.पहले आत्मा फिर परमात्मा5. धनराशि सुरक्षित तो है ना

उत्तर:

क्रम स्तंभ 1स्तंभ 2
1.लाखों के आदमी खाक में मिल गए।3. बहुत ही समृद्ध व्यक्ति थे पर अब उनके पास कुछ भी नहीं है
2.धोती ऐसी चर्रा रही है, जैसे पुरानी हो।4. कपड़ा पसीने से भीगकर पुराने जैसा हो गया है।
3.माल-मसाला तो. अटी में है न?5. धनराशि सुरक्षित तो है ना
4.खाने में क्या देर-दार है।1. भोजन की व्यवस्था कब तक हो जाएगी
5.पहले आत्मा फिर परमात्मा2. पहले अपना ध्यान फिर दूसरा काम

सोच-विचार के लिए

एकांकी को पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए–

(क) “शहर में तो ऐसे ही मकान होते हैं।” नन्हेमल का ‘ऐसे ही मकान’ से क्या आशय है?

उत्तर: नन्हेमल का मतलब है कि बड़े नगरों में साधारण मध्यवर्गीय लोगों के मकान प्रायः छोटे, भीड़-भाड़ वाले और कम सुविधाओं वाले होते हैं। उनमें प्रायः पीछे एक छोटा आँगन और ऊपर छत होती है। यानी शहर के मकानों का यही सामान्य ढाँचा होता है – तंग कमरे, कम जगह और गर्मी से भरे हुए।

(ख) पड़ोसी को विश्वनाथ से किस तरह की शिकायत है? आपके विचार से पड़ोसी का व्यवहार उचित है या अनुचित? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

उत्तर: पड़ोसी को यह शिकायत थी कि विश्वनाथ के मेहमानों ने उसकी छत पर गंदा पानी फैला दिया और पहले भी उनके यहाँ आए किसी मेहमान ने उसकी खाट पर लेटने जैसी असुविधा दी थी।

मेरे विचार से पड़ोसी का व्यवहार आंशिक रूप से उचित है, क्योंकि दूसरों की छत पर गंदा पानी फैलाना या बिना अनुमति खाट पर लेटना गलत है। लेकिन उसका बार-बार गुस्सा करना और कठोर शब्दों में ‘रोज़ गलती’ कहकर ताना देना अनुचित है। उसे धैर्य और शिष्टता से बात करनी चाहिए थी।

(ग) एकांकी में विश्वनाथ नन्हेमल और बाबूलाल को नहीं जानता है, फिर भी उन्हें अपने घर में आने देता है। क्यों?

उत्तर: विश्वनाथ ने नन्हेमल और बाबूलाल को नहीं पहचाना, फिर भी आतिथ्य धर्म निभाया। भारतीय संस्कृति में अतिथि देवो भव: की परंपरा के अनुसार वह उन्हें बिना शक-शुबहा अपने घर में ले आया। उसके मन में यह भी संभावना रही कि शायद कोई पुराना परिचित या दूर का रिश्तेदार हो। इसलिए उसने अपनापन दिखाकर पानी पिलाया और भोजन बनवाने की तैयारी की।

(घ) एकांकी के उन संवादों को ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि बाबूलाल और नन्हेमल विश्वनाथ के परिचित नहीं हैं?

उत्तर: विश्वनाथ: “क्षमा कीजिएगा आप कहाँ से पधारे हैं?”

नन्हेमल: “अरे, आप नहीं जानते…।”

विश्वनाथ: “में संपतराम को नहीं जानता।”

विश्वनाथ: “जी हाँ, बात यह है कि मैं बिजनौर गया तो अवश्य हूँ, पर बहुत दिन हो गए हैं।”

नन्हेमल: “कभी-कभी ऐसा हो जाता है। हम तो आपको जानते हैं…।”

इन संवादों से पता चलता है कि विश्वनाथ और वे अतिथि पहले से परिचित नहीं थे।

(ङ) एकांकी के उन वाक्यों को ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि शहर में भीषण गरमी पड़ रही है।

उत्तर: विश्वनाथ: “भयंकर है। मकान है कि भट्टी! ओफ, बड़ी गरमी है!”

रेवती: “पत्ता तक नहीं हिल रहा है। जैसे साँस बंद हो जाएगी। सिर फटा जा रहा है।”

विश्वनाथ: “पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है और प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।”

नन्हेमल: “बड़ी गरमी है। क्या कहें, पंडित जी, पैदल चले आ रहे हैं, कपड़े तो ऐसे हो गए कि निचोड़ लो।”

बाबूलाल: “उफ्फ, बड़ी गरमी है।”

ये वाक्य पूरे एकांकी में भीषण गर्मी और असुविधा का सजीव चित्र प्रस्तुत करते हैं।

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-

(क) एकांकी में विश्वनाथ अपनी पत्नी को अतिथियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने के लिए कहता है। साथ ही रेवती की अस्वस्थता का विचार करके भोजन बाजार से मंगवाने का सुझाव भी देता है। लेकिन उसने स्वयं अतिथियों के लिए भोजन बनाने के विषय में क्यों नहीं सोचा?

उत्तर: उस समय समाज में रसोई का कार्य मुख्यतः स्त्रियों का माना जाता था। पुरुष प्रायः बाहर के काम-धंधे संभालते थे और घर के भीतर विशेषकर रसोई में नहीं जाते थे। विश्वनाथ भी उसी सामाजिक सोच और परंपरा से बँधा हुआ था। इसलिए उसने रेवती से ही भोजन बनाने को कहा और केवल एक व्यावहारिक सुझाव दिया कि ज़रूरत हो तो खाना बाज़ार से मँगवा लिया जाए। यही कारण है कि उसने खुद रसोई में जाने का विचार नहीं किया।

(ख) एकांकी में विश्वनाथ का बेटा प्रमोद अतिथियों के पेयजल की व्यवस्था करता है और छोटी बहन का भी ध्यान रखता है। प्रमोद को इस तरह के उत्तरदायित्व क्यों दिए गए होंगे?

