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NCERT Class 12 Home Science Important Chapter 3 जनपोषण तथा स्वास्थ्य

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NCERT Class 12 Home Science Important Chapter 3 जनपोषण तथा स्वास्थ्य

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Chapter: 3

Part – 1: मानव पारिस्थितिकी एवं परिवार विज्ञान
IMPORTANT SOLUTIONS

लघु उत्तरीय प्रश्न:

1. जन स्वास्थ्य की संकल्पना का क्या अर्थ है?

उत्तर: सभी लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा और उसे बढ़ावा देने के लिए समाज द्वारा किए गए सामूहिक प्रयास जन स्वास्थ्य कहलाते हैं।

2. जन्म के समय कम भार वाले शिशु किसे माना जाता है?

उत्तर: जिन शिशुओं का जन्म के समय भार 2500 ग्राम (2.5 किलोग्राम) से कम होता है, उन्हें कम जन्म-भार वाले शिशु कहा जाता है।

3. भारत में कुपोषण के क्या मुख्य आर्थिक प्रभाव होते हैं?

उत्तर: कुपोषण के कारण उत्पादकता में कमी आती है, जिससे व्यक्ति के जीवन भर की कमाई का 10 प्रतिशत और राष्ट्र के समग्र घरेलू उत्पाद (GDP) में 2-3 प्रतिशत का नुकसान हो सकता है।

4. अतिपोषण और मोटापे के कारण कौन से असंक्रामक रोग होने का खतरा रहता है?

उत्तर: अतिपोषण के कारण उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर और गठिया (आर्थराइटिस) जैसे असंक्रामक रोग होने का खतरा रहता है।

5. जन स्वास्थ्य पोषण किन विषयों पर आधारित एक बहुविषयक क्षेत्र है?

उत्तर: यह जीवन विज्ञान तथा सामाजिक विज्ञान विषयों की बुनियाद पर टिका है, जिसमें पोषण, जैविक, व्यवहार-संबंधी और प्रबंधकीय विज्ञान शामिल होते हैं।

6. ‘छिपी भूख’ (Hidden hunger) से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: जब आहार में खनिजों और विटामिनों जैसे सूक्ष्मपोषक तत्वों की कमी होती है, तो उस स्थिति को ‘छिपी भूख’ कहा जाता है।

7. लौह तत्व (आयरन) की कमी से होने वाले विकार का क्या नाम है?

उत्तर: लौह तत्व की कमी से अरक्तता (एनीमिया या आई. डी. ए. – IDA) नामक गंभीर पोषण विकार होता है।

8. विटामिन A की कमी (VAD) का सबसे गंभीर परिणाम क्या हो सकता है?

उत्तर: विटामिन A की कमी से रतौंधी होती है, जो यदि अनुपचारित रहे तो पूर्ण अंधेपन में बदल सकती है, विशेषकर छोटे बच्चों में यह अंधेपन का मुख्य कारण है।

9. आयोडीन की कमी से बच्चों में कौन सा रोग प्रकट होता है?

उत्तर: आयोडीन की कमी से बच्चों में क्रेटिनिज्म (Cretinism) नामक विकार प्रकट होता है, और भ्रूण में यह मानसिक मंदन ला सकता है।

10. भारत सरकार द्वारा ‘पोषण अभियान’ (Poshan Abhiyan) की शुरुआत कब और कहाँ से की गई थी?

उत्तर: पोषण अभियान (समग्र पोषण के लिए पीएम की व्यापक योजना) मार्च 2018 में राजस्थान के झुंझुनू से शुरू की गई थी।

11. भारत में स्वास्थ्य देखभाल कितने स्तरों पर की जाती है?

उत्तर: भारत में स्वास्थ्य देखभाल मुख्य रूप से तीन स्तरों पर की जाती है — प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक स्तर।

12. प्राथमिक स्तर की स्वास्थ्य देखभाल किसके द्वारा उपलब्ध कराई जाती है?

उत्तर: प्राथमिक स्तर की स्वास्थ्य देखभाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पी.एच.सी./ PHC) के नेटवर्क द्वारा उपलब्ध कराई जाती है।

13. पी. ई. एम. (PEM) का पूर्ण रूप क्या है और यह क्यों होता है?

