NCERT Class 8 Hindi Chapter 6 एक टोकरी भर मिट्टी Solutions English Medium As Per NCERT New Syllabus to each chapter is provided in the list so that you can easily browse through different chapters NCERT Class 8 Hindi Chapter 6 एक टोकरी भर मिट्टी Question Answer and select need one. NCERT Class 8 Hindi Chapter 6 एक टोकरी भर मिट्टी Notes Download PDF. CBSE Solutions For Class 8 Hindi.
NCERT Class 8 Hindi Chapter 6 एक टोकरी भर मिट्टी
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एक टोकरी भर मिट्टी
Chapter: 6
पाठ से
आइए, अब हम इस पाठ पर विस्तार से चर्चा करें। नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. जमींदार को झोंपड़ी हटाने की आवश्यकता क्यों लगी?
(i) झोपड़ी जर्जर हो चुकी थी।
(ii) झोंपड़ी रास्ते में बाधा थी।
(iii) वह अहाते का विस्तार करना चाहता था।
(iv) वृद्धा से उसका कोई पुराना झगड़ा था।
उत्तर: (iii) वह अहाते का विस्तार करना चाहता था।
2. वृद्धा ने मिट्टी ले जाने की अनुमति कैसे माँगी?
(i) क्रोध और झगड़ा करके।
(ii) अदालत से अनुमति लेकर।
(iii) विनती और नम्रता से।
(iv) चुपचाप उठाकर ले गई।
उत्तर: (iii) विनती और नम्रता से।
3. वृद्धा की पोती का व्यवहार किस भाव को दर्शाता है?
(i) दया।
(ii) लगाव।
(iii) गुस्सा।
(iv) डर।
उत्तर: (ii) लगाव।
4. कहानी का अंत कैसा है?
(i) दुखद।
(ii) सुखद।
(iii) प्रेरणादायक।
(iv) सकारात्मक।
उत्तर:
(ii) सुखद।
(iii) प्रेरणादायक।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: मेरे द्वारा चुने गए उत्तर इसलिए सही लगते हैं क्योंकि कहानी का मुख्य भाव इन्हीं बिंदुओं से स्पष्ट होता है।
ज़मींदार झोंपड़ी इसलिए हटवाना चाहता था क्योंकि उसे अपने अहाते को बढ़ाना था। यह बात सीधे पाठ में लिखी हुई है, इसलिए अन्य कारण जैसे झोंपड़ी का जर्जर होना या पुराना झगड़ा होना सही नहीं है।
वृद्धा ने झगड़े या ज़बरदस्ती नहीं की, बल्कि बड़ी विनम्रता और आँसू भरी प्रार्थना के साथ मिट्टी माँगी। यही उसकी असली लाचारी और नम्रता को दिखाता है।
पोती का व्यवहार अपने घर और चूल्हे के प्रति गहरे लगाव का प्रतीक है। वह नया घर या बाहर कहीं रोटी नहीं खाना चाहती थी, उसे केवल अपने पुराने घर की मिट्टी चाहिए थी। यह उसके प्रेम और जुड़ाव को दर्शाता है।
कहानी का अंत केवल सुखद ही नहीं है, बल्कि प्रेरणादायक भी है। ज़मींदार को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने वृद्धा की झोंपड़ी लौटा दी। इससे यह शिक्षा मिलती है कि अहंकार और अन्याय टिक नहीं सकता, अंत में सत्य और करुणा ही जीतती है।
इस तरह मेरे उत्तर कहानी की मुख्य घटनाओं और भावनाओं से मेल खाते हैं।
मिलकर करें मिलान
(क) पाठ में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो निष्कर्ष दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्षों से मिलाइएण।
| क्रम | वाक्य | निष्कर्ष |
| 1. | अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | वृद्धावस्था में वृद्धा का सहारा उसकी पोती ही थी। वृद्धावस्था में पोती का सहारा वृद्धा थी। |
| 2. | बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया। | जमीदार ने वकीलों से सलाह लेकर झोंपड़ी पर न्यायपूर्वक कब्जा किया। जमींदार ने वकीलों को पैसे देकर कानूनी दावपेंच से झोंपडी पर कब्जा किया। |
| 3. | आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। | वृद्धा ने ज़मीदार को कमजोर साबित करने के लिए टोकरी उठाने को कहा। वृद्धा ने टोकरी को प्रतीक बनाकर जमींदार को उसके अन्याय का अनुभव कराया। |
| 4. | जमींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे। | धन और अहकार ने जमींदार को मानवीयता और करुणा से दूर कर दिया था। संपत्ति के घमंड को भूलकर जमीदार अपने कर्तव्यों को पूरा कर रहे थे। |
| 5. | कुतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी। | वृद्धा ने अपने व्यवहार पर पछताकर जमीदार से क्षमा माँगी। अपने द्वारा किए अन्याय पर पछताकर जमीदार ने क्षमा माँगी। |
| 6. | उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? | वृद्धा ने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि अन्याय का नैतिक भार उठाना आसान नहीं है। वृद्धा ने जमींदार की उम्र और शक्ति पर व्यंग्य करते हुए यह बात कही। |
| 7. | कृपा करके इस टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ। | वृद्धा ने चतुराई से जमींदार को शर्मिंदा करने की योजना बनाई। वृद्धा ने टोकरी उठाने में सहायता के लिए ज़मींदार से विनम्र निवेदन किया। |
| 8. | उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी | झोंपड़ी में प्रवेश करते ही वृद्धा पुराने दिनों के कारण भावुक हो गई। झोंपड़ी में जाकर वृद्धा डर गई कि ज़मींदार उसे फिर से बाहर निकाल देगा और रोने लगी। |
उत्तर:
| क्रम | वाक्य | निष्कर्ष |
| 1. | अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | वृद्धावस्था में वृद्धा का सहारा उसकी पोती ही थी। |
| 2. | बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया। | जमींदार ने वकीलों को पैसे देकर कानूनी दावपेंच से झोंपडी पर कब्जा किया। |
| 3. | आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। | वृद्धा ने टोकरी को प्रतीक बनाकर जमींदार को उसके अन्याय का अनुभव कराया। |
| 4. | जमींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे। | धन और अहकार ने जमींदार को मानवीयता और करुणा से दूर कर दिया था। |
| 5. | कुतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी। | अपने द्वारा किए अन्याय पर पछताकर जमीदार ने क्षमा मांगी। |
| 6. | उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? | वृद्धा ने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि अन्याय का नैतिक भार उठाना आसान नहीं है। |
| 7. | कृपा करके इस टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ। | वृद्धा ने टोकरी उठाने में सहायता के लिए ज़मींदार से विनम्र निवेदन किया। |
| 8. | उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी | झोंपड़ी में प्रवेश करते ही वृद्धा पुराने दिनों के कारण भावुक हो गई। |
(ख) अपने मित्रों के उत्तर से अपने उत्तर मिलाइए और चर्चा कीजिए कि आपने कौन-से निष्कर्षों का चुनाव किया है और क्यों?