उत्तर: प्रमोद घर का बड़ा बेटा है और समझदार है। पिता-माता दोनों ही गर्मी और अस्वस्थता से परेशान थे, इसलिए घर में जो काम तुरंत सम्भाला जा सकता था—जैसे अतिथियों को ठंडा पानी देना, छोटी बहन का ध्यान रखना—वह प्रमोद को सौंपा गया। यह बच्चों को जिम्मेदारी सिखाने का भी एक तरीका था, ताकि वह पारिवारिक सहयोग, सेवा-भाव और अतिथि-सत्कार का अनुभव कर सके।

(ग) कैसी बाते करते हो, भैया! में अभी खाना बनाती हूं’ भीषण गरमी और सिर में दर्द के बावजूद भी रेवती भोजन की व्यवस्था करने के लिए क्यों तैयार हो गई होगी?

उत्तर: भारतीय गृहिणी का स्वभाव अतिथि-सेवा को कर्तव्य मानता है। अतिथि देवो भव: की परंपरा में पली रेवती के लिए अतिथियों को भूखा सोने देना असंभव था। यद्यपि भीषण गर्मी और सिर दर्द ने उसे कष्ट दिया, फिर भी उसने घरेलू जिम्मेदारी, स्नेह और आत्मसम्मान के कारण भोजन बनाने का निर्णय लिया। यह उसका पारिवारिक कर्तव्यबोध और मेहमानों के प्रति आदर का परिचायक है।

(घ) एकाकी से गरमी की भीषणता दशनि वाली कुछ पंक्तियाँ दी जा रहीं हैं। अपनी कल्पना और अनुमान से बताइए कि सर्दी और वर्षा की भीषणता के लिए,आप इनके स्थान पर क्या-क्या वाक्य प्रयोग करते हैं? अपने बाक्यों को दिए गए उचित स्थान पर लिखिए–

गरमी की भीषणता दर्शाने वाली पंक्तियाँसर्दी की भीषणता दर्शाने वाली पंक्तियाँवर्षा की भीषणता दर्शाने वाली पंक्तियाँ
1. यह गरमी में भुन रहा है।यह सर्दी में जम गया।यह वर्षा में भीग रहा है।
2. पर बरफ भी कोई कहाँ तक पिए।
3. सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।
4. प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।
5. चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।
6. ठंडा-ठंडा पानी पिलाओ दोस्त, प्राण सूखे जा रहे हैं।
7. सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।
8. यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।
9. फिर भी पसीने से नहा गया हूँ।

उत्तर:

गरमी की भीषणता दर्शाने वाली पंक्तियाँसर्दी की भीषणता दर्शाने वाली पंक्तियाँवर्षा की भीषणता दर्शाने वाली पंक्तियाँ
1. यह गरमी में भुन रहा है।यह सर्दी में जम गया।यह वर्षा में भीग रहा है।
2. पर बरफ भी कोई कहाँ तक पिए।पर अंगीठी भी कोई कहाँ तक सहे।पर छाता भी कोई कहाँ तक थामे रखे।
3. सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।सारे शहर में जैसे बर्फ की चादर बिछी हो।सारे शहर में जैसे पानी की बाढ़ उमड़ रही हो।
4. प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।ठंड है कि कम होने का नाम नहीं लेती।बरसात है कि रुकने का नाम नहीं लेती।
5. चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।चारों तरफ दीवारें ठंडी बर्फ सी जम रही हैं।चारों तरफ पानी की धाराएँ बह रही हैं।
6. ठंडा-ठंडा पानी पिलाओ दोस्त, प्राण सूखे जा रहे हैं।गरम-गरम सूप पिलाओ दोस्त, अंग ठिठुर रहे हैं।गरम-गरम चाय पिलाओ दोस्त, कपड़े भीगे जा रहे हैं।
7. सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।सचमुच सर्दी में आग ही तो प्राण है।सचमुच बरसात में छाता ही तो सहारा है।
8. यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।यह तो हमारा ही भाग्य है कि बर्फ में पत्थर जैसे जमते रहते हैं।यह तो हमारा ही भाग्य है कि पानी में मछली जैसे भीगते रहते हैं।
9. फिर भी पसीने से नहा गया हूँ।फिर भी ठंड से काँपता जा रहा हूँ।फिर भी वर्षा में भीगकर पानी-पानी हो गया हूँ।

एकांकी की रचना

इस एकांकी के आरंभ में पात्र-परिचय, स्थान, समय और विश्वनाथ और रेवती के घर के विषय में बताया गया है, जैसे कि-

“गरमी की ऋतु, रात के आठ बजे का समय। कमरे के पूर्व की ओर दो दरवाजे…”

विश्वनाथ – उफ्फ, बड़ी गरमी है (पंखा जोर-जोर से करने लगता है) इन बंद मकानों में रहना कितना भयंकर है। मकान है कि भट्टी!

(पश्चिम की ओर से एक स्त्री प्रवेश करती है)

रेवती – (आँचल से मुँह का पसीना पोंछती हुई) पत्ता तक नहीं हिल रहा है। जैसे साँस बंद हो जाएगी। सिर फटा जा रहा है।

एकांकी की इन पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए। इन्हें पढ़कर स्पष्ट पता चल रहा है कि पहली पंक्ति समय और स्थान आदि के विषय में बता रही है। इसे रंगमंच-निर्देश कहते हैं। वहीं दूसरी पंक्तियों से स्पष्ट है कि ये दो लोगों द्वारा कही गई बातें हैं। इन्हें संवाद कहा जाता है। ये ‘नए मेहमान एकांकी का एक अंश है।

एकांकी एक प्रकार का नाटक होता है जिसमें केवल एक ही अंक या भाग होता है। इसमें किसी कहानी या घटना को संक्षेप में दर्शाया जाता है। आप इस एकांकी में ऐसी अनेक विशेषताएँ खोज सकते हैं। (जैसे इस एकांकी में कुछ संकेत कोष्ठक में दिए गए हैं, पात्र-परिचय, अभिनय संकेत, वेशभूषा संबंधी निर्देश आदि)

