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NCERT Class 7 Social Science Chapter 18 राज्य, सरकार और नागरिक
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राज्य, सरकार और नागरिक
Chapter: 18
| Part – 2 |
महत्वपूर्ण प्रश्न
1. राज्य और सरकार में क्या अंतर है?
उत्तर: राज्य (या राष्ट्र) एक व्यापक राजनीतिक संगठन है जिसके पास एक निश्चित भूभाग (भूमि), स्थायी जनसंख्या (लोग), सरकार और संप्रभुता (बिना किसी बाहरी नियंत्रण के निर्णय लेने व कानून बनाने की पूर्ण शक्ति) होती है। इसके विपरीत, सरकार व्यक्तियों का केवल एक समूह या एक ऐसी व्यवस्था है जो राज्य की ओर से देश के दैनिक कार्यों का संचालन करती है। चुनावों के बाद देश की सरकार बदल सकती है लेकिन राज्य का मूल ढांचा वैसा ही बना रहता है; ठीक उसी तरह जैसे शिक्षक और प्रधानाचार्य (सरकार) आते-जाते रहते हैं परंतु विद्यालय (राज्य) हमेशा वहीं स्थापित रहता है।
2. लोकतंत्र और गणराज्य में क्या भिन्नता है? भारत को एक लोकतांत्रिक गणराज्य क्या बनाता है?
उत्तर: लोकतंत्र का मूल विचार ‘जनता का शासन’ है, जिसमें देश के नागरिकों को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के माध्यम से अपनी सरकार चुनने का पूर्ण अधिकार प्राप्त होता है। दूसरी ओर, गणराज्य वह शासन-व्यवस्था है जिसमें देश का राष्ट्राध्यक्ष (सर्वोच्च पद) वंशानुगत नहीं होता, बल्कि वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा निर्वाचित होता है और शासकों की शक्तियों पर संविधान व कानूनों द्वारा सीमा तय की जाती है। भारत को एक लोकतांत्रिक गणराज्य इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ सरकार का चुनाव जनता स्वयं मतदान से करती है (लोकतंत्र), और देश के राष्ट्राध्यक्ष (राष्ट्रपति) का पद वंशानुगत न होकर अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित प्रतिनिधियों के समूह द्वारा चुना जाता है (गणराज्य)।
3. नागरिक, सरकार से अपने दैनिक जीवन में किस प्रकार जुड़े रहते हैं? हम सरकार को कैसे अधिक उत्तरदायी और प्रभावी बना सकते हैं?
उत्तर: नागरिक अपने दैनिक जीवन में उन विभिन्न विभागों (कार्यपालिका के अंग) से सीधे जुड़े रहते हैं जो कानून-व्यवस्था (पुलिस बल), बुनियादी सेवाएँ (निःशुल्क शिक्षा, विद्यालय, पेयजल, सड़क आदि) और लोक कल्याणकारी योजनाएँ प्रदान करते हैं। सरकार को अधिक उत्तरदायी और प्रभावी बनाने के लिए हम ऑनलाइन शिकायत निवारण पोर्टल (जैसे pgportal.gov.in) पर अपनी समस्याएँ दर्ज करा सकते हैं, ‘सूचना का अधिकार’ (RTI) के तहत परियोजनाओं के खर्च की जानकारी मांगकर पारदर्शिता ला सकते हैं, सोशल मीडिया या जनसंचार माध्यमों पर अधिकारियों को टैग करके समस्याओं को उजागर कर सकते हैं, नागरिक समाज संगठनों (जैसे ऐतिहासिक साइलेंट वैली आंदोलन) से जुड़ सकते हैं, या फिर प्रतिनिधियों को पत्र लिखकर और पात्र आयु होने पर चुनाव में रचनात्मक मतदान करके सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
प्रश्न एवं क्रियाकलाप
1. “प्रत्येक लोकतंत्र एक गणराज्य होता है।” क्या यह कथन सत्य है या असत्य? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: यह कथन पूर्णतः असत्य है क्योंकि सभी लोकतांत्रिक देश गणराज्य नहीं होते। उदाहरण के लिए, ब्रिटेन, कनाडा और स्वीडन पूर्ण लोकतांत्रिक देश हैं क्योंकि वहाँ की जनता स्वतंत्र चुनाव के माध्यम से अपनी सरकार खुद चुनती है, परंतु वे गणराज्य नहीं हैं क्योंकि वहाँ आज भी देश के सर्वोच्च राष्ट्राध्यक्ष का पद वंशानुगत सम्राट (राजा या रानी) के हाथ में होता है।
2. भारत में विकेंद्रीकरण क्यों महत्वपूर्ण है? इसके दो कारण लिखिए।
उत्तर: भारत 1.4 अरब से अधिक जनसंख्या और अत्यधिक विविधता वाला एक विशाल देश है, जहाँ केवल एक केंद्रीय सरकार देश के हर स्तर की समस्याओं को प्रभावी ढंग से हल नहीं कर सकती, इसलिए यहाँ शक्तियों का विकेंद्रीकरण अनिवार्य हो जाता है। इसके दो मुख्य कारण हैं: पहला, स्थानीय स्तर का उत्तम ज्ञान, जिसके तहत स्थानीय नेता अपने क्षेत्र की बुनियादी जरूरतों और समस्याओं (जैसे सड़क मरम्मत, पानी की निकासी या स्ट्रीटलाइट ठीक कराना) को दूर बैठे केंद्रीय अधिकारियों की तुलना में बहुत बेहतर ढंग से जानते हैं; और दूसरा, लोकतांत्रिक सहभागिता, जिसके माध्यम से आम नागरिकों को सीधे उन निर्णयों में शामिल होने का अवसर मिलता है जो उनके दैनिक जीवन को प्रभावित करते हैं, जिससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बहुत बढ़ जाती है।
3. कल्पना कीजिए कि आप अपने विद्यालय की छात्र परिषद के सदस्य हैं। यह परिषद एक लघु संसद की तरह कार्य करती है— इसके सदस्य विद्यार्थियों द्वारा चुने जाते हैं, समस्याओं पर चर्चा करते हैं और निर्णय लेते हैं। इस संदर्भ में बताइए कि क्या यह अधिक उपयुक्त होगा कि केवल परिषद अध्यक्ष सभी निर्णय ले या फिर सभी सदस्यों में शक्ति का वितरण किया जाए?