उत्तर: मैंने अपने मित्रों के उत्तरों से अपने उत्तरों का मिलान किया और पाया कि अधिकतर उत्तर समान हैं। मैंने वे निष्कर्ष चुने जो कहानी की घटनाओं और भावों से सीधे मेल खाते हैं। जैसे, वृद्धा की पोती ही उसका सहारा थी, इसलिए क्रम 1 में वही उचित लगा। क्रम 2 में जमींदार ने पैसों से वकीलों को खरीदकर झोंपड़ी पर कब्जा किया, क्योंकि “थैली गरम करना” इसी ओर संकेत करता है। क्रम 3 में वृद्धा ने टोकरी को प्रतीक बनाकर जमींदार को अन्याय का भार दिखाया, यह मुझे सबसे सही लगा। क्रम 4 और 5 में मैंने यह माना कि धन-अहंकार ने जमींदार को कर्तव्य से दूर कर दिया और बाद में उसने अपने अन्याय पर पछताकर क्षमा माँगी। क्रम 6 में निष्कर्ष यही है कि अन्याय का नैतिक भार उठाना आसान नहीं है। क्रम 7 में वृद्धा ने केवल विनम्र निवेदन करके सहायता माँगी और क्रम 8 में वह झोंपड़ी में प्रवेश करते ही पुरानी यादों से भावुक हो गई। इन सब कारणों से मैंने वही निष्कर्ष चुने जो कहानी के भाव, परिस्थितियों और संदेश को सबसे सही ढंग से प्रकट करते हैं।
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) “आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?”
उत्तर: इस पंक्ति का प्रतीकात्मक अर्थ है कि अन्याय का बोझ उठाना बहुत कठिन होता है। वृद्धा यह समझा रही है कि जब ज़मींदार एक टोकरी मिट्टी नहीं उठा पाए, तो पूरी झोंपड़ी का नैतिक भार वे कभी नहीं उठा सकेंगे। यहाँ मिट्टी केवल भौतिक वस्तु नहीं, बल्कि अन्याय, पीड़ा और अपराधबोध का भार है। यह पंक्ति हमें बताती है कि गलत काम का बोझ जीवनभर चैन नहीं लेने देता।
(ख) “जमींदार साहब पहले तो बहुत नाराज हुए, पर जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों पर गिरने लगी तो उनके भी मन में कुछ दया आ गई। किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने को आगे बढ़े। ज्यों ही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ही देखा कि यह काम उनकी शक्ति के बाहर है।”
उत्तर: इस पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि दया और करुणा का भाव हर इंसान के भीतर छिपा होता है, चाहे वह कितना भी कठोर या घमंडी क्यों न हो। वृद्धा की विनम्रता ने ज़मींदार के मन को बदल दिया और वह स्वयं टोकरी उठाने को तैयार हुए। लेकिन टोकरी का न उठना यह संकेत करता है कि अन्याय का बोझ इतना भारी होता है कि उसे कोई भी इंसान नहीं उठा सकता। इस घटना ने ज़मींदार को उनके अपराध का गहरा अनुभव कराया और अंततः उन्हें पश्चाताप की ओर ले गया।
सोच-विचार के लिए
पाठ को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।
(क) आपके विचार से कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र कौन है और क्यों?
उत्तर: मेरे विचार से इस कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र वृद्धा है। उसने अपने दुख और असहायता के बावजूद अद्भुत धैर्य, साहस और सत्य का सहारा लिया। उसने टोकरी भर मिट्टी को प्रतीक बनाकर जमींदार को उसके अन्याय का बोध कराया और अंततः उसके हृदय परिवर्तन में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।
(ख) बुद्धा की पोती ने खाना क्यों छोड़ दिया था।
उत्तर: वृद्धा की पोती अपने पुराने घर और चूल्हे से गहरा लगाव रखती थी। जब झोंपड़ी उससे छिन गई, तब उसने नया घर स्वीकार नहीं किया और ज़िद करने लगी कि वह केवल अपने घर में ही रोटी खाएगी। इसी कारण उसने खाना-पीना छोड़ दिया था।
(ग) जमीदार ने झोपड़ी पर कब्जा कैसे किया?
उत्तर: जमींदार ने वकीलों को पैसे देकर कानूनी दाँवपेंच अपनाए और अदालत से झोंपड़ी पर कब्जा कर लिया। यानी उसने अपने धन और प्रभाव के बल पर वृद्धा को अन्यायपूर्वक बेदखल किया।
(घ) महाराज क्षमा करे तो एक विनती है। जमीदार साहब के सिर हिलाने पर उसने कहा……”। यहाँ जमीदार द्वारा सिर हिलाने की इस क्रिया का क्या अर्थ है?
उत्तर: यहाँ सिर हिलाने का अर्थ है— जमींदार ने वृद्धा को अपनी बात कहने की अनुमति दे दी। यह उनकी सहमति और मौन स्वीकृति का संकेत था।
(ङ) “किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़े।” यहाँ ज़मीदार के व्यवहार में परिवर्तन का आरंभ दिखाई देता है। पहले जमींदार का व्यवहार कैसा था? इस घटना के बाद उसके व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर: पहले जमींदार का व्यवहार कठोर, अहंकारी और निर्दयी था। वह वृद्धा की झोंपड़ी छीनकर केवल अपने अहाते का विस्तार चाहता था। लेकिन टोकरी उठाने की घटना ने उसके भीतर करुणा और पश्चाताप की भावना जगा दी। उसके स्वभाव में कठोरता की जगह मानवीय संवेदना और दया का उदय हुआ।
(च) “उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।” जमीदार ने ऐसा क्यों किया?
