NCERT Class 7 Social Science Chapter 12 बाजारों की समझ

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NCERT Class 7 Social Science Chapter 12 बाजारों की समझ

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Chapter: 12

प्रश्न और क्रियाकलाप

1. बाजार की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? हाल में जब आप बाजार गए थे, तब आपने वहाँ कौन-कौन सी विशेषताएँ देखीं?

उत्तर: बाजार की मुख्य विशेषताएँ हैं:

(i) क्रेता और विक्रेता की उपस्थिति: बाजार में क्रेता और विक्रेता सीधे मिलते हैं और वस्तुओं व सेवाओं का लेन-देन करते हैं।

(ii) मोल-भाव की प्रक्रिया: मूल्य निर्धारण के लिए क्रेता और विक्रेता आपस में मोल-तोल करते हैं।

(iii) वस्तुओं और सेवाओं की विविधता: बाजार में सब्जियाँ, फल, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसी वस्तुएँ और सैलून, भोजनालय जैसी सेवाएँ उपलब्ध होती हैं।

(iv) आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व: बाजार केवल आर्थिक लेन-देन का स्थान नहीं है, बल्कि यह परंपराओं, विचारों और सामाजिक संबंधों को भी जोड़ता है।

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हाल ही में जब मैं बाजार गया तो वहाँ तरह-तरह की दुकानें और ठेले सजे हुए थे। लोग सब्ज़ियाँ, फल और किराने का सामान ख़रीद रहे थे। क्रेताओं और विक्रेताओं के बीच मोलभाव भी हो रहा था। कुछ दुकानों पर पैक्ड वस्तुओं पर ISI और FSSAI जैसे मानक चिह्न दिखाई दिए। लेन-देन के साथ-साथ लोग आपस में बातचीत कर रहे थे, जिससे बाजार का माहौल और भी जीवंत और सामाजिक बन गया।

2. इस अध्याय के आरंभ में दिए गए एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री के उद्धरण को देखिए। इस अध्याय के संदर्भ में उस उद्धरण की प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए।

उत्तर: प्रत्यक्ष बाजार वे होते हैं जहाँ क्रेता और विक्रेता आमने-सामने मिलकर वस्तुओं और सेवाओं का लेन-देन करते हैं, जैसे स्थानीय हाट या सब्जी मंडी। इसके विपरीत, ऑनलाइन बाजार में क्रेता और विक्रेता आभासी रूप से जुड़ते हैं और किसी भी समय मोबाइल ऐप या वेबसाइट के माध्यम से लेन-देन कर सकते हैं। घरेलू बाजार वे होते हैं जो राष्ट्र की सीमाओं के भीतर संचालित होते हैं, जबकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार देशों की सीमाओं के बाहर वस्तुओं और सेवाओं के आयात-निर्यात से जुड़े होते हैं। थोक बाजार में वस्तुओं की बड़ी मात्रा में खरीद-बिक्री होती है और यहाँ से खुदरा विक्रेताओं को सामान मिलता है। खुदरा बाजार वह है जहाँ अंतिम उपभोक्ताओं तक वस्तुएँ और सेवाएँ पहुँचाई जाती हैं, जैसे किराना दुकाने, सुपरमार्केट और रेस्तराँ। इस प्रकार, विभिन्न प्रकार के बाजार अपनी-अपनी विशेषताओं के अनुसार अलग-अलग स्तर पर व्यापार को सुगम बनाते हैं।

3. अमरूद के क्रय-विक्रय के दिए गए उदाहरण में यदि विक्रेता को अच्छा मूल्य मिल रहा है, तब वह किसानों से और अधिक अमरूद क्रय करने का प्रयास करेगा, ताकि वह उन्हें उसी मूल्य पर बेचकर अपनी आमदनी बढ़ा सके। ऐसी स्थिति में किसान क्या करेगा? क्या आपको लगता है कि वह अगली ऋतु में अमरूदों की माँग के बारे में सोचना शुरू करेगा? उसकी संभावित प्रतिक्रिया क्या होगी?