(क) अपने समूह में मिलकर इस एकांकी की विशेषताओं की सूची बनाइए।

उत्तर: एकांकी की विशेषताओं की सूची:

उदयशंकर भट्ट के “नए मेहमान” एकांकी में निम्न विशेषताएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं—

एक ही अंक और एक ही स्थान : पूरी घटना एक ही जगह (विश्वनाथ का मकान) और एक ही समय (गरमी की रात, लगभग आठ बजे) में घटित होती है।

पात्र-परिचय: नाटक की शुरुआत में सभी पात्रों (विश्वनाथ, रेवती, प्रमोद, किरण, नन्हेमल, बाबूलाल, आगंतुक, पड़ोसी) का संक्षिप्त परिचय दिया गया है।

रंगमंच-निर्देश: समय, स्थान, पात्रों की गतिविधियों, भाव-भंगिमा और वेशभूषा से संबंधित निर्देश कोष्ठक ( ) में दिए गए हैं, जैसे—(पश्चिम की ओर से एक स्त्री प्रवेश करती है), (पंखा जोर-जोर से करने लगता है)।

संवाद प्रधानता: कहानी का विकास पात्रों के बीच संवादों के माध्यम से होता है, कथावाचन नहीं है।

संक्षिप्तता और एकाग्रता: कम समय में एक ही समस्या (अचानक आए अजनबी मेहमानों की परेशानी) को संक्षेप और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

यथार्थ चित्रण : भीषण गर्मी, छोटे शहरी घर की स्थिति, पड़ोसी का तर्क, और भारतीय परिवार की आतिथ्य-परंपरा का जीवंत चित्र मिलता है।

अभिनय संकेत : कलाकारों को मंच पर चलने-फिरने, बोलने और क्रियाएँ करने के स्पष्ट संकेत दिए गए हैं, ताकि मंचन सरल और प्रभावी हो।

(ख) आगे कुछ वाक्य दिए गए हैं। एकांकी के बारे में जो वाक्य आपको सही लग रहे हैं, उनके सामने हाँ लिखिए। जो बाक्य सही नहीं लग रहे हैं, उनके सामने नहीं लिखिए।

वाक्य हाँ/नहीं
1. ‘नए मेहमान’ एकांकी में पूरी कहानी एक ही स्थान, घर में घटित होती दिखाई गई है।
2. एकांकी में पात्रों की संख्या बहुत अधिक है।
3. एकांकी में एक कहानी छिपी है।
4. एकांकी और कहानी में कोई अंतर नहीं है।
5. एकांकी में कहानी की घटनाएं अलग-अलग दिनों या महीनों में हो रही हैं।
6. एकांकी में कहानी मुख्य रूप से संवादों से आगे बढ़ती है।
7. एकांकी में पात्रों को अभिनय के लिए निर्देश दिए गए हैं।

उत्तर: 

वाक्य हाँ/नहीं
1. ‘नए मेहमान’ एकांकी में पूरी कहानी एक ही स्थान, घर में घटित होती दिखाई गई है।हाँ
2. एकांकी में पात्रों की संख्या बहुत अधिक है।नहीं
3. एकांकी में एक कहानी छिपी है।हाँ
4. एकांकी और कहानी में कोई अंतर नहीं है।नहीं
5. एकांकी में कहानी की घटनाएं अलग-अलग दिनों या महीनों में हो रही हैं।नहीं
6. एकांकी में कहानी मुख्य रूप से संवादों से आगे बढ़ती है।हाँ
7. एकांकी में पात्रों को अभिनय के लिए निर्देश दिए गए हैं।हाँ

अभिनय की बारी

(क) क्या आपने कभी मंच पर कोई एकांकी या नाटक देखा है? टीवी पर फिल्में और धारावाहिक तो अवश्य देखे होंगे। अपने अनुभवों से बताइए कि यदि आपको अपने विद्यालय में ‘नए मेहमान एकांकी का मंचन करना हो तो आप क्या-क्या तैयारियाँ करेंगे। (उदाहरण के लिए – इस एकांकी में आप क्या-क्या जोड़ेंगे जिससे यह और अधिक रोचक बने, कौन-से पात्र जोड़ेंगे या पात्रों की वेशभूषा क्या रखेंगे।)

उत्तर: मंचन की तैयारी और कल्पनात्मक सुझाव:

यदि हमारे विद्यालय में “नए मेहमान” एकांकी का मंचन करना हो, तो मैं इसे रोचक बनाने के लिए इन तैयारियों और बदलावों पर ध्यान दूँगा—

1. मंच-सज्जा : कमरे का दृश्य दिखाने के लिए मेज, दो कुर्सियाँ, पुराना पंखा, खूँटी (कपड़े टाँगने के लिए), एक छोटा पलंग और पानी का लोटा/गिलास रखूँगा।

पीछे की ओर दरवाज़ों और खिड़कियों का संकेत रंगीन पर्दों या गत्ते से बनाया जा सकता है।

2. वेशभूषा: विश्वनाथ – साधारण धोती-कुर्ता, पसीने से तर कपड़े।

रेवती – सूती साड़ी, सिर पर पल्ला, हल्की थकान का मेकअप।

नन्हेमल और बाबूलाल – ग्रामीण शैली के कपड़े, पगड़ी, गले में गमछा।

पड़ोसी – घर पहनावे में साधारण कुर्ता-पायजामा।

प्रमोद और किरण – सामान्य बच्चों के कपड़े।

आगंतुक (रेवती का भाई) – हल्के सफर के कपड़े और बैग।

3. संवाद और ध्वनि प्रभाव: गरमी का प्रभाव दिखाने के लिए मंच के पीछे से पंखे की हल्की आवाज़ और कभी-कभी बिजली की हल्की गड़गड़ाहट (बिजली जाने का अहसास) जोड़ सकते हैं।