उत्तर: टोकरी उठाने का असफल प्रयास जमींदार के लिए आत्मबोध का क्षण था। उसे समझ में आया कि अन्याय और अपराध का बोझ सहना किसी के लिए संभव नहीं है। वृद्धा के वचनों ने उसका अहंकार तोड़ दिया। पश्चाताप और करुणा से भरकर उसने वृद्धा से क्षमा माँगी और झोंपड़ी लौटा दी। यही उसके वास्तविक परिवर्तन का प्रमाण है।
अनुमान और कल्पना से
(क) यदि वृद्धा की पोती जमींदार से स्वयं बात करती तो वह क्या कहती?
उत्तर: यदि पोती स्वयं जमींदार से बात करती, तो वह मासूमियत से कहती—“महाराज, यह झोंपड़ी ही हमारा घर है। मुझे यहीं रहना, खेलना और रोटी खाना अच्छा लगता है। कृपया हमारा घर मत छीनिए, हम कहीं और जाकर सुख से नहीं रह सकते।” उसकी भोली-बाली बात सुनकर जमींदार का कठोर हृदय और भी जल्दी पिघल जाता।
(ख) यदि आप जमींदार की जगह होते तो क्या करते?
उत्तर: यदि मैं जमींदार की जगह होता, तो मैं वृद्धा और उसकी पोती की कठिनाइयों को समझकर उनकी झोंपड़ी छीनने की बजाय उनकी मदद करता। मैं अपने अहाते का विस्तार किसी दूसरी जगह करता और यह सुनिश्चित करता कि वृद्धा और उसकी पोती सुरक्षित और सुखी रहें। दूसरों के दुख पर आघात करना सच्चे इंसान का धर्म नहीं है।
(ग) जमींदार को टोकरी उठाने में सफलता क्यों नहीं मिली होगी?
उत्तर: जमींदार को टोकरी उठाने में सफलता इसलिए नहीं मिली क्योंकि यह साधारण मिट्टी नहीं थी, बल्कि इसमें वृद्धा की पीड़ा, आँसू और उसके साथ किए गए अन्याय का भार भी था। यह प्रतीकात्मक भार किसी भी अन्यायी और अहंकारी व्यक्ति से उठाया नहीं जा सकता। यह घटना जमींदार को उसके पाप का एहसास कराने के लिए हुई।
(घ) झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियों मिट्टी पड़ी है…..।” यहाँ केवल मिट्टी की बात की जा रही है या कुछ और बात भी छिपी है?
(संकेत- मिट्टी किस बात का प्रतीक हो सकती है? मिट्टी के बहाने वृद्धा क्या कहना चाहती है?)
उत्तर: यहाँ केवल मिट्टी की बात नहीं है। मिट्टी अन्याय, अपराधबोध और नैतिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। वृद्धा कहना चाहती थी कि जब एक टोकरी मिट्टी यानी एक छोटा अन्याय ही इतना भारी है, तो पूरी झोंपड़ी छीन लेने का नैतिक बोझ कोई इंसान जीवनभर कैसे उठा पाएगा? इस तरह वह जमींदार को उसके कर्मों की गंभीरता का एहसास दिला रही थी।
(ङ) यह कहानी आज से लगभग सवा सौ साल पहले लिखी गई थी। इस कहानी के आधार पर बताइए कि भारत में स्त्रियों को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता होगा?
उत्तर: उस समय भारत में स्त्रियों को अनेक कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। वे समाज में असुरक्षित और असहाय स्थिति में रहती थीं। विधवा और वृद्ध स्त्रियों को सहारा नहीं मिलता था। संपत्ति और अधिकारों से उन्हें वंचित किया जाता था। अनाथ और गरीब स्त्रियाँ अपने जीवनयापन के लिए केवल करुणा और दया पर निर्भर थीं। पुरुषप्रधान समाज में उन्हें न्याय और सम्मान पाने में कठिनाई होती थी। अकेली स्त्रियों को परिवार और बच्चों का पालन-पोषण बहुत संघर्ष के साथ करना पड़ता था। इस प्रकार यह कहानी उस समय स्त्रियों की दयनीय और चुनौतीपूर्ण स्थिति को उजागर करती है।
बदली कहानी
कल्पना कीजिए कि कहानी कैसे आगे बढ़ती-
1. यदि जमींदार टोकरी उठाने से मना कर देता।
उत्तर: कहानी इस प्रकार आगे बढ़ती कि वृद्धा अपने आँसुओं के साथ वहीं बैठी रह जाती। लोग यह देखकर जमींदार की कठोरता की निंदा करते और धीरे-धीरे गाँव भर में उसकी छवि बिगड़ जाती। अंततः समाज का दबाव और अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनकर जमींदार को पछतावा होता और वह झोंपड़ी लौटाने पर मजबूर होता।
2. यदि जमींदार टोकरी उठा लेता।
उत्तर: यदि वह टोकरी उठा लेता, तो उसे कोई असामान्य बात महसूस न होती। शायद वह अपने अपराध का भार भी न समझ पाता और वृद्धा हमेशा के लिए बेघर हो जाती। पोती का जीवन दुख और कष्ट में बीतता। इस तरह कहानी का अंत दुखद और अन्यायपूर्ण होता।
3. यदि ज़मींदार मिट्टी देने से मना कर देता।
उत्तर: वृद्धा और उसकी पोती बिल्कुल निराश हो जातीं। पोती भूख से तड़पकर बीमार पड़ जाती। यह स्थिति देखकर गाँव के लोग जमींदार के खिलाफ खड़े होते और उसे मजबूर करते कि वह झोंपड़ी लौटा दे। इस तरह यह कहानी सामूहिक विरोध और जनता की ताकत को दिखाती।
4.यदि जमींदार एक स्त्री होती।
उत्तर: यदि जमींदार स्त्री होती, तो शायद वह वृद्धा की पीड़ा को जल्दी समझ जाती। वह अपने मातृत्व और करुणा के भाव से प्रेरित होकर झोंपड़ी छीने बिना वृद्धा की मदद करती। कहानी एक संवेदनशील और मानवीय मोड़ पर समाप्त होती।
5. यदि पोती जमींदार से अपनी झोंपड़ी वापस माँगती।
उत्तर: यदि पोती स्वयं जाकर जमींदार से झोंपड़ी माँगती, तो उसकी मासूम और निश्छल बातें सुनकर जमींदार का हृदय पिघल जाता। वह सोचता कि यदि एक छोटी बच्ची इतना गहरा लगाव व्यक्त कर सकती है, तो झोंपड़ी को छीनना वास्तव में अन्याय है। इस तरह झोंपड़ी लौटाने का निर्णय और भी जल्दी हो जाता।
5. अपने समूह के साथ इनमें से किसी एक स्थिति को चुनकर चर्चा कीजिए। इस बदली हुई कहानी को मिलकर लिखिए।