उत्तर: पैराग्राफ़ रूप में उत्तर:

यदि अमरूद का विक्रेता अधिक मूल्य प्राप्त करता है, तो वह किसानों से और अधिक अमरूद खरीदने का प्रयास करेगा। इसे किसान एक अवसर के रूप में देखेगा और संभवतः अगली ऋतु में अमरूद की खेती बढ़ाने की योजना बनाएगा, ताकि बढ़ती माँग का लाभ उठाकर अधिक आय अर्जित कर सके। इससे यह स्पष्ट होता है कि किसान भी बाजार की माँग और मूल्य के आधार पर अपने उत्पादन संबंधी निर्णय लेते हैं।

बिंदुवार रूप में उत्तर:

अमरूद का विक्रेता यदि अच्छा मूल्य पाएगा, तो वह अधिक मात्रा में अमरूद खरीदेगा।

किसान इस स्थिति को अवसर समझेगा।

किसान अगली ऋतु में अधिक अमरूद उगाने की योजना बना सकता है।

बढ़ती माँग का लाभ उठाकर किसान अपनी आय बढ़ाने का प्रयास करेगा।

यह दर्शाता है कि किसान उत्पादन का निर्णय बाजार की माँग और मूल्य को ध्यान में रखकर करता है।

4. निम्नलिखित प्रकार के बाजारों का उनकी विशेषताओं से मिलान कीजिए-

क्र.संबाजार मानदंड
(क)प्रत्यक्ष बाजारवस्तुएँ और सेवाएँ जो राष्ट्र की सीमा के बाहर भेजी जाती हैं।
(ख)ऑनलाइन बाजारबड़ी मात्रा में सौदे
(ग)घरेलू बाजारअंतिम उपभोक्ताओं तक वस्तुएँ एवं सेवाएँ पहुँचाना।
(घ)अंतर्राष्ट्रीय बाजारक्रेता और विक्रेता की प्रत्यक्ष उपस्थिति आवश्यक है।
(ङ)थोक बाजारक्रेता और विक्रेता आभासी रूप से मिलते हैं और किसी भी समय लेन-देन कर सकते हैं।
(च)खुदरा बाजारकिसी राष्ट्र की सीमा के भीतर स्थित

उत्तर:

क्र.संबाजार मानदंड
(क)प्रत्यक्ष बाजारक्रेता और विक्रेता की प्रत्यक्ष उपस्थिति आवश्यक है।
(ख)ऑनलाइन बाजारक्रेता और विक्रेता आभासी रूप से मिलते हैं और किसी भी समय लेन-देन कर सकते हैं।
(ग)घरेलू बाजारकिसी राष्ट्र की सीमा के भीतर स्थित
(घ)अंतर्राष्ट्रीय बाजारवस्तुएँ और सेवाएँ जो राष्ट्र की सीमा के बाहर भेजी जाती हैं।
(ङ)थोक बाजारबड़ी मात्रा में सौदे
(च)खुदरा बाजारअंतिम उपभोक्ताओं तक वस्तुएँ एवं सेवाएँ पहुँचाना।

5. सामान्यतया मूल्य क्रेताओं की माँग और विक्रेताओं की आपूर्ति की अंतःक्रिया द्वारा निर्धारित होता है। क्या आप ऐसे उत्पादों के बारे मे सोच सकते हैं, जहाँ किसी उत्पाद की माँग के लिए क्रेताओं की संख्या कम होने के बावजूद उसका मूल्य अधिक होता है? इसके क्या कारण हो सकते हैं?

उत्तर: कम माँग होने पर भी अधिक मूल्य वाले उत्पाद कुछ वस्तुएँ ऐसी होती हैं जिनकी माँग सीमित होती है, परंतु उनका मूल्य बहुत अधिक होता है।

कारण:

(i) हीरे और सोना: ये दुर्लभ खनिज हैं, जिनकी आपूर्ति सीमित होती है, इसलिए मूल्य अधिक है।

(ii) प्राचीन कलाकृतियाँ: ये अद्वितीय होती हैं और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक महत्व के कारण महँगी होती हैं।

(iii) ब्रांडेड लक्ज़री वस्तुएँ: सीमित उपभोक्ताओं के लिए होती हैं, लेकिन गुणवत्ता और प्रतिष्ठा के कारण ऊँचे दामों पर बिकती हैं।

(iv) दवाएँ और जीवन-रक्षक औषधियाँ: इनकी विशेष उपयोगिता होती है, इसलिए माँग कम होने पर भी मूल्य अधिक रहता है।

(v) विशेष सेवाएँ: जैसे दुर्लभ परामर्श या विशेषज्ञता भी ऊँचे मूल्य पर मिलती है।

6. सब्जियों के एक खुदरा विक्रेता की वास्तविक जीवन-स्थिति पर विचार कीजिए -एक परिवार सब्जियाँ खरीदने के लिए दुकान पर आया। विक्रेता, जो फलियाँ ठेले पर बेच रहा था, उसकी कीमत ₹30/- प्रति किलोग्राम थी। महिला ने कीमत को ₹25/-प्रति किलोग्राम के नीचे लाने के लिए विक्रेता के साथ मोल-भाव करना शुरू कर दिया। विक्रेता ने उस मूल्य पर विक्रय करने से मना कर दिया और कहा कि उसे उस मूल्य पर घाटा होगा। महिला वहाँ से चली गई। फिर परिवार समीप के सुपरमार्केट में गया और वहाँ से सब्जियाँ क्रय कीं। सुपरमार्केट में अच्छे ढंग से पैक की गई फलियों के लिए उन्होंने ₹40/- प्रति किलोग्राम का भुगतान किया। क्या कारण है कि परिवार ने ऐसा किया? क्या कीमतों के अतिरिक्त ऐसे कोई कारक हैं, जो क्रय-विक्रय को प्रभावित करते हैं?