उत्तर: पी. ई. एम. का पूर्ण रूप ‘प्रोटीन-ऊर्जा कुपोषण’ (Protein Energy Malnutrition) है, जो आहार में ऊर्जा और प्रोटीन के अपर्याप्त अंतर्ग्रहण से होता है।

14. जन पोषण में ‘समुदाय’ से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: समुदाय लोगों का एक विशिष्ट समूह होता है, जिसमें कुछ सामान्य विशेषताएँ (जैसे एक जैसी भाषा, एक ही सरकार या एक जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ) पाई जाती हैं।

15. भोजन पुष्टिकरण (Food Fortification) किस प्रकार की कार्यनीति है?

उत्तर: यह एक आहार अथवा भोजन-आधारित कार्यनीति है, जिसमें सूक्ष्मपोषकों की कमी को रोकने के लिए खाद्य पदार्थों में पोषक तत्व मिलाए जाते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:

1. कुपोषण का दोहरा भार क्या है? समझाइए कि यह भारत के लिए एक चुनौती कैसे है?

उत्तर: ‘कुपोषण का दोहरा भार’ एक ऐसी स्थिति है जहाँ समाज में अल्पपोषण और अतिपोषण दोनों एक साथ पाए जाते हैं। भारत में एक ओर बड़ी आबादी अल्पपोषण (सूक्ष्मपोषकों की कमी, बौनापन आदि) से पीड़ित है, तो दूसरी ओर जीवनशैली और आहार में बदलाव (जैसे रिफाइंड और फास्ट फूड का अधिक सेवन, कम शारीरिक श्रम) के कारण मोटापे और अतिपोषण की समस्या तेजी से बढ़ रही है। अतिपोषण से उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर जैसी असंक्रामक बीमारियां होती हैं। इन दोनों के एक साथ होने और एच.आई.वी./एड्स, टी.बी. जैसे नए और पुराने रोगों के प्रसार के कारण डॉक्टरों और सरकार के लिए रोग नियंत्रण की एक बहुत बड़ी दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है।

2. भारत में पोषण संबंधी समस्याओं से जूझने के लिए भोजन-आधारित और औषधीय (पोषण-आधारित) कार्यनीतियों में क्या अंतर है?

उत्तर: भोजन-आधारित कार्यनीतियां व्यापक और निवारक योजनाएं हैं, जो सूक्ष्मपोषक-समृद्ध खाद्य पदार्थों के उपभोग को बढ़ावा देती हैं (जैसे – आहार विविधता, भोजन पुष्टिकरण और घर की बागवानी)। ये नीतियां दीर्घकालिक रूप से उपयोगी, लागत-प्रभावी होती हैं और इनमें पोषक तत्वों की अधिक मात्रा या विषाक्तता का खतरा नहीं होता है। इसके विपरीत, औषधीय या पोषण-आधारित दृष्टिकोण एक अल्पावधि नीति है, जिसमें विशेष रूप से संवेदनशील समूहों (जिनमें कमी का खतरा हो) को सीधे पोषक तत्वों के पूरक (supplements) दिए जाते हैं, जैसे विटामिन A और आयरन की खुराक। ये पूरक कार्यक्रम अधिक महंगे होते हैं और इनका लक्ष्य क्षेत्र सीमित होता है।

3. लौह तत्व की कमी (IDA) और विटामिन A की कमी (VAD) के कारणों और परिणामों का विस्तार से वर्णन करें।

उत्तर: (i) लौह तत्व की कमी (IDA): यह शरीर में आयरन के अपर्याप्त सेवन से हीमोग्लोबिन के स्तर में कमी के कारण होती है। इसके परिणामों में शारीरिक श्रम करने पर सांस फूलना, थकावट, सुस्ती और पीलापन (जीभ, नाखूनों आदि में) शामिल हैं। बच्चों में यह एकाग्रता, स्मरण शक्ति और ध्यान केंद्रित करने जैसी संज्ञानात्मक क्षमताओं को बुरी तरह प्रभावित करती है।

(ii) विटामिन A की कमी (VAD): विटामिन A सामान्य दृष्टि, वृद्धि और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए आवश्यक है। इसकी कमी से रतौंधी होती है, जो यदि अनुपचारित रहे तो पूर्ण अंधेपन में बदल सकती है, विशेषकर छोटे बच्चों के अंधेपन का यह मुख्य कारण है। यह संक्रमण के प्रति संवेदनशीलता को भी बढ़ाती है, जिससे बच्चों की शारीरिक वृद्धि पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ता है।

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