उत्तर: एक दिन वृद्धा अपनी पोती को साथ लेकर जमींदार के पास पहुँची। वृद्धा अभी कुछ बोल ही रही थी कि पोती आगे बढ़ी और मासूम आवाज़ में बोली—
“महाराज, यह झोंपड़ी हमारा घर है। मैं यहीं खेलती हूँ, यहीं खाती हूँ और यहीं सोती हूँ। मुझे यह घर मत छीनिए। अगर मेरा घर ही नहीं रहेगा तो मैं कहाँ रहूँगी? कृपा करके हमारी झोंपड़ी हमें वापस दे दीजिए।”
उसकी मासूम आँखों से आँसू बह रहे थे। यह दृश्य देखकर वहाँ खड़े नौकर और गाँव वाले सब चुप हो गए। जमींदार ने पहले तो उसे समझाने की कोशिश की, पर बच्ची की मासूमियत और उसके गहरे लगाव को देखकर उसका कठोर हृदय पिघल गया। उसने तुरंत वृद्धा से क्षमा माँगी और घोषणा की कि झोंपड़ी उसी की रहेगी।
इस तरह पोती की निश्छल बातों ने जमींदार के हृदय परिवर्तन में सबसे बड़ी भूमिका निभाई और कहानी का अंत और भी प्रेरणादायक हो गया।
‘कि’ और ‘की’ का उपयोग
इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों के प्रयोग पर ध्यान दीजिए–
| इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। | यहाँ “कि” एक संयोजक के रूप में प्रयोग हुआ है। संयोजक का अर्थ होता है मिलाने वाला। संयोजक शब्दों या वाक्यों को जोड़ने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। यह हमें बताता है क्या कहा गया, क्या सोचा गया, क्या देखा गया आदि। |
| जमींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की झोंपड़ी थी। | यहाँ “की” एक संबंधसूचक कारक शब्द है। इसका प्रयोग संज्ञा या सर्वनाम का किसी अन्य शब्द के साथ संबंध बताने के लिए किया जाता है। अन्य संबंधकारक शब्द है का और के। |
अब नीचे दिए गए वाक्यों में इन दोनों शब्दों का उपयुक्त प्रयोग कीजिए-
1. वृद्धा ने कहा ________वह झोंपड़ी को लेने नहीं आई है।
उत्तर: वृद्धा ने कहा कि वह झोंपड़ी को लेने नहीं आई है।
2. वह अपनी पोती __________चिंता में दुखी हो गई थी।
उत्तर: वह अपनी पोती की चिंता में दुखी हो गई थी।
3. बुद्धा ने प्रार्थना __________टोकरी को जरा हाथ लगाइए।
उत्तर: बुद्धा ने प्रार्थना की कि टोकरी को जरा हाथ लगाइए।
4. पोती हमेशा कहती थी ____________वह अपने घर में ही खाना खाएगी।
उत्तर: पोती हमेशा कहती थी कि वह अपने घर में ही खाना खाएगी।
5. झोंपड़ी _____________ मिट्टी से वृद्धा चूल्हा बनाना चाहती थी।
उत्तर: झोंपड़ी की मिट्टी से वृद्धा चूल्हा बनाना चाहती थी।
6. उसे विश्वास था _____________ मिट्टी का चूल्हा देखकर पोती खाना खाने लगेगी।
उत्तर: उसे विश्वास था कि मिट्टी का चूल्हा देखकर पोती खाना खाने लगेगी।
7. वृद्धा ________आँखों से आँसुओं _______धारा बहने लगी।
उत्तर: वृद्धा की आँखों से आँसुओं की धारा बहने लगी।
8. उसने यह सोचा _____________झोंपड़ी से मिट्टी ले जाकर चूल्हा बनाऊँगी।
उत्तर: उसने यह सोचा कि झोंपड़ी से मिट्टी ले जाकर चूल्हा बनाऊँगी।
9. वृद्धा के मन ___________पीड़ा उसकी बातों में झलक रही थी।
उत्तर: वृद्धा के मन की पीड़ा उसकी बातों में झलक रही थी।
10. जमींदार इतने लज्जित हुए __________टोकरी उठाने की बात मान ली।
उत्तर: जमींदार इतने लज्जित हुए कि टोकरी उठाने की बात मान ली।
11. उस झोंपड़ी ___________हर दीवार वृद्धा _________यादों से भरी थी।
उत्तर: उस झोंपड़ी की हर दीवार वृद्धा की यादों से भरी थी।
मुहावरे
“बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोपडी पर अपना कब्जा कर लिया।”
(क) इस वाक्य में मुहावरों की पहचान करके उन्हें रेखांकित कीजिए।
उत्तर: वाक्य: “बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया।”
मुहावरे: बाल की खाल निकालना (बहुत सूक्ष्मता से तर्क करना, बेवजह बारीकी निकालना)
थैली गरम करना (पैसे देना, रिश्वत देना)।
(ख) ‘बाल’ शब्द से जुड़े निम्नलिखित मुहावरों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए।
बाल बाँका न होना – कुछ भी कष्ट या हानि न पहुंचना। पूर्ण रूप से सुरक्षित रहना।
बाल बराबर – बहुत सूक्ष्म। बहुत महीन या पतला।
बाल बराबर फर्क होना – जरा-सा भी भेद होना। सूक्ष्मतम अंतर होना।
बाल-बाल बचना – कोई विपत्ति आने या हानि पहुँचने में बहुत थोड़ी कमी रह जाना।
उत्तर: ‘बाल’ शब्द से जुड़े मुहावरों का प्रयोग:
बाल बाँका न होना:
वाक्य: इतनी बड़ी दुर्घटना में भी यात्रियों का बाल बाँका न हुआ।
बाल बराबर:
वाक्य: दो जुड़वाँ भाइयों के चेहरे में बाल बराबर भी फर्क नहीं था।
बाल बराबर फर्क होना:
वाक्य: दोनों खिलाड़ियों की क्षमता में बाल बराबर फर्क है, इसलिए मुकाबला कड़ा होगा।
बाल-बाल बचना:
वाक्य: तेज़ रफ़्तार से आती गाड़ी से वह बाल-बाल बच गया।
काल
नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए-
इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाऊँगी।
इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाई।
इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पका रही हूँ।
यहाँ रेखांकित शब्दों से पता चल रहा है कि कार्य होने का समय या काल क्या है। क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि कोई कार्य कब हुआ, हो रहा है या होने वाला है, उसे काल कहते हैं।
काल के तीन भेद होते हैं-