पानी भरने या दरवाज़ा खटखटाने की ध्वनि भी जीवंतता बढ़ाएगी।

4. अतिरिक्त रोचकता: छोटे-छोटे हास्य प्रसंग जैसे—नन्हेमल का बार-बार पानी माँगना, बाबूलाल का बार-बार नहाने का आग्रह—को हल्के-फुल्के हावभाव से और मज़ेदार बनाया जाएगा।

अंत में असली मेहमान के आने पर हैरानी और राहत का भाव अधिक स्पष्ट दिखाएँगे।

5. नए पात्र (वैकल्पिक): मोहल्ले का एक छोटा लड़का/डाकिया जो रेवती के भाई का न पहुँचा हुआ तार लेकर आता है, ताकि नाटक और भी सजीव लगे।

(ख) अब आपको अपने-अपने समूह में इस एकाकी को प्रस्तुत करने की तैयारी करनी है। इसके लिए आपको यह सोचना है कि कौन किस पात्र का अभिनय करेगा। आपके शिक्षक आपको तैयारी के बाद अभिनय के लिए निर्धारित समय देंगे (जैसे 10 मिनट या 15 मिनट)। आपको इतने ही समय में एकांकी प्रस्तुत करनी है। बारी-बारी से प्रत्येक समूह एकाकी प्रस्तुत कोगा।

सुझाव-

आप एकांकी को जैसा दिया गया है, बिलकुल वैसा भी प्रस्तुत कर सकते हैं या इसमें थोड़ा-बहुत परिवर्तन भी कर सकते हैं।

एकांकी के लिए आस-पास की वस्तु‌ओं का ही उपयोग कर लेना है, जैसे कुर्सी, मेज आदि।

स्थान की कमी हो तो अभिनेता बच्चे अपने स्थान पर खड़े-खड़े भी संवाद बोल सकते हैं।

आप चाहे तो अपने अभिनय को अपने शिक्षक की सहायता से रिकॉर्ड करके उसे अपने परिवार या संबंधियों के साथ साझा भी कर सकते हैं।

उत्तर: अभिनय की योजना (समूह कार्य):

भूमिकाओं का चयन: विश्वनाथ – समूह का वह छात्र जो गंभीर और स्पष्ट उच्चारण वाला हो।

रेवती – वह छात्रा जो भावपूर्ण और सजीव संवाद बोल सके।

नन्हेमल व बाबूलाल – हँसमुख और चंचल छात्र, जो हास्य अभिनय में माहिर हों।

प्रमोद और किरण – जिम्मेदार और आत्मविश्वासी दो छात्र/छात्राएँ।

पड़ोसी – तेज़ संवाद और गुस्से वाले हावभाव करने वाला छात्र।

आगंतुक (रेवती का भाई) – सौम्य और साधारण अभिनय वाला छात्र।

समय-सीमा: शिक्षक द्वारा दिए गए 10–15 मिनट में नाटक समाप्त करने के लिए मुख्य संवादों का चयन और तेज़ गति से अभ्यास करेंगे।

स्थान व वस्तुएँ: विद्यालय का मंच या कक्षा का एक कोना ही पर्याप्त है।

कुर्सी, मेज, पानी का लोटा/गिलास, पंखा या हाथ का पंखा ही मंच सजावट के लिए पर्याप्त रहेंगे।

रिकॉर्डिंग और साझा करना।

अभ्यास के बाद शिक्षक की मदद से पूरे नाटक को मोबाइल या कैमरे से रिकॉर्ड करेंगे ताकि विद्यालय की सभा या घर पर परिवार के साथ साझा कर सकें।

भाषा की बात

“सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।”

“चारों तरफ दीवारें तप रही है।”

“यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।

उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्द गरमी की प्रचंडता को दर्शा रहे हैं कि तापमान अत्यधिक है।

एकांकी में इस प्रकार के और भी प्रयोग हुए हैं जहाँ शब्दों के माध्यम से विशेष प्रभाव उत्पन्न किया गया है, उन प्रयोगों को छाँटकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

उत्तर: एकांकी “नए मेहमान” में भीषण गरमी का प्रभाव दिखाने के लिए लेखक ने कई ऐसे शब्द और वाक्य प्रयोग किए हैं, जिनसे तापमान की प्रचंडता जीवंत हो उठती है। ऊपर दिए गए उदाहरणों के अतिरिक्त निम्न वाक्य विशेष प्रभाव उत्पन्न करते हैं—

“भयंकर है। मकान है कि भट्टी! ओफ, बड़ी गरमी है!”

“पत्ता तक नहीं हिल रहा है। जैसे साँस बंद हो जाएगी। सिर फटा जा रहा है।”

“पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है और प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।”

“के उबल उठा है। इन सुकुमार बालकों का क्या अपराध है?”

“फिर भी पसीने से नहा गया हूँ।”

“बड़ी गरमी है। क्या कहें पंडित जी, पैदल चले आ रहे हैं, कपड़े तो ऐसे हो गए कि निचोड़ लो।”

“ठंडा-ठंडा पानी पिलाओ दोस्त, प्राण सूखे जा रहे हैं।”

“सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।”

इन वाक्यों में भट्टी, उबल उठा, पसीने से नहा गया, प्राण सूखे जा रहे हैं, प्यास बुझने का नाम नहीं लेती जैसे शब्द और भाव गरमी की तीव्रता को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रकट करते हैं।

* मुहावरे

“आज दो साल से दिन-रात एक करके ढूँढ़ रहा हूँ।”

“लाखों के आदमी खाक में मिल गए।”

उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित वाक्यांश ‘रात-दिन एक करना’ तथा ‘खाक में मिलना’ मुहावरों का प्रायोगिक रूप है। ये वाक्य में एक विशेष प्रभाव उत्पन्न कर रहे हैं। एकांकी में आए अन्य मुहावरों की पहचान करके लिखिए और उनके अर्थ समझते हुए उनका अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।