उत्तर: परिवार ने सुपरमार्केट से ₹40/- प्रति किलोग्राम की दर से फलियाँ खरीदीं, क्योंकि:

(i) गुणवत्ता: सुपरमार्केट में फलियाँ अच्छी तरह से पैक और साफ-सुथरी थीं, जिससे उनकी ताजगी और गुणवत्ता पर भरोसा हुआ।

(ii) विश्वास: सुपरमार्केट में बिकने वाले उत्पादों पर अक्सर प्रमाणन चिह्न (जैसे FSSAI/ISI) होते हैं, जो उपभोक्ता को सुरक्षा और गुणवत्ता का भरोसा दिलाते हैं।

(iii) सुविधा: सुपरमार्केट में एक ही स्थान पर अनेक प्रकार की वस्तुएँ आसानी से उपलब्ध होती हैं, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।

(iv) वातावरण: सुपरमार्केट का वातावरण स्वच्छ, व्यवस्थित और आधुनिक होता है, जो उपभोक्ता के अनुभव को बेहतर बनाता है।

कीमतों के अतिरिक्त अन्य कारक, जो क्रय-विक्रय को प्रभावित करते हैं:

(i) वस्तु की गुणवत्ता और ताजगी।

(ii) विक्रेता या दुकान की विश्वसनीयता।

(iii) खरीदारी का अनुभव और सुविधा।

(iv) ग्राहक सेवा और व्यवहार।

7. भारत के कुछ जिले टमाटर उगाने के लिए प्रसिद्ध हैं। हालाँकि, कुछ मौसमों में किसानों के लिए स्थिति अच्छी नहीं होती। अधिक उपज होने पर कृषकों द्वारा अपनी उपज को फेंकने और उनका सारा श्रम नष्ट होने के समाचार आते हैं। आपके विचार में किसान ऐसा क्यों करते हैं? ऐसी स्थिति में थोक विक्रेता क्या भूमिका निभा सकते हैं? यह सुनिश्चित करने के संभावित उपाय क्या हो सकते हैं जिससे टमाटर बर्बाद न हों और किसानों को नुकसान भी न पहुँचे ?

उत्तर: टमाटर किसानों की समस्या और समाधान:

समस्या:

(i) अधिक उपज होने पर कीमतें बहुत गिर जाती हैं।

(ii) किसान लागत मूल्य तक नहीं कमा पाते और मजबूरी में टमाटर फेंक देते हैं।

संभावित समाधान:

(i) थोक व्यापारी की भूमिका: बड़ी मात्रा में उपज खरीदकर कोल्ड स्टोरेज या प्रसंस्करण इकाइयों (जैसे सॉस, प्यूरी, केचप) में भेज सकते हैं।

(ii) सरकार की भूमिका: न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित कर सकती है।

(iii) भंडारण और वितरण तंत्र: पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज, गोदाम और परिवहन व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।

(iv) प्रसंस्करण उद्योग का विकास: कृषि उपज को लंबे समय तक संरक्षित करने के लिए प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

8. क्या आपने अपने या किसी अन्य विद्यालय द्वारा आयोजित किसी मेले के बारे में सुना है या उसमें गए हैं? अपने मित्रों और शिक्षकों से ऐसे मेलों के बारे में चर्चा कीजिए कि इन मेलों में किस तरह से क्रय-विक्रय और मोल-भाव होता है?