1. भूतकाल – यह बताता है कि कार्य पहले ही हो चुका है।
2. वर्तमान काल – यह बताता है कि कार्य अभी हो रहा है या सामान्य रूप से होता रहता है।
3. भविष्य काल – यह बताता है कि कार्य आने वाले समय या भविष्य में होगा।
नीचे दिए गए वाक्यों को वर्तमान और भविष्य काल में बदलिए-
(क) वह गिड़गिड़ाकर बोली।
उत्तर: वर्तमान काल: वह गिड़गिड़ाकर बोल रही है।
भविष्य काल: वह गिड़गिड़ाकर बोलेगी।
(ख) श्रीमान् ने आज्ञा दे दी।
उत्तर: वर्तमान काल: श्रीमान् आज्ञा दे रहे हैं।
भविष्य काल: श्रीमान् आज्ञा देंगे।
(ग) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी।
उत्तर: वर्तमान काल: उसकी आँखों से आँसू की धारा बह रही है।
भविष्य काल: उसकी आँखों से आँसू की धारा बहेगी।
(घ) जमींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई।
उत्तर: वर्तमान काल: जमींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हो रही है।
भविष्य काल: जमींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा होगी।
(ङ) उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।
उत्तर: वर्तमान काल: वे वृद्धा से क्षमा माँग रहे हैं और उसकी झोंपड़ी वापस दे रहे हैं।
भविष्य काल: वे वृद्धा से क्षमा माँगेंगे और उसकी झोंपड़ी वापस देंगे।
वचन की पहचान
“उनके मन में न में कुछ दया आ गई।”
“उनकी आँखें खुल गई।”
ऊपर दिए गए रेखांकित शब्दों में क्या अंतर है और क्यों? आपस में चर्चा करके पता लगाइए।
आपने ध्यान दिया होगा कि शब्द में एक अनुस्वार-भर के अंतर से उसके अर्थ में अंतर आ जाता है।
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में उपयुक्त शब्द भरिए–
(क) वृद्धा झोंपड़ी के भीतर ____________। (गई/गई)
उत्तर: वृद्धा झोंपड़ी के भीतर गई।
(ख) वृद्धा गिड़गिड़ाकर ___________।(बोली/बोली)
उत्तर: वृद्धा गिड़गिड़ाकर बोली।
(ग) पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया ___________। (है/हैं)
उत्तर: पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है।
(घ) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी ________। (थी/थी)
उत्तर: उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी थीं।
(ङ) उसने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली और बाहर ले _________। (आई/आई)
उत्तर: उसने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली और बाहर ले आई।
(च) झोंपड़ी में बसी पुरानी यादें वृद्धा को रुला _________। (गई गई)
उत्तर: झोंपड़ी में बसी पुरानी यादें वृद्धा को रुला गईं।
(छ) पाठक देख सकते हैं कि कैसे एक छोटी-सी टोकरी ने बड़े बदलाव ला दिए ____________। (है/हैं)
उत्तर: पाठक देख सकते हैं कि कैसे एक छोटी-सी टोकरी ने बड़े बदलाव ला दिए हैं।
कहानी की रचना
“यह सुनकर वृद्धा ने कहा, “महाराज, नाराज न हों तो…”
इस पंक्ति में लेखक ने जानबूझकर वृद्धा की कही हुई बात को अधूरा छोड़ दिया है। बात को अधूरा छोड़ने के लिए’… ‘का उपयोग किया गया है। इस प्रकार के वाक्यों और प्रयोगों से कहानी का प्रभाव और बढ़ जाता है। अनेक बार कहानी में नाटकीयता लाने के लिए भी इस प्रकार के प्रयोग किए जाते हैं।
(क) आपको इस कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएं दिखाई देगी। उन्हें अपने समूह के साथ मिलकर ढूंढिए और उनकी सूची बनाइए।
उत्तर: कहानी की विशेषताएँ:
कहानी “एक टोकरी भर मिट्टी” में कई साहित्यिक विशेषताएँ दिखाई देती हैं—
इसमें करुणा और संवेदना का गहरा भाव है।
नाटकीय मोड़ आते हैं, जैसे टोकरी न उठना।
पात्रों के संवाद के माध्यम से कहानी आगे बढ़ती है।
अन्याय और अपराधबोध का संदेश प्रतीकात्मक रूप से दिया गया है।
कहानी में मानवीय मूल्य और नैतिक शिक्षा स्पष्ट रूप से प्रकट होते हैं।
लेखक ने वर्णनात्मक शैली का प्रयोग किया है जिससे दृश्य और भाव जीवंत हो उठते हैं।
(ख) इस कहानी की कुछ विशेषताओं को नीचे दिया गया है। इनके उदाहरण कहानी से चुनकर लिखिए-
| कहानी की विशेषताएँ | कहानी से उदाहरण |
| 1. प्रश्नोत्तरी शैली – कहानी में ऐसे प्रश्न हैं जो पाठक को सोचने पर विवश कर देते हैं। | |
| 2. वर्णनात्मकता – लेखक ने जगहों और भावनाओं का ऐसा चित्र खीचा है कि पाठक दृश्य को देख सकता है। | |
| 3. भावात्मकता – कहानी में करुणा, पछतावा और प्रेम जैसे गहरे भाव दिखते हैं। | |
| 4. संवादात्मकता – पात्रों के संवादों से कहानी आगे बढ़ती है और प्रभावी बनती है। | |
| 5. नाटकीयता – कुछ दृश्य इतने प्रभावशाली हैं कि वे नाटक जैसे लगते हैं। | |
| 6. चरित्र चित्रण – पात्रों के गुण, स्वभाव और मन की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखती है। |
उत्तर:
| कहानी की विशेषताएँ | कहानी से उदाहरण |
| 1. प्रश्नोत्तरी शैली – कहानी में ऐसे प्रश्न हैं जो पाठक को सोचने पर विवश कर देते हैं। | आपसे तो एक टोकरी भर मिट्टी उठाई नहीं जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? |
| 2. वर्णनात्मकता – लेखक ने जगहों और भावनाओं का ऐसा चित्र खीचा है कि पाठक दृश्य को देख सकता है। | उस झोंपड़ी में उसका ऐसा कुछ मन लग गया था कि बिना मरे वहाँ से वह निकलना ही नहीं चाहती थी। |