→ क्या छात्र परिषद को आपके भोजन या आपकी बोलचाल की भाषा से संबंधित नियम बनाने का अधिकार होना चाहिए?
→ यदि छात्र परिषद आपके विद्यालय की सबसे शक्तिशाली संस्था बन जाए और उसके निर्णयों पर कोई प्रश्न न उठाए, तो क्या समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं?
उत्तर: विद्यालय की छात्र परिषद में सभी सदस्यों के बीच शक्ति का वितरण किया जाना अधिक उपयुक्त होगा ताकि सभी विद्यार्थियों के विचारों का निष्पक्ष प्रतिनिधित्व हो सके और किसी भी प्रकार की मनमानी को रोका जा सके।
नहीं, छात्र परिषद को भोजन या बोलचाल की भाषा जैसे व्यक्तिगत अधिकारों और स्वतंत्रताओं पर मनमाने नियम बनाने का अधिकार नहीं होना चाहिए, क्योंकि लोकतांत्रिक सिद्धांत हमेशा व्यक्तिगत मौलिक स्वतंत्रताओं की रक्षा करते हैं।
यदि छात्र परिषद असीमित रूप से शक्तिशाली हो जाएगी, तो वह निरंकुश होकर ‘बहुमत के वर्चस्व’ का रूप ले सकती है, जिससे असहमत रहने वाले अल्पमत छात्रों के अधिकारों को भारी क्षति पहुँचेगी और विद्यालय में अन्याय, असंतोष और अशांति का माहौल पैदा हो जाएगा।
4. भारत के लोकतंत्र के संदर्भ में वास्तविक जीवन की इन परिस्थितियों पर विचार कीजिए—
→ क्या संसद को देश की सबसे शक्तिशाली संस्था होना चाहिए? क्यों होना चाहिए अथवा क्यों नहीं?
→ क्या संसद को कोई भी कानून बनाने का अधिकार होना चाहिए, भले ही वह आपके अधिकारों को प्रभावित करता हो या नहीं?
→ यदि कानून-निर्माण पर कोई सीमा न हो, तो क्या-क्या हानि हो सकती है? क्या इससे अन्यायपूर्ण या अनुचित कानूनों का निर्माण हो सकता है?
→ भारत में अधिक शक्तिशाली कौन है— संसद या सर्वोच्च न्यायालय? अपने कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: संसद को देश की असीमित रूप से सबसे शक्तिशाली संस्था नहीं होना चाहिए क्योंकि लोकतंत्र में शक्तियों का संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार के अंगों पर सीमाएँ आवश्यक हैं।
नहीं, संसद को ऐसा कोई भी कानून बनाने का अधिकार नहीं है जो देश के नागरिकों को संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों (जैसे समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता हो।
यदि कानून-निर्माण पर कोई सीमा नहीं होगी, तो निर्वाचित नेता व सरकारी अधिकारी अपनी शक्तियों का अनियंत्रित उपयोग करेंगे, जिससे अल्पसंख्यकों के अधिकारों को दबाकर “बहुमत का वर्चस्व” स्थापित हो जाएगा और निश्चित रूप से अत्यधिक अन्यायपूर्ण व अनुचित कानून बनने लगेंगे।
भारत में न तो संसद और न ही सर्वोच्च न्यायालय असीमित शक्तिशाली है; यहाँ संविधान सर्वोच्च है। संसद के पास कानून बनाने की शक्ति है, परंतु स्वतंत्र न्यायपालिका ‘न्यायिक पुनरावलोकन’ (Judicial Review) के माध्यम से यह जाँच करती है कि वे कानून न्यायसंगत हैं या नहीं, जिससे ‘नियंत्रण और संतुलन’ का सिद्धांत बना रहता है।
5. अपने माता-पिता/अभिभावकों से यह पूछिए कि पिछले एक वर्ष में उन्होंने सरकार से किस प्रकार संपर्क स्थापित किया। एक सूची बनाइए और उन कार्यों को सरकार के उस स्तर के अनुसार वर्गीकृत कीजिए, जिनके साथ उन्हें कार्य करना पड़ा। उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
उत्तर: यह एक व्यावहारिक प्रश्न है जिसे छात्र अपने अभिभावकों से चर्चा करके वर्गीकृत कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि माता-पिता ने सड़क मरम्मत या पानी की समस्या के लिए वार्ड पार्षद या ग्राम पंचायत से संपर्क किया, तो यह स्थानीय सरकार के दायरे में आता है; नया ड्राइविंग लाइसेंस या भूमि के दस्तावेज (खसरा/रजिस्ट्री) बनवाने का काम राज्य सरकार के स्तर पर आता है; और डाकघर में खाता खुलवाना या आधार कार्ड अपडेट कराना संघ (केंद्रीय) सरकार के स्तर पर वर्गीकृत किया जाता है। इन कार्यों में नागरिकों को अक्सर जटिल कागजी कार्यवाही, काम में होने वाली देरी, और कार्यालयों के बार-बार चक्कर काटने जैसी व्यावहारिक प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
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