उत्तर: एकांकी “नए मेहमान” में कई मुहावरे ऐसे हैं जो भाव को संक्षेप और प्रभावी ढंग से प्रकट करते हैं। ऊपर दिए गए रात-दिन एक करना और खाक में मिलना के अतिरिक्त निम्न मुहावरे उल्लेखनीय हैं—

1. सिर फटना : अर्थ : बहुत अधिक दर्द होना या परेशानी से बेहाल होना।

एकांकी से प्रयोग : “सिर फटा जा रहा है।”

अपना वाक्य : पढ़ाई का इतना दबाव था कि मेरा सिर फटने लगा।

2. पसीने से नहाना : अर्थ : अत्यधिक गरमी में पूरा शरीर पसीने से भीग जाना।

एकांकी से प्रयोग : “फिर भी पसीने से नहा गया हूँ।”

अपना वाक्य : मैदान में खेलते-खेलते बच्चे पसीने से नहा गए।

3. जान में जान आना : अर्थ : संकट टलने पर राहत महसूस होना।

एकांकी से प्रयोग : “आह! अब जान में जान आई।”

अपना वाक्य : गुम हुआ पर्स मिलते ही मेरी जान में जान आई।

4. प्राण सूखना : अर्थ : अत्यधिक भय, चिंता या प्यास से बेचैन होना।

एकांकी से प्रयोग : “ठंडा-ठंडा पानी पिलाओ दोस्त, प्राण सूखे जा रहे हैं।”

अपना वाक्य : परीक्षा का परिणाम आने तक मेरे प्राण सूखते रहे।

5. भाड़ में भुनना / भट्टी बनना : अर्थ : भीषण गरमी में जलना-सा अनुभव होना।

एकांकी से प्रयोग : “यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।”

अपना वाक्य : धूप में घंटों खड़े रहने से हम भाड़ में भुनने लगे।

ये मुहावरे न केवल पात्रों की भावनाएँ तीव्रता से व्यक्त करते हैं, बल्कि संवादों को जीवंत, असरदार और चित्रात्मक बनाते हैं।

* बात पर बल देना

“वह तो कहो, मैं भी ढूंढकर ही रहा।

उपर्युक्त वाक्य से रेखांकित शब्द ही हटाकर पढ़िए–

“वह तो कहो, में भी ढूंढ़कर रहा”

(क) दो-दों के जोड़े में चर्चा कीजिए कि वाक्य में ही के प्रयोग से किस बात को बल मिल रहा था और ‘ही’ हटा देने से क्या कमी आई?

उत्तर: वाक्य में ‘ही’ से मिलने वाला बल:

मूल वाक्य : “वह तो कहो, मैं भी ढूँढकर ही रहा।”

बिना ‘ही’ : “वह तो कहो, मैं भी ढूँढकर रहा।”

अंतर और बल: ‘ही’ के प्रयोग से यह स्पष्ट होता है कि वक्ता ने अन्य कोई काम नहीं किया, सिर्फ़ और सिर्फ़ ढूँढने में ही लगा रहा।

यह शब्द खोज की कठिनाई और निरंतरता पर ज़ोर देता है।

‘ही’ हटाने पर वाक्य का बल घट जाता है और यह साधारण कथन जैसा लगता है, जिसमें लगातार कोशिश या विशेष मेहनत का भाव कम हो जाता है।

(ख) नीचे लिखे वाक्यों में ऐसे स्थान पर ‘ही’ का प्रयोग कीजिए कि वे सामने लिखा अर्थ देने लगे-

1.विश्वनाथ के अतिथि यहाँ रुकेंगेऔर किसी के अतिथि नहीं।
2.विश्वनाथ के अतिथि यहाँ रुकेंगेयहाँ के अतिरिक्त और कहीं नहीं।
3.विश्वनाथ के अतिथि यहाँ रुकेंगेयहाँ रुकना निश्चित है।

उत्तर: 

1.विश्वनाथ ही के अतिथि यहाँ रुकेंगेऔर किसी के अतिथि नहीं।
2.विश्वनाथ के अतिथि यहाँ ही रुकेंगेयहाँ के अतिरिक्त और कहीं नहीं।
3.विश्वनाथ के ही अतिथि यहाँ रुकेंगेयहाँ रुकना निश्चित है।

“तुम नहाने तो जाओ।”

उपर्युक्त वाक्य में ‘तो’ का स्थान बदलकर अर्थ में आए परिवर्तन पर ध्यान दें-

“तुम तो नहाने जाओ।”

“तुम नहाने जाओ तो।”

‘ही’ और ‘तो’ के ऐसे और प्रयोग करके वाक्य बनाइए।

उत्तर: दिए गए वाक्य का विश्लेषण:

मूल वाक्य : “तुम नहाने तो जाओ।”

यहाँ तो आग्रह या हल्की प्रेरणा दर्शाता है,“जाओ न, ज़रूर जाओ।”

(क) तुम तो नहाने जाओ।

यहाँ तो से आशय है कि बाकी कोई न भी जाए, पर तुम जरूर जाओ।

जोर व्यक्ति (तुम) पर है।

(ख) तुम नहाने जाओ तो।

यहाँ तो शर्त या परिणाम का भाव लाता है,“अगर तुम नहाने जाओ तो (अच्छा होगा/हम आगे का काम करेंगे)।”

2. ‘ही’ और ‘तो’ के और प्रयोग-

वाक्य अर्थ / विशेष बल
यह काम तुम ही करो।और कोई नहीं, केवल तुम करो।
आज का पुरस्कार रीता को ही मिलेगा।यह निश्चित है कि रीता को ही मिलेगा, किसी और को नहीं।
हम अब निकलें ही।अब तुरंत निकलना निश्चित है।
तुम तो बहुत मेहनती हो।विशेष रूप से तुम्हारी मेहनत पर जोर।
तुम अब पढ़ाई शुरू करो तो।अगर तुम अब पढ़ाई शुरू करो, तो अच्छा होगा।
यह किताब अभी पढ़ो तो।सुझाव या अनुरोध का भाव।
यह काम तुम तो जल्दी कर सकते हो।तुम पर विशेष भरोसा और बल।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) “रेवती- ये लोग कौन हैं? जान-पहचान के तो मालूम नहीं पड़ते।