| 3. भावात्मकता – कहानी में करुणा, पछतावा और प्रेम जैसे गहरे भाव दिखते हैं। | ‘जब से यह झोंपड़ी छूटी है, तब से मेरी पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है। |
| 4. संवादात्मकता – पात्रों के संवादों से कहानी आगे बढ़ती है और प्रभावी बनती है। | महाराज क्षमा करें तो एक विनती है।” |
| 5. नाटकीयता – कुछ दृश्य इतने प्रभावशाली हैं कि वे नाटक जैसे लगते हैं। | जमींदार का टोकरी उठाने में असफल होना और वृद्धा का कटाक्ष भरा उत्तर। |
| 6. चरित्र चित्रण – पात्रों के गुण, स्वभाव और मन की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखती है। | वृद्धा—धैर्यवान, करुणामयी और प्रतीकात्मक ढंग से अन्याय का विरोध करने वाली। जमींदार—अहंकारी, परंतु अंततः पश्चाताप कर दयालु बन जाने वाला। |
शब्दकोश का उपयोग
आप जानते ही हैं कि हम शब्दकोश का प्रयोग करके शब्दों के विषय में अनेक प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। नीचे कुछ शब्दों के अनेक अर्थ शब्दकोश से चुनकर दिए गए हैं। इन शब्दों के जो अर्थ इस कहानी के अनुसार सबसे उपयुक्त हैं, उन पर घेरा बनाइए–
| वाक्य | रेखांकित शब्द का अर्थ |
| 1. श्रीमानू के सब प्रयत्न निष्फल हुए | धनी, शोभायुक्त, शोभावान, संपत्तिशाली, संपन्न, पुरुषों के नाम के पूर्व आदर सूचनार्थ लगाया जाने वाला शब्द। |
| 2. पतोहू भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी। | अविवाहित लड़की, एक राशि का नाम, लड़की, बड़ी इलायची। |
| 3. जमींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई। | राजा या रईस आदि के रहने का बहुत बड़ा और बढ़िया मकान, प्रासाद, अतःपुर, पत्नी, उतरने की जगह। |
| 4. वह तो कई जमाने से वहीं बसी थी। | काल, बहुत अधिक समय, सौभाग्य का समय, संसार, जगत, राजाकाल, अवधि, युग, कार्यकाल, विलंब, देर अतिकाला |
| 5. यहीं उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | सहारा, आलंबन, पात्र (नाटक), नींव, बाँध, नहर, संबंध, बरतन, परिस्थितियाँ, अधिष्ठान, आश्रय देनेवाला, पालन करनेवाला। |
उत्तर:
| वाक्य | रेखांकित शब्द का अर्थ |
| 1. श्रीमानू के सब प्रयत्न निष्फल हुए | पुरुषों के नाम के पूर्व आदर सूचनार्थ लगाया जाने वाला शब्द। |
| 2. पतोहू भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी। | अविवाहित लड़की। |
| 3. जमींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई। | राजा या रईस आदि के रहने का बहुत बड़ा और बढ़िया मकान। |
| 4. वह तो कई जमाने से वहीं बसी थी। | बहुत अधिक समय। |
| 5. यहीं उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | सहारा। |
भावों की पहचान
“कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी…”
कहानी की इस पंक्ति से कौन-कौन से भाव प्रकट हो रहे हैं? सही पहचाना, इस पंक्ति से पश्चाताप और क्षमा के भाव प्रकट हो रहे हैं। अब नीचे दी गई पंक्तियों में प्रकट हो रहे भावों से उनका मिलान कीजिए-
| क्रम | पंक्तियां | भाववाचक संज्ञा |
| 1. | वह लज्जित होकर कहने लगे ‘नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी।’ | ममता/स्नेह |
| 2. | वृद्धा के उपर्युक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गई। | दुख/पीड़ा |
| 3. | उनके मन में कुछ दया आ गई। | विनम्रता/विनय |
| 4. | इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। | अहंकार/घमंड |
| 5. | महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। | बोध/आत्मज्ञान |
| 6. | अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | आस्था/विश्वास |
| 7. | जमींदार साहब धन-मद से गर्चित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे। | जुड़ाव/मोह |
| 8. | उस झोपड़ी में उसका मन ऐसा कुछ लग गया था कि बिना मरे वहाँ से वह निकलना ही नहीं चाहती थी। | करुणा/दया |
| 9. | जब उसे अपनी पूर्वस्थिति की याद आ जाती तो मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी। | क्रूरता/अन्याय |
| 10. | बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया। | लज्जा/पछतावा |
उत्तर:
| क्रम | पंक्तियां | भाववाचक संज्ञा |
| 1. | वह लज्जित होकर कहने लगे -‘नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी।’ | लज्जा/पछतावा |
| 2. | वृद्धा के उपर्युक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गई। | बोध/आत्मज्ञान |
| 3. | उनके मन में कुछ दया आ गई। | करुणा/दया |
| 4. | इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। | आस्था/विश्वास |
| 5. | महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। | विनम्रता/विनय |
| 6. | अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | ममता/स्नेह |
| 7. | जमींदार साहब धन-मद से गर्चित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे। | अहंकार/घमंड |
| 8. | उस झोपड़ी में उसका मन ऐसा कुछ लग गया था कि बिना मरे वहाँ से वह निकलना ही नहीं चाहती थी। | जुड़ाव/मोह |
| 9. | जब उसे अपनी पूर्वस्थिति की याद आ जाती तो मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी। | दुख/पीड़ा |