उत्तर: हाँ, मैंने अपने विद्यालय में आयोजित एक मेले में भाग लिया था। इस मेले में अलग-अलग तरह के स्टॉल लगे थे, जहाँ हस्तशिल्प, खाने-पीने की चीज़ें, किताबें और खिलौने बिक रहे थे।

क्रय-विक्रय:

(i) स्टॉल पर छात्र और शिक्षक विक्रेता की भूमिका निभा रहे थे।

(ii) वे ग्राहकों को वस्तुओं की विशेषताओं के बारे में बताते थे और बिक्री करते थे।

(iii) उदाहरण के लिए, एक स्टॉल पर घर पर बनाए गए पके हुए पकवान और एक अन्य स्टॉल पर हस्तनिर्मित गहने उपलब्ध थे।

मोल-भाव:

(i) कई ग्राहक वस्तुओं की कीमत कम कराने के लिए मोल-भाव कर रहे थे।

(ii) जैसे, यदि किसी गहने की कीमत ₹50 थी, तो ग्राहक ने ₹40 में माँगा और थोड़ी बातचीत के बाद विक्रेता ₹45 पर सहमत हो गया।

अनुभव: मेले का वातावरण उत्साहपूर्ण और आनंदमय था। लोग केवल खरीदारी ही नहीं कर रहे थे, बल्कि एक-दूसरे से बातचीत और हँसी-मजाक भी कर रहे थे। इस तरह यह मेला बाजार की तरह ही आर्थिक गतिविधि और सामाजिक मेलजोल का सुंदर मिश्रण था।

9. कोई भी पाँच उत्पाद चुनें और अध्याय में चर्चा किए गए प्रमाणन चिह्नों के साथ उनके लेबल की जाँच करें। क्या आपको ऐसे उत्पाद मिले, जिन पर मानक चिह्न नहीं था? यह किस बात का सूचक है?

उत्तर: मैंने निम्नलिखित पाँच उत्पादों की जाँच की:

(i) बेसन का पैकेट: इस पर FSSAI चिह्न था, जो यह दर्शाता है कि यह खाद्य पदार्थ सुरक्षित और मानक के अनुसार है।

(ii) विद्युत पंखा: इस पर ISI चिह्न था, जो इसकी गुणवत्ता और उपयोग के दौरान सुरक्षा की गारंटी देता है।

(iii) शहद: इस पर Agmark चिह्न था, जो इसकी शुद्धता और शुद्ध सामग्री से बने होने का संकेत देता है।

(iv) रेफ्रिजरेटर: इस पर BEE स्टार रेटिंग अंकित थी, जो इसकी ऊर्जा दक्षता और बिजली बचत की क्षमता को दर्शाती है।

(v) साबुन: इस पर कोई मानक चिह्न नहीं था।

निष्कर्ष: जिन उत्पादों पर मानक चिह्न होते हैं, वे गुणवत्ता, शुद्धता और सुरक्षा की गारंटी देते हैं। लेकिन जिन पर मानक चिह्न नहीं होता, जैसे साबुन, उनके बारे में यह कहा जा सकता है कि उनकी गुणवत्ता की सरकारी स्तर पर जाँच नहीं की गई है। यह उपभोक्ताओं के लिए जोखिम हो सकता है, क्योंकि ऐसे उत्पाद की सुरक्षा और प्रामाणिकता पर संदेह रहता है।

10. आपने और आपके सहपाठियों ने एक साबुन बनाया है। इसकी पैकेजिंग के लिए एक लेबल डिजाइन कीजिए। आपके विचार से लेबल पर क्या लिखा होना चाहिए, ताकि उपभोक्ता उत्पाद को बेहतर तरीके से जाँच सकें?

उत्तर: हमारे द्वारा बनाए गए साबुन की पैकेजिंग पर ऐसा लेबल होना चाहिए, जो उपभोक्ता को उत्पाद की पूरी जानकारी दे और भरोसा दिलाए। लेबल पर लिखी जाने वाली बातें इस प्रकार हो सकती हैं—

(i) ब्रांड/उत्पाद का नाम: “नेचुरल ग्लो हर्बल सोप”।

(ii) वजन/शुद्ध मात्रा: 100 ग्राम।

(iii) सामग्री: नीम, एलोवेरा, नारियल तेल, गुलाब जल, ग्लिसरीन।

(iv) निर्माण तिथि व समाप्ति तिथि: अक्टूबर 2025 से अक्टूबर 2027 तक उपयोग योग्य।

(v) बैच नंबर: NGH-25/01

(vi) अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP): ₹55/-

(vii) प्रमाणन चिह्न: ISI/FSSAI (यदि लागू हो)।

(viii) विशेष जानकारी: यह साबुन 100% हर्बल और त्वचा के लिए सुरक्षित है।

(ix) उपयोग की विधि: साबुन को गीली त्वचा पर लगाएँ, हल्का झाग बनाएँ और साफ पानी से धो लें।

(x) सावधानी: संवेदनशील त्वचा वाले उपयोग से पहले पैच टेस्ट करें।

(xi) पर्यावरण संदेश: यह साबुन बायोडिग्रेडेबल है और पैकेजिंग पर्यावरण-हितैषी है।

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