विश्वनाथ- क्या पूछ लूँ? दो-तीन बार पूछा, ठीक-ठीक उत्तर ही नहीं देते।”

उपर्युक्त संवाद से पता चलता है कि विश्वनाथ दुविधा की स्थिति में है। क्या आपके सामने कभी कोई ऐसी दुविधापूर्ण स्थिति आई है जब आपको यह समझने में समय लगा हो कि क्या सही है और क्या गलत? अपने अनुभव साझा कीजिए।

उत्तर: हाँ, मेरे साथ भी एक बार ऐसी स्थिति आई थी। विद्यालय में विज्ञान प्रदर्शनी के समय मुझे दो अलग-अलग मॉडल बनाने के प्रस्ताव मिले—एक मेरे अच्छे मित्रों के साथ और दूसरा अपने विज्ञान शिक्षक के विशेष सुझाव पर। दोनों ही अच्छे अवसर थे। मुझे यह समझने में समय लगा कि किसे चुनूँ। बहुत सोचने और परामर्श लेने के बाद मैंने वही काम चुना जो मेरे रुचि और भविष्य की पढ़ाई के लिए अधिक उपयोगी था। इस अनुभव से मैंने सीखा कि दुविधा की स्थिति में धैर्य और सही जानकारी के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।

(ख) एकांकी से ऐसा लगता है कि नन्हेमल और बाबूलाल सगे संबंधी ही नहीं, अच्छे मित्र भी हैं। आपके अच्छे मित्र कौन-कौन हैं? वे आपको क्यों प्रिय हैं?

उत्तर: मेरे अच्छे मित्रों में (उदाहरण के लिए) आरव, सिया और राहुल हैं।

वे मुझे इसलिए प्रिय हैं क्योंकि वे हर परिस्थिति में मेरा साथ देते हैं।

पढ़ाई, खेल और कठिन समय—हर जगह हम एक-दूसरे की मदद करते हैं।

उनकी ईमानदारी, हँसमुख स्वभाव और सहयोग की भावना हमारी मित्रता को मजबूत बनाती है।

इसी तरह जैसे नन्हेमल और बाबूलाल हर समय साथ रहते हैं और एक-दूसरे को समझते हैं, मेरे मित्र भी मेरे लिए परिवार जैसे हैं।

(ग) आप अपने किसी संबंधी या मित्र के घर जाने से पहले क्या-क्या तैयारी करते हैं?

उत्तर: जब मैं किसी रिश्तेदार या मित्र के घर जाता हूँ तो कुछ बातें ध्यान में रखता हूँ—

पहले सूचना देना – फोन या संदेश से आगमन का समय बताता हूँ।

जरूरी सामान साथ रखना – मौसम के अनुसार कपड़े, ज़रूरी दवाइयाँ या पढ़ाई का सामान।

शिष्टाचार का ध्यान – घर से निकलते समय समय पर पहुँचने और अच्छे व्यवहार का संकल्प।

उपहार या मिठाई – अवसर के अनुसार छोटा-सा तोहफ़ा या मिठाई ले जाता हूँ।

इससे मिलने का आनंद और भी बढ़ जाता है और मेज़बान को भी सुविधा होती है।

(घ) विश्वनाथ के पड़ोसी उनका किसी प्रकार से भी सहयोग नहीं करते हैं। आप अपने पड़ोसियों का किस प्रकार से सहयोग करते हैं।

उत्तर: हमारे पड़ोसी हमारे आसपास के परिवार जैसे ही हैं। मैं उन्हें इन तरीकों से सहयोग करता हूँ—

बुज़ुर्ग पड़ोसियों को बाज़ार से ज़रूरी सामान लाकर देना।

बच्चों की पढ़ाई या खेल-कूद में मदद करना।

किसी आपात स्थिति, जैसे अचानक बीमारी या पानी/बिजली की समस्या, में तुरंत सहायता करना।

त्योहारों और सामाजिक कार्यक्रमों में मिलकर काम करना।

ऐसा सहयोग मोहल्ले में आपसी प्रेम और विश्वास बढ़ाता है।

(ङ) नन्हेमल और बाबूलाल का व्यवहार सामान्य अतिथियों जैसा नहीं है। आपके अनुसार सामान्य अतिथियों का व्यवहार कैसा होना चाहिए?

उत्तर: मेरे अनुसार अच्छे अतिथि का आचरण ऐसा होना चाहिए—

सूचना देकर आना, ताकि मेज़बान को तैयारी का समय मिले।

मर्यादित समय तक रुकना और अनावश्यक माँग न करना।

घर के नियमों का सम्मान करना, जैसे साफ़-सफाई और शांति बनाए रखना।

मेज़बान के समय और सुविधा का ध्यान रखना, विशेषकर भोजन और आराम के समय।

जाते समय विनम्रता से धन्यवाद देना और दोबारा मिलने का स्नेहपूर्ण भाव प्रकट करना।

नन्हेमल और बाबूलाल ने बिना सूचना दिए, बार-बार पानी और खाने की ज़िद करके और सही पता न बताकर जो असुविधा पैदा की, वह सामान्य अतिथि-धर्म से भिन्न था। अच्छे अतिथि का आचरण सादगी, शिष्टाचार और मेज़बान की सुविधा का सम्मान करने वाला होना चाहिए।

सावधानी और सुरक्षा

(क) विश्वनाथ ने नन्हेमल और बाबूलाल से उनका परिचय नहीं पूछा और उन्हें घर के भीतर ले आए। यदि आप उनके स्थान पर होते तो क्या करते?