| 10. | बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया। | क्रूरता/अन्याय |
वाक्य विस्तार
‘वृद्धा पहुँची।’
यह केवल दो शब्दों से बना एक वाक्य है लेकिन हम इस वाक्य को बड़ा भी बना सकते हैं-
‘वह वृद्धा हाथ में एक टोकरी लेकर वहाँ पहुँची।’
अब बात कुछ अच्छी तरह समझ में आ रही है। किंतु इसी वाक्य को हम और विस्तार भी दे सकते हैं, जैसे-
‘थकी हुई आँखों और काँपते हाथों में टोकरी लिए वृद्धा धीरे-धीरे दरवाजे पर पहुँची।’
अब यह वाक्य अनेक अर्थ और भाव व्यक्त कर रहा है। अब इसी प्रकार नीचे दिए गए वाक्यों का कहानी को ध्यान में रखते हुए विस्तार कीजिए। प्रत्येक वाक्य में लगभग 15-20 शब्द हो सकते हैं।
1. एक झोंपड़ी थी।
उत्तर: गाँव के कोने में पेड़ों से घिरी हुई एक छोटी-सी झोंपड़ी थी, जिसमें एक गरीब वृद्धा अपनी पोती के साथ रहती थी।
2. श्रीमान् टहल रहे थे।
उत्तर: श्रीमान् अपने शानदार महल के अहाते में टहल रहे थे और नौकरों को इशारे से काम करने के आदेश दे रहे थे।
3. वह खाने लगेगी।
उत्तर: वृद्धा ने सोचा कि अगर झोंपड़ी की मिट्टी से चूल्हा बनेगा तो उसकी पोती भरोसे से रोटी खाने लगेगी।
4. वृद्धा भीतर गई।
उत्तर: वृद्धा काँपते कदमों से झोंपड़ी के भीतर गई, जहाँ उसे अपने बीते जीवन की यादें देखकर आँखों से आँसू बहने लगे।
5. आगे बढ़े।
उत्तर: जमींदार साहब पहले नाराज़ हुए, पर वृद्धा की बार-बार विनती देखकर दया आ गई और वे स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़े।
संवाद फोन पर
(क) कल्पना कीजिए कि यह कहानी आज के समय की है। जमींदार वृद्धा की पोती को समझाना चाहता है कि वह जिद छोड़ दे और भोजन कर ले। उसने पोती को फोन किया है। अपनी कल्पना से दोनों की बातचीत लिखिए।
उत्तर: फोन पर संवाद — जमींदार और पोती।
जमींदार: हेलो बेटी, क्यों खाना नहीं खा रही हो?
पोती: (उदास स्वर में) मुझे हमारी झोंपड़ी में ही रोटी खानी है। वहाँ की मिट्टी और चूल्हा ही अपना लगता है।
जमींदार: लेकिन बेटा, भूख से कमजोर हो जाओगी। मैं चाहता हूँ कि तुम स्वस्थ रहो।
पोती: जब तक आप हमारी झोंपड़ी वापस नहीं देंगे, मैं खाना नहीं खाऊँगी।
जमींदार: (नर्म स्वर में) अच्छा, मैं वादा करता हूँ कि झोंपड़ी तुम्हारी ही रहेगी। अब तुम चिंता मत करो।
पोती: सचमुच?
जमींदार: हाँ, बिल्कुल। अब मुस्कुराकर खाना खा लो।
पोती: (खुश होकर) धन्यवाद दादा जी… अब मैं खाना खाऊँगी।
(ख) कल्पना कीजिए कि जमीदार और उसका कोई मित्र वृद्धा की झोंपड़ी हथियाने के बारे में मोबाइल पर लिखित संदेशों द्वारा चर्चा कर रहे हैं। मित्र उसे समझा रहा है कि यह झोपड़ी न हड़पे। उनकी इस लिखित चर्चा को अपनी कल्पना से भाव मुद्रा (इमोजी) के साथ लिखिए।
उदाहरण-
मित्र – इस विचार को छोड़ दो, तुम्हें आखिर किस बात की कमी है?
जमीदार – मुझे तुमसे उपदेश नहीं सुनना है।
उत्तर: मोबाइल संदेश द्वारा चर्चा — जमींदार और मित्र:
जमींदार: सोच रहा हूँ कि उस झोंपड़ी को हटाकर अहाता बढ़ा दूँ।
मित्र: यह गलत होगा। वृद्धा और उसकी पोती का यही सहारा है।
जमींदार: लेकिन मुझे जगह चाहिए और मेरे पास ताकत है।
मित्र: ताकत का सही उपयोग दूसरों को दबाने में नहीं, उनकी मदद करने में है।
जमींदार: (थोड़ा झुंझलाकर) तुम हमेशा उपदेश ही देते हो।
मित्र: नहीं, मैं दोस्त हूँ, इसलिए सच कह रहा हूँ। अन्याय का बोझ जीवनभर चैन नहीं लेने देगा।
जमींदार: (सोचते हुए) शायद तुम सही हो…
मित्र: सही निर्णय यही है कि झोंपड़ी लौटाकर वृद्धा का आशीर्वाद लो।
जमींदार: ठीक है, मैं उसे वापस कर दूँगा।
पोती की भावनाएँ
“मेरी पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया इदिया है।”
(क) कहानी में वृद्धा की पोती एक महत्वपूर्ण पात्र है, भले ही उसका उल्लेख केवल एक-दो पंक्तियों में ही हुआ है। कल्पना कीजिए कि आप ही वह पोती हैं। आपको अपने घर से बहुत प्यार है। अपने घर को बचाने के लिए जिलाधिकारी को एक पत्र लिखिए।
उत्तर: प्रेषक :
गाँव – ______
तारीख – ______
प्रति,
माननीय जिलाधिकारी महोदय,
_________ ज़िला।
विषय : झोंपड़ी को बचाने के लिए निवेदन पत्र
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं एक छोटी-सी बच्ची हूँ। मेरी दादी और मैं गाँव के कोने में एक छोटी-सी झोंपड़ी में रहते हैं। यही हमारा घर है। मेरी माँ और पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। दादी ही मेरा सहारा हैं।
महोदय, मुझे अपनी झोंपड़ी से बहुत प्यार है। यहीं मैं खेलती हूँ, पढ़ती हूँ और दादी के साथ रोटी खाती हूँ। अब हमारे गाँव के जमींदार साहब हमारी झोंपड़ी लेना चाहते हैं। यदि यह झोंपड़ी छिन गई तो हमारा जीवन अंधकारमय हो जाएगा।
मैं आपसे प्रार्थना करती हूँ कि हमें हमारी झोंपड़ी में रहने दें और जमींदार को इसे हड़पने से रोकें। आप मेरे लिए पिता समान हैं। कृपया मेरी मासूम गुज़ारिश स्वीकार करें।
आपकी आज्ञाकारी,
वृद्धा की पोती
(ख) मान लीजिए कि वृद्धा की पोती दैनंदिनी (डायरी) लिखा करती थी। कहानी की घटनाओं के आधार पर कल्पना कीजिए कि उसने अपनी डायरी में क्या लिखा होगा? स्वयं को पोती के स्थान पर रखते हुए वह दैनंदिनी लिखिए। उदाहरण के लिए–
मेरी दैनंदिनी