उत्तर: यदि मैं विश्वनाथ की जगह होता तो सबसे पहले विनम्रता से उनका सही परिचय और आने का उद्देश्य पूछता।

उनसे यह भी पूछता कि वे किसका पता खोज रहे हैं और किसने भेजा है।

जब तक पूरी जानकारी और भरोसा न हो, उन्हें भीतर घर में नहीं बुलाता; पहले बरामदे या गेट पर ही बैठने को कहता।

जरूरत पड़ने पर पास के पड़ोसी या सुरक्षा गार्ड से मदद लेता और उनके बताए पते की पुष्टि करता।

इस तरह अतिथि-सत्कार का सम्मान रखते हुए परिवार की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता।

(ख) आपके माता-पिता या अभिभावक की अनुपस्थिति में यदि कोई अपरिचित व्यक्ति आए तो आप क्या-क्या सावधानियाँ बरतेंगे?

उत्तर: यदि घर में मैं अकेला हूँ और कोई अपरिचित व्यक्ति आए तो मैं ये सावधानियाँ ज़रूर रखूँगा—

दरवाज़ा पूरी तरह न खोलना : पहले ग्रिल या चेन-लॉक लगे दरवाज़े से ही बात करूँगा।

पहचान पूछना और सत्यापन : उनका नाम, आने का कारण और किसके कहने पर आए हैं—यह सब स्पष्ट रूप से पूछूँगा।

फोन से संपर्क करना : तुरंत माता-पिता, अभिभावक या किसी भरोसेमंद पड़ोसी को फ़ोन करूँगा और जानकारी दूँगा।

अंदर अकेले न बुलाना : जब तक बड़ों की अनुमति न हो, किसी को भी घर में प्रवेश नहीं करने दूँगा।

जरूरत पड़ने पर मदद बुलाना : यदि व्यक्ति संदिग्ध लगे तो पास के पड़ोसी, सुरक्षा गार्ड या पुलिस हेल्पलाइन (जैसे 112) को सूचित करूँगा।

इन सावधानियों से न केवल मेरी बल्कि पूरे घर की सुरक्षा बनी रहेगी और किसी अनहोनी की संभावना कम होगी।

सृजन

(क) आपने यह एकांकी पढ़ी। इस एकांकी में एक कहानी कही गई है। उस कहानी को अपने शब्दों में लिखिए। (जैसे एक दिन मेरे घर में मेहमान आ गए….)

उत्तर: एक दिन मेरे घर में मेहमान आ गए…

गरमी की एक भीषण रात थी। पंखे की हवा भी जैसे रुक-रुक कर चल रही थी। हम सब गर्मी और प्यास से परेशान थे। तभी अचानक दो अनजान मेहमान—नन्हेमल और बाबूलाल—घर में आ गए। उन्होंने कहा कि वे बिजनौर से आए हैं और किसी कविराज नामक व्यक्ति को खोज रहे हैं, पर सही पता नहीं जानते।

पिता जी (विश्वनाथ) ने कई बार पूछा, पर वे ठीक-ठीक उत्तर नहीं दे पाए। भारतीय परंपरा के अनुसार पिता जी ने उन्हें संकोच के बावजूद पानी पिलाया और खाने का प्रबंध करने लगे। माँ (रेवती) खुद बीमार थीं, फिर भी उन्होंने अतिथि सत्कार का धर्म निभाने के लिए भोजन बनाने का निश्चय किया।

काफी देर तक वे दोनों वहीं आराम से बैठे रहे, बातें करते रहे। अंत में पता चला कि वे ग़लत मकान में आ गए थे और पास के कविराज रामलाल वैद्य के घर जाना था। वे चले गए। ठीक उसी समय हमारा असली मेहमान—मामा जी—पहुंचा, जो लंबे सफर के बाद हमारा पता ढूँढता-ढूँढता थक चुका था।

इस प्रकार अचानक आए अजनबी मेहमानों के कारण पूरे परिवार को परेशानी उठानी पड़ी, पर भारतीय संस्कार “अतिथि देवो भव” के कारण सभी ने धैर्य और सद्भाव से उनका स्वागत किया।

गरमी का प्रकोप

“तमाम शरीर मारे गरमी के उबल उठा है।”

एकाकी में भीषण गरमी का वर्णन किया गया है। आप गरमी के प्रकोप से चचने के लिए क्या-क्या सावधानी बरतेंगे? पाँच-पाँच के समूह में चर्चा करें। मुख्य बिंदुओं को चार्ट पेपर पर लिखकर बुलेटिन बोर्ड पर लगाएँ और इन्हें व्यवहार में लाएँ।

उत्तर: मुख्य बिंदु (चार्ट पेपर पर लिखने योग्य):

पर्याप्त पानी पिएँ : दिन में बार-बार पानी, नींबू पानी, छाछ या नारियल पानी लें।

दोपहर की धूप से बचें : 11 बजे से 4 बजे तक धूप में अनावश्यक न निकलें।

हल्के और सूती कपड़े पहनें : ढीले-ढाले हल्के रंग के कपड़े व टोपी/छाता उपयोग करें।

संतुलित और ठंडी चीज़ें खाएँ : मौसमी फल (तरबूज, खीरा, ककड़ी) व हल्का भोजन लें।

घर को ठंडा रखें : खिड़कियों पर पर्दा लगाएँ, पानी का छिड़काव करें, पंखे/कूलर का सही उपयोग करें।

इन उपायों को हम अपने विद्यालय के बुलेटिन बोर्ड पर चार्ट लगाकर सबको बताएँगे और स्वयं भी अपनाएँगे, ताकि गरमी से होने वाली लू, डिहाइड्रेशन और थकान से बच सकें।

तार से संदेश

“क्या मेरा तार नहीं मिला?”

रेवती के भाई ने अपने आने की सूचना तार द्वारा भेजी थी। ‘तार’ संदेश भेजने का एक माध्यम था। जिसके द्वारा शीघ्रता से किसी के पास संदेश भेजा जा सकता था, किंतु अब इसका प्रचलन नहीं है।

टेलीग्राफ

किसी भौतिक वस्तु के विनिमय के बिना ही संदेश को दूर तक संप्रेषित करना टेलीग्राफी कहलाता है। विद्युत धारा की सहायता से, पूर्व निर्धारित संकेतों द्वारा, संवाद एवं समाचारों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजनेवाला तथा प्राप्त करने वाला यंत्र तारयंत्र (टेलीग्राफ) कहलाता है। वर्तमान में वह प्रौद्योगिकी अप्रचलित हो गई है।

(क) तार भेजने के आधार पर अनुमान लगाएँ कि यह एकांकी लगभग कितने वर्ष पहले लिखी गई होगी?

उत्तर: एकांकी “नए मेहमान” में अतिथि के आने की सूचना तार (टेलीग्राम) से भेजी गई है। भारत में टेलीग्राम सेवा का स्वर्णकाल लगभग 1900 से 1980 के दशक तक था और यह सेवा 2013 में समाप्त हुई। इस आधार पर अनुमान लगाया जा सकता है कि यह एकांकी लगभग 60–70 वर्ष पहले, यानी 1950–1960 के आसपास लिखी गई होगी।

(ख) आजकल संदेश भेजने के कौन-कौन से साधन सुलभ हैं?

उत्तर: आज के समय में तार की जगह अनेक तेज़ और आसान माध्यम उपलब्ध हैं, जैसे—

मोबाइल फ़ोन : कॉल, एसएमएस (SMS)।

मैसेजिंग ऐप्स : व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल।

ई-मेल : त्वरित औपचारिक या व्यक्तिगत संदेश के लिए।

सोशल मीडिया : फ़ेसबुक मैसेंजर, इंस्टाग्राम डीएम, ट्विटर (एक्स)।

वीडियो कॉलिंग : गूगल मीट, ज़ूम, व्हाट्सऐप वीडियो कॉल आदि।

(ग) आप किसी को संदेश भेजने के लिए किस माध्यम का सर्वाधिक उपयोग करते हैं?

उत्तर: मैं सामान्यतः मोबाइल फोन पर व्हाट्सऐप और एसएमएस का सबसे अधिक उपयोग करता हूँ।

यह तुरंत संदेश भेजने, तस्वीर या दस्तावेज़ साझा करने और रीड रिसीप्ट देखने के लिए सुविधाजनक है।

परिवार और मित्रों से जुड़े रहने के लिए यह सबसे तेज़ और भरोसेमंद साधन है।

(घ) अपने किसी प्रिय व्यक्ति को एक पत्र लिखकर भारतीय डाक द्वारा भेजिए।

उत्तर: प्रेषक

राम शर्मा

दूधेश्वर रोड, लखनऊ – 226003

उत्तर प्रदेश

प्राप्तकर्ता

श्रीमान् दादाजी

गाँव– हरिपुर, पोस्ट – पिपराही

जिला – सीतापुर, उत्तर प्रदेश

दिनांक : 12 सितम्बर 2025

प्रिय दादाजी,

सादर नमस्ते।

आशा है आप स्वस्थ और प्रसन्न होंगे। यहाँ हम सब कुशल हैं। पिछले सप्ताह हमारी परीक्षाएँ समाप्त हुईं। अब विद्यालय में खेलकूद प्रतियोगिता शुरू हो रही है। मैंने कबड्डी और दौड़ में भाग लिया है।

दादाजी, पिछली बार आपके घर में आम का पेड़ खूब फला था। इस बार के आम की मिठास याद आ रही है। आशा है अगली छुट्टियों में हम सब आपके पास आकर फिर से वह स्वाद लेंगे।

कृपया दादीजी को मेरा प्रणाम कहिए और अपना आशीर्वाद बनाए रखिए।

आपका स्नेही

राम

(लिफ़ाफ़े पर पता साफ़-साफ़ लिखकर डाक टिकट लगाएँ और डाकघर में जमा करें।)

नाप, तौल और मुद्राएँ

“जबकि नत्थामल के यहाँ साढ़े नौ आने गज बिक रही थी।”

उपर्युक्त पंक्ति के रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। रेखांकित शब्द ‘साढ़े नौ’, ‘आने’, ‘गज’ में ‘साढ़े नौ’ भारतीय भाषा में अंतरराष्ट्रीय अंक (9.5) को दर्शा रहा है तो वहीं ‘आने’ शब्द भारतीय मुद्रा और ‘गज’ शब्द लंबाई नापने का मापक है।

(क) पता लगाइए कि एक रुपये में कितने आने होते हैं?

उत्तर: पुराने भारतीय मुद्रा प्रचलन में 1 रुपये = 16 आने होते थे।

(ख) चार आने में कितने पैसे होते हैं?

उत्तर: उस समय 1 आना = 4 पैसे के बराबर था।

इसलिए 4 आने = 4 × 4 = 16 पैसे।

(ग) आपके आस-पास गज शब्द का प्रयोग किस संदर्भ में किया जाता है? पता लगाइए और लिखिए।

उत्तर: मेरे आस-पास ‘गज’ का प्रयोग प्रायः कपड़े नापने, ज़मीन/प्लॉट की माप, या परदे और बिछावन की लंबाई मापने में किया जाता है।

उदाहरण : कपड़ा खरीदते समय दुकानदार कहता है—“तीन गज कपड़ा दीजिए।”

(घ) बताइए कि एक गज में कितनी फीट होती है?

उत्तर: मापन के अनुसार 1 गज = 3 फीट (लगभग 0.914 मीटर) होता है।

साझी समझ

भारत में ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा रही है। आपके घर जब अतिथि आते हैं तो आप उनका अभिवादन कैसे करते हैं, अपनी भाषा में बताइए और अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि अतिथियों को आप अपने राज्य, क्षेत्र का कौन-सा पारंपरिक व्यंजन खिलाना चाहते हैं।

उत्तर:

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