2 मई- आज दादी घर पर आई तो बहुत परेशान थीं। मैंने बहुत पूछा। उन्होंने बताया…
उत्तर: मेरी दैनंदिनी:
2 मई – आज दादी बहुत परेशान थीं। मैंने बार-बार पूछा तो उन्होंने बताया कि जमींदार हमारी झोंपड़ी लेना चाहता है। यह सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ।
3 मई – दादी ने मुझे समझाया कि हमें शायद झोंपड़ी छोड़नी पड़ेगी। लेकिन मैंने कहा कि मैं कहीं और रोटी नहीं खाऊँगी। मैं बहुत रोई।
5 मई – दादी मुझे साथ लेकर जमींदार के पास गईं। उन्होंने विनती की कि झोंपड़ी की थोड़ी मिट्टी दे दें ताकि उसी से चूल्हा बनाकर रोटी पकाएँ।
6 मई – आज अजीब घटना हुई। जमींदार खुद टोकरी उठाने लगे, लेकिन वह मिट्टी की टोकरी उठा ही नहीं पाए। दादी ने कहा कि यह अन्याय का भार है। जमींदार बहुत शर्मिंदा हो गए।
7 मई – मुझे बहुत खुशी हुई। जमींदार ने दादी से क्षमा माँगी और झोंपड़ी वापस कर दी। अब मैं फिर से अपने घर में रहूँगी। मेरी दादी के साथ मेरा छोटा-सा संसार सुरक्षित हो गया है।
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) कहानी में वृद्धा की पोती अपने घर से बहुत प्यार करती थी। आपके घर से अपने लगाव का अनुभव बताइए।
उत्तर: मुझे अपने घर से बहुत लगाव है। यही वह स्थान है जहाँ मैं अपने परिवार के साथ हँसता-बोलता और सुख-दुख बाँटता हूँ। घर की दीवारें, आँगन और हर कोना मुझे सुरक्षा और अपनापन का एहसास कराते हैं। कहीं भी जाऊँ, पर घर लौटकर मुझे सच्चा सुकून मिलता है।
(ख) क्या कभी आपको किसी स्थान, वस्तु या व्यक्ति से इतना लगाव हुआ है कि उसे छोड़ना मुश्किल लगा हो? अपना अनुभव साझा कीजिए।
उत्तर: मुझे अपने स्कूल से गहरा लगाव रहा है। जब मैं पहली बार स्कूल बदला था तो बहुत दुख हुआ, क्योंकि पुराना स्कूल मेरी यादों और मित्रों से जुड़ा था। वहाँ की कक्षाएँ, खेल का मैदान और अध्यापक सब मुझे बहुत याद आते थे। यह अनुभव बताता है कि लगाव किसी स्थान को केवल ईंट-पत्थर नहीं रहने देता, बल्कि उसे दिल का हिस्सा बना देता है।
(ग) कहानी में जमींदार अपने किए पर पश्चाताप कर रहा है। क्या आपने कभी किसी को उनके किए पर पछताते हुए देखा है? उस घटना के बारे में बताइए। यह भी बताइए कि उस पश्चाताप का क्या परिणाम निकला?
उत्तर: एक बार मेरे एक मित्र ने झगड़े में आकर किसी साथी से बुरी तरह बात कह दी। बाद में उसने महसूस किया कि उससे गलती हो गई है। उसने माफी माँगी और दोनों फिर से अच्छे दोस्त बन गए। इस पश्चाताप का परिणाम यह हुआ कि उनकी दोस्ती और भी गहरी हो गई। इससे मैंने सीखा कि गलती मान लेना और माफी माँगना सबसे बड़ा साहस है।
(घ) क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने कोई काम गुस्से या अहंकार में किया हो और बाद में पछताए हों? फिर आपने क्या किया? उस अनुभव से आपने क्या सीखा?
उत्तर: एक बार मैंने गुस्से में आकर अपने छोटे भाई से बहुत कठोर शब्द कह दिए। वह उदास हो गया और मुझसे बात नहीं करने लगा। बाद में मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ और मैंने उससे माफी माँगी। इस अनुभव से मैंने सीखा कि गुस्सा सबसे पहले इंसान की समझ छीन लेता है, इसलिए धैर्य और संयम से काम लेना चाहिए।
न्याय और समता
कहानी में आपने पढ़ा कि एक जमींदार ने लालच के कारण एक स्त्री का पर छीन लिया।
(क) क्या आपने किसी के साथ ऐसा अन्याय देखा, पढ़ा या सुना है? उसके बारे में बताइए।
उत्तर: हाँ, मैंने अपने गाँव में देखा था कि एक गरीब मज़दूर से उसकी मेहनत का पूरा पैसा नहीं दिया गया। मालिक ने लालच और अहंकार में उसका हक़ दबा लिया। मज़दूर चुप रहा क्योंकि उसके पास विरोध करने की ताक़त नहीं थी। यह देखकर मुझे बहुत दुख हुआ। ऐसे अन्याय की घटनाएँ हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि समाज में सबके साथ समान व्यवहार क्यों नहीं होता।
(ख) ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं। आपके आस-पास के लोग क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर: ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए हम कई कदम उठा सकते हैं। सबसे पहले हमें साहसपूर्वक आवाज़ उठानी चाहिए। यदि किसी का हक़ छीना जा रहा है तो हम कानून और प्रशासन की मदद ले सकते हैं। अपने आस-पास के लोग मिलकर पीड़ित व्यक्ति का साथ दें और अन्याय का विरोध करें। समाज में जागरूकता फैलाना भी ज़रूरी है ताकि कोई गरीब या असहाय व्यक्ति अकेला महसूस न करे।
(ग) “सच्ची शक्ति दया और न्याय में है।” इस कथन पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर:

Hi! my Name is Parimal Roy. I have completed my Bachelor’s degree in Philosophy (B.A.) from Silapathar General College. Currently, I am working as an HR Manager at Dev Library. It is a website that provides study materials for students from Class 3 to 12, including SCERT and NCERT notes. It also offers resources for BA, B.Com, B.Sc, and Computer Science, along with postgraduate notes. Besides study materials, the website has novels, eBooks, health and finance articles, biographies, quotes, and more.


